रीबा बेन्नी की समय पर मदद के लिए मुख्यमंत्री का दंपती ने शाल-श्रीफल भेंटकर किया सम्मान

रायपुर पेरिस ओलंपिक्स से आ रही निराशाजनक समाचार के बीच ताजी हवा का झोंका बनकर छत्तीसगढ़ की रीबा बेन्नी आई है, जिन्होंने न्यूजीलैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में तलवारबाजी में सिल्वर मेडल जीतकर न केवल प्रदेश का बल्कि देश का मान बढ़ाया है. मुख्यमंत्री आवास में गुरुवार को साप्ताहिक जनदर्शन का कार्यक्रम हुआ. इस दौरान मुख्यमंत्री का एक दंपती ने शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मान किया. लोगों को कौतुहल हुआ कि आखिर क्या माजरा है. पता चला कि पति-पत्नी रीबा बेन्नी की माता-पिता हैं. माता-पिता इसलिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद देने के लिए आए थे, क्योंकि जब रीबा के पास तलवारबाजी प्रतियोगिता के लिए न्यूजीलैंड जाने के लिए जब पैसे नहीं थे, तब मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि सूटकेस तैयार करो. पैसे का इंतजाम हो जाएगा. मुख्यमंत्री साय के भरोसे के बाद रीबा ने तैयारी जारी रखी. समय पर मुख्यमंत्री ने तत्काल सहायता राशि चार लाख रुपए स्वीकृत किया. पैसा आया और रीबा न्यूजीलैेड गई, और माता-पिता के साथ प्रदेश और देश का मान बढ़ाते हुए तलवारबाजी जैसे भारत के लिए नए खेल में रजत पदक हासिल किया. जनदर्शन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का शाल-श्रीफल भेंटकर समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए आभार जताया. recent visitors 77

अंतिम पर अपना आधिकारिक मान्यता कार्ड अपनी छोटी बहन को देने का आरोप, पेरिस छोड़ने का मिला आदेश

पेरिस भारतीय पहलवान अंतिम पंघाल और उनके सहयोगी स्टाफ को अनुशासनात्मक उल्लंघन के लिए पेरिस छोड़ने का आदेश दिया गया हैं। अंतिम पर अपना आधिकारिक मान्यता कार्ड अपनी छोटी बहन को देने का आरोप है, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने खेल गांव से बाहर निकलते हुए पकड़ा था। जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने कार्रवाई करते हुए उनकी पेरिस ओलंपिक गांव की मान्यता को रद्द कर दिया गया है। इसके बाद अंतिम की बहन को बयान दर्ज कराने के लिए स्थानीय पुलिस थाने ले जाया गया। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के एक बयान में कहा गया है कि फ्रांसीसी अधिकारियों द्वारा उनके संज्ञान में लाया गया यह अनुशासनात्मक उल्लंघन का मामला है। जिसके बाद पहलवान अंतिम और उनके सहयोगी स्टाफ को वापस भेजने का फैसला किया है।   recent visitors 80

फैशन इंफ्लुएंसर उर्फी जावेद की स्नैपचैट अकाउंट से न्यूड तस्वीरें हुई थी लीक

फैंशन इंफ्लुएंसर उर्फी जावेद अक्सर अपने बोल्ड फैशन अवतार के लिए खबरों में रहती हैं। अब उर्फी जावेद ने एक इंटरव्यू में शॉकिंग खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी न्यूड तस्वीरें लीक हो गई थीं। उर्फी ने बताया कि उनकी तस्वीर तब लीक हुई थी जब उनका स्नैप्चैट अकाउंट हैक हो गया था। उर्फी ने बताया कि जब तक उन्होंने वो फोटो डिलीट कीं तबतक बहुत से लोगों ने उसका स्क्रीनशॉट ले लिया था। साक्षी शिवदासानी और नैना भान के साथ खास बातचीत में उर्फी ने इस पूरी घटना पर बात की। उन्होंने कहा, "मैनें इस बात की ज्यादा चर्चा किसी से नहीं की है। कोविड-19 के बिल्कुल बाद किसी ने मेरा स्नैप्चैट अकाउंट हैक कर लिया था और मेरी तस्वीरें स्नैप्चैट मेमोरी में सेव थीं। वो मेरी गलती थी, मैनें डबल ऑथेंटिकेशन नहीं लगाया था।" किसी ने तस्वीरें (न्यूड तस्वीरें) स्टोरी पर शेयर कर दी हैं। मैनें उन्हें तुरंत डिलीट कर दिया था लेकिन लोग स्क्रीनशॉट ले चुके थे। वो तस्वीरें वायरल भी हो चुकी थीं। उर्फी कर चुकी हैं बॉलीवुड डेब्यू बता दें, उर्फी जावेद एक फैशन इंफ्लुएंसर के साथ-साथ कुछ रियलिटी शो में नजर आ चुकी हैं। उर्फी बिग बॉस ओटीटी सीजन 1 में नजर आईं थीं। इसके अलावा वो स्पिल्ट्सविला X5 सीजन में मिसचीफ मेकर बनकर कंटेस्टेंट की मुश्किलें बढ़ाती हैं। उर्फी जावेद एकता कपूर की फिल्म लव सेक्स और धोखा 2 से फिल्मों में भी डेब्यू कर चुकी हैं। उर्फी जावेद को अपने फैशन के साथ-साथ बेबाक तरीके से सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने के लिए भी जानी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने एक फैशन इंफ्लुएंसर को उन्हें घटिया मैसेज भेजने के लिए सबक सिखाया था। उन्होंने उस इंफ्लुएंसर की चैट अपनी स्टोरी पर शेयर की थी। हालांकि, बाद में उर्फी ने वो स्टोरी डिलीट कर दी थी। recent visitors 131

09 अगस्त को कमिश्नर रीवा एवं शहडोल संभाग करेंगे विभिन्न कार्यों की ऑनलाइन समीक्षा

शहडोल कमिश्नर रीवा एवं शहडोल संभाग बीएस जामोद 9 अगस्त 2024 को रीवा तथा शहडोल संभाग के समस्त जिलों के विभिन्न कार्यों की ऑनलाइन समीक्षा करेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व महा अभियान की समीक्षा, हर घर तिरंगा अभियान की तैयारी, रक्षा बंधन पर्व तथा आगामी त्यौहारों पर चर्चा, एक पेड़ मां के नाम की प्रगति एवं समीक्षा, बाढ़ राहत,जर्जर आवास/दीवार/ढांचों  के चिन्हांकन  तथा उनको गिराने की प्रगति एव समीक्षा, हॉस्टल ,आश्रम निरीक्षण तथा प्रवेश की स्थिति, वर्तमान समसामयिक तथा अन्य विषयों की समीक्षा की जाएगी। समीक्षा हेतु निर्धारित समय तथा ऑनलाइन वीसी लिंक प्रथक से प्रदाय की जावेगी, तथा उक्त समीक्षा में समस्त संबंधित अधिकारी पूर्ण जानकारी के साथ सम्मिलित होना सुनिश्चित करें। recent visitors 58

कुंभराज रेलवे स्टेशन पर बड़ा हादसा टला, 60 वर्ष पुरानी बिल्डिंग गिरी

गुना  गुना जिले में गुरुवार सुबह 5 बजे कुंभराज रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग गिर गई. गनीमत रही कि बिल्डिंग गिरने से कोई यात्री हताहत नहीं हुआ वरना बड़ा हादसा हो सकता था. कुंभराज स्टेशन भवन क्षतिग्रस्त होने के बाद से यात्री सुबह से बिना टिकट यात्रा कर रहे है. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बिल्डिंग क्षतिग्रस्त होने से टिकट वितरण का काम रुक गया है. करीब 60 साल पुराने कुंभराज रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग गुरुवार को अचानक भरभराकर गिर गई. हादसे में किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है. हालांकि हादसे के बाद से कुंभराज स्टेशन से साबरमती, कोटा-इंदौर, नागदा-बीना जैसी ट्रेनों में रेल यात्री बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं. टिकट काउंटर बंद होने की वजह से यात्री बिना टिकट के ही यात्रा करने पर मजबूर हैं। इंदौर से गुना आने-जाने वाली ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्री टिकट नहीं ले पा रहे हैं। सूचना मिलने पर रेलवे के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। फिलहाल बिल्डिंग को खाली कराया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक सुबह 5 बजे हादसे से रेल स्टेशन पर पहुंचने वाले सकते में आ गए. कुंभराज स्टेशन से विभिन्न स्टेशनों की ओर यात्रा करने वाले रेल यात्री स्टेशन बिल्डिंग गिरने के बाद भी यात्री जारी रखी, लेकिन टिकट वितरण केंद्र बिल्डिंग के साथ क्षतिग्रस्त हो गया इसलिए सभी यात्रियों ने बिना टिकट अपने गंतव्य की ओर गए. recent visitors 88

दुल्हा-दुल्हन को गोद में उठाकर कराया पार, छत्तीसगढ़-बलौदा बाजार का मल्लीन नाला बना टापू

बलौदा बाजार. बलौदा बाजार जिले के पलारी ब्लॉक मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ग्राम मल्लीन के नाला पारा के लिए बरसात के दो महीने किसी दुःस्वप्न के समान आते हैं जब एक पूरा मुहल्ला सारी दुनिया के साथ अपने ही गाँव से कट जाता है। कुल 204 घरों में बसे 1347 निवासियों वाले ग्राम पंचायत  मल्लीन को दो भागों में बाँटता है मल्लीन नाला। मुख्य भाग में स्कूल, आंगनबाड़ी, राशन भंडार, आवश्यक सामानों की दुकान और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। दूसरा भाग नाला पारा इन सारी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इस भाग के 20 घरों में बसने वाले 125 लोगों के लिए बरसात के दो महीने कई तरह की समस्याओं का सबब बनकर आते हैं, जब थोड़ी सी बरसात में ही नाले का चढ़ा पानी नाला पारा को मुख्य भाग से पूरी तरह पृथक कर देता है। मुख्य बस्ती से कटने के बाद सबसे बड़ी दिक्कत 40 स्कूली बच्चों को शाला तक पहुँचाने में परेशानी आती है। जब पानी घुटनों तक हो तो किसी तरह नाले में बने चैक डेम या पालक के कंधों में बैठ बच्चे नाला पार कर लेते हैं, लेकिन उससे ज्यादा होने पर बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है। जिसके कारण विद्यार्थी शैक्षणिक और बौद्धिक स्तर पर पिछड़ते जाते हैं। यही हाल आंगनबाड़ी केंद्र जाने वाले 8 छोटे बच्चों का है। न बच्चे जा पाते हैं और न ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आ पाती हैं। परिणामस्वरूप पोषण आहार और टीकाकरण जैसे शासन के कार्यक्रम यहाँ तक पहुँच ही नहीं पाते हैं। इस बीच किसी की तबियत खराब हो जाए तो अस्पताल तक पहुँचने का कोई साधन नहीं है। एम्बुलेंस तो दूर डॉक्टर भी मरीज तक नहीं पहुँच पाते, परेशानियाँ केवल जीते जी ही नहीं मरने के बाद भी पेश आती हैं, मुक्तिधाम नाला के इस पार है, इन  महीनों में किसी की मृत्यु हो जाए तो अन्तिम संस्कार का जतन करना टेढ़ी खीर बन जाती है। बरसात के दो महीने गरीब परिवारों के लिए दोहरी मार का कारण बनते हैं, एक तरफ  तो बाहर काम करने को जाने का रास्ता बंद दूसरी तरफ राशन केंद्र से राशन भी नहीं उठा पाते। मुहल्ले के निवासी जनक राम,चिन्ता राम,धरम सिंग ध्रुव, रवि साहू,दादू राम, हीरालाल,बिहारी, पाहरू साहू बताते हैं कि अन्य मौसम में नाले में बने स्टॉपडैम के रपटे या नाले के अंदर से अस्थायी कच्ची सड़क बनाकर आवागमन का जुगाड़ बनाया जाता है। पर यह जुगाड़ पहली बरसात में ही खत्म हो जाता है, नाला पर एक पक्का पुल इन सारी समस्याओं को जड़ से खत्म कर सकती है और इस बाबत शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान कई बार दिलाया गया लेकिन अब तक परिणाम शून्य ही रहा है। बरात गई तो नाला सुखा था लोटे तो नाले में पानी दूल्हे दुल्हन को गोद में उठाकर नाला पार करना पड़ा। बेटी विदा करने की जद्दोजहद नाला पारा में रहने वाले रूपेश की प्रेम विवाह इसी महीने 20 जुलाई को बस्ती पारा की भारती से तय हुई। घर से दूल्हा के रूप में तैयार हुए रूपेश के लिए नाला पार करना सोनी-महिवाल और चनाब के कथानक के कुछ हिस्सों को जीवंत करने जैसा रहा। बहरहाल, सारे बाराती सूखे नाले से आसानी से  नाला पार कर उस पार पहुँचे। अब दुल्हन के घर सारे रस्मो-रिवाज के पूर्ण होने तक सारे घराती मिलकर भगवान से प्रार्थना करते रहे कि पानी न गिरे, वरना बेटी की विदाई जाने कितने दिनों के लिए अटक जाती। जब मांगलिक कार्यक्रम पूर्ण हुए तो दूल्हा- जब दुल्हन लेकर घर लोटे तब तक बारिश हो चुकी थी और नाला में पानी भर जाने से दूल्हे गाड़ी नाला पार नहीं कर पाया और फिर बाराती दूल्हे और दुल्हन को गोद पर उठाकर नाला पार कराया तब दुल्हन अपनी ससुराल पहुंच पाई जो उनके जीवन के लिए एक यादगार पल तो बना पर सारी जीवन इस बात का मलाल भी रहेगा की उसे गोद पर उठाकर ससुराल पहुंचना पड़ा खैर समस्या तो बड़ी है पर इसे हल करना मुमकिन नहीं है जरूरत है तो बस इच्छा शक्ति का की इसे पूरा करना है देखते है की सरकार और प्रशासन जनप्रतिनिधि इस और कब ध्यान देते है और मल्लीन नाला पार बड़ा पुल कब बनता है। recent visitors 133