Friday, July 10, 2026 3:59 pm

न्यूजीलैंड के खिलाफ बदल सकता है भारत का कप्तान, टीम इंडिया का अगला मुकाबला न्यूजीलैंड से 2 मार्च को

नई दिल्ली ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में टीम इंडिया का अगला मुकाबला न्यूजीलैंड से 2 मार्च को है। भारत सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुका है ऐसे में यह मैच सिर्फ एक औपचारिकता ही है। ऐसे में हैमस्ट्रिंग इंजरी से जूझ रहे भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को इस मैच के लिए आराम दिया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टीम मैनेजमेंट इस मुद्दे पर विचार भी कर रहा है। भारत का सेमीफाइनल मुकाबला 4 मार्च को है ऐसे में टीम मैनेजमेंट रोहित शर्मा पर कम से कम दबाव बनाना चाहेगी। अगर रोहित शर्मा को न्यूजीलैंड के खिलाफ रेस्ट दिया जाता है तो शुभमन गिल वनडे क्रिकेट में अपने कैप्टेंसी करियर का डेब्यू करेंगे। बता दें, चैंपियंस ट्रॉफी के लिए शुभमन गिल को रोहित शर्मा को डिप्टी यानी टीम का उप-कप्तान चुना गया है। पाकिस्तान के खिलाफ मैच के दौरान जब रोहित शर्मा चोटिल होने के बाद मैदान छोड़कर गए थे तो कुछ देर के लिए गिल ने ही टीम की कमान संभाली थी। हालांकि कुछ देर बाद ही हिटमैन फील्ड पर आकर अपनी जिम्मेदारी संभालने लगे थे, मगर वह 100 प्रतिशत फिट नहीं दिखाई दे रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार रोहित शर्मा और शुभमन गिल दोनों ने ही बुधवार को हुए बैटिंग प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा नहीं लिया था। रोहित चोटिल थे तो गिल अच्छा महसूस नहीं कर रहे थे। हालांकि गिल ने गुरुवार को अलग से एक सेशन में हिस्सा लिया, जिसे देखने के बाद भारतीय फैंस ने राहत की सांस ली। कौन करेगा रोहित शर्मा को रिप्लेस? अगर रोहित शर्मा को न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले में आराम दिया जाता है तो ऋषभ पंत की टीम में जगह बन सकती है। वहीं शुभमन गिल के साथ केएल राहुल पारी का आगाज करते हुए नजर आ सकते हैं। बता दें, टीम इंडिया के पास कोई बैकअप ओपनर नहीं है। पहले स्क्वॉड में यशस्वी जायसवाल का नाम था, मगर अंतिम समय में उन्हें ट्रैवलिंग रिजर्व में शामिल कर भारत ने वरुण चक्रवर्ती को टॉप-15 में जगह दी। recent visitors 51

अफगानिस्तान वर्सेस ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबला, जाने लाहौर की पिच का कैसा रहेगा मिजाज

नई दिल्ली अफगानिस्तान वर्सेस ऑस्ट्रेलिया आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का 10वां मुकाबला आज यानी शुक्रवार, 28 फरवरी को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेला जाना है। सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करने के लिए दोनों टीमों के लिए यह मैच अहम होने वाला है। अगर ऑस्ट्रेलिया आज जीतता है या फिर मैच बारिश की भेंट भी चढ़ता है तो भी कंगारू टीम अगले राउंड में अपनी जगह बना लेगी, वहीं अफगानिस्तान को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए हर हाल में यह मैच जीतना होगा। आईए एक नजर गद्दाफी स्टेडियम के रिकॉर्ड और पिच रिपोर्ट पर एक नजर डालते हैं- अफगानिस्तान वर्सेस ऑस्ट्रेलिया पिच रिपोर्ट लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में अभी तक आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दो मुकाबले खेले गए हैं और दोनों ही मैच हाई स्कोरिंग रहे हैं। टीमों ने सभी चार इनिंग्स में 300 रन का आंकड़ा पार किया है और उम्मीद रहेगी आगे भी बल्लेबाज यहां गेंदबाजों को डोमिनेट करते हुए नजर आएंगे। स्पिनरों को बीच के ओवर्स में कुछ मदद मिल सकती है वहीं पेसर्स की नजरें नई गेंद का फायदा उठाने पर होगी। कुल मिलाकर, बल्लेबाजों के लिए इस मैदान की पिच स्वर्ग से कम नहीं है। यहां वही टीम जीतेगी जो गेंदबाजी में कम रन खर्च करेगी। बात टॉस की करें तो यहां पहला मैच ऑस्ट्रेलिया ने चेज करते हुए जीता था, तो दूसरे मुकाबले में अफगानिस्तान ने स्कोर डिफेंड किया था। गद्दाफी स्टेडियम रिकॉर्ड और आंकड़े मैच- 71 पहले बैटिंग करते हुए जीते गए मैच- 36 (50.70%) टारगेट का पीछा करते हुए जीते गए मैच- 33 (46.48%) टॉस जीतकर जीते गए मैच- 44 (61.97%) टॉस हारकर जीते गए मैच- 25 (35.21%) बिना परिणाम वाले मैच- 1 (1.41%) हाईएस्ट स्कोर इन चेज- 356/5 पहले बैटिंग करते हुए औसत स्कोर- 257 अफगानिस्तान वर्सेस ऑस्ट्रेलिया हेड टू हेड वनडे क्रिकेट में अफगानिस्तान एक भी बार ऑस्ट्रेलिया को नहीं हरा पाया है। दोनों टीमों के बीच 50 ओवर फॉर्मेट में अभी तक 4 मुकाबले खेले गए हैं और हर बार कंगारुओं ने जीत दर्ज की है। आज अफगानिस्तान के पास इतिहास रचने का मौका होगा। recent visitors 53

एक वचन, तीन बाण और शीश का दान… कौन थे बर्बरीक, कैसे मिला खाटू वाले श्याम का नाम

फाल्गुन के इस महीने श्रद्धालुओं के जत्थे राजस्थान के सीकर जिले की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं. इन रेलों में दूर से ही दिख रही हैं, नीली-पीली और केसरिया झंडिया, जिन्हें हाथों में थामकर श्रद्धालु नंगे पांव मंदिर की ओर बढ़ते ही जा रहे हैं. भीड़ भक्ति से झूम रही है, कतारों में खड़े लोग भजन गा रहे हैं और भजन को ध्यान से सुनिए तो वह अपने प्रभु श्याम का गुणगान कर रहे हैं. ये श्याम राधा के कृष्ण नहीं हैं, न ही नंद के लाला नंदलाल हैं. देवकी और यशोदा के पुत्र भी नहीं और न ही ये गीता का संदेश देने वाले कर्मयोगी हैं. श्रद्धालु उन्हें बाबा भी कह रहे हैं और हारे का सहारा भी. वह उनका नाम खाटू वाले श्याम बता रहे हैं. उनकी मंजिल है सीकर से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर एक गांव खाटू. यह गांव फाल्गुन महीने में दुल्हनों की तरह सजा है और भक्त अपने भगवान के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं. उन्हें हारे का सहारा बता रहे हैं और खुद को धन्य मान रहे हैं  बाबा के दर्शन कर लिए. कौन है खाटू वाले श्याम बाबा… महाभारत से जुड़ा है खाटू श्याम का इतिहास खाटू बाबा का इतिहास आज से 5000 साल पहले की पौराणिक गाथा से जुड़ा है. महाभारत के युद्ध के दौरान हुई एक घटना से खाटू वाले बाबा श्याम का प्राकट्य माना जाता है. क्या है यह कथा? जब यह तय हो गया था कि कौरव-पांडव में युद्ध होना ही है. ऐसे में दूर-दूर से राजा-महाराजा अपना पक्ष चुनते हुए सेना समेत युद्ध में शामिल होने पहुंच रहे थे. युद्ध की बात जंगल में रहने वाले एक नवयुवक के कानों तक भी पहुंच रही थी. उसने अपनी मां से युद्ध में जाने की आज्ञा मांगी. मां ने सहर्ष अनुमति दे दी और जाते-जाते कहा, जा बेटा 'हारे का सहारा' बनना. वह नवयुवक मां की बात से इंच भर भी नहीं डिगता था, क्योंकि वह उसकी गुरु भी थीं. उसने अपने नीले घोड़े पर सवार होने से पहले मां को वचन दिया, जैसा आपने कहा ऐसा ही होगा. 'हारे का ही सहारा' बनूंगा. यह नवयुवक थे महाबली भीम के पौत्र, महाबलशाली घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक, उनकी महान मां थीं मौरवी. बर्बरीक की दादी हिडिंबा थीं. जिन्होंने पांडवों के वनवास के दौरान भीम से गंधर्व विवाह किया था. इस तरह बर्बरीक पांडव वंशी भी था और हस्तिनापुर के क्षत्रिय परिवार से संबंधित था. क्यों लिया हारे के सहारे का वचन दरअसल, कौरव व पांडव के युद्ध में देश-विदेश के जो भी राज्य व राजा थे वह सभी युद्ध में भाग लेने पहुंच चुके थे. राजाओं के साथ उनकी सेना भी उनके साथ युद्ध मे शामिल थीं. इस तरह दोनों दलों की ओर 7-7 अक्षौहिणी सेना हो चुकी थीं. अभी तक द्वारिका ने युद्ध में भाग नहीं लिया था. कौरव-पांडव जब दोनों ही द्वारिका से सहायता मांगने पहुंचे तो परिस्थिति वश कृष्ण पांडव की ओर निहत्थे शामिल हुए और अपनी चतुरंगिणी सेना उन्होंने दुर्योधन को दे दीं. इस तरह कौरवों के पक्ष में 11 अक्षौहिणी सेना हो गई. मौरवी को था पांडवों की हार का डर बर्बरीक की मां को लगा था पांडवों की सेना कम है. कहीं युद्ध में उनका पलड़ा कमजोर न पड़े. ऐसे में उसने अपने बेटे से हारने वाले या कमजोर के पक्ष से युद्ध करने का वचन लिया. क्योंकि वह केवल शुरुआती पक्ष ही समझ पा रही थीं, लेकिन, मौरवी ने यह ध्यान नहीं दिया कि अनजाने ही उसने जो वचन लिया है वह महाभारत के युद्ध में किसी काम नहीं आएगा, लेकिन आगे चलकर उनका यही वचन कलयुग में संसार भर के लोगों का कल्याण करेगा. इसी वचन के कारण योद्धा बर्बरीक आज हारे के सहारे बाबा श्याम के तौर पर जाने जाते हैं. ऐसे मिला श्याम बाबा का नाम जब बर्बरीक युद्ध क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे, तो रास्ते में एक ब्राह्मण ने उन्हें रोक लिया. ब्राह्मण ने योद्धा का परिचय पूछा. बर्बरीक ने बताया कि मैं पांडव कुलभूषण बलशाली भीम और हिडिम्बा का पोता और उनके पुत्र घटोत्कच का पुत्र हूं. मेरी मां मौरवी हैं जो खुद एक योद्धा हैं और मेरी गुरु भी हैं. मैं इस समय महाभारत के युद्ध में हिस्सा लेने जा रहा हूं. मेरी मां ने मुझे युद्धनीति में प्रशिक्षित किया है और देवताओं से आशीर्वाद भी दिलवाया है. अब मैं उनके आशीष से युद्ध में भाग लेने जा रहा हूं. बर्बरीक के पास थी दिव्य शक्तियां ब्राह्मण ने पूछा, योद्धा तुम युद्ध में भाग लेने अकेले जा रहे हो. तुम्हारी सेना कहां है? तुम्हारे अस्त्र-शस्त्र भी अधिक नहीं दिख रहे. यह क्या तुणीर में केवल तीन बाण और बस एक धनुष. ब्राह्मण ने उनका मजाक उड़ाते हुए कहा-योद्धा कुरुक्षेत्र में ऐसा युद्ध होगा, जो फिर कभी नहीं होगा. वहां तुम कैसे अपना पराक्रम दिखाओगे. मेरी मानो लौट जाओ और जीवन का आनंद लो. बर्बरीक ने नम्रता से कहा-मेरी मां के आशीष का अपमान न कीजिए ब्राह्मण देवता. उनके प्रताप से मैं हारे का सहारा बनूंगा. यह तीन बाण साधारण नहीं हैं, दिव्य हैं. योद्धा बर्बरीक ने दिखाया पराक्रम इस महाभारत युद्ध के लिए तो मेरा एक ही बाण का काफी है, तीनों बाण चले तो सृष्टि का ही नाश हो जाएगा. यह बाण खुद महादेव ने प्रसन्न होकर दिए हैं. इनकी विशेषता है कि एक बार में लक्ष्य करते ही यह शत्रु समूह का समूल नाश कर देता है. चाहे वह कहीं भी जा छिपा हो. ब्राह्मण ने कहा-तुम तो बातें करते हो. ऐसा होता है तो प्रमाण दिखाओ. उस पीपल के पेड़ के पत्तों को क्या एक ही बाण से वेध सकते हो? इस पर बर्बरीक ने कहा-मैं बातें नहीं करता, प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या जरूरत? लीजिए आप संतुष्टि कर लीजिए. कहकर बर्बरीक ने पीपल की ओर लक्ष्य कर दिया. …और आश्चर्य में पड़ गए ब्राह्मण बर्बरीक ने जैसे ही बाण संधान किया. ऐसा लगा कि लाखों बाण प्रकट होकर पीपल के पेड़ के पत्तों को बेधने लगे हों. यह देखकर ब्राह्मण ने एक पत्ते को चुपके से अपने पैर के नीचे छिपा लिया. सारे पत्तों को बेध लेने के बाद बाण ब्राह्मण के पैरों की ओर बढ़ा और उसके पंजों को … Read more

पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल का दौरा, कांग्रेस के नेताओं से करेंगे मुलाकात

रायपुर  कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल दिल्ली से अमृतसर के लिए रवाना हो गए हैं. बतौर प्रभारी पंजाब यह उनका राज्य में पहला दौरा होगा. इस दौरान वे पंजाब कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात करेंगे. इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट भी किया है. पंजाब प्रभारी बनने के बाद दौरे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया कि “जब-जब पंजाब को पढ़ा, घूमा, जाना और समझा तब-तब लगा कि पंजाब सिर्फ एक राज्य ही नहीं बल्कि रंगों का संगम है. पंजाब खेतों की खुशबू है. पंजाब त्याग की भूमि है. पंजाब समर्पण का रास्ता है. पंजाब क्रांति की ज्वाला है. पंजाब संस्कृति का बहता जल है. पंजाब ढोल का मधुर संगीत है. पंजाब धर्म का प्रतीक है. पंजाब कर्म का नवगीत है. पंजाब एक आवाज है. हर अन्याय के विरुद्ध. आज पंजाब आ रहा हूं. स्वर्ण मंदिर अमृतसर में मत्था टेक अरदास करूंगा, जलियां वाला बाग में क्रांति को महसूस करूंगा, दुर्गियाना व राम तीरथ मंदिर में पूजा कर आप सबसे मुलाकात करूंगा.” recent visitors 47

सुनील गावस्कर ने दिया सीधा जवाब, कब खेली जाएगी इंडिया वर्सेस पाकिस्तान बाइलेट्रल सीरीज?, जब तक बॉर्डर पर

नई दिल्ली एक दशक से भी ज्यादा का समय हो गया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी द्विपक्षीय सीरीज खेली गई थी। राजनीतिक मसलों की वजह से यह दोनों टीमें बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में ही एक दूसरे के खिलाफ खेलती नजर आती है। इंडिया वर्सेस पाकिस्तान आखिरी द्विपक्षीय सीरीज 2012-13 में खेली गई थी जिस पाकिस्तान ने भारत का दौरा किया था, वहीं टीम इंडिया तो 2005-06 में आखिरी बार पाकिस्तान गई थी। पाकिस्तान अकसर भारत के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज खेलने की इच्छा जताता रहा है, मगर भारत की ओर से कभी इसका पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं आया। इसका प्रमुख कारण बॉर्डर पर अशांति है। जब टीम इंडिया के लीजेंड सुनील गावस्कर से इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने सुनील गावस्कर से हाल ही में स्पोर्ट्स सेंट्रल पर पाकिस्तानी क्रिकेट शो ‘ड्रेसिंग रूम’ में यह सवाल पूछा गया था और उन्होंने कहा था कि जब तक सीमा पर शांति नहीं हो जाती, तब तक द्विपक्षीय क्रिकेट संबंधों की बहाली पर बात नहीं हो सकती। सुनील गावस्कर ने कहा "सच कहूं तो जब बॉर्डर पर शांति होगी। अगर बॉर्डर पर शांति है, तो मुझे लगता है कि दोनों सरकारें निश्चित रूप से कहेंगी, 'देखिए, ठीक है, हमारे यहां कोई घटना नहीं हुई, बिल्कुल भी नहीं। तो चलिए कम से कम बातचीत से शुरुआत करते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे पूरा यकीन है कि कुछ बैक-चैनल कनेक्शन चल रहे होंगे। लेकिन आप देखना चाहते हैं कि जमीन पर और जमीन से बाहर क्या हो रहा है, क्योंकि हम घुसपैठ के बारे में सुनते हैं। यही कारण है कि भारतीय सरकार कह रही है, 'देखिए, शायद जब तक यह सब बंद नहीं हो जाता, हमें कुछ भी करने या बात करने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए।" पाकिस्तान और यूएई में जारी चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी पहले सिर्फ पाकिस्तान के पास थी, मगर जब बीसीसीआई ने अपनी टीम को पाकिस्तान भेजने से इनकार कर दिया तो आईसीसी ने इस टूर्नामेंट को हाईब्रिड मॉडल के आधार पर कराया। यह टूर्नामेंट अब पाकिस्तान और यूएई में खेला जा रहा है। recent visitors 31

खुलासा :बाइडेन शासन के दौरान आतंकी समूहों को भी करोड़ों डॉलर की मदद दी गई

न्यूयॉर्क अमेरिकी कांग्रेस ने आतंकवादी-नामित समूहों के साथ USAID के कथित संबंधों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि बाइडेन शासन के दौरान आतंकी समूहों को भी करोड़ों डॉलर की मदद दी गई. दरअसल ट्रंप द्वारा खर्चे में कटौती करने के लिए DOGE (Department of Government Efficiency) नाम का अलग मंत्रालय बनाया गया है. DOGE ने कहा था कि वो USAID के तहत दुनिया के देशों को दिए जाने वाले 723 मिलियन डॉलर की रकम को खत्म कर रहा है. यानी कि अब ऐसी कोई भी रकम इन देशों को नहीं मिलेगी. हमास को 2 बिलियन डॉलर आतंकी समूहों को बाइडेन शासन के दौरान मिली मदद को लेकर DOGE और अमेरिकी संघीय कर्मचारियों पर गठित कमेटी के समक्ष सुनवाई हुई.  इस दौरान हुई गवाही के अनुसार, बाइडेन प्रशासन के तहत 7 अक्टूबर, 2023 से USAID द्वारा हमास की मदद के लिए 2 बिलियन डॉलर से अधिक भेजे गए थे. लश्कर को भी मदद रिपोर्टों के अनुसार, USAID ने एक भारत-विरोधी संगठन को भी वित्तीय मदद प्रदान की थी जिसे अमेरिकी सरकार ने आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया है. इसने पाकिस्तान में स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के मुखौटे संगठन फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) को वित्तीय सहायता प्रदान की थी. लश्कर वहीं आतंकी संगठन है जिसने 26/11 के मुंबई हमले को अंजाम दिया था. इस हमले में 166 लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए थे. DOGE पहले ही दावा कर चुकी है कि USAID ने जांच के दायरे में होने के बावजूद फाउंडेशन को समर्थन देना जारी रखा था. recent visitors 43

पशुपतिनाथ मंदिर में अभिषेक पूजा-अर्चना एवं भंडारे का आयोजन

Abhishek puja and feast organized at Pashupatinath temple भोपाल (सुशील दामले)। पशुपतिनाथ नेपाली समाज के द्वारा 47वा:महाशिवरात्रि पर्व मनाया गया,महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर गंगाजली कलश यात्रा का आयोजन किया गया था जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए,वहीं महाशिवरात्रि के पावन पर्व में मुख्य रूप से क्षेत्रीय विधायक एवं राज्य मंत्री कृष्णा गौर खेल एवं युवा कल्याण सहकारिता मंत्री कैलाश विश्वास सारंग उपस्थित हुए,वही पशुपतिनाथ नेपाली समाज के अध्यक्ष लोकमणि धिमिरे शर्मा ने हमें बताया कि विगत कई वर्षों से हम लोग यह आयोजन करते आ रहे हैं,जिसमें समाज के द्वारा कई वरिष्ठ अतिथियों का सम्मान किया गया मंदिर प्रांगण में नेपाली समाज के द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया,जहां दिन भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही,मंदिर में सुबह भगवान का रूद्राभिषेक,अभिषेक सहित विशेष पूजा अर्चना की गई,इसके बाद दोपहर से भंडारे की शुरुआत हुई,जो देर शाम तक चलता रहा,इस दौरान कागज के दोने,पत्तल और गिलास का इस्तेमाल किया गया recent visitors 91