सुप्रीम कोर्ट ने कहा बेटियों को पढ़ाई के खर्चे के लिए अपने माता-पिता से पैसे मांगने का पूरा अधिकार

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बेटियों को पढ़ाई के खर्चे के लिए अपने माता-पिता से पैसे मांगने का पूरा अधिकार है. कोर्ट ने लड़कियों को बड़ा अधिकार देते हुए कहा कि वे जरूरत पड़ने पर पढ़ाई का खर्चा देने के लिए अपने माता-पिता को कानूनी तौर पर बाध्य भी कर सकती हैं. उनके माता-पिता अपनी हैसियत के अंदर बेटी को पढ़ाई का खर्चा देने को बाध्य होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला तलाक से जुड़े एक विवाद में दिया है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ कर रही थी. मामले में एक दंपत्ति 26 साल से अलग रह रहे थे. इनकी बेटी आयरलैंड में पढ़ाई कर रही थी. लड़की ने अपनी मां को दिए जा रहे कुल गुजारा भत्ते के एक हिस्से के रूप में अपने पिता द्वारा उसकी पढ़ाई के लिए दिए गए 43 लाख रुपये लेने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने केस में क्या कहा अदालत ने आदेश में कहा, "बेटी होने के नाते उसे अपने माता-पिता से शिक्षा का खर्च प्राप्त करने का ऐसा अधिकार है जिसे खत्म नहीं किया जा सकता है. इस आदेश को कानूनी रूप से लागू किया जा सकता है." सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केवल इतना ही मानते हैं कि बेटी को अपनी शिक्षा जारी रखने का मौलिक अधिकार है, जिसके लिए माता-पिता को अपने वित्तीय संसाधनों की सीमा के भीतर आवश्यक धनराशि प्रदान करने के लिए बाध्य किया जा सकता है." अदालत ने कहा कि लड़की ने अपनी गरिमा का ध्यान रखते हुए इस राशि रखने से इनकार कर दिया और अपने पिता को पैसे वापस लेने को कहा, लेकिन पिता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि बेटी कानूनी रूप से राशि की हकदार थी. पिता ने बिना किसी कारण के पैसे दिए, जिससे पता चलता है कि वे फाइनेंशियल तौर पर मजबूत हैं और अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद करने में सक्षम हैं. 73 लाख रुपये में हुआ था सेटलमेंट इस केस में 28 नवंबर 2024 को दंपती के बीच एक समझौता हुआ था. इनकी बेटी ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किया था. इस सेटलमेंट के तहत पति ने कुल  73 लाख रुपये अपनी पत्नी और बेटी को देने पर सहमति जताई थी. इसमें से 43 लाख रुपये बेटी की पढ़ाई के लिए थे, बाकी पत्नी के लिए थे. कोर्ट ने कहा कि चूंकि पत्नी को अपने हिस्से के 30 लाख रुपए मिल गए हैं और दोनों पक्ष पिछले 26 साल से अलग रह रहे हैं, ऐसे में कोई कारण नहीं बनता है कि आपसी सहमति से दोनों को तलाक न दिया जाए. न्यायालय ने कहा, "परिणामस्वरूप, हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए आपसी सहमति से तलाक का आदेश देकर दोनों पक्षों के विवाह को भंग करते हैं." अदालत ने कहा कि भविष्य में कोई भी पक्ष न तो किसी के खिलाफ अदालत में कोई केस करेगा और न ही किसी तरह का दावा करेगा. विरासत में बेटियों की हिस्सेदारी इससे पहले जनवरी 2022 में भी सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों के पक्ष में एक अहम फैसला दिया था. सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले में कहा था कि एक ऐसे व्यक्ति की संपत्ति,जो बिना वसीयत लिखे मर गया और उसकी केवल एक बेटी हो तो उसकी बेटी को संपत्ति में समग्र अधिकार प्राप्त होगा, न कि परिवार के किसी अन्य सदस्य को. कोर्ट के अनुसार संयुक्त परिवार में रह रहे व्यक्ति की वसीयत लिखे बिना ही मौत हो जाए तो उसकी संपत्ति पर बेटों के साथ उसकी बेटी का भी हक होगा. इस दौरान बेटी को अपने पिता के भाई के बेटों की तुलना में संपत्ति का हिस्सा देने में प्राथमिकता दी जाएगी.   recent visitors 176

सत्ता जाने के भय से बोखलाए केजरीवाल, दिल्ली वालों से ले रहे हैं बदला: वीरेंद्र सचदेवा

नई दिल्ली 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा पीएम मोदी और गृह मंत्री पर जाटों को धोखा देने का आरोप लगाए जाने के बाद भाजपा ने पलटवार किया। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अरविंद केजरीवाल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सत्ता जाने के भय से अरविंद केजरीवाल अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "सत्ता जाने के भय से अरविंद केजरीवाल अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। केजरीवाल अपनी सत्ता खोने का बदला दिल्ली वालों से ले रहे हैं। मैं उनसे यही कहूंगा कि वह भाजपा को कोस लें, लेकिन प्लीज दिल्ली में तनाव ना फैलाइए, दिल्ली का विकास रोककर, खजाना लूटकर वह पहले ही बहुत नुकसान कर चुके हैं। अब उन्हें दिल्ली का समुदाय सौहार्द नहीं बिगाड़ना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "दो कुर्सी नाटक से आज के घटिया पोस्टर तक आपने गत 4 माह में हर सुबह दिल्ली वालों को, भाजपा को कोसा है। दिल्ली अब और केजरीवाल को नहीं सह पाएगी। केजरीवाल का आज का पोस्टर उनके चरित्र और हताशा को दर्शाता है। भाजपा इसकी निंदा करती है और अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची हो तो इसे वापस लें।" वीरेंद्र सचदेवा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा, "13 सितंबर को माननीय सुप्रीम कोर्ट की सख्त शर्तों के साथ एक कागजी मुख्यमंत्री के रूप में जेल से बाहर आए अरविंद केजरीवाल ने उसी दिन इस्तीफा न देकर राजनीतिक आत्महत्या की थी। 21 सितंबर को आतिशी को अस्थाई मुख्यमंत्री कहकर अरविंद केजरीवाल ने अपनी पुरानी महिला विरोधी सोच को फिर से दर्शाया था। 22 सितंबर को मुख्यमंत्री कार्यालय में आतिशी से दो कुर्सी का नाटक करा कर केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा तार-तार की थी। 25 अक्टूबर को विकासपुरी से लेकर 30 नवंबर को ग्रेटर कैलाश पदयात्रा तक अरविंद केजरीवाल ने खुद पर हमले का कार्ड चलाने की भरसक कोशिश की, पर इस बार 2015 के थप्पड़ जैसी झूठी कहानी जमी नहीं।" उन्होंने आगे कहा, "केजरीवाल पूरा दिसंबर दिल्ली के हर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक डैमेज कंट्रोल के लिए मुस्लिम रोहिंग्या वोटर जुड़वाने को बेताब दिखे। वहीं नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में तो मृत एवं शिफ्टेड वोटर को बनाए रखने के लिए फड़फड़ाते रहे। 1 जनवरी 2025 को जब लोग खुशियां बांट रहे थे, तब केजरीवाल-मार्लेना ने उपराज्यपाल मंदिर तुड़वा देंगे जैसी झूठी खबर उड़ाकर दिल्ली का साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की, पर वह सफल नहीं हुए।" भाजपा नेता ने राकेश टिकैत और अरविंद केजरीवाल की मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "चार दिन पहले उनसे राकेश टिकैत मिले थे और कल 9 जनवरी को केजरीवाल ने दिल्ली के जाट समाज को राजनीतिक रूप से उकसाने की कोशिश की है, जो शर्मनाक है। 9 जनवरी को ही देर शाम केजरीवाल ने चुनाव अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए। अरविंद केजरीवाल हमेशा से पूर्वांचल विरोधी थे, हैं और रहेंगे और यह काला सच कल 9 जनवरी की शाम को एक बार फिर उनके मुंह से निकला। केजरीवाल को बताना चाहिए कि वह पूर्वांचल के लोगों से इतनी नफरत क्यों करते हैं?" recent visitors 105

निर्मम हत्या: पति-पत्नी सहित 3 बेटियों का स्टोन कटर से काटा गला

मेरठ मेरठ में एक ही परिवार के 5 लोगों की हत्या करने का मामला सामने आया है। पति-पत्नी सहित 3 बेटियों को पत्थर काटने वाली मशीन से काटा गया है। बच्चियों के शव बोरी भर दिया। उसके बाद हत्यारों ने पांचों शवों को बेड के बॉक्स में छिपा दिया। पांचों शवों के गले किसी धारदार हथियार से काटे गए थे, जिसके गहरे निशान मिले। घर के बाहर ताला लटका हुआ था। पड़ोसी समझ रहे थे कि सभी कहीं बाहर गए हुए हैं। भाई व परिवार के लोग फोन कर रहे थे, लेकिन कोई रिसीव नहीं कर रहा था। मामला लिसाड़ी गेट इलाके के सोहेल गार्डन का है। सभी मरने वालों की पहचान हो गई है। पति मोईन, पत्नी आसमा, अफ्सा (8), अजीजा (4), अदीबा (1) के शव मिले हैं। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में शवों के गलों पर गहरे निशान मिले हैं, जिससे अनुमान है कि उनकी पत्थर काटने वाली मशीन से हत्या की गई है। मोईन के भाई पर शक एक बड़े हत्याकांड की खबर लगते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। एडीजी डीके ठाकुर व डीआईजी कलानिधि नैथानी ने लोगों से पूछताछ की। पुलिस ने मोईन के भाई को हिरासत में लिया है। आसमा के भाई ने मामला दर्ज कराया, जिसमें आसमा की देवरानी व मोईन के दो भाइयों को नामजद किया है। पुलिस देवरानी नजराना को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घर में बिछी पड़ी थीं लाशें मोईन किराए के घर में परिवार के साथ रहता था। सुबह से परिवार के लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। भाई सलीम ने पत्नी के साथ घर जाकर देखा, तो ताला लटका हुआ था। उसने आसपास लोगों से पूछा तो पता चला कि कल से किसी को भी नहीं देखा है। आवाज लगाई, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। हम दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे तो सामान बिखरा मिला। फिर भाई और भाई के शव जमीन पर पड़े देखे। पास जाकर देखने पर पता चला कि वह मर गए थे।   recent visitors 72

अमेरिका : लॉस एंजिल्स के जंगलों में लगी भयानक आग और हुई भयानक, मरने वालों की संख्या 7 हुई

कैलिफोर्निया अमेरिका के सबसे अधिक आबादी वाले काउंटी लॉस एंजिल्स के जंगलों में लगी आग अब और भयानक रूप ले लिया है। इस भयानक आग में अब तक मरने वालों की संख्या 7 हो गई है। इस आग से 1,100 इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग अब विकराल रूप ले चुकी है। इसमें लॉस एंजेलिस और हॉलीवुड हिल्स में तबाही मचा दी है ,जिससे हजारों लोग पलायन को मजबूर हैं। एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक आग की वजह से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार इस भयानक आग ने लगभग 1,000 से ज्‍यादा घरों को अपनी चपेट में ले लिया है। इससे सांता मोनिका पर्वतमाला और प्रशांत महासागर के बीच बने कई महंगे घर भी प्रभावित हुए हैं। मालिबू के लिए भी नई चेतावनी जारी की गई है। कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट्री एंड फायर प्रोटेक्शन (कैल फायर) ने जानकारी देते हुए कहा कि पैलिसेड्स में मंगलवार से शुरू हुई विनाशकारी आग ने तेज हवा की वजह से विकराल रूप ले लिया है। बुधवार दोपहर तक यह आग 15,800 एकड़ (63.9 वर्ग किमी) तक फैल गई और इस पर काबू नहीं पाया जा सका। कैल फायर ने कहा, " आग भयावह है और दूर या पास से इसका पता लगाना एक चुनौती बना हुआ है।" लॉस एंजिल्स शहर के पश्चिम में 32 किमी दूर स्थित एक समृद्ध समुदाय में, कई ऐतिहासिक स्थल, जिनमें ग्रीक और रोमन प्राचीन वस्तुओं को प्रदर्शित करने वाला शानदार गेट्टी विला संग्रहालय और मध्य शताब्दी का आधुनिक ईम्स हाउस भी आग के खतरे में है। वही इस भयानक आग से पैलिसेड्स के तीन स्कूलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। अग्निशमन और पुलिस अधिकारियों के अनुसार मंगलवार शाम को लगी ईटन की आग ने लॉस एंजिल्स के दो पड़ोसी शहरों अल्ताडेना और पासाडेना के पास 10,600 एकड़ (42.9 वर्ग किमी) से अधिक क्षेत्र को जला दिया, जिससे पांच लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। भीषण के कारण राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपना विदेशी दौरा रद्द कर दिया था। वहीं नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कैलिफोर्निया के गवर्नर पर भड़कते दिखाई दिए। अधिकारियों ने दक्षिणी कैलिफोर्निया में खतरनाक जंगली आग की स्थिति के लिए तेज हवाओं और सूखी वनस्पति को जिम्मेदार ठहराया है। रात में 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से असाधारण रूप से शक्तिशाली हवाएं चलीं। स्थानीय टीवी स्टेशन केटीएलए ने बताया कि दक्षिणी कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स, वेंचुरा, ऑरेंज, सैन बर्नार्डिनो, रिवरसाइड और सैन डिएगो काउंटियों में जंगली आग के कारण व्यापक बिजली कटौती से बुधवार दोपहर तक 4 मिलियन से अधिक ग्राहक प्रभावित हुए। वहीं कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने मंगलवार को आपातकाल घोषित करने के साथ तेजी से फैल रही आग के चलते हजारों लोगों से वहां से निकलने का कहा। recent visitors 62

दिल्ली विधानसभा चुनाव: राजनीतिक दलों में पोस्टर वॉर जारी, आप ने भाजपा नेताओं को बताया ‘गालीबाज दानव’

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव के प्रचार के बीच राजनीतिक दलों के बीच पोस्टर वॉर जारी है। आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को एक नया पोस्टर जारी किया है। इस पोस्टर में उन्होंने बीजेपी नेताओं को गालीबाज बताया है। आम आदमी पार्टी ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्टर शेयर किया है। उन्होंने पोस्टर को कैप्शन दिया, "भाजपा के गालीबाज दानवों से दिल्ली रहे सतर्क।" इस पोस्टर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वीरेंद्र सचदेवा, विजेंद्र गुप्ता, प्रवेश वर्मा, मनोज तिवारी, रमेश बिधूड़ी की तस्वीर लगाई गई है। इस पोस्टर को ‘गालीबाज दानव’ नाम दिया गया है। वहीं, आम आदमी पार्टी के पोस्टर के जवाब में भाजपा ने भी पलटवार किया है। दिल्ली भाजपा ने अपने एक्स अकाउंट पर अरविंद केजरीवाल की एक हंसती हुई तस्वीर को शेयर किया। उन्होंने 'आप' को पूर्वांचल विरोधी बताया है। भाजपा ने फोटो शेयर करते हुए लिखा, "पूर्वांचल समाज का अपमान, शीशमहल के नवाब केजरीवाल की पहचान।" इतना ही नहीं, पोस्टर में लिखा गया है कि पूर्वांचलियों का दुश्मन, पूर्वांचलियों को फर्जी बताया, कोरोना में उन्हें भगाया। जब भी मिला मौका महाठग ने उनका मजाक उड़ाया। इसके अलावा भाजपा ने अपने एक अन्य पोस्ट में आम आदमी पार्टी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, "महाठग ने दिल्लीवासियों को लंदन का झूठा सपना दिखाकर ठग लिया। अब दिल्ली से आप-दा जाएगी, भाजपा आएगी।" इससे पहले गुरुवार को आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर होर्डिंग्स लगवाए थे, जिसमें भाजपा से मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सवाल पूछा गया है। साथ ही उसे गाली-गलौज पार्टी भी बताया था। आम आदमी पार्टी के इस होर्डिंग में एक तरफ अरविंद केजरीवाल की तस्वीर लगाई, जबकि दूसरी तरफ प्रश्न चिन्ह छपा हुआ है। होर्डिंग में सबसे ऊपर लिखा है दिल्ली का सीएम कौन? इसके बाद अरविंद केजरीवाल की फोटो के साथ आम आदमी पार्टी का नाम लिखा है। जबकि दूसरी तरफ प्रश्न चिन्ह के साथ गाली-गलौज पार्टी लिखा है। आम आदमी पार्टी की तरफ से यह होर्डिंग दिल्ली के वजीरपुर फेस-1 अशोक विहार में लगाई गई थी। recent visitors 71

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, रविचंद्रन अश्विन का बयान हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा नहीं

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-3 से हार का सामना करना था. इस हार के चलते भारतीय टीम ने 10 साल बाद बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (BGT) गंवा दी थी. ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान ही स्टार स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. अश्विन के इस फैसले से फैन्स चौंक गए थे. अश्विन गाबा टेस्ट के बाद ऑस्ट्रेलिया से स्वदेश वापस लौट आए थे. अश्विन के बयान से खड़ा हुआ बखेड़ा अब रविचंद्रन अश्विन ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसके चलते बखेड़ा खड़ा हो गया है. अश्विन ने चेन्नई स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी भारत की राष्ट्रीय भाषा नहीं है. अश्विन के इस बयान से भाषा पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. अश्विन ने अपने संबोधन के दौरान छात्रों से पूछा कि क्या कोई हिंदी में सवाल पूछने में रुचि रखता है, जिसे लेकर किसी ने रुचि नहीं दिखाई. इसके बाद अश्विन के कहा, 'मैंने सोचा कि मुझे यह कहना चाहिए. हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा नहीं है, यह एक आधिकारिक भाषा है.' आर. अश्विन के बयान से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. कुछ लोगों ने तर्क दिया कि अश्विन को ऐसे मुद्दों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए. एक यूजर ने लिखा, 'अश्विन को इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए. मुझे यह पसंद नहीं है. मैं उनका प्रशंसक हूं. आप जितनी अधिक भाषाएँ सीखेंगे, यह अच्छा है. हमारे फोन में किसी भी भाषा का अनुवाद उपलब्ध है. समस्या क्या है, भाषा का मुद्दा लोगों पर छोड़ दें.' एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, 'अश्विन पहले ही इंटरव्यूज में कह चुके हैं कि जब आप तमिलनाडु से बाहर जाते हैं और हिंदी नहीं जानते तो जीवन कितना कठिन होता है. क्या हम इसे नहीं सीख सकते, जिसे भारत अधिकांश लोग जानते हैं.' अश्विन के बयान पर राजनीति भी तेज डीएमके ने आर.अश्विन के बयान का समर्थन किया है. डीएके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, 'जब कई राज्य अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं तो हिंदी राजभाषा कैसे हो सकती है.' हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अपील की है कि भाषा पर फिर से बहस नहीं शुरू होनी चाहिए. भाजपा नेता उमा आनंदन ने कहा, 'डीएमके की ओर से इसकी सराहना करना आश्चर्य की बात नहीं होगी. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अश्विन राष्ट्रीय क्रिकेटर हैं या तमिलनाड के क्रिकेटर हैं.' 1930-40 के दशक में तमिलनाडु में स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य भाषा के रूप में लागू करने का काफी विरोध हुआ था. द्रविड़ आंदोलन का उद्देश्य तमिल को बढ़ावा देना और तमिल भाषियों के अधिकारों का दावा करना था. इस आंदोलन ने हिंदी भाषा के विरोध में केंद्रीय भूमिका निभाई. द्रविड़ राजनीतिक दल जैसे डीएमके, एआईएडीएमके लंबे समय से हिंदी के बजाय तमिल के इस्तेमाल की वकालत करते रहे हैं. उनका तर्क है कि हिंदी को बढ़ावा देने से तमिल जैसी क्षेत्रीय भाषा की स्थानीय पहचान हाशिए पर चली जाएगी. क्या हिंदी है राष्ट्रभाषा या राजभाषा? बता दें कि हिंदी को राजभाषा का दर्जा 14 सितंबर 1949 को मिला था. इसके बाद 1953 से राजभाषा प्रचार समिति द्वारा हर साल 14 सितंबर को हिंदी द‍िवस का आयोजन किया जाने लगा. अपनी विभिन्‍नताओं के चलते भारत की कोई राष्‍ट्र भाषा नहीं है मगर सरकारी दफ्तरों में कामकाज के लिए एक भाषाई आधार बनाने के लिए हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया. संविधान के भाग 17 में इससे संबंधित महत्‍वपूर्ण प्रावधान भी किए गए हैं. भारत के संविधान के भाग 17 के अनुच्‍छेद 343(1) में कहा गया है कि राष्‍ट्र की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी. recent visitors 75

bjp state president Post पर एसपी समुदाय का होगा कब्जा , ये नाम आगे

st community may get a chance in the list of bjp state president Post these names will come forward

अध्यक्ष के नाम पर कयासों का दौर तेज हो गया है। मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के विभाजन के बाद 24 वर्षों में अब तक आदिवासी वर्ग के हाथ bjp state president Post की बागडोर नहीं मिल सकी। MP BJP President : bjp state president Post के नाम पर कयासों का दौर तेज हो गया है। मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के विभाजन के बाद 24 वर्षों में अब तक आदिवासी वर्ग के हाथ प्रदेश की बागडोर नहीं मिल सकी। जबकि इस दौरान अनुसूचित जाति के सत्यनारायण जटिया नौ माह के लिए मनोनीत अध्यक्ष बने थे। वहीं साल 1980 से ब्राह्मण सबसे ज्यादा 6 और क्षत्रिय 5 बार प्रदेश अध्यक्ष रहे। इस बीच बदलते पॉलिटिकल ट्रेंड में भाजपा जातिगत समीकरण साधने आदिवासी समुदाय की ओर भी जा सकती है। बता दें 15 जनवरी तक नए अध्यक्ष का चयन होना है। इसके लिए प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान जल्द ही भोपाल का दौरा कर सकते हैं। प्रदेश में मौजूदा स्थिति में सीएम डॉ. मोहन यादव ओबीसी वर्ग से हैं, जबकि दोनों डिप्टी सीएम में से राजेंद्र शुक्ल ब्राह्मण और जगदीश देवड़ा एससी से आते हैं। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सामान्य से हैं। ऐसे में सोशल इंजीनियरिंग बनाने एससी पर पार्टी दांव खेल सकती है। 1980 के बाद से ऐसा रहा फॉर्मूलाब्राह्मण- 06क्षत्रिय – 05जैन – 02ओबीसी – 02वैश्य – 01एसटी – 01एससी – 01 भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव में आदिवासी वोटबैंक को साधने के लिए विशेष प्रयास किए थे। 230 सीटों में से 47 आदिवासी सीटों पर पार्टी ने 24 सीटें जीती थीं। हालांकि यह प्रदर्शन भाजपा के कुल 163 सीटों की तुलना में कमजोर था। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने एसटी वर्ग की सुरक्षित सीटों पर 50% से अधिक वोट हासिल किए थे। बता दें प्रदेश में करीब 24 प्रतिशत आबादी आदिवासी है। Read more:- जीतू और जय’ की जोड़ी के पीछे है दिग्विजय सिंह का माइंडगेम! कमलनाथ होते जा रहे हैं साइड फग्गन सिंह कुलस्ते(Faggan Singh Kulaste): सात बार के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते इस दौड़ में सबसे आगे हैं। वे केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया। केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से उनकी संभावना प्रबल है।सुमेरसिंह सोलंकी(Sumer Singh Solanki): राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी युवा और ऊर्जावान चेहरा हैं। मालवा के सोलंकी संघ के नजदीकी हैं। आदिवासी समाज में उनकी अच्छी पकड़ है।जातिगत समीकरण: प्रदेश में मौजूदा स्थिति में सीएम डॉ. मोहन यादव ओबीसी वर्ग से हैं, जबकि दोनों डिप्टी सीएम में से राजेंद्र शुक्ल ब्राह्मण और जगदीश देवड़ा एससी से आते हैं। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सामान्य से हैं। ऐसे में सोशल इंजीनियरिंग बनाने एससी पर पार्टी दांव खेल सकती है।ये भी संभावित नामगजेंद्र सिंह पटेल और महिला नेताओं में हिमाद्री सिंह का नाम भी चर्चाओं में है। हालांकि इनकी संभावनाएं प्राथमिक नामों की तुलना में थोड़ी कमजोर मानी जा रही हैं। recent visitors 322