राज्यसभा चुनाव 2026… मोहन और हेमंत का कद बढ़ेगा, उमंग और जीतू के लिए अग्नि परीक्षा, जानें कैसे

Rajya Sabha Elections 2026… Mohan and Hemant to see their stature rise; a litmus test for Umang and Jitu—find out how. भोपाल । Rajya Sabha Elections 2026 में तीसरा प्रत्याशी उतारकर भाजपा ने कांग्रेस को 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मिनी अग्नि परीक्षा में झोंक दिया है। लेकिन, भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी इससे अछूता नहीं है। अगर जीत मिली तो दिल्ली में सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कद बढ़ेगा और अगर हारे तो सवाल भी उठना तय है। उधर, कांग्रेस खेमे में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार व प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए अगले 10 दिन किसी चुनौती से कम नहीं होने वाले। राहुल गांधी की टीम दोनों के नेतृत्व को परखेगी। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा के लिए ये जीत कई मायने में खास तो होगी, लेकिन हार पर उतना गम भी नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के लोग कांग्रेस के खिलाफ किए गए एक प्रयोग की तरह ले सकते हैं। जबकि, बहुमत होते हुए भी अगर नटराजन सफल नहीं हुईं तो ये कांग्रेस के लिए एक बड़ा सदमा साबित होगा। जीते तो भाजपा को ये संभावित लाभ Rajya Sabha Elections 2026 हारे तो ये नुकसान 1-जनता के मन में सवाल खड़े होने तय है कि आखिर बहुमत नहीं था, तब भी भाजपा ने तीसरी सीट कैसे जीत ली, इसके लिए क्या किया होगा?2-कांग्रेस विक्टिम कार्ड खेलेगी। बताएगी कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले दल ने धोखे से जीत हासिल की, इसके लिए जोड़-तोड़ किया। जीते तो कांग्रेस को ये फायदे हारे तो ये नुकसान Rajya Sabha Elections 2026 1-बहुमत होते हुए भी हारे तो जनता के मन से उतरेंगे, अगले निकाय चुनाव व विधानसभा चुनाव में जतना का विश्वास जीतने में दिक्कत आ सकती है।2-भाजपा जनता के बीच जाकर बताएगी कि कांग्रेसी एकजुट नहीं है, आपस में ही खींचतान जारी है। ऐसे में यदि ये सत्ता में आए तो प्रदेश का नुकसान करेंगे। recent visitors 33

MP RajyaSabha Elections 2026: भाजपा प्रत्याशी तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने भरा नामांकन, सीएम मोहन यादव रहे साथ

MP RajyaSabha Elections 2026: BJP candidates Tarun Chugh and Rajneesh Aggarwal filed their nominations, with CM Mohan Yadav accompanying them. भोपाल ! MP RajyaSabha Elections 2026 मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने शनिवार को विधानसभा में नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों के नामांकन पत्र प्रस्तुत कराए। इससे पहले भाजपा कार्यालय में बैठक और मंदिर में पूजा-अर्चना हुई।मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने शनिवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा में दोनों का नामांकन पत्र दाखिल कराया।दोनों ने भाजपा नेताओं के साथ शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन से पहले प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और दोनों प्रत्याशी भाजपा कार्यालय स्थित शिव एवं हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर जीत का आशीर्वाद लिया। इसके बाद सभी नेता विधानसभा के लिए रवाना हुए। नामांकन प्रक्रिया के दौरान विधानसभा परिसर में पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। MP RajyaSabha Elections 2026 हमारे प्रत्याशियों ने भरा नामांकन सीएम मोहन यादव ने कहा कि आज हमारे दोनों ही राज्यसभा प्रत्याशी का नामांकन भर दिया है। इस दौरान भाजपा की सभी दिग्गज नेता मौजूद रहे। इस समय हम सभी हर्ष और उल्लास के साथ हैं। भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। हमारा राज्य संगठन की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में आता है। हम सबने मिलकर उनका नॉमिनेशन फॉर्म जमा करवाया है। हम सभी वर्गों की सेवा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने पार्टी के घोषित उम्मीदवारों पर भरोसा जताते हुए कहा कि भाजपा ने ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, जिन्होंने जमीन पर रहकर संगठन के लिए लंबे समय तक काम किया है। recent visitors 39

राज्यसभा चुनाव: MP में BJP उतारेगी तीसरा उम्मीदवार? विजयवर्गीय के बयान के बाद अटकलें तेज

kailash vijayvargiya said if bjp announces third candidate efforts will be made to ensure victory mp rajya sabha elections, MP RajyaSabha Election 2026 MP RajyaSabha Election 2026: मध्य प्रदेश से बीजेपी ने राज्यसभा की द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल को अपना उम्मीदवार बनाया है मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होने के बीच, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने शुक्रवार (05 जून) को कहा कि अगर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस चुनाव के लिए राज्य से तीसरे उम्मीदवार की घोषणा करती है, तो उसे भी जिताने की कोशिश की जाएगी. विजयवर्गीय के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या भाजपा राज्यसभा चुनाव में मध्यप्रदेश से तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतार सकती है? MP RajyaSabha Election 2026 प्रदेश से राज्यसभा की कुल तीन सीट खाली हो रही हैं. भाजपा ने राज्यसभा की द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार घोषित किया है. कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह की खाली हो रही इस सीट से लंबे समय बाद किसी महिला चेहरे को प्रत्याशी बनाया है. ‘तीसरा उम्मीदवार घोषित होने पर उसे भी जिताने की कोशिश करेंगे’ कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा के दोनों उम्मीदवार बहुत अच्छे हैं और उनके चयन के लिए वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को धन्यवाद देते हैं. उन्होंने कहा,‘‘मुझे उम्मीद है कि हमारे दोनों उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव जीतेंगे. अगर हमारी पार्टी कोई तीसरा उम्मीदवार घोषित कर दे, तो हम उसे भी जिताने की कोशिश करेंगे.’’ एमपी में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए कब है वोटिंग? यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा राज्यसभा चुनाव के लिए मध्यप्रदेश से तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारेगी, पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सीधा जवाब दिए बगैर कहा कि अभी केवल दो सीट के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं. मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को मतदान होगा. इस चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख आठ जून है. recent visitors 31

16 नंबर’ में छिपा है जवाब: राहुल गांधी की पहेली से हलचल, क्या परिसीमन को लेकर दक्षिण की राजनीति पर है इशारा?

The answer lies in ‘number 16’: Rahul Gandhi’s puzzle stirs up a stir, is it a reference to South Indian politics regarding delimitation? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने ’16’ नंबर को लेकर एक रहस्यमयी टिप्पणी करते हुए कहा ‘हे भगवान यही तो वो नंबर है 16। जिसमें पूरा जवाब छिपा है।’ क्या है ’16’ का रहस्य?राहुल गांधी ने बताया कि कल जब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा में भाषण सुन रहे थे, तब उन्हें उनकी ऊर्जा कम लगी। उसी दौरान उन्होंने तारीख देखी 16 अप्रैल। इसी पर उन्होंने कहा कि 16 नंबर में ही इस पहेली का जवाब है। अगर आप किसी को कुछ समझ आया तो प्लीज मुझे सोशल मीडिया पर बताएं। आप जल्द ही इस नंबर के रहस्य को जान जाएंगे। NDA गणित और 16 का कनेक्शनराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का इशारा सीधे एनडीए गठबंधन के अंदरूनी गणित की ओर हो सकता है। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर बहुमत से पीछे रह गई थी और उसे सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस संदर्भ में आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) का महत्व बढ़ जाता है, जिसके पास 16 सांसद हैं और जिसका नेतृत्व चंद्रबाबू नायडू करते हैं। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं है कि राहुल गांधी का इशारा इसी तरफ था। TDP की भूमिका और दक्षिणी राज्यों की चिंताहालांकि राहुल गांधी ने कोई विवरण नहीं दिया, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वे इस ओर इशारा कर रहे थे कि टीडीपी (जो दक्षिण भारत का एक दल है) परिसीमन की योजनाओं पर मोदी सरकार के साथ सहमत नहीं हो सकता है। यह भी गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के मंत्री और टीडीपी के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष नारा लोकेश, जो नायडू के बेटे हैं, ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी को एनडीए की ओर से देश को आश्वासन देने के लिए धन्यवाद दिया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा। परिसीमन बिल पर क्यों उठे सवाल?राहुल गांधी का यह बयान उस समय आया है जब केंद्र सरकार लोकसभा सीटों के परिसीमन की तैयारी कर रही है। यह प्रक्रिया 2023 में पास महिला आरक्षण कानून से भी जुड़ी बताई जा रही है। दक्षिण भारत के कई दलों को डर है कि पुरानी जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से उनकी हिस्सेदारी कम हो सकती है। तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सहित कई दलों का कहना है कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ, तो दक्षिण राज्यों की लोकसभा हिस्सेदारी 24% से घटकर 20% तक आ सकती है। recent visitors 122

खाली खजाना, भारी वादे— कर्ज के सहारे चल रही मोहन सरकार ने 1800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया

Empty coffers, big promises—the debt-ridden Mohan government has taken a new loan of ₹1,800 crore. भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार की वित्तीय सेहत को लेकर खतरे की घंटी बज चुकी है। मंगलवार को राज्य सरकार ने 1800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है। इस बार कर्ज लेने की प्रक्रिया पिछले साल के मुकाबले एक महीने पहले ही शुरू कर दी गई है। इसके पीछे की मुख्य वजह केंद्र से मिलने वाले टैक्स के हिस्से में हुई कटौती और आरबीआई के नए नियम हैं, जिसने सरकार को शुरुआती महीनों में ही बाजार से पैसा उठाने पर मजबूर कर दिया है। बजट से ज्यादा हुआ कर्जमध्य प्रदेश का चालू वित्त वर्ष (2026-27) का बजट करीब ₹4,38,317 करोड़ का है, लेकिन राज्य पर कुल सार्वजनिक कर्ज अब ₹5,20,000 करोड़ के पार निकल गया है। यानी सरकार की कुल कमाई और खर्च के बजट से भी करीब 80,000 करोड़ रुपये ज्यादा का कर्ज प्रदेश पर लदा हुआ है। 2007 में जो कर्ज महज ₹52,731 करोड़ था, वह पिछले 20 सालों में 10 गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। क्या है कर्ज बढ़ने की वजहकेंद्र की कटौती और लाडली बहना का बोझ राज्य की आर्थिक कमर टूटने के पीछे दो बड़े कारण हैं। एक तो केंद्र सरकार ने राज्यों की टैक्स हिस्सेदारी को 7.850% से घटाकर 7.347% कर दिया है। महज 0.5% की यह गिरावट मध्य प्रदेश को हर साल ₹8000 करोड़ का चपत लगाएगी। दूसरी ओर सरकार की लाडली बहना फ्लैगशिप योजना के तहत 1.25 करोड़ महिलाओं को हर महीने ₹1500 दिए जाते हैं। इस अकेले मद में सरकार को हर महीने ₹1,836 करोड़ का नकद भुगतान करना पड़ रहा है। आखिर इतनी जल्दी कर्ज क्यों?सरकार ने इस बार अप्रैल में ही कर्ज लेना क्यों शुरू किया? इसके पीछे आरबीआई की एक नई नीति है। अब राज्यों की अनयूटिलाइज्ड लोन लिमिट अगले साल के लिए फॉरवर्ड नहीं होगी। अगर सरकार इस साल की ₹85,000 करोड़ की लिमिट का उपयोग नहीं करती, तो वह पैसा लैप्स हो जाता। इसलिए, विकास कार्यों और योजनाओं को जारी रखने के लिए सरकार ने शुरुआत में ही कर्ज उठाना बेहतर समझा। recent visitors 138

35 करोड़ का गेहूं सड़ाकर 150 करोड़ का नुकसान, भाजपा सरकार की लापरवाही या संगठित भ्रष्टाचार: जीतू पटवारी

Loss of Rs 150 crore due to rotting of wheat worth Rs 35 crore, negligence of BJP government or organised corruption: Jitu Patwari भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रायसेन जिले के दिवटिया (नूरगंज) एवं नूरगंज वेयरहाउस में हजारों टन गेहूं सड़ने और उसकी लागत 35 करोड़ रुपए से बढ़कर 150 करोड़ रुपए तक पहुंचने के मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा और आक्रामक हमला बोला है। पटवारी ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रदेश में फैले भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और गैरजिम्मेदार शासन का भयावह उदाहरण है। जिस अनाज को गरीबों के घर तक पहुंचना था, वह वर्षों तक गोदामों में सड़ता रहा और अंतत: जहरीला बन गया। यह केवल अनाज की बबार्दी नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों की खुली लूट है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच समर्थन मूल्य पर खरीदा गया यह गेहूं लगभग 20 हजार टन मात्रा में वेयरहाउस में पड़ा रहा, लेकिन सरकार और संबंधित अधिकारियों ने समय पर इसका उठाव सुनिश्चित नहीं किया। न तो वितरण की कोई ठोस योजना बनाई गई और न ही भंडारण की समुचित व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप, करोड़ों रुपए का अनाज पूरी तरह सड़कर अनुपयोगी हो गया। पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 35-36 करोड़ रुपए का गेहूं किराया, मेंटेनेंस, परिवहन और कीटनाशक छिड़काव जैसे खर्चों के कारण बढ़ते-बढ़ते 150 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है या फिर जानबूझकर लागत बढ़ाने और घोटाले को छिपाने का प्रयास? उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला एक संगठित आर्थिक अपराध की ओर इशारा करता है, जहां भंडारण की आड़ में वर्षों तक अनाज को सड़ने दिया गया और उसके नाम पर लगातार खर्च दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। यह सीधे-सीधे जनता के टैक्स के पैसे की लूट है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह सिर्फ गेहूं नहीं सड़ा है, यह भाजपा सरकार की नीयत और व्यवस्था सड़ चुकी है। गरीब का हक गोदामों में सड़ रहा है और सत्ता के संरक्षित लोग उससे मुनाफा कमा रहे हैं। यह घोटाला नहीं, बल्कि जनता के साथ विश्वासघात है। उन्होंने आगे कहा कि कीटनाशकों के अत्यधिक छिड़काव के कारण यह गेहूं अब जहरीला हो चुका है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा है। यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। यदि समय रहते इस अनाज का उचित वितरण किया जाता, तो लाखों गरीब परिवारों को राहत मिल सकती थी। पटवारी ने यह भी कहा कि यह घटना मध्यप्रदेश की भंडारण व्यवस्था की पूरी पोल खोलती है। जहां एक ओर किसान अपनी उपज बेचने के लिए संघर्ष करता है, वहीं दूसरी ओर खरीदा गया अनाज वर्षों तक गोदामों में सड़ता रहता है। यह प्रशासनिक असफलता के साथ-साथ नीतिगत विफलता का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करना अत्यंत आवश्यक है। कौन अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार है? किसके आदेश पर अनाज को वर्षों तक रोका गया? क्यों समय पर वितरण नहीं हुआ? इन सभी सवालों का जवाब प्रदेश की जनता मांग रही है। पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने इस गंभीर मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी प्रदेशभर में व्यापक जनआंदोलन छेड़ेगी और जनता के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी। जनता के पैसे की बबार्दी और गरीबों के हक की लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा सरकार को हर हाल में जवाब देना होगा और दोषियों को सजा दिलानी होगी। प्रदेश कांग्रेस की प्रमुख मांगें: 1. इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। 2. जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। 3. 150 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई दोषियों से वसूली जाए। 4. प्रदेश की भंडारण एवं वितरण प्रणाली की समग्र समीक्षा कर सुधार लागू किए जाएं। 5. भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र विकसित किया जाए। recent visitors 58

सरकार को भाजपा के चुनावी संकल्प पत्र 2023 के पृष्ठ 81 को दिलाया याद

Reminded the government of page 81 of the BJP’s election manifesto 2023 भोपाल। राजधानी के गांधी भवन में मध्य प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भोपाल दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के विधायक भगवानदास सबनानी भी शामिल हुए।  विधायक सबनानी ने कर्मचारियों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।  उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे उनकी जायज मांगों को सरकार के समक्ष उचित पटल पर रखेंगे। विधायक ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का सहानुभूतिपूर्वक विचार कर ठोस समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने प्रतिनिधि मंडल को मुख्यमंत्री से मिलाने की भी बात कही। इस दौरान आउटसोर्स कर्मचारी प्रतिनिधि मंडल ने विधायक सबनानी को मांग पत्र भी सौंपा और उस पर विचार करने का आग्रह किया।   बैठक में कर्मचारी नेताओं ने कई बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई और कर्मचारियों में एकता बनाए रखने की बात पर जोर दिया गया। बैठक में वरिष्ठ कर्मचारी नेता अनिल वाजपेयी ने कहा कि यह वर्ग वर्षों से सरकार की दोहरी नीति से आर्थिक नुकसान उठा रहा है।  नौकरी की सुरक्षा की मांग  बैठक में प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी मांगों और कार्यस्थल पर आ रही समस्याओं को विस्तार से साझा किया। कर्मचारियों ने संकल्प पत्र 2023 के पृष्ठ क्र 81 अनुसार मुख्य रूप से वेतन वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा और शोषण मुक्त कार्य वातावरण की मांग की। बैठक में आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी, सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। recent visitors 88