सीएम मोहन यादव का अजीबोगरीब बयान: राहुल को नाना, दादा-दादी, पिता के पास चले जाना चाहिए

सीएम मोहन यादव का अजीबोगरीब बयान: राहुल को नाना, दादा-दादी, पिता के पास चले जाना चाहिए

CM Mohan strange statement: Rahul should go to his maternal grandfather, grandparents, fathe मुरैना। CM Mohan statement मुरैना जिले में 101 हेक्टेयर का एक नया औद्योगिक पार्क बनाया जा रहा है, जो विकास का प्रतीक है। दूसरी ओर, नादान विपक्ष और राहुल गांधी तरह-तरह के प्रपंच रच रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी पार्टी लगातार चुनाव हार रही है, और वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ के लिए गलत बयान दे रहे हैं। राहुल गांधी को अगर इतनी ही परेशानी है, तो उन्हें अपने नाना, दादा, दादी, पिता के पास चले जाना चाहिए, क्योंकि इस जगत में रहने का उन्हें कोई हक नहीं है। यह बात CM Mohan statement ने मुरैना में हाइड्रोजन इकाई का भूमि पूजन करने के बाद आमसभा में कही। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी से सीखना चाहिए, जिन्होंने कई मंत्रियों और नेता विपक्ष के साथ काम किया था कि विपक्ष में कैसे रहा जाता है। कांग्रेस को माफी मांगनी होगी। राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाए। अगर कोई शंका थी, तो उन्हें वहां चले जाना चाहिए था। बम के नीचे, तो सब पता चल जाता। अब वे चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। Read More: केंद्रीय मंत्री का विवादित बयान : अंबानी के पिता भी आयुष्मान योजना से इलाज करा रहे है CM Mohan statement ने कहा- पिपरसेवा में 157.5 करोड़ की लागत से 500 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाला सोलर प्लांट वर्ष 2030 तक तैयार होगा। इसका भूमिपूजन सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कभी मुरैना-चंबल में उद्योगपति आते ही नहीं थे, क्योंकि कांग्रेसियों ने यहां डाकुओं को जमीन दे रखी थी। लेकिन अब मुरैना में बहुत संभावना है। यहां चंबल मैया और गजक अद्भुत हैं। अब अनुराग जैन जैसे उद्योगपति यहां इन्वेस्ट कर रहे हैं। शनि देव की कृपा से शनि लोक भी बनेगा। यहां सड़कों का चौड़ीकरण किया जाएगा और 300 करोड़ के इन्वेस्ट हो रहे हैं। मुरैना की अब काया बदल रही है। आमसभा में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना एवं सांसद शिवमंगल सिंह तोमर भी मौजूद थे। recent visitors 245

विरोध का नया स्वर: OBC समागम व विपक्षी गठबंधन की रणनीति’

विरोध का नया स्वर: OBC समागम व विपक्षी गठबंधन की रणनीति’

New voice of protest: OBC Sammelan and the strategy of opposition INDIA alliance कांग्रेस द्वारा 25 जुलाई को आयोजित “OBC न्याय और भागीदारी सम्मेलन” केवल एक विपक्षी सभा नहीं, बल्कि उनको जातीय जनगणना और आरक्षण सीमा हटाने जैसे संवैधानिक मुद्दों पर नया मोर्चा खोलने की रणनीति है CM सिद्धारमैया ने ‘अहिन्दा मॉडल’ को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के रूप में पेश करते हुए इसे सामाजिक न्याय की मिसाल बतायायह पूरी योजना कांग्रेस द्वारा पिछड़े वर्गों की राजनीतिक शक्ति को फिर से केंद्रित करने का स्पष्ट संकेत है। 19 जुलाई को हुई वर्चुअल बैठक में सीट बंटवारे, साझा घोषणा पत्र और आगामी चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय की समीक्षा हुईबीजेपी के बढ़ते चुनावी दबाव को देखते हुए यह बैठकों का सिलसिला अब और तेज़ हो रहा है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि दोनों ही दल विरोधी के बिल्कुल समान मुद्दे उठाते हुए जनता के बीच अलग-अलग प्रस्तुति दे रहे हैं। कांग्रेस ने OBC सम्मेलन को न सिर्फ नैरेटिव बदलने का जरिया बनाया है, बल्कि उससे आक्रामक विपक्षी रणनीति भी तैयार कर रही है।INDIA गठबंधन की बैठक इस दिशा में पहला ठोस कदम है, लेकिन इसके लिए राष्ट्रव्यापी समन्वय और स्पष्ट नेतृत्व की भी आवश्यकता है।बीजेपी और कांग्रेस के बीच की ‘कॉपिकैट’ रणनीतियों से स्पष्ट है कि आगामी चुनावी चर्चाएँ वस्तुनिष्ठ मुद्दों से हटकर प्रतीकात्मक राजनीति की ओर बढ़ रही हैं—जहां असली मुकाबला संवाद की न बजाय जुबानी प्रतिस्पर्धा की होगी। चुनौती और अवसर यदि विपक्ष की ये रणनीतियाँ स्थानीय जनभावनाओं से जुड़कर आगे बढ़ाईं गयीं, तो बीजेपी को न सिर्फ जवाबी मोर्चा बनाना पड़ेगा, बल्कि उसे नई राजनीतिक जोर जुटाना होगा।वहीं बीजेपी की जातिगत जनगणना अधिसूचना कांग्रेस की ओबीसी रणनीति को जबाव देने की सीधी कोशिश है—लेकिन देखना यह है कि कौन जनता को असली बदलाव का भरोसा दिला पाता है। recent visitors 127

कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का आगाज “कांग्रेस का ‘नव संकल्प’: 2028 की रणभेरी मांडू से”

कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का आगाज “कांग्रेस का ‘नव संकल्प’: 2028 की रणभेरी मांडू से”

Congress’s election preparations begin “Congress’s ‘Nav Sankalp’: The battle cry of 2028 from Mandu” Congress Nav Sankalp from Mandu मध्य प्रदेश की राजनीति में बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। कांग्रेस ने 2028 विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है — और इसकी शुरुआत हो रही है ऐतिहासिक नगरी मांडू से। 21 और 22 जुलाई को आयोजित ‘नव संकल्प शिविर’ कांग्रेस की गंभीरता, तैयारी और भविष्य की लड़ाई के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह महज एक शिविर नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्निर्माण और विचारधारा की पुनर्स्थापना का एक मंच है। 12 सत्रों में बंटे इस शिविर में विधायकों को विचारधारा, विपक्ष की भूमिका, जन मुद्दों की समझ, और सोशल मीडिया रणनीति जैसे पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाएगा। यह दिखाता है कि कांग्रेस अब सिर्फ प्रतिक्रिया देने वाली पार्टी नहीं, बल्कि दिशा देने वाली ताकत बनना चाहती है। Congress Nav Sankalp from Mandu शिविर का सबसे अहम संदेश है — संगठन की मजबूती, विचारधारा की स्पष्टता और जनता से संवाद की नई शुरुआत। राहुल गांधी की वर्चुअल मौजूदगी और शीर्ष नेताओं — जैसे कमलनाथ, जीतू पटवारी, विवेक तन्खा, सुप्रिया श्रीनेत, अजय माकन — की सक्रिय भागीदारी इस बात को पुष्ट करती है कि कांग्रेस अब ‘नेताओं की भीड़’ नहीं, बल्कि ‘विचारधारा से जुड़ा कैडर’ बनाना चाहती है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने जहां एक ओर शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत की, वहीं दूसरी ओर उन्होंने सरकार की असफलताओं को उजागर करते हुए कांग्रेस के वैकल्पिक विज़न को भी सामने रखा। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को “झूठ का पुलिंदा” कहना और प्रदेश में बढ़ते अपराध, बेरोजगारी, और भ्रष्टाचार पर तीखे सवाल खड़े करना कांग्रेस के तीखे तेवरों को दर्शाता है। Read more: क्या बार-बार थकान और भूख न लगना फैटी लीवर की चेतावनी हो सकती है? जानिए कैसे बचाव संभव यह शिविर आने वाले वर्षों में कांग्रेस की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। अगर यह प्रशिक्षण और आत्ममंथन जमीन पर उतर पाया, तो मांडू कांग्रेस के लिए वही बन सकता है, जो कभी नव-भारत निर्माण के दौर में वर्धा और सेवाग्राम हुआ करते थे। कांग्रेस ने यह संकेत दे दिया है कि वह अब विपक्ष में बैठने के लिए नहीं, सत्ता में लौटने के लिए मैदान में है। अब देखना यह होगा कि मांडू से निकली यह संकल्पशक्ति 2028 तक कितना प्रभाव छोड़ती है। recent visitors 214

गुटबाजी खत्म करो, बदलाव चाहिए तो बताओ – मैं करूंगा’: भोपाल में राहुल गांधी का कांग्रेस नेताओं को सख्त संदेश

गुटबाजी खत्म करो, बदलाव चाहिए तो बताओ – मैं करूंगा’: भोपाल में राहुल गांधी का कांग्रेस नेताओं को सख्त संदेश

Rahul Gandhi’s strong message to Congress leaders in Bhopal भोपाल ! लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ की शुरुआत करते हुए पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया: गुटबाजी अब और नहीं चलेगी, सभी को मिलकर संगठन को मजबूत करना होगा। पार्टी संगठन को मिशन 2028 के तहत नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश के तहत राहुल गांधी ने एक ही दिन में पांच अहम बैठकें कीं। उन्होंने सभी नेताओं से साफ कहा, कोई भी फैसला ऊपर से नहीं थोपा जाएगा। आप मिलकर निर्णय लें, और अगर कोई बदलाव चाहिए, तो बताइए – मैं करूंगा। लेकिन पहले एकजुट हो जाइए। संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश राहुल गांधी ने नेताओं को याद दिलाया कि पिछले बीस सालों में कांग्रेस का संगठन मध्य प्रदेश में कमजोर हुआ है और अब समय है इसे फिर से खड़ा करने का। उन्होंने संगठन को मजबूत, पारदर्शी और जनसरोकार से जुड़ा बनाने पर जोर दिया। कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ का लक्ष्य 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले स्थानीय और जिला स्तर पर संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करना है। राहुल गांधी ने कहा कि कार्यकर्ताओं की आवाज़ सुनी जाएगी और निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएंगे, न कि ऊपर से थोपे जाएंगे। recent visitors 122

भोपाल पहुंचे राहुल गांधी मध्य प्रदेश में नई कांग्रेस खड़ी करने… 5 घंटे में करेंगे ताबड़तोड़ बैठकें

भोपाल पहुंचे राहुल गांधी मध्य प्रदेश में नई कांग्रेस खड़ी करने… 5 घंटे में करेंगे ताबड़तोड़ बैठकें

Rahul Gandhi reached Bhopal to establish a new Congress in Madhya Pradesh… will hold a series of meetings in 5 hours भोपाल (Rahul Gandhi in MP): 23 साल से मध्य प्रदेश में कांग्रेस वनवास काट रही है। कमल नाथ के नेतृत्व में 2018 में सरकार बनी, पर डेढ़ साल ही चल सकी। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समय बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर चले गए। संगठन का ताना-बाना बिखर गया। अब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मप्र में नई कांग्रेस खड़ी करेंगे। इसके लिए संगठन सृजन अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मंगलवार, 3 जून को भोपाल में राहुल गांधी ही करेंगे। वे 5 घंटे में तीन बैठकों और अधिवेशन में भाग लेंगे। विभीषणों को चिन्हित करने की बात कह चुके राहुल गांधीमध्य प्रदेश में अब कांग्रेस नया नेतृत्व तैयार कर रही है। अभी तक यह कमल नाथ, दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं के हाथों में रहा है। राहुल गांधी मध्य प्रदेश में भी ‘विभीषणों’ को चिन्हित करने की बात भी कह चुके हैं।जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष, उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष और हेमंत कटारे को उपनेता बनाकर पीढ़ी परिवर्तन की कवायद भी प्रारंभ कर दी गई है। इस बीच, देश में जनगणना के साथ जाति आधारित गणना का श्रेय पार्टी राहुल गांधी को देगी। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस पूरे प्रदेश में अभियान चलाएगी। संगठन सृजन अभियान के दौरान ही कार्यकर्ता घर-घर जाकर बताएंगे कि राहुल गांधी के जाति आधारित गणना करने का मुद्दा उठाने के बाद भारत सरकार को झुकना पड़ा और वह इसके लिए तैयार हुई। विमानतल से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय तक 52 द्वार भी बनाए गए है, जिनमें जाति आधारित गणना के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया है। recent visitors 131

राहुल गांधी नए युग के मीर जाफर हैं, आसिम मुनीर संग हाफ फोटो शेयर कर अमित मालवीय ने साधा निशाना

नई दिल्ली पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया. इस ऑपरेशन की सफलता को लेकर एक तरफ जहां सरकार देश-विदेश में अभियान चला रही है. वहीं राहुल गांधी इस ऑपरेशन का हिसाब-किताब मांगने में जुटे हैं. ऐसे में अब बीजेपी नेता ने राहुल गांधी की तुलना मीर जाफर से कर दी है. बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने कहा कि यह चौंकाने वाला नहीं है कि राहुल गांधी पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को लेकर प्रधानमंत्री को बधाई भी नहीं दी. इसके बजाए वह बार-बार पूछ रहे हैं कि हमने कितने एयरक्राफ्ट गंवा दिए जबकि इस सवाल का जवाब डीजीएमओ की ब्रीफिंग में पहले से दिया जा चुका है. मालवीय ने कहा कि राहुल ने हालांकि एक बार भी ये जानने की कोशिश नहीं की कि इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के कितने जेट मार गिराए गए या फिर कितनों को नष्ट किया गया. राहुल गांधी को आगे क्या मिलेगा? निशान-ए-पाकिस्तान? क्या है पूरा मामला? बता दें कि इस पोस्ट के साथ अमित मालवीय ने एक तस्वीर भी पोस्ट की है, जिसमें आधा चेहरा पाकिस्तानी सेना के चीफ आसिम मुनीर का और आधा चेहरा राहुल गांधी का नजर आ रहा है. वह एक और पोस्ट कर कहते हैं कि राहुल गांधी नए युग के मीर जाफर हैं. पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया. इस पूरे ऑपेरशन को लेकर राहुल गांधी बार-बार पूछ रहे हैं कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान भारत के कितने एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विदेश मंत्री जयशंकर से सवाल करते हुए कहा था कि विदेश मंत्री जयशंकर चुप है. उनकी यह चुप्पी बहुत कुछ कह रही है. ये निंदनीय है. इसलिए मैं दोबारा पूछूंगा कि पाकिस्तान को हमले का पता होने की वजह से हमने कितने एयरक्राफ्ट खो दिए? यह सिर्फ चूक नहीं थी. यह अपराध था और देश को सच्चाई जानने का हक है. इससे पहले भी राहुल गांधी ने जयशंकर पर निशाना साधते हुए कहा था कि हमला करने से पहले पाकिस्तान को बताना एक अपराध है. विदेश मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर इसे स्वीकार किया है. इसकी मंजूरी किसने दी? हमने कितने एयरक्राफ्ट खोए? इससे पहले 11 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एयर मार्शल एके भारती ने कहा था कि हम युद्ध की स्थिति में है और नुकसान इसका एक हिस्सा है. सवाल ये है कि क्या हमने अपना उद्देश्य हासिल कर लिया है? इसक जवाब है हां. उन्होंने कहा कि इससे जुड़ी डिटेल पर वह फिलहाल टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि हम अभी भी युद्ध की स्थिति में है और ऐसी कोई भी जानकारी दुश्मनों के हाथ लगाना सही नहीं है. एयर मार्शल ने कहा कि भारत के सभी पायलट सुरक्षित लौट आए हैं. विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि हमने ऑपरेशन की शुरुआत में पाकिस्तान सरकार को मैसेज भेजा था कि हम आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहे थे लेकिन हम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा. ऐसे में सेना के पास पीछे हटने और हस्तक्षेप नहीं करने का विकल्प है. पाकिस्तान ने इस सलाह को नहीं सुनने में ही अपनी भलाई समझी. बता दें कि मीर जाफर बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला का सेनापति था, जिसने प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला के खिलाफ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का साथ देकर विश्वासघात किया था.   recent visitors 72

नागरिकता विवाद में राहुल गांधी को राहत: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, केंद्र पर उठाए सवाल

Relief to Rahul Gandhi in citizenship dispute: High Court dismisses petition, raises questions on Centre लखनऊ। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका को लखनऊ हाईकोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से अस्पष्ट जवाब दिए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि जब तक केंद्र कोई स्पष्ट स्थिति नहीं रखता, तब तक याचिका को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की स्वतंत्रता दी है। Relief to Rahul Gandhi in citizenship dispute यह मामला पिछले कुछ वर्षों से सुर्खियों में बना हुआ था, जिसमें राहुल गांधी पर ब्रिटेन की एक कंपनी के डायरेक्टर पद पर रहते हुए खुद को “ब्रिटिश नागरिक” बताने का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर, जो कर्नाटक के निवासी और भाजपा से जुड़े हैं, ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि यदि राहुल गांधी ने स्वयं को ब्रिटिश नागरिक बताया है, तो भारतीय नागरिकता कानून 1955 के अनुसार उनकी नागरिकता रद्द की जानी चाहिए और वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किए जाएं। हाईकोर्ट की टिप्पणी और केंद्र की भूमिका कोर्ट की खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति राजीव सिंह शामिल थे, ने कहा कि केंद्र सरकार याचिकाकर्ता की शिकायत के निपटारे के लिए कोई समयसीमा नहीं दे पा रही है। ऐसे में याचिका पर विचार जारी रखना व्यर्थ होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में अन्य वैकल्पिक विधिक उपायों के लिए स्वतंत्र है। Read more : शासकीय ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय :शिक्षकों की घोर लापरवाही से 93 छात्र विद्यालय से बाहर निकलने हुए मजबूर इससे पहले 21 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है, और इसमें देरी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं या नहीं—और 10 दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। लेकिन 10 दिन की समयसीमा बीतने के बाद भी सरकार की ओर से ठोस जवाब नहीं आया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सूर्यभान पांडेय ने कोर्ट में केंद्र की ओर से स्थिति रिपोर्ट पेश की थी, जिसे कोर्ट ने अपर्याप्त” बताया था। इसके बाद कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ही मामले की गंभीरता को नहीं समझ रही, तो कोर्ट के पास याचिका खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। याचिकाकर्ता के आरोप क्या थे? याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने वर्ष 2005-2006 में ब्रिटेन की एक कंपनी, ‘BackOps Limited’ में डायरेक्टर के रूप में खुद को “British citizen” बताया था। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के 2022 के एक गोपनीय मेल का भी हवाला दिया और कहा कि राहुल गांधी की नागरिकता संदिग्ध है। याचिका में यह भी कहा गया कि यदि राहुल गांधी वास्तव में ब्रिटिश नागरिक रहे हैं या दोहरी नागरिकता रखते हैं, तो भारतीय कानून के अनुसार उन्हें संसद सदस्य बने रहने और चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। भारतीय नागरिकता अधिनियम की धारा 9(2) के तहत याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की नागरिकता को समाप्त करने की मांग की थी। पिछली सुनवाइयों का विवरण मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। 24 मार्च को कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था, लेकिन सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा। 19 दिसंबर 2024 को जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने केंद्र सरकार को यूके सरकार से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखा है और जांच जारी है। राहुल गांधी की ओर से चुप्पी Relief to Rahul Gandhi in citizenship dispute इस पूरे मामले के दौरान कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ, जिससे कई सवाल खड़े हुए। हालांकि, कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की ओर से सार्वजनिक रूप से इस याचिका पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इससे मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक प्रकृति और भी गहरी हो जाती है। क्या आगे की कार्रवाई होगी? हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है, लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि याचिकाकर्ता अन्य वैधानिक विकल्पों के लिए स्वतंत्र हैं। इसका अर्थ यह है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य मंच पर चुनौती के रूप में फिर से उठाया जा सकता है। राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर उठे सवाल और कोर्ट की टिप्पणी दोनों ही भारतीय राजनीति में संवेदनशील और अहम हैं। हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिका खारिज कर एक स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक केंद्र खुद ठोस जानकारी नहीं देता, तब तक न्यायपालिका इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दे सकती। अब देखना होगा कि क्या याचिकाकर्ता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाते हैं या केंद्र सरकार इस पर कोई नई स्थिति स्पष्ट करती है। recent visitors 98