भोपाल में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का अपमान, पीसीसी के पूर्व चीफ अरुण यादव ने जताई नाराजी

Anti-social elements garlanded the statue of former Prime Minister Lal Bahadur Shastri with shoes in Bhopal भोपाल। देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री के भोपाल में अपमान का मामला सामने आया है। इस मामले की वीडियो एक्स पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने वायरल कर तीखी नाराजगी जताई है। देश के महान नेताओं का सम्मान उनकी पुण्य तिथि और जयंती पर किया जाता है, लेकिन उनके अपमान के लिए शरारती तत्व कोई भी मौका नहीं चूकते। महान नेताओं की सार्वजनिक स्थानों व चौराहा-तिराहों पर उनकी स्थापित प्रतिमाएं की देखरेख को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं लेता और इसका परिणाम आए दिन महान नेताओं के अपमान की घटनाएं सामने आती हैं। एक ताजा मामला भोपाल का सामने आया है जिसे कांग्रेस के नेता ने एक्स पर वीडियो के साथ शेयर किया है।भोपाल में पुरानी विधानसभा के सामने पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की प्रतिमा तिराहा पर स्थापित है। जिस पर उनकी पुण्यतिथि और जयंती पर फूल माला डालने के लिए राजनीतिक दलों के नेता पहुंचते हैं। मगर इसके बाद शायद ही कभी कोई नेता इनकी तरफ देखता होगा। प्रतिमा पर धूल चढ़ी रहती है लेकिन अभी एक्स पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस प्रतिमा का एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो से भोपाल शहर शर्मसार हो रहा है क्योंकि पूर्व पीएम शास्त्री की प्रतिमा पर किसी शरारती तत्व ने जूतों की माला पहना दी है। पूर्व पीसीसी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस मामले में दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की है। साथ ही घटना को घोर निंदनीय एवं अपमानजनक बताया है। उन्होंने सरकार से मांग है कि दोषियों पर कठोर से कठोर कार्यवाही की जाए। वहीं, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष और मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने भी इसकी निंदा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। recent visitors 193

मध्यप्रदेश में परिसीमन की तैयारी: 6 नए जिलों और तहसीलों के गठन की तैयारी पूरी, कभी भी घोषणा हो सकती है 

Preparation for delimitation in Madhya Pradesh: Preparations for formation of 6 new districts and tehsils complete, announcement can be made anytime  MP News: मध्यप्रदेश परिसीमन आयोग इन दिनों जिलों, संभाग, तहसीलों का सीमांकन कर रहा है। जिसके 6 नए जिलों और तहसीलों का गठन हो सकता है। भोपाल। मध्यप्रदेश के सभी जिलों, तहसीलों और ब्लॉक की सीमाएं तय करने के लिए एक आयोग का गठन सरकार द्वारा किया जा चुका है। पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष के रूप में रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव को नियुक्त किया गया है। आयोग को जिम्मेदारी दी गई है कि प्रदेश में संभाग, जिले, तहसील, विकासखंड का नए सिरे से सीमांकन कर रूपरेखा तैयार करें। क्या दो महीने में हो पाएगा परिसीमन राज्य सरकार की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि वह पुनर्गठन का काम 2 महीने में पूरा कर लेगी। हालांकि, इस कई जानकारों का मानन है कि यह लंबी प्रक्रिया है। इसमें अभी काफी समय लगने की गुंजाइश है। मध्यप्रदेश में कुल 10 संभाग है। जिसमें 56 जिले और 430 तहसीलें हैं। नई सीमाओं को तय करने के लिए हर संभाग, जिले, तहसील और ब्लॉक लेवल पर रिपोर्ट मांगी जाएगी। फिर उसको देखकर मंथन किया जाएगा। इसके बाद देखा जाएगा कि जिला मुख्यालय से तहसील या ब्लॉक से कितनी दूरी है। इसके साथ ही क्या-क्या विसंगतियां है। आयोग को देखना होगा कि राजस्व, वन, नगरीय निकाय और पंचायत विभाग समन्वय कैस किया जा सकता है। सभी सीमाओं अध्यन करने के बाद ही फाइनल रिपोर्ट तैयारी की हो पाएगी। देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश को क्षेत्रफल के हिसाब से देखा जाए तो यह दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। यहां पर जिला, तहसील और ब्लॉक के नए सिरे से गठन करने की मांग की जा रही है। इसमें कई विसंगतियां हैं। बीते कई सालों में नए जिले और तहसील के गठन के बाद और विसंगतियां बढ़ गई है। सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि जब हमने सरकार बनाई तो हमने इस बात पर ध्यान दिया कि मध्यप्रदेश भौगोलिक दृष्टि से भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। उसका क्षेत्रफल तो है लेकिन इसमें समय के साथ कुछ कठिनाइयां भी आई हैं। जिले तो बढ़ गए हैं, लेकिन सीमाओं को लेकर विसंगतियां हैं। ये 6 तहसीलें बनेंगी जिला? परिसीमन के दौरान कई जिले और तहसीलें बन सकती हैं। भौगोलिक दृष्टि से बीना, चाचौड़ा, खुरई, जुन्नारदेव, लवकुशनगर और मनावर को जिला बनाने की मांग लगातार उठ रही है। पुनर्गठन आयोग बनने से पहले इस पर विचार किया जा सकता है। क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पहले भी कह चुके हैं कि कई टोले, मजरे और पंचायतों के लोगों को जिला, संभाग, तहसील विकासखंड तक पहुंचने के लिए 100-150 किलोमीटर तक के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे क्षेत्रों से दूसरे जिले, संभाग, विकासखंड और तहसील मुख्यालय नजदीक हैं। कई संभाग बड़े-छोटे हो गए हैं। ऐसे में विसंगतियों को दूर करने के लिए नया परिसीमन आयोग बनाया गया है। recent visitors 255

मध्यप्रदेश दिवस ख़ास: आखिर कैसे अस्तित्व में आया मध्यप्रदेश? 

Madhya Pradesh Day Special: How did Madhya Pradesh come into existence?  इंदौर और ग्वालियर जैसे धनी शहरों वाला मध्यप्रांत कैसे मध्यप्रदेश में शामिल हुआ? नेता और अफसर जबलपुर को राजधानी मान जमीन खरीदते रहे लेकिन नेहरू और पटेल ने बाजी क्यों पलट दी? भोपाल (कमलेश)। राजधानी के लिए कैसे भोपाल का चुनाव हुआ? जब नया प्रदेश बना तो चार राज्यों के अफसर-कर्मचारियों के बीच कई तरह के विवाद हुए। यहां तक कि पोहे को लेकर भी अफसर-कर्मचारियों में झगड़ा होता था। आइए चलते हैं यादों के खट्‌टे-मीठे सफर पर… मध्य प्रांत, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल को मिलाकर मध्य प्रदेश बना। आखिर नए राज्य की जरूरत क्यों पड़ी मध्यप्रदेश का जन्म एक विचित्र संयोग था। यहां के रहने वालों ने कभी किसी ऐसे प्रदेश की मांग नहीं की थी, लेकिन जब दिसंबर 1952 में श्रीरामुलु नाम का एक व्यक्ति तेलुगू भाषी राज्य की मांग को लेकर भूख हड़ताल करते हुए मर गया और आंध्र प्रदेश का गठन हुआ, तब देश के बाकी इलाके भी भाषायी आधार पर राज्य की मांग करने लगे। तब सुप्रीम कोर्ट के जज सैयद फजल अली की अध्यक्षता में कवालम माधव पाणिक्कर और डॉ. हृदयनारायण कुंजरु की सदस्यता में 1955 में राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया। मध्यप्रदेश ऐसा राज्य बना, जिसकी कोई भाषायी पहचान नहीं थी। गुना से हिन्दू महासभा के सांसद विष्णु घनश्याम देशपाण्डे ने संसद में नए राज्य का विरोध किया। पुनर्गठन की बहस में बोलते हुए उन्होंने कहा- अगर कोई प्रांत है, जिसका अपना जीवन नहीं है… लाइफ ऑफ इट्स ओन नहीं है, तो वह मध्यप्रदेश है। विधायकों की संयुक्त बैठक नागपुर के विधानसभा भवन में हुई चार राज्यों में सबसे छोटा भोपाल राज्य था। ये अपने शासक नवाब हमीदुल्लाह के बगावती तेवरों के कारण सबसे चर्चित था। आजादी के डेढ़ साल तक नवाब ने भोपाल रियासत का भारत संघ में विलय नहीं किया था। सरदार पटेल के हस्तक्षेप के बाद भोपाल में 30 सदस्यीय विधानसभा का निर्माण हुआ और डॉ. शंकरदयाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया गया। मध्य प्रांत सबसे बड़ा राज्य था। इसमें नागपुर, विदर्भ के 8 जिलों सहित पूरा छत्तीसगढ़ भी शामिल था। राज्यों के विलीनीकरण के दौरान अंग्रेजों की प्रशासकीय इकाई सेंट्रल प्रॉविन्स और बरार को 1950 में मध्यप्रदेश बना दिया गया था। ये सबसे व्यवस्थित राज्य इसलिए भी था क्योंकि यह अंग्रेजों के समय से एक प्रशासनिक इकाई था। 1956 में जब नया राज्य बनना तय हो गया तो अक्टूबर में चारों राज्यों के सभी कांग्रेसी विधायकों की संयुक्त बैठक नागपुर के विधानसभा भवन में की गई। बैठक में सर्वसम्मति से रविशंकर शुक्ल को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया। राज्य बना तो राजधानी को लेकर उठापटक शुरू हो गई 1 नवंबर 1956 को राज्यों के पुनर्गठन के बाद जब नया मध्यप्रदेश बना, तब राजधानी को लेकर काफी जद्दोजहद हुई। जहां ग्वालियर और इंदौर मध्यभारत के बड़े शहर थे, वहीं रायपुर रविशंकर शुक्ल का गृहनगर था। इसके बाद जबलपुर का भी दावा मजबूत था। पुनर्गठन आयोग ने अपनी सिफारिश में जबलपुर का नाम राजधानी के लिए प्रस्तावित किया था। कहा जाता है कि सेठ गोविंददास ने जबलपुर को राजधानी बनवाने के लिए सबसे ज्यादा कोशिश की थी। उन्हीं दिनों विनोबा भावे ने जबलपुर को संस्कारधानी की उपमा भी दी थी। जबलपुर के राजधानी न बन पाने का एक कारण ये भी माना गया कि वहां के समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई कि सेठ गोविंददास के परिवार ने जबलपुर-नागपुर रोड पर सैकड़ों एकड़ जमीन खरीद ली है। अखबारों में छपा कि सेठ परिवार ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि जब जबलपुर राजधानी बनेगी तो वहां जमीनों का अच्छा मुआवजा मिलेगा। ये बात जब प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को पता चली तो भोपाल का पक्ष और मजबूत हो गया। भोपाल को राजधानी बनाने का एक कारण और था- विंध्य प्रदेश में समाजवादी आंदोलन को कमजोर करना। जबलपुर राजधानी बनता तो महाकौशल के साथ विंध्य भी राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र रहता। जबलपुर को राजधानी न बनाने का एक तर्क और दिया गया कि वहां सरकारी कर्मचारी और कार्यालयों के लिए उपयुक्त इमारतें नहीं हैं। इधर, डॉ. शर्मा प्रधानमंत्री पं. नेहरू को यह समझाने में सफल रहे कि भोपाल में बहुत सारी सरकारी इमारतें और जमीन खाली हैं। यहां जमीन खरीदने की जरूरत नहीं होगी। 1958 में नेहरू ने रखी वल्लभ भवन की नींव राज्य बनने के साथ ही नई राजधानी बनाने का काम भी शुरू हुआ। दूसरे मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू ने दक्षिण की तरफ एक सुनसान जगह को मंत्रालय के लिए चुना। इस इलाके का नाम लक्ष्मीनारायण गिरी रखा गया। 1958 में नेहरु ने वल्लभ भवन की आधारशिला रखी। वल्लभ भवन को बनने में 7 साल का समय लगा। सचिवालय का नाम वल्लभ भवन तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र के कहने पर रखा गया। मिश्र वल्लभ भाई पटेल से बहुत प्रभावित थे। उस जमाने में भोपाल का सबसे आखिरी छोर रोशनपुरा चौराहा हुआ करता था। जब भोपाल राजधानी बना तो कर्मचाारियों के लिए नाॅर्थ टीटीनगर और साउथ टीटी नगर बना। उसके बाद भोपाल में एक नंबर, दो नंबर से लेकर ग्यारह नंबर स्टॉप तक बिल्डिंगें बनती रहीं। भोपाल राजधानी बना तो बाकी शहरों को संतुष्ट करने की कोशिश हुई। जबलपुर को हाईकोर्ट, ग्वालियर को रेवेन्यू बोर्ड और इंदौर को लोक सेवा आयोग दिया गया। recent visitors 348

69वें स्थापना दिवस पर मध्य प्रदेश का जश्न, मुख्यमंत्री करेंगे समारोह का शुभारंभ

Madhya Pradesh celebrates 69th foundation day, Chief Minister will inaugurate the function मध्य प्रदेश का 69वां स्थापना दिवस: धूमधाम से मनाया जाएगा राज्य का जन्मदिन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन करेंगे समारोह का शुभारंभ भोपाल। आज मध्य प्रदेश अपना 69वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आतिथ्य में भव्य राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया जाएगा। स्थापना दिवस का मुख्य कार्यक्रम भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में सुबह 9:45 बजे शुरू होगा, जिसमें मुख्यमंत्री ध्वजारोहण कर इस कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ समारोह को आगे बढ़ाया जाएगा। स्थापना दिवस के प्रमुख आकर्षण समारोह में प्रदेश की संस्कृति और गौरव को प्रदर्शित करने के लिए कई खास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें मध्यप्रदेश का राज्य गान, पारंपरिक खेल मलखंब का प्रदर्शन और आर्मी के उपकरणों की प्रदर्शनी प्रमुख हैं। आर्मी उपकरणों का प्रदर्शन सुरक्षा और साहस का प्रतीक होगा, जो देश की रक्षा में सेना की भूमिका को दर्शाएगा।  मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखते हुए इस अवसर पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में बैंड की प्रस्तुति, पारंपरिक नृत्य और संगीत शामिल होंगे, जो राज्य की अनूठी सांस्कृतिक विविधता को उजागर करेंगे। राज्य की गौरवशाली विरासत का उत्सव मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस को पूरे राज्य में खास अंदाज में मनाया जा रहा है। राज्य ने 69 वर्षों की यात्रा में विकास और समृद्धि की दिशा में कई मील के पत्थर हासिल किए हैं। इस अवसर पर प्रदेशवासी अपने राज्य की प्रगति और उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर रहे हैं।  कार्यक्रम का उद्देश्य और भाव इस समारोह का उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक धरोहर को संजोते हुए आने वाली पीढ़ियों को इसे संरक्षित रखने की प्रेरणा देना है। साथ ही, यह आयोजन प्रदेशवासियों में एकता और समर्पण का भाव उत्पन्न करता है, जो राज्य के उज्जवल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस, न केवल राज्य के लिए एक विशेष दिन है बल्कि पूरे देश के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत है। recent visitors 153

विजयपुर उपचुनाव में कांग्रेस का विरोध, रिटर्निंग ऑफिसर को हटाने की मांग

Congress protests in Vijaypur by-election, demands removal of returning officer भोपाल। मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर आगामी उपचुनाव में कांग्रेस ने विजयपुर के रिटर्निंग ऑफिसर उदय सिंह सिकरवार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने रिटर्निंग अधिकारी पर पक्षपात और भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से अधिकारी को हटाने की मांग की है। कटारे का कहना है कि 2017-18 में हुए उपचुनाव के दौरान भी सिकरवार पर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें रिटर्निंग ऑफिसर के पद से हटाया गया था। उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा, “हर बार उदय सिंह को ही चुनावी जिम्मेदारी क्यों दी जाती है?” कुल प्रत्याशी और उपचुनाव की प्रक्रिया विजयपुर में कुल 12 और बुधनी में 23 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र स्वीकृत हुए हैं, जबकि कुछ अभ्यर्थियों के नामांकन खारिज कर दिए गए हैं। चुनाव प्रक्रिया के तहत 13 नवंबर को मतदान और 23 नवंबर को मतगणना होगी। recent visitors 91

आज से एकादशी तक छोटे व्यापारियों और ठेले वालों से नहीं ली जाएगी मार्केट फीस’, CM मोहन यादव का निर्देश

‘Market fees will not be taken from small traders and street vendors from today till Ekadashi’, instructions from CM Mohan Yadav CM Mohan Yadav Directed Departments: दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए धनतेरस से देवउठनी एकादशी तक सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था करने के लिए संबंधित विभागों को सीएम साय ने निर्देश दिया। प्रदेश में वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि दीपावली पर्व पर स्थानीय विक्रेताओं से सामग्री की खरीदी को प्रोत्साहित किया जाये। धनतेरस से एकादशी तक सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों और हाथ ठेला वालों से बाजार शुल्क न लिया जाए। सभी नगरीय निकाय स्थानीय स्तर पर साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने विशेष अभियान चलायें। साथ ही प्रदेश में रोशनी के पर्व दीपावली पर विद्युत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री यादव मंत्रालय में समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के पहले प्रदेशवासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीपावली और मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर सभी को शुभकामनाएं दी। recent visitors 111

भोपाल में बजरंग दल के पोस्टर से विवाद: दिवाली की खरीदारी ‘हिन्दू दुकानदारों’ से करने की अपील, कांग्रेस ने जताई नाराजगी

Controversy over Bajrang Dal poster in Bhopal: Appeal to do Diwali shopping from ‘Hindu shopkeepers’, Congress expressed displeasure भोपाल। दीपावली के बीच भोपाल में बजरंग दल के एक पोस्टर ने विवाद खड़ा कर दिया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शहर में पोस्टर लगाए हैं, जिनमें लोगों से दिवाली की खरीदारी केवल हिन्दू दुकानदारों से करने की अपील की गई है और अन्य धर्म के व्यापारियों से सामान न खरीदने का अनुरोध किया गया है। इन पोस्टरों पर लिखा गया है, “अपना त्योहार, अपनों से व्यवहार। दीपावली की खरीदी उनसे करें, जो आपकी खरीदी से दीपावली मना सकें।” विश्व हिंदू परिषद का समर्थन विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रांत प्रचार-प्रसार प्रमुख जितेंद्र सिंह चौहान ने इस अपील का समर्थन करते हुए कहा कि दीपावली सनातनियों का बड़ा त्योहार है और लोगों को अपने ही समुदाय से खरीदारी करनी चाहिए ताकि हर हिन्दू परिवार भी इस पर्व को मना सके। उनका मानना है कि यह त्योहार श्रीराम के अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाता है और इसे समुदायिक स्तर पर समर्थन मिलना चाहिए। बीजेपी की प्रतिक्रिया इस मामले पर बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि कुछ मामलों में सनातन धर्म की भावनाओं को आहत करने की कोशिश की जाती रही है, और ऐसे में धार्मिक संगठनों द्वारा इस तरह की अपील स्वाभाविक है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह सनातन धर्म का विरोध करने वालों के साथ खड़ी रहती है और कहा कि देश में स्वदेशी को बढ़ावा देना जरूरी है। कांग्रेस की कड़ी आलोचना दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश बुंदेला ने बजरंग दल की इस अपील को शर्मनाक बताते हुए इसकी निंदा की है। उन्होंने इसे विभाजनकारी राजनीति करार दिया और कहा कि फूलों और सब्जियों का कारोबार करने वाले अधिकतर लोग दूसरे धर्म के हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस सोच के तहत भगवान को फूल चढ़ाना भी बंद कर देना चाहिए। कांग्रेस ने इसे ‘घटिया सोच’ का परिणाम बताते हुए मुख्यमंत्री से बजरंग दल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भोपाल में लगे इन पोस्टरों ने फिर से धार्मिक भावनाओं और सामाजिक एकता पर सवाल खड़े किए हैं। recent visitors 194