Saturday, July 4, 2026 5:06 pm

वाराणसी के 50वें दौरे पर पीएम, भाजपा कार्यकर्ताओं नें स्वागत को लेकर की खास

वाराणसी  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अप्रैल को एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल करने जा रहे हैं. इस दिन वह अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के 50वें दौरे पर पहुंचेंगे, जो किसी भी प्रधानमंत्री के लिए एक अभूतपूर्व उपलब्धि मानी जा रही है. ये संयोग और भी खास हो जाता है क्योंकि पीएम मोदी अपने कार्यकाल के 11वें साल में11 अप्रैल को सुबह 11 बजे एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे. इसे बीजेपी ने एक ‘शुभ योग’ और ‘गौरव का क्षण’बताया है. काशी क्षेत्र अध्यक्ष दिलीप पटेल ने बताया कि पीएम मोदी 11 अप्रैल को वाराणसी आएंगे और अपने इस दौरे में 3884 करोड़ रुपये की 44 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. 50वें दौरे को खास बनाने की तैयारी, 50 हजार की भीड़ का लक्ष्य बीजेपी इस दौरे को ऐतिहासिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पार्टी ने पीएम मोदी की जनसभा में 50,000 लोगों को लाने का लक्ष्य रखा है. काशी क्षेत्र के बीजेपी अध्यक्ष दिलीप पटेल ने कहा कि यह दौरा बताता है कि प्रधानमंत्री मोदी को काशीवासियों से कितना गहरा लगाव और आत्मीय संबंध है. शहरभर को पार्टी के झंडोंऔर बैनरों झालरों से सजाया जा रहा है. पूरे जिले में 1000 से अधिक होर्डिंग्स लगाई जा चुकी हैं. इसके अलावा पार्टी कार्यकर्ता और आम जनता जुलूस, दोपहिया व चारपहिया वाहनों के काफिलों के साथ जनसभा स्थल पर पहुंचेंगे. पीएम के आगमन से पहले विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाया जा रहा है. पीएम मोदी 11 अप्रैल को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचेंगे साथ ही उन्होंने बताया कि पीएम मोदी इस बार शहर से बाहर मेहंदीगंज में जनसभा को संबोधित करेंगे. यहां उनके लगभग ढाई से तीन घंटे रुकने का कार्यक्रम है. पार्टी का दावा है कि जनसभा में 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचेंगे. इसके लिए मंडल और बूथ स्तर तक तैयारी की जा रही है. आसपास के 16 गांवों में कार्यकर्ता और विधायक लोगों से संपर्क कर रहे हैं. पीएम मोदी के स्वागत के लिए वाराणसी के चौराहों को सजाया जा रहा है. झंडे, कपड़े और ढोल-नगाड़ों से पीएम मोदी का भव्य स्वागत होगा. दिलीप पटेल ने बताया कि पीएम मोदी एयरपोर्ट से सीधे मेहंदीगंज जनसभा स्थल पहुंचेंगे. वहां से वापस एयरपोर्ट आकर दोपहर 12:30 बजे दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे. दुग्ध उत्पादकों को देंगे 106 करोड़ का बोनस मेंहदीगंज में जनसभा को संबोधित करने से पहले वह 3884.18 करोड़ की 44 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादकों को 106 करोड़ रुपये का बोनस भी देंगे। बुधवार को सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा नेताओं ने यह जानकारी दी। जनसभा में 50 हजार से ज्यादा लोगों के पहुंचने का अनुमान उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी का असर जनसभा पर नहीं पड़ेगा क्योंकि पीएम मोदी की सभा में लोग मौसम की परवाह नहीं करते. यह दौरा सिर्फ पीएम मोदी की हाजिरी नहीं है, बल्कि वाराणसी के विकास की नई सौगात भी है. 3884 करोड़ की 44 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे के दौरान 3884.18 करोड़ रुपये की 44 परियोजनाओं** का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. 19 परियोजनाएं (1629.13 करोड़ रुपये)का लोकार्पण. 25 परियोजनाएं (2255.05 करोड़ रुपये) का शिलान्यास. सबसे अहम है जल जीवन मिशन के अंतर्गत 345.12 करोड़ रुपये की 130 ग्रामीण पेयजल योजनाओं का उद्घाटन, जिससे हजारों गांवों को शुद्ध जल मिलेगा. इसके अलावा पीएम मोदी बनास डेयरी से जुड़े लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों को 106 करोड़ रुपये का बोनस भी ट्रांसफर करेंगे. ट्रैफिक की समस्या होगी कम नए फ्लाईओवर और टनल का शिलान्यास शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पीएम जिन परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे. बाबतपुर एयरपोर्ट के पास NH-31 पर अंडरपास टनल. भिखारीपुर तिराहा और मंडुवाडीह चौराहे पर फ्लाईओवर का निर्माण. इन योजनाओं से वाराणसी की जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है. recent visitors 43

भाजपा सरकार ने 190+ को किया सिस्टम से बाहर, दिल्ली में AAP नेताओं को नया झटका

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने आम आदमी पार्टी को एक और झटका दिया है। पिछले आप प्रशासन द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, समितियों और अकादमियों में की गई कम से कम 194 मनोनीत नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। इसे लेकर सेवा विभाग ने एक आदेश जारी किया है। 4 अप्रैल को जारी आदेश में कहा गया है कि कम से कम 22 संस्थानों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं। इनमें दिल्ली जल बोर्ड, पशु कल्याण बोर्ड, दिल्ली हज समिति, तीर्थयात्रा विकास समिति, उर्स समिति, हिंदी अकादमी, उर्दू अकादमी, साहित्य कला परिषद, पंजाबी अकादमी और संस्कृत अकादमी आदि शामिल हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इनमें से ज्यादातर नियुक्तियां राजनीतिक थीं – जिन्हें सरकार बदलने के बाद अक्सर पलट दिया जाता है। अधिकारी ने कहा, “इन पदों पर आसीन लोग- निर्वाचित विधायक और विषय विशेषज्ञ दोनों- नई सरकार को आने वाले प्रशासन के दृष्टिकोण और नीतियों को लागू करने में मदद करते हैं। पिछली सभी सरकारों ने अपनी पसंद के हिसाब से इन बोर्डों और संस्थानों में लोगों को नियुक्त किया। इनमें से कुछ पद विषय विशेषज्ञों के लिए हैं जैसे कि पशु कल्याण बोर्ड या वृक्ष प्राधिकरण के मामले में, लेकिन कई पद राजनेताओं के लिए हैं। उदाहरण के लिए, डीजेबी के वीसी और डीएएमबी के अध्यक्ष विधायक हैं। एक बार जब कोई सरकार सत्ता से हट जाती है, तो इनमें से कई नियुक्तियां भी निरर्थक हो जाती हैं।” बर्खास्त किए गए नियुक्तियों में वर्तमान और पूर्व विधायक शामिल हैं, और आदेश में संबंधित विभागों से इन निकायों के पुनर्गठन के लिए नए प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा गया है। उप सचिव (सेवाएं) भैरव दत्त द्वारा 4 अप्रैल को जारी आदेश में कहा गया है, "सक्षम प्राधिकारी नामित गैर-सरकारी पदाधिकारियों और गैर-सांविधिक और सांविधिक निकायों, प्राधिकरणों, बोर्डों, समितियों और अकादमियों के सदस्यों के कार्यकाल को तत्काल प्रभाव से खत्म किया जा रहा है। इसके अलावा, जीएनसीटीडी के सभी विभागों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनके प्रशासनिक नियंत्रण के तहत प्राधिकरणों या निकायों के संबंध में इसी तरह की कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाता है।" recent visitors 44

ट्रंप को चंदा देने वालों को लगा 1.8 ट्रिलियन डॉलर का घाटा, टैरिफ प्लान ने दुनिया के सभी देशों की टेंशन बढ़ा दी

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ प्लान ने दुनिया के सभी देशों की टेंशन बढ़ा दी है। अब खबरें हैं कि अमेरिका उद्योग जगत के दिग्गज भी चिंताओं से अछूते नहीं हैं। खास बात है कि टेस्ला के सीईओ एलन मस्क समेत ऐसे कई अरबपति हैं जो ट्रंप को अभियान या इनॉग्युरल फंड के नाम पर भारी चंदा दे चुके हैं, लेकिन साल की शुरुआत के साथ ही उन्हें लाखों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। इस लिस्ट में पहला नंबर ही मस्क का है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग, एप्पल के सीईओ टिम कुक, गूगल के सीईओ सुंदर पिचई, टेस्ला के मस्क और अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस की कंपनियों ने मिलकर करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान उठाया है। यह आंकड़ा साल की शुरुआत से लेकर अब तक का है। जानकारों का कहना है कि लॉन्ग टर्म रेसिप्रोकल टैरिफ और आर्थिक अनिश्चितता टेक जगत की कमाई को 25 फीसदी तक कम कर सकती हैं। सीएनएन ने यूबीएस से संडे रिपोर्ट के हवाले से यह बात कही है। किसे हुआ कितना नुकसान एलन मस्क: रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने कम से कम 290 मिलियन डॉलर ट्रंप के समर्थन में डोनेट किए थे। ब्लूमबर्ग इंडेक्स के अनुसार, साल 2025 की शुरुआत से लेकर अब तक उनकी नेट वर्थ में 143 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। इसकी बड़ी वजह टेस्ला के शेयर में गिरावट है। खास बात है कि ट्रंप प्रशासन में मस्क का कार्यकाल खासा विवादित रहा है। साल की शुरुआत से ही टेस्ला के शेयर्स में 28 प्रतिशत की गिरावट आई है और बाजार पूंजीकरण 376.6 बिलियन डॉलर तक कम हो गया है। आंकड़े 9 अप्रैल को बाजार बंद होने तक के हैं। मार्क जकरबर्ग: ट्रंप के इनॉग्युरल फंड में मेटा ने 1 मिलियन डॉलर के दान का वादा किया था। इसके अलावा जकरबर्ग और ट्रंप की कई मौकों पर मुलाकात भी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 की शुरुआत से जकरबर्ग की नेटवर्त में 26.5 बिलियन डॉलर की गिरावट हुई है। जबकि, मेटा के शेयर करीब 2.25 फीसदी गिर गए हैं। जेफ बेजोस: बेजोस ने ट्रंप की जीत पर खुशी जाहिर की थी और अमेजन ने इनॉग्युरल फंड में 1 मिलियन डॉलर का अनुदान दिया था। इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक बेजोस की नेट वर्थ 47.2 बिलियन डॉलर गिर गई है। वहीं, अमेजन के शेयर 13 फीसदी नीचे गिर गए हैं। सुंदर पिचई: गूगल ने ट्रंप के इनॉग्युरल फंड में 1 मिलियन डॉलर डोनेट किए थे और कार्यक्रम को यूट्यूब पर लाइव प्रसारित किया था। इसके अलावा पिचई उन CEOs की सूची में शामिल हैं, जो चुनाव के बाद मार-ए-लागो गए थे। गूगल का स्टॉक 16.2 फीसदी गिर गया और मूल्यांकन 386.7 बिलियन डॉलर कम हो गया है। टिम कुक: ट्रंप की इनॉग्युरल कमेटी में एप्पल के सीईओ कुक ने व्यक्तिगत रूप से 1 मिलियन डॉलर जमा किए थे। इसके अलावा अमेरिका में ही अगले 4 सालों में 500 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया था। हालांकि, अब टैरिफ वॉर का बड़ा असर एप्पल पर ही पड़ने के आसार हैं। कंपनी का स्टॉक साल की शुरुआत से अब तक 18.5 फीसदी गिर चुका है और मार्केट वैल्यू में 684 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। recent visitors 24

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने परिवार के साथ नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन किए

 भोपाल शिवराज सिंह चौहान ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मुलाकात भी की। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच मजबूत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। शिवराज सिंह चौहान ने खुशी जताई कि नेपाल में आयोजित बिम्सटेक सम्मेलन खाद्य सुरक्षा, कृषि समृद्धि और किसान सशक्तीकरण की दिशा में वैश्विक प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनकर उभरा है। शिवराज सिंह काठमांडू में बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (बिम्सटेक) मंत्रिस्तरीय बैठक (तीसरी बीएएमएम) में भाग लेने के लिए नेपाल पहुंचे हैं। 'कृषि और खाद्य सुरक्षा' बिम्सटेक के सहयोग के मुख्य क्षेत्रों में से एक है। यह क्षेत्रीय कृषि सहयोग को आकार देने वाली सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था BAMM की तीसरी बैठक थी। पहली BAMM 12 जुलाई 2019 को म्यांमार में हुई, उसके बाद दूसरी BAMM 10 नवंबर 2022 को भारत में हुई। तीसरे BAMM के दौरान, कृषि मंत्रियों ने मत्स्य पालन और पशुधन सहयोग सहित BIMSTEC कृषि क्षेत्र में अधिक गति लाने के तरीकों और साधनों पर विचार-विमर्श किया। चौहान ने  नेपाल के कृषि और पशुधन विकास मंत्री के साथ बैठक भी की। बैठक के दौरान, उन्होंने अपने समकक्ष को तीसरे BAMM की सफलतापूर्वक मेजबानी के लिए बधाई दी। दोनों नेताओं ने कृषि में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। मंत्रियों ने कृषि के क्षेत्र में विभिन्न द्विपक्षीय पहलों और विकासात्मक परियोजनाओं में हुई प्रगति की समीक्षा की और आगे के सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। recent visitors 26

सरकार ने पासपोर्ट में जीवनसाथी का नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को किया अब बेहद आसान, सरकार ने दी राहत

नई दिल्ली पासपोर्ट में जीवनसाथी का नाम जुड़वाने की प्रक्रिया अब बेहद आसान हो गई है। अब तक नाम जुड़वाने के लिए शादी के रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती थी। आमतौर पर भारत में परंपरागत शादियां करने वाले लोग पंजीकरण नहीं कराते हैं। ऐसे में पासपोर्ट में नाम जुड़वाने के लिए उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब सरकार ने इस प्रक्रिया को आसान कर दिया है। अब बिना मैरिज सर्टिफिकेट के ही जीवनसाथी का नाम आप पासपोर्ट में जुड़वा सकेंगे। इसके लिए आपको बस दोनों का एक फोटो शेयर करना होगा और उस पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर करने होंगे। इस तरह शादी की स्वप्रमाणित तस्वीर को ही दस्तावेज माना जाएगा और उसके आधार पर पासपोर्ट में जीवनसाथी का नाम जोड़ दिया जाएगा। इसके लिए विदेश मंत्रालय की तरफ से Annexure J का विकल्प दिया गया है। अब आप एनेक्सर जे पर जाकर शादी की अपनी तस्वीर या फिर कोई अन्य जॉइंट फोटो दोनों के साथ के अपलोड कर देंगे। इसे ही प्रमाण पत्र के तौर पर मान लिया जाएगा। आमतौर पर शादियों का पंजीकरण कराना एक जटिल प्रक्रिया है और लोग इससे बचने के लिए सालों तक इसे लटकाए रहते हैं। फिर कभी किसी नौकरी में ट्रांसफर या फिर पासपोर्ट आदि के लिए जरूरत होती है तो उन्हें परेशानी का सामना करना होता है। अब पासपोर्ट में पति या पत्नी का नाम जुड़वाने में आने वाली परेशानी को तो विदेश मंत्रालय ने पूरी तरह से दूर कर दिया है। दरअसल महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में शादी का रजिस्ट्रेशन आसानी से हो जाता है और लोग विवाह के तुरंत बाद ही यह प्रक्रिया करा लेते हैं। लेकिन यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे कई उत्तर भारत के राज्यों में ऐसी स्थिति नहीं है। यहां आमतौर पर लोग शादियों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराते और जरूरत के वक्त उन पर दस्तावेज नहीं मिल पाते। ऐसे ही मामलों को देखते हुए विकल्प के तौर पर विदेश मंत्रालय ने जॉइंट फोटो डिक्लेरेशन की सुविधा प्रदान की है। इसके तहत पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वालों को अपने नाम बताने होंगे। इसके बाद अपने पति या पत्नी का नाम डालना होगा। फिर एनेक्सर जे पर जाकर जॉइंट फोटो को अपलोड करना होगा और वहां दोनों को साइन भी करने होंगे। यहां बताना होगा कि वे मैरिड कपल के तौर पर साथ हैं। इसके अलावा आवेदक को यह बताना होगा कि उसके पति या पत्नी का नाम शामिल करते हुए ही पासपोर्ट जारी किया जाए। एनेक्सर जे में जो विकल्प दिया गया है, उसके तहत जॉइंट फोटोग्राफ के साथ साइन करने होंगे। इसके अलावा अपना स्थान और साइन करने की तारीख भी लिखनी होगी। इसके अलावा अपने नाम, आधार कांड नंबर, वोट आईडी नंबर और पासपोर्ट नंबर आदि का भी जिक्र करना होगा। सरकार का मानना है कि यदि दोनों के दस्तावेज सही हों और उनके पास फोटो हो तो फिर सेल्ट अटेस्टेड कराने में कोई दिक्कत नहीं है। इससे पूरी वैधता रहेगी और लोगों को जटिलता से भी बचाय़ा जा सकेगा। recent visitors 34

सोने की कीमतों में एक बार फिर भारी उछाल, सोने के दाम में लगभग ₹3,000 बड़े दाम

मुंबई सोने की कीमतों में एक बार फिर भारी उछाल देखा गया है, साथ ही चांदी की कीमत में भी तगड़ा इज़ाफा हुआ है। 10 अप्रैल, 2025 को सोने के दाम में लगभग ₹3,000 का उछाल आया, और चांदी की कीमत भी बढ़ी। यह बढ़ोतरी अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के कारण हुई है, जिसने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है। क्या कारण है इस बढ़ोतरी का? सोने की कीमतों में यह अचानक उछाल अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध के कारण आया है। चीन ने अमेरिकी आयात पर 84% टैरिफ लगा दिया है, जिससे अमेरिका ने चीनी वस्त्रों पर 125% टैरिफ बढ़ा दिया है। इस तनाव के बढ़ने से निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का रुख कर रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों में उछाल आया है। इससे पहले सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही थी, विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण। लेकिन इन अनुमानित गिरावटों को सोने ने नकारा, और अब इसकी कीमत फिर से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-चीन के बीच तनाव लंबे समय तक जारी रहने की संभावना है, जिससे सोने की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। सोने और चांदी की कीमतें 10 अप्रैल 2025 को: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम होने की संभावना नहीं दिख रही है, और ऐसे में सोने में निवेश बढ़ सकता है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं। हालांकि, गोल्ड में कुछ समय के लिए गिरावट आ सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसमें नरमी की उम्मीद नहीं है।   कैसे तय होती हैं कीमतें? सोने की कीमतें वैश्विक स्तर पर निर्धारित होती हैं, और लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) द्वारा प्रकाशित सोने की कीमतें विश्वभर में एक बेंचमार्क के रूप में काम करती हैं। भारत में, भारतीय बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) आयात शुल्क और स्थानीय करों को जोड़कर सोने की कीमत तय करता है। यह बढ़ती सोने और चांदी की कीमतें यह दर्शाती हैं कि वैश्विक व्यापारिक गतिविधियाँ, जैसे व्यापार युद्ध, सीधे तौर पर इन वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित करती हैं, जिससे निवेशकों के लिए सोना एक महत्वपूर्ण सुरक्षित निवेश विकल्प बन जाता है।   recent visitors 202

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं की खरीदी 5 मई तक

Madhya Pradesh government to purchase wheat till May 5 भोपाल ,ब्यूरो रिपोर्ट ! मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा सरकारी गेहूं की खरीदी 15 मार्च से शुरू हो गई है,जो राजधानी के कई जिलों में खरीदी केंद्र खोले गए हैं,जबकि कुछ जिलों में जल्द ही खरीदी शुरू हो जाएगी, भोपाल में 60 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, सभी उपार्जन केंद्रों में गेहूं की खरीदी 15 मार्च से 5 मई तक की जाएगी,सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP दो हज़ार चार सौ पच्चीस रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है,इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार 175 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दे रही है,इस तरह किसानों को कुल 2600 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा लेकिन खुले बाजार में गेहूं का भाव 2800 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है,यही कारण है कि,सरकारी केंद्रों पर गेहूं की आवक कम हो रही है,किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिल रहे हैं, वहीं हम आपको बतादे की,राजधानी स्थित अमझरा पंचायत में उपार्जन केंद्र में भी गेहूं की खरीदी चल रही है,वहीं अमझरा पंचायत के सहायक सचिव राजू कुशवाहा ने हमें बताया कि,हमारी पंचायत में किसानों की सहूलियत को देखते हुए,दो उपार्जन केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिसमें मध्य प्रदेश शासन के दिए आदेश अनुसार किसानों से खरीदारी की जा रही है सरकार द्वारा बनाए गए,पोर्टल पर किसान अपने अनुसार दिन समय निश्चित कर उपार्जन केंद्र पर आते हैं,और आसानी से अपनी फसल बेचते हैं,जिससे उनका समय भी बचता है,वहीं उन्होंने कृषि मंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि,मध्य प्रदेश शासन कि,इस पहल से किसानों के चेहरों पर खुशहाली दिख रही है,क्योंकि कम समय पर अपनी फसल को बेचते हैं,और समय पर किसानों फसल की कीमत भी मिल जाती है recent visitors 72