‘रोज 100 से 300 रुपये की भीख के बदले मिलता है सिर्फ खाना’, बच्चे का वीडियो वायरल

‘Gets only food in exchange for ₹100–₹300 in daily alms’ – video of child from Gwalior goes viral. ग्वालियर। बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के अभियान की पोल खोलता एक वीडियो सोमवार को वायरल हुआ। बैजाताल पर बैठे एक बच्चे से वीडियो में युवक बात कर रहा है जिसमें वह बता रहा है कि रोज 100 से 300 रुपये तक भीख मिलती है जिसे मुखिया को दे देता है और बदले में सिर्फ खाना मिलता है। बच्चे के ऐसे और भी कई साथी है, उसने खुद को फूलबाग पर रहना बताया। इस वीडियो से प्रशासन से लेकर बाल भिक्षावृत्ति रोकने वाले विभागों के अभियान पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पहले इसको लेकर तिराहों व सिग्नलों पर भीख मांगते बच्चों को रेस्क्यू करने का अभियान काफी चला था। ग्वालियर जिले में बाल भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाया था जिसमें इस अभियान में महिला बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, विशेष किशोर पुलिस इकाई, नेहरू युवा केंद्र और सेंटर फॉर डेवलपमेंट के सदस्य सक्रिय रूप से शामिल थे। इसके बाद बीच-बीच में चलकर यह अभियान अब सक्रिय नहीं दिखता है। वर्तमान में हकीकत यह है कि मंदिरों से लेकर चौराहों व तिराहों के साथ सिग्नलों पर बाल भिक्षावृत्ति आसानी से देखी जा सकती है लेकिन कार्रवाई नहीं होती है। इधर, मालगाड़ी की चपेट में आने से 25 वर्षीय युवक की मौतबिरलानगर और रायरू रेलवे स्टेशन के बीच सोमवार सुबह मालगाड़ी की चपेट में आने से 25 वर्षीय युवक की मौत हो गई। रेलवे ट्रैक के पास युवक का शव पड़ा होने की सूचना मिलने पर रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची। पंचनामा की कार्रवाई के बाद शव को एंबुलेंस से ले जाया गया। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह 6:55 बजे झांसी मंडल के नियंत्रण कक्ष से सूचना मिली कि बिरलानगर-रायरू के बीच किलोमीटर नंबर 1228/21 पर डाउन मालगाड़ी संख्या 156 से दुर्घटना हुई है। सूचना पर बिरलानगर में तैनात रेलवे सुरक्षा बल के आरक्षक धर्मवीर सिंह और नरपाल घटनास्थल पर पहुंचे। वहां रेलवे ट्रैक के पास एक युवक का शव पड़ा मिला। मौके पर बिरलानगर स्टेशन के पाइंट्समैन सुनील कुमार भी मौजूद थे। कुछ देर बाद जीआरपी ग्वालियर की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। मृतक की पहचान दीपक चौरसिया, उम्र 25 वर्ष के रूप में हुई। मौके पर पहुंचे उसके चचेरे भाई शिवदत्त ने उसकी पहचान की। हालांकि, घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। मृतक के पास तलाशी के दौरान यात्रा टिकट, पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य सामान नहीं मिला। पंचनामा की कार्रवाई के बाद जीआरपी ने सुबह करीब 10:30 बजे शव को आगे की कार्रवाई के लिए भिजवा दिया। पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रही है। recent visitors 3

तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे: फिर हिरासत में सौरव दास-रांका; दिपके बोले- प्रतिरोध को दबा नहीं सकते

Arrived at Jantar Mantar with the Tricolour: Sourav Das and Ranka detained again; Dipke says resistance cannot be suppressed. दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार सुबह तिरंगा लेकर पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सीजेपी की ओर से साझा की गई पोस्ट के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य समेत संगठन के अन्य सदस्य शामिल हैं। दिपके ने क्या-क्या कहा?सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक देशभर में प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कार्रवाई की है। दिपके ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों से कहा गया कि वे इस बार मतदान नहीं कर सकते तो अगली बार कर लेंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी यही कहेगा कि वह इस बार चुनाव न लड़ें और अगली बार लड़ लें? दिपके ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को बड़ा और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विपक्ष समेत पूरे देश को ऐसे प्रदर्शनों के लिए एकजुट होना चाहिए। पहले विमान से हिरासत, फिर रिहाई और अब जंतर-मंतर पर कार्रवाईकॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को दिल्ली पुलिस ने पहली बार 10 अक्तूबर को हिरासत में लिया था। पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में पहुंचने की कोशिश में थे। पुलिस ने तीनों को दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से हिरासत में ले लिया। सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना चाहती थी। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताएं हुई हैं। इसके बाद 11 अक्तूबर को तीनों नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया। प्रदर्शन की अनुमति लेने थाने पहुंचे थे रांका-दासरिहाई के बाद सीजेपी ने प्रदर्शन से पीछे हटने के बजाय आंदोलन जारी रखने का एलान किया। 12 अक्तूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे। उन्होंने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए 24 घंटे के भीतर तारीख और समय तय करने की मांग की। उनका कहना था कि अगर पुलिस तारीख नहीं देती है, तो पार्टी खुद प्रदर्शन का एलान करेगी। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर रोड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया। पुलिस ने प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान जैसे वैकल्पिक स्थान बताए। सीजेपी ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने की मांग जारी रखी। इसी घटनाक्रम के बीच 13 अक्तूबर की सुबह सीजेपी के नेता और कार्यकर्ता तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बार-बार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की क्यों हो रही है कोशिश?इसकी मुख्य वजह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठे सवाल हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कई छात्र संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं। प्रदर्शनकारी इसे मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। इसी विरोध के तहत 10 अक्तूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एलान किया गया था। recent visitors 3

कूनो में अब तक 28 चीतों की मौत, इस साल 7 ने गंवाई जान; आशा के 8 माह के शावक की भी गई जान

28 cheetahs have died in Kuno so far, with 7 losing their lives this year; Asha’s 8-month-old cub has also died. मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला जारी है। अक्टूबर 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के बाद अब तक 28 चीतों की मौत हो चुकी है। इनमें वयस्क चीते और भारत में जन्मे शावक दोनों शामिल हैं। इस साल अब तक सात चीतों की मौत हुई है। ताजा मामला नामीबियाई मादा चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत का है। शावक की मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। 2023 में सबसे ज्यादा 9 चीतों की मौतसरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद शुरुआती तीन वर्षों में भी कई चीतों की मौत हुई। सालवार आंकड़े के अनुसार वर्ष 2023 में 6 वयस्क चीते और तीन शवक कुल 9 मौतें। 2024 में 2 वयस्क और चार शावक यानी कुल 6 मौतें। 2025 में एक वयस्क और पांच शावक यानी कुल 6 मौतें। 2026 में 12 अक्टूबर तक दो वयस्क, पांच शावक कुल सात चीतों की मौत हुई। इस प्रकार अब तक 11 वयश्क, 17 शावक समेत कुल 28 चीतों की मौत हो चुकी हैं। इस साल इन घटनाओं में गई जानइस वर्ष सात चीतों की जान गई। इसमें मई 2026 में जंगल में जन्मे चार शावक मृत मिले थे। उनकी मौत के पीछे किसी दूसरे वन्यजीव के हमले की आशंका जताई गई थी। जून 2026 में भारतीय मूल की मादा चीता KGP-11 की मोरेना जिले में चोटों के कारण मौत हुई। सितंबर 2026 में नामीबियाई चीता गौरव की मौत हुई। उसे कमजोर और डिहाइड्रेशन की स्थिति में पाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, उसे पहले से एक गंभीर बीमारी थी। वहीं, 12 अक्टूबर 2026 को आशा के आठ महीने के पांच शावकों में से एक मृत मिला। उसकी मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। अब भारत में कितने चीते बचे हैं?5 अक्टूबर 2026 को कूनो में पांच शावकों के जन्म के बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई थी। इसके बाद आशा के एक शावक की मौत के साथ यह संख्या घटकर 59 रह गई है। इनमें कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में मौजूद चीते शामिल हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी उठा सवालचीतों की मौत के बीच उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा भी सामने आया है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद से मृत चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी थी। हाल ही में मध्यप्रदेश वन विभाग ने सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट का हवाला दिया। इससे रिपोर्टों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। recent visitors 8