Thursday, July 2, 2026 2:28 am

पति ने मांगा तलाक तो कोर्ट ने कहा- ‘ये कोई गुनाह नहीं’, पत्नी पोर्नोग्राफी देखती है या आत्म-संतुष्टि में संलग्न होती है

मद्रास मद्रास हाईकोर्ट ने एक तलाक संबंधी याचिका पर फैसला सुनाते हुए साफ किया कि यदि कोई पत्नी पोर्नोग्राफी देखती है या आत्म-संतुष्टि में संलग्न होती है, तो इसे हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पति के प्रति क्रूरता नहीं माना जाएगा। अदालत ने पति की तलाक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह कोई अपराध नहीं है और न ही तलाक का वैध कारण बन सकता है।  क्या था मामला? करूर जिले के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी, जिसमें उसने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी महंगी चीजें खरीदती है, अश्लील फिल्में देखने की आदी है और घर के कामों से बचती है। इसके अलावा, उसने यह भी दावा किया कि पत्नी ससुराल वालों के साथ गलत व्यवहार करती है और फोन पर घंटों समय बिताती है। पति का यह भी कहना था कि उसकी पत्नी किसी यौन रोग से पीड़ित है, जिससे उनका वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि विवाहेतर संबंध तलाक का आधार हो सकता है, लेकिन आत्म-संतुष्टि को किसी भी स्थिति में पति के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता।  जज ने कहा: "यदि शादी के बाद कोई महिला विवाह के बाहर संबंध स्थापित करती है, तो यह तलाक का कारण बन सकता है। हालांकि, आत्म-संतुष्टि में संलग्न होना तलाक का आधार नहीं हो सकता।" कब हुई थी शादी? पति-पत्नी की शादी 1 जुलाई 2018 को अरुलमिघु पसुपतीश्वर मंदिर, करूर में हुई थी। हालांकि, 9 दिसंबर 2020 से वे अलग रह रहे थे। यह दोनों की दूसरी शादी थी। फरवरी 2024 में फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी। पत्नी ने पति के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर ये सभी बातें सही होतीं, तो वे दोनों लगभग दो साल तक एक साथ नहीं रह पाते। अदालत ने पाया कि पति अपनी पत्नी पर क्रूरता से जुड़े आरोपों को साबित करने में असफल रहा, जिसके चलते उसकी तलाक की याचिका खारिज कर दी गई। recent visitors 39

सचिन तेंदुलकर को बीसीसीआई द्वारा हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन दी जाती है

नई दिल्ली क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट जगत में कोई भी पहचान देने की जरूरत नहीं है। उनके योगदान को शब्दों में व्यक्त करना बेहद मुश्किल है। हालांकि, क्रिकेट की दुनिया से रिटायरमेंट लेने के बाद भी उनका संबंध खेल से बना हुआ है। क्या आप जानते हैं कि बीसीसीआई (BCCI) सचिन तेंदुलकर को हर महीने कितनी पेंशन देती है? अगर नहीं, तो इस लेख में हम आपको यही जानकारी देंगे, साथ ही यह भी बताएंगे कि अन्य क्रिकेटरों को क्या पेंशन मिलती है भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 2004 में एक पेंशन योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य रिटायर होने के बाद क्रिकेटरों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। इस योजना के तहत पेंशन राशि खिलाड़ी के टेस्ट मैचों की संख्या पर आधारित थी। यानी, जितने ज्यादा टेस्ट मैच खेले होंगे, उतनी अधिक पेंशन मिलती है। यह योजना क्रिकेटरों की लंबी सेवा और उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए बनाई गई थी। सचिन तेंदुलकर को कितनी पेंशन मिलती है? सचिन तेंदुलकर के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। सचिन तेंदुलकर को बीसीसीआई द्वारा हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन दी जाती है। यह पेंशन उनकी लंबी क्रिकेट यात्रा और योगदान के आधार पर तय की गई है। बीसीसीआई का यह कदम सचिन जैसे महान खिलाड़ी के सम्मान के रूप में देखा जाता है। अन्य क्रिकेटर्स को क्या मिलती है पेंशन? सचिन तेंदुलकर के अलावा बीसीसीआई कई अन्य महान क्रिकेटरों को भी पेंशन देती है। उदाहरण के तौर पर: युवराज सिंह को हर महीने 60,000 रुपये की पेंशन मिलती है। विनोद कांबली को 6,30,000 रुपये की सालाना पेंशन मिलती है। यह पेंशन क्रिकेटरों को उनके योगदान के आधार पर दी जाती है, और यह उन खिलाड़ियों के लिए एक तरह का सम्मान और उनके क्रिकेट करियर के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है। recent visitors 40

उज्जैन में जीआई टैग के लिए प्रेजेंटेशन बैठक हुई, बुरहानुपर के केले में मिनरल्‍स का भंडार, बताईं खूबियां

बुरहानपुर करीब दो साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद गुरुवार को उज्जैन में जीआई टैग के लिए प्रेजेंटेशन बैठक हुई। इस बैठक में प्रदेश के सोलह से ज्यादा जिलों के अधिकारियों को बुलाया गया था, लेकिन दस जिलों के अधिकारी ही शामिल हुए। साथ ही केंद्र सरकार की टीम और जीआई टैग मप्र के डायरेक्टर लक्ष्मीकांत दीक्षित मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार बैठक में शामिल बुरहानपुर जिले के विज्ञानी और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने केले की विशेषता बताई। इसके साथ ही देवास जिले से पहुंचे अधिकारियों ने वहां के खुरचन (मलाई से बना मिष्ठान) और गुलाब जामुन की विशेषता बताई। इसके अलावा जीआई टैग के लिए नरसिंहपुर के बैगन व इमली और इंदौर के आलू को भी शामिल किया गया है। सभी जिलों के अधिकारियों ने अपने उत्पादों की विशेषता, गुणवत्ता और उनमें मौजूद तत्वों के संबंध में जानकारी दी। केंद्र से आई टीम प्रेजेंटेशन के दौरान सामने आए तथ्य व जानकारी लेकर दिल्ली रवाना हो गई है। इस बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। वहां मीडिया का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस प्रेजेंटेशन का परिणाम आ सकता है। यदि बुरहानपुर के केले को जीआई टैग मिला तो इसके एक्सपोर्ट में कई गुना की वृद्धि संभव है। वर्ष 1960 से शुरू केले का उत्पादन जिले में केेले का उत्पादन वर्ष 1960 से शुरू हुआ था। पहली बार जलगांव से बैलगाड़ी में टिश्यू कल्चर लाकर पांच एकड़ खेत में फसल लगाई गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य किसानों ने फसल लगाना शुरू किया। इससे पहले तक जिले में मोसम्बी और संतरे की खेती की जाती थी। यह जिला चारों ओर से पहाड़ों से घिरा है। केला उत्पादन के लिए जलवायु पूरी तरह उपयुक्त है। छब्बीस हजार हेक्टेयर में होता है केला जिले में करीब 26 हजार हेक्टेयर में केले का उत्पादन होता है। इस काम में 16 हजार से ज्यादा किसान सक्रिय हैं। चार प्रमुख बिंदुओं पर प्रजेंटेशन तैयार किया था। इनमें जिले में केले का इतिहास, मिट्टी की गुणवत्ता, जलवायु और पोषक तत्व शामिल थे। केले को जीआई टैग प्रदान करने के लिए वर्ष 2023 में आवेदन किया गया था। अब जाकर जीआई टैगिंग के लिए बैठक बुलाई गई। उल्लेखनीय है कि बुरहानपुर का केला स्वाद और गुणवत्ता में हमेशा से बेहतर रहा है। यही वजह है कि इसकी मांग देश के कई राज्यों के साथ खाड़ी देशों तक है।   recent visitors 46

समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये किसान भाई 31 मार्च तक करा सकते हैं पंजीयन

ग्वालियर मौजूदा रबी विपणन वर्ष में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये ग्वालियर जिले में 40 पंजीयन केन्द्रों (प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थायें) पर किसानों का पंजीयन किया जा रहा है। साथ ही किसान भाई एमपी ऑनलाइन कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र एवं कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भी अपना पंजीयन करा सकते हैं। सिकमी किसानों के पंजीयन का काम पंजीयन केन्द्रों पर ही किया जायेगा। जिन किसान भाईयों ने अभी तक पंजीयन नहीं कराया है, उनसे 31 मार्च तक पंजीयन कराने का आग्रह किया गया है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ का उपार्जन खरीदी केन्द्रों पर 5 मई तक किया जायेगा। समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीदी की दर 2600 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जायेगा। recent visitors 34

रायपुर बना NFSU का आधिकारिक परिसर, उपमुख्यमंत्री शर्मा ने बोले- युवाओं को मिलेगा फॉरेंसिक शिक्षा में बेहतरीन अवसर

रायपुर छत्तीसगढ़ को फॉरेंसिक विज्ञान क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राजधानी रायपुर स्थित परिसर को राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के आधिकारिक परिसर के रूप में अधिसूचित कर दिया गया है. यह महत्वपूर्ण निर्णय प्रदेश को फॉरेंसिक विज्ञान, अनुसंधान और जांच के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा. अब छत्तीसगढ़ में ही आधुनिक तकनीकों के माध्यम से फॉरेंसिक शिक्षा और अनुसंधान को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा, जिससे न्याय प्रणाली को और प्रभावी बनाया जा सकेगा. इस अभूतपूर्व पहल के लिए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हृदय से आभार व्यक्त किया. उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह निर्णय न केवल प्रदेश के युवाओं को फॉरेंसिक शिक्षा के बेहतरीन अवसर प्रदान करेगा, बल्कि जांच और अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्यों में शामिल करने में भी सहायक होगा. recent visitors 32

देश भर के बैंक कर्मचारी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सड़क पर, 22 से 30 मार्च बैकिंग सेवाएं प्रभावित

बिलासपुर देश भर के बैंक कर्मचारी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सड़क पर उतरेंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले मार्च में दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया गया है। 24 और 25 मार्च को बैंक बंद रहेंगे। ठीक पहले 22 मार्च को चौथा शनिवार और 23 मार्च को रविवार के अवकाश को मिलाकर बैंक लगातार चार दिन बंद रह सकते हैं। ग्राहकों को इस बीच बैंकिंग कार्यों को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यूएफबीयू की ओर से कहा गया है कि सरकार और बैंक प्रबंधन ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 24 और 25 मार्च को हड़ताल अनिवार्य होगी। लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज शनिवार और रविवार अवकाश पड़ेगा। इन दो दिनों के बाद हड़ताल के कारण बैंक चार दिन तक बंद रहेंगे। इससे ग्राहकों को अपने जरूरी काम निपटाने में मुश्किल हो सकती है। बैंक कर्मचारी लंबे समय से कई मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं। ये मांगे उठा रहे हैं बैंककर्मी     बैंकिंग में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना।     सभी अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करना।     सभी कैडर में पर्याप्त भर्ती करना।     नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना। इसके अलावा बैंक कर्मचारी वित्तीय सेवा विभाग के हालिया परफॉर्मेंस समीक्षा से जुड़े निर्देश वापस लेने की मांग कर रहे हैं। पीनबी में 28 और 29 को मार्च को हड़ताल 28-29 मार्च को ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईपीएनबीओए) द्वारा पंजाब नेशनल बैंक की सभी शाखाओं में हड़ताल रहेगी। माना जा रहा है कि मैनेजमेंट बैंक अधिकारियों के हित के विरुद्ध न्यू ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने जा रहा है। हालांकि, पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के मर्जर के समय यह कहा गया था कि “बेस्ट ऑफ थ्री” की पालिसी लागू की जाएगी। अब ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव को अधिकारी धोखा बता रहे हैं। केवाईसी अपडेट के लिए बैंकों में लग रही कतार मार्च वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना होने के कारण बैंकिंग गतिविधियां तेज हो गई हैं। बैंकों द्वारा पिछले छह महीनों से ग्राहकों को आधार-पैन लिंक और केवाईसी अपडेट करने की सूचना दी जा रही थी। अधिकांश लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब जब बैंकों ने ट्रांजैक्शन पर रोक लगानी शुरू कर दी है, तो ग्राहकों में हड़कंप मच गया है। हड़बड़ी में लोग अपने खाते की प्रक्रिया पूरी करने के लिए बैंकों की ओर दौड़ लगा रहे हैं, जिससे बैंकों में भारी भीड़ उमड़ रही है। शहर के सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों में ग्राहकों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। बैंक कर्मचारी लगातार लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कह रहे हैं। मगर, तकनीकी समस्याओं के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। ग्राहकों का कहना है कि केवाईसी अपडेट के लिए और समय दिया जाना चाहिए, ताकि सभी लोग बिना परेशान हुए अपनी जानकारी अपडेट कर सकें। ग्राहकों को मिल रहे हैं एरर मैसेज साथ ही, बैंक प्रबंधन को तकनीकी समस्याओं को ठीक कर, अधिकृत कर्मचारियों की सहायता से यह प्रक्रिया पूरी करानी चाहिए। दरअसल, बैंकिंग वेबसाइट और मोबाइल ऐप ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इससे ग्राहकों को एरर मैसेज मिल रहे हैं। बुजुर्ग और तकनीकी जानकारी से दूर लोग मोबाइल ऐप या वेबसाइट से खुद प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। बैंककर्मी अत्यधिक भीड़ और अन्य कार्यों में व्यस्त होने के कारण सभी ग्राहकों की मदद नहीं कर पा रहे। ग्राहक अपने महत्वपूर्ण कार्यों को छोड़कर बैंकों में आ रहे हैं, लेकिन आनलाइन प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। हो सकते हैं यह समाधान     ऑनलाइन पोर्टल की खामियों को जल्द ठीक किया जाए।     केवाईसी अपडेट के लिए विशेष काउंटर बनाए जाएं।     बैंक ग्राहकों को हेल्पडेस्क और फोन सहायता दी जाए।     बुजुर्गों के लिए बैंकों में की जाए विशेष व्यवस्था।   recent visitors 35

भोपाल के जयप्रकाश चिकित्सालय में वेतन घोटाला: ठेकेदार और सुपरवाइजर की मिलीभगत से कर्मचारियों को नहीं मिल रहा वेतन

Salary scam in Bhopal’s Jaiprakash Hospital: Employees are not getting salary due to collusion between contractor and supervisor भोपाल (ब्यूरो रिपोर्ट)। जयप्रकाश चिकित्सालय में कर्मचारियों की वेतन में हो रही कालाबाजारी,ठेकेदार एवं सुपरवाइजर की मिली भगत से कर्मचारियों का दो महीने से वेतन नहीं मिल रहा जब कर्मचारियों की मांगों को लेकर,समाज सेविका मृणालिनी सेंगर जयप्रकाश चिकित्सालय पहुंची,और ठेकेदार से सवाल जवाब किया तो,सुपरवाइजर शिव प्रसाद त्रिपाठी का कहना है कि,सरकार हमें पैसे नहीं दे रही तो,हम कहां से पैसे दें,वहीं आपको बता दें कि,लगभग इस अस्पताल के अंदर 200 कर्मचारी हैं जिनकी दो से तीन माह तक की सैलरी नहीं मिली है,वही इस अस्पताल में विधवा महिला कर्मचारी है, जिसकी 7 माह से वेतन ही नहीं मिला,जिसकी शिकायत उन्होंने कई जगह की है, लेकिन इसके बावजूद भी समस्या का निराकरण नहीं हो सका,सिविल सर्जन राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि,मैं इस मामले में कुछ नहीं कह सकता,जबकि पूरा आरोप उन पर ही लग रहा है एक कर्मचारी ने सीएम हेल्प लाइन में शिकायत की,तो उस पर दबाव बनाकर शिकायत को वापस करवा दी गई recent visitors 82