माहवारी स्वच्छता दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, फ्री दी जाएगी ‘पीरियड किट’

भोपाल  भोपाल शहर में बालिकाओं एवं महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति प्रेरित करने के लिए नया कदम उठाया जा रहा है। भोपाल के वार्ड क्रमांक 28 के अम्बेडकर नगर क्षेत्र में 28 मई को ‘विश्व महावारी स्वच्छता दिवस’ पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। सामाजिक संस्था हम लोग शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति द्वारा ’प्रोजेक्ट पिंक’ का आरंभ किया जा रहा है। 28 मई को कोटरा सुल्तानाबाद स्थित आंबेडकर नगर में शिविर लगाकर इसकी शुरुआत होगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहियकाओं के साथ 30-30 बालिकाओं के समूह बनाकर उनके लिए यह कार्यशाला आयोजित की जाएगी। संस्था के नीतेश नेमा ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट पिंक’ अभियान की शुरूआत महावारी स्वच्छता दिवस से की जा रही है। इसके अंतर्गत किशोर बालिकाओं एवं महिलाओं को ‘पीरियड किट’ प्रदान की जाएगी, जो उनके लिए मददगार बनेगी। इस किट में सेनेटरी नेपकिन के साथ फिटकरी और साबुन भी हैं जो उनके लिए मददगार साबित होगी। उन्होंने कहा कि जो बातें हमारे समाज में सामान्य रूप से नहीं समझाई जाती लेकिन लघु फिल्म के माध्यम से व विषय विशेषज्ञों की कार्यशाला आयोजित कर इस महत्वपूर्ण विषय पर आवश्यक जानकारी किशोर बालिकाओं को प्रदान की जाएगी। विषय विशेषज्ञ आयुषी पचौरी, श्रीमती शालू मजुमदार एवं श्रीमती नीलिमा ढोंके द्वारा किशोर बालिकाओं एवं महिलाओं को विषय की गंभीरता के बारे में समझाया जाएगा। लघु फिल्म के माध्यम से व कार्यशाला आयोजित कर इस महत्वपूर्ण विषय पर आवश्यक जानकारी दी जाएगी। recent visitors 62

18 साल की समायरा हुल्लुर ने भारत की सबसे कम उम्र की पायलट बनने का रिकॉर्ड बनाया

बीजापुर क्या आपने कभी सोचा कि हवाई जहाज की कॉकपिट से दुनिया कैसी दिखती होगी? राजस्थान के बीजापुर की समायरा हुल्लुर ने न सिर्फ ये सपना देखा, बल्कि 18 साल की उम्र में भारत की सबसे कम उम्र की कमर्शियल पायलट बनकर इसे हकीकत में बदल दिया. आज यह लड़की उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है, जो उंची छलांग लगाना चाहते हैं. आइए आपको बताते हैं इस लड़की की कहानी…  कर्नाटक के बीजापुर की रहने वाली समायरा हुल्लुर 18 साल की उम्र में कामर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) हासिल कर चुकी हैं. उन्‍होंने भारत की सबसे कम उम्र की पायलट बनने का रिकॉर्ड बनाया है.अब 19 साल की समायरा को बचपन से ही एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसे घुड़सवारी, रॉक क्लाइंबिंग और स्विमिंग का शौक था. पायलट बनने का सपना उनकी मां का था, जिसे बेटी ने पूरा किया. उनकी मां नजीया हुल्लुर दिल्ली पब्लिक स्कूल,बीजापुर में कोऑर्डिनेटर हैं. समायरा की मां नजीया हुल्लुर को पायलट की वर्दी और उसका सम्मान हमेशा से आकर्षित करता था. उन्‍होंने ही बेटी समायरा को पायलट बनने के लिए प्रेरित किया और उसका भरपूर साथ दिया. 5वीं में बैठी थी हेलिकॉप्टर समायरा ने एक इंटरव्‍यू में बताया था कि जब वह क्लास 5 में थीं तब बीजापुर के नवराासपुर उत्सव में हेलिकॉप्टर में बैठी थी.उनकी मां कॉकपिट में थीं और वह वर्दी से बहुत प्रभावित हुईं.कुछ साल बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर क्रू मेंबर्स को सम्मान से देखकर उनकी मां ने उनसे कहा मैं चाहती हूं कि तुम्‍हें भी अपने काम के लिए ऐसा सम्मान मिले.क्लास 9 में समायरा ने तय किया कि वो डेस्क जॉब या भारी-भरकम पढ़ाई वाली फील्ड में नहीं जाएंगी. उनकी मां ने एविएशन का सुझाव दिया. पायलट बनने के लिए 10वीं से जुट गईं समायरा ने बताया कि वह क्लास 10वीं में थी तब उन्‍होंने अकासा एयरलाइंस के कैप्टन थपेश कुमार से ओरिएंटेशन क्लास ली,जिससे एविएशन का रोडमैप समझने में मदद मिली. क्लास 11 तक वह पूरी तरह पायलट बनने की तैयारी कर चुकीं थीं. समायरा ने कहा कि उन्‍हें हौसला तब मिला जब एक दोस्त ने कहा कि कितने माता-पिता अपने बच्चों को पायलट बनने को कहते हैं? तुम लकी हो,पूरी मेहनत करो.इसके बाद समायरा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पहले अटेम्‍प्‍ट में पास की परीक्षा 12वीं बोर्ड एग्जाम के बाद समायरा दिल्ली के एक एविएशन अकादमी में पढ़ने गईं. वहां उन्हें छह पेपर्स पास करने थे:एयर रेगुलेशन,एविएशन मेट्रोलॉजी,एयर नेविगेशन,टेक्निकल जनरल, टेक्निकल स्पेसिफिक और रेडियो टेलीफोनी. हर पेपर में 70% मार्क्स जरूरी थे. जहां ज्यादातर स्टूडेंट्स को एक-दो अटेम्प्ट लगते हैं, समायरा ने पांच पेपर्स पहले ही अटेम्प्ट में पास कर लिए. रेडियो टेलीफोनी के लिए उम्र 18 साल होनी चाहिए,इसलिए उन्हें तीन बार रिजेक्शन झेलना पड़ा. फिर भी उन्होंने सात महीने में ग्राउंड ट्रेनिंग पूरी की. 200 घंटे की ट्रेनिंग के बाद मिला सर्टिफ‍िकेट अप्रैल 2024 में समायरा पुणे के बारामती में कार्वर एविएशन में भर्ती हुईं.जहां 200 घंटे की फ्लाइट ट्रेनिंग के बाद उन्हें CPL मिला. पूरी प्रक्रिया में 18 महीने लगे. समायरा ने बताया कि जब उन्‍होंने पहली बार कॉकपिट में बैठकर सूर्यास्त के समय उड़ान भरी.वह नजारा जिंदगी भर नहीं भूलेंगी. उनके इंस्ट्रक्टर ने कई मैन्यूवर्स किए ताकि उनकी सहनशक्ति और मोशन सिकनेस चेक हो सके. समायरा के इंस्ट्रक्टर ने उनसे पूछा कि‘मजा आ रहा है क्या?’. कैसे रही पहली सोलो फ्लाइट? पायलट की ट्रेनिंग में सोलो फ्लाइट सबसे खास पल होता है. ज्यादातर पायलट 36 घंटे की ट्रेनिंग के बाद सोलो उड़ान भरते हैं, लेकिन समायरा ने सिर्फ 28 घंटे में ये मुकाम हासिल किया.समायरा ने बताया कि जब उन्‍होंने अकेले उड़ान भरी,तो जहाज इतना हल्का लगा जैसे कोई वजन ही न हो.वह अनुभव अविश्वसनीय था.समायरा ने एक इंटरव्‍यू में बताया कि लैंडिंग में उन्हें शुरू में दिक्कत हुई. उनके इंस्ट्रक्टर ने सलाह दी कि लैंडिंग के वक्त गहरी सांस लो और फोकस करो.इस छोटी सी सलाह ने उनकी दिक्कत दूर कर दी. मां और दादी की आंखों में आ गए आंसू CPL मिलने पर अकादमी में समायरा को तीन स्ट्राइप्स के साथ सम्मानित किया गया.समायरा ने बताया कि यह देखकर उनकी मां और दादी की आंखों में आंसू आ गए. दादी को मेरे स्कूल के रिजल्ट से थोड़ा मलाल था,लेकिन लाइसेंस मिलने पर वो बहुत खुश थीं.समायरा ने बताया कि उनकी स्कूल में चीफ गेस्ट बनकर जाना भी उनके लिए गर्व का पल था.उनके प्रिंसिपल कहते थे कि कुछ ऐसा करो कि स्कूल में चीफ गेस्ट बनकर लौटो.वह सपना सच हुआ. recent visitors 89

धामनोद नगर परिषद की यह योजना मई 2023 को आरंभ हुई, सितंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया

धार धार जिले के धामनोद नगर परिषद में एशियन डेवलपमेंट बैंक की वित्तीय सहायता से 81 करोड़ 42 लाख रूपये की लागत से एक व्यापक सीवरेज योजना का कार्य प्रगति पर है। इस योजना के अंतर्गत नगर की सीवरेज व्यवस्था को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ तरीके से विकसित किया जा रहा है, जिसमें 6.68 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होगा। यह प्लांट 80.67 किलोमीटर का सीवरेज नेटवर्क का होगा। इसमें एक मुख्य पंपिंग स्टेशन, दो मध्यवर्ती पंपिंग स्टेशन तथा 3 हजार 379 घरेलू सीवरेज कनेक्शन सम्मिलित हैं। धामनोद नगर परिषद की यह योजना मई 2023 को आरंभ हुई थी और सितंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में योजना की भौतिक प्रगति 55.60% तथा वित्तीय प्रगति 45.60% तक पहुँच चुकी है, जो कि निर्धारित समय सीमा के अनुसार संतोषजनक है। इस योजना के अंतर्गत जैसे ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और नेटवर्क का कार्य पूर्ण होगा, मलजल का प्रभावी उपचार किया जाएगा। उपचारित मलजल का एक भाग नगर के पार्कों में सिंचाई एवं अन्य नागरिक उपयोगों में किया जाएगा, जबकि शेष जल को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप वन क्षेत्र अथवा नदी में सुरक्षित रूप से छोड़ा जाएगा। यह योजना न केवल धामनोद नगर के नागरिकों को बेहतर स्वच्छता एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करेगी, बल्कि नर्मदा नदी को प्रदूषण से मुक्त रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी की इंदौर इकाई सभी कार्यों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से पूर्ण करने के लिए कटिबद्ध है।   recent visitors 58

PM मोदी भोपाल से ‘नमामि क्षिप्रे परियोजना’ के तहत घाट निर्माण एवं अन्य कार्यों का वर्चुअल भूमि-पूजन करेंगे

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 31 मई को भोपाल के जम्बूरी मैदान से सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के अंतर्गत 'नमामि क्षिप्रे परियोजना' के तहत घाट निर्माण एवं अन्य कार्यों का वर्चुअल भूमि-पूजन करेंगे। क्षिप्रा नदी पर 778.91 करोड़ रुपए की लागत वाले ये निर्माण कार्य धार, उज्जैन, इंदौर और देवास जिले के हैं। प्रधानमंत्री मोदी 83.39 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले बैराज/स्टॉप डैम/वेटेड कॉजवे का भी भूमि-पूजन करेंगे। साथ ही कालियादेह स्टॉप डैम के 1.39 करोड़ रूपए लागत के मरम्मत कार्य भी शुरू होंगे। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि क्षिप्रा नदी के दोनों किनारों पर शनि मंदिर से नागदा बाईपास तक कुल 29.21 किलोमीटर लम्बाई में घाट निर्माण कार्य किया जाएगा। घाटों पर श्रद्धालुओं के स्नान के लिये आवश्यक जल स्तर और आवागमन बनाए रखने के लिये वेटेड कॉजवे का निर्माण किया जाएगा। सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए क्षिप्रा नदी को अविरल एवं प्रवाहमान बनाए रखने के लिये क्षिप्रा नदी पर बैराज का निर्माण एवं स्टॉप डैम का मरम्मत कार्य भी किया जाएगा। बैराज/स्टॉप डैम/वेटेड कॉजवे निर्माण मंत्री सिलावट ने बताया कि क्षिप्रा नदी पर जल संसाधन विभाग देवास द्वारा 2.53 करोड़ रुपए की लागत से गाजनोद खेडा बैराज ,3.23 करोड़ रूपए की लागत से दखनाखेड़ी बैराज, 3.15 करोड़ रूपए की लागत से पटाड़ा बैराज कम कॉजवे, 3.79 करोड़ रुपए की लागत से रनायर बैराज, 4.73 करोड रुपए की लागत से टिगरियागोगा बैराज, 6.74 करोड रूपए की लागत से सिरोंज बैराज कम कॉजवे और 2.57 करोड़ रूपए की लागत से बरोदपिपलिया बैराज का निर्माण किया जाएगा। नमामि क्षिप्रे परियोजना इकाई उज्जैन के द्वारा क्षिप्रा नदी पर 8.71 करोड़ रुपए की लागत से किट्ठोदाराव स्टॉप डैम तथा कान्ह नदी पर 5.74 करोड़ रुपए की लागत से पंथपिपलई स्टॉप डैम, 4.56 करोड़ रुपए की लागत से जमालपुरा स्टॉप डैम, 6.24 करोड़ रूपए की लागत से गोठड़ा स्टॉप डैम, 5.06 करोड़ रूपए की लागत से पिपलियाराघौ क्रमांक 02 बैराज और 6.34 करोड़ रूपए की लागत से रामवासा क्रमांक 02 बैराज का निर्माण किया जाएगा। जल संसाधन विभाग इंदौर द्वारा 2.69 करोड़ रुपए की लागत से ब्राम्हणपिपलिया स्टॉप डैम, 2.64 करोड़ रुपए की लागत से दर्जीकराड़िया स्टॉप डैम, 1.96 करोड़ रूपए की लागत से कुडाना स्टॉप डैम, 3.43 करोड़ रूपए की लागत से कायस्थ्खेड़ी स्टॉप डैम, 4.32 करोड़ रूपए की लागत से साहदा स्टॉप डैम, 0.53 करोड़ रूपए की लागत से लालखेडी स्टॉप डैम मरम्मत कार्य और 4.43 करोड़ रुपए की लागत से मेलकलमा बैराज सहपुलिया का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा नगर पालिका निगम उज्जैन द्वारा 1.39 करोड़ रुपए की लागत से कालियादेह स्टाप डैम का मरम्मत कार्य किया जाएगा। कान्ह नदी पर उज्जैन जिले में 5 बैराज एवं इंदौर जिले में 6 बैराज, इस प्रकार कुल 11 वैराजों का निर्माण किया जाएगा। इस प्रकार क्षिप्रा एवं कान्ह नदीं पर कुल 21 बैराजों/स्टाप डैम का निर्माण किया जावेगा।   recent visitors 73

भोपाल एम्स में लगातर सामने आ रहे खतरनाक और लाइलाज सुपरबग के मामले, कारण जानकर होंगे हैरान

भोपाल डॉक्टर से बिना परामर्श लिए एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक उपयोग या अनुचित तरीके से सेवन मुश्किलें पैदा कर सकता है। इससे शरीर में संक्रमण फैलाने वाले विभिन्न रोगजनक सुपरबग पैदा हो जाते हैं। विशेषज्ञ ने बताया कि ये लाइलाज हैं, क्योंकि इन पर कोई भी दवा असर नहीं करती जो जानलेवा हो सकता है। एम्स भोपाल सहित राजधानी और एमपी के अस्पतालोें में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। उपचार के लिए उपयोग की गई विभिन्न दवाइयों के ठीक से डिस्पोज नहीं करने से भी सुपरबग पैदा होते हैं। AIIMS की रिपोर्ट में हुआ था चौंकाने वाला खुलासा पिछले साल 2024 भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की रिपोर्ट में देश के 21 नामचीन हॉस्पिटल के ओपीडी वार्ड से लेकर आइसीयू में भर्ती एक लाख मरीजों के रक्त, मलमूत्र, पस, मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी से संग्रह सीएसएफ नमूने की जांच में सुपरबग की श्रेणी के 10 तरह के घातक बैक्टीरिया पाए गए। सुपरबग के बढ़ने में मददगार आम एंटीबायोटिक शोधकर्ताओं ने एक आम एंटीबायोटिक की पहचान की है जो लगभग लाइलाज सुपरबग के बढ़ने में मददगार है.  प्रकाशित एक अध्ययन में अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने पाया कि आम तौर पर लीवर रोग के उपचार के लिए दिए जाने वाले एक एंटीबायोटिक से रोगियों को खतरनाक सुपरबग का जोखिम बढ़ सकता है. मेलबर्न विश्वविद्यालय के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में पीटर डोहर्टी इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शन एंड इम्युनिटी और ऑस्टिन हेल्थ भी शामिल थे. सुपरबग ऐसे बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या कवक को दिया गया नाम है, जिन्होंने उनके इलाज के लिए उपयोग किए जाने वाले एक या अधिक एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लिया है, जिसे रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) के रूप में भी जाना जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एएमआर को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य और विकास के लिए एक शीर्ष जोखिम बताया है. साथ ही यह अनुमान लगाया है कि 2019 में वैश्विक स्तर पर इसके कारण 49.5 लाख लोगों की मौत हुई. आठ साल तक चले नए अध्ययन में पाया गया कि एंटीबायोटिक रिफैक्सीमिन के कारण एएमआर सुपरबग वैनकॉमाइसिन-प्रतिरोधी एंटरोकोकस फेसियम (वीआरई) का लगभग लाइलाज वर्जन वैश्विक स्तर पर उभर आया है, जो एक संक्रामक जीवाणु संक्रमण है, जो अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. शोधकर्ताओं द्वारा किए गए प्रयोगशाला प्रयोग और नैदानिक ​​​​अध्ययनों में पाया गया है कि रिफैक्सिमिन के उपयोग से वीआरई के डीएनए में परिवर्तन हुआ है, जिससे यह डैप्टोमाइसिन एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधी हो गया है, जो मल्टीड्रग-प्रतिरोधी रोगजनकों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्रमुख आखिरी उपाय है.  यह अध्ययन पहले से चली आ रही इस धारणा को चुनौती देता है कि रिफैक्सीमिन से एएमआर होने का जोखिम कम है. उन्होंने कहा, "हमने दिखाया है कि रिफैक्सीमिन वीआरई को डैप्टोमाइसिन के प्रति प्रतिरोधी बनाता है, जो पहले कभी नहीं देखा गया. "यह भी चिंता का विषय है कि ये डैप्टोमाइसिन-प्रतिरोधी वीआरई अस्पताल में अन्य रोगियों में भी फैल सकते हैं. यह एक परिकल्पना है, जिसकी हम वर्तमान में जांच कर रहे हैं." शोधकर्ताओं ने कहा कि निष्कर्ष उभरते एएमआर का पता लगाने के लिए प्रभावी जीनोमिक्स-आधारित निगरानी की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं. recent visitors 77

मां पीताबरा और मैहर वाली मां शारदा समेत श्रीराम तीर्थ चित्रकूट के लिए तीर्थ यात्री ले सकेंगे फ्लाइट

प्रधानमंत्री मोदी 31 मई को करेंगे दतिया और सतना एयरपोर्ट का वर्चुअल लोकार्पण दतिया और सतना को मिलेगी हवाई उड़ान की सुविधा, विकास को मिलेगी रफ्तार मां पीताबरा और मैहर वाली मां शारदा समेत श्रीराम तीर्थ चित्रकूट के लिए तीर्थ यात्री ले सकेंगे फ्लाइट   भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 31 मई को प्रदेश के दो प्रमुख तीर्थ स्थलों दतिया और सतना को हवाई उड़ान की ऐतिहासिक सौगात देंगे। प्रधानमंत्री मोदी भोपाल से वर्चुअली दतिया और सतना में नव निर्मित एयरपोर्ट्स का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी लोकार्पण कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रारंभ से ही प्रदेश के प्रमुख शहरों को हवाई सुविधा से जोड़ने में जुटे हुये हैं। दतिया औऱ सतना शहर धार्मिक , औद्योगिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यहां एयरपोर्ट्स की सुविधा आ जाने से तीर्थ यात्रियों को दतिया की मां पीतांबरा पीठ, सतना की मैहर वाली मां शारदा और श्रीराम के वनवास के साक्षी चित्रकूट धाम पहुंचने के लिए हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इस सुविधा से तीर्थ यात्रा सुगम हो जाएगी, साथ ही दोनों क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास को गति मिलेगी। दतिया को मिली हवाई सेवा की सौगात प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां पीतांबरा की नगरी दतिया अब हवाई सेवा से देश से और भी बेहतर रूप से जुड़ सकेगी। प्रधानमंत्री मोदी के एयपरपोर्ट लोकार्पण के बाद 60 करोड़ रुपये की लागत से नव निर्मित 124 एकड़ में फैले एयरपोर्ट पर प्रारंभिक चरण में 19 सीटर एयरक्राफ्ट उतर सकेंगे। नया एयरपोर्ट पर 1.81 किलोमीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा रनवे बनाया गया है। एयरपोर्ट की पार्किंग में लगभग 50 कारों की पार्किंग व्यवस्था है। यात्रियों की सुविधा के लिए एयरपोर्ट पर दो चेक-इन काउंटर बनाए गए हैं। यह एयरपोर्ट ATR 72 विमानों की क्षमता वाला है। यहां फ्लाई बिग एयरलाइन्स की उड़ानें सप्ताह में चार दिन संचालित होंगी। यह एयरपोर्ट दतिया वासियों के साथ-साथ देशभर से मां पीतांबरा के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का एक सुविधाजनक साधन बनेगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। सतना एयरपोर्ट से विन्ध्य को मिलेगी नई पहचान विन्ध्य क्षेत्र की औद्योगिक राजधानी सतना में भी नये एयरपोर्ट का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। 37 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह एयरपोर्ट पूर्व निर्मित हवाई पट्टी का पुनर्निर्माण कर आधुनिक स्वरूप में विकसित किया गया है। भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण (AAI) ने निर्माण कार्य को रिकॉर्ड समय में 31 अक्टूबर 2024 को पूर्ण कर लिया था और DGCA द्वारा 20 दिसंबर 2024 को लाइसेंस जारी कर दिया गया। इस एयरपोर्ट पर  12 सौ मीटर लंबा रनवे, 750 वर्गमीटर में निर्मित टर्मिनल बिल्डिंग, और एक समय में दो एयरक्राफ्ट पार्किंग की व्यवस्था है। यह एयरपोर्ट अब 19 सीटर विमानों के संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है। एयरपोर्ट में सभी आधुनिक सुविधाएं – एटीसी टावर, फायर स्टेशन, वीआईपी लाउंज, दिव्यांग और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं, ट्रांसफार्मर, डीजी सेट, एम्बुलेंस और सुरक्षा व्यवस्थाएं – छोटे स्वरूप में उपलब्ध कराई गई हैं। यह एयरपोर्ट सतना ही नहीं, बल्कि पूरे विन्ध्य क्षेत्र के उद्योग, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा और क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ बनाएगा। सतना के एयरपोर्ट के प्रारंभ होने से देश और दुनिया में प्रसिद्ध मैहर की शारदा देवी, भगवान राम की वनस्थली चित्रकूट और ज्ञान के तीर्थ के रूप में विकसित नानाजी देशमुख ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट आने वालों के लिए बड़ी सुविधा मिल जाएगी। सतना और आसपास का क्षेत्र खनिजों के साथ सीमेंट आदि कारखानों के लिए आने वाले उद्योगपतियों के लिए भी सुविधाजनक हवाई सफर सुनिश्चित हो सकेगा। सतना के एयरपोर्ट्स तीर्थ यात्रियों के आवागमन के लिए नए द्वार खोल रहा है। इससे प्रधानमंत्री मोदी का 'नये भारत' का वह विजन भी साकार हो रहा है, जिसमें छोटे शहरों को भी बड़ी उड़ान सुविधा दिये जाने का सपना संजोया गया है।   recent visitors 75

सौगात : भोपाल-दतिया के बीच सिर्फ 999 रुपए में यात्री उड़ान भर सकेंगे, प्रदेश में अब आठ एयरपोर्ट हो जाएंगे

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 31 मई को भोपाल आ रहे हैं। वे इस दौरान बड़ी सौगात देने वाले हैं। बता दें कि वे महिला सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यहीं से दतिया और सतना एयरपोर्ट व इंदौर मेट्रो का वर्चुअल लोकार्पण करेंगे।लोकार्पण वाले दिन सतना से हवाई सेवा शुरू करने पर कवायद तेज हो गई है। अभी लाइट के संचालन व किराया तय नहीं हुआ है। इसी तरह इंदौर के लोगों को दिल्ली और मुंबई की तरह मेट्रो की सेवाएं मिलने लगेंगी। हो जाएंगे आठ एयरपोर्ट मध्यप्रदेश में छह एयरपोर्ट कार्यरत हैं। इनमें भोपाल, इंदौर, रीवा, जबलपुर, खजुराहो और ग्वालियर शामिल हैं। सतना, दतिया एयरपोर्टका लोकार्पण होने के बाद प्रदेश में आठ एयरपोर्ट हो जाएंगे। इंदौर मध्यप्रदेश का पहला मेट्रो रेल वाला शहर बनेगा। मोदी महिला सम्मेलन से ही करोड़ों के विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। शिप्रा नदी के दोनों किनारों को मिलाकर 29 किलोमीटर में घाट निर्माण होना है। आधारशिला भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रखेंगे। इंदौर को मेट्रो की सौगात इंदौर अब मेट्रो शहर बनने जा रहा है. पीएम मोदी के इस दौरे पर इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट का वर्चुअल उद्घाटन भी किया जाएगा. इंदौरवासियों को जल्द ही दिल्ली और मुंबई की तरह मेट्रो की सुविधाएं मिलेंगी, जिससे शहर की ट्रैफिक समस्या को राहत मिलेगी और आवाजाही भी आसान हो जाएगी. मेट्रो परियोजना के साथ ही शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर लगभग 29 किलोमीटर तक सुंदर घाटों का निर्माण भी किया जाएगा, जिसकी आधारशिला प्रधानमंत्री ही रखेंगे. उड़ेगा आम आदमी उड़ान योजना के तहत दतिया से हवाई सेवा शुरू करने का जिमा बिग चार्टर एयरलाइंस कंपनी को दिया गया है। लोकार्पण वाले दिन दतिया-भोपाल-दतिया हवाई सेवा शुरू होगी। कंपनी 2 जून से नियमित सेवा शुरू करेगी, जो सोम, मंगल, बुध और गुरुवार को मिलेगी। बिग चार्टर एयरलाइंस ये चार दिन भोपाल से रीवा, रीवा से भोपाल, भोपाल से दतिया, दतिया से खजुराहो, खजुराहो से दतिया और दतिया से भोपाल के बीच लाइट सेवा देगी। सिर्फ 999 रुपए में यात्री भर सकेंगे उड़ान भोपाल-दतिया के बीच सिर्फ 999 रुपए में यात्री उड़ान भर सकेंगे। बाकी के शहरों का किराया भी कुछ इसी तरह का होगा, लेकिन इसका लाभ पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर मिलेगा। यानी 50% सीटें ही 999 में मिलेंगी। बाकी पर लेक्सी फेयर सिस्टम के तहत 2500 से 3500 रुपए किराया लगेगा। ऐनवक्त पर मामूली बदलाव हो सकता है। रीवा को यह जरूरत डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने दिल्ली में नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू से भेंट की। उन्होंने रीवा से इंदौर, हैदराबाद, दिल्ली एवं प्रयागराज के लिए एटीआर-72 विमानों से उड़ानों की आवश्यकतासे मंत्री को अवगत कराया।   recent visitors 70