भाजपा की बड़ी मुश्किल ,सिंधिया और तोमर में तूफानी घमासान

ग्वालियर ! भारतीय जनता पार्टी में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति अब गले की फांस बनती जा रही है. क्योंकि अध्यक्ष पद के लिए अब नेता समर्थकों में खींचतान मची हुई है. वहीं मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति में हुए फेरबदल के बाद अब सबकी निगाहें जिलाध्यक्ष के पद पर टिकी हुई हैं. ग्वालियर में मुकाबला सीधे तौर पर सिंधिया समर्थकों और नरेंद्र सिंह तोमर गुट के बीच देखा जा रहा है. बड़े स्तर पर नेता भले ही कुछ ना कह रहे हों पर अंदरूनी तौर पर खींचतान जारी है. मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है. सभी जिलों के ऑब्जर्वर जिला अध्यक्ष के दावेदारों के नाम कुछ बंद लिफाफों में लेकर भोपाल पहुंच चुके हैं. वहीं प्रदेश स्तरीय बैठक में मंथन किया जा रहा है. इस बीच मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जिला अध्यक्ष के तौर पर घमासान मचा हुआ है. वजह है, सिंधिया गुट और नरेंद्र सिंह तोमर गुट के समर्थकों का आमने-सामने होना. BJP के पास बंद लिफाफों में नाम पहुंच चुके हैं, जिन्हें अब भोपाल में फाइनल किया जाएगा. इन नामों को आगे बढ़ाने का काम पार्टी के बड़े नेता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया, मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, नारायण सिंह कुशवाहा और सांसद भारत सिंह कुशवाहा की सहमति से किया जाएगा. बीजेपी में जिला अध्यक्ष के पद के लिए मचे घमासान में बीजेपी-कांग्रेस अपनी-अपनी राय दे रही है. पूर्व सांसद विवेक शेजवलकर ने कहा, “सभी कार्यक्रम केंद्रीय नेतृत्व द्वारा निर्धारित टाइम लाइन के हिसाब से चल रहे हैं. कहीं भी खींचतान जैसी कोई स्थिति नहीं है. मैं खुद चुनावी प्रक्रिया की बॉडी मैं हूं और मुझे अब तक ऐसी कहीं भी स्थिति दिखाई नहीं दी है.” इधर कांग्रेस भी बीजेपी के हालातों पर तंज कसने में पीछे नहीं है. प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग उपाध्यक्ष आरपी सिंह ने कहा, ” भारतीय जनता पार्टी में पहले से ही श्रेय लेने के लिए प्रतिस्पर्धा और होड़ जैसी स्थिति हम सभी ने देखी है. वहीं दूसरी ओर जब से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारतीय जनता पार्टी में एंट्री की है तभी से वर्तमान की भाजपा और पूर्व से स्थापित भाजपा में संघर्ष देखने को मिल रहा है. ऐसे में जो भारतीय जनता पार्टी खुद को सुचिता और अनुशासन का प्रतीक बताती है वहां ऐसी स्थिति आने के बातें दिल्ली तक पहुंच रही हैं. ये भारतीय जनता पार्टी में चिंगारी लग चुकी है और इसी तरह की स्थितियां बीजेपी और संगठन को समाप्त करने का काम करेगी.” जिला अध्यक्ष पद के लिए भारतीय जनता पार्टी में कितना भी घमासान मचा हो लेकिन अंतिम मुहर दिल्ली हाई कमान से ही लगेगी, लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि जिला अध्यक्ष पद पर होने वाली नियुक्ति पर नाम किसका होगा. इसमें तोमर गुट को तवज्जो मिलेगी या सिंधिया समर्थक भारी पड़ेंगे, ये तो वक्त ही बताएगा. recent visitors 306

मध्यप्रदेश बीजेपी जिलाध्यक्षों को लेकर खींचतान, इंदौर,सहित डेढ़ दर्जन जिलों में नहीं बनी सहमति

भोपाल ! मध्यप्रदेश में बीजेपी जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर सियासी माहौल गर्माया हुआ है। फीडबैक और रायशुमारी के बाद अब जिलाध्यक्षों के चयन के लिए भोपाल में बीजेपी दफ्तर में मंथन चल रहा है। बीजेपी निर्वाचन पदाधिकारी नए जिलाध्यक्षों के नामों पर मंथन कर रहे हैं। खबरें हैं कि इंदौर ग्रामीण और सागर सहित करीब डेढ़ दर्जन जिलों में जिलाध्यक्षों को लेकर जमकर खींचतान मची हुई है और कोई सहमति नहीं बन पाई है। मध्यप्रदेश में भाजपा जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर प्रदेश कार्यालय में से वन टू बन चर्चा शुरू हो गई। कई जिलों में सहमति नहीं बन पाने की खबरों के बीच प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह पार्टी दफ्तर में इन जिलों का मसला सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। सबसे ज्यादा विवाद इंदौर ग्रामीण, सागर में हैं। इंदौर ग्रामीण जिला अध्यक्ष चिंटू वर्मा हैं, कुछ नेता प्रयास कर रहे हैं कि वे एक बार फिर अध्यक्ष बनें, जबकि कुछ नेता प्रयास कर रहे हैं कि उनकी जगह दूसरे नेता को इंदौर ग्रामीण की कमान दी जाए। चिंटू वर्मा का कार्यकाल सिर्फ एक साल का ही हुआ है। इंदौर ग्रामीण के लिए भाजपा के एक विधायक दिल्‍ली तक सक्रिय हो गए हैं, वे अपनी पसंद का जिला अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं। सागर जिले के अध्यक्ष को लेकर भी गहमा गहमी बनी हुईं है। यहां पर मंत्री गोंविद राजपूत अपनी पसंद से अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं, जबकि पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह अपनी पसंद का अध्यक्ष चाहते हैं। इसके चलते यहां पर जमकर पेंच फंस गया है। इसके अलावा सतना में भी पेंच फंसता हुआ दिखाई दे रहा है। इन जिलों के अलावा करीब डेढ़ दर्जन और ऐसे जिले हैं, जहां पर रायशुमारी में नाम निकल कर सामने नहीं आए। यदि इन जिलों पर सहमति नहीं बनी तो यहां पर जिला अध्यक्ष के चयन को होल्ड किया जा सकता है और बाकी बचे जिलों के जिलाध्यक्षों के नामों का ऐलान 5 जनवरी को किया जा सकता है। recent visitors 187

यूनियन कार्बाइड कचरे पर सुमित्रा महाजन से मिले पटवारी, जताई चिंता

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को इंदौर की पूर्व सांसद, पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन (ताई) से मुलाकात कर पीथमपुर के रामकी कंपनी में डंप लिए गए यूनियन कार्बाइड के कचरे इंदौर, धार, पीथमपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में पड़ने वाले दुष्प्रभाव को लेकर गहन चर्चा की। पटवारी ने कहा कि कचरा जलाने को लेकर कोर्ट के आदेश है, सरकार ने पीतमपुर की एक रामकी कंपनी में जो कचरा भेजा है जो रात में डंप हो चुका है, इसका इंदौर शहर पर क्या असर पड़ेगा बहुत ही गंभीर और चिंताजनक है। पटवारी ने कहा कि इस मुद्दों को राजनीतिक रूप देने से वाजिब नहीं है, इससे इंदौर सहित अन्य क्षेत्रों की जनता के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ताई से इस संबंध में बात हुई इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनना चाहिए। कुछ साल पहले रामकी में 10 टन कचरा जलाया गया था, जिसका असर लंबे क्षेत्रफल पर पढ़ा था। उन्होंने कहा कि यदि निरीक्षण करेंगे तो पता चलेगा कि जो फसल 5 कुंटल होती थी वह घटकर एक कुंटल ही रह गई है। सवाल यह है कि इतना कचरा जलेगा या डिस्पोजल होगा या वैज्ञानिक विधि से इसका डिस्पोजल होगा तो स्वाभाविक है यशवंत सागर तालाब जो वहां से 27 किलोमीटर दूर है, जब तालाब के पानी का रिसाव होगा तो उसका असर कितना पड़ेगा, यशवंत सागर का पानी दूषित होगा। पटवारी ने कहा कि कचरा जलाने के लिए जो एक्सपर्ट है, उनसे बात करके जब तक है क्लियर नहीं होगा, तब तक कचरा नहीं जलाना चाहिए, मेरा सभी से आग्रह किया है कि कचरा जलाने की योजना को थोड़ा अभी रोका जाए, विपक्ष के नाते हमारा दायित्व है कि हम जनता के प्रति अपने दायित्व निभाएं। उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि एक एक्सपर्ट की टीम बनानी चाहिए, कचरा जलाने से इसका क्या असर होगा इस पर चर्चा होना चाहिए। पटवारी ने कहा कि 2020 में कोरोना आया था किसी को पता नहीं चला, लेकिन इसका कितना असर हुआ, हजारों, लाखों लोग हमारे परिवार के बीच से चले गए। फिर हम कचरा जलाने का रिस्क क्यों लें, प्रीतमपुर और धार में इसका विरोध हो रहा है। मीडिया जगत के साथियों से आग्रह है कि आप लोग बढ़ चढ़कर इसमें हिस्सा ले, यह राजनीतिक हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री जी से आग्रह करता हूं कि इस कचरे के निष्पादन का निर्धारण करके लोगों को समझाना आपका दायित्व है। जब तक यह कचरा डिस्पोजल की प्रक्रिया चालू नहीं हो आपने जो कचरा दम किया है, वह प्रक्रिया गलत है। कचरा डिस्पोजल हो गया तो आने वाली जनरेशन उससे प्रभावित होगी, उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। कैंसर का खतरा बढ़ेगा। प्रदेष के नगरीय प्रषासन मंत्री भी इंदौर के ही है, उन्हें भी इस बात की चिंता व्यक्त करते हुये लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। कोर्ट के आदेश हैं लेकिन यह आदेश नहीं है कि कचरा यहीं डंप होना चाहिए। recent visitors 211

दिल्ली सीएम आतिशी का शिवराज को जवाब , यह वैसे ही जैसे दाऊद इब्राहिम अहिंसा पर प्रवचन दे

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को पत्र लिखकर किसानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र की किसान-कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में विफल रही है, जिससे दिल्ली के किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को पत्र लिखा है. उन्होंने दिल्ली में किसानों की स्थिति पर चिंता जताई है. शिवराज ने कहा है कि आम आदमी पार्टी की सरकार किसानों के प्रति बेहद उदासीन है. किसानों के लिए आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में कोई संवेदना नहीं. शिवराज सिंह की चिट्ठी पर सीएम आतिशी का जवाब आया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी का किसानों के बारे में बात करना वैसे ही है जैसे दाऊद अहिंसा पर प्रवचन दे रहा हो. जितना बुरा हाल किसानों का बीजेपी के समय हुआ, उतना कभी नहीं हुआ. आतिशी ने कहा कि पंजाब में किसान आमरण अनशन पर बैठे हैं, मोदी जी से कहिए उनसे बात करें. किसानों से राजनीति करना बंद करिए. बीजेपी राज में किसानों पर गोलियां, लाठियां चलाई गईं. शिवराज ने क्या कहा था?चिट्ठी में शिवराज ने लिखा, दिल्ली में केजरीवाल और आतिशी ने कभी किसानों के हित में उचित निर्णय नहीं लिए. केजरीवाल ने हमेशा चुनावों से पहले बड़ी बड़ी घोषणाएं कर राजनैतिक लाभ लिया है. केजरीवाल ने सरकार में आते ही जनहितैषी निर्णयों को लेने के स्थान पर अपना रोना रोया है. उन्होंने आगे लिखा, 10 वर्षो से दिल्ली में आप की सरकार है, लेकिन पूर्व सीएम केजरीवाल ने हमेशा किसानों के साथ केवल धोखा किया है. केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं को आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में लागू नहीं किया. दिल्ली के किसान केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं. ‘किसानों के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया’केंद्रीय मंत्री चिट्ठी में आगे लिखते हैं, दिल्ली में आप सरकार का किसानों के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया है. एकीकृत बागवानी मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, बीज ग्राम कार्यक्रम सहित अनेक योजनाओं का लाभ किसान नहीं ले पा रहे हैं. दिल्ली में केंद्र की कृषि योजनाएं लागू नहीं होने से किसान भाई-बहन नर्सरी और टिशू कल्चर की स्थापना, रोपण सामग्री की आपूर्ति, फसल उपरांत प्रबंधन के इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, नए बाग़, पाली हाउस एवं कोल्ड चैन की सब्सिडी सहित अनेक योजनाओं के लाभ नहीं ले पा रहे हैं. उन्होंने लिखा, कृषि विकास योजना को लागू नहीं होने से कृषि मशीनीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य, फसल अवशेष प्रबंधन, परंपरागत कृषि विकास योजना, कृषि वानिकी और फसल डायवर्सिफिकेशन के लिए सब्सिडी जैसी योजनाओं का लाभ दिल्ली के किसान नहीं ले पा रहे हैं. बीज ग्राम कार्यक्रम के दिल्ली में क्रियान्वयन नहीं होने से बीजों के वितरण, बीज परीक्षण, प्रयोगशालाओं के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, बीज प्रमाणीकरण एजेंसियों की सहायता, बीजों की पारंपरिक किस्म के लिए सहायता और बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सब्सिडी जैसे लाभ नहीं मिल पा रहे हैं. ‘किसानों की आजीविका पर संकट’शिवराज सिंह चौहान ने आगे लिखा, दिल्ली में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर सहित किसान उपकरण का पंजीकरण कमर्शियल व्हीकल श्रेणी में किया जा रहा है, जिससे किसानों को अधिक दाम देना पड़ रहा है. आप की सरकार फ्री बिजली की बात करती है, लेकिन दिल्ली में किसानों के लिए बिजली की उच्च दरें निर्धारित कर रखी है. यमुना से लगे गांवों में सिंचाई उपकरणों के बिक़ली कनेक्शन काटे जा रहे हैं, जिससे किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है. कृषि मंत्री ने पत्र में लिखा, राजनैतिक प्रतिस्पर्धा किसान कल्याण में बाधा नहीं बननी चाहिए, किसान कल्याण सभी सरकारों का कर्तव्य हैं. दलगत राजनीति से उठकर आप की सरकार को किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए. आम आदमी पार्टी की सरकार को केंद्र की योजनाओं को लागू कर दिल्ली के किसानों को राहत प्रदान करनी चाहिए. recent visitors 425

,,,, में नहीं रहेगी केंद्र में मोदी सरकार… संजय राउत के बयान से मची खलबली

,,,, Modi government will not remain at the center… Sanjay Raut’s statement created panic उद्धव शिवसेना सांसद संजय राउत ने मोदी सरकार को लेकर बड़ा दावा किया है, उन्होंने कहा कि मेरे मन में संदेह है कि साल 2026 के बाद केंद्र सरकार बचेगी या नहीं. मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगे. केंद्र सरकार अस्थिर हो गई, तो इसका असर महाराष्ट्र पर भी पड़ेगा. राज्यसभा सांसद और उद्धव शिवसेना के नेता संजय राउत अपने बयानों को लेकर खासे चर्चा में रहते हैं, आज यानी कि गुरुवार को उन्होंने एक बयान में दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार 2026 में नहीं बचेगी. संजय राउत ने कहा कि मुझे संदेह है कि केंद्र सरकार 2026 के बाद बचेगी या नहीं, मुझे लगता है कि मोदी अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगे. और केंद्र सरकार अस्थिर हो जाएगी. उन्होंने कहा कि इसका असर महाराष्ट्र पर भी पड़ेगा. महाराष्ट्र में कैसे पड़ेगा असर? महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 132 सीटों पर जीत दर्ज की है, तो वहीं शिवसेना ने 57 एनसीपी ने 41 पर जीत दर्ज की है. इन तीनों दलों ने मिलकरमहाराष्ट्र में सरकार बनाई है. संजय राउत का दावा अगर सही साबित होता है तो महाराष्ट्र में भी बीजेपी मुश्किल में पड़ सकती है. यही कारण है कि राउत ने दावा किया कि केंद्र के अस्थिर होने के बाद महाराष्ट्र पर भी असर पड़ेगा. सियासी बयानबाजी के बीच राउत का दावा बिहार में भी आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने कहा कि नीतीश के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं, नीतीश को भी खोलकर रखना चाहिए. लालू ने कहा कि नीतीश कुमार साथ में आएं, मिलकर काम करें. नीतीश कुमार ही हमेशा भाग जाते हैं, हम माफ कर देंगे. लालू के इस बयान के पहले भी नीतीश को लेकर कई तरह के बयान सामने आए हैं. इन बयानों के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि राजनीतिक गलियारों में कुछ तो पक रहा है. जिसके कारण ये बयान सामने आ रहे हैं. recent visitors 215

मध्य प्रदेश को मिलने वाला है नया प्रदेशाध्यक्ष जल्द , इस दिन आएगी सूची

भाजपा जिला अध्यक्ष चुने जाने की मप्र भाजपा की अड़चनें शीर्ष नेतृत्व ने दूर कर दी है। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही भाजपा को प्रदेश अध्यक्ष भी मिल जाएगा। इन बिंदुओं पर दिल्ली में शुरू हुई केंद्रीय भाजपा की बैठक में मंथन हुआ। इसमें मप्र भाजपा संगठन पदाधिकारियों का एक दल शामिल रहा। चुनाव को लेकर अलग-अलग स्तर पर बातचीत हुई। प्रदेश भाजपा ने किया था मंथन प्रदेश भाजपा खुद के स्तर पर मंथन कर रही थी, लेकिन जिला अध्यक्ष चुने जाने को लेकर एक राय नहीं बनी। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व की लाइन पर पार्टी बढ़ेगी। प्रत्येक जिले से तीन-तीन नामों का पैनल मंगवाया जाएगा। इसी में से एक नाम संगठन के संज्ञान में लाकर फाइनल किया जाएगा। बता दें कि अध्यक्षों की सूची पांच जनवरी तक आ जाएगी। उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। बूथ व मंडल अध्यक्ष चुनने में अव्वल राष्ट्रीय बैठक में मप्र भाजपा द्वारा बूथ और मंडल अध्यक्ष चुने जाने को लेकर बरती गई पारदर्शिता व सक्रियता चर्चा का विषय रही। सूत्रों के मुताबिक अन्य राज्यों के संगठन को मप्र भाजपा के कामों से सीख लेने की सलाह दी गई। सक्रिय सदस्यता में भी अच्छा काम प्रदेश भाजपा ने सक्रिय सदस्य बनाने में भी अच्छा काम किया। मप्र भाजपा इसमें पहले स्थान पर रहा तो गुजरात को दूसरी व यूपी को तीसरी रैंक मिली। इस पर भी प्रदेश भाजपा संगठन को सरहाना मिली है। पूर्व संगठन मंत्री भी ठोक रहे ताल पार्टी के पूर्व संगठन मंत्री से लेकर पूर्व विधायक तक जिला अध्यक्ष के लिए ताल ठोक रहे हैं। क्षेत्रीय क्षत्रपों से समीकरण बैठाने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक कई नेता पूर्व संगठन मंत्रियों के नाम की पुरजोर पैरवी भी कर रहे हैं। ऐसा होता है पार्टी में ही नई लकीर खींची जाएगी। भाजपा संगठन ने सितंबर 2021 में छह संभागीय संगठन मंत्रियों की छुट्टी कर दी थी। शैलेंद्र बरूआ, जितेंद्र लिटोरिया, आशुतोष तिवारी, श्याम महाजन, जयपाल सिंह चावड़ा और केशव सिंह भदौरिया को पद से मुक्त करते हुए पूरी जिम्मेदारी संगठन महामंत्री सुहास भगत और सह संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को दी गई थी। तीन फैक्टर हावी लंबे समय बाद जिला अध्यक्षों के चुनाव हो रहे हैं। 75 फीसदी जिलों में मौजूदा अध्यक्ष भारी पड़ रहे हैं, क्योंकि इन्हीं के नेतृत्व में प्रदेश भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2023, लोकसभा चुनाव 2024 और सक्रिय सदस्यता बनाने में देशभर में बाजी मारी।जमीनी पदाधिकारी दावा ठोक रहे हैं कि वे लंबे समय से बिना पद के काम किए जा रहे हैं। उन्हें निगम मंडलों में जगह नहीं दी गई। कम से कम अब संगठन चुनाव में ही मौका मिल जाए।कई सांसद व भाजपा विधायक भी जोड़-तोड़ में लगे हैं कि उनके गुट का अध्यक्ष हो तो चुनाव लड़ने को लेकर थोड़ी मदद मिलेगी। इसके अलावा भी अध्यक्षों को लेकर कई फैक्टर प्रभावी हैं। recent visitors 174

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम मोहन पर कसा तंज: ‘कर्ज़ में डूबा प्रदेश, बढ़ रही मुख्यमंत्री की संपत्ति

मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश कर्ज़ के बोझ तले दबता जा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री की संपत्ति दिन-ब-दिन बढ़ रही है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मध्यप्रदेश पर प्रति व्यक्ति क़र्ज़ ₹52,000 है, और कुल मिलाकर प्रदेश पर लगभग ₹4 लाख करोड़ का कर्ज़ है। उन्होंने इसे प्रदेश की बदहाल आर्थिक स्थिति का परिचायक बताया। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देश के पांचवें सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान, उनकी कुल चल संपत्ति ₹5.66 करोड़ थी, जबकि उनकी पत्नी सीमा यादव के पास ₹3.23 करोड़ की संपत्ति थी। इसके अतिरिक्त, उनकी अचल संपत्ति का मूल्य ₹13.36 करोड़ और उनकी पत्नी की ₹18.75 करोड़ था। रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ₹931 करोड़ की संपत्ति के साथ देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास सबसे कम ₹15 लाख की संपत्ति है। देश के 31 मुख्यमंत्रियों की कुल संपत्ति ₹1630 करोड़ है। उमंग सिंघार ने कहा, “प्रदेश गर्त में जा रहा है और विकास हो रहा है तो केवल मुख्यमंत्री की तिजोरी का।” उन्होंने इसे प्रदेश की जनता के साथ अन्याय और आर्थिक प्रबंधन में विफलता बताया। भारत की 2023-24 की प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय ₹85,854 थी, जबकि मुख्यमंत्रियों की औसत आय ₹13,64,310 है, जो औसत आय का लगभग 7.3 गुना है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में कर्ज़ बढ़ाने की नीतियां जनता के हित में नहीं हैं और इसका लाभ केवल कुछ चुनिंदा लोगों को मिल रहा है। उमंग सिंगार ने मुख्यमंत्री से उनकी संपत्ति में हुई वृद्धि का स्पष्टीकरण मांगा है। नेता प्रतिपक्ष के इन आरोपों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री या सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और क्या जनता इन मुद्दों को आगामी चुनावों में गंभीरता से लेगी। recent visitors 384