सिरदर्द को न करें नजरअंदाज: ये संकेत हो सकते हैं किसी गंभीर बीमारी के

सिरदर्द को न करें नजरअंदाज: ये संकेत हो सकते हैं किसी गंभीर बीमारी के

Do not ignore headache: These can be signs of a serious disease Do not ignore headache आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में सिरदर्द को हम अक्सर नींद की कमी या थकान का सामान्य लक्षण मान लेते हैं। लेकिन अगर यह सिरदर्द बार-बार हो रहा है, पेनकिलर से भी ठीक नहीं हो रहा, या इसके साथ अन्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं — तो यह शरीर का एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है। सिरदर्द के पीछे छिपे हो सकते हैं ये बड़े कारण ब्रेन ट्यूमरअगर सिर में बार-बार एक ही स्थान पर दर्द हो रहा है और वह समय के साथ तेज़ होता जा रहा है, तो यह ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। विशेष रूप से अगर दवा लेने के बाद भी आराम नहीं मिल रहा है। माइग्रेनमाइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें सिरदर्द के साथ मतली, तेज़ रोशनी या आवाज़ से चिढ़, और धुंधलापन भी हो सकता है। इसका इलाज केवल दवा नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव से भी संभव है। Read More: सीधी में रातों-रात आदिवासी परिवार बेघर, कमलेश्वर पटेल ने जताया विरोध साइनस इन्फेक्शननाक बंद होना, चेहरे में भारीपन और माथे पर दबाव के साथ दर्द — ये संकेत साइनस के हो सकते हैं। यह वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण होता है। आंखों की समस्याअगर लंबे समय तक स्क्रीन देखने या पढ़ने के बाद सिरदर्द होता है, तो आंखों में नंबर बढ़ना, चश्मा न लगाना या थकावट इसकी वजह हो सकती है। कब सतर्क हो जाएं? Do not ignore headache क्या करें सिरदर्द होने पर? Do not ignore headache न करें इसे मामूली समझने की भूलसिरदर्द एक ऐसा शरीरिक अलार्म है जिसे अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। यह किसी गहरी और गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। अगली बार सिर में हल्का दर्द भी हो, तो उसे नजरअंदाज न करें — क्योंकि कभी-कभी छोटा दर्द, बड़े खतरे की घंटी हो सकता है। recent visitors 206

सीधी में रातों-रात आदिवासी परिवार बेघर, कमलेश्वर पटेल ने जताया विरोध

सीधी में रातों-रात आदिवासी परिवार बेघर, कमलेश्वर पटेल ने जताया विरोध

Tribal family became homeless overnight in Sidhi, Kamleshwar Patel protested सीधी । Tribal family became homeless जिले के डैनीहा गांव में बुधवार-गुरुवार की रात प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से हाहाकार मच गया। इस कार्रवाई में लगभग 100 आदिवासी परिवारों के घर जमींदोज कर दिए गए, जिनमें ज़ालिम कोल, लखन कोल, मोहन कोल और मसाली कोल जैसे परिवार शामिल हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें अपना सामान निकालने तक का वक्त नहीं दिया। पीड़ित परिवारों का दावा है कि वे पिछले 80 वर्षों से इस जमीन पर रह रहे थे। कार्रवाई के बाद अधिकांश परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हो गए, जबकि कुछ को अस्थायी आश्रय स्थल ‘रंग बसेरा’ में शरण दी गई है। कोर्ट के आदेश पर चली कार्रवाई Tribal family became homelessप्रशासन के मुताबिक यह कार्रवाई सिविल कोर्ट के आदेश पर की गई थी। जानकारी के अनुसार, मृगेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ने करीब 20 वर्ष पहले अतिक्रमण हटाने की याचिका दायर की थी, जिस पर 2020 में निर्णय आया था। हाल ही में कोर्ट ने फिर से प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, जिसके बाद राजस्व विभाग की टीम ने यह कार्रवाई अंजाम दी। कमलेश्वर पटेल पहुंचे मौके पर, बताया अमानवीय Tribal family became homelessघटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल गुरुवार-शुक्रवार की रात लगभग 12 बजे मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और सीधी कलेक्टर को फोन कर पीड़ितों की व्यथा सुनाई।पटेल ने इस कार्रवाई को “अन्यायपूर्ण और अमानवीय” करार देते हुए कहा, Read More: ऑपरेशन सिंदूर”: भाजपा का नया नाटक या संस्कृति के नाम पर स्त्री अस्मिता का अपमान? “अगर अतिक्रमण हटाना आवश्यक था, तो पहले इन आदिवासी परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए थी।” कलेक्टर बोले – पहले से जानकारी नहीं थीसीधी कलेक्टर ने सफाई दी कि उन्हें इस कार्रवाई की पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन उचित कार्रवाई करेगा और प्रभावितों को राहत पहुंचाई जाएगी। recent visitors 133

ऑपरेशन सिंदूर”: भाजपा का नया नाटक या संस्कृति के नाम पर स्त्री अस्मिता का अपमान?

ऑपरेशन सिंदूर”: भाजपा का नया नाटक या संस्कृति के नाम पर स्त्री अस्मिता का अपमान?

Operation Sindoor BJP drama or an insult to women’s identity in the name of culture? भोपाल ! Operation Sindoor BJP drama भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर प्रचार के नाम पर भारतीय संस्कृति को बाज़ार में उतार दिया है। इस बार टारगेट हैं देश की महिलाएं और मोहरा बना है सिंदूर। “ऑपरेशन सिंदूर” के नाम से भाजपा सांसदों और कार्यकर्ताओं द्वारा गली-गली घूमकर विवाहित महिलाओं को सिंदूर दान करने का जो अभियान चलाया जा रहा है, उसने न सिर्फ हिंदू परंपरा का मज़ाक उड़ाया है, बल्कि भारतीय नारी की गरिमा को भी बुरी तरह चोट पहुंचाई है। क्या अब सिंदूर भी प्रचार का सामान बन गया है? जो सिंदूर पति-पत्नी के प्रेम और विश्वास का प्रतीक होता है, उसे भाजपा ने चुनावी रथ का पहिया बना दिया है। सवाल ये है कि कोई पराया पुरुष, वह भी एक राजनेता, किसी महिला की मांग में सिंदूर क्यों लगाएगा? क्या यही संस्कृति है? भाजपा के इस कदम से साफ है कि पार्टी के लिए न भारतीय परंपरा मायने रखती है, न स्त्री की गरिमा उन्हें सिर्फ “वोटबैंक” चाहिए, चाहे वह सिंदूर से मिले या जुमलों से। Operation Sindoor BJP drama महिलाओं के प्रति अपराध और सिंदूर का पाखंड एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि भाजपा के 54 मौजूदा सांसदों और विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों के केस दर्ज हैं जिनमें यौन शोषण से लेकर उत्पीड़न तक शामिल हैं। और अब यही पार्टी अपने नेताओं से महिलाओं को सिंदूर दान करवाना चाहती है? यह कैसा दोगलापन है एक तरफ महिला सुरक्षा पर जीरो ज़िम्मेदारी और दूसरी तरफ नारी सम्मान का ढोंग? Operation Sindoor BJP drama Read More: सफल लोगों की 5 ऐसी आदतें हैं, जो हर काम में दिलाती है जीत राजनीति में संस्कृति का बाजारूकरण भाजपा जिस तरह हर धार्मिक प्रतीक को चुनावी ब्रांड बना रही है, वह न सिर्फ धर्म का अपमान है बल्कि जनता की समझदारी का भी अपमान है। आज सिंदूर, कल मंगलसूत्र, फिर सात फेरे क्या शादी की सारी परंपराएं अब भाजपा के प्रचार स्टेज की शोभा बनेंगी? क्या अब पतियों को भी सजग रहना होगा? लोग सोशल मीडिया पर व्यंग्य कर रहे हैं कि अब पतियों को अपनी लुगाइयों को भाजपा सांसदों से बचाना पड़ेगा, क्योंकि पार्टी ने सांसदों को आदेश दिया है कि वह 20 किलोमीटर रोज पैदल चलें और सिंदूर दान करें। यह बात हंसी की नहीं, चिंता की है। देश की महिलाओं को जब सिंदूर जैसे पवित्र प्रतीक के ज़रिए राजनीतिक औज़ार बनाया जाए, तो समाज को खड़ा होना ही होगा। ऑपरेशन सिंदूर असल में भाजपा की संस्कृति के नाम पर संवेदनाओं से खेलने की एक और कोशिश है। यह अभियान ना महिलाओं का सम्मान करता है, ना परंपरा का। यह केवल और केवल प्रचार की राजनीति है और जनता को अब इस राजनीतिक नौटंकी से सावधान रहने की जरूरत है। recent visitors 226

ग्रीन बिल्डिंग्स व पर्यावरण अनुकूल अधोसंरचनाओं की दिशा में राज्य सरकार के साथ सहभागिता करे

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल से बूटेक्स इम्पेक्स टेक के प्रतिनिधि मंडल ने की सौजन्य भेंट नेट जीरो एमिशन बिल्डिंग्स के क्षेत्र में संभावनाओं पर हुई चर्चा  ग्रीन बिल्डिंग्स व पर्यावरण अनुकूल अधोसंरचनाओं की दिशा में राज्य सरकार के साथ सहभागिता करे भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का पर्यावरण अनुकूल, सतत एवं संवहनीय विकास का विजन भारत को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में समर्थ बना रहा है। इस दिशा में पूरे भारत में प्रयास किये जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल से निवास कार्यालय भोपाल में बूटेक्स इम्पेक्स टेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार उद्योगों को सभी आवश्यक सुविधाएं एवं नीति-गत सहयोग देने के लिए सतत कार्य कर रही है। राज्य में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनाने और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने के लिए ठोस रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास की गति अब सतत विकास के सिद्धांतों से जुड़कर तेज़ी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों का अध्ययन करे और ग्रीन बिल्डिंग्स व पर्यावरण अनुकूल अधोसंरचनाओं की दिशा में राज्य सरकार के साथ सहभागिता करे। कंपनी प्रतिनिधियों ने उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल को भारत में नेट जीरो एमिशन बिल्डिंग्स के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों एवं पूर्ण किए गए प्रोजेक्ट्स की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बूटेक्स इम्पेक्स टेक द्वारा निर्मित भवन पूरी तरह से सेल्फ-सस्टेनेबल होते हैं और उन्हें ग्रिड कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे भवन नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों पर आधारित होते हैं, जो पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रतिनिधि मंडल में कंपनी के महाप्रबंधक श्री सुखवंत सोना सिंह सैनी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। recent visitors 101

गढ़बेंगाल के श्री पंडीराम मंडावी को पद्मश्री सम्मान, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं

गढ़बेंगाल के श्री पंडीराम मंडावी को पद्मश्री सम्मान, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं रायपुर देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा बस्तर अंचल के गढ़बेंगाल निवासी श्री पंडीराम मंडावी को वर्ष 2025 के पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया है। यह सम्मान उन्हें जनजातीय वाद्य यंत्र निर्माण और काष्ठ शिल्प कला के क्षेत्र में उनके अद्भुत एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है। श्री मंडावी द्वारा पारंपरिक गोंड और मुरिया समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों ने न केवल बस्तर की कला को राष्ट्रीय मंच दिया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने श्री मंडावी को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की जनजातीय प्रतिभा और सांस्कृतिक समृद्धि का गौरवपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने कहा कि श्री मंडावी जैसे कलाकारों ने अपनी साधना से यह सिद्ध किया है कि हमारी मिट्टी की कला विश्वपटल पर छा सकती है। यह पद्मश्री सम्मान बस्तर की लोकपरंपरा, शिल्प और सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय गौरव दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। recent visitors 170

पीएम मोदी 31 मई को मध्य प्रदेश आ रहे हैं, महिला सशक्तिकरण के लिए आयोजित कार्यक्रम में लेंगे हिस्सा

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई को मध्य प्रदेश आ रहे हैं। वे इस दौरान भोपाल में महिला सशक्तिकरण के लिए आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और राज्य के कई हिस्सों को बड़ी सौगात देंगे। भोपाल का कार्यक्रम सफल हो, इसकी जिम्मेदारी सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री मोदी 31 मई को भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित महिला समागम को संबोधित करेंगे। इस आयोजन में प्रदेश भर की दो लाख महिलाएं हिस्सा लेने वाली हैं। इस आयोजन की सरकार और संगठन दोनों तैयारी कर रहे हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में आयोजन की तैयारियों पर चर्चा हुई। साथ ही, प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिले में आयोजित कार्यक्रमों को सफल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बैठक की जानकारी देते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि मध्य प्रदेश में निवेश लाने के लिए अनुकूल चार्टर बनाने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही एक ऐसा पर्यटन स्थल विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे दुनिया के पर्यटक आएं। इसके अलावा राज्य में जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए नदी ग्रिड योजना बनाई जाएगी। शहरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए टू-टियर और थ्री-टियर शहरों की योजना बनेगी। आगामी कैबिनेट बैठक पचमढ़ी में होगी। इसके साथ ही सरकारी कामकाज को और बेहतर बनाने के लिए टाइपराइटर जैसे पुराने पदों को हटाकर कंप्यूटर ऑपरेटर के पदों का सृजन किया जाएगा। विजयवर्गीय ने बताया है कि खेती को लाभ का धंधा बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के साथ निवेश बढ़ाने पर भी बैठक में चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी अपने एक दिवसीय प्रवास के दौरान भोपाल से उज्जैन के सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के अंतर्गत नमामि क्षिप्रे परियोजना के तहत घाट निर्माण एवं अन्य कार्यों का वर्चुअल भूमि-पूजन करेंगे। क्षिप्रा नदी पर 778.91 करोड़ रुपए की लागत वाले ये निर्माण कार्य धार, उज्जैन, इंदौर और देवास जिले के हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई को प्रदेश के दो प्रमुख तीर्थ स्थलों दतिया और सतना को हवाई उड़ान की ऐतिहासिक सौगात देंगे। प्रधानमंत्री मोदी भोपाल से वर्चुअली दतिया और सतना में नव निर्मित एयरपोर्ट्स का लोकार्पण करेंगे। इसके अलावा भारत का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार भोपाल से वर्चुअली इंदौर मेट्रो के सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर यात्री सेवा का शुभारंभ करेंगे। यह लगभग 6 किलोमीटर का हिस्सा येलो लाइन का सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर है। recent visitors 82

मोरघनिया नाला में बने चेक डेम से पानी को तरसते किसानों के चेहरे पर आई मुस्कान

मोरघनिया नाला में बने चेक डेम से पानी को तरसते किसानों के चेहरे पर आई मुस्कान मनरेगा के तहत बने चेकडेम से 20 किसानों के 17 एकड़ भूमि में बढ़ी सिंचाई सुविधा एमसीबी किसान की मेहनत सफल तभी हो सकती है जब किसान के पास समय पर सिंचाई के लिए जल उपलब्ध हो। ग्राम पंचायत बरदर में नाले के किनारे रहने वाले कई किसानों के पास सिंचाई का संसाधन न होने से उन्हें अपने खेतों से मनचाहा लाभ नहीं मिल पाता था। गांव के किनारे बहने वाले नाले से पूरा बारिश का पानी बहकर आगे हसदेव नदी में जाकर मिलता था और उसके बाद गर्मी आते तक वह नाला पूरी तरह से जल विहीन हो जाता था। बारिश में खेतों मे कटाव करके बहने वाली बारिश का पानी बाद में सिंचाई तो दूर उनके पशुओं के लिए पेयजल भी नहीं दे पाता था। लेकिन बीते वित्तीय वर्ष में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत बनाए गए एक पक्के चेक डेम से अब गांव का एक कोना हर मौसम में हरा भरा रहता है। यहां आधा दर्जन किसान पंपों के सहारे अपने 17 एकड़ से अधिक खेतों में सिंचाई का लाभ लेते हुए दो फसलें और तीन फसलें तक लेने लगे हैं। मई की तपती गर्मी में भी बरदर के दर्जन भर किसानों के खेतों में उड़द की फसल लहलहा रही है।  जिले के जनपद पंचायत खड़गवां का एक ग्राम पंचायत बरदर है। यहां गांव के किनारे से एक मोरघनिया नाला बहता है। यह एक बरसाती नाला है जिसमे बारिश में तो पर्याप्त जल रहता था। लेकिन बारिश खत्म होने के बाद से इसमें जल कम होने लगता था और गर्मी आते तक यह पूरी तरह से सूख जाता था। इस नाले को नरवा विकास के तहत चयनित कर इसका सर्वे किया गया और उपयुक्त जगह पर गत वर्ष एक पक्का चेक डेम बनाया जाना प्रस्तावित किया गया। ग्राम सभा से प्राप्त प्रस्ताव के अनुसार कार्य की स्वीकृति प्रदान करते हुए ग्राम पंचायत बरदर को निर्माण एजेंसी बनाया गया। तकनीकी सहायक राहुल की देखरेख में ग्राम पंचायत ने समय सीमा में कार्य को गुणवत्ता पूर्ण तरीके से पूरा किया। इस कार्य से एक हजार से ज्यादा मानव दिवस का रोजगार भी ग्रामीणों को प्राप्त हुआ। चेक डेम बन जाने के बाद यहां बड़ी मात्रा में जल संचय किया जा रहा है। चेकडेम से पीछे लगभग एक किलोमीटर तक बैकवाटर होने से आस पास का जल स्तर बेहतर हो रहा है। साथ ही किसानों को अपनी फसलों में सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल भी उपलब्ध हो पा रहा है। मोरघनिया नाले में बने चेक डेम से ग्राम पंचायत में रहने वाले किसान सत्यनारायण, फागुनाथ सिंह, राजकुमार, बलदेव, बाबूलाल, राजकिशुन, सुरेश और शिवप्रसाद जैसे कुल 20 किसानों के लगभग 17 एकड़ से अधिक भूमि में दो फसली सिंचाई सुविधा बढ़ गई है। इन किसानों ने बताया कि पहले सूख जाने वाले नाले में चेकडेम बन जाने से सिंचाई की दिक्कत समाप्त हो गई हैं अब हम अपनी मर्जी से फसलों की बुआई करके अच्छा लाभ कमा रहे हैं। वर्तमान में इस चेक डेम से लगी भूमि से लगभग दस एकड़ में उड़द और सब्जी की फसल लगी हुई है। इसके पहले किसानों ने धान और गेहूं की भरपूर फसल लेकर अच्छा मुनाफा कमाया है। कुल मिलाकर एक संसाधन से कई घरों में जीवन की शैली और स्तर में परिवर्तन साफ नजर आ रहा है। ऐसे में महात्मा गांधी नरेगा के तहत बने एक पक्के चेक डेम ने उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में परिवर्तन लाना आरंभ किया है। recent visitors 140