जीतू पटवारी बोले- सौरभ शर्मा की हो सकती है हत्या:अगर गिरफ्तारी हुई तो कई चेहरे होगे बेनकाब

भोपाल। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की हत्या हो सकती है। क्योंकि वह जब भी सामने आएगा, कई लोगों के चेहरे बेनकाब होंगे। इसलिए सरकार को चाहिए कि उसकी गिरफ्तारी कर उसे सुरक्षा दे और भ्रष्टाचार का सच सामने लाए। सौरभ शर्मा के वकील भी उनके एनकाउंटर की आशंका जता चुके हैं। पटवारी ने सोमवार को भोपाल में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि बीजेपी के राज में भ्रष्टाचारी चेहरा कैसा होता है, यह दिखने लगा है। जनता को साफ हो गया है कि यह करप्शन, क्राइम, कर्ज और कमीशन की सरकार है। उन्होंने कहा कि सौरभ शर्मा की हत्या हो सकती है, यह बात मैं पहले भी कह चुका हूं, जब सौरभ के भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ था। अब फिर इस आशंका को दोहरा रहा हूं। जीतू पटवारी ने कहा कि यह लूट के पैसे की लड़ाई है। जिन लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई, वे सभी लूटपाट कर रहे हैं और एक से डेढ़ करोड़ तक की अवैध कमाई कर रहे हैं। पटवारी ने उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए वसूले जा रहे पैसों का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी के शासन में भगवान के दर्शन के लिए भी पैसे वसूले जा रहे हैं। ये ऐसे भोलेनाथ के भक्त हैं। यह भाजपा की सरकार है। यह आरएसएस से जुड़े लोगों का नैतिक दायित्व है, जो ऐसा करा रहे हैं। बीजेपी पर घोटाले और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पटवारी ने कहा कि कांग्रेस लगातार इनके खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस ने सच्चे विपक्ष की भूमिका निभाई है। एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दलितों पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं। संविधान की रक्षा के लिए महू में एक बड़ा कार्यक्रम किया जा रहा है। इसमें राहुल गांधी और कमलनाथ समेत पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। बता दें कि सौरभ शर्मा की ओर से भोपाल जिला कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई गई थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सौरभ शर्मा की ओर से ग्वालियर के वकील राकेश पाराशर पैरवी कर रहे हैं। याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने कहा था कि मुझे नहीं पता सौरभ कहां है। याचिकाकर्ता की मां के कहने पर ग्वालियर से भोपाल आया हूं। हमें डर है कि कहीं सौरभ का एनकाउंटर न हो जाए। recent visitors 232

देवास में पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत, कांग्रेस जीतू पटवारी का तीखा हमला, पैसे की मांग का आरोप

देवास जिले के सतवास में पुलिस हिरासत में एक दलित युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस ने युवक से पैसे की मांग की थी, और जब रकम नहीं दी गई तो पुलिस की बर्बरता का शिकार बना युवक मौत की वजह बना। इस घटना के बाद पूरे देवास में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे पुलिस की बर्बरता करार दिया है। हिरासत में मौत का मामला मालागांव के रहने वाले 35 वर्षीय मुकेश लोंगरे को शनिवार दोपहर पुलिस ने एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए मामले के तहत हिरासत में लिया था। लेकिन शाम होते-होते मुकेश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर दावा किया कि युवक ने आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन उसके परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उसे बिना किसी कारण हिरासत में लिया और उसके साथ बर्बरता की। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने मामले में धाराएं कम करने के एवज में 6,000 रुपये की मांग की थी। मुकेश के साथ थाने में मौजूद एक साथी को यह राशि देने के लिए घर भेजा गया था। जब वह पैसे लेकर लौटा, तब तक मुकेश की मौत हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बिना उनकी जानकारी के मुकेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और शव के कमरे में बाहर से ताला लगा दिया, जिससे परिवार के लोग अंदर नहीं जा सके। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटना को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देवास में पुलिस ने एक और दलित युवक की बेरहमी से हत्या कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन अब गुंडों से ज्यादा दलित समाज पर अत्याचार कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए पूरे थाने के पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाए। घटना के बाद स्थानीय लोग और मुकेश के परिजन सड़क पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे पुलिस प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने देवास जिले में पुलिस के खिलाफ गहरी नाराजगी को जन्म दिया है और लोग न्याय की उम्मीद में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। मुकेश के परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस की बर्बरता के कारण उनका परिवार टूट गया है। वे अब पुलिस के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं और न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, और लोगों की मांग है कि दोषियों को सजा मिले और इस तरह के अत्याचार को रोका जाए। इस घटना ने देवास जिले में पुलिस प्रशासन के खिलाफ गुस्से को और बढ़ा दिया है, और अब लोग सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठाने को तैयार हैं। recent visitors 342

मध्यप्रदेश शासन मोदी और अमित शाह के हवाले, सीएम मोहन बने कठपूतली, सभी नेताओं को किया दरकिनार

मध्य प्रदेश में जिला अध्यक्षों के नामों पर रायशुमारी लगभग पूरी होने को है। वहीं दिल्ली में भी संगठन पर्व को लेकर आज रविवार से दो दिवसीय बैठकों का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर हो रही इन बैठकों में राज्यवार संगठन चुनावों की प्रगति और स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक ही नीतिगत निर्णय लिए जाने हैं। माना जा रहा है कि इसी बैठक में जिला अध्यक्षों को लेकर नई गाइडलाइन तय की जा सकती है। वहीं इस बार जिला अध्यक्षों के रूप में कई महिला चेहरे भी कमान संभाल सकते हैं। बता दें कि दिल्ली बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद, प्रदेश चुनाव प्रभारी समेत प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी शामिल हुए हैं। दरअसल, संगठन में एक बड़ा तबका ऐसा है जो मांग कर रहा है कि जो 5 साल तक जिला अध्यक्ष पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं, उन जिला अध्यक्षों को रिपीट नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि नए चेहरों को जिला अध्यक्ष होने का अवसर मिलना चाहिए। इधर कुछ जिलाध्यक्ष चाहते हैं कि कुछ व्यक्तियों को जिला अध्यक्ष के रूप में दोबारा मौका दिया जाना चाहिए। इस तबके का तर्क है कि ये वे चेहरे हैं, जिनके नेतृत्व में पार्टी को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बड़ी सफलता मिली है, उनका कार्यकाल निर्विवाद और उपलब्धियों भरा रहा है तो उन्हें दोबारा मौका मिलना चाहिए। जिला अध्यक्ष चुनाव को लेकर भाजपा दो तबकों में बंट गई है। वहीं मध्य प्रदेश के भाजपा नेताओं का कहना है कि इस मसले पर फिलहाल कोई स्पष्ट नीति नहीं हैं। उनका कहना है कि ये मसला अब राष्ट्रीय स्तर की बैठक में ही स्पष्ट होगा। नई नीति बनी तो नए चेहरे सामने आ सकते हैं या चुनावों में भाजपा की भारी सफलता का श्रेय लेने वालों को ही दोबारा मौका मिल सकता है। बता दें कि शनिवार तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में जिलाध्यक्ष के लिए रायशुमारी की प्रक्रिया पूरी हो गई है। वहीं कई जिलों में रायशुमारी की गई, इसलिए दिनभर प्रदेश कार्यालय से लेकर भाजपा के जिला कार्यालयों में गहमागहमी का दौर बना रहा। जानकारी के मुताबिक 1 जनवरी से 3 जनवरी के बीच जिला अध्यक्षों के 3 नामों का अंतिम पैनल तैयार किया जाएगा। इसके बाद अंतिम नामों की फाइनल सूची लिफाफे में बंद कर केंद्रीय संगठन को भेज दी जाएगी। वहीं केंद्रीय संगठन 5 जनवरी के बाद इसे कभी भी जारी कर देगा। भाजपा की नई रणनीति के मुताबिक अब तक जो तय हुआ है उसके हिसाब से कोई भी जिलाध्यक्ष 60 साल से ज्यादा उम्र का नहीं होगा। वहीं लगभग 25 फीसदी जिलाध्यक्ष के पदों पर महिलाएं नजर आ सकती हैं। यानी कुल 60 जिलाध्यक्षों में से 15 जिलाध्यक्ष के रूप में महिलाओं को मौका मिल सकता है। recent visitors 392

संसदीय इतिहास में पहली बार भाजपा ने रची भेदभाव की परिभाषा

सुशील दामले (विशेष संवाददाता) भोपाल। बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने भाजपा सरकार की भेदभाव पूर्ण नीति पर कटाक्ष करते हुए मोहन सरकार की नीतियों पर हमला बोला है। विधायक पट्टा ने कहा कि यह सरकार कहने को तो कुछ भी कह देती है, लेकिन उसकी असल सच्चाई कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा विधायकों को 15 – 15 करोड रुपए की राशि विकास कार्यों के लिए दी है, लेकिन कांग्रेसी विधायकों को कुछ भी नहीं। इस बात का जब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने विरोध किया तो मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायकों को भी 5 – 5 करोड रुपए देने के लिए घोषणा की थी, लेकिन यह घोषणा ही रह गई। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा विधायकों को 15 – 15 करोड रुपए मिले, वह राशि भी आज तक विधायकों को पता नहीं चला कि मिली या नहीं मिली। मुख्यमंत्री मोहन यादव सिर्फ घोषणा ही कर रहे हैं। इतना बड़ा भेदभाव संसदीय इतिहास में किसी भी सरकार ने चुने हुए जनप्रतिनिधियों के साथ नहीं किया। विधायक पट्टा ने कहा कि भाजपा सरकार विकास और विपक्ष विरोधी है। मुख्यमंत्री आप हमारे साथ भेदभाव कर दीजिए, पर क्षेत्र की जनता के साथ ऐसा मत कीजिए। उनका कहना है कि यह हमारे साथ नहीं, बल्कि प्रदेश की 8 करोड़ जनता के साथ भेदभाव कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है। जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेेगी। recent visitors 127

मध्यप्रदेश बीजेपी में जबर्दस्त खींचतान, मोहन-शर्मा-सिंधिया सबके पावर खत्म, हाईकमान का सीधा हस्तक्षेप

भोपाल ! मध्यप्रदेश में संगठन चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। पार्टी के भीतर मंडल अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर खींचतान साफ झलकी। पार्टी ने पहले पारदर्शिता का दावा करते हुए कहा था कि नियुक्तियां किसी मंत्री, सांसद, विधायक, या जिलाध्यक्ष की पसंद से नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर होंगी। लेकिन व्यवहार में यह वादा अधूरा ही रहा। बीजेपी हाईकमान ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेताओं का जिला अध्यक्षों के चयन में सीधा हस्तक्षेप समाप्त कर दिया गया है। हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि जैसे सांसद और विधायक के टिकट का निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करता है, वैसे ही अब जिलाध्यक्षों का चयन भी दिल्ली से होगा। मध्यप्रदेश में बीजेपी जिलाध्यक्षों की चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला स्तर पर चुनाव अधिकारियों ने तीन नामों का पैनल तैयार कर प्रदेश संगठन को सौंप दिया है। अब इन नामों पर अंतिम निर्णय हाईकमान करेगा। यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश बीजेपी में जिलाध्यक्षों का निर्धारण सीधे दिल्ली से किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य संगठन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। अब तक जिलाध्यक्षों का चयन स्थानीय नेताओं द्वारा किया जाता रहा, जिसमें कई बार सांसद और विधायकों ने अपनी पसंद के लोगों को ही प्राथमिकता दी। इससे योग्यता को दरकिनार किया गया। नई व्यवस्था के तहत काबिल और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। हाल ही में हुए मंडल अध्यक्षों के चुनावों में कई गड़बड़ियां सामने आईं। पार्टी द्वारा तय किए गए क्राइटेरिया, जैसे 45 साल की आयु सीमा, आपराधिक रिकार्ड न होना, और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल न होना, का पालन कई जगहों पर नहीं हुआ। कई मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों पर विवाद हुआ, और कुछ को चयन के तुरंत बाद हटा भी दिया गया। मंडल अध्यक्षों के चुनाव में सामने आए विवादों और शिकायतों के बाद हाईकमान ने जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर सख्ती दिखाई है। अब दिल्ली से चयन होने से पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद बढ़ गई है। इससे कार्यकर्ताओं का विश्वास भी मजबूत होगा और पार्टी संगठन को नई दिशा मिलेगी। यह कदम मध्यप्रदेश बीजेपी के संगठन को न केवल मजबूती देगा, बल्कि योग्यता और पारदर्शिता के नए मानदंड भी स्थापित करेगा। recent visitors 415

‘ये आदेश एलजी नहीं, अमित शाह के ऑफिस से आया है’, महिला सम्मान योजना के जांच के आदेश पर भड़के केजरीवाल

दिल्ली ! उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने महिला सम्मान योजना की जांच के आदेश दिए हैं। इसे लेकर अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर हमला बोला है। केजरीवाल का कहना है कि भाजपा दिल्ली में महिला सम्मान योजना रोकना चाहती है। ये आदेश एलजी ऑफिस से नहीं, अमित शाह के ऑफिस से आया है। भाजपा महिलाओं का सम्मान नहीं करती है। भाजपा दिल्ली चुनाव में हार मान चुकी है। दिल्ली में महिला सम्मान योजना को महिलाओं का पूरा समर्थन मिल रहा है। अब तक 22 लाख से ज्यादा महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। केजरीवाल ने कहा कि महिला सम्मान योजना और संजीवनी योजना से दिल्ली के लोग खुश थे। भाजपा इन योजनाओं को रोकना चाहती है। भाजपा महिला सम्मान योजना से बौखला गई है। भाजपा वाले दिल्ली में पैसे बांट रहे हैं। मैंने कहा था कि चुनाव जीतने के बाद हम महिलाओं को 2100 रुपए देंगे और 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों को मुफ्त इलाज देंगे। ये दोनों योजनाएं जनता के लिए इतनी फायदेमंद थीं कि लाखों लोगों ने पहले ही इनके लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया था। इससे भाजपा घबरा गई, कई भाजपा नेताओं ने मुझसे कहा कि जीतना तो छोड़िए, कई जगह भाजपा की जमानत जब्त हो जाएगी। केजरीवाल ने कहा कि पहले उन्होंने अपने गुंडे भेजे, फिर पुलिस भेजकर रजिस्ट्रेशन कैंप उखाड़ दिया, आज उन्होंने फर्जी जांच के आदेश दे दिए कि जांच होगी। किस बात की जांच होगी? हमने चुनावी घोषणा की थी कि चुनाव जीतेंगे तो इसे लागू करेंगे। मुझे खुशी है कि इस कदम से भाजपा ने साफ कर दिया है कि वे चुनाव क्यों लड़ रहे हैं। आज उन्होंने बता दिया है कि अगर आप उन्हें वोट देंगे तो वे महिला सम्मान योजना और संजीवनी योजना को लागू नहीं करेंगे। वे बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा बंद कर देंगे, वे आपकी मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, मोहल्ला क्लीनिक, मुफ्त इलाज और मुफ्त शिक्षा बंद कर देंगे। एलजी सचिवालय ने महिला सम्मान योजना के जांच के आदेश दिए हैं। एलजी सचिवालय ने दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं। डिविजनल कमिश्नर से जांच करने को कहा गया है। सचिवालय ने पुलिस कमिश्नर से कहा है कि वे उन लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करें जो लाभ देने की आड़ में डेटा की गोपनीयता भंग कर रहे हैं। recent visitors 191

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का आलेख

कमलनाथमध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार का एक साल का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूरा हो गया। अब बीजेपी इस एक साल को स्वर्णिम कार्यकाल बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है। लेकिन मोहन सरकार ने गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, दलितों और सभी वर्गों के लोगों के लिए क्‍या किया है यह विचारणीय है। महिला सुरक्षा, दलित और आदिवासी सुरक्षा के मामले में मध्यप्रदेश का रिकॉर्ड और भी खराब हो गया है। स्वास्थ्य शिक्षा का हाल यह है कि मध्यप्रदेश की पहचान व्यापमं और नर्सिंग जैसे घोटालों से होने लगी है। समाज की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था, हर पहलू पर इतनी नाकामी क्यों हासिल हो रही है? इससे बढ़कर चिंता की बात यह है कि मध्य प्रदेश सरकार इन सारे विषयों पर एकदम चुप है। क्या जनता के विकास के ये सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर सरकार की प्राथमिकता से बाहर हो गए हैं? ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश की सरकार ने जमीनी सच्चाई से पूरी तरह पीठ फेर ली है और प्रदेश को उसके हाल पर छोड़ कर, खुद सिर्फ झूठी ब्रांडिंग से अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त हो गई है। हकीकत से मुंह फेर कर मोहन सरकार झूठे प्रचार-प्रसार में मस्‍त है। जबकि चुनावों के पहले बीजेपी ने बड़े-बड़े वादे कर जनता को गुमराह करने का काम किया। आज प्रदेश की जनता खुद सरकार से सवाल करना चाहती है कि वादों का क्‍या हुआ? सरकार कर्ज पर कर्ज लेकर अपनी गाड़ी को चला रही है। और सपने ऐसे दिखाए जा रहे हैं कि प्रदेश ने विकास के कई सोपान गढ़ लिए हैं। पिछले एक साल में प्रदेश में दलितों पर काफी अत्‍याचार हुए हैं। वह चाहे शिवपुरी की घटना हो या सागर की घटना हो। सारे प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्‍याचारों से यही लगता है कि यह साल दलित अत्‍याचार पर केन्द्रित रहा है। शिवपुरी के इंदरगढ़ में एक दलित युवक की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मध्यप्रदेश के सागर जिले के ग्राम बरोदिया नोनागिर में दलित युवती द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत से गुस्साए गुंडों ने युवती के भाई की पिछले वर्ष अगस्त माह में हत्या कर दी थी। हत्या में बीजेपी नेताओं पर आरोप लगे। पीड़ित परिवार समझौते के लिये तैयार नहीं हुआ तो दो दिन पूर्व पीड़िता के चाचा की भी हत्या कर दी गई। मंदसौर जिले के एक गांव में एक महिला का पीछा करने के आरोप में दलित व्यक्ति को चेहरा काला करके, गले में जूतों की माला डालकर घुमाया गया। यह दोनों घटनाएं तो सिर्फ ऐसी थी जो सुर्खियों में ज्‍यादा रहीं लेकिन‍ ऐसी न जाने हजारों घटनाएं हैं जो रोज दलितों से साथ घटती रहीं। दुर्भाग्य की बात है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस तरह के विषयों पर कुछ भी कहने से बचते रहे और दलितों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने में पूरी तरह नाकाम रहे। मध्य प्रदेश में कर्ज दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसा कोई महीना नहीं बीतता है जब सरकार कर्ज न ले रही हो। सरकार पिछले 11 महीनों में 40 हजार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। राज्य यादव सरकार के एक साल पूरे होने के साथ कर्ज का आंकड़ा 52.5 हजार करोड़ तक पहुंचने वाला है। दिसंबर 2023 से अब तक सरकार ने 47.5 हजार करोड़ का कर्ज लिया है। साल 2024 के अंत तक राज्य पर कुल कर्ज 4 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा। पिछले 6 माह में हर महीने 05-05 हजार करोड़ का कर्ज लिया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक 30 हजार करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है। 31 मार्च 2025 तक मप्र सरकार का कर्ज 4.21 लाख करोड़ पहुंचेगा। मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार अपनी जरूरतों के लिए लगभग 25 हजार करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेगी। पिछले साढ़े चार साल में मप्र सरकार पर कर्ज का बोझ सबसे तेजी से बढ़ा है। मार्च 2020 की स्थिति में सरकार पर लगभग 2.01 लाख करोड़ का ही कर्ज था, लेकिन पिछले साढ़े चार साल में यह दोगुना हो गया है। सरकार अपने कार्यकाल का एक साल पूरा होने का जश्न मना रही है। लेकिन‍ अपने वादों को भूल गई है। चुनावों के समय जो वादे किये थे उन पर ध्‍यान ही नहीं है। लाडली बहनों को 3,000 रुपये की राशि देने का वादा, किसानों को उपज का दाम मिलना, युवाओं को रोजगार देने का वादा, महिलाओं को सुरक्षा देने का वादा, भ्रष्‍टाचार मुक्‍त प्रदेश बनाने का वादा ऐसे तमाम वादे थे जो एक साल में शुरू ही नहीं हुए हैं। मध्य प्रदेश में खाद की कमी के कारण किसानों की आय पर भी काफी असर पड़ा है। किसानों ने खाद की कमी के कारण अपनी फसल ही नहीं बोई। किसानों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पहले साल के कार्यकाल में ऐसे मामले हैं जहां मोहन यादव की सरकार बैकफुट पर नजर आई। 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। मोहन यादव के पहले कार्यकाल में मध्य प्रदेश में क्राइम के कई ऐसे मामले आए जिसके राज्य सरकार की किरकिरी हुई। वैसे तो प्रदेश को शांति का टापू कहा जाता है लेकिन प्रदेश में दिनोंदिन बढ़ रहे अपराधों ने मध्‍यप्रदेश को बदनाम किया है। अपराधों के आंकड़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। क्‍या महिलाएं क्‍या बच्चियां, कोई सुरक्षित नहीं है। साइबर क्राइम भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। राज्य के युवाओं को साधने के लिए मोहन यादव की सरकार ने एक लाख पदों पर भर्ती की घोषणा की थी। दिसंबर महीने से भर्ती शुरू होनी थी लेकिन कई विभाग ऐसे हैं जो यह रिपोर्ट तक नहीं दे पाए हैं कि उनके विभाग में कितने पद खाली हैं। बीते एक साल से भर्ती नहीं होने पर युवाओं में ओवरएज होने का डर है। राज्य में नर्सिंग घोटाले के बाद प्रदेश सरकार की छवि धूमिल हुई है। राज्य में कॉलेजों की संख्या कम की गई है। नर्सिंग घोटाले सामने आने के बाद समय पर परीक्षाएं नहीं हो पाई हैं। पूरे मामले की निगरानी कोर्ट में चल रही है। सरकार ने पूरे मामले में लीपापोती कर हजारों बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ की है। राज्य के कई छात्र संगठन भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे … Read more