Wednesday, July 8, 2026 1:38 am

मौसम विभाग ने शीतलहर को लेकर अलर्ट जारी किया, बारिश के बाद लुढ़का पारा, बढ़ी ठंड

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश के बाद ठंड बढ़ गई है। पहाड़ों पर बर्फबारी का असर मैदानी क्षेत्र में साफ दिख रहा है। मौसम विभाग ने शीतलहर को लेकर अलर्ट जारी किया है। दिल्ली में इस समय कंपकंपी वाली ठंड का अहसास हो रहा है और मौसम विभाग ने आज भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट मुख्य रूप से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए है, जहां बारिश, ओलावृष्टि और ठंडी हवाओं के कारण तापमान और भी गिर सकता है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी से हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक दिल्ली में आज न्यूनतम मौसम 9 डिग्री सेल्सियस रहेगा। वहीं अगले सप्ताह तक मौसम ठंडा और शुष्क बना रहेगा। उत्तर भारत के कुछ स्थानों में रविवार (29 दिसंबर) से शीतलहर शुरू होने की आशंका है। पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़, राजस्थान के अलग-अलग स्थानों में 29-30 दिसंबर के दौरान देर रात और सुबह के दौरान घने से बहुत घना कोहरा रहने की आशंका जताई जा रही है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में इस समय घना कोहरा देखा जा रहा है। खासकर सुबह और शाम के समय कोहरे के कारण ड्राइविंग करना मुश्किल हो सकता है। कोहरे की चादर ने इन राज्यों में ठंड को और बढ़ा दिया है, जिससे सर्दी का अहसास और भी तेज हो गया है। राजस्थान माउंट आबू के तापमान में 8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आज गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है। शनिवार को राज्य के विभिन्न इलाकों में मौसम बिगड़ने की चेतावनी दी गई है। इन इलाकों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बादल गरजने का भी अलर्ट जारी किया गया है। बनारस कोहरे की सफेद चादर में ढका है। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मौसम और भी बिगड़ सकता है और ठंडी हवाएं और बारिश की संभावना बनी रहेगी। इस स्थिति में दिल्ली और एनसीआर सहित अन्य हिस्सों में ठंड बढ़ने की संभावना है, जिससे लोगों को ज्यादा सर्दी का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली का मौसम ठंडा रहेगा, जहां न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। रविवार को दोपहर के समय भी बादल छाए रहने की संभावना है, जिससे तापमान में और कमी आ सकती है।   recent visitors 50

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर तेजी से चल रहा कार्य, कई रेलवे लाइनों को सात स्टील और प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट पुलों के माध्यम से पार किया जाएगा

नई दिल्ली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है, जिसके तहत 13 नदियों और कई राजमार्गों पर पुल बनाए जा रहे हैं। इसमें कई रेलवे लाइनों को सात स्टील और प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट पुलों के माध्यम से पार किया जाएगा। यह जानकारी भारतीय रेलवे द्वारा वार्षिक समीक्षा में दी गई। रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रोजेक्ट के अंतर्गत 243 किलोमीटर से अधिक पुल निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है, साथ ही 352 किलोमीटर पियर कार्य और 362 किलोमीटर पियर नींव का कार्य भी पूरा हो चुका है। गुजरात में ट्रैक निर्माण का काम तेजी से चल रहा है, आनंद, वडोदरा, सूरत और नवसारी जिलों में आरसी ट्रैक बेड का निर्माण कार्य हो रहा है। लगभग 71 किलोमीटर आरसी ट्रैक बेड का निर्माण पूरा हो चुका है और वायडक्ट पर रेल की वेल्डिंग शुरू हो गई है। महाराष्ट्र में मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए पहला कंक्रीट बेस स्लैब 32 मीटर की गहराई पर सफलतापूर्वक डाला जा चुका है, जो 10 मंजिला इमारत के बराबर है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) और शिल्पाता के बीच 21 किलोमीटर लंबी सुरंग पर काम चल रहा है, जिसमें मुख्य सुरंग निर्माण की सुविधा के लिए 394 मीटर की इंटरमीडिएट सुरंग (एडीआईटी) पूरी हो चुकी है। पालघर जिले में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके सात पर्वतीय सुरंगों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। गुजरात में एकमात्र पर्वतीय सुरंग पहले ही सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। समीक्षा में कहा गया है कि इस कॉरिडोर पर 12 स्टेशन हैं, जिन्हें थीम आधारित एलीमेंट्स और ऊर्जा-कुशल सुविधाओं के साथ डिजाइन किया गया है और इनका निर्माण चल रहा है। ये यूजर फ्रेंडली और ऊर्जा-सकारात्मक स्टेशन विश्व स्तरीय यात्री अनुभव प्रदान करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, साथ ही इनमें सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता भी दी गई है। इसके अलावा रेलवे द्वारा 2030 तक नेट जीरो कार्बन का लक्ष्य रखा गया है। समीक्षा में कहा गया है कि नवंबर 2024 तक लगभग 487 मेगावाट सौर संयंत्र और लगभग 103 मेगावाट पवन ऊर्जा संयंत्र चालू हो चुके हैं।   recent visitors 93

जन्मदिन (29 दिसंबर) पर विशेष: बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार थे राजेश खन्ना

मुंबई हिंदी फिल्म जगत में अपने अभिनय से लोगों को दीवाना बनाने वाले अभिनेता तो कई हुए और दर्शकों ने उन्हें स्टार कलाकार माना पर सत्तर के दशक में राजेश खन्ना पहले ऐसे अभिनेता के तौर पर अवतरित हुए जिन्हें दर्शको ने 'सुपर स्टार' की उपाधि दी। पंजाब के अमृतसर में 29 दिसंबर 1942 को जन्में जतिन खन्ना उर्फ राजेश खन्ना का बचपन के दिनों से ही रूझान फिल्मों की और था और वह अभिनेता बनना चाहते थे हांलाकि उनके पिता इस बात के सत खिलाफ थे।राजेश खन्ना अपने करियर के शुरूआती दौर में रंगमंच से जुड़े और बाद में यूनाईटेड प्रोड्यूसर ऐसोसियिशेन द्वारा आयोजित ऑल इंडिया टैलेंट कान्टेस्ट में उन्होंने भाग लिया। जिसमें वह प्रथम चुने गये।राजेश खन्ना ने अपने सिने करियर की शुरूआत 1966 में चेतन आंनद की फिल्म 'आखिरी खत' से की । वर्ष 1966 से 1969 तक राजेश खन्ना फिल्म इंडस्ट्री मे अपनी जगह बनाने के लिये संघर्ष करते रहे। राजेश खन्ना के अभिनय का सितारा निर्माता-निर्देशक शक्ति सामंत की क्लासिकल फिल्म 'अराधना' से चमका। बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की गोल्डन जुबली कामयाबी ने राजेश खन्ना को 'स्टार' के रूप में स्थापित कर दिया। फिल्म 'अराधना' की सफलता के बाद अभिनेता राजेश खन्ना शक्ति सामंत के प्रिय अभिनेता बन गये। बाद में उन्होंने राजेश खन्ना को कई फिल्मों में काम करने का मौका दिया। इनमें 'कटी पतंग', 'अमर प्रेम', 'अनुराग', , 'अजनबी', 'अनुरोध' और 'आवाज' आदि शामिल है । फिल्म अराधना की सफलता के बाद राजेश खन्ना की छवि रोमांटिक हीरो के रूप में बन गयी। इस फिल्म के बाद निर्माता निर्देशकों ने अधिकतर फिल्मों में उनकी रूमानी छवि को भुनाया। निर्माताओं ने उन्हें एक कहानी के नायक के तौर पर पेश किया। जो प्रेम प्रसंग पर आधारित फिल्में होती थी। सत्तर के दशक में राजेश खन्ना लोकप्रियता के शिखर पर जा पहुंचे और उन्हें हिंदी फिल्म जगत के पहले सुपरस्टार होने का गौरव प्राप्त हुआ। यूं तो उनके अभिनय के कायल सभी थे लेकिन खासतौर पर टीनएज लड़कियों के बीच उनका क्रेज कुछ ज्यादा ही दिखाई दिया। एक बार का वाकया है जब राजेश खन्ना बीमार पड़े तो दिल्ली के कॉलेज की कुछ लड़कियों ने उनके पोस्टर पर बर्फ की थैली रखी जिससे उनका बुखार जल्द उतर जाये।इतना ही नहीं लड़कियां उनकी इस कदर दीवानी थी कि उन्हें अपने खून से प्रेम पत्र लिखा करती थी और उससे ही अपनी मांग भर लिया करती थी। सत्तर के दशक में राजेश खन्ना पर यह आरोप लगने लगे कि वह केवल रूमानी भूमिका ही निभा सकते है। राजेश खन्ना को इस छवि से बाहर निकालने में निर्माता -निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने मदद की और उन्हें लेकर 1972 में फिल्म 'बावर्ची' जैसी हास्य से भरपूर फिल्म का निर्माण किया और सबको आश्चर्यचकित कर दिया । 1972 में ही प्रदर्शित फिल्म 'आनंद' में राजेश खन्ना के अभिनय का नया रंग देखने को मिला। ऋषिकेश मुखर्जी निदेर्शित इस फिल्म में राजेश खन्ना बिल्कुल नये अंदाज में देखे गये। फिल्म के एक दृश्य में राजेश खन्ना का बोला गया यह संवाद 'बाबूमोशाय ..हम सब रंगमंच की कठपुतलियां है जिसकी डोर ऊपर वाले की उंगलियों से बंधी हुई है कौन कब किसकी डोर जाये ये कोई नही बता सकता उन दिनों सिने दर्शको के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था और आज भी सिने दर्शक उसे नहीं भूल पाये। 1969 से 1976 के बीच कामयाबी के सुनहरे दौर में राजेश खन्ना ने जिन फिल्मों में काम किया उनमें अधिकांश फिल्में हिट साबित हुयी लेकिन अमिताभ बच्चन के आगमन के बाद परदे पर रोमांस का जादू जगाने वाले इस अभिनेता से दर्शकों ने मुंह मोड़ लिया और उनकी फिल्में असफल होने लगी। अभिनय मे आयी एकरूपता से बचने और स्वंय को चरित्र अभिनेता के रूप मे भी स्थापित करने के लिये और दर्शकों का प्यार फिर से पाने के लिये राजेश खन्ना ने अस्सी के दशक से खुद को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। इसमें 1980 मे प्रदर्शित फिल्म 'रेडरोज' खास तौर पर उल्लेखनीय है। इस फिल्म में राजेश खन्ना ने नेगेटिव किरदार निभाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। 1985 में प्रदर्शित फिल्म 'अलग अलग' के जरिये राजेश खन्ना ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया। राजेश खन्ना के सिने करियर में उनकी जोड़ी अभिनेत्री मुमताज और शर्मिला टैगोर के साथ काफी पसंद की गयी। राजेश खन्ना को उनके सिने कैरियर में तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार से समानित किया गया। फिल्मों में अनेक भूमिकाएं निभाने के बाद राजेश खन्ना ने समाज सेवा के लिए राजनीति में भी कदम रखा और वर्ष 1991 में कांग्रेस के टिकट पर नयी दिल्ली की लोकसभा सीट से चुने गए । राजेश खन्ना अपने चार दशक लंबे सिने करियर में लगभग 125 फिल्मों में काम किया। अपने रोमांस के जादू से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाले किंग ऑफ रोमांस 18 जुलाई 2012 को इस दुनिया को अलविदा कह गये। recent visitors 134

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की ‘मन की बात’ में बस्तर ओलंपिक आयोजन की प्रशंसा

बस्तर ओलंपिक एक ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का हो रहा संगम मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों की ओर से जताया आभार कहा – बस्तर ओलंपिक का आयोजन यह सिद्ध करता है कि शांति, विकास और सामूहिक प्रयासों से प्रत्येक चुनौती का सामना किया जा सकता है रायपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात की 117वीं कड़ी में देश को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित बस्तर ओलंपिक-2024 की प्रशंसा की। श्री मोदी ने कहा पहली बार हुए बस्तर ओलंपिक से बस्तर में नई क्रांति जन्म ले रही है। मेरे लिए यह बहुत ही खुशी की बात है कि बस्तर ओलंपिक का सपना साकार हुआ है। यह ओलंपिक उस क्षेत्र में हो रहा है जो जगह कभी माओवादी हिंसा का गवाह रहा है। श्री मोदी ने कहा कि बस्तर ओलंपिक का शुभंकर है वनभैंसा और पहाड़ी मैना – इसमें बस्तर की समृद्ध संस्कृति की झलक दिखती है। इस बस्तर खेल महाकुंभ का मूलमंत्र है, ‘करसाय ता बस्तर, बरसाय ता बस्तर’ यानी खेलेगा बस्तर, जीतेगा बस्तर।   प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर ओलंपिक-2024 की सराहना करते हुए कहा कि पहली ही बार में बस्तर ओलंपिक में बस्तर संभाग के 7 जिलो के एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं युवाओं के संकल्प की गौरव गाथा है। एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो और बॉलीवॉल हर खेल में हमारे युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में बस्तर ओलंपिक के प्रतिभागियों के उत्साह का भी जिक्र किया। उन्होंने बस्तर की कारी कश्यप का जिक्र करते हुए कहा कि एक छोटे से गांव से आने वाली कारी जी ने तीरंदाजी में रजत पदक जीता है, वे कहती हैं बस्तर ओलंपिक ने हमें खेल का मैदान नहीं जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि सुकमा की पायल कवासी जी की बात भी कम प्रेरणादायक नही है, जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतने वाली पायल जी कहती हैं कि अनुशासन और कड़ी मेहनत से जीवन में कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर के दोरनापाल में रहने वाले पुनेम सन्ना की कहानी को नए भारत की प्रेरक कथा बताते हुए कहा कि एक समय नक्सलियों के प्रभाव में आए पुनेम जी आज व्हीलचेयर पर दौड़कर मेडल जीत रहे हैं, उनका साहस और हौसला हर किसी के लिए प्रेरणा है। कोंडागांव के तीरंदाज रंजू सोरी जी को बस्तर यूथ आइकॉन चुना गया है, उनका मानना है बस्तर ओलंपिक दूरदराज के युवाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का अवसर दे रहा है। बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं यह ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है, जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर ओलंपिक के आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने आह्वान किया कि ऐसे खेल आयोजन को प्रोत्साहित करें और स्थानीय खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर दें। खेल से न केवल शारीरिक विकास होता है, बल्कि यह खेल भावना के विकास के द्वारा समाज को जोड़ने का भी एक सशक्त एवं प्रभावकारी माध्यम है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार बस्तर में बदलाव और यहां के लोगों के जीवन में खुशहाली लाने दृढ़संकल्पित है। बस्तर ओलंपिक में 1.65 लाख से अधिक लोगों का प्रतिभागी होना ओलंपिक की सफलता को दर्शाता है। बस्तर में अब बंदूक की आवाज नहीं, खेलों का शोर सुनाई देता है, हंसते-खेलते लोगों के चेहरे दिखाई देते हैं। निश्चित ही प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के इस प्रोत्साहन और विश्वास से हमारी सरकार को बस्तर की प्रगति के लिए कार्य करने की नई ऊर्जा मिलेगी, साथ ही बस्तरवासियों का मनोबल बढ़ेगा। लोगों के उत्साह ,ऊर्जा और सहभागिता ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। यह आयोजन भविष्य में भी खेल और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को और मजबूती प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक का आयोजन यह सिद्ध करता है कि शांति, विकास और सामूहिक प्रयासों से प्रत्येक चुनौती का सामना किया जा सकता है। recent visitors 66

कुंभ में निमंत्रण नहीं दिया जाता है, कुंभ में लोग अपने आप आस्था से आते हैं: अखिलेश यादव

प्रयागराज समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाकुंभ को लेकर दिए जा रहे निमंत्रण पर बयान दिया है. प्रेस कॉन्फ्रेस में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा, "कुंभ में निमंत्रण नहीं दिया जाता है. कुंभ में लोग अपने आप आस्था से आते हैं. मैं किसी के बारे में कुछ कहना नहीं चाहता. हमने अपने धर्म में सीखा और पढ़ा है कि ऐसे आयोजनों में लोग खुद आते हैं. जो करोड़ो लोग आएंगे क्या उन्हें निमंत्रण दिया जाता है? ये सरकार अलग है." अखिलेश यादव ने कहा कि कुम्भ सही से हो हम सहायता देने के लिये तैयार हैं. मैंने भी हकीकत चेक कराई है, PDA पत्रकार ने कुंभ की हकीकत चेक की और सब उजागर हुआ है. वहीं VHP के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा, मैं तो कहता हूँ कि ये जो रोज खुदाई चल रही है. CM हाउस में भी करें वहाँ शिव मंदिर है, CM के घर में भी खुदाई हो शिवलिंग मिलेगा. अवैध निर्माण राज्यपाल के हाउस में भी हो रहा है. जर्मनी में बैलेट से डाले जाते हैं वोट-अखिलेश यादव वहीं सपा सांसद अखिलेश यादव ने जर्मनी के संसद सदस्य राहुल कंबोज को लेकर उन्होंने कहा कि उनसे लगातार बात हो रही थी. मुझे खुशी है कि हमलोग आज लखनऊ में मिल रहे हैं. आज की पीढी को सबसे ज्यादा पढ़ाई की जरूरत है. वो भी अपने परिवार को खुशहाल बनाना चाहता है. सपा मुखिया ने कहा कि जर्मनी जैसा देश जहां अभी भी बैलट से वोट डाले जाते हैं और हर स्तर पर बैलेट से चुनाव होते हैं. हमें भी अपने वोटिंग प्रक्रिया पर वो भरोसा वापस पैदा करना होगा. हम लोग अपनी संस्थाओं पर भरोसा खो रहे हैं, हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में जनता बदलाव लाने का काम करेगी. अखिलेश यादव ने कहा कि वहां की सु्प्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर आप ईवीएम की मांग करेंगे वोटिंग के लिए तो वो असंवैधानिक होगा. जब जर्मनी जैसा देश ये मान रहा है तो ये एक लंबी बहस है. हम भले हार जाएं लेकिन हमें भरोसा होना चाहिए कि हम हारे हैं. हम हारने के बाद भरोसा नहीं कर पा रहे हैं और जीतने वाला जीतने के बाद भरोसा नहीं कर रहा है. अंतिम चरण पर हैं महाकुंभ की तैयारियां बता दें कि प्रयागराज में अगले साल 13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ को लेकर तैयारियां लगभग अंतिम चरण पर हैं. महाकुंभ की तैयारियों को लेकर यूपी सरकार ने युद्ध स्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं. खुद सीएम योगी महाकुंभ की तैयारियों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. recent visitors 42

सड़क दुर्घटनाएं रोकने हेतु चलाया जा रहा है, विशेष अभियान

  अभियान के द्वितीय दिवस की कार्यवाही अनूपपुर शराब के नशे में वाहन चलाने वाले 03 वाहन चालकों पर हुई कार्यवाही   कल अभियान के तहत ट्रैफिक पुलिस द्वारा ट्रक क्रमांक MP 18H6015  एवं हाइवा क्रमांक MP18 Z0846  के  चालक  शराब के नशे में वाहन चलाते पाया गए, जिनके विरूद्ध  प्रकरण तैयार कर वाहन जप्त किये गए। कोतमा पुलिस द्वारा एक मोटर साइकिल चालक को शराब के नशे में वाहन चलाते पाया गया, जिसके विरुद्ध प्रकरण तैयार  कर वाहन जप्त किया गया। फुनगा के पास हाईवे रोड पर स्थित डिवाइडर के दोनों ओर लगवाए गए ट्रैफिक कोन हाईवे पर ग्राम फुनगा  के पास स्थित डिवाइडर से रात्रि में अदृश्यता के कारण टकराने से एक्सीडेंट घटित होते है, जिस पर अंकुश लगाने हेतु ट्रैफिक पुलिस द्वारा डिवाइडर के दोनों ओर ट्रैफिक कोन रखवाए गए हैं, जिससे रात्रि के समय वाहन डिवाइडर से ना टकराएं। ट्रैफिक मिरर लगवाए जाने के लिए अंधे मोड़ किए गए चिन्हित आज अभियान के तहत यातायात प्रभारी ज्योति दुबे एवं ट्रैफिक स्टाफ द्वारा अमरकंटक रोड, जैतहरी रोड एवं चचाई रोड का भ्रमण किया जाकर ऐसे 15 अंधे मोड़ जहां पर मोड़  के कारण आने जाने वाहन आपस में दिखाई ना देने से टकराने  की घटनाएं घटित होती हैं, चिन्हित किए गए ।इन स्थानों पर अभियान के दौरान ही मिरर लगाए जाने की कार्यवाही की जाएगी। recent visitors 58

देवास में पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत, कांग्रेस जीतू पटवारी का तीखा हमला, पैसे की मांग का आरोप

देवास जिले के सतवास में पुलिस हिरासत में एक दलित युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस ने युवक से पैसे की मांग की थी, और जब रकम नहीं दी गई तो पुलिस की बर्बरता का शिकार बना युवक मौत की वजह बना। इस घटना के बाद पूरे देवास में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे पुलिस की बर्बरता करार दिया है। हिरासत में मौत का मामला मालागांव के रहने वाले 35 वर्षीय मुकेश लोंगरे को शनिवार दोपहर पुलिस ने एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए मामले के तहत हिरासत में लिया था। लेकिन शाम होते-होते मुकेश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर दावा किया कि युवक ने आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन उसके परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उसे बिना किसी कारण हिरासत में लिया और उसके साथ बर्बरता की। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने मामले में धाराएं कम करने के एवज में 6,000 रुपये की मांग की थी। मुकेश के साथ थाने में मौजूद एक साथी को यह राशि देने के लिए घर भेजा गया था। जब वह पैसे लेकर लौटा, तब तक मुकेश की मौत हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बिना उनकी जानकारी के मुकेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और शव के कमरे में बाहर से ताला लगा दिया, जिससे परिवार के लोग अंदर नहीं जा सके। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटना को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देवास में पुलिस ने एक और दलित युवक की बेरहमी से हत्या कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन अब गुंडों से ज्यादा दलित समाज पर अत्याचार कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए पूरे थाने के पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाए। घटना के बाद स्थानीय लोग और मुकेश के परिजन सड़क पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे पुलिस प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने देवास जिले में पुलिस के खिलाफ गहरी नाराजगी को जन्म दिया है और लोग न्याय की उम्मीद में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। मुकेश के परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस की बर्बरता के कारण उनका परिवार टूट गया है। वे अब पुलिस के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं और न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, और लोगों की मांग है कि दोषियों को सजा मिले और इस तरह के अत्याचार को रोका जाए। इस घटना ने देवास जिले में पुलिस प्रशासन के खिलाफ गुस्से को और बढ़ा दिया है, और अब लोग सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठाने को तैयार हैं। recent visitors 324