Bjp अध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी के पार्षदों को PIC से किया बाहर ,भाजपा आपसी खींचतान के चलते

Bjp अध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी के पार्षदों को PIC से किया बाहर ,भाजपा आपसी खींचतान के चलते

The BJP president expelled councillors from his own party from the PIC due to internal infighting within the BJP. मध्य प्रदेश के गुना में भाजपा आपसी खींचतान खुलकर सामने आई। नपा परिषद अध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी के पार्षदों को सबक सिखाते हुए पीआईसी से बाहर किया और जातीय समीकरण साधते हुए नए सदस्य जोड़े। BJP Faction War: गुना नगरपालिका परिषद (Guna Municipal Council) में भाजपा पार्षदों की आपसी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले दिनों भाजपा के अधिकतर पार्षदों ने अपनी ही नगरपालिका अध्यक्ष द्वारा रखे गए प्रस्ताव विपक्ष के साथ मिलकर गिरा दिए थे। आठ पार्षद केवल नगर पालिका अध्यक्ष के साथ थे। इसके बाद् भाजपा पार्षदों में रार बढ़ गई। इसके चलते नगरपालिका अध्यक्ष ने उन पार्षदों को सबक सिखाने के लिए प्रेसीडेंट इन काउंसिल (पीआइसी) से छुट्टी कर दी है। इसमें पीआइसी के सदस्य रहे दिनेश शर्मा, अलका कोरी, अजब बाई लोधा और सुमन लोधा को हटाया गया है। उनकी जगह विनोद लोधा, राजकुमारी जाटव, अनीता कुशवाह, कीर्ति सरवैया को पीआइसी में प्रभारी के रूप में शामिल किया है। पीआइसी सदस्यों के बदले गए विभागनई पीआइसी में कई सदस्यों के भी विभाग बदल दिए हैं। पीआइसी की किसी भी समिति या विभाग में कांग्रेस की पार्षद रश्मि शर्मा को शामिल नहीं किया है। पार्षदों के बीच यह चर्चा है कि पीआइसी के फेरबदल का मामला स्थानीय संगठन के साथ-साथ भाजपा प्रदेश संगठन के पास भेजा जा सकता है। वहीं अध्यक्ष इस फेरबदल का कारण भाजपा के रीति-नीति के अनुसार जातिगत समीकरण और महिलाओं का प्रतिनिधित्व देने वाला बता रही है। गुटबाजी के चलते किया गया बदलावनपा अध्यक्ष के अनुसार स्वास्थ्य समिति के प्रभारी दिनेश शर्मा, सामान्य प्रशासन समिति की प्रभारी अलका कोरी, शहरी गरीबी उपशमन विभाग की प्रभारी सुमन लोधा और यातायात परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रभारी अजब बाई लोधा को अध्यक्ष ने पीआइसी सदस्य बनाया था। लेकिन लगातार विवाद और गुटबाजी चलते बदलाव किया गया है। विरोध के चलते पास नहीं हो पाए थे कई प्रस्तावपिछले दिनों हुई नगरपालिका परिषद की बैठक में रेलवे को पानी दिए जाने, शहर की मुख्य सड़कों के डामरीकरण किए जाने आदि प्रस्ताव को भाजपा पार्षद दल की आपसी गुटबाजी के चलते स्वीकृति नहीं मिल पाई थी। ऐसे ही पूर्व में 19 सितंबर को होने वाली नगरपालिका परिषद की बैठक आपसी सहमति न बनने और विवाद होने के कारण स्थगित कर दी थी। भाजपा कई पार्षद विवाद के बाद शिकायत करने पुलिस थाने भी पहुंच गए थे। अब ये है नई पीआइसी नई पीआईसी में राजकुमारी जाटव, राजू ओझा, अनीता कुशवाह, कैलाश धाकड़, विनोद लोधा, कीर्ति सरवैया, बबीता साहू को शामिल किया है।सामान्य प्रशासन विभाग समिति की प्रभारी राजकुमारी जाटव होंगी, तथा सदस्य के रूप में बबीता साहू, अनीता कुशवाह, अलका कोरी. राजू ओझा. नीता कुशवाह, कैलाश धाकड़, विनोद लोधा होंगे। जल कार्य एवं सीवरेज विभाग के प्रभारी राजू ओझा को बनाया है। सदस्य के रूप में सुशीला कुशवाह. संध्या सोनी, ओमप्रकाश कुशवाह. फूलबाई ओझा, राममूर्ति कुशवाह, तरुण सेन, नीता कुशवाह है।लोक निर्माण एवं उद्यान, विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभारी अनीता कुशवाह हैं। इसमें सदस्य के रूप में अलका कोरी. सुमन लोधा, राधाबाई कुशवाह, संध्या सोनी. राजकुमारी जाटव, सुनीता शर्मा, तरुण मालवीय हैं।राजस्व, वित्त एवं लेखा विभाग के प्रभारी कैलाश धाकड़ होंगे। सदस्य के रूप में महेश कुशवाह, ओमप्रकाश कुशवाह, कीर्ति सरवैया, नीता कुशवाह, रमेश भील, दिनेश शर्मा, विनोद लोधा शामिल हैं। स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ठ प्रबर्धन विभाग के प्रभारी विनोद लोधा होंगे, सदस्य के रूप में ममता तोमर, तरन्नुम खान, कृष्णा मौर्या, फूलबाई ओझा, संध्या सोनी, ओमप्रकाश कुशवाह, अनीता कुशवाह शामिल रहेंगे।योजना यातायात परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रभारी कीर्ति सरवैया को बनाया गया है। इनके साथ सदस्य के रूप में शेखर वशिष्ठ, बृजेश राठौर, सचिन धूरिया, राजू ओझा, नीता कुशवाह. सुशीला कुशवाह, बबीता साहू शामिल हैं।शहरी गरीबी उपशमन विभाग में बबीता साहू प्रभारी रहेंगी। इसमें अजब बाई लोधा, सुनीता रघुवंशी, हलीम गाजी, रामवीर जाटव, अनीता कुशवाह, नीता कुशवाह को शामिल किया गया है। recent visitors 136

मनुवादी ताकतों को परास्त किए बिना, भारत में समानता स्थापित नहीं हो सकती: प्रो. रतनलाल

Equality cannot be established in India without defeating Manuwadi forces: Prof. Ratanlal भोपाल। लोकतान्त्रिक अधिकार मोर्चा (DRF), मध्यप्रदेश के नेतृत्व में एक दिवसीय ऐतिहासिक ‘मनुवादी संघी फासीवाद विरोधी जन सम्मेलन’ संपन्न हुआ। भोपाल के नार्मदीय भवन में जुटे किसानों, मजदूरों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों सहित लगभग 300 प्रगतिशील, जनवादी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से ‘संविधान की रक्षा और फासीवाद को परास्त’ करने का निर्णायक संघर्ष संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन विजय कुमार और आभार सैयद जावेद अख्तर ने किया। सम्मेलन के दौरान क्रान्तिकारी सांस्कृतिक मंच (RCF) के साथियों ने क्रन्तिकारी जनगीतों की प्रस्तुति दी। सम्मेलन में मुख्य वक्ताओं ने कहा कि देश इस समय भाजपा/आरएसएस-कॉर्पोरेट फासीवाद की मजबूत गिरफ्त में है, जिसने सामाजिक विभाजन, कॉर्पोरेट लूट और संवैधानिक संस्थाओं के क्षरण को चरम पर पहुंचा दिया है। आज मनुवादी संघी फासीवाद से लड़ना वक्त की पुकार है। इतिहासकार डॉ. रतनलाल (संस्थापक, अंबेडकरनामा) ने ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत करते हुए कहा कि, “आज की लड़ाई 1927 के महाड़ सत्याग्रह की वैचारिक निरंतरता है। मनुवादी ताकतों को परास्त किए बिना, भारत में समानता स्थापित नहीं हो सकती।” राष्ट्र निर्माण में आदिवासी पुस्तक के लेखक और इतिहासकार डॉ. जितेंद्र मीणा ने आदिवासी अधिकारों पर बात करते हुए कहा, “आदिवासियों की जल-जंगल-जमीन को लूटा जा रहा है। गोंडवाना और भील प्रदेश की मांग अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि संवैधानिक न्याय की मांग बन चुकी है।” वरिष्ठ नेता बुद्धसेन पटेल ने सभी बहुजन ताकतों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि, “पिछड़े वर्गों को उनकी संख्या के अनुपात में 52% आरक्षण देना संवैधानिक अनिवार्यता है, जिसे सरकार टाल नहीं सकती।” मानवाधिकार कार्यकर्ता और वरिष्ठ एडवोकेट सैयद साज़िद अली ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की निंदा की और कहा कि, “ईवीएम हटाओ, मतपत्रों से चुनाव कराओ” की मांग लोकतंत्र को बचाने की पहली शर्त है। सम्मेलन ने अपनी सभी प्रमुख मांगों और प्रस्तावों को शामिल करते हुए भारत की माननीय राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन (Memorandum) भी सौंपा, जिसमें संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए उनके तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। लोकतान्त्रिक अधिकार मोर्चा के संयोजक मोनू यादव ने घोषणा की कि यह सम्मेलन संघर्ष की रणभेरी है। ‘आरएसएस फासीवाद के खिलाफ व्यापक, एकजुट और मज़बूत जन प्रतिरोध’ खड़ा करने की निर्णायक शुरुआत आज से हो गई है। उन्होंने संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए सभी जनवादी ताकतों से ‘जनपथ से न्यायपथ’ तक एकताबद्ध होकर संघर्ष तेज़ करने की पुरजोर अपील की है।  लोकतान्त्रिक अधिकार मोर्चा, मध्य प्रदेश के आंनद श्याम ने बताया कि सम्मेलन ने छह सूत्रीय ‘न्याय संकल्प’ पारित किया, जिसमें मौजूदा भाजपा/ आरएसएस की सरकार को चुनौती देने वाली प्रमुख मांगें शामिल हैं। recent visitors 101

ब्रेकिंग न्यूज : MP में 24 आईएएस अफसरों के तबादले, 11 कलेक्टर बदले: संस्कृति बनीं भोपाल नगर निगम की कमिश्नर; नीरज वशिष्ठ पांढुर्णा के नए कलेक्टर

ब्रेकिंग न्यूज : MP में 24 आईएएस अफसरों के तबादले, 11 कलेक्टर बदले: संस्कृति बनीं भोपाल नगर निगम की कमिश्नर; नीरज वशिष्ठ पांढुर्णा के नए कलेक्टर

Breaking News: 24 IAS officers transferred in MP, 11 collectors changed भोपाल। राज्य शासन ने मंगलवार को 24 आईएएस अफसरों के तबादले करते हुए 11 कलेक्टर बदल दिए हैं। जिन जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं उनमें पन्ना, पांढुर्णा, सिवनी, मुरैना, डिंडोरी, अलीराजपुर, निवाड़ी, भिंड, सिंगरौली, छिंदवाड़ा और रतलाम जिलों के कलेक्टर शामिल हैं। पन्ना कलेक्टर रहे सुरेश कुमार को मुरैना का संभागायुक्त बनाया गया है। संस्कृति जैन को भोपाल नगर निगम का कमिश्नर बनाया गया है। नीरज कुमार वशिष्ठ पांढुर्णा के नए कलेक्टर होंगे। राज्य शासन द्वारा जारी आदेश में कलेक्टर पन्ना सुरेश कुमार को ओएसडी सह आयुक्त चंबल संभाग मुरैना, छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह को अपर सचिव नगरीय विकास और आवास विभाग, नेहा मारव्या कलेक्टर डिंडौरी को संचालक विमुक्त घुमंतू और अर्ध घुमंतु जनजाति विभाग, संजीव श्रीवास्तव कलेक्टर भिंड को अपर सचिव लोक निर्माण विभाग, उषा परमार अपर आयुक्त राजस्व भोपाल संभाग को कलेक्टर पन्ना पदस्थ किया गया है। देखें लिस्ट recent visitors 102

जैसीनगर का नाम न बदलने दांगी समाज ने दिया ज्ञापन

जैसीनगर का नाम न बदलने दांगी समाज ने दिया ज्ञापन

Dangi community submitted a memorandum to stop changing the name of Jaisinghnagar. गंजबासौदा। दांगी क्षत्रिय समाज ने तहसील पहुंचकर एक ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा है। जिसमें कहा गया है कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र की जनपद पंचायत जैसीनगर जिला सागर का नाम परिवर्तित न किया जाये क्योकि यह नाम दांगी समाज के राजा जयदेव सिंह (राजा जयसिंह) के नाम पर रखा गया था। जैसीनगर की स्थापना सोहलवे संवत में गढपैहरा के राजा जयदेवसिंह (राजा जयसिंह ) दांगी ने की। यह दांगी समाज की धरोहर है। राजनैतिक रूप से जैसीनगर का इतिहास मिटाया जा रह है। जिससे दांगी क्षत्रिय समाज में रोष व्याप्त हो रहा है। राजा जयसिंह दांगी समाज के गौरव थे। ज्ञापन पर विचार कर घोषणा वापिस लेवें और जैसीनगर का नाम न बदला जाये। recent visitors 103

मंदसौर में भाजपा नेता के खिलाफ महिला से छेड़छाड़ का मामला, एफआईआर दर्ज

FIR lodged against BJP leader in Mandsaur for molesting woman मंदसौर। मंदसौर में भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष भगवती लाल सुरावत के खिलाफ छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ है। जिले के सीतामऊ थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने उन पर बाथरूम में घुसकर छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है।महिला की शिकायत पर एसपी विनोद मीना के निर्देश के बाद सोमवार को सीतामऊ थाने में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है। वहीं आरोपी नेता ने इसे जमीन विवाद से जुड़ा षड्यंत्र बताया है। पीड़िता ने मंदसौर एसपी विनोद मीना से मिलकर न्याय की गुहार लगाई थी।मामला दर्ज होने के बाद आरोपी नेता भगवती लाल सुरावत ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला जमीन विवाद से जुड़ा है, जिसे भटकाने के लिए महिला ने झूठे आरोप लगाए हैं। बता दें कि सुरावत, जनपद सदस्य प्रतिनिधि भी हैं। recent visitors 98

मध्यप्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को अब निश्चित तारीख पर मिलेगा वेतन

मध्यप्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को अब निश्चित तारीख पर मिलेगा वेतन

Outsourced workers of Madhya Pradesh will now get salary on a fixed date भोपाल। मध्य प्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को महीने की 7 और 10 तारीख तक वेतन मिल जाएगा। उक्त अवधि में भुगतान नहीं करने वाली आउटसोर्स एजेंसियों के खिलाफ श्रम विभाग कार्रवाई करेगा। सरकार ने पहली बार यह डेडलाइन तय की है, इसका फायदा सरकारी विभागों, निगम मंडलों, बिजली कंपनियों व उपक्रमों में काम करने वाले 3 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा।श्रम विभाग ने ये निर्देश इसलिए जारी करने पड़े, क्योंकि अब तक आउटसोर्स कर्मियों को कई एजेंसियां तय समय पर भुगतान नहीं करती थी, जिसकी वजह से ये परिवार का पालन-पोषण ठीक से नहीं कर पाते थे। कुछ एजेंसियां बिना कारण बताएं ही सेवा से हटा देती थीं। इस पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने बीते दिनों श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल से फीडबैक लेकर गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिए थे। जिन एजेंसियों के पास 1000 आउटसोर्स कर्मी होंगे, उन्हें महीने की 7 तारीख तक वेतन भुगतान करना होगा।ऐसी आउटसोर्स एजेंसियां, जिनके पास 1000 से अधिक आउटसोर्स कर्मी है,उन्हें महीने की 10 तारीख तक भुगतान करना होगा।गड़बड़ी पर यहां शिकायतः यदि कोई एजेंसी गड़बड़ी करती है या श्रम विभाग की गाइडलाइन का पालन नहीं करती है तो आउटसोर्स कर्मी 0755-2555582 वाट्सऐप पर शिकायत दर्ज करा सकते है। यह नंबर शासन द्वारा अधिकृत है। recent visitors 99

जब मंत्री ही अपराध के कटघरे में हों, तो न्याय किससे मांगे जनता?

जब मंत्री ही अपराध के कटघरे में हों, तो न्याय किससे मांगे जनता?

When the ministers themselves are in the dock for crime, then from whom should the public seek justice? भोपाल ! Shivraj government to ministers MP आई ताज़ा रिपोर्ट ने शिवराज सरकार की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के विश्लेषण ने साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार का मंत्रिमंडल स्वच्छ राजनीति का दावा करने के बावजूद विवादों और आपराधिक मामलों में गहराई तक उलझा हुआ है। प्रदेश की कैबिनेट में शामिल 31 मंत्रियों में से 12 मंत्री आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें से 3 मंत्री तो हत्या के प्रयास, महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार और भड़काऊ भाषण जैसे गंभीर आरोपों में घिरे हुए हैं। शेष 9 मंत्री भी हल्की धाराओं में ही सही, लेकिन कानून के शिकंजे में फंसे हुए हैं। सवाल यह है कि जब मंत्रिमंडल ही दागदार हो तो आम जनता किससे न्याय और सुरक्षा की उम्मीद करे? कैलाश विजयवर्गीय का मामला – सबसे चौंकाने वाला Shivraj government to ministers MP इस सूची में सबसे ऊपर नाम है भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का। उनके खिलाफ कुल 5 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें 6 गंभीर आईपीसी की धाराएँ और 14 अन्य धाराएँ शामिल हैं। इनमें साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, धार्मिक भावनाएँ भड़काने और भड़काऊ भाषण देने जैसे गंभीर आरोप हैं। अधिकतर मामले पश्चिम बंगाल की अदालतों में लंबित हैं। सवाल यह नहीं है कि अब तक आरोप तय क्यों नहीं हुए, बल्कि यह है कि ऐसे व्यक्ति को मंत्रिमंडल में बैठने का अधिकार आखिर कैसे दिया गया? लोकतंत्र का मज़ाक Shivraj government to ministers MPमध्यप्रदेश की शिवराज सरकार बार-बार सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति का दावा करती है, लेकिन ADR की रिपोर्ट ने इस दावे की पोल खोल दी है। जब सत्ता के गलियारों में बैठे लोग ही अपराध के मामलों में लिप्त हों, तो यह लोकतंत्र का मज़ाक है। जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल Shivraj government to ministers MPरिपोर्ट बताती है कि कुछ मंत्रियों पर महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार के गंभीर मामले दर्ज हैं। यह तब है, जब सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नारों के सहारे खुद को महिलाओं की हितैषी बताती है। लेकिन हकीकत यह है कि जो नेता खुद कटघरे में खड़े हों, वे महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी कैसे दे सकते हैं? जनता की जिम्मेदारी Shivraj government to ministers MPयह मामला केवल सरकार की नाकामी का नहीं, बल्कि जनता की जिम्मेदारी का भी है। आखिरकार ये मंत्री चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँचे और वहीं से कैबिनेट में शामिल किए गए। यदि हम जातीय, धार्मिक या भावनात्मक मुद्दों से ऊपर उठकर “स्वच्छ छवि” वाले उम्मीदवारों का चयन नहीं करेंगे, तो लोकतंत्र में ऐसे ही दागदार चेहरे सत्ता की कुर्सी तक पहुँचते रहेंगे। Read more: कर्ज़ का बोझ, विकास का खोखला वादा – 2020 से 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार ने जनता को दिया सिर्फ़ कर्ज़ का पहाड़ ADR की रिपोर्ट एक चेतावनी है। यह केवल आँकड़े नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गिरती साख का आईना है। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को चाहिए कि वह ऐसे दागी चेहरों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाए और राजनीति को स्वच्छ बनाने का वास्तविक साहस दिखाए। वरना यह याद रखना होगा जब सत्ता अपराधियों से घिर जाती है, तो लोकतंत्र कमजोर होता है और जनता सबसे बड़ा नुकसान उठाती है। recent visitors 133