भोपाल: हमीदिया रोड पर ध्वनि प्रदूषण की बाढ़: पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की नई रिपोर्ट

Bhopal: Flood of noise pollution on Hamidia Road: New report of Pollution Control Board भोपाल: मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में राजधानी भोपाल के हमीदिया रोड को सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण वाला क्षेत्र घोषित किया गया है। बीते 6 महीनों (1 अप्रैल से 30 सितंबर) के आंकड़ों के अनुसार, हमीदिया रोड पर 68 डेसिबल तक का नॉइस पॉल्यूशन दर्ज किया गया है, जो शहर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। इस रिपोर्ट में गोविंदापुरा और बैरागढ़ में ध्वनि प्रदूषण 50 डेसिबल से कम दर्ज हुआ है, जबकि हमीदिया रोड पर इंडस्ट्रियल एरिया से भी ज्यादा शोर है। ट्रैफिक और डीजे-बैंड हैं ध्वनि प्रदूषण के मुख्य कारण विशेषज्ञों का मानना है कि हमीदिया रोड पर भारी ट्रैफिक और डीजे-बैंड जैसी गतिविधियों के कारण नॉइस पॉल्यूशन की समस्या अधिक गंभीर है। इस सड़क पर प्रतिदिन प्रति घंटा 8 से 10 हजार वाहनों का आवागमन होता है, जिससे ध्वनि प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना रहता है। इसके अलावा, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान डीजे और बैंड की आवाजें इस समस्या को और बढ़ा देती हैं। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, हमीदिया रोड पर अप्रैल से सितंबर तक का औसत ध्वनि स्तर निम्न प्रकार रहा: इसके मुकाबले, गोविंदापुरा और बैरागढ़ में ध्वनि प्रदूषण का स्तर कम पाया गया। गोविंदापुरा में अगस्त में 49 डेसिबल और बैरागढ़ में अगस्त और सितंबर में 49 से 52 डेसिबल तक का ध्वनि स्तर दर्ज किया गया। साइलेंट जोन में भी प्रदूषण रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के पर्यावरण परिसर, जो साइलेंट जोन के रूप में जाना जाता है, में भी ध्वनि प्रदूषण चिंता का विषय है। यहां भी अप्रैल से सितंबर के बीच ध्वनि स्तर 53 से 58 डेसिबल के बीच रहा, जो साइलेंट जोन के लिए निर्धारित मानकों से अधिक है। तेज शोर ने ली बच्चे की जान तेज ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव हाल ही में तब सामने आए जब 14 अक्टूबर को 13 वर्षीय समर बिल्लौरे की मौत हो गई। समर डीजे की तेज आवाज में मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान डांस कर रहा था, जब उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार ने आरोप लगाया कि डीजे की अत्यधिक आवाज उसकी मौत का कारण बनी। ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण की आवश्यकता हमीदिया रोड और अन्य क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के मद्देनजर, शहर के नागरिकों और पर्यावरणविदों ने प्रशासन से इस समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यह आवश्यक है कि प्रशासन नॉइस पॉल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोका जा सके और नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम किया जा सके। recent visitors 148

ग्रामीण चिकित्सकीय सेवाओं को सशक्त करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

Strengthening rural medical services is the government’s top priority: Deputy Chief Minister Shukla भोपाल ! उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण कर फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में विकसित करने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में पदोन्नति की प्रक्रिया की समीक्षा की और नियमों के अनुसार प्रक्रिया को शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के गुणवत्तापूर्ण प्रदाय के लिए चिकित्सकीय मैनपॉवर का मनोबल और उत्साहवर्धन अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में विभिन्न विभागीय विषयों की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए महत्वपूर्ण निर्देश प्रदान किए। ग्रामीण क्षेत्रों में रेडियोलॉजिस्ट सेवा प्रदाय व्यवस्था की करें व्यवस्था उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आईपीएचएस मानकों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की और समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिये। प्रशासनिक औपचारिकताओं की पूर्ति में कमी से प्रक्रिया में व्यवधान न आये यह सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने और मातृ मृत्यु दर तथा शिशु मृत्यु दर में सुधार के उद्देश्य से सोनोलॉजिस्ट की उपलब्धता आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में सोनोलॉजिस्ट (रेडियोग्राफर) की सेवा के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए तकनीकी समस्याओं का निदान कर प्रक्रिया पूर्ण की जाये। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी प्रदाय और प्रबंधन के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का करें उपयोग उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी प्रदाय और प्रबंधन के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग महत्वपूर्ण है। डिजिटल हस्तक्षेपों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के कुशल प्रबंधन के लिए एचआरएमएस और एचएमआईएस के त्वरित क्रियान्वयन के लिये आवश्यक कार्यवाही करने के उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिये। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी उपस्थित थे। recent visitors 113

शिवराज का रुतबा काम ना आया ,कार्तिकेय की लॉन्चिंग पर संगठन ने लगाया ब्रेक

budhni: Shivraj’s status did not work, organization put brakes on Karthikeya’s launch बुधनी उपचुनाव में बीजेपी ने रामाकांत भार्गव को टिकट दिया है। यह शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाते हैं। साथ ही लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिवराज के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी। इस सीट से शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। भोपाल: बुधनी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। इस रेस में कई नाम थे। रेस में सबसे आगे शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। इसके बाद विदिशा के पूर्व सांसद रामाकांत भार्गव के नाम की चर्चा थी। दिल्ली ने रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगाई है। ऐसे में चर्चा है कि Shivraj’s status did not work वाली सीट पर रामाकांत भार्गव की लॉटरी कैसे लग गई है। कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम की थी चर्चा दरअसल, शिवराज सिंह चौहान के विदिशा सीट से सांसद बनने के बाद बुधनी विधानसभा सीट खाली हुई थी। बुधनी में उपचुनाव की तारीख घोषित हो गई है। इसके बाद से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि शिवराज सिंह चौहान का वारिस कौन होगा। इस रेस में सबसे आगे कार्तिकेय सिंह चौहान ही चल रहे थे। वह पिता की सीट पर लगातार मेहनत भी कर रहे थे। उनके समर्थकों की इच्छा भी थी कि बुधनी से कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम पर ही मुहर लगे। वही प्रदेश चुनाव समिति की तरफ से पैनल में जो नाम भेजा गया था, उसमें कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम था। दिल्ली में नहीं बनी सहमति टिकट की घोषणा से दो दिन पहले शिवराज सिंह चौहान अपने बेटों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शादी का न्यौता देने गए थे। इसके बाद एमपी में अटकलें शुरू हो गई थीं कि कार्तिकेय सिंह चौहान को पीएम मोदी का आशीर्वाद मिल सकता है। चुनाव समिति की बैठक के बाद नामों की सूची आई तो रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी है। परिवारवाद से पार्टी ने बनाई दूरी कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में पार्टी परिवारवाद से दूर है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी नेता पुत्रों को पार्टी ने टिकट नहीं दिया। मध्य प्रदेश में कई बड़े नेताओं के पुत्र राजनीति में एंट्री के लिए ललायित हैं लेकिन पार्टी ने सभी की एंट्री पर ब्रेक लगा रखी है। अगर शिवराज सिंह चौहान के बेटे को टिकट देती तो गलत नैरेटिव गढ़ा जाता। शायद इससे बचने के लिए पार्टी ने यह फैसला लिया है। रामाकांत भार्गव हैं शिवराज सिंह चौहान के खास वहीं, रामाकांत भार्गव भी शिवराज सिंह चौहान के खास माने जाते हैं। शिवराज सिंह चौहान पहले विदिशा सीट से सांसद थे। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जब विदिशा से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया तो शिवराज की पसंद और करीबी रहे रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में रामाकांत भार्गव ने शिवराज सिंह चौहान के लिए सीट छोड़ दी। शिवराज सिंह चौहान विदिशा से सांसद बन गए हैं। वहीं, बुधनी में शिवराज की विरासत को अब रामाकांत भार्गव संभालेंगे। चुनाव प्रचार में जुट गए कार्तिकेय रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगने के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान पहली बार मीडिया के सामने आए तो उनके चेहरे पर शिकन भी देखने को मिला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रामाकांत भार्गव हमारे पितातुल्य हैं। मैं उनके लिए चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहा हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैंने चुनाव लड़ने की मंशा से कभी काम नहीं किया। यह मेरा सौभाग्य है कि कार्यकर्ताओं ने मेरा नाम पैनल तक पहुंचाया है। हम रामाकांत भार्गव के लिए दोगुनी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। Read More : https://mysecretnews.com/congress-bjp-face-to-face-clash-over-name-change/ recent visitors 156

अहिल्या माता और शिवाजी पर सियासत: कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, नाम परिवर्तन पर टकराव

Politics on Ahilya Mata and Shivaji: Congress-BJP face to face, clash over name change इंदौर में हुई मेयर इन काउंसिल की बैठक में रेसीडेंसी कोठी का नाम बदलकर शिवाजी कोठी (शिवाजी वाटिका) करने का प्रस्ताव पास होने के बाद राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। कांग्रेस नेता राकेश सिंह यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि यह कदम महाराष्ट्र में आगामी चुनावों के मद्देनजर उठाया गया है, ताकि वहां के वोट बैंक को साधा जा सके। उनका कहना है कि यह देवी अहिल्या बाई होलकर की उपेक्षा है, जिन्होंने इंदौर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। कांग्रेस बोली अहिल्या रेसीडेंसी नाम करना थारेसीडेंसी कोठी, जो लगभग 204 वर्ष पुरानी है और अंग्रेजी शासन के दौरान मालवा-निमाड क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता का केंद्र थी, का नामकरण शिवाजी महाराज के नाम पर किए जाने से कांग्रेस असहमत है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव ने भी सोशल मीडिया पर इस फैसले की आलोचना की और सुझाव दिया कि इसे देवी अहिल्या रेसीडेंसी कोठी नाम दिया जाना चाहिए था। गफ्फूर खां की बजरिया पर नहीं हुआ निर्णयसाथ ही, अन्य नामकरणों की भी बैठक में स्वीकृति दी गई, जिसमें फूटी कोठी ब्रिज का नाम सेवालाल महाराज ब्रिज और भंवरकुआं चौराहे का नाम टंट्या भील चौराहा रखा गया है। इसके अलावा, बीजेपी नेता वरुण पाल ने गफ्फूर खां की बजरिया का नाम बदलकर वीरांगना तुलसाबाई होलकर के नाम पर करने की मांग भी की थी, हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। दोनों के अपने तर्कइस नामकरण विवाद से दोनों दलों के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस इसे ऐतिहासिक व्यक्तियों के सम्मान से जोड़कर देख रही है, जबकि बीजेपी इसे अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत नामकरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है। recent visitors 119

सिंगरौली : सरकारी स्कूल में शराबी हेडमास्टर की हरकत, कार्रवाई की तैयारी

Drunk headmaster's actions in government school, preparation for action The villagers made a video of this

Drunk headmaster’s actions in government school, preparation for action सिंगरौली ! Drunk headmaster’s actions in government के नशे में पहुंचा. इसका वीडियो ग्रामीणों ने बना लिया. अब इस मामले में शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई की बात कही है. मध्य प्रदेश के एक सरकारी स्कूल से शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है. सिंगरौली जिले के ग्रामीण क्षेत्र बिंदुल संकुल केंद्र, पुरा गांव के प्राथमिक स्कूल में एक टीचर शराब के नशे में धुत नजर आया. शराब पीकर स्कूल आने की वजह भी शिक्षक ने बताई. उसने कहा कि मेरा मोबाइल गुम हो गया, दिमाग डिस्टर्ब है, इसलिए थोड़ी बहुत शराब पीकर आया हूं. स्कूल में सिर्फ एक टीचरपुरा गांव में सरकारी स्कूल में तैनात इस टीचर का नाम अर्जुन सिंह है. इसी प्राथमिक विद्यालय में हेडमास्टर भी है, जो लंबे समय से इसी स्कूल में है और अक्सर स्कूल में शराब के नशे में ही आता है. इस प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ यही एक शिक्षक है. ग्रामीणों ने बनाया वीडियोरोजाना की तरह बुधवार (16 अक्टूबर) को जब शराबी हेडमास्टर स्कूल पहुंचा तो ग्रामीणों ने उसका वीडियो बनाया और पूछा कि आप शराब पीकर क्यों आये हो? तो जवाब भी ऐसा दिया जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. शराबी हेडमास्टर ने कहा कि मेरा मोबाइल गुम गया है, इसलिए शराब पीकर स्कूल आया हूं. शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा?ग्रामीणों ने नशे में धुत्त शराबी हेडमास्टर का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी एसबी सिंह ने जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही. Read More : https://mysecretnews.com/chhatarpur-and-khajuraho-opposition-targeted/ recent visitors 206

निर्मला सप्रे का स्पष्टीकरण: विधानसभा अध्यक्ष को लिखित जवाब, कहा- ‘न मैंने कांग्रेस छोड़ी, न बीजेपी जॉइन की

Nirmala Sapre’s clarification: Written reply to the Assembly Speaker, said- ‘Neither I left Congress, nor joined BJP’ भोपाल। मध्य प्रदेश की विधायक Nirmala Sapre’s clarification के दलबदल से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित में जवाब दिया है। निर्मला ने कहा कि न मैंने कांग्रेस छोड़ी है और न बीजेपी ज्वाइन की है। उनके इस बयान से प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है। दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान Nirmala Sapre’s clarification ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में बीजेपी में शामिल हुई थी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इसे लेकर उमंग सिंघार ने विधानसभा में आवेदन दिया था। विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे को नोटिस जारी किया था। लिखित जवाब में क्या कहा? विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए अपने लिखित जवाब में सप्रे ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी निष्ठा कांग्रेस पार्टी के प्रति हमेशा रही है और रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नाम का इस्तेमाल कर कुछ तत्व भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लिखा, “कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए मेरे नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। मैं इसे पूरी तरह से खारिज करती हूं और कांग्रेस के प्रति अपनी वफादारी और समर्पण को दोहराती हूं।” राजनीतिक हलकों में हलचल निर्मला सप्रे की इस प्रतिक्रिया के बाद, राज्य की राजनीति में कई अटकलों पर विराम लग गया है। कांग्रेस पार्टी ने भी इस पर राहत की सांस ली है, क्योंकि सप्रे पार्टी की एक वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता मानी जाती हैं। बीजेपी खेमे में भी इस खबर को लेकर चर्चा हो रही थी, लेकिन अब सप्रे के इस बयान से यह साफ हो गया है कि उन्होंने कोई दल नहीं बदला है। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस का दो बार जवाब नहीं दिया था। नोटिस का जवाब नहीं देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने एक सप्ताह का समय दिया था। निर्मला ने 10 अक्टूबर को बंद लिफाफे में उत्तर भेजा। नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे ने जवाब देते हुए कहा था कि मैंने दलबदल नहीं किया है। इस मामले की सुनवाई अब विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर 21 अक्टूबर को कर सकते हैं। स्पीकर कांग्रेस से दलबदल के सबूत पेश करने को कह सकते हैं। Read More : https://mysecretnews.com/mining-department-running-with-half-staff/ recent visitors 141

मध्यप्रदेश के हर विवि में 500 कम्प्यूटर वाली मॉडर्न लैब बनेगी, साल भर नहीं चलेगी परीक्षा

भोपाल मध्यप्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी में 500 कम्प्यूटर वाली मॉडर्न लैब तैयार की जाएगी। ये लैब 24 घंटे सातों दिन स्टूडेंट्स को उपलब्ध रहेंगी। सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) और परीक्षा नियंत्रक की समीक्षा बैठक के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने ये निर्देश जारी किए हैं। इसमें जिन बिन्दुओं पर फोकस करने के निर्देश जारी किए हैं, उसमें छात्र हित से जुड़े कई मामले शामिल हैं। शासन ने ये निर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत हायर एजुकेशन में गुणवत्ता सुधार, रिसर्च सेंटर स्थापना, विद्यार्थियों के एनरोलमेंट, अगली कक्षा में प्रमोशन, परीक्षा संचालन, परीक्षा परिणाम और अन्य मामलों में डिस्कसन के बाद जारी किए हैं। ऐसा टाइम टेबल सेट करें कि साल भर न चले परीक्षा कुलसचिवों से कहा है कि वे ऐसा टाइम टेबल सेट करें कि परीक्षा साल भर न चले। खास तौर पर इग्नू विश्वविद्यालय, चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और भोज विश्वविद्यालय के कुलसचिव अपनी परीक्षा के टाइम टेबल परंपरागत विश्वविद्यालयों के टाइम टेबल के साथ सेट करें ताकि महाविद्यालय में साल भर परीक्षा की स्थिति न बने और शैक्षणिक कार्यक्रम कैलेंडर के अनुसार हो सके। इसके लिए आगामी कार्य योजना बनाई जाए और जरूरत हो तो स्कूलों में भी परीक्षा केंद्र बनाए जा सकते हैं। 45 दिन में पूरे हों एग्जाम, 15 जुलाई तक आए रिजल्ट सभी विश्वविद्यालय अपना परीक्षा कार्यक्रम 45 दिन में पूरा कराएं और एक माह में सप्लीमेंट्री परीक्षा कराएं। सभी विश्वविद्यालय परीक्षा परिणाम 15 जुलाई तक जारी करें। परीक्षाओं के कारण विद्यार्थियों का अस्थायी प्रवेश बाधित नहीं होना चाहिए। हायर क्लास में प्रवेश तुरंत देने की जिम्मेदरी कुलसचिव की है। काॅलेज में टीचर की नियुक्ति रोकें, शासन से होगी भर्ती उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि पुराने विश्वविद्यालयों के सभी रजिस्ट्रार शैक्षणिक स्टाफ की कमी को देखते हुए महाविद्यालय के शिक्षकों की नियुक्ति प्रथा को रोकें। रिक्त पदों पर शासन के निर्देशानुसार भर्ती की जाएगी ताकि महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता ठीक की जा सके। इसको लेकर शासन की ओर से दिव्यांगों और सहायक प्राध्यापकों की भर्ती को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा है कि सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए रोस्टर खुद तैयार करें और जरूरत होने पर उच्च शिक्षा विभाग से संपर्क करें। शैक्षणिक उड़नदस्ता तैयार हो जो बगैर सूचना विजिट करे विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक उड़नदस्ता तैयार कराएं जो अपने क्षेत्र में माह में एक बार बगैर सूचना दिए विजिट करें, यह विजिट सकारात्मक होना चाहिए। सभी विश्वविद्यालय अपने से संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी शासन को जल्द देंगे। सभी रजिस्ट्रार मान्यता और संबद्धता का साफ्टवेयर तैयार करने के लिए आपस में चर्चा करेंगे और शासन द्वारा ली जाने वाली अगली बैठक में जानकारी देंगे। रीवा, छतरपुर, छिंदवाड़ा में पेंशन फंड का पैसा जमा नहीं कार्यकारी परिषद की जानकारी सभी विश्वविद्यालयों को सरकार को देना होगी। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त भी शामिल होंगे। विश्वविद्यालयों के पेंशन पंड के संबंध में सभी विवि को निर्देश दिए हैं कि राशि पेंशन फंड में जमा करें। रीवा, छतरपुर और छिंदवाड़ा विश्वविद्यालयों के कुल सचिव से 2023-24 का पेंशन फंड का बाकी पैसा जल्द जमा करने के लिए कहा गया है। साथ ही ऑडिट रिपोर्ट भी देने के लिए कहा गया है। recent visitors 81