दबंग सरपंच ने दलित युवक को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट

The domineering Sarpanch beat the Dalit youth to death शिवपुरी ।  शिवपुरी जिले में सरपंच और उसके परिजनों ने एक दलित युवक को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया. खेत में पानी लगाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था, जो देखते ही देखते मौत तक पहुंच गया. घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया काफी वायरल हो रहा है, जिसमें दबंग सरपंच अपने परिजनों के साथ मिलकर युवक को जमीन पर गिरा-गिराकर पीटते हुए नजर आ रहा है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी है. शिवपुरी जिले के सुभाषपुरा थाने के तहत आने वाले इंदरगढ़ गांव में सुभाषपुरा के सरपंच और उसके लोगों ने एक युवक को बेरहमी मौत के घाट उतार दिया. ग्वालियर का रहने वाला विष्णु जाटव (27) अपने मामा के यहां आया हुआ था. इसी दौरान वह 26 नवम्बर को खेत में पानी लगा रहा था. खेत में पानी लगाने के दौरान अचानक से सरपंच पदम सिंह धाकड़ और उसके परिजन बेताल धाकड़, जसवंत धाकड़, अवधेश धाकड़, अंकेश धाकड़, मोहर पाल धाकड़, दाखा बाई धाकड़ और विमल धाकड़ भी मृतक के मामा के खेत पर पहुंच जाते हैं. सरपंच समेत आठ लोगों पर दर्ज की जा रही FIR मामले की जानकारी देते हुए सुभाषपुरा थाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर सरपंच और उसके आठ परिजनों पर हत्या की धाराओं में मामला दर्ज किया जा रहा है. जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. recent visitors 239

मध्यप्रदेश के 21 जिलों में पीवीटीजी परिवारों के लिये बनेंगे पक्के आवास

भोपाल केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश को प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में 33 हजार 138 आवास मंजूर किये गये हैं। पीएम जन-मन के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़े जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के 'पक्के घर' बनाये जा रहे हैं। मंत्रालय द्वारा प्रदेश के 21 जिलों में रहने वाले पीवीटीजी परिवारों को पक्के घर की सौगात देते हुए यह विशेष मंजूरी दी गई है। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने मध्यप्रदेश को बड़ी संख्या में पीएम आवास मंजूर करने के लिये केन्द्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया है। मध्यप्रदेश को इन पीएम आवासों की 25 नवम्बर को मंजूरी दी गई है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा श्योपुर जिले को 7561, शिवपुरी को 5154, उमरिया को 4092, शहडोल 2591, अशोकनगर 2294, गुना 2084, सिंगरौली 1895, डिंडोरी 1532, अनूपपुर 1522, सीधी 1042, मंडला 903, मुरैना 695, विदिशा 448, बालाघाट 401, ग्वालियर 266, छिंदवाड़ा 202, नरसिंहपुर 158, सिवनी 117, दतिया 110, जबलपुर 42 एवं रायसेन जिले को 29 पीएम आवास मंजूर किये गये हैं। मध्यप्रदेश को 1 लाख 44 हजार 200 पीएम आवासों की स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है। इस प्रकार मध्यप्रदेश को अब तक 1 लाख 77 हजार 338 पीएम आवास स्वीकृत हो चुके हैं। केन्द्र सरकार द्वारा पीएम जन-मन के तहत प्रदेश के 24 जिलों में रहने वाले पीवीटीजी परिवारों के समग्र विकास के लिये विभिन्न प्रकार के विकास एवं हितग्राहीमूलक कार्य किये जा रहे हैं। पीएम जन-मन में 'सबको पक्का घर' के तहत सभी पीवीटीजी परिवारों के पक्के घर बनाकर इन घरों में विद्युतिकरण भी कराया जा रहा है। recent visitors 31

आयुष्मान कार्ड बनाने में लापरवाही बरतने पर, 9 अधिकारी सस्पेंड, 90 को कारण बताओ नोटिस जारी

9 officers suspended for negligence in making Ayushman card, show cause notice issued to 90 शिवपुरी ! स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान कार्ड बनाने में न्यूनतम उपलब्धि, लापरवाही व निरीक्षण कार्य में अनुपस्थित रहने जैसे कारणों के चलते 04 बीएमओ, 08 बीसीएम, 08 वीपीएम, 69 सीएचओ, 01 नेत्र सहायक सहित एक सैकड़ा कर्मचारियों कार्यवाही की गई है। इनमें से 9 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, वहीं शेष को नोटिस जारी किया गया है। वृद्धजन व गरीब परिवारों के बनाए जा रहे हैं आयुष्मान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय ऋषीश्वर ने बताया कि कलेक्टर शिवपुरी रविन्द्र कुमार चौधरी की पहली प्राथमिकता पर आदिवासी, गरीब व पिछड़े वर्ग के आयुष्मान कार्ड तैयार कराकर उन्हें लाभ प्रदान कराना है। इसके लिए वह निरंतर बैठक, निरीक्षण करने के साथ चेतावनी भी दे रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर कार्रवाई इसके बावजूद पीव्हीटीजी वर्ग, सीनीयर सीटिजन एवं बीओसीडब्लू वर्ग के आयुष्मान कार्ड बनाने, उनकी मॉनिटरिंग कार्य करने में लापरहवाही को देखते हुए खंड चिकित्सा अधिकारियों, सीएमएचओ की अनुशंसा पर स्वंय कलेक्टर शिवपुरी व उनके निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा कार्यवाही की गई है। इन पर गिरी गाज इस कार्रवाई में आयुष्मान कार्ड बनाने में न्यूनतम उपलब्धि वाले 04 बीएमओ, 08 बीसीएम, 08 बीपीएम, 69 सीएचओ और नेत्र सहायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं विकासखंड पिछोर 04 सुपरवाईजर, खनियांधाना विकासखंड से 03 एमपीडब्यू , बदरवास विकासखंड से 01 एमपीडब्लू व पोहरी विकासखंड से 1 एलएचव्ही को निलंबित किया गया है। इन्हें हुआ कारण बताओ नोटिस जारी पीव्हीटीजी, सीनीयर सीटिजन एवं बीओसीडब्लू वर्ग के आयुष्मान कार्ड बनाने में न्यूनतम उपलब्धि वाले विकासखंड पिछोर के प्रभारी बीपीएम अखिलेश कनेहरिया, प्रभारी बीसीएम विवेक पचौरी एवं 16 सीएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया। विकासखंड करैरा के प्रमुखखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रदीप शर्मा, बीसीएम अवधेश गौरैया एवं प्रभारी बीपीएम विजय सोनी एवं 06 सीएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। विकासखंड खनियांधाना के प्रभारी बीएमओ डॉ.अरूण झस्या, प्रभारी बीसीएम हरीश चौरसिया, प्रभारी बीपीएम मोहन गुप्ता एवं 5 सीएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विकासखंड बदरवास प्रभारी बीएमओ डॉ चेतेन्द्रि कुशवाह, बीसीएम दुर्गादास धनोलिया, बीपीएम सुमन बडोले एवं 6 सीएचओ, विकासखंड नरवर से बीएमओ डॉ एलडी शर्मा, बीसीएम सोनू जैन, प्रभारी बीपीएम अजयकांत गहलोत एवं 11 सीएचओ विकासखंड पोहरी से वीपीएम सतेन्द्र पटेरिया, बीसीएम शेर सिंह रावत एवं 12 सीएचओ, विकासखंड सतनवाडा से बीसीएम संतोष शर्मा, वीपीएम पूर्णिमा शर्मा एवं 6 सीएचओ, विकासखंड कोलारस से बीसीएम विवेक पचौरी , वीपीएम रजनीश श्रीवास्ततव एवं 7 सीएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी किये गये । इसके साथ ही एक नेत्र सहायक जितेन्द्र रघुवंशी विकासखंड बदरवास को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया। इन पर गिरी निलंबन की गाज आयुष्मान कार्ड बनवाने एवं मॉनिटरिंग में लापरवाही बरतने वाले 04 सुपरवाईजर वीके शर्मा पिछोर, वीरेन्द्र गुप्ता पिछोर, खेमराज आदिवासी पिछोर, सुखदेव पांडे पिछोर को निलंबन किया गया। इसी प्रकार 04 एमपीडब्लू को निलंबित किया गया है, जिनमें विकासखंड बदरवास से मुकेश शर्मा एमपीडब्यू, प्रकाशचंद राजपूत एमपीडब्लू, खनियांधाना, ओमप्रकाश जाटव खनियांधाना, संजय गुप्ता एमपीडब्लू खनियांधाना को निलंबन किया गया। इसके साथ ही पोहरी विकासखंड से एलएचव्ही स्वरूपी मांझी को निलंबित करने की कार्यवाही की गई। recent visitors 211

पराली जलाने में हरियाणा को पछाड़ एमपी बना अव्वल, 14493 मामले आए सामने

MP became the first country to surpass Haryana in stubble burning, 14493 cases were reported भोपाल। पराली जलाने के मामले में अक्सर पंजाब और हरियाणा पहले नंबर पर रहता है, लेकिन इस बार यह रिकॉर्ड मध्य प्रदेश ने तोड़ दिया है। पराली जलाने के मामले मध्य प्रदेश में सबसे अधिक दर्ज हुए है। पंजाब और हरियाणा में इस साल सिर्फ 10682 और 1315 मामले सामने आए हैं जबकि मप्र 14493 मामलों के साथ सबसे आगे हो चुका है। मध्य प्रदेश में 24 नवंबर तक 14493 पराली जलाने के मामले आए। ये आंकड़े अब तक के प्रदेश में सबसे अधिक मामले हैं। 2020 में 13793 मामले दर्ज हुए थे। श्योपुर जिले में पराली जलाने के सबसे ज्यादा 2506 मामले सामने आए है। जबकि आदिवासी जिलों झाबुआ और अलीराजपुर में पराली नहीं जली है। recent visitors 103

5 हजार करोड़ का फिर कर्ज लेगी मोहन सरकार, 11 महीने में 40 हजार 500 करोड़ का लोन ले चुकी

Mohan government will again take a loan of Rs 5 thousand crores, has already taken a loan of Rs 40 thousand 500 crores in 11 months भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर 5 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। यह ऋण 26 नवंबर को ई ऑक्शन के जरिए स्टाक गिरवी रखकर लिया जाएगा। लोन की यह राशि दो अलग-अलग कर्ज के रूप में ली जा रही है, जो 2500-2500 करोड़ रुपए की है। 27 नवंबर को सरकार के खाते में लोन की यह रकम पहुंच जाएगी। जानकारी के मुताबिक मोहन सरकार की 20 साल के लिए 2500 करोड़ और 14 साल के लिए 2500 करोड़ लेने की तैयारी है। पिछले 11 महीने में सरकार 40 हजार 500 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है है। मध्यप्रदेश की जनता पर 3 लाख 90 हजार करोड़ का कर्ज का बोझ हो चुका है। राज्य सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से यह कर्ज उठाएगी। इसके लिए सरकारी बांड या स्टॉक को गिरवी रखकर धनराशि जुटाई जाएगी। ई-ऑक्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 नवंबर को यह रकम राज्य सरकार के खजाने में आ जाएगी। 11 महीने में 40,500 करोड़ का कर्ज सरकार के वित्तीय रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यह इस साल का नया बड़ा कर्ज होगा। पिछले 11 महीनों में, राज्य सरकार ने 40,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। यह धनराशि राज्य की विकास योजनाओं और अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल की गई है। मध्य प्रदेश की जनता पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में राज्य पर कुल कर्ज 3 लाख 90 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर मुद्दा है। recent visitors 176

जंगली जानवरों के हमले से मौत पर दो किस्त में 25 लाख रुपये देगी MP सरकार

MP government will give Rs 25 lakh in two installments on death due to attack by wild animals भोपाल ! मध्य प्रदेश में वन्य जीव के हमले से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर आठ लाख रुपये के स्थान पर अब 25 लाख रुपये देने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। वन विभाग मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की घोषणा के अनुसार जंगलों में वन्यप्राणी के हमले में मरने वाले व्यक्तियों को 25 लाख रुपये हर्जाना देने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसमें आर्थिक सहायता दो किस्त में दी जाएगी। वन्यप्राणी के हमले पर व्यक्ति की मृत्यु पर उसके स्वजन को तुरंत 10 लाख रुपये दिए जाएंगे। शेष 15 लाख रुपये की बैंक में एफडी की जाएगी। इसमें 10 लाख रुपये की एफडी पांच साल बाद और शेष पांच लाख रुपये की एफडी 10 साल बाद तोड़ी जाएगी। यह राशि मृतक के वारिसों को ब्याज सहित भुगतान की जाएगी। एक साल में करीब 40 मामले वर्तमान में वन विभाग के पास एक साल में जनहानि के करीब 40 मामले आते हैं, जिनमें मुआवजा देने के लिए करीब तीन करोड़ रुपयों का बजट रखा जाता है। यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में प्रस्तुत करने की तैयारी है। महाराष्ट्र में इसी तरह वन्यजीव के हमले से मृत्यु पर स्वजन को राशि दी जाती है। बता दें कि मप्र में वर्तमान में जनहानि पर मुआवजा राशि आठ लाख रुपये, उपचार पर हुआ व्यय तथा स्थाई अपंगता पर दो लाख रुपये दिए जाते हैं। वहीं महाराष्ट्र में वन्यप्राणी के हमले से जनहानि पर 25 लाख, छत्तीसगढ़ में छह लाख और उत्तर प्रदेश, राजस्थान व गुजरात में पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। पांच साल में 292 से अधिक लोगों की मौत मध्य प्रदेश में बाघ-तेंदुआ सहित अन्य मांसाहारी वन्यप्राणियों के जंगल से बाहर निकलकर नजदीक की बस्ती में पहुंचने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे मानव-वन्यप्राणी द्वंद की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले पांच साल में वन्यप्राणियों के हमले में 292 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं वर्ष 2023-24 से अक्टूबर माह तक वन्यप्राणी के हमले से जनहानि, व्यक्ति के घायल होने और पशु हानि के प्रकरणों में 15 करोड़ तीन लाख रुपये की राशि पीड़ित परिवारों को क्षतिपूर्ति के रूप में भुगतान की जा चुकी है। मप्र से सटे राज्यों में अलग-अलग है मुआवजा राशि छत्तीसगढ़ : जनहानि पर छह लाख रुपये व स्थाई अपंगता पर कोई राशि देय नहीं है।उत्तर प्रदेश : जनहानि पर पांच लाख रुपये, स्थाई अपंगता पर चार लाख रुपये।राजस्थान : जनहानि पर पांच लाख रुपये, स्थाई अपंगता पर तीन लाख रुपये।गुजरात : जनहानि पर पांच लाख रुपये, स्थाई अपंगता पर दो लाख रुपये।महाराष्ट्र : जनहानि पर 25 लाख रुपये एवं स्थाई अपंगता पर साढ़े सात लाख रुपये। recent visitors 143

निर्मला सप्रे की सदस्यता पर फैसला अगले हफ्ते

Decision on Nirmala Sapre’s membership next week भोपाल। रामनिवास रावत के साथ लोकसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करने वाली बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर निर्णय अगले सप्ताह होगा। विधानसभा सचिवालय ने उन्हें अपनी बात रखने का अंतिम अवसर दिया है। वहीं, सप्रे ने कहा है कि वे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगी। उधर, कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा अध्यक्ष तोमर से मांग की है कि 16 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र है। इसलिए आवेदन का निराकरण शीघ्र करें। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लोकसभा चुनाव के समय भाजपा में शामिल होने की घोषणा करके पार्टी प्रत्याशी के विरुद्ध काम करने वाली बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने का आवेदन दिया है। सदस्यता त्यागने का निर्णय नहीं कर पा रहीं सप्रे आवेदन में सप्रे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच साझा करने के साथ भाजपा का हाथ थामने की घोषणा करते हुए वीडियो, विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर आदि दस्तावेज लगाए हैं। साथ ही भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित बैठक में उनके शामिल होने के फोटो भी फिर से दिए आवेदन के साथ लगाए हैं। उधर, सप्रे सदस्यता त्यागने को लेकर निर्णय नहीं कर पा रही हैं। यही कारण है कि उन्होंने पहले दो बार के नोटिस पर विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगा और फिर कहा कि वे अध्यक्ष के समक्ष प्रत्यक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगी। अनाश्यक खींचा जा रहा मामला- उपनेता प्रतिपक्ष सूत्रों का कहना है कि इस मामले में निर्णय अध्यक्ष को ही करना है, इसलिए अगले सप्ताह सप्रे की बात सुनकर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वहीं, विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का कहना है कि इस मामले को अनाश्यक खींचा जा रहा है। दस्तावेज गुम होने की बात कहते हुए दोबारा आवेदन मांगा गया, जबकि स्थितियां बिलकुल स्पष्ट हैं। सभी प्रमाण विधानसभा सचिवालय को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। यदि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले सप्रे की सदस्यता पर निर्णय नहीं लिया गया, तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उधर, विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह का कहना है कि सप्रे ने अध्यक्ष से भेंट करके अपनी बात रखने का कहा है। जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। टल सकता है निर्मला का मामला सूत्रों का कहना है कि रामनिवास रावत के उपचुनाव हारने के बाद अब निर्मला सप्रे का मामला टल भी सकता है। दरअसल, सप्रे बीना को जिला बनाने की मांग कर रही थीं। सरकार के स्तर पर इसकी तैयारी भी हो गई थी, पर खुरई में विरोध होने के कारण मामला टल गया। खुरई से विधायक पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह कह चुके हैं कि भले ही पार्टी कांग्रेस से आए लोगों को स्वीकार कर ले, पर वे नहीं करेंगे। सागर जिले में पार्टी के अधिकतर नेता व कार्यकर्ताओं के बीच सप्रे को लेने पर एकराय नहीं है। recent visitors 162