एप अटेंडेंस सिस्टम: एमपी के IAS अधिकारी हाजिरी लगाने तैयार नहीं: सुबह 10 से शाम 6 बजे तक ऑफिस में रुकना होगा

App Attendance System: IAS officers of MP are not ready to mark attendance भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रशासनिक मुख्यालय वल्लभ भवन में एप से अटेंडेंस का प्रयोग IAS अधिकारियों की बेरुखी के कारण अटक गया है। मंत्रालय में फेस अटेंडेंस सिस्टम को 1 जनवरी से लागू किया जाना था लेकिन ये 1 फरवरी से भी लागू नहीं हो पाया है। अधिकारियों के रजिस्ट्रेशन नहीं होने के चलते इसे फरवरी में भी लागू नहीं किया जा सका है। हालात ये हैं कि जिन प्रशासनिक अधिकारियों पर व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी है, वह ही नई व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे हैं। वल्लभ भवन में पदस्थ 50 से ज्यादा IAS में से सिर्फ 6 ही आधार बेस्ड फेस अटेंडेंस एप से हाजिरी लगा रहे हैं। आईएएस को भी करनी होगी 8 घंटे नौकरी प्रदेश में इनकम शो करने के बाद अब आईएएस अधिकारियों को काम पर आने-जाने का हिसाब भी देना होगा। आईएएस अधिकारियों को कर्मचारियों की तरह आठ घंटे की ड्यूटी पूरी करनी होगी और इसके लिए जियो टैगिंग बेस्ड एप पर हाजिरी लगानी होगी। मंत्रालय से शुरू किए जा रहे फेस अटेंडेंस एप के माध्यम से हाजिरी लगाने की प्रक्रिया में कर्मचारियों के साथ सभी अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। व्यवस्था को लागू करने वाले सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे बताते हैं कि हम केवल कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं कर रहे हैं, बल्कि प्रदेश में पहली बार आईएएस अधिकारियों को भी एप से हाजिरी लगानी होगी। देश में पहली बार ऐसा सबसे बड़ा प्रयोग प्रमुख सचिव दुबे बताते हैं कि इस तरह की अटेंडेंस प्रक्रिया देश का अपनी तरह का सबसे बड़ा प्रयोग है। अभी तक किसी राज्य ने आधार बेस्ड फेस रिकॉग्नाइजेशन से अटेंडेंस लगानी शुरू नहीं की है। यह बहुत सरल एप है, जो आधार से जुड़ा है। इसे लागू करने वालों से लेकर अटेंडेंस लगाने वालों तक को न तो कोई इक्यूपमेंट खरीदना है, न ही डाटा ही अलग से इकट्‌ठा किया जाना है। बिना बड़े बजट के खर्च किए मंत्रालय के सभी अधिकारियों–कर्मचारियों की उपस्थिति एप के माध्यम से दर्ज हो रही है। प्रदेश भर में लागू होगा एप बेस्ड अटेंडेंस सिस्टम प्रदेश के मंत्रालय में इस तरह एप से अटेंडेंस लगाने का प्रयोग नए मुख्य सचिव अनुराग जैन के आने के बाद शुरू हुआ है। यह कहा जाता है कि प्रशासनिक मुखिया का विचार है कि सबसे पहले मंत्रालय में सभी अधिकारी-कर्मचारी एक व्यवस्था के तहत नियम से अपने ड्यूटी आवर्स पूरे करें, इसके बाद इस प्रयोग को पूरे प्रदेश में लागू किए जाने की योजना है। इसकी पुष्टि करते हुए सामान्य प्रशासन के प्रमुख सचिव संजय दुबे कहते हैं कि जब मंत्रालय में एप से अटेंडेंस हो सकती है तो बाकी कार्यालयों में क्यों नहीं? हम इसे सफलतापूर्वक यहां लागू करेंगे। इसके बाद कलेक्टर कार्यालयों में और प्रदेश के अन्य कार्यालयों में ले जाया जाएगा। इससे सरकारी कर्मचारियों की यह छवि सुधरेगी कि वे देर से दफ्तर आते हैं और जल्दी चले जाते हैं। जनता में छवि बेहतर होगी तो कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ेगी और प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी। अधिकारी ही बन रहे व्यवस्था में रोड़ा प्रशासनिक मुखिया भले ही बेहतर सोच के साथ नई व्यवस्था को लागू कर रहे हों, लेकिन इसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा प्रशासनिक अधिकारी ही बन रहे हैं। फरवरी के पहले सप्ताह तक 1266 कर्मचारी ऐसे थे, जो अटेंडेंस पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। वहीं, कुल रजिस्टर्ड डिवाइस 755 हैं यानी जिन्होंने अपने एंड्रॉयड डिवाइस में एप डाउनलोड कर लिया है। इनमें से आधे यानी करीब 350 प्रतिदिन इस एप से हाजिरी लगा रहे हैं, लेकिन मात्र 10 प्रतिशत अधिकारी ही इसका पालन कर रहे हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि मंत्रालय में करीब 50 आईएएस पदस्थ हैं। इनमें से छह ही एप की मदद से हाजिरी लगा रहे हैं। हाजिरी लगाने वालों में व्यवस्था को लागू करने वाले विभाग सामान्य प्रशासन के उप सचिव अजय कटेसरिया, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी सहित उनके विभाग के आईएएस तन्वी सुंद्रियाल, राजीव मीणा, रोहित सिंह और लोकेश जाटव शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पूरे मंत्रालय से इक्का-दुक्का आईएएस ही इस व्यवस्था का पालन कर रहे हैं। 1 से 3.30 तक लंच पर चले जाते हैं आईएएस नायक बताते हैं कि कर्मचारियों के बारे में कहा जाता है कि वह शाम को जल्दी घर चले जाते हैं, लेकिन आईएएस बैठे रहते हैं। हकीकत कौन नहीं जानता, सभी आईएएस एक बजे लंच पर घर चले जाते हैं। साढ़े तीन बजे ही आते हैं। कोई मंत्रालय में लंच टाइम में आईएएस से मिलकर दिखा दे। उनके पास घोड़ा है, गाड़ी है, ड्राइवर है। कर्मचारी दो-तीन बसें बदलकर आता है। recent visitors 225

भारतीय किसान संघ का आज भोपाल में वल्लभ भवन का घेराव करेंगे; बिजली-फसल रेट मुख्य मुद्दे

Bharatiya Kisan Sangh will surround Vallabh Bhawan in Bhopal today; electricity and crop rates are the main issues भोपाल में प्रदर्शन को लेकर भारतीय किसान संघ गांव-गांव जाकर बैठकें भी कर चुका है। भोपाल। बिजली और फसल के रेट जैसे कई मुद्दों पर हजारों किसान बुधवार को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करेंगे। भारतीय किसान संघ के बैनर तले ये प्रदर्शन होगा। लिंक रोड नंबर-1 पर पहले धरना, फिर अन्नदाता अधिकार रैली और वल्लभ भवन का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शन को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। इधर, किसान संघ ने सख्त चेतावनी दी है कि बाहर से आने वाले किसानों को पुलिस नहीं रोकें। वर्ना, वे वहीं पर धरना प्रदर्शन शुरू कर देंगे। भारतीय किसान संघ ने मध्यप्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंका है। लिंक रोड नंबर-1 स्थित भाकिसं कार्यालय के सामने सुबह 11 बजे बाद धरना शुरू होगा। दोपहर 3 बजे से रैली के रूप में किसान वल्लभ भवन पहुंचेंगे और घेराव करेंगे। संघ के मध्य भारत प्रांत अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने कहा, प्रदेश में किसान राजस्व विभाग के फौती नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, बटांकन, नक्शा सुधार जैसे कार्यों में की जा रही लूट से परेशान हो गया है। निरंकुश अफसरशाही के खिलाफ प्रदेश का किसान खेतों से निकलकर राजधानी की सड़कों पर 5 फरवरी को अपने अधिकार के लिए अन्नदाता अधिकार रैली और वल्लभ भवन घेराव कार्यक्रम में शामिल होगा। ज्ञापन देने के बावजूद नहीं चेती सरकार भाकिसं के पदाधिकारियों का कहना है कि किसान संघ ने किसानों की समस्याओं को लेकर तहसील व जिला स्तर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे, लेकिन आज तक किसानों की किसी भी समस्या पर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है। इसलिए किसान अपनी समस्याओं को सुनाने और निदान के लिए सरकार के दरवाजे पर आने के लिए मजबूर है। ये हैं किसानों की प्रमुख मांगें फौती नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, बटांकन, ऑनलाइन रिकॉर्ड और नक्शा सुधारा जाए। हॉर्स पावर क्षमता वृद्धि वापस ली जाए। जले ट्रांसफॉर्मर और लाइनें समय सीमा में बदली जाए। डीएपी, यूरिया खाद सहकारिता के माध्यम से नगद वितरण समय पर किया जाए। सभी मंडियों में फ्लेट कांटों से तुलाई अनिवार्य हो। मंडी परिसर में ही भुगतान हो। नकली दूध बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। प्रदेश में गो-अभयारण्य खोले जाएं। प्रस्तावित और स्वीकृत नहरों के कार्य जल्द पूरा हो। सभी फसलों को एमएसपी से नीचे नहीं खरीदा जाए। किसानों के झूठे प्रकरण वापिस हों। पूसा बासमती धान को जीआई टैग दिलाया जाए। धान 3100 रुपए व गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल खरीदा जाए। गांव-गांव में किसानों की हुई बैठकें अन्नदाता अधिकार रैली और वल्लभ भवन के घेराव में किसानों को शामिल करने के लिए किसान संघ के ग्राम समिति से लेकर प्रांत स्तर तक के पदाधिकारियों ने गांव-गांव बैठकें कीं। जिसमें किसानों की विभिन्न समस्याओं की चर्चा कर भोपाल आने के लिए आमंत्रित किया गया। बढ़े हुए बिजली बिलों से किसान त्रस्त किसानों का कहना है कि बिजली विभाग के द्वारा कृषि विद्युत कनेक्शन में हॉर्स पावर भार वृद्धि करने के कारण किसानों को बढ़े हुए बिजली के बिल भेजे जा रहे हैं। जिससे वे नाराज हैं। किसान बिजली कंपनियों द्वारा बिना जांच के भार वृद्धि करने के कारण आंदोलन के मूड में हैं और उसने सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। recent visitors 175

किस कानून में लिखा है कि सीएम के कार्यक्रम में निगमायुक्त डीजल भरवाए? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का सवाल

HIGHCOURT ON NO DIESEL PAYMENT जबलपुर ! मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री का सम्मान कार्यक्रम जबलपुर में रखा गया था, जिसमें बसों के डीजल का मामला कोर्ट पहुंच गया है. दरअसल, सीएम के सम्मान कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित की गई बसों में भरे गए डीजल का अबतक भुगतान नहीं किया गया है, जिसके बाद एक पेट्रोल पंप संचालक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. सीएम के कार्यक्रम के लिए 6 लाख का डीजल दरअसल, जबलपुर के आईएसबीटी बस स्टैंड के पास स्थित पेट्रोल पंप के संचालक सुगम चंद्र जैन ने ये याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया था कि 3 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम का आयोजन जबलपुर में किया गया था. कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में डीजल भरने के लिए नगर निगम के खाद्य अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से आकर निर्देश दिए थे. उन्होंने कहा था कि निगमायुक्त ने उक्त निर्देश दिए थे. कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में लगभग 6 लाख रु का डीजल उनके पेट्रोल पंप से भरा गया था. बिल भुगतान कराने के लिए की कई बार की मांग अगस्त 2024 में याचिकाकर्ता ने बिल भुगतान के लिए संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से संपर्क किया. इसके अलावा कलेक्टर कार्यालय से निगमायुक्त को राशि भुगतान के संबंध में आदेश जारी किए गए थे, पर भुगतान नहीं हुआ. एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि अधिग्रहित बस में डीजल भरने के लिए प्रशासन की ओर से पीओएल जारी किया गया था या नहीं? याचिकाकर्ता ने इसपर जवाब दिया कि सिर्फ मौखिक आदेश जारी किए गए थे. बिना पीओल कैसे भर दिया बसों में डीजल? एकलपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने आदेश में कहा है कि बिना किसी प्राधिकरण के याचिकाकर्ता ने बसों में कैसे डीजल भरा? इसके साथ ही कोर्ट ने संयुक्त कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से एसोसिएशन व उसके सदस्य को पीओएल की प्रतिपूर्ति करवाने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कलेक्टर से मांगा जवाब कोर्ट ने इसके अलावा कलेक्टर से जवाब मांगा है कि किस कानून में यह लिखा है कि निगमायुक्त का दायित्व है कि वह मुख्यमंत्री की रैली में लगी बसों में डीजल भरवाए? एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर गोलमाल का मामला प्रतीत हो रहा है. इस संबंध में एकलपीठ ने जिला कलेक्टर को हलफनामे में जवाब पेश करने के आदेश जारी किए हैं. एकलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता अब याचिका वापस लेने का हकदार नहीं होगा. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष रावत ने पैरवी की,,, recent visitors 164

प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्रियों ने जो किया वही करने जा रहे हैं, सीएम मोहन

भोपाल ! मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव नए साल में नया प्रयोग करने जा रहे हैं। सीएम मोहन यादव, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और उमा भारती की तरह सीएम आवास पर जनता दरबार लगाएंगे। सीएम मोहन यादव लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और उसका समाधान करेंगे। सीएम आवास पर पहले जनता दरबार का आयोजन 6 जनवरी को होगा। इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मोहन यादव से पहले राज्य के दो पूर्व सीएम उमा भारती और दिग्विजय सिंह जनता दरबार लगा चुके हैं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में कभी पहल नहीं की। सूत्रों के अनुसार, पहला जनता दरबार 6 जनवरी को सुबह 10 से 12 बजे तक होगा। सीएम हाउस पहुंचे लोगों से मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। लोगों की समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग विभाग के अधिकारी भी मौजूद करेंगे जो लोगों की समस्या का तुरंत समाधान करेंगे। बताया जा रहा है कि जनता दरबार में ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे मुद्दों की कोई सुनवाई नहीं होगी। यहां केवल केवल बीमारी और जरूरतमंदों के आवेदनों पर ही सुनवाई होगी। बताया जा रहा है कि जनता दरबार में ग्रामीण इलाके से आए लोगों को प्राथमिकता मिलेगी। सीएम खुद उन लोगों की समस्या को सुनेंगे। पहले जनता दरबार में 500 से भी ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए विभाग स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मोहन यादव से पहले पूर्व सीएम उमा भारती भी जनता दरबार लगा चुकी हैं। पूर्व सीएम उमा भारती 2003 में राज्य की मुख्यमंत्री बनीं थी। वह लोगों की समस्या सुनकर उसका समाधान करती थीं। कहा जाता है कि जनता दरबार में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर पहुंचते थे जिस कारण से इसे बंद करना पड़ा था। मध्य प्रदेश में सबसे पहले दिग्विजय सिंह ने जनता दरबार लगाने की शुरुआत की थी। दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक लोगों की समस्या सीएम आवास पर खुद सुनते थे। recent visitors 276

देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री में डॉ मोहन यादव ,,,,,, वें स्थान पर ,ताजा रिपोर्ट से मचा हड़कंप

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव(Dr Mohan Yadav) देश के पांचवें सबसे अमीर सीएम है। विधानसभा चुनाव 2023 के समय डॉ. मोहन यादव के पास 1.41 लाख व पत्नी सीमा के पास 3.38 लाख नकद थे। रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू 931 करोड़ रुपए की कुल संपत्ति के साथ देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (15 लाख रुपए) के पास सबसे कम संपत्ति है। वहीं देश के 31 मुख्यमंत्रियों(Richest Chief Ministers) की कुल संपत्ति 1630 करोड़ रुपए है। 2023-24 में भारत की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय लगभग, 85, 854 थी, जबकि एक मुख्यमंत्री की औसत आमदनी 13, 64, 310 रुपए है, जो औसत प्रति व्यक्ति आय का लगभग 7.3 गुना है। चल संपत्ति: विस चुनाव 23 के समय डॉ. मोहन(CM Mohan Yadav) यादव के पास 1.41 लाख व पत्नी सीमा के पास 3.38 लाख नकद थे। डॉ. यादव के पास 5.66 करोड़, पत्नी के पास 3.23 करोड़, परिवार के पास 59.66 लाख और बेटा अभिमन्यु के पास 42.96 लाख की चल संपत्ति थी।अचल संपत्ति का विवरण: डॉ. मोहन यादव के पास चुनाव के पहले 13.36 करोड़ और पत्नी सीमा पास 18.75 करोड़ की अचल संपत्ति थीं।चुनाव के पहले मोहन यादव पर 5.75 करोड़, पत्नी सीमा पर 1.86 करोड़, परिवार पर 4 लाख रुपए की देनदारियां थीं। recent visitors 281

बिना काम के मोहन सरकार का एक साल पूरा… बधाई कौन देगा?

भोपाल ! मध्यप्रदेश में 13 दिसंबर 2023 को भाजपा ने डॉ. मोहन यादव को प्रदेश की कमान सौंपी। एक साल के कार्यकाल में मोहन यादव ने कई मायनों में यह साबित कर दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का भाजपा का फैसला दूरदर्शी था। चुनौतियां कई थीं, पर उन्होंने काल के प्रवाह में इन फैसलों को मजबूती में बदलकर नेतृत्व के फैसले को सही साबित किया। शहर से ग्रामीण व्यवस्था तक हर मोर्चे पर सरकार ने अपना विजन बनाकर काम शुरू किया। जो काम प्रदेश में 20 साल में भी नहीं हुए थे उन पर सरकार ने सबसे ज्यादा फोकस किया। 27 नवंबर2500 करोड़ का कर्ज 20 साल के लिए2055 करोड़ का कर्ज 14 साल के लिए9 अक्टूबर2500 करोड़ का कर्ज 11 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 19 साल के लिए25 सितंबर2500 करोड़ का कर्ज 12 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 19 साल के लिए28 अगस्त2500 करोड़ का कर्ज 14 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 21 साल के लिएऔर 28 अगस्त को ही2500 करोड़ का कर्ज 11 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 21 साल के लिए नर्सिंग घोटाले के बाद नर्सिंग शिक्षा पर लगा कलंक मिटाना। कॉलेज कम हुए। परीक्षाएं समय पर नहीं हो सकीं। हालांकि अब परीक्षाएं शुरू हुई हैं। परीक्षाएं न होने से नर्सिंग स्टाफ कम हुआ है। कोर्ट की निगरानी में जांच जारी है। कई कॉलेजों की मान्यता समाप्त हो चुकी है। घोटाले को लेकर छात्र संगठन भी मुखर हैं। वर्ष 2016 से राज्य के अधिकारी और कर्मचारियों का प्रमोशन नहीं हो रहा। हाईकोर्ट ने पदोन्नति नियम निरस्त कर दिए हैं। सरकार के इस दिशा में प्रयास नाकाफी रहे। प्रमोशन का इंतजार करते-करते एक लाख से ज्यादा कर्मचारी रिटायर हो गए, लेकिन प्रमोशन का रास्ता नहीं निकला। इससे कर्मी नाराज हैं। मोहन सरकार ने एक लाख पदों पर नियुक्तियों का वादा किया है, प्रक्रिया दिसंबर तक शुरू होनी थी, लेकिन ज्यादातर विभागों में कागजी घोड़े ही दौड़ रहे हैं। खाली पदों की जानकारी भी नहीं भेज पाए हैं। विभागों में नियुक्तियां न होने से होने युवा ओवरएज हो रहे हैं। युवा आंदोलनरत भी हैं। आय से ज्यादा राज्य में खर्च है। कर्ज का बोझ बढ़ा है। लगातार कर्ज लेने का नतीजा यह है कि बजट से ज्यादा कर्ज हो गया है। कर्ज का बोझ कम करने के उपाय खोजे जा रहे हैं। सरकार में फिजूलखर्ची पर रोक लगाई गई है, लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं दिख रहे। राज्य में बढ़ते अपराध बड़ी चुनौती हैं। अपराधों के नए तरीके आने से लोग चिंतित हैं। साइबर क्राइम भी चुनौती है। इससे निपटने के लिए सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन पुलता इंतजाम नहीं हो पाए हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस इसको लेकर सरकार की लगातार घेराबंदी कर रही है। शहरों में बढ़ता प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है। चिंता यह है कि यदि प्रदूषण इसी तरह बढ़ता रहा तो कहीं दिल्ली जैसी हालत न बन जाएं, उसे रोकना किसी चुनौती से कम नहीं। प्रदूषण रोकने के लिए बजट में लगातार प्रावधान किया जा रह है, लेकिन धरातल पर यह नजर नहीं आता। 4000 वकीलों के सामने मुलयमंत्री ने वकीलों के हित के लिए घोषणा की थी। यह सरकार महज घोषणा करना जानती है, वादा पूरा नहीं करती। इसलिए सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। एडवोकेट प्रोटेशन एट भी लागू नहीं किया है।-पवन पाठक, अध्यक्ष, हाईकोर्ट बार एसो. ग्वालियर नया चेहरा होने के बावजूद सीएम डॉ. मोहन यादव ने शासन-प्रशासन पर मजबूत पकड़ बनाई है। औद्योगिक निवेशक लाने के लिए देश-विदेश में दौरों के भविष्य में अच्छे परिणाम दिखेंगे। शहरों में सड़क कनेक्टिविटी के लिए काम हो रहा है।-संजय गोरानी, सचिव यशवंत क्लब इंदौर सरकार ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करने एमएसएमई, स्टार्टअह्रश्वस और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं। आदिवासी परिवारों को मुलयधारा से जोडऩे के लिए उठाए गए कदमों के परिणाम देखने को मिल रहे हैं। -संजीव कुमार बैगा, युवा, शहडोल recent visitors 283

CM मोहन ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख सहायता राशि देने की घोषणा

CM Mohan expressed grief, announced to give Rs 2 lakh each as compensation to the families of the deceased भोपाल। मध्य प्रदेश के मुरैना ब्लास्ट की घटना पर सीएम डॉ मोहन यादव ने दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए सहायता राशि देने की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मुरैना जिले के थाना कोतवाली अंतर्गत राठौर कॉलोनी में कल देर रात एक मकान में अचानक विस्फोट की घटना से आसपास के मकान भी क्षतिग्रस्त होने से 4 लोगों की असामयिक मृत्यु एवं 5 लोगों के घायल होने की दुखद खबर प्राप्त हुई है। मेरी शोक संवेदनाएं शोकाकुल परिवारों के साथ है। प्रशासन की तत्परता से घायलों को ग्वालियर रेफर कर शीघ्र उपचार मिलने से अब सभी पूर्णतः स्वस्थ है। इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के मूल कारणों का पता लगाने के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित भी किया है, मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए है। बता दें कि सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के राठौर कॉलोनी टंच रोड में सोमवार की रात करीब 12 बजे एक मकान में विस्फोट हो गया। विस्फोट इतना भयानक था कि इसने दो मकान को अपनी चपेट में ले लिया। 3 मकान पूरी तरह से धराशाई हो गए। इस घटना में 4 महिलाओं की मौत हो चुकी है। जबकि पांच लोग घायल है।   recent visitors 157