बताया जाए कि आखिर कितने जजों के परिजनों को वरिष्ठ वकील बनाया गया है, दलील पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, मांग ली लिस्ट

नई दिल्ली जजों के रिश्तेदारों को ही अदालतों में सीनियर वकील का दर्जा दिया जाता है। ऐसा दावा करने वाला एक वकील को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। अदालत ने गुरुवार को कहा कि ऐसा कहने से पहले यह भी तो बताया जाए कि आखिर कितने जजों के परिजनों को वरिष्ठ वकील बनाया गया है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेंदुमपारा और अन्य की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। यह अर्जी दिल्ली हाई कोर्ट में 70 वकीलों को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिए जाने के खिलाफ दायर की गई थी। इस अर्जी में कहा गया है कि इन लोगों को दर्जा देने वाले फैसले को खारिज किया जाए। इसके अलावा जजों के परिजनों को ही सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिए जाने का भी आरोप लगाया गया। इस पर बेंच ने कहा, 'आखिर आप ऐसे कितने जजों के नाम बता सकते हैं, जिनके परिजनों को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया गया है।' इस पर याची वकील ने कहा कि मैंने अपने दावे के समर्थन में एक चार्ट पेश किया है। हालांकि अदालत ने वकील के दावों पर असहमति जताई और कहा कि यदि याचिका से इन चीजों को वापस नहीं हटाया गया तो फिर ऐक्शन भी लिया जाएगा। बेंच ने कहा, 'हम आपको यह छूट देते हैं कि याचिका में संशोधन कर लें। यदि आप ऐसा नहीं कर सके तो फिर हम ऐक्शन भी ले सकते हैं।' इस पर वकील ने कहा कि बार एसोसिएशन तो जजों से डरती है। इस पर भी बेंच ने सख्त ऐतराज जताया है। जस्टिस गवई ने वकील की दलील पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, 'यह कानून के अनुसार चलने वाली अदालत है। मुंबई का आजाद मैदान नहीं है, जहां आप कुछ भी भाषण दे सकते हैं। आप यहां कानूनी आधार पर दलीलें दें, भाषण न करें।' इसके साथ ही अदालत ने वकील को टाइम दिया कि वह अपनी याचिका में संशोधन कर लें। यही नहीं बेंच ने कहा कि इस अर्जी में याची के तौर पर साइन करने वाले एक वकील तो अदालत की अवमानना के दोषी भी हैं। दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट में 70 वकीलों को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने का फैसला शुरुआत से ही विवादों में है। यहां तक कि परमानेंट कमेटी के एक मेंबर ने तो यह कहते हुए इस्तीफा ही दे दिया कि उनकी सलाह के बिना ही फाइनल लिस्ट तैयार कर दी गई। इसके अलावा फाइनल लिस्ट के साथ छेड़छाड़ के आरोप भी लग रहे हैं। recent visitors 64

राज्य सरकार चला रही बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं को पकड़ने का विशेष अभियान, संदिग्धों के दस्तावेजों की होगी जांच

रायपुर प्रदेश में बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं की पहचान और उन्हें पकड़ने के लिए राज्य सरकार विशेष अभियान चलाएगी। इसमें संदिग्धों के आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड आदि दस्तावेजों की जांच की जाएगी। विगत पांच वर्षों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से बने आधार व राशन कार्डों और अन्य दस्तावेजों को भी अभियान के दौरान जांच के दायरे में लाया जाएगा। राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर अनुशंसा के आधार पर बने आधार कार्डों की जानकारी उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। फर्जीवाड़े में शामिल जनप्रतिनिधियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। बताया जाता है कि दूसरे राज्यों के बड़ी संख्या में लोग बिना दस्तावेजों के निवासरत हैं और काम कर रहे हैं। गृह विभाग को दुर्ग जिले में ही 1500 बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं के होने की जानकारी मिली है। भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) में सैकड़ों श्रमिक ठेके पर काम कर रहे हैं, जिनके पास कोई नागरिक संबंधित दस्तावेज नहीं है। ठेका श्रमिकों के दस्तावेजों की जांच जल्द ही शुरू की जाएगी। प्रदेश में बिना किसी पहचान पत्र के रहने वालों की धरपकड़ के लिए गृह विभाग जल्द ही एसओपी (स्टैंडिंग ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी करने की तैयारी कर रहा है। बांग्लादेश सीमा के पास के निकले विगत माह भिलाई-तीन थाने की पुलिस ने हथखोज इंडस्ट्रियल एरिया नई बस्ती में रहवासियों की पहचान के लिए अभियान चलाया था। दो-तीन वर्षों में बसने वाले लोगों के स्थायी पता की जांच की गई थी। इस दौरान 33 लोग मिले, जो पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश सीमा के पास के रहने वाले थे। पुलिस ने सभी को चेतावनी देकर छोड़ दिया था। राजनांदगांव जिले के मोहला-मानुपर में भी पुलिस ने संदिग्धों को पकड़ा था, जो आठ माह से अवैध रूप से निवासरत थे। 58 लोगों की पुलिस को तलाश कोंडागांव जिले में बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं के संदेह में विगत माह 40 से अधिक संदिग्धों को पकड़ कर कोर्ट में पेश किया था। यहां से केंद्रीय जेल भेजा गया था। गृह विभाग के पास ऐसे 58 लोगों की भी सूची है, जो पश्चिम बंगाल से बस्तर आए हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है। डेढ़ हजार संदिग्धों को पकड़ा ऐसे संदिग्धों की जांच की जा रही है, जो कि बिना किसी दस्तावेज और पहचान के ही अलग-अलग जगहों पर रह रहे हैं। अब तक करीब डेढ़ हजार ऐसे संदिग्ध मिल चुके हैं। – विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री व गृहमंत्री, छत्तीसगढ़ recent visitors 58

छोटी मछली को पकड़ बड़े मगरमच्छों को बचा रही सरकार, सपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ यादव

भोपाल। समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ मनोज यादव ने बताया कि परिवहन विभाग का एक छोटा सा आरक्षक करोड़ों का मालिक कैसे हो सकता है? सौरभ शर्मा एक छोटी मछली है असली मगरमच्छों का नाम सामने आना बाकी है। इस केस में पूर्व परिवहन मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री की भी भूमिका की जांच हो। सौरभ शर्मा को फंसा के उसके इर्द-गिर्द पूरी जांच को सीमित कर इस केस को दबाने की बड़ी साजिश है। 21 साल में भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश को कंगाल राज्य बना दिया है। पीएम मोदी ने कहा था “ना खाऊँगा और ना खाने दूंगा” पर सबसे ज्यादा इन्हीं के अधिकारी और मंत्री ही खा रहे हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाया कि भोपाल में सेंट्रल पार्क प्रोजेक्ट के लिए परमिशन बहुत समय से अटकी हुई थी, लेकिन इकबाल सिंह बैंस का सहयोग मिलते ही कुछ ही समय में बड़े तालाब के ग्रीन बेल्ट एरिया में परमिशन मिल गई। इसमें भी इकबाल सिंह बैस की भूमिका पर जांच करना चाहिए। इसके अलावा नीलबढ़, रातीबड़, मंडोरा मेंडोरी, अरेरा हिल्स, कोलार में कुणाल कंस्ट्रक्शन के नाम से प्रॉपर्टी खरीदी गई है, उन संपत्तियों के मालिकों की भी जांच होनी चाहिए। डॉ यादव ने कहा कि सौरभ शर्मा के घर से एक लाल डायरी जब्त की गई है। सपा प्रदेश अध्यक्ष का मानना है कि इस डायरी पर कई मंत्रियों नेताओं और अधिकारियों के नाम है। इस डायरी में कई हजार करोड़ के लेनदेन का हिसाब किताब भी है। इसकी जांच होनी चाहिए। सौरभ शर्मा के घर से जब्त लाल डायरी को लेकर मध्य प्रदेश शासन में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि इस डायरी में मेरा नाम नहीं होगा। समाजवादी पार्टी मांग करती है कि इस केस की निष्पक्षता से जांच कर दोषियों पर कङी से कङी कार्रवाही की जाए। सपा अध्यक्ष डॉ यादव ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है, तो समाजवादी पार्टी सड़क से लेकर संसद तक मुद्दों को उठाएगी। recent visitors 101

शाही जामा मस्जिद सर्वे रिपोर्ट यूपी कोर्ट को सौंपी गई, 60 तस्वीरों से खुलेगा राज़!

संभल संभल की शाही जामा मस्जिद के अंदर की एडवोकेट कमीशन रिपोर्ट बंद लिफाफे में कोर्ट में पेश कर दी गई है। इस सर्वे रिपोर्ट की इनसाइड डिटेल सामने आई है। बताया जा रहा है कि जामा मस्जिद में मंदिर होने के प्रमाण मिले हैं। मस्जिद के अंदर दो वट वृक्ष हैं। अमूमन हिंदू धर्म के मंदिरों में ही वट वृक्ष की पूजा होती है। इतना ही नहीं मस्जिद में कुंआ भी है, जो आधा अंदर है और आधा बाहर है। बाहर वाले हिस्से को ढक दिया गया है। मस्जिद के अंदर कमल के फूल भी उकेरे हुए मिले हैं। बता दें कि संभल की जामा मस्जिद के अंदर हुए सर्वे की एडवोकेट कमीशन की रिपोर्ट सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह की कोर्ट में पेश की गई है। एडवोकेट कमिश्नर रमेश राघव ने यह रिपोर्ट कोर्ट में पेश की है। सूत्रों के मुताबिक, इस सर्वे रिपोर्ट में शाही जामा मस्जिद में मंदिर होने के काफी सबूत मिले हैं। जामा मस्जिद के सर्वे के पहले दिन यानि 19 नवंबर, 2024 को करीब डेढ़ घंटे की वीडियोग्राफी हुई थी, जबकि दूसरे दिन करीब तीन घंटे की वीडियोग्राफी हुई। इस दौरान करीब 1200 फोटो लिए गए. सारी चीजों का अवलोकन करने पर मस्जिद के अंदर 50 से अधिक फूल के निशान/ कलाकृतियां मिलीं। वहीं, गुंबद के हिस्से को प्लेन कर दिया गया है। पुराने ढांचे को बदलने के भी सबूत मिले हैं, साथ ही उस जगह नए कंस्ट्रशन के सबूत मिले हैं। मंदिर के शेप वाले स्ट्रक्चर पर प्लास्टर लगाकर पेंट कर दिया गया है। मस्जिद में अंदर जहां बड़ा गुंबद है, उस पर झूमर को तार से बांधकर एक चेन से लटकाया गया है। ऐसी चेन का इस्तेमाल मंदिर के घंटों में किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, विवादित स्थल में वैसे प्रतीक भी मिले हैं, जो उस दौर के मंदिरों और देवालयों में बने होते थे। मंदिर के दरवाजों, झरोखों और अलंकृत दीवारों पर प्लास्टर लगाकर पेंट कर दिया गया है, जिससे पुराना निर्माण ढक गया है। गौरतलब हो कि संभल में अदालत के आदेश पर 19 नवंबर को कोट गर्वी इलाके में मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद का सर्वे किए जाने के बाद से ही तनाव है। दरअसल कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया गया कि जिस जगह यह मस्जिद बनी है, वहां पहले हरिहर नाथ मंदिर था। 24 नवंबर को जब मस्जिद के दूसरे सर्वे के लिए टीम आई तो हिंसा भडक़ उठी थी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। हिंसा मामले में पुलिस का एक्शन जारी है। 50 फूल, बरगद के पेड़, कुआं भी मौजूद सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में मस्जिद के अंदर हिंदू धर्म से जुड़े 50 से ज्यादा फूल के निशान/कलाकृतियां मिलीं हैं. मस्जिद के अंदर दो बरगद के पेड़ हैं. अमूमन हिंदू धर्म के मंदिरों में ही बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है. इतना ही नहीं मस्जिद में कुआं भी है, जो आधा अंदर है और आधा बाहर है. बाहर वाले हिस्से को ढंक दिया गया है. पुराने ढांचे को बदला गया, रिपोर्ट में दावा इतना ही नहीं सर्वे रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पुराने ढांचे को बदला गया है. गुम्मद के हिस्से को प्लेन कर दिया गया है. साथ ही उस जगह नए कंस्ट्रशन के सबूत मिले हैं. मंदिर के शेप वाले स्ट्रक्चर पर प्लास्टर लगाकर पेंट कर दिया गया है. मस्जिद के अंदर जहां बड़ा गुम्मद है उस पर झूमर को तार से बांधकर एक जंजीर से लटकाया गया है. ऐसी जंजीर का इस्तेमाल मंदिर के घंटों को लटकाने में किया जाता है. मंदिरों के दरवाजों पर प्लास्टर लगाकर किया गया पेंट सूत्रों के अनुसार, विवादित स्थल में वैसे प्रतीक भी मिले हैं जो उस दौर के मंदिरों और देवालयों में बने होते थे. मंदिर के दरवाजों, झरोखों और अलंकृत दीवारों पर प्लास्टर लगाकर पेंट कर दिया गया है, जिससे पुराना निर्माण छिप गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके शिलालेख के साथ छेड़छाड़ हुई है. ऐसा लगता है पुरानी लिखावट को मिटाकर नया शिलालेख बढ़ाने की कोशिश की गई है. जामा मस्जिद के पूर्व के हिस्से में गेट के कुछ हटाकर वहां नया निर्माण कराया गया. नमाज पढ़ने वाली मुख्य स्थान पर परिक्रमा जैसे स्ट्रक्चर मिले हैं. बताया जा रहा है जिसे बदलकर अब कोठरी में तब्दील कर दिया गया है. जामा मस्जिद के मुख्य गेट को तोड़कर अंदर तक रेलिंग लगाए जाने का भी जिक्र है. मुख्य गेट पर फूल की आकृति है और ऐसे ही कई फूल भीतर भी बने हैं. कई कलाकृतियों को हटाकर उन पर पेंट करने की कोशिश की गई है, कुछ आले (ताखे) भी मिले हैं जिन्हें बंद किया गया है. संभल में सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा बता दें कि संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर दावा किया गया है कि प्राचीन काल में ये हरिहर मंदिर था. इसको लेकर 19 नवंबर 2024 को सिविल कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. उसी दिन सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह ने मस्जिद के अंदर सर्वे करने का आदेश जारी कर दिया था. अदालत ने रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया. उसी दिन शाम को करीब चार बजे सर्वे के लिए टीम मस्जिद पहुंच गई और करीब दो घंटे के सर्वे किया. हालांकि उस दिन सर्वे का काम पूरा नहीं हुआ. इसके बाद सर्वे की टीम 24 नवंबर को जामा मस्जिद पहुंची. दोपहर में मस्जिद के अंदर सर्वे हो रहा था, इसी दौरान भारी संख्या में लोग जमा हो गए. भीड़ ने पुलिस की टीम पर पत्थर फेंके, जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल हो गया. इस दौरान हुई हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई. मंदिर के ये निशान मस्जिद के अंदर दो वट वृक्ष के साथ कुंआ 50 से अधिक फूल के निशान, कलाकृतियां पुराने ढांचे को बदलने के भी मिले सबूत मंदिर की शेप वाले स्ट्रक्चर पर किया प्लास्टर recent visitors 56

भाजपा: प्रदेश एवं जिला अध्यक्षों का नाम तय, दिनभर चली बैठक ,,,अध्यक्ष का ऐलान

BJP: Names of state and district presidents decided, announcement of district president on January 5 and state president on January 15

BJP: Names of state and district presidents decided, announcement of district president on January 5 and state president on January 15 भोपाल। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मध्य प्रदेश के चुनाव अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। वे मध्य प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष का चयन करेंगे। 15 जनवरी तक भाजपा BJP state and district presidents का चयन कर लिया जाएगा। इसको लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं प्रदेश प्रभारी डॉ महेंद्र सिंह और सह प्रभारी सतीश उपाध्याय की भूमिका भी नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में महत्वपूर्ण होगी।पांच जनवरी तक जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान मध्य प्रदेश से राज्य सभा सदस्य रहे हैं। अब वे ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। मध्य प्रदेश से राज्य सभा रहने के कारण उनका प्रदेश से जुड़ाव रहा है । भाजपा संगठन चुनाव के तहत नए जिला अध्यक्षों के नामों के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। गुरुवार को दिनभर चली बैठकों में प्रदेश के चुनाव अधिकारियों के साथ अलग-अलग जिलों के जिला चुनाव अधिकारी और पर्यवेक्षकों से साथ वन-टू-वन चर्चा की गई। प्रत्येक जिले के लिए प्रस्तावित पांच नामों का पैनल तैयार किया गया है। इनमें दो नामों के अलावा एससी, एसटी और महिला का एक-एक नाम शामिल हैं। कुल पांच नामों का पैनल तैयार किया गया है। शुक्रवार को इन नामों का पैनल फाइनल कर केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष दिल्ली भेजा जाएगा। दिल्ली से नामों पर अंतिम निर्णय के बाद पांच जनवरी को जिला अध्यक्षों की घोषणा की जा सकती है। Read More: भाजपा की बड़ी मुश्किल ,सिंधिया और तोमर में तूफानी घमासान https://mysecretnews.com/stormy-fight-between-scindia-and-tomar/ गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में दिनभर चली बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व संगठन पर्व की केंद्रीय पर्यवेक्षक सरोज पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद एवं प्रदेश चुनाव अधिकारी विवेक नारायण शेजवलकर ने जिला अध्यक्ष के नामों पर विचार विमर्श कर फाइनल पैनल तैयार किया। बताया जा रहा है कि 15 मौजूदा युवा जिला BJP state and district presidents को रिपीट किया जा सकता है। हालांकि पार्टी यह भी सुनिश्चित करेगी कि इन जिला अध्यक्षों का कार्यकाल निर्विवाद रहा हो। चार साल से अधिक समय से जिला अध्यक्ष रहने वाले रिपीट नहीं किए जाएंगे। पार्टी ने इस बार जिला अध्यक्ष के महिलाओं को भी प्राथमिकता में रखा है। पैनल में महिला नेत्रियों का नाम शामिल है। recent visitors 313

एसकेएम ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया, हुई रद्द, 4 जनवरी को बुलाई महापंचायत

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बीच किसानों के मुद्दों पर होने वाली बैठक रद्द कर दी गई है। एसकेएम ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है। यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के द्वारा नियुक्त समिति के अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश नवाब सिंह की अगुवाई में आयोजित की जाने वाली थी। इसका उद्देश्य किसानों की समस्याओं को सुलझाना था। एसकेएम ने एक बयान जारी कर कहा कि वह 3 जनवरी को होने वाली बैठक में भाग नहीं ले पाएंगे। किसान संगठन का कहना है कि समिति का ध्यान मुख्य रूप से हाईवे ब्लॉक को हटाने पर है, जबकि किसानों के मूल मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही है। समिति को शंभू बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों से संपर्क साधने और उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग से अपने ट्रैक्टर और तंबू हटाने के लिए मनाने का कार्य सौंपा गया है, ताकि पंजाब और हरियाणा के लिए रास्ते खोले जा सकें। आपको बता दें कि सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति का गठन किया था, जिसका नेतृत्व पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश नवाब सिंह कर रहे हैं। फरवरी 2024 से किसान संगठनों की विभिन्न शाखाओं के किसान दिल्ली जाने के रास्ते में शंभू और अन्य बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल की भूख हड़ताल 37वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। उनकी तबीयत भी बिगड़ चुकी है। दल्लेवाल ने कहा है कि वह तब तक अपना उपवास नहीं तोड़ेंगे जब तक सरकार 24 फसलों के लिए कानूनी गारंटी नहीं देती। किसानों ने शनिवार को विरोध स्थल पर 'किसान महापंचायत' का आह्वान किया है। एसकेएम के नेता काका सिंह कोटरा ने कहा, "4 जनवरी को हम एक बड़ी किसान महापंचायत आयोजित करेंगे, जिसमें विभिन्न राज्यों से किसान भाग लेंगे।" किसान नेता अभिमन्यु कोहड़ ने कहा कि दल्लेवाल भी महापंचायत में संबोधन कर सकते हैं। recent visitors 72

सीएम सिंह ने कहा, ‘मैंने जो भी कहा वो माफी थी, जिसके जरिए मैंने पीड़ितों के प्रति दुख जाहिर किया था, आतंकवादियों से नहीं

इम्फाल मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने साफ कर दिया है कि उन्होंने सिर्फ पीड़ितों से माफी मांगी है, 'किसी और से नहीं।' दरअसल, माफी मांगने पर कांग्रेस समक्ष कुछ विपक्षी दलों ने सीएम पर निशाना साधा था। शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय सचिव अजय कुमार भल्ला ने राज्यपाल के तौर पर शपथ ली। सीएम सिंह कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। सीएम सिंह ने कहा, 'मैंने जो भी कहा वो माफी थी, जिसके जरिए मैंने पीड़ितों के प्रति दुख जाहिर किया था। वो लोग जो भुगत रहे हैं और वो लोग, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया।' उन्होंने कहा, 'मैं मानवीयता के चलते उनसे माफी मांग रहा था। मैं उन लोगों से माफी मांग रहा था, किसी और से नहीं। मैं क्यों आतंकवादियों से सॉरी बोलूंगा? नहीं, मैं माफी उन मासूमों से मांग रहा था, जिन लोगों ने अपने करीबियों को खो दिया और विस्थापित हो गए।' मई 2023 से जारी राज्य में हिंसा को लेकर सीएम सिंह ने 2024 के आखिरी दिन हालात पर दुख जाहिर किया था और माफी मांगी थी। तब कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने माफी को लेकर घेरा था और कहा था कि यह काफी नहीं है। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हुई हिंसा में 250 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। शपथ: मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. कृष्णकुमार ने भल्ला को राज्यपाल पद की शपथ दिलाई। भल्ला ने मणिपुर राइफल्स के जवानों द्वारा दी गई सलामी गारद का निरीक्षण किया। सबसे लंबे समय तक केंद्रीय गृह सचिव रहने वाले भल्ला ने पिछले वर्ष अगस्त में अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया था। वह असम-मेघालय कैडर के 1984 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पिछले महीने भल्ला को मणिपुर का राज्यपाल नियुक्त किया था। recent visitors 95