शिवराज का रुतबा काम ना आया ,कार्तिकेय की लॉन्चिंग पर संगठन ने लगाया ब्रेक

budhni: Shivraj’s status did not work, organization put brakes on Karthikeya’s launch बुधनी उपचुनाव में बीजेपी ने रामाकांत भार्गव को टिकट दिया है। यह शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाते हैं। साथ ही लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिवराज के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी। इस सीट से शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। भोपाल: बुधनी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। इस रेस में कई नाम थे। रेस में सबसे आगे शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। इसके बाद विदिशा के पूर्व सांसद रामाकांत भार्गव के नाम की चर्चा थी। दिल्ली ने रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगाई है। ऐसे में चर्चा है कि Shivraj’s status did not work वाली सीट पर रामाकांत भार्गव की लॉटरी कैसे लग गई है। कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम की थी चर्चा दरअसल, शिवराज सिंह चौहान के विदिशा सीट से सांसद बनने के बाद बुधनी विधानसभा सीट खाली हुई थी। बुधनी में उपचुनाव की तारीख घोषित हो गई है। इसके बाद से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि शिवराज सिंह चौहान का वारिस कौन होगा। इस रेस में सबसे आगे कार्तिकेय सिंह चौहान ही चल रहे थे। वह पिता की सीट पर लगातार मेहनत भी कर रहे थे। उनके समर्थकों की इच्छा भी थी कि बुधनी से कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम पर ही मुहर लगे। वही प्रदेश चुनाव समिति की तरफ से पैनल में जो नाम भेजा गया था, उसमें कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम था। दिल्ली में नहीं बनी सहमति टिकट की घोषणा से दो दिन पहले शिवराज सिंह चौहान अपने बेटों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शादी का न्यौता देने गए थे। इसके बाद एमपी में अटकलें शुरू हो गई थीं कि कार्तिकेय सिंह चौहान को पीएम मोदी का आशीर्वाद मिल सकता है। चुनाव समिति की बैठक के बाद नामों की सूची आई तो रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी है। परिवारवाद से पार्टी ने बनाई दूरी कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में पार्टी परिवारवाद से दूर है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी नेता पुत्रों को पार्टी ने टिकट नहीं दिया। मध्य प्रदेश में कई बड़े नेताओं के पुत्र राजनीति में एंट्री के लिए ललायित हैं लेकिन पार्टी ने सभी की एंट्री पर ब्रेक लगा रखी है। अगर शिवराज सिंह चौहान के बेटे को टिकट देती तो गलत नैरेटिव गढ़ा जाता। शायद इससे बचने के लिए पार्टी ने यह फैसला लिया है। रामाकांत भार्गव हैं शिवराज सिंह चौहान के खास वहीं, रामाकांत भार्गव भी शिवराज सिंह चौहान के खास माने जाते हैं। शिवराज सिंह चौहान पहले विदिशा सीट से सांसद थे। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जब विदिशा से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया तो शिवराज की पसंद और करीबी रहे रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में रामाकांत भार्गव ने शिवराज सिंह चौहान के लिए सीट छोड़ दी। शिवराज सिंह चौहान विदिशा से सांसद बन गए हैं। वहीं, बुधनी में शिवराज की विरासत को अब रामाकांत भार्गव संभालेंगे। चुनाव प्रचार में जुट गए कार्तिकेय रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगने के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान पहली बार मीडिया के सामने आए तो उनके चेहरे पर शिकन भी देखने को मिला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रामाकांत भार्गव हमारे पितातुल्य हैं। मैं उनके लिए चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहा हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैंने चुनाव लड़ने की मंशा से कभी काम नहीं किया। यह मेरा सौभाग्य है कि कार्यकर्ताओं ने मेरा नाम पैनल तक पहुंचाया है। हम रामाकांत भार्गव के लिए दोगुनी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। Read More : https://mysecretnews.com/congress-bjp-face-to-face-clash-over-name-change/ recent visitors 160

अहिल्या माता और शिवाजी पर सियासत: कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, नाम परिवर्तन पर टकराव

Politics on Ahilya Mata and Shivaji: Congress-BJP face to face, clash over name change इंदौर में हुई मेयर इन काउंसिल की बैठक में रेसीडेंसी कोठी का नाम बदलकर शिवाजी कोठी (शिवाजी वाटिका) करने का प्रस्ताव पास होने के बाद राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। कांग्रेस नेता राकेश सिंह यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि यह कदम महाराष्ट्र में आगामी चुनावों के मद्देनजर उठाया गया है, ताकि वहां के वोट बैंक को साधा जा सके। उनका कहना है कि यह देवी अहिल्या बाई होलकर की उपेक्षा है, जिन्होंने इंदौर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। कांग्रेस बोली अहिल्या रेसीडेंसी नाम करना थारेसीडेंसी कोठी, जो लगभग 204 वर्ष पुरानी है और अंग्रेजी शासन के दौरान मालवा-निमाड क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता का केंद्र थी, का नामकरण शिवाजी महाराज के नाम पर किए जाने से कांग्रेस असहमत है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव ने भी सोशल मीडिया पर इस फैसले की आलोचना की और सुझाव दिया कि इसे देवी अहिल्या रेसीडेंसी कोठी नाम दिया जाना चाहिए था। गफ्फूर खां की बजरिया पर नहीं हुआ निर्णयसाथ ही, अन्य नामकरणों की भी बैठक में स्वीकृति दी गई, जिसमें फूटी कोठी ब्रिज का नाम सेवालाल महाराज ब्रिज और भंवरकुआं चौराहे का नाम टंट्या भील चौराहा रखा गया है। इसके अलावा, बीजेपी नेता वरुण पाल ने गफ्फूर खां की बजरिया का नाम बदलकर वीरांगना तुलसाबाई होलकर के नाम पर करने की मांग भी की थी, हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। दोनों के अपने तर्कइस नामकरण विवाद से दोनों दलों के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस इसे ऐतिहासिक व्यक्तियों के सम्मान से जोड़कर देख रही है, जबकि बीजेपी इसे अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत नामकरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है। recent visitors 124

सिंगरौली : सरकारी स्कूल में शराबी हेडमास्टर की हरकत, कार्रवाई की तैयारी

Drunk headmaster's actions in government school, preparation for action The villagers made a video of this

Drunk headmaster’s actions in government school, preparation for action सिंगरौली ! Drunk headmaster’s actions in government के नशे में पहुंचा. इसका वीडियो ग्रामीणों ने बना लिया. अब इस मामले में शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई की बात कही है. मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल से शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है. सिंगरौली जिले के ग्रामीण क्षेत्र बिंदुल संकुल केंद्र, पुरा गांव के प्राथमिक स्कूल में एक टीचर शराब के नशे में धुत नजर आया. शराब पीकर स्कूल आने की वजह भी शिक्षक ने बताई. उसने कहा कि मेरा मोबाइल गुम हो गया, दिमाग डिस्टर्ब है, इसलिए थोड़ी बहुत शराब पीकर आया हूं. स्कूल में सिर्फ एक टीचरपुरा गांव में सरकारी स्कूल में तैनात इस टीचर का नाम अर्जुन सिंह है. इसी प्राथमिक विद्यालय में हेडमास्टर भी है, जो लंबे समय से इसी स्कूल में है और अक्सर स्कूल में शराब के नशे में ही आता है. इस प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ यही एक शिक्षक है. ग्रामीणों ने बनाया वीडियोरोजाना की तरह बुधवार (16 अक्टूबर) को जब शराबी हेडमास्टर स्कूल पहुंचा तो ग्रामीणों ने उसका वीडियो बनाया और पूछा कि आप शराब पीकर क्यों आये हो? तो जवाब भी ऐसा दिया जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. शराबी हेडमास्टर ने कहा कि मेरा मोबाइल गुम गया है, इसलिए शराब पीकर स्कूल आया हूं. शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा?ग्रामीणों ने नशे में धुत्त शराबी हेडमास्टर का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी एसबी सिंह ने जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही. Read More : https://mysecretnews.com/chhatarpur-and-khajuraho-opposition-targeted/ recent visitors 210

निर्मला सप्रे का स्पष्टीकरण: विधानसभा अध्यक्ष को लिखित जवाब, कहा- ‘न मैंने कांग्रेस छोड़ी, न बीजेपी जॉइन की

Nirmala Sapre’s clarification: Written reply to the Assembly Speaker, said- ‘Neither I left Congress, nor joined BJP’ भोपाल। मध्य प्रदेश की विधायक Nirmala Sapre’s clarification के दलबदल से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित में जवाब दिया है। निर्मला ने कहा कि न मैंने कांग्रेस छोड़ी है और न बीजेपी ज्वाइन की है। उनके इस बयान से प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है। दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान Nirmala Sapre’s clarification ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में बीजेपी में शामिल हुई थी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इसे लेकर उमंग सिंघार ने विधानसभा में आवेदन दिया था। विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे को नोटिस जारी किया था। लिखित जवाब में क्या कहा? विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए अपने लिखित जवाब में सप्रे ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी निष्ठा कांग्रेस पार्टी के प्रति हमेशा रही है और रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नाम का इस्तेमाल कर कुछ तत्व भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लिखा, “कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए मेरे नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। मैं इसे पूरी तरह से खारिज करती हूं और कांग्रेस के प्रति अपनी वफादारी और समर्पण को दोहराती हूं।” राजनीतिक हलकों में हलचल निर्मला सप्रे की इस प्रतिक्रिया के बाद, राज्य की राजनीति में कई अटकलों पर विराम लग गया है। कांग्रेस पार्टी ने भी इस पर राहत की सांस ली है, क्योंकि सप्रे पार्टी की एक वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता मानी जाती हैं। बीजेपी खेमे में भी इस खबर को लेकर चर्चा हो रही थी, लेकिन अब सप्रे के इस बयान से यह साफ हो गया है कि उन्होंने कोई दल नहीं बदला है। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस का दो बार जवाब नहीं दिया था। नोटिस का जवाब नहीं देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने एक सप्ताह का समय दिया था। निर्मला ने 10 अक्टूबर को बंद लिफाफे में उत्तर भेजा। नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे ने जवाब देते हुए कहा था कि मैंने दलबदल नहीं किया है। इस मामले की सुनवाई अब विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर 21 अक्टूबर को कर सकते हैं। स्पीकर कांग्रेस से दलबदल के सबूत पेश करने को कह सकते हैं। Read More : https://mysecretnews.com/mining-department-running-with-half-staff/ recent visitors 148

मध्यप्रदेश के हर विवि में 500 कम्प्यूटर वाली मॉडर्न लैब बनेगी, साल भर नहीं चलेगी परीक्षा

भोपाल मध्यप्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी में 500 कम्प्यूटर वाली मॉडर्न लैब तैयार की जाएगी। ये लैब 24 घंटे सातों दिन स्टूडेंट्स को उपलब्ध रहेंगी। सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) और परीक्षा नियंत्रक की समीक्षा बैठक के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने ये निर्देश जारी किए हैं। इसमें जिन बिन्दुओं पर फोकस करने के निर्देश जारी किए हैं, उसमें छात्र हित से जुड़े कई मामले शामिल हैं। शासन ने ये निर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत हायर एजुकेशन में गुणवत्ता सुधार, रिसर्च सेंटर स्थापना, विद्यार्थियों के एनरोलमेंट, अगली कक्षा में प्रमोशन, परीक्षा संचालन, परीक्षा परिणाम और अन्य मामलों में डिस्कसन के बाद जारी किए हैं। ऐसा टाइम टेबल सेट करें कि साल भर न चले परीक्षा कुलसचिवों से कहा है कि वे ऐसा टाइम टेबल सेट करें कि परीक्षा साल भर न चले। खास तौर पर इग्नू विश्वविद्यालय, चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और भोज विश्वविद्यालय के कुलसचिव अपनी परीक्षा के टाइम टेबल परंपरागत विश्वविद्यालयों के टाइम टेबल के साथ सेट करें ताकि महाविद्यालय में साल भर परीक्षा की स्थिति न बने और शैक्षणिक कार्यक्रम कैलेंडर के अनुसार हो सके। इसके लिए आगामी कार्य योजना बनाई जाए और जरूरत हो तो स्कूलों में भी परीक्षा केंद्र बनाए जा सकते हैं। 45 दिन में पूरे हों एग्जाम, 15 जुलाई तक आए रिजल्ट सभी विश्वविद्यालय अपना परीक्षा कार्यक्रम 45 दिन में पूरा कराएं और एक माह में सप्लीमेंट्री परीक्षा कराएं। सभी विश्वविद्यालय परीक्षा परिणाम 15 जुलाई तक जारी करें। परीक्षाओं के कारण विद्यार्थियों का अस्थायी प्रवेश बाधित नहीं होना चाहिए। हायर क्लास में प्रवेश तुरंत देने की जिम्मेदरी कुलसचिव की है। काॅलेज में टीचर की नियुक्ति रोकें, शासन से होगी भर्ती उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि पुराने विश्वविद्यालयों के सभी रजिस्ट्रार शैक्षणिक स्टाफ की कमी को देखते हुए महाविद्यालय के शिक्षकों की नियुक्ति प्रथा को रोकें। रिक्त पदों पर शासन के निर्देशानुसार भर्ती की जाएगी ताकि महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता ठीक की जा सके। इसको लेकर शासन की ओर से दिव्यांगों और सहायक प्राध्यापकों की भर्ती को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा है कि सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए रोस्टर खुद तैयार करें और जरूरत होने पर उच्च शिक्षा विभाग से संपर्क करें। शैक्षणिक उड़नदस्ता तैयार हो जो बगैर सूचना विजिट करे विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक उड़नदस्ता तैयार कराएं जो अपने क्षेत्र में माह में एक बार बगैर सूचना दिए विजिट करें, यह विजिट सकारात्मक होना चाहिए। सभी विश्वविद्यालय अपने से संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी शासन को जल्द देंगे। सभी रजिस्ट्रार मान्यता और संबद्धता का साफ्टवेयर तैयार करने के लिए आपस में चर्चा करेंगे और शासन द्वारा ली जाने वाली अगली बैठक में जानकारी देंगे। रीवा, छतरपुर, छिंदवाड़ा में पेंशन फंड का पैसा जमा नहीं कार्यकारी परिषद की जानकारी सभी विश्वविद्यालयों को सरकार को देना होगी। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त भी शामिल होंगे। विश्वविद्यालयों के पेंशन पंड के संबंध में सभी विवि को निर्देश दिए हैं कि राशि पेंशन फंड में जमा करें। रीवा, छतरपुर और छिंदवाड़ा विश्वविद्यालयों के कुल सचिव से 2023-24 का पेंशन फंड का बाकी पैसा जल्द जमा करने के लिए कहा गया है। साथ ही ऑडिट रिपोर्ट भी देने के लिए कहा गया है। recent visitors 84

जबलपुर: गोहलपुर में आग ने लॉज को किया तबाह, लोग हुए परेशान

Jabalpur: Fire destroys lodge in Gohalpur, people get worried जबलपुर ! Jabalpur: Fire destroys lodge जबलपुर में देर रात एक लॉज में आग लगने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग लगने के बाद आस-पास के घरों से लोग घबराकर बाहर निकल आए थे। दशहरा पर्व के उल्लास के बीच शनिवार-रविवार दरमियानी रात करीब 3:15 बजे गोहलपुर क्षेत्र में स्थित एक लॉज में आग लगने से क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। आग की कुर्ती उठती लगता देख आसपास रहने वालों मे अफरा-तफरी मच गई और वह घरों से निकलकर बाहर आ गए। तत्काल ही लॉज में आग लगने की सूचना नगर निगम के दमकल भाग को दी गई। इसकी जानकारी लगते ही मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने आग पर काबू पाया। आग से लॉज के पर्दे, फर्नीचर सहित अन्य सामान जलकर खाक हो गया। Read More : https://mysecretnews.com/bjp-mla-brijbihari-pateria/ एक घंटे की मशक्कत के बाद बुझी आग दमकल कर्मियों के मुताबिक तकरीबन 3:15 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। तत्काल ही एक बड़ा दमकल वाहन रवाना किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, धुआं उठ रहा था। लगभग लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। दमकल विभाग के मुताबिक फिलहाल आग लगने की वजह शार्ट सर्किट बताई जा रही है। लॉज अजय पटेल का बताया जा रहा हैं। recent visitors 168

BJP विधायक बृजबिहारी पटेरिया ने इस्तीफा लिया वापस, कहा- ‘गुस्से में किया था निर्णय

BJP MLA Brijbihari Pateria withdrew his resignation out of emotion सागर: BJP MLA Brijbihari Pateria ने अपना इस्तीफा वापस लेने के बाद कहा कि वह गुस्से में लिया गया कदम था. एफआईआर दर्ज हो गई है, अब इस्तीफे का कोई विषय नहीं है. संगठन और सरकार मेरे साथ है.सागर जिले के देवरी से BJP MLA Brijbihari Pateria ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है. विधायक एक डॉक्टर के खिलाफ रिश्वत मांगने को लेकर थाने में एफआईआर दर्ज कराने गए थे, लेकिन शिकायत न लिखे जाने पर उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया और धरने पर बैठ गए. देर रात तक चले धरने के बाद डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद विधायक ने अपना इस्तीफा वापस लिया. दरअसल, सागर के केसली थाना क्षेत्र के ग्राम मेड़की में सर्पदंश से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर ने रिपोर्ट में सर्पदंश से मौत लिखने की एवज जगह में 40 हजार रुपये मांगे. सबूत होने के बाद भी पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की. इसके बाद विधायक थाने पहुंचे, फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई. इसके बाद BJP MLA Brijbihari Pateria ने विधानसभा अध्यक्ष के नाम अपना इस्तीफा लिखकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया और केसली पुलिस थाने में धरने पर बैठ गए. इस दौरान उन्होंने कहा, “सबूत और सत्ता पक्ष के होने के बाद भी अगर एफआईआर नहीं हो रही है तो इससे शर्मनाक बात क्या हो सकती है?” उन्होंने कहा, जब तक डॉक्टर दीपक दूबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती तब तक धरने पर बैठे रहेंगे. Read more : https://mysecretnews.com/mining-department-running-with-half-staff/ इस्तीफा वापस लेने के बाद क्या बोले BJP विधायक?उन्होंने यह भी बताया कि “ऐसी जानकारी लग रही है कि शायद डॉक्टर की पत्नी भी पुलिस में है इसलिए पुलिस मामला दर्ज करने से बच रही है.” वहीं देर रात जब केसली पुलिस ने डॉक्टर दीपक दूबे के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया, तो बृजबिहारी पटेरिया ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया. उन्होंने कहा, “वह आक्रोश में लिया गया कदम था. एफआईआर दर्ज हो गई है, अब इस्तीफे का कोई विषय नहीं है. संगठन और सरकार मेरे साथ है, मुख्यमंत्री जी के आदेश का मैं पालन करूंगा.” वहीं अब इस मामले ने प्रदेश का सियासी पारा बढ़ा दिया है. पूर्व मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी विधायक गोपाल भार्गव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर ट्वीट कर कहा, “मैंने विधायक बृजबिहारी पटेरिया से बात की और पूरा मामला जाना. प्रदेश की बीजेपी सरकार आमजन के प्रति बेहद संवेदनशील है, इस प्रकार के गैर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली और व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.” recent visitors 165