सरकार को निजीकरण पर ध्यान देने की बजाए शिक्षा पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत: राहुल गांधी

नई दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शिक्षा को समाज के हर व्यक्ति का अधिकार बताते हुए कहा है कि सरकार को निजीकरण पर ध्यान देने की बजाए शिक्षा पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सरकारी संस्थानों को मजबूत बनाने की जरूरत है और इस पर सरकार को ज्यादा पैसा खर्च करना चाहिए ताकि शिक्षा को बढ़ावा मिले और इसके स्तर को और बेहतर बनाया जा सके। श्री गांधी ने कहा "मेरा मानना है कि किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी देना है। इसे निजीकरण और वित्तीय प्रोत्साहनों के माध्यम से हासिल नहीं किया जा सकता। हमें शिक्षा और सरकारी संस्थानों को मजबूत बनाने पर बहुत अधिक पैसा खर्च करने की आवश्यकता है।"   recent visitors 67

निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार से भड़के राहुल गांधी, मनमोहन सिंह का अपमान किया, केजरीवाल ने भी केंद्र को घेरा

नई दिल्ली पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका यहां निगमबोध घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस सांसद व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे मनमोहन सिंह का अपमान करार दिया। इसके अलावा, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इसे परंपरा का उल्लंघन बताया। राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "भारत माता के महान सपूत और सिख समुदाय के पहले प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का अंतिम संस्कार आज निगमबोध घाट पर करवाकर वर्तमान सरकार द्वारा उनका सरासर अपमान किया गया है। एक दशक के लिए वह भारत के प्रधानमंत्री रहे, उनके दौर में देश आर्थिक महाशक्ति बना और उनकी नीतियां आज भी देश के गरीब और पिछड़े वर्गों का सहारा हैं। आज तक सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की गरिमा का आदर करते हुए उनके अंतिम संस्कार अधिकृत समाधि स्थलों में किए गए ताकि हर व्यक्ति बिना किसी असुविधा के अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दे पाए। डॉ. मनमोहन सिंह हमारे सर्वोच्च सम्मान और समाधि स्थल के हकदार हैं। सरकार को देश के इस महान पुत्र और उनकी गौरवशाली कौम के प्रति आदर दिखाना चाहिए था ।" सिंह के निधन के शोक के बीच उनकी अंत्येष्टि और स्मारक स्थल को लेकर उस वक्त एक विवाद भी खड़ा हुआ जब सरकार ने उनका अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर किए जाने का फैसला किया और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि देश के पहले सिख प्रधानमंत्री का जानबूझकर का अपमान किया गया है। कांग्रेस की मांग थी कि उनका अंतिम संस्कार उसी स्थान पर होना चाहिए जहां उनका स्मारक बन सके। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार रात कहा कि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए स्थान आवंटित करेगी। इसके अलावा, दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल ने लिखा, "ये खबर सुनकर मैं स्तब्ध हूं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर किया गया। इसके पूर्व भारत के सभी प्रधानमंत्रियों का अंतिम संस्कार राजघाट पर किया जाता था। सिख समाज से आने वाले, पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त, 10 वर्ष भारत के प्रधानमंत्री रहे डॉ मनमोहन सिंह जी के अंतिम संस्कार और समाधि के लिए बीजेपी सरकार 1000 गज़ जमीन भी न दे सकी?" सिंह के निधन के शोक के बीच उनकी अंत्येष्टि और स्मारक स्थल को लेकर उस वक्त एक विवाद भी खड़ा हुआ जब सरकार ने उनका अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर किए जाने का फैसला किया और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि देश के पहले सिख प्रधानमंत्री का जानबूझकर का अपमान किया गया है। कांग्रेस की मांग थी कि उनका अंतिम संस्कार उसी स्थान पर होना चाहिए जहां उनका स्मारक बन सके। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार रात कहा कि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए स्थान आवंटित करेगी। बता दें कि इससे पहले मनमोहन सिंह की तीन बेटियों में से सबसे बड़ी बेटी उपिंदर सिंह ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। देश तथा दुनिया के कई गणमान्य लोगों, राजनीतिज्ञों और आम लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य हस्तियों ने सिंह को निगमबोध घाट पर श्रद्धांजलि अर्पित की। भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने भी निगमबोध घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए। recent visitors 71

कोर्ट का अब जाति जनगणना पर राहुल गांधी को नोटिस, बढ़ गईं मुश्किलें, गृह युद्ध की कोशिश

बरेली यूपी के बरेली की जिला अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव के दौरान जाति जनगणना वाले उनके बयान को लेकर नोटिस जारी किया है। इस मामले में राहुल को कोर्ट में पेश होने को कहा गया है। सुनवाई सात जनवरी को होनी है। लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने यह बयान दिया था जिसके खिलाफ वाद दायर किया गया है। याचिकाकर्ता और हिन्‍दूवादी नेता पंकज पाठक का कहना है, 'हमें लगा कि राहुल गांधी ने चुनाव के दौरान जो बयान दिया था, वह देश में गृहयुद्ध शुरू करने की कोशिश जैसा था। हमने सबसे पहले उनके खिलाफ एमपी-एमएलए कोर्ट में केस दायर किया था। उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद हम डिस्ट्रिक्ट जज कोर्ट में गए, वहां हमारी अपील स्वीकार कर ली गई और राहुल गांधी को नोटिस जारी कर दिया गया। नोटिस में तारीख 7 जनवरी है। लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने एक बयान में सरकार में आने पर जाति जनगणना और आर्थिक सर्वेक्षण कराने की बात कही थी। इस बयान को लेकर तब काफी विरोध हुआ था। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया। कहा गया कि राहुल, जाति जनगणना और आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर संपत्ति विभाजन की बात कह रहे हैं। जिसकी भागीदारी अधिक होगी अगर उसकी संपत्ति कम है तो कम आबादी वाले जिसकी संपत्ति अधिक है उससे लेकर कम संपत्ति वालों को दे दी जाएगी। आरोप लगा कि राहुल गांधी एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए इस तरह के बयान देते हैं। हिन्‍दूवादी नेता पंकज पाठक ने बरेली कोर्ट में इसे लेकर वाद दायर किया था। इस वाद को सुनवाई के बाद कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया था। अब इस पर रिविजन दायर हआ है जिस पर सात जनवरी को सुनवाई होगी। इसी को लेकर राहुल गांधी को नोटिस जारी किया गया है। recent visitors 64

राहुल गांधी ने अपनी सफाई में कहा- बीजेपी के लोग हमें अंदर जाने से रोक रहे थे

नई दिल्ली गुरुवार को संसद परिसर में एक बड़ा विवाद हुआ, जिसमें दोनों प्रमुख दलों बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बन गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी के सांसदों ने उनके नेताओं के साथ धक्का-मुक्की की, जबकि बीजेपी ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी पर धक्का देने का आरोप लगाया। बीजेपी के लोग हमें अंदर जाने से रोक रहे थे- राहुल गांधी राहुल गांधी ने अपनी सफाई में कहा कि जब वह और उनके साथी संसद के मकर द्वार से अंदर जा रहे थे, तब बीजेपी के सांसदों ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने कहा, "बीजेपी के लोग हमें अंदर जाने से रोक रहे थे और इस दौरान धक्का-मुक्की हुई। कुछ लोग गिर भी गए।" राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी संविधान पर हमला कर रही है और अंबेडकर का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा, "मुख्य मुद्दा यह है कि ये लोग संविधान पर हमला कर रहे हैं।" खरगे जी के साथ धक्का-मुक्की की राहुल ने आगे कहा कि मकर द्वार पर बीजेपी के सांसदों ने उन्हें और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे नेताओं को रोकने की कोशिश की और उनके साथ धक्का-मुक्की की। उन्होंने कहा कि कैमरे में सब कुछ रिकॉर्ड हो गया है और बीजेपी सांसद उन्हें संसद में जाने से रोक नहीं सकते हैं। राहुल गांधी ने धक्का दिया- प्रताप सारंगी वहीं, बीजेपी सांसद प्रताप चंद्र सारंगी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक सांसद को धक्का दिया, जिससे वह सांसद गिरकर उनके ऊपर आ गिरा और उनके सिर में चोट लग गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया और बीजेपी के नेता उन्हें देखने पहुंचे। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने भी कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के साथ भी धक्का-मुक्की हुई थी और यह सब कैमरे में रिकॉर्ड हो गया है। विपक्षी सांसद संसद में निकाल रहे थे प्रोटेस्ट मार्च इस विवाद के बीच, इंडिया ब्लॉक के सांसद संसद में प्रोटेस्ट मार्च निकाल रहे थे। यह मार्च बीते दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के खिलाफ निकाला जा रहा था। शाह ने बीआर आंबेडकर को लेकर कुछ टिप्पणी की थी, जिसे विपक्ष ने आंबेडकर का अपमान करार दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने शाह के इस्तीफे और माफी की मांग की है। विरोध के दौरान इंडिया ब्लॉक के नेता आंबेडकर की प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक मार्च कर रहे थे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अमित शाह ने जानबूझकर आंबेडकर का अपमान किया और उनका यह अपराध माफ नहीं किया जा सकता। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी पूरे तंत्र के जरिए शाह को बचाने में लगी है, जबकि वे माफी मांगने के बजाय धमकियां दे रहे हैं। recent visitors 83

एनडीए सांसदों ने लगाया फेक नैरेटिव फैलाने का आरोप, राहुल गांधी ने संसद में वीर सावरकर पर की टिप्पणी

नई दिल्ली। लोकसभा में शनिवार को संविधान के 75 साल की गौरवशाली यात्रा पर चर्चा के दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा और वीर सावरकर पर निशाना साधते हुए सदन में संविधान मनुस्मृति की प्रतियां लहराईं। उन्होंने सत्ता पक्ष से पूछा कि आपके नेता ने संविधान की जगह मनुस्मृति से देश चलाने की वकालत की थी। इस पर शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और भाजपा के पी.पी. चौधरी ने कांग्रेस पार्टी पर संविधान की हत्या करने का आरोप लगाया। श्रीकांत शिंदे ने कहा, "राहुल गांधी ने संविधान छोड़कर सभी मुद्दों पर बात की। वह जो हर समय सावरकर जी को गाली देने का काम करते हैं, उन्होंने आज भी वही किया। लेकिन, मैंने उनकी दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधा का पत्र उनको दिखाया। उनको यह बात पता नहीं थी कि इंदिरा गांधी के विचार सावरकर के लिए क्या थे। आज उनको पता चला, इसलिए वह तिलमिला उठे। उनको लगा कि यह बात उन्हें पता ही नहीं थी। वह संविधान को हाथ में पकड़ने के नाम पर कोरे कागज लेकर घूम रहे थे। लोगों में फेक नैरेटिव फैलाने का काम उन्होंने लोकसभा चुनाव में किया। वह नैरेटिव सिर्फ लोकसभा चुनावों तक चला। इसके बाद लोगों ने इन्हें हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में उठाकर राज्य के बाहर फेंक दिया।" भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी ने कहा, "कांग्रेस सरकार में जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी से होते हुए मनमोहन सिंह तक सभी ने सरकारों को भंग किया। इंदिरा गांधी के समय सबसे ज्यादा सरकारें भंग हुईं। हर साल करीब तीन सरकार भंग होने का औसत रहा। इससे बड़ा संविधान पर हमला क्या हो सकता है। हमेशा जवाहर लाल नेहरू चाहते थे और कांग्रेस भी चाहती है कि न्यायिक व्यवस्था उनके नीचे रहे। न्यायिक व्यवस्था स्वतंत्र न रहे। सबसे पहले न्यायाधीश कानिया जब रिटायर हुए तो उस समय भी नए सीजेआई बनाने में कांग्रेस सरकार ने वरिष्ठता के पैमाने को दरकिनार कर दिया। कांग्रेस पार्टी ने संविधान का सबसे ज्यादा मजाक उड़ाया है। recent visitors 75

राहुल गांधी ने संसद परिसर में जताया अनोखा विरोध, मंत्री राजनाथ सिंह को तिरंगा और गुलाब का फूल भेंट किया

नई दिल्ली कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद परिसर में एक अनोखे तरीके से केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जताया। राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने संसद परिसर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को तिरंगा और गुलाब का फूल भेंट किया। यह घटना तब घटी जब राजनाथ सिंह अपनी कार से संसद परिसर में प्रवेश कर रहे थे। जैसे ही उनकी कार रुकी, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता उनके पास पहुंचे और उन्हें तिरंगा और गुलाब का फूल भेंट कर दिया। यह प्रतीकात्मक रूप से उनके विरोध का इजहार था और केंद्र सरकार के खिलाफ संसद में होने वाली चर्चा से बचने का आरोप था, खासकर अडानी समूह के साथ जुड़ी कथित भ्रष्टाचार की जांच को लेकर। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस का यह कदम गांधीवादी विचारधारा पर आधारित था। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने तिरंगा और गुलाब का फूल संसद में सत्तापक्ष के सांसदों को भेंट कर यह संदेश देने की कोशिश की कि वे अडानी के खिलाफ आरोपों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार हैं। प्रतापगढ़ी ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार ने संसद को काम न करने देने की कसम खाई है और विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि अडानी मामले पर सदन में चर्चा की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है और अडानी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, 20 नवंबर से संसद के सत्र के दौरान दोनों सदनों में लगातार हंगामा देखा गया। कांग्रेस ने अडानी समूह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा की मांग की, जबकि बीजेपी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के जॉर्ज सोरोस से संबंध हैं। बीजेपी ने दावा किया कि जॉर्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित एक संगठन ने कश्मीर को भारत से अलग करने का समर्थन किया था। इस तरह के आरोपों को लेकर भी सदन में तू-तू, मैं-मैं का माहौल बना हुआ है। संसद में विपक्ष के प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रहने के साथ, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। 10 दिसंबर को, विपक्षी गठबंधन के दलों ने राज्यसभा में धनखड़ को हटाने के लिए एक नोटिस दिया। इन दलों का आरोप है कि उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ ने हमेशा पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है। हालांकि, विपक्ष के पास राज्यसभा में धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव पारित कराने के लिए जरूरी सदस्य संख्या की कमी है, फिर भी यह कदम एक कड़ा संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है कि वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े हैं।   इन घटनाओं के बीच, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार अपनी आवाज़ उठाने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार अडानी मामले पर संसद में चर्चा कराए। उनका कहना है कि यदि इस मामले पर चर्चा नहीं की जाती है, तो यह संसद और लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है। विपक्ष का यह मानना है कि यह सरकार का कर्तव्य है कि वह भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर संसद में खुलकर चर्चा करने की अनुमति दे, ताकि जनता को सच्चाई का पता चल सके। राहुल गांधी द्वारा तिरंगा और गुलाब का फूल भेंट करने की यह घटना न केवल विरोध का प्रतीक बन गई, बल्कि यह देश की राजनीति में एक नई दिशा को भी जन्म देती है। इसने यह भी दिखा दिया कि कैसे विपक्ष अपनी असहमति को शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक तरीके से व्यक्त कर सकता है, जैसा कि गांधी के समय में हुआ करता था। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक विश्लेषकों और जनता के बीच यह सवाल उठाया है कि क्या भारत की संसद में इस तरह के विरोध प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र की मजबूती का संकेत हैं या यह केवल राजनीतिक दांवपेंच का हिस्सा हैं।  recent visitors 129

गुलाबी नगरी में ‘नेतृत्व संगम’ कैंप में होंगे शामिल, राजस्थान-जयपुर में मोदी से पहले पहुंचे राहुल गांधी

जयपुर. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज सुबह जयपुर पहुंचे। वे यहां सामोद में आयोजित कांग्रेस के 'नेतृत्व संगम' कैंप में शामिल होने आए हैं। एयरपोर्ट पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राहुल गांधी का स्वागत किया। राजस्थान में इनवेस्टमेंट समिट के उद्घाटन से एक दिन पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी रविवार को जयपुर पहुंचे। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निवेश समिट का उद्घाटन करने जयपुर पहुंच रहे हैं। हालांकि राहुल यहां सामोद में आयोजित कांग्रेस के 'नेतृत्व संगम' कैंप में शामिल होने आए हैं। राहुल गांधी सुबह करीब 7 बजे जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे, जहां पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, और उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा ने उनका भव्य स्वागत किया। अशोक गहलोत ने उन्हें सूत की माला पहनाई और पीसीसी चीफ गोविंदसिंह डोटासरा ने गुलदस्ता भेंट किया। राहुल गांधी का यह 17 दिनों में दूसरा जयपुर दौरा है। इससे पहले वे एक शादी समारोह में शामिल होने जयपुर आए थे। 'नेतृत्व संगम' ट्रेनिंग कैंप कांग्रेस का 'नेतृत्व संगम' ट्रेनिंग कैंप पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास है। इस कैंप का उद्देश्य पार्टी में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना और नेताओं को पार्टी की विचारधारा और रणनीतियों से परिचित कराना है। राहुल गांधी इस कैंप में महत्वपूर्ण सत्रों का हिस्सा बनेंगे, जिसमें आगामी चुनावों की रणनीति, युवा नेतृत्व को प्रोत्साहन और पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से संवाद शामिल होगा। कैंप में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ संवाद और प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे, जिसमें कांग्रेस के आगामी चुनावी एजेंडे और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा होगी। recent visitors 110