बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी लैब का केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने किया शिलान्यास

Union Home Minister Shah laid the foundation stone for the BSL-4 Bio-Containment Facility Lab.  गांधी नगर। पुणे के बाद देश की सबसे बड़ी लैब यानि गुजरात बायोटेक्नॉलजी रिसर्च सेंटर की बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी गांधीनगर में बनेगी। जहां संक्रामक व घातक वासरस पर शोध होगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को इसका गांधी नगर में शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उपस्थित थे। केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि इस क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं ने दिखाया है कि हमारा युवा जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर है। शाह ने कहा कि पुणे की वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के बाद यह भारत की दूसरी उच्च स्तरीय लैब होगी। एक विशाल कॉम्प्लेक्स में 362 करोड़ रुपये की लागत से 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में देश की जैविक सुरक्षा का एक मजबूत किला बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम दुनिया में हो रहे अत्याधुनिक रिसर्च से कई साल तक पिछड़े हुए थे, लेकिन बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी से बायो-टेक्नॉलजी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को नए मौके मिलेंगे। यह सुविधा वैज्ञानिकों को अत्यंत संक्रामक और घातक वायरस पर एक सुरक्षित वातावरण में शोध करने का प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगी। मंत्री शाह ने कहा कि इस बीएसएल लैब्स में पशुओं से होकर मानव तक पहुंचने वाले रोगों का भी अध्ययन की विश्वस्तरीय व्यवस्था होगी। शाह ने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार 60 से 70 प्रतिशत बीमारियां पशुओं से होकर इंसान तक पहुंचती हैं, इसलिए भारत मानव और पशु दोनों की सुरक्षा पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब हमारे वैज्ञानिकों को खतरनाक वायरस के सैंपल जांचने के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  शाह ने कहा कि बीते 11 साल में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। 2014 में भारत की बायो इकोनॉमी 10 बिलियन डॉलर की थी और 2024 का वित्त वर्ष समाप्त होने पर यह 166 बिलियन डॉलर तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा कि 10 साल के अंदर 17 गुना विकास हुआ। उन्होंने कहा कि 2014 में बायोटेक क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या 500 से कम थी, जो 2025 में बढ़कर 10 हजार से अधिक हो चुकी है। बायो इंक्यूबेटर्स वर्ष 2014 में 6 थे, जो 2025 में 95 हो चुके हैं। हमारे पास इंक्यूबेशन स्पेस 60 हजार वर्ग फुट था, जो 15 गुना बढ़कर आज 9 लाख वर्ग फुट हो गया है। बाजार में केवल यो उत्पाद थे, अब 800 से ज्यादा प्रोडक्ट्स बाजार में लॉन्च किया जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में इस क्षेत्र में भारत के 125 पेटेंट फाइल हुए थे और 2025 में हम 1300 तक पहुंच चुके हैं। प्राइवेट फंडिंग पहले 10 करोड़ रुपए थी, अब इस क्षेत्र में 7 हजार करोड़ का निवेश हो चुका है। शाह ने कहा कि हमने बायोटेक पॉलिसी के तहत 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश और 1 लाख रोजगार का लक्ष्य रखा है। recent visitors 86

मध्यप्रदेश में दलित-आदिवासी मुख्यमंत्री बने तो मुझे खुशी होगी: दिग्विजय सिंह

मध्यप्रदेश में दलित-आदिवासी मुख्यमंत्री बने तो मुझे खुशी होगी: दिग्विजय सिंह

I will be happy if a Dalit-tribal becomes the Chief Minister of Madhya Pradesh: Digvijay Singh भोपाल। साल 2002 में दिग्विजय सरकार में लागू किए गए भोपाल डिक्लेरेशन के 25 साल पूरे होने से पहले राजधानी भोपाल में आयोजित भोपाल डिक्लेरेशन-2 की ड्राफ्टिंग बैठक और उसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलित एजेंडे को लेकर खुली बहस देखने को मिली।एक ओर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने 2002 के दलित एजेंडे के अधूरा रह जाने के लिए अफसरशाही को जिम्मेदार ठहराया। वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दलित-आदिवासी नेतृत्व को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया।प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि अगर उनकी सरकार बनती है तो क्या दलित या आदिवासी मुख्यमंत्री बनेगा, तो उन्होंने कहा—कांग्रेस पार्टी ने पहले भी आदिवासी समाज के राजा नरेशचंद्र सिंह और अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया है।अगर अनुसूचित जाति या जनजाति का मुख्यमंत्री बनता है तो मुझे खुशी होगी। उन्होंने कहा कि नेतृत्व में सामाजिक प्रतिनिधित्व लोकतंत्र को मजबूत करता है।सज्जन वर्मा बोले- एजेंडा पवित्र था, लेकिन अफसरों ने फेल किया : पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा कि 2002 में जब भोपाल डिक्लेरेशन (दलित एजेंडा) लागू हुआ, तब वे दिग्विजय सिंह की कैबिनेट में मंत्री थे।उन्होंने कहा- दलित एजेंडा पवित्र मन से लाया गया था, लेकिन वह अधकचरा रह गया। अधिकारियों, खासकर तहसीलदारों और पटवारियों ने उसे फेल करने में बड़ी भूमिका निभाई।सज्जन वर्मा के मुताबिक, गरीब दलित-आदिवासी परिवार जहां बसे थे, वहीं जमीन देने की शुरूआत की गई थी, लेकिन कई जगह पैसे लेकर पट्टे बनाए गए और आज भी कई परिवारों को मालिकाना हक नहीं मिल पाया। recent visitors 82

हिंदू सम्मेलन में शामिल होंगे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

Peethadheeshwar Dhirendra Krishna Shastri of Bageshwar Dham will participate in the Hindu conference. लोकेंद्र सिंह बुंदेला /बड़ामलहरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 14 जनवरी को नगर में विशाल हिंदू सम्मेलन होगा। इसमें मुख्य रूप से बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दोपहर 2 बजे शामिल होंगे। वे यहां हिंदू सम्मेलन को संबोधित भी करेंगे। आयोजन समिति ने नगर परिषद के पीछे खेल मैदान में आयोजित होने वाले हिंदू सम्मेलन में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय में हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति पदाधिकारियों ने बताया कि हिंदू नगर में विशाल हिंदू सम्मेलन होगा। जिसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। नगर में विशेष सज्जा की जा रही है। इस सम्मेलन में नगर सहित क्षेत्र के सभी हिंदू परिवार शामिल हों, इसके लिए घर-घर अक्षत बांट कर आमंत्रित किया जा रहा है। पदाधिकारियों के अनुसार, बड़ामलहरा खंड में 13 मंडल हैं। सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरण और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से मंडल के सभी गांवों में आयोजन किए जा रहे हैं। बता दें, विजयादशमी पर पथ संचलन निकाला गया था। गृह संपर्क अभियान के तहत हिंदू परिवार में पत्रक, भारत माता के स्टिकर व पंच परिवर्तन पत्रक वितरित किए गए। युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता में सम्मेलन संयोजक मुकेश अग्रवाल, सह संयोजन रामगोपाल यादव, मातृ शक्ति सह संयोजिका मालती जैन, खंड संघचालक नंदकिशोर शुक्ला, अखिलेश गुप्ता, अवध विश्वकर्मा, दशरथ तिवारी सहित बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी शामिल हुए। recent visitors 73

अनुशासन, एकता एवं भाईचारे का माध्यम है खेल: भूपेंद्र सिंह

अनुशासन, एकता एवं भाईचारे का माध्यम है खेल: भूपेंद्र सिंह

Sports is a medium of discipline, unity and brotherhood: Bhupendra Singh लोकेंद्र सिंह बुंदेला /बड़ामलहरा। ग्राम पंचायत छायन में रविवार को स्वर्गीय शंकर सिंह की पुण्य स्मृति में क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन बड़े ही उत्साह और खेल भावना के साथ किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के युवाओं एवं खेल प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला। टूर्नामेंट्र का शुभारंभ ग्राम पंचायत कजरा के सरपंच भूपेंद्र सिंह परमार ने फीता काटकर किया। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और खेल को अनुशासन, एकता एवं भाईचारे का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल में इस प्रकार के आयोजनों से युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ती है तथा नशा और अन्य कुरीतियों से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है। स्व. शंकर सिंह के सामाजिक योगदान को स्मरण करते हुए आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह टूनार्मेंट प्रतिवर्ष आयोजित किया जाएगा, ताकि उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाया जा सके। टूर्नामेंट में आसपास के गांवों की कई टीमों ने भाग लिया और रोमांचक मुकाबले खेले गए। पूरे कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से किया गया तथा खिलाड़ियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। ग्रामीणों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया।इस अवसर पर रमेश शुक्ला, मोहित राय, गोविंद सेन, हरिसिंह लोधी, राममिलन लोधी सहित जनप्रतिनिधि, ग्रामवासी, आयोजन समिति के सदस्य व खेल प्रेमी उपस्थित रहे। recent visitors 78

योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है: बालमकुंद राजपूत

योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है: बालमकुंद राजपूत

Yoga is an invaluable heritage of Indian culture: Balmkund Rajput बड़ामलहरा /लोकेंद्र सिंह बुंदेला । सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल बड़ामलहरा में सोमवार को सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, आचार्यगण एवं विद्यालय परिवार ने उत्साहपूर्वक एक साथ सूर्य नमस्कार किया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में योग, अनुशासन एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष बालमकुंद राजपूत ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। जो तन-मन को स्वस्थ रखने के साथ आत्मविश्वास और एकाग्रता भी बढ़ाता है। सूर्य नमस्कार से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और मानसिक संतुलन बना रहता है। इस अवसर पर राजपूत ने विद्यालय को एक कंप्यूटर सिस्टम भेंट किया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में कंप्यूटर शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस सहयोग से विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने में सहायता मिलेगी और उनकी शैक्षणिक क्षमता में वृद्धि होगी।वहीं आचार्यगणों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति की भावना का विकास होता है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जनपद पंचायत अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह (राघव राजा), पूर्व छात्र मयंक डेवड़िया, सोमू असाटी सहित स्कूल स्टाप एवं बड़ी संख्या छात्र-छात्राएं मौजूद थीं । recent visitors 81

बुरहानपुर में किसानों का आदिमानव भेष में आंदोलन… नग्नावस्था में केले के पत्ते लपेटकर जताया विरोध

Farmers in Burhanpur protest disguised as primitive humans बुरहानपुर/भोपाल। जिले के खकनार आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के पांगरी गांव में मध्यम सिंचाई पांगरी बांध परियोजना का विरोध थमने का नाम नही ले रहा। प्रभावित किसानों ने आदिमानव के भेष में आंदोलन किया। उचित मुआवजे की मांग को लेकर बीते 3 साल से किसानों ने मोर्चा खोल रखा है। सरकार का ध्यान आकर्षित करने के मकसद से किसानों ने विरोध के कई तरीके अपनाए। किसानो का आरोप है कि लगातार प्रदर्शन के बावजूद अब तक सरकार ने सुध नहीं ली। आक्रोशित प्रभावित किसानों ने इस बार आदिमानव बनकर अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। किसानों ने निर्वस्त्र होकर शरीर पर केले के पत्ते लपेटे, सिर पर भी पत्तों की टोपी पहनी और फिर नारेबाजी कर सरकार को जगाने का प्रयास किया। किसानों का कहना है कि पिछले 3 वर्षों से दोगुने मुआवजा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सुनवाई नहीं होने पर अब ये तरीका अपनाना पड़ा है। आदिमानव आंदोलन का तरीका अपनाकर किसानों ने बताया कि सरकार उन्हें इसी रूप में लाने की जिद पर है। किसानों ने कहा कि सरकार न्यूनतम मुआवजा देकर उन्हें आदिमानव जैसी स्थिति में धकेल रही है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 राइट टू लाइफ विद डिग्निटी और संविधान के अनुच्छेद 300A का हवाला देते हुए न्यायसंगत मुआवजे की मांग रखी। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट नहीं दें पा रहे सही जवाब किसान डॉ. रवि कुमार पटेल ने बताया “भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में दोगुना मुआवजा का अधिकार है, जो उन्हें मिलना चाहिए। किसान नंदू पटेल ने बताया “सरकार चाहती है कि किसान आदिमानव हो जाएं, किसानों की भूमि अधिग्रहण की गई है। लेकिन सरकार न्यूनतम मुआवजा दे रही है, अगर सरकार का यही रवैया रहा तो विवश होकर उग्र आंदोलन करना होगा। वहीं, इस मामले में सवाल पूछने पर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कन्नी काट ली। उन्होंने अन्य बांध परियोजना के लाभ बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। जीतू पटवारी ने बोला मोहन यादव सरकार पर हमला बुरहानपुर में किसानों के प्रदर्शन पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा “एक ओर किसान अर्धनग्न होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी ओर मोहन यादव सरकार इवेंटबाजी में व्यस्त है। इन्हीं किसानों से देश की थाली भरती है। किसानों को इस तरह प्रताड़ित करना निंदनीय है। सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे और किसानों को उनके हक का पूरा मुआवजा दे। बीजेपी सरकार की केवल बातें बड़ी-बड़ी बुरहानपुर के राजीव गांधी पंचायती राज संगठन जिलाध्यक्ष हेमंत पाटिल ने कहा “भाजपा सरकार का शुरू से सिद्धांत रहा है, बातें बड़ी-बड़ी करती हैं। जमीन पर हकीकत कुछ ओर रहती है। पांगरी बांध परियोजना का मामला चल रहा है। प्रभावित किसान बीते 3 वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे है, लेकिन सरकार कुम्भकर्णी नींद में सो रही है। किसानों को 4 गुना तक मिलना चाहिए मुआवजा भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर जबलपुर के भारतीय किसान संघ के नेता राघवेंद्र पटेल का कहना है “2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में सरकार ने जमीन के दाम का 4 गुना तक मुआवजा देने की बात कही है, लेकिन मध्य प्रदेश केवल दो गुना मुआवजा दे रहा है।सरकार को चाहिए कि गुजरात की ही तरह विकास परियोजनाओं में जिन किसानों की जमीन जा रही है, उन्हें 4 गुना तक मुआवजा दिया जाए। जमीन के बदले जमीन दे सरकार भारत कृषक समाज से जुड़े हुए किसान नेता इंदु पटेल का कहना है “सरकार को ऐसी नीति बननी चाहिए कि किसान की जमीन यदि किसी परियोजना में जा रही है तो उसे आधा मुआवजा और आधी जमीन कम से कम वापस होनी चाहिए, क्योंकि यदि किसी किसान की पूरी जमीन परियोजना में चली जाती है वह बेरोजगार हो जाता है। सरकार को किसानों को जमीन के बदले जमीन देना चाहिए। recent visitors 98

श्रद्धांजलि सभा में गौ-सेवा की दिखी अनूठी मिसाल ।

A unique example of cow service was seen in the condolence meeting. हरिप्रसाद गोहे आमला। देवगांव (काजली): ग्राम पंचायत देवगांव में स्व. तुलसी बाई खातरकर की श्रद्धांजलि सभा एक प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुई। इस दुखद अवसर पर भी परिवार ने समाज सेवा और जीव दया का उदाहरण प्रस्तुत किया। गौशाला परिवार के विशेष आग्रह पर क्षेत्र के प्रमुख गौ-सेवक—मनोज विश्वकर्मा, देवेंद्र राजपूत, बाला जैन, और यशवंत चढ़ोकर, कार्यक्रम में उपस्थित हुए। सभी ने स्व. तुलसी बाई खातरकर के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर स्व. खातरकर की स्मृति में अनिल खातरकर, विजय खातरकर और सुरेश खातरकर ने गौशाला समिति को ₹1100 की राशि भेंट की। उन्होंने यह दान मूक पशुओं की सेवा के लिए समर्पित किया और कामना की कि परिवार पर गौ माता का आशीर्वाद सदैव बना रहे। इस पुनीत कार्य की उपस्थित जनों ने सराहना की। recent visitors 137