बुंदलेखंड में ठंड का कहर, बर्फ जमना हुई शुरू, मौसम विभाग का अलर्ट

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड रीजन के नौगांव में इस समय तेज ठंड पड़ रही है. यहां का पारा 4.1 डिग्री सेल्सियस चला गया है. छतरपुर ! मध्य प्रदेश में इन दिनों ठंड ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है. प्रदेश के ज्यादातर जिलों में पारा गिरा है. जिसके चलते कड़ाके की ठंड पड़ रही है. वहीं बात अगर बुंदेलखंड अंचल की करें तो यहां भी ठंड बहुत बढ़ी है. छतरपुर जिले के नौगांव में सर्दी चरम सीमा पर पहुंच गई है. शनिवार की सुबह तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया. बुंदेलखंड का नौगांव ठंड का केंद्र बना हुआ है. हर दिन ठंड बढ़ रही है. तापमान में भौगोलिक स्थिति का असरछतरपुर जिले के नौगांव और खजुराहो में भौगोलिक स्थिति व ग्रेनाइट पत्थर का बड़ा असर होता है. अंग्रेजों के द्वारा बसाए नौगांव नगर की भौगोलिक स्थिति ही सबसे ज्यादा ठंड व गर्मी की वजह है. इसके साथ ही ग्रेनाइट के पहाड़ों के चलते भी मौसम का असर बढ़ जाता है. इसी तरह खजुराहो में भी भौगोलिक स्थिति व ग्रेनाइट के पहाड़ों के कारण सर्दी और गर्मी का असर आसपास के इलाके से एक से दो डिग्री अधिक बढ़ जाता है. कर्क रेखा के उत्तर में नौगांव विशेष स्थान पर बसा है. जिससे सूर्य की किरणें कम प्रभाव से पहुंचती है. जिससे ज्यादा ठंडा होती है. इसके साथ ही हिमाचल से आने वाली उत्तर पूर्वी हवाएं पहले पहुंचती है, इसलिए ठंड अधिक होती है. वहीं, नौगांव के नीचे चट्टानी मिट्टी की पथरीली परत है, जो जमीन की ऊर्जा विचरण की क्षमता को प्रभावित करती है. नौगांव में लुढ़का पारा, बाइक के ऊपर जमी बर्फजिले में ठंड दिनों-दिन कहर ढहा रही है. मैदानी इलाकों में भी बर्फ जमने लगी है. उमरिया मंदिर रोड निवासी विक्रम सिंह परिहार ने बताया कि “शनिवार सुबह 5:30 बजे जब वे किसी काम से निकले, तो उनकी बाइक की सीट पर बर्फ की परत जमी हुई थी. उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया, जिसमें सुबह 5:32 का समय और 14 दिसंबर 2024 की तारीख दर्ज है.” नौगांव और इसके आस-पास के क्षेत्रों में ठंड का असर लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में मौसम वैज्ञानिक ने लोगों को सतर्क रहने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है. recent visitors 167

मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर दिखेंगी जल्द सरकारी बसें फर्राटे भरते

मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एकदम से चरमरा गई है। दो दशक पहले जहां सड़कों पर राज्य परिवहन निगम की बसें फर्राटे भरती दिखाई देती थी वहीं अब निजी बसों का बोलबाला है। तनाकुलित तथा स्लीपर कोच बसें तक प्रदेश की सड़कों पर दौड़ रही है। राज्य परिवहन की बसें प्रदेश के विभिन्न शहरों को जोड़ने के अलावा दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक यात्रियों को लाती ले जाती थी। भोपाल। राज्य परिवहन निगम की इन बसों में जहां किराया वाजिब था तो वहीं विशिष्ट जनों व पत्रकारों के लिए पास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती थी। राज्य परिवहन निगम के संचालक मंडल में पहले नेताओं को रखा जाता था और अध्यक्ष का पद नौकरशाहों के जिम्में में होता था। एक बार का दिलचस्प वाकया है तब राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष एक नौकरशाह थे किसी पत्रकार ने अनौपचारिक चर्चा में उनसे पूछ लिया कि आपने बसों में यात्रा कब से नहीं की तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया था की आखिरी बस यात्रा 15 साल पहले की थी, इस चर्चा के बाद अध्यक्ष महोदय ने समस्त डिपो प्रबंधकों को यह निर्देश दिया कि वह महीने में दो बार बसों में यात्रा करें और यात्रियों से फीडबैक ले कर व्यवस्था सुचारू करें। इसके साथ ही अध्यक्ष ने स्वयं भी हर महीने बस में सफर करना शुरू कर दिया बाद में राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष पद पर नेताओं को पदस्थ किया जाने लगा और यही से पूरे सिस्टम में दीमक लगना शुरू हो गया। जिन डिपो प्रबंधकों को राज्य परिवहन निगम अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष से अच्छी सेटिंग होती थी वहां मनमानियां करने लगे। दूसरे राज्यों में जाने वाली बसों में उन्ही ड्राइवर व कंडक्टरों को भेजा जाने लगा जो वापसी पर अच्छी खासी रकम उनको भेंट कर सके क्योंकि राज्य की सीमा पार करने के बाद टिकट चेकिंग का कोई डर नहीं, लोकल सवारियों लो और अपनी जेब गर्म करो वाला सिद्धांत चलता था। दूसरे राज्यों में स्थित राज्य परिवहन निगम के डिपो प्रबंधकों के रोस्टर पर अपने नाते रिश्तेदारों को रख लिया जो केवल वेतन लेते थे काम नहीं करते थे। राज्य परिवहन निगम के एक उपाध्यक्ष ने जब विधानसभा का चुनाव लड़ा तो डिपो प्रबंधकों ने उनके चुनावी खर्च में हिस्सेदारी की, किसी डिपो प्रबंधक ने पोस्टर का खर्च उठाया तो किसी ने विज्ञापनों के लिये भुगतान किया। इस तरह की व्यवस्था ने तथा भ्रष्टाचार ने राज्य परिवहन निगम को खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और आखिरकार 2005 में राज्य परिवहन निगम को बंद करना पड़ा हालांकि इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। राज्य परिवहन निगम बंद होने का फायदा निजी बस मालिकों ने उठाना शुरू किया यह वह समय था जब दिग्विजय सिंह की सरकार का दूसरा कार्यकाल चल रहा था। दिग्गी सरकार घाटा बताती रही और भाजपा सरकार ने राज्य परिवहन निगम पर ही ताला लगा दिया और कुछ कर्मचारियों को वीआरएस देकर घर बैठा दिया तो कुछ कर्मचारियों को दूसरे विभागों में स्थानांतरित कर दिया गया। खैर यह तो राज्य परिवहन निगम का हाल हुआ उधर निजी बस ऑपरेटर की मनमानी बढ़ने लगी। बस में क्षमता से अधिक यात्री भरना निर्धारित किराए से ज्यादा वसूलना, सवाल करने पर यात्रियों से बदसलूकी करना, यहां तक की मारपीट की नौबत आना इत्यादि। शहरी इलाकों में तो फिर भी ठीक-ठाक मगर ग्रामीण क्षेत्रों में हालत ज्यादा खराब हो गए और लोग परेशान हो गए। राज्य परिवहन निगम बंद हो जाने के बाद भी जिन राज्यों से अंतर राज्य समझौता था उनकी बसे एमपी में आती रही। निजी ऑपरेटर इनका भी विरोध करने लगे। बहरहाल अब मोहन यादव की सरकार ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को 19 साल बाद फिर से शुरू करने का संकेत दिया है तदनुसार लोक परिवहन सेवा का प्रारूप तैयार कर कैबिनेट में पेश किया जाएगा फिर उस पर अमल होना शुरू होगा वैसे अभी यह तय नहीं है कि लोक परिवहन का संचालन किस तरह होगा महाराष्ट्र का मॉडल अपनाया जाए या पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर अमल किया जाए यह फैसला भी हो जाएगा। recent visitors 163

लोकायुक्त ने जिला स्वास्थ्य अधिकारी को 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा

इंदौर लोकायुक्त ने धार जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधीर मोदी को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई आशीष चौहान, प्रबंध संचालक श्रीश्याम हॉस्पिटल, धार द्वारा की गई शिकायत पर की गई। चौहान ने लोकायुक्त को बताया था कि डॉ. मोदी ने उनके हॉस्पिटल से संबंधित शिकायत के बाद रिश्वत की मांग की थी। सत्यापन के बाद, लोकायुक्त ने 13 दिसंबर 2024 को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। डॉ. मोदी को 25 हजार लेते हुए गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 के तहत की गई। FD रिलीज करने के नाम पर एक लाख की घूस मांगने वाले तीन गिरफ्तारभोपाल में लोकायुक्त ने नगर पालिका परिषद बाड़ी के तीन कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। आरोपी ₹1,00,000 रिश्वत मांग रहे थे। ट्रैप के दौरान ₹40,000 नगद और ₹60,000 चेक लेते हुए गिरफ्तार किए गए। मामले की जांच जारी है। आवेदक राजेश मिश्रा ने शिकायत की थी कि वर्ष 2021 में नगर पालिका परिषद बाड़ी के श्मशान घाट निर्माण कार्य के लिए टेंडर के साथ 3 लाख 40 हजार रुपये की FD जमा की गई थी, जिसे रिलीज करने के लिए आरोपी बद्री प्रसाद शर्मा ने एक लाख रुपयों की मांग की थी। मिश्रा द्वारा पुलिस अधीक्षक विशेष पुलिस स्थापना भोपाल को शिकायत करने के बाद शिकायत का सत्यापन लोकायुक्त विभाग द्वारा किया गया। सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि आरोपी बद्री प्रसाद शर्मा के साथ अन्य दो आरोपियों, शुभम जैन और जय कुमार ने मिलकर आवेदक को रिश्वत देने के लिए मजबूर किया था। recent visitors 141

एमपी गजब: 108 एंबुलेंस को ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं बातें एयर एम्बुलेंस की ,ऑक्सीजन के अभाव में युवक की मौत

खंडवा। मरीज को इंदौर रेफर करने के खेल और एंबुलेंस ड्राइवर की लापरवाही से एक युवक की ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो गई। खंडवा में मेडिकल कॉलेज होने के बाद भी मरीज को उपचार के लिए इंदौर रेफर करने का सिलसिला यहां थम नहीं रहा है।ऐसे में मरीज को उपचार के अभाव में जान गंवानी पड़ रही है। वहीं मरीजों की सुविधा के लिए शासन द्वारा संचालित 108 एम्बुलेंस की सुविधा भी प्रभावी देखरेख, चालकों की मनमानी के अभाव में दम तोड़ रही है। सड़क हादसे में घायल मरीज को जिला अस्पताल से इंदौर रेफर करने के दौरान 108 एंबुलेंस के सिलिंडर में ऑक्सीजन खत्म होने से मरीज की मौत हो गई। युवक के स्वजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन के लिए एंबुलेंस चालक दो घंटे तक एंबुलेंस हिला हवाला करता रहा। स्वजनों ने रात में मोघट पुलिस को शिकायती आवेदन दिया है। अस्पताल से एंबुलेंस निकलने के बाद पता चला कि सिलेंडर में ऑक्सीजन ही नहीं है। फिर कर्मचारी घायल को एंबुलेंस में लेकर इंदौर रोड स्थित ऑक्सीजन प्लांट पहुंचा। ऑक्सीजन लेने की प्रक्रिया में ही कर्मचारी को दो घंटे लग गए। तब तक घायल युवक के मुंह पर खाली मास्क ही लगा रखा था। पंधाना पुलिस के अनुसार टाकली कला ग्राम में रहने वाले 28 वर्षीय धर्मेंद्र पुत्र अमरचंद विद्युत कंपनी में लाइन हेल्पर था। गुरुवार रात करीब आठ बजे घर लौटते समय कोहड़द और टकली के बीच अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। दुर्घटना में धर्मेंद्र के सिर में गंभीर चोट आई थी। उपचार के लिए रात को जिला अस्पताल लाया गया। हालत गंभीर होने से रात करीब 10:30 बजे उसे 108 एंबुलेंस क्रमांक सीजी 04 एनजेड 6025 से इंदौर रेफर किया गया। युवक के भाई जितेंद्र दिलावरे ने बताया कि एंबुलेंस के सिलेंडर में ऑक्सीजन कम होने से चालक वाहन लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर के गोदाम पर पहुंचा। 2 घंटे तक ऑक्सीजन के लिए माथा पच्ची चलती रही। मरीज के मुंह पर केवल ऑक्सीजन का खाली मास्क लगा रखा था। एंबुलेंस के ड्राइवर संदीप चौहान व ईएमटी ने बताया कि हम प्लांट पर ऑक्सीजन लेने पहुंचे। हमारे पास रुपए नहीं थे। इसलिए भोपाल में बैठे एचआर विभाग से ऑक्सीजन लेने के लिए आईडी लेनी पड़ती है। आईडी लेने हमने सात अधिकारियों को कॉल किया। इस प्रक्रिया में रात करीब एक बजे सिलिंडर मिला। यहां से एंबुलेंस आगे रवाना होने पर कुछ समय बाद ही युवक धर्मेंद्र की मौत हो गई। इस मामले में एंबुलेंस एजेंसी के जोनल मैनेजर अविनाश पांडे का कहना है कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन कम होने से व्यवस्था कर रहे थे, मौत मरीज गंभीर होने के कारण हुई है। सिस्टम की लापरवाही और एंबुलेंस चालक की मनमानी से युवक धर्मेंद्र की मौत को लेकर आक्रोशित स्वजनों ने मोघट थाने में शिकायत की है। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। recent visitors 158

FARMER GOOD NEWS: फार्मर आईडी बनाने जिलों में लगाए जाएंगे शिविर, दस रुपए देगी सरकार

भोपाल। राज्यों में कैंप लगाकर किसान आईडी बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को इनसेंटिव देगी। इसमें प्रति कैंप 15,000 रुपये तक दिए जाएंगे। इसके अलावा हर आईडी बनाने पर केंद्र की ओर से राज्य सरकार को 10 रुपये दिए जाएंगे। दरअसल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने राज्यों से किसान पहचान पत्र को तेजी से बनवाने के लिए कैंप लगाने को कहा है। किसान पहचान पत्र या किसान आईडी एक आधार से जुड़ी अनूठी डिजिटल पहचान है, जो राज्य के लैंड रिकॉर्ड से जुड़ी हुई है। इसके अलावा इसमें डेमोग्राफी, बोई गई फसल और जमीन के मालिकाना हक जैसी जानकारी भी होती है। किसान आईडी के माध्यम से बनाए गए डेटाबेस को किसान रजिस्ट्री के रूप में जाना जाएगा। यही वजह है कि केंद्र ने अब राज्यों से किसान आईडी देने के लिए कैंप-मोड अपनाने को कहा है।केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 27 नवंबर को इस संबंध में मध्यप्रदेश सराकर को एक पत्र भेजा था। केंद्र के पत्र के बाद आयुक्त भू-अभिलेख ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को इस संबंध में मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान के तहत शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि राजधानी सहित प्रदेश भर में करीब 87 लाख 90 हजार किसानों की आईडी जनरेट होनी हैं, जबकि अकेले भोपाल में करीब 65 हजार किसानों की फार्मर आईडी बननी है। आयुक्त भू-अभिलेख अनुभा श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि फार्मर आईडी क्रियेशन के लिए राज्यों को इंसेंटिवाइज करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस स्कीम घोषित की गई है।फार्मर आईडी क्रियेशन कार्य यथाशीघ्र पूर्ण करने की दृष्टि से इसे राजस्व महाअभियान 3.0 में भी शामिल किया गया है। फार्मर आईडी जनरेट करने की कार्रवाई अभियान के रूप में पूर्ण करने के लिए कैम्प आयोजित कर शीघ्र कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने दिए हैं। भारत सरकार द्वारा प्रति कैप राशि 15000 रुपए तीन किश्तों में प्रदान की जाएगी। इसकी प्रक्रिया भी केंद्र सरकार के निर्देश में विहित की गई है। जरूरत इसके लिए आपको आधार कार्ड की कॉपी, जमीन की जानकारी के लिए नकल की कॉपी, फसल के नाम, किस्में, बोनी का समय, बैंक पासबुक की डिटेल देनी होगी। हमेशा ध्यान रखें कि आधार नंबर और मोबाइल नंबर देते समय उसे चेक कर लें। आधार नंबर 12 अंकों का और मोबाइल नंबर 10 अंकों का होना चाहिए। प्रदेश में फार्मर आईडी बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को इनसेंटिव देगी। इसमें प्रति कैंप 15,000 रुपये तक दिए जाएंगे। इसमें गांवों में क्लस्टर से पीएम किसान डाटाबेस अनुसार कम-से-कम 50 फीसदी किसानों को रजिस्टर करना होगा। पहली किश्त 5000 रुपए प्रथम 15 फीसदी किसान आईडी जनरेट करने पर, दूसरी किश्त 5000 रुपए आगामी 15 प्रतिशत आईडी जनरेट करने पर और तीसरी किश्त 5000 आगामी 20 फीसदी फार्मर आईडी जनरेट करने पर प्राप्त होगी। प्रति फार्मर आईडी जनरेशन पर राशि 10 रुपए राज्य को प्राप्त होगी। यह राशि राजस्व महाअभियान 3.0 में फार्मर आईडी व खसरा आधार लिकिंग के लिए नियत कर्मचारी को दी जाएगी। इसके लिए किसानों को खुद का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन में गांव के पटवारी या सर्वेयर से किसान संपर्क कर सकते हैं। राजस्व का मैदानी अमला किसानों की किसान पहचान पत्र के लिए रजिस्ट्रेशन में मदद करेंगे। आप चाहें तो यह काम खुद भी कर सकते हैं। यह काम मोबाइल से कम्प्यूटर से भी किया जा सकता है। इसमें दी गई लिंक पर क्लिक करते ही आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। ओटीपी दर्ज करें और कैप्चा कोड भरना होगा। इसके बाद आपको नया यूजर अकाउंट बनाना होगा। अकाउंट बनने के बाद आपका किसान आईडी के लिए रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। recent visitors 245

बिना काम के मोहन सरकार का एक साल पूरा… बधाई कौन देगा?

भोपाल ! मध्यप्रदेश में 13 दिसंबर 2023 को भाजपा ने डॉ. मोहन यादव को प्रदेश की कमान सौंपी। एक साल के कार्यकाल में मोहन यादव ने कई मायनों में यह साबित कर दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का भाजपा का फैसला दूरदर्शी था। चुनौतियां कई थीं, पर उन्होंने काल के प्रवाह में इन फैसलों को मजबूती में बदलकर नेतृत्व के फैसले को सही साबित किया। शहर से ग्रामीण व्यवस्था तक हर मोर्चे पर सरकार ने अपना विजन बनाकर काम शुरू किया। जो काम प्रदेश में 20 साल में भी नहीं हुए थे उन पर सरकार ने सबसे ज्यादा फोकस किया। 27 नवंबर2500 करोड़ का कर्ज 20 साल के लिए2055 करोड़ का कर्ज 14 साल के लिए9 अक्टूबर2500 करोड़ का कर्ज 11 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 19 साल के लिए25 सितंबर2500 करोड़ का कर्ज 12 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 19 साल के लिए28 अगस्त2500 करोड़ का कर्ज 14 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 21 साल के लिएऔर 28 अगस्त को ही2500 करोड़ का कर्ज 11 साल के लिए2500 करोड़ का कर्ज 21 साल के लिए नर्सिंग घोटाले के बाद नर्सिंग शिक्षा पर लगा कलंक मिटाना। कॉलेज कम हुए। परीक्षाएं समय पर नहीं हो सकीं। हालांकि अब परीक्षाएं शुरू हुई हैं। परीक्षाएं न होने से नर्सिंग स्टाफ कम हुआ है। कोर्ट की निगरानी में जांच जारी है। कई कॉलेजों की मान्यता समाप्त हो चुकी है। घोटाले को लेकर छात्र संगठन भी मुखर हैं। वर्ष 2016 से राज्य के अधिकारी और कर्मचारियों का प्रमोशन नहीं हो रहा। हाईकोर्ट ने पदोन्नति नियम निरस्त कर दिए हैं। सरकार के इस दिशा में प्रयास नाकाफी रहे। प्रमोशन का इंतजार करते-करते एक लाख से ज्यादा कर्मचारी रिटायर हो गए, लेकिन प्रमोशन का रास्ता नहीं निकला। इससे कर्मी नाराज हैं। मोहन सरकार ने एक लाख पदों पर नियुक्तियों का वादा किया है, प्रक्रिया दिसंबर तक शुरू होनी थी, लेकिन ज्यादातर विभागों में कागजी घोड़े ही दौड़ रहे हैं। खाली पदों की जानकारी भी नहीं भेज पाए हैं। विभागों में नियुक्तियां न होने से होने युवा ओवरएज हो रहे हैं। युवा आंदोलनरत भी हैं। आय से ज्यादा राज्य में खर्च है। कर्ज का बोझ बढ़ा है। लगातार कर्ज लेने का नतीजा यह है कि बजट से ज्यादा कर्ज हो गया है। कर्ज का बोझ कम करने के उपाय खोजे जा रहे हैं। सरकार में फिजूलखर्ची पर रोक लगाई गई है, लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं दिख रहे। राज्य में बढ़ते अपराध बड़ी चुनौती हैं। अपराधों के नए तरीके आने से लोग चिंतित हैं। साइबर क्राइम भी चुनौती है। इससे निपटने के लिए सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन पुलता इंतजाम नहीं हो पाए हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस इसको लेकर सरकार की लगातार घेराबंदी कर रही है। शहरों में बढ़ता प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है। चिंता यह है कि यदि प्रदूषण इसी तरह बढ़ता रहा तो कहीं दिल्ली जैसी हालत न बन जाएं, उसे रोकना किसी चुनौती से कम नहीं। प्रदूषण रोकने के लिए बजट में लगातार प्रावधान किया जा रह है, लेकिन धरातल पर यह नजर नहीं आता। 4000 वकीलों के सामने मुलयमंत्री ने वकीलों के हित के लिए घोषणा की थी। यह सरकार महज घोषणा करना जानती है, वादा पूरा नहीं करती। इसलिए सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। एडवोकेट प्रोटेशन एट भी लागू नहीं किया है।-पवन पाठक, अध्यक्ष, हाईकोर्ट बार एसो. ग्वालियर नया चेहरा होने के बावजूद सीएम डॉ. मोहन यादव ने शासन-प्रशासन पर मजबूत पकड़ बनाई है। औद्योगिक निवेशक लाने के लिए देश-विदेश में दौरों के भविष्य में अच्छे परिणाम दिखेंगे। शहरों में सड़क कनेक्टिविटी के लिए काम हो रहा है।-संजय गोरानी, सचिव यशवंत क्लब इंदौर सरकार ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करने एमएसएमई, स्टार्टअह्रश्वस और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं। आदिवासी परिवारों को मुलयधारा से जोडऩे के लिए उठाए गए कदमों के परिणाम देखने को मिल रहे हैं। -संजीव कुमार बैगा, युवा, शहडोल recent visitors 272

रातापानी टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए निकाली बाइक रैली, CM ने की शुरुआत, रणदीप हुड्डा भी रहे शामिल

रातापानी जंगल के संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष बाइक रैली का आयोजन किया गया। “विरासत से विकास” अभियान के अंतर्गत यह रैली कोलार रोड स्थित गोल जोड़ चौराहे से शुरू हुई। रैली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी भाग लिया और अभियान की सराहना की। अभियान के दौरान अभिनेता रणदीप हुड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को उनके कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर बधाई दी और कहा कि मैं कुरुक्षेत्र की धरती से आता हूं, जहां भगवान श्री कृष्ण ने अन्याय के खिलाफ संदेश दिया। आज मैं उस प्रदेश में हूं, जहां भगवान ने शिक्षा पाई और जहां जल, जंगल और गायों की सुरक्षा का संदेश दिया गया। रणदीप हुड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि श्री कृष्ण के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने जो कार्य किए हैं, वह सराहनीय हैं। विशेषकर जंगलों और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता प्रशंसा योग्य है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर वीर सावरकर की तारीफ करते हुए कहा कि वीर सावरकर को दो बार कालापानी की सजा हुई, लेकिन वे कभी नहीं झुके। उनका आदर्श आज भी हमें प्रेरणा देता है। रातापानी टाइगर रिजर्व से एक नई इबारत लिखी जाएगी, जहां टाइगर का संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, “जंगल का राजा टाइगर ही होता है, क्योंकि टाइगर अपने पराक्रम से शिकार करता है। टाइगर रिजर्व की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह न केवल प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस टाइगर रिजर्व के उद्घाटन के लिए बाइक रैली का आयोजन रोजगार और प्रदेश को गौरव देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भोपाल और आसपास के क्षेत्र में भूगर्भीय परिवर्तन के कारण प्राचीन चित्रकला और अन्य ऐतिहासिक धरोहरें भी पाई जाती हैं। सीएम ने कहा कि भोपाल एक ऐसी राजधानी जिसके आंगन ने अपना टाइगर रिजर्व बना है। recent visitors 205