बाबा साहब की मूर्ति लगाने का विरोध संघ समर्थक कर रहे हैंः गोविंद सिंह

बाबा साहब की मूर्ति लगाने का विरोध संघ समर्थक कर रहे हैंः गोविंद सिंह

Sangh supporters are opposing the installation of Baba Saheb’s statue: Govind Singh ग्वालियर। हाईकोर्ट परिसर में बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति लगाये जाने का विरोध आरएसएस के समर्थक लोग कर रहे है। जिस कारण प्रशासन द्वारा हाईकोर्ट परिसर से मूर्ति को हटा दिया गया। यह समस्त देश की जनता का अपमान है। कुछ अलग विचारधारा के लोगों ने संविधान की प्रतियां जलाई एवं अंबेडकर के पुतले जलाये। आज वही विचारधारा के लोग खुलेआम मूर्ति स्थापना का विरोध कर रहे है। कांग्रेस पार्टी इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करती है। यह बात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह ने पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहीं।डा. सिंह ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि हाईकोर्ट परिसर में बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित किये जाने की प्रक्रिया पूरी तरह से न्यायालय की अनुमति और विधि सम्मत कार्रवाई के अनुरूप पूरी हो चुकी है। इसके बाबजूद यदि किसी विशेष मानसिकता या राजनीतिक दबाब में आकर यह प्रक्रिया रोकी गई है तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा के लिये हम सामाजिक जनजागरण और राजनीतिक आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन शीघ्र ही मूर्ति स्थापना की तारीख तय करें। पत्रकारवार्ता में राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, विधायक डा. सतीश सिंह सिकरवार, विधायक साहब सिंह गुर्जर, डबरा विधायक सुरेश राजे, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डा. देवेन्द्र शर्मा, प्रवक्ता राम पाण्डे भी उपस्थित थे। recent visitors 86

विमान दुर्घटना के दिवंगत यात्रियों की आत्मा की शांति के लिए भगवान चक्रधर से की प्रार्थना

विमान दुर्घटना के दिवंगत यात्रियों की आत्मा की शांति के लिए भगवान चक्रधर से की प्रार्थना

Prayers were offered to Lord Chakradhar for the peace of the souls of the deceased passengers of the plane crash ग्वालियर। श्री सनातन धर्म मंडल में आज अहमदाबाद में हुई एयर इंडिया की भीषण दुर्घटना में दिवंगत यात्रियों की आत्मा की शांति हेतु भगवान श्री चक्रधर के चरणों में प्रार्थना की गई। मण्डल के अध्यक्ष विजय गोयल, प्रधानमंत्री रमेश चंद्र गोयल लल्ला, कोषाध्यक्ष राकेश बंसल, धर्म मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि अहमदाबाद में घटित भीषण हृदयविदारक विमान हादसे से सभी स्तब्ध, निःशब्द और दुखित है। ऐसे हादसों पर विश्लेषण से ज्यादा विलाप स्वीकार्य होता है। आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक अनुसंधान भी ईश्वरीय प्राकृतिक प्रकोप के आगे निस्सहाय साबित हुए। ईश्वर मृतको को सद्गति और परिजनों को संबल प्रदान करें। ऐसे दुःखद घटनाक्रम पर अभिव्यक्ति के लिए शब्द एवं भाव भी अपर्याप्त हो जाते है। मृत्यु शाश्वत सत्य है परंतु इस तरह जाना या जाते हुए अपनों को देखना अकल्पनीय है। गोयल ने कहा कि सनातन धर्म मंडल परिवार की संवेदनाएं इस दुख की घड़ी में सभी पीड़ित परिवारों के साथ हैं। recent visitors 104

बेबस मां, कलयुगी पुत्र-बहू ने हड़पा मकान, पुलिस को सुनाई फरियाद

बेबस मां, कलयुगी पुत्र-बहू ने हड़पा मकान, पुलिस को सुनाई फरियाद

Kaliyuga’s son and daughter-in-law usurped the house जबलपुर। बच्चे माता-पिता का अरमान, उम्मीद होते हैं, लेकिन कलयुगी दौर में जिस माता पिता ने उन्हें उंगलियां पकडक़र चलना सिखाया, खून पसीने की कमाई से उन्हें पाला पोसा, ताकि वे बुढ़ापे का सहारा बने लेकिन वे उन्हें रामभरोसे छोड़ रहे हैं। ताजा मामला शांति नगर का सामने आया। बेटा बहू ने मां के साथ न केवल मारपीट की बल्कि उसे घर से निकाल दिया और उसके मकान को हड़प लिया अब वृद्धा दर-दर भटक रही है। मंगलवार को 75 वर्षीय वृद्धा ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत की। रोते-बिलखते हुए फरियाद सुनाई। रेवती बाई सोनी निवासी शांति नगर ने बताया कि उनका छोटा बेटा चन्द्रेश सोनी और बहू प्रीति सोनी ने उनके साथ मारपीट की और घर से निकाल दिया। राशन कार्ड छीन लिया। उनके मकान को भी हड़प लिया है, वे दरदर भटक रही है, बड़ा बेटा इंदौर में रहता है जो फोन तक नहीं उठाता है। recent visitors 110

कई दुकानों में पहुंचा बेहद खराब क्वालिटी का खाद्यान्न, पीडीएस के जिम्मेदार अधिकारी अनजान

कई दुकानों में पहुंचा बेहद खराब क्वालिटी का खाद्यान्न, पीडीएस के जिम्मेदार अधिकारी अनजान

Very poor quality food grains reached many shops, PDS officials are unaware सिंगरौली । सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सस्ती कीमतों पर गरीबों को मिलने वाले खाद्यान्न वितरण की क्वालिटी भी सवालों के घेरे में आ गई है। बैढ़न ब्लॉक के कई शासकीय उचित मूल्य दुकानों में तीन महीने के लिए पहुंचा खाद्यान्न बेहद खराब है। जहां हितग्राही खाद्यान्न लेने में आनाकानी कर रहे हैं। वही जिम्मेदार अधिकारी उक्त मामले में अनजान हैं।गौरतलब है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को सस्ते दर पर राशन देने का निर्देश है। जिसमें जमकर भर्रेशाही मची हुई है। आरोप है कि जिला खाद्य अमला इस निरंकुश व्यवस्थाओं पर अंकुश लगाने में अब तक नाकाम रहा है। एक ओर जहां आये दिन शिकायते मिलती रहती हैं कि गरीबों को खाद्यान्न दो-दो, तीन-तीन महीने का वितरण विके्रताओं के द्वारा नही किया जाता है और ई-केवाईसी समेत आवंटन न मिलने का बहाना बताकर गरीब परिवारों को वैरंग लौटा दिया जाता है। जबकि गोदाम एवं स्टॉक पंजी में पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध भी रहता है। यह तो कहानी विके्रताओं की है। वही अब राशन दुकानों में बेहद खराब क्वालिटी के गेहूॅ-चावल का परिवहन राशन दुकानों में किया गया है। बताया जाता है कि बैढ़न इलाके के कई दुकानों में अत्यंत घटिया किस्म के चावल-गेहूं का भण्डारण किया गया है। जिसे लेने में उपभोक्ता लेने में आनाकानी कर तरह-तरह के सवाल खड़े करते हुये यह कहते नजर आ रहे हैं कि जब पीडीएस का खाद्यान्न गुणवत्ता युक्त देने का निर्देश है, फिर यह घटिया चावल-गेहूं कहां से आ गया। सरकार एवं प्रशासन खाद्यान्न वितरण के नाम पर केवल कोरम पूर्ति कर अपनी पीठ थपथपाने में लगा हुआ है। गरीबों को किस तरह का खाद्यान्न मिल रहा है उसको देखने एवं सुनने वाला कोई नही है।तीन महीने का दुकानों के गोदामों में पहुंचा है राशनजानकारी के मुताबिक कलेक्टर चन्द्रशेखर शुक्ला का निर्देश है बरसात सीजन को देखते हुये तीन महीने का एक साथ राशन दुकानों के गोदामों में भण्डारण का जून से अगस्त महीने तक वितरण कराया जाना है। जहां खाद्यान्नों का वितरण भी शुरू हो गया है। लेकिन खाद्यान्न गेहूं-चावल की क्वालिटी को देखकर हर कोई सक्श कोस रहा है। बैढ़न कस्बे के आसपास के उपभोक्ताओं ने यहां तक कहा कि उक्त खाद्यान्न को अधिकारी चख कर देखे तो पता चल जायेगा। यह खाद्यान्न इतना घटिया है कि देखते ही मन उचट जाता है। इतना घटिया खाद्यान्न मिलों में कैसे पहुंचा, इसकी जवाबदेही किसकी है और क्या ऐसे लापरवाहों पर कार्रवाई होगी?विंध्या एग्रो इण्ड्रस्ट्रीज के मिल से पहुंचा है खाद्यान्नजानकारी के मुताबिक बैढ़न मुख्यालय के आसपास के शासकीय उचित मूल्य दुकानों में गेहूं विंध्या एग्रो इण्ड्रस्ट्रीज उद्योग दीप बैढ़न के मिल से परिवहन किया गया है। जिसमें एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन लिमिटेड सिंगरौली के मद 2024-25 के प्रत्येक बोरिया में टैग भी लगा हुआ है और टैग में राइस की स्थिति क्या है, उसमें एनर्जी, सूगर, बिटामिन की मात्रा कितनी है, उसका विधिवत जिक्र है। अब सवाल उठता है कि उचित मूल्य दुकानों में सिर्फ गुणवत्ता विहीन जिसे देखने लायक भी नही है, वह दुकानों में कैसे पहुंचा। अब चर्चा यह है कि केवल टैग लगाकर राइस के बेहतर क्वालिटी बताया जा रहा है। जबकि मामला कुछ और है। इनका कहना:-अभी मैं अवकाश पर हू। ऐसी कोई शिकायत मेरे पास नही आई है और ऐसा हो भी नही सकता है कि गुणवताविहीन खाद्यान्न वितरण के लिए दिया जाये। अवकाश से आने के बाद देखता हॅू।पीसी चन्द्रवंशीजिला खाद्य अधिकारी, सिंगरौली recent visitors 210

क्या आपकी प्राइवेसी खतरे में है? सोशल मीडिया, सरकार और निगरानी की सच्चाई

क्या आपकी प्राइवेसी खतरे में है? सोशल मीडिया, सरकार और निगरानी की सच्चाई

Is your privacy at risk? The truth about social media, government and surveillance Is your privacy at risk आज हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ सूचना ही शक्ति है — लेकिन ये शक्ति अब आम नागरिकों के हाथ से निकलकर सरकारों, कॉर्पोरेशनों और डेटा एग्रीगेटिंग प्लेटफॉर्म्स के पास चली गई है। हमने अपनी मर्जी से, बिना कुछ समझे, सोशल मीडिया पर वह सब साझा कर दिया जो कभी सिर्फ घर की चारदीवारी में सुरक्षित था। फोटो, लोकेशन, पसंद-नापसंद, रिश्ते, विचार—हर चीज़ हमने पोस्ट की, लाइक की, शेयर की। शुरू में ये एक आज़ादी जैसी लगी, लेकिन यह आज़ादी धीरे-धीरे एक जाल में बदल गई। Is your privacy at risk जब हम अपनी निजी ज़िंदगी का डिजिटल खाका खुद ही खींच रहे थे, तब न सरकारें दिखती थीं और न ही राजनीतिक एजेंडा। पर जैसे ही यह डेटा बढ़ा, सरकारें चौकन्नी हुईं, निगरानी शुरू हुई और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इसे मॉनेटाइज करना शुरू कर दिया। अब यह डेटा हमारे खिलाफ हथियार बन चुका है। Read more: भगवान बिरसा मुंडा की 125वीं पुण्यतिथि वेब स्टोरी आज का यथार्थ यही है कि सोशल मीडिया पर दी गई हर जानकारी का इस्तेमाल हमारी मानसिकता को प्रभावित करने, हमें उपभोक्ता में बदलने और कभी-कभी राजनीतिक टूल बनाने तक में हो रहा है। यह न केवल व्यक्ति की निजता, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा के लिए भी खतरा है। हमें यह समझना होगा कि Is your privacy at risk प्राइवेसी कोई सुविधा नहीं, बल्कि एक मूलभूत अधिकार है। जब तक हम इसके महत्व को नहीं समझेंगे, तब तक हम और हमारा समाज लगातार नियंत्रण में आता जाएगा। हमें खुद तय करना होगा कि हम तकनीक का इस्तेमाल करेंगे या तकनीक हमारा इस्तेमाल करेगी। प्राइवेसी ही पावर है। यही वह शक्ति है जो हमें सवाल पूछने, सोचने और चुनने की आज़ादी देती है। इसे समझना, इसकी रक्षा करना आज पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। यदि आप इस विषय में जागरूकता फैलाना चाहते हैं, तो इस लेख को अधिक से अधिक साझा करें — क्योंकि सोच तभी बचेगी जब निजता बचेगी। recent visitors 125

कन्नौद में तहसीलदार अंजलि गुप्ता की तानाशाही: किसानों और महिलाओं के साथ बर्बरता, सरकार पर उठे सवाल

कन्नौद में तहसीलदार अंजलि गुप्ता की तानाशाही: किसानों और महिलाओं के साथ बर्बरता, सरकार पर उठे सवाल

Dictatorship of Tehsildar Anjali Gupta in Kannaud: Brutality with farmers and women, questions raised on the government कन्नौद से आई यह खबर न सिर्फ दिल को झकझोरती है, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। मामूली तहसीलदार अंजलि गुप्ता द्वारा किसानों और महिलाओं के साथ की गई बदसलूकी, धक्का-मुक्की और थाने तक भिजवाने जैसी घटनाएं कहीं से भी एक लोकसेवक के आचरण को उचित नहीं ठहरातीं। यह मामला न केवल कन्नौद की स्थानीय राजनीति का विषय है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र के चरित्र पर प्रश्नचिन्ह है। किसान: व्यवस्था के शिकाररेलवे जमीन अधिग्रहण के नाम पर किसानों को जिस तरह से डराया और धमकाया जा रहा है, वह लोकतंत्र में अक्षम्य है। किसान, जो इस देश की रीढ़ माने जाते हैं, अगर उन्हीं को सरकारी व्यवस्था अपमानित करने लगे तो यह लोकतंत्र की बुनियाद को हिला देने वाला कदम है। अंजलि गुप्ता की कार्यशैली यह बताने के लिए काफी है कि प्रशासन में बैठे कुछ अफसर आज भी खुद को राजा समझते हैं और जनता को रियाया। महिला विरोधी रवैया, कानून की अवहेलनातहसीलदार द्वारा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और हाथापाई की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। ऐसे समय में जब सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, महिला सशक्तिकरण जैसे अभियानों को आगे बढ़ा रही है, तब एक महिला अफसर द्वारा महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार पूरे अभियान की भावना को झुठलाता है। पुलिस वैन में महिलाओं को भरकर थाने भेजना, उनके सम्मान को ठेस पहुंचाना — यह सब सत्ता की अमानवीयता को दर्शाता है। यह कोई पहली बार नहींसोनकच्छ में भी पहले अंजलि गुप्ता पर किसानों से अभद्रता का आरोप लग चुका है, और वहां भी जनदबाव में सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था। पर क्या एक बार चेतावनी देकर अफसरों को छोड़ देना ही समाधान है? क्या यह न्याय है कि जनता बार-बार अपमानित हो और अफसर बच निकलें? मुख्यमंत्री से अपील: तुरंत सख्त कदम उठाएंप्रदेश के मुखिया के तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपेक्षा की जाती है कि वे इस घटनाक्रम पर त्वरित संज्ञान लें और अंजलि गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर निष्पक्ष जांच के आदेश दें। यदि इस प्रकार की तानाशाही और दमनकारी प्रवृत्ति पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह जनता का प्रशासन से विश्वास उठने जैसा होगा। जनता का आक्रोश, सरकार के लिए खतराजनता के मन में गुस्सा और आक्रोश दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। किसान आंदोलन की संभावनाएं प्रबल हो रही हैं, और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला सरकार की छवि पर गहरे दाग छोड़ सकता है। यह लोकतंत्र है, न कि तानाशाही का अड्डा। कन्नौद की घटना सिर्फ एक तहसीलदार की गलती नहीं है, यह एक व्यवस्था के असंवेदनशील होने का प्रमाण है। अब वक्त है कि सरकार केवल घोषणाएं न करे, बल्कि जमीन पर उतरकर ऐसे अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करके एक मिसाल पेश करे। प्रशासन अगर जनता की सेवा नहीं कर सकता, तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं। recent visitors 250

परवरिश: मोबाइल की लत बच्चों के भविष्य पर भारी, जानें इससे छुटकारा पाने के उपाय

परवरिश: मोबाइल की लत बच्चों के भविष्य पर भारी, जानें इससे छुटकारा पाने के उपाय

Parenting: Mobile addiction is harmful for children’s future, know the ways to get rid of it क्या आपका बच्चा मोबाइल के बिना रह सकता है?Mobile addiction for children future आज यह सवाल हर माता-पिता के मन में गूंज रहा है। तकनीक के इस दौर में मोबाइल बच्चों की जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन चुका है, मानो उनका एक नया अंग हो। चाहे भोजन हो, पढ़ाई या आराम का समय हर क्षण मोबाइल उनके साथ है। यह डिजिटल डिवाइस केवल उनके शरीर को ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक विकास को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है। बच्चों पर मोबाइल का असर: सिर्फ आंखें नहीं, पूरी सोच पर असर Mobile addiction for children future धैर्य में गिरावट:स्क्रीन पर मिलने वाला त्वरित मनोरंजन बच्चों को अधीर बना रहा है। किसी भी असफलता या देरी पर वे गुस्से में आ जाते हैं। माता-पिता या शिक्षकों की मामूली बात भी उन्हें आहत कर देती है। एकाग्रता में कमी:लगातार आने वाले नोटिफिकेशन्स और ऑनलाइन एक्टिविटी बच्चों की एकाग्रता को कमजोर कर रही है। वे लंबे समय तक किसी एक काम पर ध्यान नहीं दे पाते। संवादहीनता और सामाजिक दूरी:मोबाइल की लत बच्चों को परिवार और दोस्तों से दूर कर रही है। अब वे भावनाओं को शब्दों में नहीं, इमोजी में बयां करते हैं। इसका असर उनके आत्मविश्वास, भाषा कौशल और सामाजिकता पर पड़ रहा है। ऑनलाइन गेमिंग और मानसिक स्वास्थ्य:गेमिंग ऐप्स बच्चों के लिए एक नशे की तरह बन चुके हैं। लेवल पार करने का जुनून, पैसे हारने का डर और त्वरित सफलता की उम्मीद उन्हें तनाव, एंग्ज़ायटी और यहां तक कि आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम तक ले जा रही है। Read More: ऑनलाइन गेमिंग के जाल में फंसते युवा: कर्ज, लत और तबाही की ओर ले जाते ऐप्स, सरकार की चुप्पी चिंता का कारण नींद और शारीरिक समस्याएं:देर रात तक स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बिगड़ता है, जिससे नींद की गुणवत्ता घटती है। इससे चिड़चिड़ापन, मोटापा और आंखों की समस्याएं जैसे डिजिटल आई स्ट्रेन और दृष्टि दोष उत्पन्न होते हैं। अभिभावकों की भूमिका: शुरुआत घर से ही होती हैआमतौर पर मोबाइल की लत के बीज माता-पिता ही बोते हैं—कभी बच्चे को चुप कराने के लिए, तो कभी उसे व्यस्त रखने के लिए। एक साल के बच्चे को मोबाइल पर राइम्स दिखाना आज सामान्य बात हो गई है। फिर जब वही बच्चा 12-13 साल में मोबाइल मांगता है, तो माता-पिता उसे रोक नहीं पाते। समाधान: स्क्रीन से दूरी, जीवन से जुड़ाव स्क्रीन टाइम तय करें:परिवार में मोबाइल उपयोग का एक साझा नियम बनाएं। बच्चे को 15 साल की उम्र तक अपना व्यक्तिगत मोबाइल न दें। मैदानी खेल और आउटडोर एक्टिविटी:हर दिन कम से कम दो घंटे बच्चों को फिजिकल एक्टिविटी में व्यस्त रखें। फैमिली आउटिंग में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित करें। बातचीत और समय:बच्चों से बात करें, उनकी समस्याएं समझें। जब वो आपकी बात सुनते हैं, तो आप भी उनकी दुनिया से जुड़ पाते हैं। तकनीक से नहीं, रिश्तों से जुड़ाव बढ़ाएं:उन्हें यादें लिखने के लिए प्रेरित करें, न कि इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने के लिए। मोबाइल कोई बुरा उपकरण नहीं है, लेकिन उसके गलत इस्तेमाल ने बच्चों को मानसिक, शारीरिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचाया है। माता-पिता यदि आज सतर्क नहीं हुए, तो कल बहुत देर हो जाएगी। सही परवरिश तकनीक से नहीं, समय और समझ से होती है। Tag: Parenting, Screen Addiction, Children Mental Health, Digital Detox recent visitors 214