Sunday, July 5, 2026 4:19 am

2024 का साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव भरा रहा

नई दिल्ली 2024 का साल भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलावों और घटनाओं से भरा रहा। यह साल खास तौर पर लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकजुटता, राज्यों में राजनीतिक बदलाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए चुनौतियों का साल रहा। आइए, 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम पर एक नजर डालते हैं। 1. लोकसभा चुनाव 2024: मोदी की तीसरी बार वापसी 2024 में भारत में हुए लोकसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति में एक बार फिर से बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता में लौटाया। बीजेपी ने अपने चुनावी प्रचार में विकास, सुरक्षा और कड़े प्रशासनिक उपायों को प्रमुख मुद्दा बनाया। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीसरी बार शानदार जीत दर्ज की, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से कहीं कठिन था। विपक्षी गठबंधन ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। इस गठबंधन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, समाजवादी पार्टी, और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल थे। हालांकि, बीजेपी ने बहुमत से सत्ता में वापसी की, लेकिन कुछ राज्यों में विपक्ष ने अच्छा प्रदर्शन किया। खासकर दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बीजेपी को कड़ी टक्कर मिली। इसने दिखा दिया कि भारतीय राजनीति में अब क्षेत्रीय दलों की ताकत लगातार बढ़ रही है और भविष्य में ये दल राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 2. विपक्ष का एकजुट होना 2024 का साल विपक्ष के लिए अहम था, क्योंकि विभिन्न विपक्षी दलों ने मिलकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला। 'INDIA' गठबंधन के तहत कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ा। हालांकि, यह गठबंधन अपनी पूरी ताकत के साथ चुनाव में सफलता हासिल नहीं कर सका, लेकिन यह विपक्ष के लिए एक नया रास्ता दिखाने का काम किया। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बीजेपी को रोकना था, लेकिन कई राज्यों में विपक्ष के बीच आंतरिक मतभेद और नेतृत्व को लेकर समस्याएं सामने आईं। इसके बावजूद, विपक्ष का एकजुट होना यह दर्शाता है कि भविष्य में बीजेपी को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों को एक साथ आना होगा। 3. राज्य चुनावों में बदलाव 2024 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें बीजेपी और विपक्ष दोनों के लिए बड़े बदलाव देखने को मिले। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, और तेलंगाना में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया और बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सत्ता बरकरार रखी, जबकि मध्यप्रदेश और तेलंगाना में बीजेपी को अपनी ताकत साबित करनी पड़ी। इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी अहम रही, जैसे कि तेलंगाना में केसीआर (कांग्रेस नेता) और बंगाल में ममता बनर्जी ने अपनी पकड़ मजबूत बनाई। इन चुनावों ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और राष्ट्रीय राजनीति में उनका रोल भी महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, यह दिखाता है कि बीजेपी को राज्यों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार कड़ी मेहनत करनी होगी। 4. कृषि और किसान आंदोलनों का असर 2024 में कृषि और किसान आंदोलनों का भी बड़ा राजनीतिक प्रभाव रहा। किसान विरोधी कानूनों को लेकर 2020 में शुरू हुआ आंदोलन अब भी पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाया था। हालांकि, 2024 में सरकार ने किसानों के लिए कुछ राहत के कदम उठाए, लेकिन किसानों के मुद्दे और उनके अधिकारों को लेकर विवाद जारी रहा। किसानों का आंदोलन और उनके समर्थन में विपक्षी दलों ने इसे अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया। इसने न सिर्फ सरकार को चुनौती दी, बल्कि यह भी साबित किया कि किसानों और ग्रामीण इलाकों के मुद्दे राजनीति में अहम बन चुके हैं। 5. राष्ट्रीय सुरक्षा: विदेश नीति की दिशा 2024 में भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति भी प्रमुख मुद्दा बने। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में कई अहम कदम उठाए, जैसे कि पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद पर कड़े रुख अपनाना। चीन के साथ सीमा पर तनाव और पाकिस्तान से संबंध जैसे मुद्दों ने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कूटनीतिक तरीके से कई बार इन दोनों देशों से अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश की, लेकिन सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण रही। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की और अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ रिश्तों को और प्रगाढ़ किया। 2024 में G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। 6. समाजवादी और क्षेत्रीय दलों की बढ़ती ताकत 2024 में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला, वह था क्षेत्रीय दलों और समाजवादी दलों की बढ़ती ताकत। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की टीआरएस, और उत्तर-पूर्वी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों ने भारतीय राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाई। इन दलों ने न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज की और अब उनका राष्ट्रीय निर्णयों पर असर होता है। इन दलों ने यह साबित किया कि राष्ट्रीय चुनावों में उनकी भूमिका और ताकत दिन-ब-दिन बढ़ रही है। 7. सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के बीच टकराव 2024 में भारत में समाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर भी राजनीति गरमाई। कई राज्य सरकारों ने सवर्ण और पिछड़े वर्गों के बीच आरक्षण की नीति को लेकर विवादों को जन्म दिया। बीजेपी सरकार ने सवर्णों के लिए आरक्षण बढ़ाने की योजना बनाई, वहीं विपक्ष ने इसे गरीबों के हक में न होने की आलोचना की। इन सामाजिक मुद्दों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक बहसें छेड़ीं, जिससे राजनीतिक दलों के बीच खींचतान बनी रही। 2024 भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण साल था, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सत्ता बरकरार रखी, लेकिन विपक्षी दलों ने भी अपनी चुनौती पेश की। राज्य चुनावों, किसान आंदोलनों, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों ने राजनीति को नया मोड़ दिया। यह साल यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति अब केवल दो प्रमुख दलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि क्षेत्रीय और समाजवादी दल भी राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 2024 ने यह साबित किया कि भारतीय राजनीति में भविष्य में और अधिक बदलाव और संघर्ष देखने को मिल सकता है।   recent visitors 156

अब आरआरबी की ओर से आरपीएफ एसआई भर्ती परीक्षा के लिए आंसर की जारी, 22 दिसंबर तक आपत्ति दर्ज करने का मौका

नई दिल्ली रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) की ओर से आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा का आयोजन 2, 3, 9, 12 और 13 दिसंबर को 2024 को देशभर में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर करवाया गया था। एग्जाम संपन्न होने के बाद अब आरआरबी की ओर से प्रोविजनल आंसर की डाउनलोड के लिए उपलब्ध करवा दी गई है। परीक्षार्थी तुरंत ही ऑफिशियल वेबसाइट rrbcdg.gov.in पर जाकर या इस पेज पर दिए गए डायरेक्ट लिंक पर क्लिक करके उत्तर कुंजी डाउनलोड कर सकते हैं। आंसर की डाउनलोड करने के लिए आपको लॉग इन डिटेल दर्ज करनी होगी। 22 दिसंबर तक ऑब्जेक्शन दर्ज करने का मौका आंसर की द्वारा अभ्यर्थी अपने सभी प्रश्न उत्तरों का मिलान अच्छे से कर लें। इस दौरान अगर वे इसमें दिए किसी उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं तो वे 22 दिसंबर 2024 रात्रि 12 बजे तक उस पर ऑब्जेक्शन दर्ज कर सकते हैं। अभ्यर्थी ध्यान रखें कि ऑब्जेक्शन दर्ज करने के लिए आपको 50 रुपये प्रति प्रश्न का भुगतान करना होगा। कैसे डाउनलोड करें आंसर की आरपीएफ एसआई एग्जाम सिटी स्लिप डाउनलोड करने के लिए आपको पहले आधिकारिक वेबसाइट rrbcdg.gov.in पर जाना होगा। वेबसाइट के होम पेज पर एसआई CEN RPF 01/2024 पर क्लिक करें। अब अभ्यर्थी आंसर की के लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद मांगी गई डिटेल दर्ज करके सबमिट करें। अब आप आंसर की डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही आप यहीं से आपत्ति भी दर्ज कर सकते हैं।   recent visitors 92

राजभवन का आज कांग्रेस करेगी घेराव: प्रतिभा बोलीं- मणिपुर जल रहा, PM नहीं ले रहे सुध, उन्हें अडानी की चिंता

Congress will gherao Raj Bhavan today: Pratibha said- Manipur is burning, PM is not taking any notice, he is worried about Adani शिमला । अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के आह्वान पर हिमाचल कांग्रेस आज राजभवन तक मार्च निकालेगी। कांग्रेस पार्टी आज देशभर में केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों, अमेरिका की अदालत में अडानी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों, पूंजीपतियों को सरंक्षण देने और मणिपुर में बढ़ती हिंसा के विरोध में प्रदर्शन करेगी। प्रतिभा सिंह ने कहा, डेढ़ साल से मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। वहां पर महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और अराजकता का माहौल बना हुआ है। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जानें जा चुकी हैं। मणिपुर के लोग बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित है और प्रधानमंत्री मोदी ने डेढ़ साल से मणिपुर तक नहीं गए। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री को इसकी कोई चिंता नहीं हैं। प्रधानमंत्री को केवल अडानी की चिंता: कांग्रेस प्रतिभा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केवल अपने मित्र गौतम अडानी और उनके सहयोगियों की चिंता है। अमेरिकी की ओर से लगाए गए आरोपों ने भाजपा-अडानी गठजोड़ के भ्रष्टाचार, छल, धोखाधड़ी की कथित जालसाजी का पर्दाफ़ाश किया है। अडानी को अमीर बनाने की सजा भुगत रहा पूरा देश: कांग्रेस कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा सस्ते कोयले को आयातित करके भारत में कोयले की कीमत बढ़ाकर बताई गई, जिसके बाद बिजली के दाम बढ़ने से इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ा। एक व्यक्ति को अमीर बनाने की कीमत पूरा देश भुगत रहा है। महंगाई जैसे मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रहे मोदी: प्रतिभा प्रतिभा सिंह ने कहा, देश में महंगाई, महिलाओं के प्रति अपराध, बेरोजगारी निरंतर बढ़ रही है। इन मुद्दों पर केंद्र सरकार ध्यान नहीं दे रही। इसे देखते हुए कांग्रेस पार्टी रोष स्वरूप आज राजभवन मार्च करेगी और राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपेगी। होटल राहत से राजभवन तक निकाला जाएगा मार्च राजभवन के बाहर कांग्रेस आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन करेगी। इस दौरान पार्टी के पूर्व पदाधिकारियों के अलावा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव व प्रदेश मामलों के सह-प्रभारी चेतन चौहान व विदित चौधरी, शिमला नगर निगम में कांग्रेस पार्षद विशेष तौर पर शिरकत करेंगे। छोटा शिमला स्थित होटल राहत से लेकर राजभवन तक यह मार्च निकाला जाएगा। recent visitors 119

शिक्षा के मंदिर में फूहड़ डांस, छात्राएं बीच में सिक्योरिटी गार्ड को कुर्सी पर बैठाकर मुन्नी बदनाम हुई गाने पर नाच रही

इंदौर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के खंडवा रोड कैंपस स्थित स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में छात्राओं के डांस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। छात्राएं बीच में सिक्योरिटी गार्ड को कुर्सी पर बैठाकर मुन्नी बदनाम हुई गाने पर नाच रही हैं। दरअसल, सोशल मीडिया में खंडवा रोड कैंपस स्थित स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में छात्राएं फूहड़ डांस कर रही हैं। वहीं पीछे से छात्र उनका वीडियो बना रहे हैं। डांस के जज कोई ओर नहीं बल्कि सिक्योरिटी गार्ड को बनाया गया है। जो कुर्सी पर बैठाकर छात्राओं का डांस देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि, सीनियर छात्र छात्राओं द्वारा जूनियर छात्राओं को नचाया जा रहा है। जिसमें सीनियर छात्राएं गाना गा रही हैं तो जूनियर छात्राएं उस पर फूहड़ डांस कर रही। छात्राओं की हरकत और डांस से कुर्सी पर बैठा बुजुर्ग सिक्योरिटी गार्ड शर्मसार होते हुए नजर आ रहा है। वीडियो वायरल होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि, कॉलेज के जिम्मेदारों को मामले की जानकारी तक नहीं है। इसी बीच पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि, विश्वविद्यालय में फूहड़ता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। माता-पिता अपने बच्चों को संस्कार और संस्कृति की शिक्षा दें। महाविद्यालयों में अश्लीलता पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। recent visitors 167

मध्यप्रदेश: मंडल अध्यक्षों के नाम को लेकर विरोध के सुर, नियम के विरुद्ध दोबारा मंडल अध्यक्ष बनाने का आरोप

शहडोल आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले में एक ओर जहां भाजपा मंडल अध्यक्षों के नाम की घोषणा के बाद खुशी का माहौल है. वहीं दूसरी ओर कुछ मंडल अध्यक्षों के नाम को लेकर विरोध बिगुल भी बजने लगे हैं. पपौंध मंडल में दोबारा उसी मंडल अध्यक्ष के नाम को लेकर जमकर विरोध हो रहा है.भ्रष्टाचार को बढ़ावा और नियमाविरुद्ध मंडल अध्यक्ष बनाने को लेकर विरोध कर रहे हैं. शहडोल जिले में 19 मंडल अध्यक्षों में से 16 के नाम की घोषणा हो चुकी है. तीन मंडल के मंडल अध्यक्ष सोहागपुर, बुढ़ार और ब्यौहारी के मंडल अध्यक्षों के नाम की घोषणा होना अभी बाकी है. मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर क्षेत्रीय कार्यकर्ता और लोगों में उत्साह है. लेकिन पपौंध मंडल अध्यक्ष श्यामपाल तिवारी की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं. सुमित पांडे, प्रभाकर मिश्रा, संतोष मिश्रा, मुकुंद राम कोल और क्षेत्र के लोगों ने दोबारा मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति पर भाजपा संगठन पर सवाल उठाए हैं.   उन्होंने बताया कि भाजपा की गाइडलाइन को नजरअंदाज करते हुए मंडल अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया. जबकि गाइडलाइन जारी की गई थी कि 2019 से 24 तक बने दो कार्यकाल से बने मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं किया जाना था. बावजूद इसके नियुक्ति किया गया और रायसुमारी की बैठक निश्चित दिनांक के एक दिन पहले ही कराया गया. सभी ने आरोप लगाया कि अगर गाइडलाइन का पालन नहीं करना था तो जारी क्यों की गई. फिलहाल, अब देखना है कि भाजपा संगठन क्या कार्यकर्ताओं की सुनेगी या विरोध को नजरअंदाज किया करेगी.   बता दें कि सीधी मंडल से संजय गुप्ता, करकी से शिव शंकर पटेल त्यागी, पपौंध से श्याम लाल तिवारी, मऊ से सचिन सिंह, बाण सागर से वीरेंद्र वैश्य, जयसिंहनगर से जयश्री कचेर, शहडोल नगर से प्रियम त्रिपाठी, चुहरी से राजीव तिवारी, सिंहपुर से राकेश कुशवाहा, गोहपारू से राम नारायण मिश्रा, धनपुरी से भोला पनिका, बकहो से धर्मेंद्र दुबे, खैराहा से विपुल सिंह, केशवाही से शुभम प्रिंस त्रिपाठी, जैतपुर से सचिन सेठिया के नाम की घोषणा की गई है. जबकि अभी भी जिले के तीन मंडल के मंडल अध्यक्ष सोहागपुर, बुढ़ार और ब्यौहारी के मंडल अध्यक्षों के नाम की घोषणा होना अभी बाकी है. recent visitors 45

कांस्य स्तर का कॉन्टिनेंटल टूर एथलेटिक्स इवेंट भुवनेश्वर में होगा, इवेंट की मेजबानी करेगा भारत

नई दिल्ली भारत अगले साल 10 अगस्त को पहली बार विश्व एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर स्तर के आयोजन की मेजबानी करेगा। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) ने उक्त जानकारी दी। एएफआई के 2025 सीज़न के प्रतिस्पर्धी कैलेंडर के अनुसार, कांस्य स्तर का कॉन्टिनेंटल टूर एथलेटिक्स इवेंट भुवनेश्वर में होगा। इस मीट को 'इंडियन ओपन' नाम दिया गया है। कॉन्टिनेंटल टूर ट्रैक और फील्ड प्रतियोगिताओं की एक वार्षिक श्रृंखला है, जो कि एलीट-लेवल डायमंड लीग के बाद वैश्विक बैठकों के दूसरे स्तर के अंतर्गत आती है। इसे 2020 में वर्ल्ड चैलेंज सीरीज़ के उत्तराधिकारी के रूप में लॉन्च किया गया था और इसमें चार स्तर, स्वर्ण, रजत, कांस्य और चैलेंजर शामिल हैं। ओलंपिक डॉट कॉम के अनुसार, एएफआई के अध्यक्ष आदिल सुमारिवाला ने कहा, कॉन्टिनेंटल टूर भारतीय टीम के लिए सितंबर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप से पहले घरेलू मैदान पर अपनी क्षमता दिखाने का एक अच्छा अवसर होगा। टोक्यो में 13-21 सितंबर तक आयोजित होने वाली विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 अगले साल की शीर्ष एथलेटिक्स प्रतियोगिता होगी। पिछली बार भारत ने इस तरह के अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स आयोजन की मेजबानी 2017 में की थी, जब भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप आयोजित की गई थी। भारत ने पुणे में बालेवाड़ी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 2013 एशियाई चैंपियनशिप की भी मेजबानी की थी। हरियाणा में 21 से 24 अप्रैल तक आयोजित होने वाला सीनियर नेशनल फेडरेशन कप मई में दक्षिण कोरिया में होने वाली एशियाई एथलेटिक चैंपियनशिप के लिए क्वालीफिकेशन इवेंट होगा। भारत का 2025 घरेलू एथलेटिक्स सत्र 12 जनवरी से उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय क्रॉस-कंट्री चैंपियनशिप, फरवरी में राष्ट्रीय अंतर-जिला एथलेटिक्स मीट और मार्च में आयोजित होने वाली इंडियन ओपन थ्रो और जंप प्रतियोगिताओं के साथ शुरू होगा। सुमरिवाला ने कहा, एएफआई ने अगले साल से क्षेत्रीय प्रतियोगिता भी शुरू की है, ताकि हाशिये पर मौजूद एथलीटों को अधिक अवसर मिल सके। क्षेत्रीय प्रतियोगिताएं अप्रैल में शुरू होंगी।   recent visitors 118

प्रदेश में कड़ाके की ठंड से 4-5 दिन राहत: लगातार 9 दिन शीतलहर की चपेट में रहा प्रदेश

 4-5 days relief from severe cold in the state: The state remained in the grip of cold wave for 9 consecutive days भोपाल । मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड से लोगों को अगले 4 से 5 दिन तक थोड़ी राहत मिल सकती है। मौसम विभाग ने बुधवार से दिन और रात के टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी होने का अनुमान जताया है। हालांकि, कुछ जिलों में कोहरे का असर रह सकता है। बुधवार सुबह ग्वालियर-चंबल में कोहरा छाया रहा। मौसम वैज्ञानिक वीएस यादव ने बताया, शीतलहर और कोल्ड डे यानी, ठंडे दिन की कंडीशन खत्म हो गई है। चार से पांच दिन तक टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी रहेगी। जिससे ठंड का असर कम रहेगा। उत्तर भारत में एक्टिव वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के गुजरने के बाद बर्फबारी होगी। जिससे उत्तरी हवाएं फिर से चलने लगेंगी। इसके बाद प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर फिर से आएगा। आज इन जिलों में कोहरा ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड में कोहरा रहेगा। शिवपुरी के कुछ हिस्से में भी हल्का कोहरा रह सकता है। भोपाल में 4 डिग्री, ग्वालियर-जबलपुर में 5 डिग्री पारा सोमवार-मंगलवार की रात में कई शहरों में रात के टेम्प्रेचर में गिरावट दर्ज की गई। इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में पारा 1.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस वजह से यह शिमला, नैनीताल, जम्मू शहर, कटरा, धर्मशाला, पालमपुर, देहरादून से भी ठंडा रहा। भोपाल में 4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।  ग्वालियर-जबलपुर में 5 डिग्री, जबकि इंदौर में 10.6 डिग्री और उज्जैन में 8 डिग्री दर्ज किया गया। पचमढ़ी के अलावा मंडला, उमरिया, नौगांव, राजगढ़, खजुराहो में भी कड़ाके की ठंड रही। मंडला-उमरिया में 3 डिग्री, नौगांव में 3.8 डिग्री, राजगढ़ में 4.4 डिग्री दर्ज किया गया। टीकमगढ़, रायसेन, रीवा, छिंदवाड़ा, मलाजखंड और सतना में तापमान 7 डिग्री से नीचे रहा। हालांकि, मंगलवार को दिन के तापमान में 1 से 2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। इस बार रिकॉर्ड तोड़ चुकी ठंड, जनवरी से भी ठंडा रहा दिसंबर इस बार ठंड रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जनवरी से भी ठंडा दिसंबर रहा। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। पिछले 9 दिन से शीतलहर चली। भोपाल में दिसंबर की सर्दी ने 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, जबकि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए हैं। recent visitors 185