आनंद नगर में चलेगा बुलडोजर, कांग्रेस ने कार्रवाई को बताया अन्यायपूर्ण

Bulldozer will be used in Anand Nagar, Congress calls the action unjust भोपाल। आनंद नगर में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के लिए व्यापारियों को नगर निगम ने नोटिस जारी किया है। इससे व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसकी आवाज उठाने व्यापारी मंडल एवं स्थानीय नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से उनके निवास पर मुलाकात की और अपनी पीड़ा साझा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी गोविंदपुरा के नागरिकों और पीड़ित दुकानदारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।  अध्यक्ष पटवारी ने गोविंदपुरा विधानसभा के आनंद नगर क्षेत्र में 40-50 वर्षों से संचालित दुकानों को तोड़ने के दिए गए आदेशों की कड़े शब्दों में निंदा की है।  उन्होंने इस कार्रवाई को अमानवीय, असंवेदनशील और गरीब-विरोधी बताया। पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार द्वारा बिना संवाद, बिना पुनर्वास और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानों को तोड़ने के आदेश देना सीधे-सीधे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की रोजी-रोटी पर हमला है। पटवारी ने कहा, जिस क्षेत्र ने 40 वर्षों तक लगातार भाजपा को वोट दिया, आज उसी क्षेत्र की जनता को बुलडोजर के नीचे कुचला जा रहा है। क्या यही 40 साल की वफादारी का इनाम है? उन्होंने आरोप लगाया कि मुआवजे के नाम पर गंभीर भेदभाव किया जा रहा है। कुछ चुनिंदा प्रभावशाली लोगों को ही लाभ दिया गया, जबकि अधिकांश छोटे दुकानदारों को या तो मुआवजा नहीं मिला या फिर 20 से 50 हजार रुपये जैसी नाममात्र की राशि देकर उनके साथ मजाक किया जा रहा है। पटवारी ने कहा कि आज के समय में नई दुकान खड़ी करना अत्यंत कठिन है और ऐसे में बिना समुचित पुनर्वास और सम्मानजनक मुआवजे के दुकानों को तोड़ना सरासर अन्याय है।  उन्होंने इस विषय में भोपाल कलेक्टर से कॉल के माध्यम से चर्चा कर आग्रह किया कि किसी भी गरीब दुकानदार की दुकान बिना वैकल्पिक व्यवस्था और उचित मुआवजे के न तोड़ी जाए। पटवारी ने भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष को निर्देश दिए कि वे आनंद नगर के दुकानदारों के समर्थन में तत्काल विरोध प्रदर्शन करें तथा आवश्यक कानूनी कदम उठाएं। पटवारी ने कहा, कांग्रेस पार्टी सदन से लेकर सड़क तक इस लड़ाई को लड़ेगी। गरीबों की रोजी-रोटी पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। recent visitors 65

फ्लाईओवर बनेगा या सिर्फ हवा में उड़ते रहेंगे बयान, कांग्रेस ने निकाली न्याय पदयात्रा 

Will the flyover be built or will the statements just remain in the air? Congress takes out a march on justice  जितेन्द्र श्रीवास्तव (विशेष संवाददाता)  जबलपुर। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के पहले ही पूर्व विधानसभा एक बार फिर से राजनीति का अखाड़ा बनता नजर आने लगा है। इस समय अम्बेडकर चौक से रद्दी चौकी तक के फ्लाई ओवर पर सियासी उड़ान तेज हो गई है। जहां एक ओर कैबिनेट मंत्री व विधायक लखन घनघोरिया ने शुक्रवार को बड़ी संख्या में आमजनों व कांग्रेसियों के साथ मिलकर पहाड़िया पैलेस रद्दी चौकी से लेकर भीमराव अंबेडकर चौक तक जन अधिकार न्याय पदयात्रा निकाली तो वहीं दूसरी तरफ भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने बयानों के बेतुके तीर छोड़े। इससे तो लग रहा कि  ‘यह फ्लाईओवर कम और चुनावी फ्लाईओवर ज्यादा है। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी और लखन खुद मंत्री थे, तब ये फ्लाईओवर कहां था? तब बजट में जगह नहीं मिली थी। कांग्रेस विधायक अब सड़क पर उतरकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। लेकिन इन भाजपा नेता ने अपनी 23 साल की सरकार और अपने ही नेताओं की घोषणाओं पर मौन साध लिया है।  जिसकी अभी सरकार है और ब्रिज बनाने वाले पीडब्ल्यूडी के मंत्री भी इसी जबलपुर शहर के निवासी हैं तो जिम्मेदारी किसकी है। यह सवाल जनचर्चा का विषय बना हुआ है। अब ऐसे में फ्लाईओवर ब्रिज बनेगा या फिर इसी तरह बयान उड़ते रहेंगे ये भी सवाल सभी के सामने बनकर खड़ा हो गया है। भाजपा जिला अध्यक्ष के अनुसार किसी भी निर्माण कार्य की घोषणा और उसकी स्वीकृति में अंतर होता है, अम्बेडकर चौक से रद्दी चौकी तक जिस फ्लाई ओवर की बात कोंग्रेस के विधायक कर रहे, उसे इन्होने कांग्रेस की 15 महीने की सरकार में बजट में शामिल नहीं किया था।  इसलिए निकाली गई यात्रा वहीं नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा का कहना है कि फ्लाईओवर निर्माण, गोहलपुर फ्लाई ओवर विस्तार और बिजली संकट की जनसमस्याओं के निराकरण के लिए जन अधिकार न्याय पदयात्रा निकाली गई है। इसके जरिए कांग्रेस व आमजन अपना हक मांग रहे हैं।  लखन ने किया दावा पदयात्रा के दौरान पूर्व मंत्री व विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि पूर्व विधानसभा क्षेत्र के साथ वर्षों से भेदभाव हो रहा है और शहर को सबसे जरूरी फ्लाईओवर आज तक सिर्फ फाइलों में ही घूम रहा है। उन्होंने दावा किया कि अंबेडकर चौक से अब्दुल हमीद चौक तक बनने वाला 269 करोड़ का फ्लाईओवर जाम से मुक्ति दिलाएगा, लेकिन सरकार सुन ही नहीं रही है। recent visitors 50

आनंदपुर धाम ट्रस्ट में चल रहे गुप्त तहखाने और आपराधिक गतिविधियां 

Secret cellars and criminal activities going on in Anandpur Dham Trust  भोपाल। अशोकनगर जिले के ईसागढ़ क्षेत्र में स्थित आनंदपुर धाम ट्रस्ट को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूर्व सदस्य, अनुसूचित जाति आयोग एवं प्रदेश अध्यक्ष, अनुसूचित जाति विभाग (कांग्रेस) प्रदीप अहिरवार ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर ट्रस्ट की गतिविधियों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि आनंदपुर धाम में लंबे समय से आपराधिक और असंवैधानिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पत्र में आरोप लगाया गया है कि आनंदपुर धाम ट्रस्ट परिसर में बिना अनुमति के बड़े-बड़े गुप्त तहखाने (बेसमेंट) बनाए गए हैं। इन तहखानों की न तो नगर प्रशासन से अनुमति ली गई और न ही किसी विभाग को इसकी विधिवत जानकारी दी गई। पत्र में आशंका जताई गई है कि इन तहखानों का उपयोग अवैध गतिविधियों और लोगों को छिपाकर रखने जैसे गंभीर कृत्यों के लिए किया जा सकता है, जिसकी तत्काल जांच आवश्यक है। प्रदीप अहिरवार ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि ट्रस्ट से जुड़े मामलों में युवक-युवतियों के साथ शारीरिक व मानसिक शोषण, तथा दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों की जमीनों पर अवैध कब्जा और अनैतिक खरीद-फरोख्त के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के समर्थन में पीड़ितों के बयान, वीडियो साक्ष्य और अन्य दस्तावेज उपलब्ध होने का दावा किया गया है। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आनंदपुर धाम ट्रस्ट के माध्यम से कुछ लोगों को पंजाब, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में भेजा गया, जहां उन्हें बिना किसी कानूनी प्रक्रिया और आधिकारिक रिकॉर्ड के रखा गया। इसे मानव तस्करी की गंभीर आशंका बताते हुए प्रदीप अहिरवार ने इस पूरे नेटवर्क की जांच की मांग की है। पत्र में भोपाल निवासी अमरीक सिंह जिसे हवाला कारोबारी बताया गया, सहित ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। इसके साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि आनंदपुर धाम को कथित रूप से प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त रहा है। पत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल सहित कुछ अधिकारियों के नामों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रदीप अहिरवार ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि यह मामला कानून व्यवस्था, मानवाधिकार और संविधान के मूल्यों से सीधे जुड़ा हुआ है। recent visitors 93

राहुल गांधी को इंदौर में सम्मेलन की नहीं मिली इजाजत, प्रशासन ने कहा- नो, सरकार पर बरसे जीतू पटवारी

Rahul Gandhi was denied permission to hold a conference in Indore, the administration said no, Jitu Patwari lashed out at the government इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त प्रकोप के कारण कई लोगों की मौत के बाद लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार को शहर के पीड़ित परिवारों और मरीजों से मुलाकात करेंगे। कांग्रेस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आठ से 10 मरीजों की हालत बेहद गंभीर है। उन्होंने बताया कि गांधी शनिवार को इंदौर पहुंचकर निजी क्षेत्र के बॉम्बे हॉस्पिटल जाएंगे और उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण भर्ती मरीजों से मिलकर उनका हाल जानेंगे। इंदौर में दूषित पानी पीने से 24 लोगों की मौत हो गई। कल नेता प्रतिपक्ष आदरणीय @RahulGandhi जी इंदौर आ रहे हैं। वे दूषित पानी से प्रभावित पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जानेंगे और उन्हें संबल प्रदान करेंगे। मध्य प्रदेश के हर नागरिक को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिले, इसी… pic.twitter.com/YmUTG7q7Gs — Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) January 16, 2026 सम्मेलन की नहीं मिली इजाजत- जीतू पटवारीपटवारी ने बताया कि पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भागीरथपुरा भी पहुंचेंगे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात करके उनके प्रति शोक संवेदनाएं व्यक्त करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हम दूषित पेयजल की समस्या के समाधान पर सकारात्मक चर्चा के लिए गांधी की मौजूदगी में बुद्धिजीवियों, पर्यावरणविदों और राज्य भर के नगर निगम पार्षदों का एक सम्मेलन आयोजित करना चाहते थे, लेकिन हमें प्रशासन ने इस आयोजन की अनुमति नहीं दी। इसलिए हम बाद में यह सम्मेलन आयोजित करेंगे।” सरकार पर बरसे जीतूपटवारी ने दावा किया कि पूरे प्रदेश में 70 प्रतिशत पानी दूषित होने के कारण पीने योग्य नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दूषित पेयजल को ‘धीमा जहर’ करार देते हुए दावा किया कि इससे लोगों की किडनी और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। पटवारी ने संस्कृत की मशहूर कहावत ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ का हवाला देते हुए प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधा और कहा, “इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत के बावजूद राज्य के मंत्री भव्य आयोजनों में व्यस्त हैं और वे हमें गालियां देकर कह रहे हैं कि हम इस घटना को लेकर सवाल क्यों उठा रहे हैं?” बता दें कि शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था। स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप में अब तक 24 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। मृतकों के आंकड़े को लेकर विरोधाभासी दावों के बीच राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में बृहस्पतिवार को पेश स्थिति रिपोर्ट में भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त प्रकोप के दौरान पांच माह के बालक समेत सात लोगों की मौत का जिक्र किया है। इस बीच, शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति के किए गए ‘डेथ ऑडिट’ की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा के 15 लोगों की मौत इस प्रकोप से किसी न किसी तरह जुड़ी हो सकती है। recent visitors 166

मध्य प्रदेश में फिर तेज हुई दलित-आदिवासी राजनीति, कांग्रेस साधने के लिए मुद्दों को दे रही हवा

Dalit-tribal politics has once again intensified in Madhya Pradesh, with the Congress raising issues to gain traction. भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर दलित-आदिवासी राजनीति केंद्र में आ गई है। भले ही विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से इन वर्गों को साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। खासकर कांग्रेस दलित और आदिवासी समाज को फिर से अपने पाले में लाने के लिए आक्रामक रुख अपनाती दिख रही है। ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर हुए विवाद से लेकर आदिवासी संगठनों के मुद्दों तक, कांग्रेस लगातार संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह इन वर्गों के साथ खड़ी है। हाल ही में ग्वालियर हाई कोर्ट खंडपीठ परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर हुए विवाद ने दलित राजनीति को नया मुद्दा दे दिया। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया समेत कई नेता खुलकर दलित संगठनों के समर्थन में सामने आए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रशासन और सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए दलित अस्मिता से जोड़कर इसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न बना दिया। ग्वालियर-चंबल अंचल में अनुसूचित जाति वर्ग की निर्णायक भूमिका को देखते हुए कांग्रेस का यह रुख महज संयोग नहीं माना जा रहा। विधानसभा गणित और दलित-आदिवासी महत्वप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए 35 और अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा करीब 40 सामान्य सीटों पर भी इन वर्गों का प्रभाव निर्णायक माना जाता है। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दल इन मतदाताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों और असंतोष के चलते दलित-आदिवासी मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर रहा, जिससे 15 वर्षों बाद कमल नाथ के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में लौटी। हालांकि 2023 में समीकरण बदले और भाजपा ने एससी-एसटी सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस की रणनीतिकांग्रेस का मौजूदा फोकस सिर्फ दलित नहीं, बल्कि आदिवासी समाज पर भी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का अधिकांश राजनीतिक जोर आदिवासी क्षेत्रों पर दिखाई देता है। हाल के दिनों में आइएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान को लेकर कांग्रेस की चुप्पी को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्मा आदिवासी समाज से आते हैं और अजाक्स के अध्यक्ष हैं, जिसे कांग्रेस का पारंपरिक समर्थन रहा है। वर्मा को दिए गए कारण बताओ नोटिस के विरोध में जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) समेत कई आदिवासी संगठन एकजुट हैं, जबकि ब्राह्मण समाज सरकार की निष्क्रियता से नाराज है। दिग्विजय सिंह और दलित एजेंडाप्रदेश में दलित राजनीति को धार देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुआई में नया दलित एजेंडा तैयार किया जा रहा है। अगले एक वर्ष तक प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इस एजेंडे को लेकर गतिविधियां चलाई जाएंगी और 13 जनवरी 2027 को इसे औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2002 में भी दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते दलित एजेंडा लागू हुआ था, हालांकि उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा का पलटवारभाजपा कांग्रेस की इस सक्रियता को महज “एजेंडा की राजनीति” बता रही है। प्रदेश के मंत्री रजनीश अग्रवाल का कहना है कि कांग्रेस का इतिहास एससी-एसटी वर्ग के विकास का नहीं रहा है। उनके अनुसार कांग्रेस ने जाति को जाति से लड़ाने का काम किया, जबकि भाजपा सामाजिक समरसता और विकास की राजनीति करती है। 2028 से पहले सियासी तापमानकुल मिलाकर, 2028 के चुनाव से काफी पहले ही मध्य प्रदेश में दलित-आदिवासी राजनीति का तापमान बढ़ने लगा है। कांग्रेस जहां इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा अपने विकास और समरसता के एजेंडे पर भरोसा जता रही है। आने वाले महीनों में यह राजनीति और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। recent visitors 66

मध्यप्रदेश में दलित-आदिवासी मुख्यमंत्री बने तो मुझे खुशी होगी: दिग्विजय सिंह

मध्यप्रदेश में दलित-आदिवासी मुख्यमंत्री बने तो मुझे खुशी होगी: दिग्विजय सिंह

I will be happy if a Dalit-tribal becomes the Chief Minister of Madhya Pradesh: Digvijay Singh भोपाल। साल 2002 में दिग्विजय सरकार में लागू किए गए भोपाल डिक्लेरेशन के 25 साल पूरे होने से पहले राजधानी भोपाल में आयोजित भोपाल डिक्लेरेशन-2 की ड्राफ्टिंग बैठक और उसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलित एजेंडे को लेकर खुली बहस देखने को मिली।एक ओर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने 2002 के दलित एजेंडे के अधूरा रह जाने के लिए अफसरशाही को जिम्मेदार ठहराया। वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दलित-आदिवासी नेतृत्व को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया।प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि अगर उनकी सरकार बनती है तो क्या दलित या आदिवासी मुख्यमंत्री बनेगा, तो उन्होंने कहा—कांग्रेस पार्टी ने पहले भी आदिवासी समाज के राजा नरेशचंद्र सिंह और अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया है।अगर अनुसूचित जाति या जनजाति का मुख्यमंत्री बनता है तो मुझे खुशी होगी। उन्होंने कहा कि नेतृत्व में सामाजिक प्रतिनिधित्व लोकतंत्र को मजबूत करता है।सज्जन वर्मा बोले- एजेंडा पवित्र था, लेकिन अफसरों ने फेल किया : पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा कि 2002 में जब भोपाल डिक्लेरेशन (दलित एजेंडा) लागू हुआ, तब वे दिग्विजय सिंह की कैबिनेट में मंत्री थे।उन्होंने कहा- दलित एजेंडा पवित्र मन से लाया गया था, लेकिन वह अधकचरा रह गया। अधिकारियों, खासकर तहसीलदारों और पटवारियों ने उसे फेल करने में बड़ी भूमिका निभाई।सज्जन वर्मा के मुताबिक, गरीब दलित-आदिवासी परिवार जहां बसे थे, वहीं जमीन देने की शुरूआत की गई थी, लेकिन कई जगह पैसे लेकर पट्टे बनाए गए और आज भी कई परिवारों को मालिकाना हक नहीं मिल पाया। recent visitors 81

मध्य प्रदेश में ठेके पर चलेगा मंत्रालय!, जीतू पटवारी का बड़ा दावा

मध्य प्रदेश में ठेके पर चलेगा मंत्रालय!, जीतू पटवारी का बड़ा दावा

Ministry will be run on contract in Madhya Pradesh! Jitu Patwari makes a big claim भोपाल ! मध्य प्रदेश में धार और बैतूल में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप) मॉडल पर दो नए मेडिकल कॉलेज और खुलने जा रहे हैं. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा इसकी आधारशिला रख रहे हैं. प्रदेश के जिला अस्पतालों से संबद्ध कर मेडिकल कॉलेज खोलने का कांग्रेस ने विरोध जताया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस द्वारा जिलों में खोले गए सरकारी अस्पतालों को सरकार ठेके पर दे रही है. सरकार ऐसी संस्थाओं को यह जिला अस्पताल ठेके पर दे रही है, जिसके पास कोई अनुभव ही नहीं है. बिना अनुभव वाली संस्थान पर मेहरबानी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि “जिला अस्पतालों से निजी मेडिकल कॉलेज को संबद्ध किए जाने के लिए सरकार ने टेंडर में शर्त रखी थी कि कम से कम 5 साल का मेडिकल कॉलेज को अनुभव होने चाहिए, लेकिन सरकार ने एक ही संस्था को 4 जिला अस्पताल सौंप दिया. इनका कोई अनुभव ही नहीं है. जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ भाषण और ताली बजाने से कुछ नहीं होगा. उन्हें पूछना चाहिए कि आखिर इससे प्रदेश का क्या भला होगा. कांग्रेस करेगी निजी मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निजी मेडिकल कॉलेज खोलने के दौरान शर्त रखी गई थी कि मेडिकल कॉलेजों में 100 बेड मुफ्त चलने चाहिए. एक भी ऐसा मेडिकल कॉलेज सरकार बता दे, जहां गरीबों से एक भी पैसा नहीं लिया जाता हो और उनका मुफ्त इलाज किया जा रहा हो. कांग्रेस अब अभियान शुरू करने जा रही है. 8 दिन चलने वाले अभियान के दौरान कांग्रेस एक-एक मेडिकल कॉलेज पहुंचेगी और देखेगी कि किस निजी मेडिकल कॉलेज में 100 बेड पर निजी मरीजों का मुफ्त इलाज किया गया. सरकार ने इस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया. इसके उलट अब सरकारी अस्पताल ठेके पर देकर सरकार उत्सव मना रही है.” मंत्रालय भी ठेके पर दे देगी क्या सरकार ? जीतू पटवारी ने कहा कि “प्रदेश में करीबन 3 हजार पंचायतें ठेके पर चल रही हैं. संस्थाएं सरपंच को साल भर का पैसा देकर पूरी पंचायत ठेके पर लेकर चला रही हैं. पंचायत के बाद अब इसी तरह जिला अस्पताल ठेके पर जा रही है. ऐसा न हो कि कहीं सरकार मंत्रालय भी ठेके पर चलने लगे. मंत्री नागर सिंह के भाई द्वारा सेल्समेन से मारपीट को लेकर जीतू पटवारी ने कहा कि इस घटना से यह प्रमाण मिलता है कि प्रदेश में खाद की कमी है, इसीलिए मंत्री के भाई ने मारपीट की. प्रदेश में पर्याप्त खाद के सरकार के दावे को इस घटना ने सामने ला दिया है. सरकार को कार्रवाई तो करनी ही चाहिए, लेकिन मंत्री के भाई का धन्यवाद कि उन्होंने सरकार को आइना दिखा दिया है.” recent visitors 88