28 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रीय सरपंच संघ भूख हड़ताल की राह पर
सुशील दामले विशेष संवाददाता भोपाल। विकास की सबसे निचले स्तर की स्थानीय इकाई ग्राम पंचायत के सरपंच इन दोनों सरकार से सीधे मुख़ातिव होने की तैयारी कर रहे हैं। इससे सरपंच और सरकार के बीच में टकराव की स्थिति बन सकती है। सरपंचों का कहना है कि हम लंबे समय से सरकार और विभाग के मंत्री की आपसी खींचतान के कारण ग्राम पंचायत के विकास कार्य ठप्प पड़े हुए हैं। 28 सूत्रीय मांगो को लेकर 27 दिसंबर को प्रदेश भर से बड़ी संख्या में सरपंच राजधानी भोपाल के अंबेडकर मैदान में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह तोमर, कमलेश पटेल सरपंच संघ जिलाध्यक्ष बड़वानी, सिवेंद्र सिंह सरपंच संघ जिलाध्यक्ष शहडोल, सोहन कन्नौज सरपंच संघ जिलाध्यक्ष धार समेत कई सरपंचों ने पंचायत में व्याप्त समस्याओं की पीड़ा सार्वजनिक रूप से सुनाई। उनका कहना है कि कई बार ज्ञापनों के माध्यम से सरकार से आग्रह कर चुके हैं, उसके बाद भी सरकार का ध्यान पंचायतों की ओर नहीं है। इससे अब उनका गुस्सा सरकार के खिलाफ और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय सरपंच संघ के अध्यक्ष राजवीर सिंह तोमर का कहना है कि पंचायत संघ की 28 सूत्रीय मांगे हैं जिनको हम सरकार के ध्यान में बार-बार लाए हैं, उसके बाद भी हमारी मांगों की ओर सरकार का रवैया लचर दिखाई नहीं दे रहा है। जनपद और जिला पंचायत स्तर पर सरपंचों के साथ जमकर कमीशन बाजी का खेल चल रहा है। जनपद सीईओ 20 से 40 परसेंट तक कमीशन लेता है उसी का ही भुगतान होता है बाकी सरपंच जो इमानदारी से काम करते हैं उनका भुगतान पेंडिंग में पड़ा रहता है। सरपंच एक प्रकार से कठपुतली बनकर रह गया है। वह सरकार और आम पब्लिक दोनों की गालियां ही सुन रहा है। राष्ट्रीय सरपंच संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि सरकार ने यदि हमारी मांगों पर जल्दी ही विचार नहीं किया तो हम पंचायत में तालाबंदी करेंगे। recent visitors 279