भगवान जगन्नाथ को क्यों लगता है कड़वे नीम का भोग? जानें इसके पीछे का रहस्य

भगवान जगन्नाथ को क्यों लगता है कड़वे नीम का भोग? जानें इसके पीछे का रहस्य

Kyon Lagate Hain Bhagwan Jagnnath Ko Neem Ka Bhog: पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म की सबसे भव्य, प्रसिद्ध और श्रद्धा से ओत-प्रोत यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित होती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर पुरी पहुँचते हैं और भगवान के रथ को खींचकर पुण्य प्राप्त करते हैं। यह न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और भक्तिभाव का अद्वितीय प्रतीक भी है। इस वर्ष यह दिव्य यात्रा 27 जून 2025 को शुरू होगी। रथ यात्रा से जुड़ी कई पुरानी और विशेष परंपराएं हैं, जिनमें से एक परंपरा भगवान जगन्नाथ को कड़वे नीम की पत्तियों का भोग अर्पित करने की भी है। यह परंपरा सुनने में भले ही विचित्र लगे, लेकिन इसके पीछे गहरी धार्मिक भावना और ऐतिहासिक महत्व छिपा हुआ है। भगवान को मीठे के स्थान पर कड़वा नीम क्यों चढ़ाया जाता है, यह जानना भक्तों के लिए हमेशा जिज्ञासा का विषय रहा है। आइए, जानते हैं इस विशेष परंपरा के पीछे की पौराणिक और आध्यात्मिक मान्यता। क्यों चढ़ाया जाता है भगवान जगन्नाथ को नीम का भोग?भगवान जगन्नाथ को 56 भोग लगाने के बाद नीम के चूर्ण का भोग चढ़ाने की परंपरा के पीछे एक बेहद मार्मिक कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि जगन्नाथ पुरी मंदिर के पास एक वृद्धा महिला रहती थी, जो भगवान को अपने पुत्र के रूप में मानती थी। वह प्रतिदिन देखती थी कि भगवान को 56 प्रकार के विविध और भारी भोजन चढ़ाए जाते हैं। एक दिन उसने सोचा कि इतना सारा भोग ग्रहण करने के बाद उसके बेटे को पेट दर्द हो सकता है, इसलिए वह नीम का औषधीय चूर्ण बनाकर मंदिर पहुंची, ताकि उसे भगवान को भोग स्वरूप अर्पित कर सके। सैनिकों ने किया चूर्ण का अपमान, भक्त हुई व्यथितजब वह महिला भगवान को वह चूर्ण देने मंदिर पहुंची, तो द्वार पर तैनात सैनिकों ने उसे अंदर नहीं जाने दिया। इतना ही नहीं, उसके हाथ से नीम का चूर्ण भी छीनकर फेंक दिया और उसे अपमानित कर मंदिर से भगा दिया। यह देखकर वह स्त्री अत्यंत दुःखी हो गई कि वह अपने पुत्र भगवान को प्यार से बनाई हुई औषधि नहीं दे सकी। भगवान ने लिया भक्त की पीड़ा का संज्ञानउस रात भगवान जगन्नाथ ने पुरी के राजा के स्वप्न में दर्शन दिए और पूरी घटना की जानकारी दी। भगवान ने राजा से कहा कि उन्होंने एक सच्ची भक्त का अपमान सहन किया है और यह अनुचित है। उन्होंने राजा को आदेश दिया कि वह स्वयं उस महिला के घर जाकर क्षमा मांगे और उसी नीम के चूर्ण को फिर से बनवाकर भगवान को अर्पित करे।, तभी से शुरू हुई यह परंपराअगले दिन राजा ने भगवान की आज्ञा का पालन किया। वह महिला के घर गए, माफी मांगी और उससे दोबारा चूर्ण बनवाया। उस मां ने बड़े प्रेम से वह नीम का चूर्ण तैयार किया और राजा ने उसे भगवान जगन्नाथ को भोग के रूप में अर्पित किया। भगवान ने उसे सहर्ष स्वीकार किया। तभी से यह परंपरा चल पड़ी कि 56 भोग के बाद भगवान को नीम के चूर्ण का भोग भी लगाया जाता है, जो आज तक पूरी श्रद्धा और प्रेमभाव के साथ निभाई जाती है। recent visitors 200

डिजिटल इंडिया या मौत का इंतज़ार? सरकार बताए—30 सेकंड की चेतावनी जरूरी है या ज़िंदगी?

डिजिटल इंडिया या मौत का इंतज़ार? सरकार बताए—30 सेकंड की चेतावनी जरूरी है या ज़िंदगी?

Digital India or waiting for death? Government should tell-30 seconds warning is more important or life? Digital India or waiting for death देश डिजिटल युग में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है, लेकिन अफसोस कि तकनीक की यही तेज़ रफ्तार अब आम आदमी की जिंदगी में देरी का कारण बन रही है और कभी-कभी मौत का भी। बीते दिनों एक दिल दहला देने वाली घटना में महज 38 सेकंड में 242 जिंदगियां जलकर राख हो गईं। अब कल्पना कीजिए कि अगर उन क्षणों में किसी ने मदद के लिए फोन मिलाया होता, तो उसे पहले 30 सेकंड अमिताभ बच्चन की साइबर क्राइम चेतावनी सुननी पड़ती। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल व्यवस्था की एक क्रूर सच्चाई है। सरकार और दूरसंचार कंपनियों ने साइबर सुरक्षा को लेकर कॉल से पहले एक चेतावनी संदेश जारी करना शुरू किया है, जिसमें मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन की आवाज़ में लोगों को आगाह किया जाता है। लेकिन यह चेतावनी अब सामान्य सुविधा नहीं, बल्कि आपात स्थिति में बाधा बन चुकी है। Digital India or waiting for death सोचिए अगर कोई सड़क हादसे का शिकार हो गया हो, कोई महिला संकट में हो, या किसी को दिल का दौरा पड़ा हो — उस समय हर सेकंड कीमती होता है। वहां 30 सेकंड का यह चेतावनी संदेश जान ले सकता है। किसी तकनीकी या साइबर धोखाधड़ी से बचाने के नाम पर अगर हम इंसानों की जान को दांव पर लगाएं, तो यह नीतिगत असंवेदनशीलता ही कहलाएगी। Read more: घरेलू कामों को बोझ न समझें, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली की कुंजी मानें! इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, दूरसंचार मंत्रालय और नेटवर्क कंपनियां तीनों ही मौन हैं। क्या इन संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे जनता की सुरक्षा और सुविधा के संतुलन को समझें? टेक्नोलॉजी का उद्देश्य सुविधा देना होता है, न कि बाधा बनना। यह कहना उचित है कि साइबर क्राइम से बचाव ज़रूरी है, लेकिन यह तभी तक उपयोगी है जब तक वह जीवन रक्षक साधनों में हस्तक्षेप न करे। अगर कोई व्यक्ति दिन में 10 बार कॉल कर रहा है, तो हर बार वही चेतावनी सुनाना न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि जनता की सुनने की क्षमता और धैर्य की परीक्षा भी है। जब एक बार चेतावनी पर्याप्त हो सकती है, तो उसे हर कॉल पर सुनाना किस तर्क पर आधारित है? यह व्यवस्था नागरिकों की आपात प्रतिक्रिया क्षमता को कुंद करती है। समस्या की जड़ यह भी है कि हमने तकनीकी सुधार को जनता की जमीनी जरूरतों से अलग कर दिया है। अधिकारी वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर साइबर क्राइम से बचाव के लिए चेतावनियां जारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह अंदाज़ा नहीं कि वास्तविक भारत में इंटरनेट की गति और मोबाइल नेटवर्क आज भी कमजोर है। उस पर यह 30 सेकंड की जबरन चेतावनी — यह सिर्फ फोन कॉल नहीं रोकती, बल्कि संवेदनशीलता का गला घोंट देती है। ज़रूरत है कि दूरसंचार मंत्रालय इस पर तुरंत संज्ञान ले और एक व्यावहारिक समाधान निकाले। चेतावनी दिन में केवल एक बार दी जाए, या आपातकालीन कॉल (जैसे 112, 100, 101) के लिए यह बाध्यता पूरी तरह से हटाई जाए। साथ ही, नेटवर्क कंपनियों को इस दिशा में जवाबदेह बनाया जाए। यह भी आवश्यक है कि इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं हस्तक्षेप करें, क्योंकि यह मुद्दा तकनीकी से कहीं बढ़कर — मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा है। आज ज़रूरत है कि हम एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था बनाएं, जो नागरिक को जागरूक तो करे, पर उसकी जान बचाने में बाधा न बने। वरना अगली बार जब कोई आपातकाल में फोन मिलाएगा, तो हो सकता है वह आपका कॉल साइबर सुरक्षा के लिए रिकॉर्ड किया जा रहा है सुनते-सुनते दुनिया से ही कटा रह जाए। recent visitors 211

चालान: ट्रैफिक नियमों की आड़ में कैमरा चालान तंत्र, जनता की जेब काटने की सरकारी स्कीम!

चालान: ट्रैफिक नियमों की आड़ में कैमरा चालान तंत्र, जनता की जेब काटने की सरकारी स्कीम!

Challan: Camera challan system under the guise of traffic rules, a government scheme to fleece public! संपादकीय टीमgovernment scheme to fleece public देशभर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के नाम पर आज जिस तरह चालान प्रणाली को डिजिटल और कैमरा आधारित किया गया है, वह सुधार से ज्यादा व्यापार नजर आता है। सरकारें दावा करती हैं कि उनका उद्देश्य सड़क सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। लेकिन असल तस्वीर कुछ और ही है। चालान या शोषण? ट्रैफिक नियमों की आड़ में जनता की जेब पर हमला हर चौराहे पर कैमरे, हर राज्य में करोड़ों का चालान government scheme to fleece publicआजकल हर राज्य और हर जिले में CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों के ज़रिए लाखों गाड़ियों के चालान रोज़ काटे जाते हैं – वो भी बिना किसी चेतावनी, सुधार या विकल्प के। ना सड़कों की हालत सुधरी, ना ट्रैफिक लाइट्स की स्थिति। कहीं लाइट काम नहीं करती, तो कहीं संकेत पूरी तरह अदृश्य होते हैं। बावजूद इसके, चालान तय है – जुर्माना तय है! नियम टूटते हैं, लेकिन वजह कौन समझे?कई बार ट्रैफिक सिग्नल काम नहीं करते। सड़कें गड्ढों में बसी होती हैं। दिशा सूचक बोर्ड गायब होते हैं। ऐसी स्थिति में नियमों का पालन असंभव हो जाता है, लेकिन जुर्माना फिर भी भुगतना पड़ता है – क्योंकि कैमरा देखता है, व्यवस्था नहीं। Read More: शोक की घड़ी में भाजपा का पचमढ़ी आयोजन नैतिकता का उल्लंघन: विभा पटेल क्या चालान अब राजस्व का नया स्रोत बन गया है?सवाल यह है – क्या चालान वाकई सुधार का जरिया है, या सिर्फ़ जनता की जेब से कमाई का साधन बन गया है? सरकारें तो जानती हैं कि लोग सुधरेंगे नहीं, इसीलिए तकनीक का इस्तेमाल जनता की नज़रों से नहीं, उसकी जेब से जोड़ने के लिए किया जा रहा है। जनता अभी भी चुप है – लेकिन कब तक? government scheme to fleece publicहैरानी की बात है कि जनता अभी तक इस खेल को समझ नहीं पा रही है। या शायद समझकर भी चुप है। लेकिन यदि जनता एक दिन जाग गई, तो सवाल करेगी कि ट्रैफिक नियमों की आड़ में वसूली कब तक चलेगी? चालान एक जरिया होना चाहिए था व्यवस्था सुधार का। लेकिन आज यह सरकारी खजाना भरने का आसान और एकतरफा तरीका बन गया है। सुधार सड़क पर नहीं दिखते, लेकिन जुर्माने की पर्ची हर घर पहुंचती है। सवाल यही है – क्या ये चालान व्यवस्था के लिए हैं, या व्यवस्था की विफलता को ढकने का तरीका? recent visitors 138

शोक की घड़ी में भाजपा का पचमढ़ी आयोजन नैतिकता का उल्लंघन: विभा पटेल

BJP’s Panchmarhi event in the hour of mourning Violation of ethics: Vibha Patel भोपाल। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती विभा पटेल ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा संवेदनशील नहीं है। उसका करुणा, वेदना, पीड़ा और मानवीयता से कोई सरोकार नहीं है। इसकी मिसाल अहमदाबाद विमान हादसे के चलते पचमढ़ी प्रशिक्षण शिविर स्थगित नहीं करना है।  श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ान दुर्घटनाग्रस्त होने से इस अकल्पनीय हादसे में सिर्फ यात्री और क्रू मेंबर्स ही नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज के कई छात्र, आम नागरिक समेत 275 लोग असमय काल के गाल में समा गए। इस शोक की घड़ी में वैश्विक नेताओं समेत देश-दुनिया में शोक की लहर है। लेकिन उत्सवप्रेमी भाजपा संगठनात्मक आयोजन के नाम पर विधायकों-सांसदों का तीन दिनी प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कर रही है। यह आश्चर्यजनक है क्योंकि इस दुर्घटना में भाजपा के पूर्व सीएम विजय रूपाणी की भी मृत्यु हुई है। इसके बावजूद भाजपा का कार्यक्रम को स्थगित नहीं करना और उद्घाटन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रित करना उसके मानवता विरोधी चेहरे को प्रदर्शित करता है। यह सामाजिक मानदंडों, सामान्य शिष्टाचार और नैतिक सीमाओं का सीधा उल्लंघन है।  श्रीमती विभा पटेल ने केंद्रीय गृह मंत्री शाह के उस बयान की भी निंदा की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ” ये एक्सीडेंट है.. एक्सीडेंट को कोई रोक नहीं सकता..’। श्रीमती विभा पटेल ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को कुछ भी बोलने से सोचना चाहिए। अभी देश अहमदाबाद विमान हादसे के सदमे से उबरा नहीं है। कई परिवार शोक और सदमे से घिरे है। यह हादसा न जाने कितने परिवारों के लिए विनाश का कारण बन गया, कितनों की दुनिया उजड़ गई। इसको समझते हुए भाजपा का अपने आयोजन को लेकर हठधर्मी वाला रवैया रखना उसके अमानवीय व्यवहार, आचरण और चरित्र को प्रदर्शित करता है। श्रीमती विभा पटेल ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए कहा कि इस कठिन समय में भाजपा को सद् बुद्धि मिले, वह यही ईश्वर से प्रार्थना करती है। recent visitors 250

BJP नेता मनोहर के डर्टी पिक्चर कांड में पुलिस ने , अश्लील वीडियो वायरल करने पर चार टोल कर्मचारियों पर FIR

BJP नेता मनोहर के डर्टी पिक्चर कांड में पुलिस ने , अश्लील वीडियो वायरल करने पर चार टोल कर्मचारियों पर FIR

In BJP leader Manohar’s dirty picture case, police filed FIR against four toll employees for making obscene video viral दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बीजेपी नेता मनोहर धाकड़ का अश्लील वीडियो वायरल के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने अब चार टोल कर्मचारियों केस दर्ज किया है। कर्मचारियों पर वीडियो लीक करने और ब्लैकमेलिंग कर 25 हजार रुपए वसूलने का आरोप है। Manohar Dhakad Viral Video Case update: मंदसौर जिले में बीजेपी नेता मनोहर लाल धाकड़ का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में है। वीडियो में धाकड़ को एक महिला के साथ दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर महिला के साथ यौन संबंध बनाते देखा गया था। इस मामले में धाकर की गिरफ्तारी हुई थी लेकिन उन्हें जमानत मिल गई थी। अब मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। बीजेपी नेता मनोहर धाकड़ के अश्लील वायरल वीडियो में पुलिस ने कार्रवाई की है। हाई सिक्योरिटी कैमरे में रिकॉर्ड वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने चार टोल कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन कर्मचारियों पर ब्लैकमेलिंग और वीडियो लीक करने का आरोप है। ये सभी 13 मई की रात ड्यूटी पर थे। इस मामले में कंपनी ने इन कर्मचारियों को पहले ही काम से बर्खास्त कर दिया था। इस कंपनी के पास एनएचएआई के लिए कंट्रोल रूम ऑपरेशन का ठेका दिया गया था। 4 टोल कर्मचारियों के खिलाफ केस13 मई की रात ड्यूटी पर मौजूद एमकेआई कंपनी के चार कर्मचारी अजय मीणा (27), कमलेश मेघवाल (32), रोहित नागर (27) और बन्ने सिंह चौहान (32) पर वीडियो लीक करने का आरोप है। कंपनी ने पहले ही चारों को बर्खास्त कर दिया था, अब पुलिस ने इन चारों के खिलाफ IT एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। मामले में पुलिस की पूछताछ में मनोहर लाल धाकड़ ने ब्लैकमेलिंग का जिक्र किया था। जिसके बाद पुलिस ने इसको लेकर जांच की। ब्लैकमेलिंग कर लिए गए थे 25 हजारएसपी अभिषेक आनंद के अनुसार, बीजेपी नेता मनोहर धाकड़ ने पूछताछ में बताया कि वीडियो वायरल न करने की एवज में उसने 20 हजार रुपए नकद और 5 हजार रुपए यूपीआई से बन्ने सिंह को ट्रांसफर किए थे। पुलिस ने चारों कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 309, 294 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है। ये सभी एनएचएआई के लिए कंट्रोल रूम ऑपरेट कर रही कंपनी के कर्मचारी थे। मामले में एनएचएआई, एमकेसी और एमकेआई कंपनी के अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश जारी है। महिला अब भी फरार, धाकड़ को जमानतअश्लील वीडियो के मामले में बीजेपी मनोहर धाकड़ के खिलाफ पहले ही IPC की धारा 296, 285, 3(5) समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज है। नेता को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिसके एक दिन बाद उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन वीडियो में दिख रही महिला अब भी फरार है। धाकड़ के वकील ने की फोरेंसिक जांच की मांगबीजेपी नेता धाकड़ के वकील संजय सोनी ने कहा कि वीडियो के साथ एआई तकनीक से छेड़छाड़ की गई हो सकती है, इसलिए इसकी फोरेंसिक जांच जरूरी है। यह वीडियो एआई से एडिट किया हुआ भी हो सकता है। इसकी प्रामाणिकता जांचना जरूरी है। recent visitors 103

इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला: 95 लोग घायल, ईरान ने कहा – यह युद्ध की घोषणा है

इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला: 95 लोग घायल, ईरान ने कहा – यह युद्ध की घोषणा है

Israel attacks Iran LIVE: 95 people injured in Israeli attack; Iran calls it a ‘declaration of war’ नई दिल्ली ! मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर है। इजरायल ने गुरुवार देर रात ईरान पर हवाई हमला किया, जिसमें अब तक 95 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। ईरान ने इस कार्रवाई को ‘युद्ध की सीधी घोषणा’ करार दिया है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाने की बात कही है। दोनों देशों के बीच इस गंभीर टकराव से वैश्विक चिंता गहराती जा रही है। क्या हुआ इजरायली हमले में?सूत्रों के अनुसार, इजरायली वायुसेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यह हमला ऐसे समय पर हुआ जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी लगातार तीखी होती जा रही थी। तेहरान में विस्फोट की आवाजें कई किलोमीटर दूर तक सुनी गईं। स्थानीय अस्पतालों में घायलों की भारी भीड़ देखी गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। ईरान की प्रतिक्रिया ईरान के राष्ट्रपति ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा,“यह हमला हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमला है। यह युद्ध की घोषणा है और हम इसका करारा जवाब देंगे।”ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है, और देश के सभी सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई है। इजरायल का पक्षइजरायल ने अभी तक आधिकारिक रूप से हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने इस कार्रवाई को “सुरक्षा कारणों से किया गया आवश्यक प्रतिरोध” बताया है। इजरायल ने पहले भी कहा था कि वह ईरानी परमाणु कार्यक्रम को किसी भी कीमत पर रोकने के लिए तैयार है। वैश्विक प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है और स्थिति को लेकर आपात बैठक बुलाई है।अमेरिका, रूस और चीन ने गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि इस टकराव से वैश्विक शांति को खतरा है।भारत ने भी इस टकराव पर चिंता जताते हुए कूटनीतिक समाधान की अपील की है। क्या हो सकते हैं इसके परिणाम?विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष आगे बढ़ा, तो यह पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है। इससे न केवल तेल की कीमतों में उछाल आएगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं भी प्रभावित होंगी। इजरायल और ईरान के बीच यह संघर्ष एक नए युद्ध की आहट जैसा महसूस हो रहा है। आने वाले कुछ घंटे और दिन बेहद अहम होंगे। पूरी दुनिया की नजरें अब इन दो देशों पर टिकी हैं कि क्या यह तनाव और बढ़ेगा या कोई समाधान निकलेगा? recent visitors 112

जिला अस्पताल परिसर में आक्सीजन प्लांट के समीप लगी आग में दो एम्बुलेंश जली

जिला अस्पताल परिसर में आक्सीजन प्लांट के समीप लगी आग में दो एम्बुलेंश जली

Two ambulances were burnt in a fire near the oxygen plant in the district hospital premises सीधी । जिला अस्पताल के एम्बुलेंशों में फिर आग लगने का मामला सामने आया। आक्सीजन प्लांट के समीप आग की चपेट में दो एम्बुलेंशों के आने से हडक़म्प मच गया। सूचना मिलते ही तत्काल नगर पालिका का फायर बिग्रेड मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाया गया।मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल परिसर में आक्सीजन प्लांट के समीप कुछ बिगड़ी हालत में एम्बुलेंश खड़ी हुई थीं। कल शाम करीब 5:30 बजे अचानक एक एम्बुलेंश से आग की तेज लपटें तथा धुआं निकलना शुरू हो गया। यह जानकारी मिलते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ.एस.बी.खरे स्वयं मौके पर पहुंचे और फायर बिग्रेड से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू हुआ। करीब आधे घंटे में आग पर काबू पा लिया गया। बताते चलें कि कुछ माह पूर्व ही जिला अस्पताल परिसर से लगे पुराने सीएमएचओ कार्यालय के पीछे खड़ी कण्डम एम्बुलेंशों में आग लगने की घटना रात में सामने आयी थी। उस दौरान यह माना गया कि रात में किसी नशेड़ी द्वारा बीड़ी या सिंगरेट फेंकने से आग लगने की घटना हुई थी। इससे पूर्व भी पुरानी एम्बुलेंशों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। आज जिस स्थान पर बिगड़ी एम्बुलेंशों को खड़ा किया गया था वहां से बिजली का तार भी गुजरता है। फिर भी लापरवाही पूर्वक आक्सीजन प्लांट के समीप ऐसे जोखिम भरे स्थान में पुरानी एम्बुलेंशों को खड़ा किया गया था। जिला अस्पताल की बिगड़ी एम्बुलेंशों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा पुरानी एम्बुलेंशों की सुरक्षा को लेकर कोई माकूल इंतजाम नहीं किये जा रहे हैं। पुरानी कण्डम एम्बुलेंशों की नीलामी की स्वीकृति न मिलने के कारण अस्पताल परिसर में पुराने सीएमएचओ कार्यालय के पीछे दर्जनों एम्बुलेंश खड़ी हुई हैं। नीलामी न होने के कारण अधिकांश एम्बुलेंश पूरी तरह से कण्डम हो चुकी हैं। इनका कहना हैजिला अस्पताल परिसर में जहां एम्बुलेंश खड़ी थीं। उसके ऊपर से बिजली के तार के गुजरने से शार्ट सर्किट के चलते आग लगने से प्रथम दृष्टया जानकारी सामने आयी है। अस्पताल परिसर में सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी भी रहती है। इस मामले में जांच कराकर दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जावेगी।डॉ.एस.बी.खरे, सिविल सर्जन जिला अस्पताल सीधी recent visitors 115