पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा पर जूते रखने वाला आरोपी गिरफ्तार, कांग्रेस ने किया था प्रदर्शन

The accused who put shoes on the statue of the former Prime Minister has been arrested; Congress had protested भोपाल । पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर शरारती तत्वों के द्वारा जूता रखने का मामला सामने आया है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत अरेरा हिल्स थाने में की है. साथ ही उन्होंने 7 दिन में आरोपियों को पकड़ने का पुलिस को अल्टीमेटम दिया है. साथ ही कार्यकर्ताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा की पानी से धुलाई की और दूध से अभिषेक भी किया. इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है. कांग्रेसियों ने नारेबाजी कर थाने में की शिकायत दरअसल, किसी अज्ञात व्यक्ति ने पुरानी विधानसभा मिंटो हाल (कुशाभाऊ ठाकरे सभागार) के सामने चौराहे पर स्थापित लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर दो जूते रख दिए थे. शनिवार दिन में यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव अवस्थी वहां से निकले तो उनकी नजर प्रतिमा के कंधों पर रखे जूतों पर पड़ी. उन्होंने तत्काल सूचना विधायक आरिफ मसूद व कांग्रेस के प्रदेश सचिव अब्दुल नफीस को दी. देखते ही देखते घटनास्थल पर बड़ी संख्या में कांग्रेसी एकत्रित हो गए. फिर नारेबाजी कर विरोध जताया गया. जहांगीराबाद के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष यसवंत यादव ने अरेरा हिल्स थाने में शिकायत आवेदन दिया. साथ ही प्रतिमा का दूध से अभिषेक कर माला पहनाई गई. आरोपी को अरेरा हिल्स पुलिस ने किया गिरफ्तार कांग्रेस के प्रदेश सचिव अब्दुल नफीस ने कहा, ”शास्त्री जी के इस अपमान को कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी, जिस प्रकार असामाजिक तत्वों के द्वारा उनका अपमान किया जा रहा है, ये अशोभनीय है. यदि एक सप्ताह के भीतर पुलिस जूते रखने वाले को गिरफ्तार नहीं करती है तो कांग्रेसी सड़कों पर उतरेंगे. जिस प्रधानमंत्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया. देश को संकट के समय उबारा. उस प्रधानमंत्री का किसी ने अपमान किया.” अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने देर रात एक आरोपी करन बैरागी को गिरफ्तार कर लिया है. recent visitors 169

पचमढ़ी सबसे ठंडा, टेम्प्रेचर @13.4°: 24 शहरों में रात का पारा 20° से नीचे; दूसरे हफ्ते तेज होगा ठंड का असर

Pachmarhi is the coldest, temperature @13.4°: Night temperature below 20° in 24 cities; effect of cold will intensify in the second week भोपाल। नवंबर शुरू होते ही मध्यप्रदेश के शहरों की रातें ठंडी होने लगी हैं। एमपी का हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा है। यहां लगातार दो दिन से तापमान 12 से 13 डिग्री सेल्सियस के बीच है। मंडला, राजगढ़, उमरिया, रीवा, बैतूल और मलाजखंड में भी न्यूनतम तापमान में गिरावट आ गई है। दिन में भी पारा लुढ़कने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, 15 नवंबर से ठंड का असर तेज होगा। पिछले 10 साल से यही ट्रेंड है। हालांकि, दिन में गर्मी का असर दूसरे सप्ताह तक बना रहेगा। इसके बाद पारा 30 डिग्री से नीचे पहुंच जाएगा। उत्तरी हवाओं की वजह से तापमान में गिरावट आएगी। मंडला में 15.6 डिग्री टेम्प्रेचर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर समेत प्रदेश के 24 शहरों में रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे चल रहा है। शुक्रवार-शनिवार की रात में पचमढ़ी में टेम्प्रेचर 13.4 डिग्री, मंडला में 15.6 डिग्री, राजगढ़-उमरिया में 16.4 डिग्री, रीवा में 16.6 डिग्री, बैतूल-मलाजखंड में 16.8 डिग्री रहा। ग्वालियर में 17.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 17.5 डिग्री, रायसेन में 17.6 डिग्री, भोपाल-जबलपुर में 17.8 डिग्री, नौगांव में 17.9 डिग्री, सतना-टीकमगढ़ में 18.0 डिग्री, इंदौर-खरगोन में 18.4 डिग्री, उज्जैन में 18.8 डिग्री, खंडवा में 19 डिग्री, रतलाम में 19.2 डिग्री, धार, गुना-सिवनी में 19.4 डिग्री और नर्मदापुरम में 19.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। नवंबर में ऐसा रहता है प्रदेश का मौसम दक्षिण-पश्चिम मानसून के समाप्त होने के बाद मौसम सामान्यत: शांत होता है, लेकिन आसमान बादलों से घिरा रहता है। अक्टूबर की तरह उमस महसूस नहीं होती है। वहीं, रात के पारे में गिरावट आने लगती है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से ग्वालियर, चंबल, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत कई संभागों में हल्की बारिश हो जाती है। दिन में पारा 30 डिग्री और रात में 15 डिग्री सेल्सियस के नीचे रहता है। recent visitors 192

संत शरण में जीतू पटवारी, पीठाधीश्वर शांडिल्य महाराज से लिया आशीर्वाद

Jeetu Patwari took refuge in saint, took blessings from Peethadheeshwar Shandilya Maharaj भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार, 2 नवंबर को करुणाधाम आश्रम, नेहरू नगर का दौरा कर पीठाधीश्वर सुदेश शांडिल्य महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर जीतू पटवारी ने महाराज को दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं और उन्हें सम्मान स्वरूप शॉल व श्रीफल भेंट किया। इस मुलाकात में पटवारी के साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे, जिनमें पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, भोपाल जिला शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, महामंत्री संजीव सक्सेना, अमित शर्मा और गुड्डू चौहान प्रमुख थे। कांग्रेस नेताओं ने इस अवसर पर संत शांडिल्य महाराज के दर्शन किए और प्रदेश में समृद्धि व शांति की कामना की।  जीतू पटवारी का यह दौरा पार्टी की धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। recent visitors 155

भोपाल में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का अपमान, पीसीसी के पूर्व चीफ अरुण यादव ने जताई नाराजी

Anti-social elements garlanded the statue of former Prime Minister Lal Bahadur Shastri with shoes in Bhopal भोपाल। देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री के भोपाल में अपमान का मामला सामने आया है। इस मामले की वीडियो एक्स पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने वायरल कर तीखी नाराजगी जताई है। देश के महान नेताओं का सम्मान उनकी पुण्य तिथि और जयंती पर किया जाता है, लेकिन उनके अपमान के लिए शरारती तत्व कोई भी मौका नहीं चूकते। महान नेताओं की सार्वजनिक स्थानों व चौराहा-तिराहों पर उनकी स्थापित प्रतिमाएं की देखरेख को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं लेता और इसका परिणाम आए दिन महान नेताओं के अपमान की घटनाएं सामने आती हैं। एक ताजा मामला भोपाल का सामने आया है जिसे कांग्रेस के नेता ने एक्स पर वीडियो के साथ शेयर किया है।भोपाल में पुरानी विधानसभा के सामने पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की प्रतिमा तिराहा पर स्थापित है। जिस पर उनकी पुण्यतिथि और जयंती पर फूल माला डालने के लिए राजनीतिक दलों के नेता पहुंचते हैं। मगर इसके बाद शायद ही कभी कोई नेता इनकी तरफ देखता होगा। प्रतिमा पर धूल चढ़ी रहती है लेकिन अभी एक्स पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस प्रतिमा का एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो से भोपाल शहर शर्मसार हो रहा है क्योंकि पूर्व पीएम शास्त्री की प्रतिमा पर किसी शरारती तत्व ने जूतों की माला पहना दी है। पूर्व पीसीसी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस मामले में दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की है। साथ ही घटना को घोर निंदनीय एवं अपमानजनक बताया है। उन्होंने सरकार से मांग है कि दोषियों पर कठोर से कठोर कार्यवाही की जाए। वहीं, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष और मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने भी इसकी निंदा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। recent visitors 201

मध्यप्रदेश में परिसीमन की तैयारी: 6 नए जिलों और तहसीलों के गठन की तैयारी पूरी, कभी भी घोषणा हो सकती है 

Preparation for delimitation in Madhya Pradesh: Preparations for formation of 6 new districts and tehsils complete, announcement can be made anytime  MP News: मध्यप्रदेश परिसीमन आयोग इन दिनों जिलों, संभाग, तहसीलों का सीमांकन कर रहा है। जिसके 6 नए जिलों और तहसीलों का गठन हो सकता है। भोपाल। मध्यप्रदेश के सभी जिलों, तहसीलों और ब्लॉक की सीमाएं तय करने के लिए एक आयोग का गठन सरकार द्वारा किया जा चुका है। पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष के रूप में रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव को नियुक्त किया गया है। आयोग को जिम्मेदारी दी गई है कि प्रदेश में संभाग, जिले, तहसील, विकासखंड का नए सिरे से सीमांकन कर रूपरेखा तैयार करें। क्या दो महीने में हो पाएगा परिसीमन राज्य सरकार की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि वह पुनर्गठन का काम 2 महीने में पूरा कर लेगी। हालांकि, इस कई जानकारों का मानन है कि यह लंबी प्रक्रिया है। इसमें अभी काफी समय लगने की गुंजाइश है। मध्यप्रदेश में कुल 10 संभाग है। जिसमें 56 जिले और 430 तहसीलें हैं। नई सीमाओं को तय करने के लिए हर संभाग, जिले, तहसील और ब्लॉक लेवल पर रिपोर्ट मांगी जाएगी। फिर उसको देखकर मंथन किया जाएगा। इसके बाद देखा जाएगा कि जिला मुख्यालय से तहसील या ब्लॉक से कितनी दूरी है। इसके साथ ही क्या-क्या विसंगतियां है। आयोग को देखना होगा कि राजस्व, वन, नगरीय निकाय और पंचायत विभाग समन्वय कैस किया जा सकता है। सभी सीमाओं अध्यन करने के बाद ही फाइनल रिपोर्ट तैयारी की हो पाएगी। देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश को क्षेत्रफल के हिसाब से देखा जाए तो यह दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। यहां पर जिला, तहसील और ब्लॉक के नए सिरे से गठन करने की मांग की जा रही है। इसमें कई विसंगतियां हैं। बीते कई सालों में नए जिले और तहसील के गठन के बाद और विसंगतियां बढ़ गई है। सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि जब हमने सरकार बनाई तो हमने इस बात पर ध्यान दिया कि मध्यप्रदेश भौगोलिक दृष्टि से भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। उसका क्षेत्रफल तो है लेकिन इसमें समय के साथ कुछ कठिनाइयां भी आई हैं। जिले तो बढ़ गए हैं, लेकिन सीमाओं को लेकर विसंगतियां हैं। ये 6 तहसीलें बनेंगी जिला? परिसीमन के दौरान कई जिले और तहसीलें बन सकती हैं। भौगोलिक दृष्टि से बीना, चाचौड़ा, खुरई, जुन्नारदेव, लवकुशनगर और मनावर को जिला बनाने की मांग लगातार उठ रही है। पुनर्गठन आयोग बनने से पहले इस पर विचार किया जा सकता है। क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पहले भी कह चुके हैं कि कई टोले, मजरे और पंचायतों के लोगों को जिला, संभाग, तहसील विकासखंड तक पहुंचने के लिए 100-150 किलोमीटर तक के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे क्षेत्रों से दूसरे जिले, संभाग, विकासखंड और तहसील मुख्यालय नजदीक हैं। कई संभाग बड़े-छोटे हो गए हैं। ऐसे में विसंगतियों को दूर करने के लिए नया परिसीमन आयोग बनाया गया है। recent visitors 262

मध्यप्रदेश दिवस ख़ास: आखिर कैसे अस्तित्व में आया मध्यप्रदेश? 

Madhya Pradesh Day Special: How did Madhya Pradesh come into existence?  इंदौर और ग्वालियर जैसे धनी शहरों वाला मध्यप्रांत कैसे मध्यप्रदेश में शामिल हुआ? नेता और अफसर जबलपुर को राजधानी मान जमीन खरीदते रहे लेकिन नेहरू और पटेल ने बाजी क्यों पलट दी? भोपाल (कमलेश)। राजधानी के लिए कैसे भोपाल का चुनाव हुआ? जब नया प्रदेश बना तो चार राज्यों के अफसर-कर्मचारियों के बीच कई तरह के विवाद हुए। यहां तक कि पोहे को लेकर भी अफसर-कर्मचारियों में झगड़ा होता था। आइए चलते हैं यादों के खट्‌टे-मीठे सफर पर… मध्य प्रांत, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल को मिलाकर मध्य प्रदेश बना। आखिर नए राज्य की जरूरत क्यों पड़ी मध्यप्रदेश का जन्म एक विचित्र संयोग था। यहां के रहने वालों ने कभी किसी ऐसे प्रदेश की मांग नहीं की थी, लेकिन जब दिसंबर 1952 में श्रीरामुलु नाम का एक व्यक्ति तेलुगू भाषी राज्य की मांग को लेकर भूख हड़ताल करते हुए मर गया और आंध्र प्रदेश का गठन हुआ, तब देश के बाकी इलाके भी भाषायी आधार पर राज्य की मांग करने लगे। तब सुप्रीम कोर्ट के जज सैयद फजल अली की अध्यक्षता में कवालम माधव पाणिक्कर और डॉ. हृदयनारायण कुंजरु की सदस्यता में 1955 में राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया। मध्यप्रदेश ऐसा राज्य बना, जिसकी कोई भाषायी पहचान नहीं थी। गुना से हिन्दू महासभा के सांसद विष्णु घनश्याम देशपाण्डे ने संसद में नए राज्य का विरोध किया। पुनर्गठन की बहस में बोलते हुए उन्होंने कहा- अगर कोई प्रांत है, जिसका अपना जीवन नहीं है… लाइफ ऑफ इट्स ओन नहीं है, तो वह मध्यप्रदेश है। विधायकों की संयुक्त बैठक नागपुर के विधानसभा भवन में हुई चार राज्यों में सबसे छोटा भोपाल राज्य था। ये अपने शासक नवाब हमीदुल्लाह के बगावती तेवरों के कारण सबसे चर्चित था। आजादी के डेढ़ साल तक नवाब ने भोपाल रियासत का भारत संघ में विलय नहीं किया था। सरदार पटेल के हस्तक्षेप के बाद भोपाल में 30 सदस्यीय विधानसभा का निर्माण हुआ और डॉ. शंकरदयाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया गया। मध्य प्रांत सबसे बड़ा राज्य था। इसमें नागपुर, विदर्भ के 8 जिलों सहित पूरा छत्तीसगढ़ भी शामिल था। राज्यों के विलीनीकरण के दौरान अंग्रेजों की प्रशासकीय इकाई सेंट्रल प्रॉविन्स और बरार को 1950 में मध्यप्रदेश बना दिया गया था। ये सबसे व्यवस्थित राज्य इसलिए भी था क्योंकि यह अंग्रेजों के समय से एक प्रशासनिक इकाई था। 1956 में जब नया राज्य बनना तय हो गया तो अक्टूबर में चारों राज्यों के सभी कांग्रेसी विधायकों की संयुक्त बैठक नागपुर के विधानसभा भवन में की गई। बैठक में सर्वसम्मति से रविशंकर शुक्ल को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया। राज्य बना तो राजधानी को लेकर उठापटक शुरू हो गई 1 नवंबर 1956 को राज्यों के पुनर्गठन के बाद जब नया मध्यप्रदेश बना, तब राजधानी को लेकर काफी जद्दोजहद हुई। जहां ग्वालियर और इंदौर मध्यभारत के बड़े शहर थे, वहीं रायपुर रविशंकर शुक्ल का गृहनगर था। इसके बाद जबलपुर का भी दावा मजबूत था। पुनर्गठन आयोग ने अपनी सिफारिश में जबलपुर का नाम राजधानी के लिए प्रस्तावित किया था। कहा जाता है कि सेठ गोविंददास ने जबलपुर को राजधानी बनवाने के लिए सबसे ज्यादा कोशिश की थी। उन्हीं दिनों विनोबा भावे ने जबलपुर को संस्कारधानी की उपमा भी दी थी। जबलपुर के राजधानी न बन पाने का एक कारण ये भी माना गया कि वहां के समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई कि सेठ गोविंददास के परिवार ने जबलपुर-नागपुर रोड पर सैकड़ों एकड़ जमीन खरीद ली है। अखबारों में छपा कि सेठ परिवार ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि जब जबलपुर राजधानी बनेगी तो वहां जमीनों का अच्छा मुआवजा मिलेगा। ये बात जब प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को पता चली तो भोपाल का पक्ष और मजबूत हो गया। भोपाल को राजधानी बनाने का एक कारण और था- विंध्य प्रदेश में समाजवादी आंदोलन को कमजोर करना। जबलपुर राजधानी बनता तो महाकौशल के साथ विंध्य भी राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र रहता। जबलपुर को राजधानी न बनाने का एक तर्क और दिया गया कि वहां सरकारी कर्मचारी और कार्यालयों के लिए उपयुक्त इमारतें नहीं हैं। इधर, डॉ. शर्मा प्रधानमंत्री पं. नेहरू को यह समझाने में सफल रहे कि भोपाल में बहुत सारी सरकारी इमारतें और जमीन खाली हैं। यहां जमीन खरीदने की जरूरत नहीं होगी। 1958 में नेहरू ने रखी वल्लभ भवन की नींव राज्य बनने के साथ ही नई राजधानी बनाने का काम भी शुरू हुआ। दूसरे मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू ने दक्षिण की तरफ एक सुनसान जगह को मंत्रालय के लिए चुना। इस इलाके का नाम लक्ष्मीनारायण गिरी रखा गया। 1958 में नेहरु ने वल्लभ भवन की आधारशिला रखी। वल्लभ भवन को बनने में 7 साल का समय लगा। सचिवालय का नाम वल्लभ भवन तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र के कहने पर रखा गया। मिश्र वल्लभ भाई पटेल से बहुत प्रभावित थे। उस जमाने में भोपाल का सबसे आखिरी छोर रोशनपुरा चौराहा हुआ करता था। जब भोपाल राजधानी बना तो कर्मचाारियों के लिए नाॅर्थ टीटीनगर और साउथ टीटी नगर बना। उसके बाद भोपाल में एक नंबर, दो नंबर से लेकर ग्यारह नंबर स्टॉप तक बिल्डिंगें बनती रहीं। भोपाल राजधानी बना तो बाकी शहरों को संतुष्ट करने की कोशिश हुई। जबलपुर को हाईकोर्ट, ग्वालियर को रेवेन्यू बोर्ड और इंदौर को लोक सेवा आयोग दिया गया। recent visitors 358

69वें स्थापना दिवस पर मध्य प्रदेश का जश्न, मुख्यमंत्री करेंगे समारोह का शुभारंभ

Madhya Pradesh celebrates 69th foundation day, Chief Minister will inaugurate the function मध्य प्रदेश का 69वां स्थापना दिवस: धूमधाम से मनाया जाएगा राज्य का जन्मदिन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन करेंगे समारोह का शुभारंभ भोपाल। आज मध्य प्रदेश अपना 69वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आतिथ्य में भव्य राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया जाएगा। स्थापना दिवस का मुख्य कार्यक्रम भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में सुबह 9:45 बजे शुरू होगा, जिसमें मुख्यमंत्री ध्वजारोहण कर इस कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ समारोह को आगे बढ़ाया जाएगा। स्थापना दिवस के प्रमुख आकर्षण समारोह में प्रदेश की संस्कृति और गौरव को प्रदर्शित करने के लिए कई खास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें मध्यप्रदेश का राज्य गान, पारंपरिक खेल मलखंब का प्रदर्शन और आर्मी के उपकरणों की प्रदर्शनी प्रमुख हैं। आर्मी उपकरणों का प्रदर्शन सुरक्षा और साहस का प्रतीक होगा, जो देश की रक्षा में सेना की भूमिका को दर्शाएगा।  मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखते हुए इस अवसर पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में बैंड की प्रस्तुति, पारंपरिक नृत्य और संगीत शामिल होंगे, जो राज्य की अनूठी सांस्कृतिक विविधता को उजागर करेंगे। राज्य की गौरवशाली विरासत का उत्सव मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस को पूरे राज्य में खास अंदाज में मनाया जा रहा है। राज्य ने 69 वर्षों की यात्रा में विकास और समृद्धि की दिशा में कई मील के पत्थर हासिल किए हैं। इस अवसर पर प्रदेशवासी अपने राज्य की प्रगति और उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर रहे हैं।  कार्यक्रम का उद्देश्य और भाव इस समारोह का उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक धरोहर को संजोते हुए आने वाली पीढ़ियों को इसे संरक्षित रखने की प्रेरणा देना है। साथ ही, यह आयोजन प्रदेशवासियों में एकता और समर्पण का भाव उत्पन्न करता है, जो राज्य के उज्जवल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस, न केवल राज्य के लिए एक विशेष दिन है बल्कि पूरे देश के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत है। recent visitors 161