दृष्टि IAS ने मारे गए छात्रों के परिवारों के लिए किया मुआवजाम विकास दिव्यकीर्ति ने स्टूडेंट्स से एक और बड़ा वादा किया, दिल हो जाएग…

नई दिल्ली दिल्ली में कोचिंग हादसे पर चुप्पी की वजह से सवालों में घिरे विकास दिव्यकीर्ति ने पीड़ित स्टूडेंट्स की मदद के लिए दो बड़े ऐलान किए हैं। प्रतिक्रिया में देरी के लिए माफी मांग चुके विकास दिव्यकीर्ति ने एक तरफ जहां हादसे में जान गंवाने वाले स्टूडेंट्स के परिवारों की आर्थिक सहायता का ऐलान किया तो दूसरी तरफ इस कोचिंग के अन्य स्टूडेंट्स को मुफ्त क्लास देने की भी घोषणा की। विकास दिव्यकीर्ति के संस्थान 'दृष्टि आईएएस' के आधिकारिक एक्स हैंडल से शुक्रवार को बयान जारी किया गया। इसमें विकास दिव्यकीर्ति की ओर से पीड़ित परिवारों और हादसे वाले कोचिंग संस्थान के स्टूडेंट्स की ओर मदद का हाथ बढ़ाया गया है। दिव्यकीर्ति ने पीड़ित परिवार को 10-10 लाख रुपए देने की घोषणा करते हुए कहा कि कोई भी राशि बच्चों के ना रहने की पीड़ा नहीं मिटा सकती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी किसी तरह की मदद की आवश्यकता इन परिवारों की होगी तो वह करेंगे। विकास दिव्यकीर्ति ने कहा- पिछले कुछ दिनों में ओल्ड राजेंद्र नगर में हुई दो दुर्घटनाओं में चार होनहार विद्यार्थियों का असमय निधन हुआ। एक विद्यार्थी नीलेश राय का निधन जलमग्न सड़क पर करेंट लगने से हुआ जबकि तीन विद्यार्थी श्रेया यादव, तान्या सोनी और निविन डाल्विन एक कोचिंग संस्थान की बेसमेंट में हुए आकस्मिक जल-भराव के शिकार हुए। यह समय निश्चित तौर पर चारों बच्चों के परिवारों के लिये अत्यंत कठिन है। इस अपार दुख में हम उनके साथ खड़े हैं। हम जानते हैं कि कोई भी राशि बच्चों के न रहने की पीड़ा को नहीं मिटा सकती, फिर भी इस दुख की घड़ी में अपनी साझेदारी व्यक्त करने के एक विनम्र प्रयास के रूप में, दृष्टि IAS ने चारों शोक-संतप्त परिवारों को ₹10 लाख (प्रत्येक) की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यदि इस शोक के समय में या इसके बाद, हम किसी और प्रकार से भी शोकाकुल परिवारों की सहायता कर सके तो कृतज्ञता महसूस करेंगे। इसके अतिरिक्त, Rau's IAS के सभी वर्तमान विद्यार्थियों की मदद करने के लिये भी हम तत्पर रहेंगे। हम सामान्य अध्ययन, टेस्ट सीरीज़ और वैकल्पिक विषयों की तैयारी के लिए उन्हें निशुल्क शैक्षणिक सहायता और कक्षाएँ उपलब्ध कराएंगे। जो विद्यार्थी इस सुविधा का लाभ लेना चाहें, वे सोमवार, 5 अगस्त 2024 से हमारे करोल बाग स्थित कार्यालय में मौजूद सहायता डेस्क पर संपर्क कर सकते हैं। recent visitors 108

केदारनाथ में फंसे शिवपुरी बदरवास के श्रद्धालुओं से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की बात……

शिवपुरी बादल फटने के बाद आये पानी के सैलाब ने चार धाम की यात्रा पर गए श्रद्धालुओं के लिए संकट खड़ा कर दिया है, सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु जहाँ हैं वहीं फंस गए हैं। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से केदारनाथ यात्रा पर गए करीब 61 श्रद्धालु भी इसमें फंस गए जिसमें से 51 को निकाल लिया गया है जबकि 10 अभी वहीं फंसे हैं जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए मध्य प्रदेश सरकार प्रयासरत है। केंद्रीय मंत्री और गुना शिवपुरी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने केदारनाथ में फंसे यात्रियों से बात की। सिंधिया ने यात्रियों को लगाया फोन, बोले चिंता नहीं करो मैं कर रहा हूँ आप सबकी चिंता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को जब ये जानकारी मिली कि उनके लोकसभा क्षेत्र शिवपुरी के तीर्थयात्री केदारनाथ में फंसे है तो उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की और रेस्क्यू की जानकारी ली। आज सुबह सिंधिया ने तीर्थयात्रियों को फोन लगाकर उनका हालचाल जाना और उनसे कहा कि आप चिंता नहीं करो, मैं आप सबकी चिंता कर रहा हूँ, सभी को सुरक्षित निकाल लिया जायेगा, कोई भी बात हो मुझे तत्काल फोन लगाना। कमलनाथ ने सरकार से की केदारनाथ में फँसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने की मांग, यात्रियों से कहा ‘सुरक्षा सुनिश्चित कर ही यात्रा पर निकलें’ सीएम डॉ मोहन यादव ने उत्तराखंड के सीएम धामी से की बात उधर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस घटना की जानकारी मिलते ही रात को ही उत्तरखंड के मुख्यमंत्री धामी से फोन पर बात की और मध्य प्रदेश के सभी 61 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने का अनुरोध किया। सीएम ने बताया कि 51 लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया है और शेष बचे 10 लोगों को भी जल्दी ही सुरक्षित निकाल लिया जायेगा। जल्दी ही सभी यात्री कर लिए जायेंगे रेक्स्यू उधर जानकारी के मुताबिक रात को बारिश के कारण रेस्क्यू रोक दिया गया था, सुबह फिर ऑपरेशन शुरू किया गया है उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही शिवपुरी के सभी 61 तीर्थ यात्री सुरक्षित निकाल लिए जायेंगे।   recent visitors 102

मूवी रिव्यू: औरों में कहां दम था

अजय देवगन और तब्बू जैसे नामी सितारों से सजी फिल्म 'औरों में कहां दम था' को पहले इसी साल अप्रैल के महीने में रिलीज किया जाना था, लेकिन लोकसभा चुनावों के कारण फिल्म टल गई। दोबारा फिल्म की रिलीज डेट 5 जुलाई घोषित की गई, लेकिन अबकी बार निर्माताओं ने प्रभास की फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' के धमाकेदार प्रदर्शन से घबराकर फिल्म को पोस्टपोन कर दिया। आखिरकार इस फिल्म को इस हफ्ते बिना किसी प्रमोशन के रिलीज कर दिया गया। बड़े सितारों की मौजूदगी के बावजूद इस फिल्म के लिए महज 7 हजार लोगों ने एडवांस बुकिंग की, वहीं सुबह के शोज में भी चुनिंदा दर्शक ही सिनेमा पहुंचे। 'औरों में कहां दम था' की कहानी यह लवस्टोरी फिल्म साल 2001 से 2024 के पीरियड में एक कपल कृष्णा (अजय देवगन) और वसुधा (तब्बू) की मोहब्बत की दास्तान कहती है। मुंबई की एक चॉल में एक-दूसरे के पड़ोसी कृष्णा और वसुधा एक दूसरे को बेहद चाहते हैं। कृष्णा को कंपनी की ओर से जर्मनी जाने का ऑफर मिला है। वे दोनों अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहे हैं। कुछ दिनों पहले कृष्णा का अपने ही इलाके में रहने वाले कुछ बदमाशों से झगड़ा हुआ था। उसे सबक सिखाने के लिए वे बदमाश एक रात अकेली घर लौट रही वसुधा को निशाना बनाते हैं। वसुधा की चीख सुनकर कृष्णा वहां पहुंचता है और गुस्से में दो बदमाशों को मौत के घाट उतार देता है। कृष्णा को उम्र कैद की सजा हो जाती है। वसुधा अब कृष्णा की रिहाई का इंतजार करना चाहती है, लेकिन वह उसे किसी ओर से शादी करने के लिए मना लेता है। अच्छे व्यवहार की वजह से कृष्णा की सजा दो साल कम हो जाती है। जेल से बाहर आने पर उसका सामना वसुधा से होता है। अभिजीत (जिमी शेरगिल) से शादी कर चुकी वसुधा आज भी कृष्णा को भुला नहीं पाई है। लेकिन अब कहानी में आगे क्‍या होता है, इस लव स्टोरी का अंजाम जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाना होगा। 'औरों में कहां दम था' मूवी रिव्‍यू फिल्म 'औरों में कहां दम था' के डायरेक्टर और राइटर नीरज पांडे को अपनी शानदार थ्रिलर फिल्मों के लिए जाना जाता है। पहली बार रोमांटिक जॉनर में उतरे नीरज ने रोमांस में भी थ्रिलर का एंगल डालने की भरपूर कोशिश की, लेकिन अफसोस कि इस चक्कर में वह रोमांस और थ्रिलर में उलझकर रह गए। खासकर फिल्म की कहानी बेहद कमजोर है। फिल्म की शुरुआत ठीकठाक अंदाज में होती है और कृष्णा-वसुधा की लव स्टोरी आपको एक खूबसूरत फिल्म की उम्मीद जगाती है, वहीं जेल में सजा काट रहे अजय देवगन की चुप्पी किसी रहस्य की ओर इशारा करती है। लेकिन इस दौरान फिल्म की धीमी रफ्तार और बार- बार आने वाले गाने आपके सब्र का इम्तहान लेते हैं। इंटरवल तक बतौर दर्शक आप किसी चमत्कार की उम्मीद में फिल्म देखते हैं। लेकिन उसके बाद बार-बार रिपीट होने वाले दृश्य आपकी सारी उम्मीदें तोड़ देते हैं। फिल्म के क्लाईमैक्स में करीब ढाई घंटे के बाद आप खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। बात अगर एक्टिंग की करें तो अजय देवगन और तब्बू ने अपनी रहस्यमयी चुप्पी से फिल्म में जान डालने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन हकीकत में फिल्म में उनसे ज्यादा फुटेज उनके जवानी के किरदारों को मिली है। उनकी जवानी के दिनों के किरदार में नजर आए शांतनु माहेश्वरी और सई मांजरेकर की जोड़ी पर्दे पर खूब जंचती है। खासकर शांतनु ने पर्दे पर कमाल की एक्टिंग की है। लवर बॉय से लेकर एंग्री यंग मैन तक के शेड्स में वह जमे हैं। चुनिंदा दृश्यों में नजर आए जिमी शेरगिल भी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं। लेकिन अफसोस कि कमजोर कहानी के कारण किरदारों की मेहनत बेकार चली गई। लव स्टोरी फिल्म में बेहतरीन म्यूजिक की काफी गुंजाइश होती है, लेकिन इस फिल्म का संगीत कुछ खास नहीं है। फिल्म की सिनेमटोग्रफी और बैकग्रांउड स्कोर भी औसत है। क्‍यों देखें- अगर आप लव स्टोरी वाली फिल्मों के शौकीन हैं, अजय देवगन और तब्बू के फैन हैं तो इस फिल्म का टिकट कटा सकते हैं। वरना इस फिल्म में ऐसा कुछ खास नहीं है, जिसके लिए आप पैसे खर्च करें। recent visitors 129

होमोसेक्शुअल जैसे हैं खुद को स्वीकारकर उसी रूप में सामने आना चाहिए, उन्हें खुद को बदलने की जरूरत नहीं- कंगना

मुंबई कंगना रनौत पेरिस ओलिंपिक्स में हुए महिला-'पुरुष' बॉक्सिंग मैच विवाद पर काफी नाराज हैं। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर कुछ पोस्ट लिखे हैं। उनका कहना है कि वह होमोसेक्शुअल लोगों को पसंद करती हैं। वे लोग जैसे हैं वैसे रह सकते हैं उन्हें खुद को बदलने की जरूरत नहीं है। कंगना ने यह भी लिखा कि उनके कई दोस्त होमोसेक्शुअल हैं और वे जैसे हैं वैसे ही नाम कमा रहे हैं। पुरुष का जनाना बनना अजीब है कंगना ने अपनी इंस्टा स्टोरी पर लिखा है, तो बेसिकली वोक रिलेशनशिप (होमोसेक्शुअल रिलेशनशिप) होने के लिए एक पार्टनर को फीमेल रोल और दूसरे को मेल रोल प्ले करना जरूरी है। वे वही मेल-फीमेल का रोल निभाना पसंद करते हैं साथ ही सामान्य महिला को मसक्युलिन बनना और पुरुष को फेमनिजम के नाम पर जनाना बनना… अजीब है!! ईमानदारी से कहूं तो मुझे होमोसेक्शुअल लोग पसंद हैं। मेरे कुछ करीबी दोस्त होमोसेक्शुअल हैं और वे बेहद टैलेंटेड और बहुत काबिल हैं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि उन्हें दूसरे स्वीकारें इसके लिए किसी की नकल करने की जरूरत है। रखना चाहिए कम्युनिटी का मान कंगना आगे लिखती हैं, उन्हें महिला या पुरुष की नकली कॉपी बनने की जरूरत नहीं। वे बेहद काबिल हैं, उन्हें वैसे ही सामने आना चाहिए जैसा ईश्वर ने उन्हें बनाया है। उन्हें अपने असली रूप से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए, उन्हें खुद को स्वीकारना चाहिए और हर क्षेत्र में चमक बिखेरने पर फोकस करना चाहिए। उन्हें घटिया या सेक्शुअल नहीं बनना चाहिए। उन्हें अपनी कम्युनिटी का मान रखना चाहिए। वे बेहतर के हकदार हैं और हमें उनके लिए सुरक्षित दुनिया बनानी चाहिए। वे जैसे हैं वैसे रह सकते हैं और बराबरी के मौके पा सकते हैं। recent visitors 124

कुएं में घुटा दम, हथौड़ी निकालने उतरे पिता-पुत्र सहित चार की जहरीली गैस से मौत, पुलिस ने निकाले चारों के शव

 छतरपुर  मध्य प्रदेश के छतरपुर में एक बड़ा हादसा हुआ है। घर के भीतर बने पुराने कुएं में चार लोग हथौड़ी निकालने के लिए उतरे थे। कुएं में उतरे सभी लोगों की एक-एक कर मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि चारों लोग कुएं की सफाई कर हथौड़ी की तलाश कर रहे थे। दम घुटने की वजह से सभी की मौत हुई है। सालों से उस कुएं की सफाई नहीं हुई थी। मृतकों में एक ही परिवार के 3 पिता-पुत्र और भतीजे की मौत हुई है। बताया जा रहा है कि कुएं में जहरीली गैस का रिसाव हो रहा था। सभी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। घटना गड़ीमलहरा थाना क्षेत्र के ग्राम कुर्राहा की है। मृतकों के नाम अल्ताफ, मुन्ना कुशवाहा, असलम और बशीर है। जानें कैसे हुई घटना जानकारी के मुताबिक, कुछ मजदूर कुएं के ठीक पास बन रहे मकान में काम कर रहे थे। कारीगर मुन्ना कुशवाहा (45) के हाथ से हथौड़ी छूटकर कुएं में गिर गई। हथौड़ी को लेने मुन्ना कुएं में उतरा। लौट कर नहीं आया। इसके बाद मकान मालिक शेख वसीर (60) कुएं में उतरा। वो भी लौटकर नहीं आया। शेख वसीर का बेटा शेख असलम (37) और भतीजा अलताब (21) भी कुएं में गए। वे भी लौटकर नहीं आए। चारों की मौत हो गई। सुबह 9 बजे हुआ हादसा कुर्राहा गांव निवासी शेख वशीर के घर पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। शुक्रवार की सुबह 9 बजे निर्माण कार्य के दौरान 45 वर्षीय मिस्त्री मुन्नालाल कुशवाहा के हाथ से हथौड़ी संकरे कुएं में गिर गई। मुन्ना लाल पिता रामदयाल हथौड़ी उठाने कुएं में उतरा, लेकिन 15 मिनट तक लौटकर नहीं आया और न ही आवाद देने पर कोई जवाब दे रहा था। तब 60 वर्षीय शेख वशीर पिता शेख रज्जाक कुएं में उतरे, लेकिन वे भी लौटकर नहीं आए, तो दोनों को देखने के लिए शेख वशीर के 37 वर्षीय पुत्र शेख असलम कुएं में उतरे, लेकिन वे भी लौटकर नहीं आए। तब इसी परिवार के 21 वर्षीय शेख अल्ताफ पिता शेख मुस्लिम भी कुएं में उतरे लेकिन वे भी लौटकर नहीं आए। न ही आवाज देने पर कोई रिप्लाई दे रहा था। मौके पर पहुंची सिर्फ पुलिस घबराकर परिजनों ने पुलिस व एंबुलेंस को फोन लगाया। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कुएं में जहरीली गैस की आशंका में फिर कोई कुएं में नहीं उतरा। पुलिस व ग्रामीणों ने कुएं से बाल्टी निकालते में इस्तेमाल होने वाले कांटे की मदद से चारों को वेसुध हालात में बाहर निकाला और तुरंत जिला अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचते तक 10.30 बज गए। ड्यूटी डॉक्टर आशीष शुक्ला ने चेकअप कर सभी को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने बताया कि किसी जहरीली गैस के कारण दम घुटने से मौत हुई है। पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने पर मौत की वजह साफ हो पाएगी। परिजन रसीद खान ने बताया कि एंबुलेंस व पुलिस को फोन किया, पुलिस तो आ गई, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। चारों को निकालकर जिला अस्पताल में लाने में समय लग गया। जिससे चारों की मौत हो गई। 10 साल से ढका था कुंआ शेख वशीर के घर के आंगन में स्थिति संकरा कुंआ सूखा होने के कारण पिछले दस साल से ढका हुआ था। निर्माण कार्य के दौरान कुएं को ढकने के लिए रखी चीप खिसक गई। जिससे उसमें जगह बनने से कारीगर की हथौड़ी फिसलने पर कुएं में जा गिरी। इसी हथौड़ी को निकालने के लिए कारीगर उतरा और उसके बाद एक-एक कर तीन और लोग उतरे, जिनकी मौत हो गई। पूरा गांव हो गया इकट्‌ठा चारों काफी देर तक जब कुएं से बाहर नहीं आए तो घर के अंदर से कुछ अन्य लोग बाहर निकले। आसपास के लोगों को बुलाया और चीख-पुकार मच गई। गांव के लोगों की भीड़ मौके पर लग गई। 100 डायल और एंबुलेंस को फोन किया। पुलिस पहुंची और चारों शवों को कुएं से बाहर निकलवाया। बताया जा रहा है कि तीन साल पहले कुआं चीप से बंद कर दिया था। कुएं में जहरीली गैस के कारण दम घुटने से 4 लोगों की मौत गई।   कटनी में हुई थी चार किसानों की मौत सात दिन पहले कटनी में ऐसी ही घटना हुई थी। 26 जुलाई को सबमर्सिबल पंप डालने कुएं में उतरे चार किसानों की जहरीली गैस से मौत हुई थी। चाचा-भतीजा सहित चार की दम घुटने से हुई मौत के बाद गांव में हड़कंप मच गया था। पुलिस और एनडीआरएफ ने रेस्क्यू ऑपरेशन कर सभी को बाहर निकाला था। दर्दनाक घटना कटनी के जुहली गांव में हुई थी। recent visitors 126