‘कोलकाता, बिहार, उत्तराखंड और यूपी में महिलाओं के साथ हुई क्रूरताओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया: प्रियंका गांधी

नई दिल्ली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी और हत्या समेत हाल ही में देश में महिला अत्याचार की हुई अन्य घटनाओं को लेकर शुक्रवार को एक ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने इन घटनाओं को लेकर भारी नाराजगी जताई और कहा कि इन क्रूरताओं ने देश को झकझोर कर रख दिया है। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में बार-बार नरमी, आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण और दोषियों को जमानत या पैरोल देने से महिलाओं का मनोबल गिरता है। उन्होंने पूछा कि जब सरकारी आंकड़े बताते हैं कि हर दिन 86 बलात्कार हो रहे हैं, तो महिलाएं किससे सुरक्षा की उम्मीद करें? एक्स प्लेटफॉर्म पर की अपनी पोस्ट में प्रियंका ने लिखा, 'कोलकाता, बिहार, उत्तराखंड और यूपी में महिलाओं के साथ हुई क्रूरताओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस समय देश भर की महिलाएं दुख और गुस्से में हैं। जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं तो देश की महिलाएं देखती हैं कि सरकारें क्या कर रही हैं? उनकी बातों और उपायों में कितनी गंभीरता है? जहां भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश देने की जरूरत हुई, वहां आरोपियों को बचाने की कोशिशें की गईं।' आगे उन्होंने लिखा, 'महिलाओं पर जघन्य अत्याचार के मामलों में बार-बार नरमी बरतना, आरोपी को राजनीतिक संरक्षण देना और सजायाफ्ता कैदियों को जमानत/पैरोल देने जैसी हरकतें महिलाओं को हतोत्साहित करती हैं। इससे देश की महिलाओं में क्या संदेश जाता है? जब सरकारी आंकड़ों में हर दिन 86 रेप हो रहे हों, महिलाएं सुरक्षा की आशा किससे करें?' प्रियंका ने ट्वीट में किया इन 3 घटनाओं का जिक्र कांग्रेस महासचिव का यह ट्वीट पिछले सप्ताह 9 अगस्त को कोलकाता में सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए जघन्य बलात्कार और हत्या को लेकर पूरे देश में आक्रोश के बीच आया है। साथ ही प्रियंका ने अपनी पोस्ट में उत्तराखंड के रुद्रपुर में हुई उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एक निजी अस्पताल की नर्स के साथ बलात्कार करके और उसके चेहरे को पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी गई। साथ ही आरोपी ने उसके शव को उत्तराखंड की सीमा के पास उत्तर प्रदेश के एक गांव में खाली पड़े प्लॉट में फेंक दिया। इसके अलावा प्रियंका ने जिस तीसरी घटना का जिक्र किया वो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुई, जहां 14 वर्षीय दलित लड़की का उसके घर से अपहरण कर लिया गया और उसका शव एक तालाब में मिला, जिस पर चोट के निशान थे। recent visitors 86

देश में अनिश्चितकालीन हिरासत में रखे गए रोहिंग्या शरणार्थियों की रिहाई की मांग की, CJI चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट (SC) ने हाल ही में केंद्र से एक याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें देश में अनिश्चितकालीन हिरासत में रखे गए रोहिंग्या शरणार्थियों की रिहाई की मांग की गई है। कोर्ट ने 12 अगस्त को इस संबंध में आदेश जारी किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि "नोटिस जारी कर रहे हैं। इसका जवाब 27 अगस्त 2024 तक दिया जाना चाहिए।" मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने ये फैसला दिया। इसमें न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। पीठ ने केंद्र और अन्य से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। जनहित याचिका में भारत में युवा महिलाओं और बच्चों सहित रोहिंग्या शरणार्थियों को अनिश्चित काल के लिए हिरासत में रखने को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि यह कानून द्वारा स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन है। यह याचिका रीता मनचंदा ने दायर की है। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता उज्जैनी चटर्जी, टी. मयूरा प्रियन, रचिता चावला और श्रेय रवि डंभारे कर रहे हैं। याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह सरकारों को निर्देश दे कि वे रोहिंग्या बंदियों को रिहा करें, जिन्हें विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट अधिनियम (भारत में प्रवेश), 1929 के तहत दो वर्षों से अधिक समय से हिरासत में रखा गया है। याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता रीता मनचंदा दक्षिण एशियाई संघर्षों एवं शांति स्थापना में विशेषज्ञता रखने वाली एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं। उन्होंने अपने सह-लेखक मनाहिल किदवई के साथ मिलकर 'डेस्टिनीज अंडर डिटेंशन' नाम से भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें उन्होंने भारत में विभिन्न हिरासत केंद्रों, किशोर गृहों और कल्याण केंद्रों में हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं के मामलों का डॉक्यूमेंटेशन किया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उन्हें अपनी रिपोर्ट में इस बात के सबूत मिले हैं कि हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं को कभी कोई नोटिस नहीं दिया गया या उन्हें शरणार्थी के रूप में अपना मामला पेश करने का मौका नहीं दिया गया। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कई रोहिंग्या बंदियों को स्वच्छ पेयजल और पौष्टिक भोजन तक नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, यौन हिंसा और मानव तस्करी के अमानवीय अपराधों से बचकर निकलीं युवा रोहिंग्या महिलाओं को बिना किसी मानसिक स्वास्थ्य सहायता के हिरासत में रखा गया है। उन्हें सामान्य रूप से चिकित्सा उपचार तक नहीं मिल पा रहा। याचिकाकर्ता ने अपनी रिपोर्ट में हिरासत केंद्रों में हुई दो मौतों का भी जिक्र किया है। इसमें एक नाबालिग की मौत भी शामिल है, जो चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा, "रोहिंग्या बच्चों को कोई शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण भी नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनका कोई भविष्य नहीं है।" याचिका में कहा गया है, "रोहिंग्याओं को हिरासत केंद्रों के अंदर उनके श्रम के लिए कोई मजदूरी नहीं दी जाती है। यह दर्शाता है कि हिरासत केंद्रों में बंदियों, विशेष रूप से युवा महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और मानवीय सम्मान के अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। इसके अलावा, इस तरह की निरंतर हिरासत क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार है, जो यातना के बराबर है।" recent visitors 72

सबसे ज्यादा सीट का मतलब सीएम पद नहीं, उद्धव ठाकरे के इस बयान के बाद कांग्रेस की टेंशन बढ़ गई

नई दिल्ली शिव सेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को आगामी विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक सीट जीतने वाली पार्टी के मुख्यमंत्री पद पर दावे वाले फॉर्मूले की बजाय चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने पर जोर दिया और कहा कि वह महा विकास आघाडी (एमवीए) की ओर से घोषित ऐसे किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करेंगे। एमवीए पार्टी कार्यकर्ताओं को यहां संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा कि अगर लोकसभा चुनाव लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए हुए हैं तो विधानसभा चुनाव महाराष्ट्र के स्वाभिमान को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने आगे कहा कि वह इस विचार का समर्थन नहीं करते कि अधिकतम विधायकों वाली पार्टी को मुख्यमंत्री पद मिले। उद्धव ठाकरे के इस बयान के बाद कांग्रेस की टेंशन बढ़ गई है। दरअसल, राज्य में कांग्रेस सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है और अब ठाकरे के बयान से साफ है कि वे मुख्यमंत्री पद सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाले दल को ही मिले, इसके इच्छुक नहीं हैं। एमवीए में शिव सेना (यूबीटी), शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला पहले किया जाना चाहिए न कि चुनाव में सबसे अधिक सीट जीतने वाली पार्टी के तर्क वाले आधार पर। ठाकरे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन के दौरान उनका अनुभव यह रहा कि जिसके पास संख्या होगी उसे मुख्यमंत्री का पद मिलेगा। उन्होंने इस नीति को 'नुकसानदेह' करार दिया क्योंकि इससे एक दल, अपने गठबंधन में बढ़त बनाए रखने के लिए दूसरे दल के उम्मीदवार को हराने की कोशिश करेगा। ठाकरे ने कहा, ''पहले (मुख्यमंत्री का चेहरा) फैसला करें और फिर आगे बढ़ें लेकिन इस नीति (जिनके पास सबसे ज्यादा सीट होंगी उसे मुख्यमंत्री पद मिलेगा) के अनुसार न चलें ।'' पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ''उद्धव ठाकरे कांग्रेस और राकांपा द्वारा एमवीए के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में घोषित किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करेगा। मैं अपने लिए नहीं लड़ रहा हूं बल्कि महाराष्ट्र के अधिकारों के लिए लड़ रहा हूं।'' ठाकरे ने एमवीए कार्यकर्ताओं से निजी स्वार्थों से ऊपर उठने और महाराष्ट्र के गौरव और हित की रक्षा के लिए लड़ने के लिए कहा। उन्होंने उनसे राज्य में विपक्षी गठबंधन का 'दूत' बनने का भी आग्रह किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने संबोधन में देश में धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता की वकालत किए जाने पर ठाकरे ने सवाल किया कि क्या उन्होंने हिंदुत्व छोड़ दिया है? पीएम मोदी ने कहा था, ''देश का एक बहुत बड़ा वर्ग मानता है कि जिस नागरिक संहिता को लेकर हम लोग जी रहे हैं, वह सचमुच में साम्प्रदायिक और भेदभाव करने वाली संहिता है। मैं चाहता हूं कि इस पर देश में गंभीर चर्चा हो और हर कोई अपने विचार लेकर आए।'' ठाकरे ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा, ''क्या आपने हिंदुत्व छोड़ दिया है? आपने चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के साथ गठबंधन किया जो हिंदुत्व में विश्वास नहीं करते हैं।'' उन्होंने वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा और पूछा कि जब भाजपा के पास पूर्ण बहुमत था तो इसे पारित क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ''क्या आप हमारे बीच झगड़ा कराने के लिए वक्फ विधेयक लाए हैं? और यदि आपको इसे लाना ही था तो आपने बहुमत होने पर ऐसा क्यों नहीं किया? मेरे संसद सदस्य वहां नहीं थे क्योंकि वे मेरे साथ थे। अगर इस पर चर्चा होनी होती तो हमारे सांसद इसमें हिस्सा लेते।'' ठाकरे की पार्टी को इस बात के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था कि पिछले सप्ताह लोकसभा में चर्चा के लिए आए इस विधेयक पर उसने अपने विचार नहीं रखे। विधेयक को बाद में जांच के लिए एक संसदीय समिति के पास भेज दिया गया। उन्होंने अयोध्या में भूमि सौदों की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग करते हुए कहा, ''जिस तरह आप हमारे हिंदू मंदिरों से जमीन लेकर अपने ठेकेदार मित्रों को दे रहे हैं, उसी तरह वक्फ बोर्ड की जमीन चुराकर अपने उद्योगपति दोस्तों को देने जा रहे हैं… तो हम कोई गड़बड़ी नहीं होने देंगे।'' ठाकरे ने निर्वाचन आयोग को महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की घोषणा करने की चुनौती भी दी। recent visitors 97

अपनी नाकारा सरकार को बचाने ममता ले रही राम, श्याम और वाम का नाम: श्रीमती शाज़िया इल्मी

भोपाल भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमती शाज़िया इल्मी ने शुक्रवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कोलकाता में महिला डॉक्टर से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की बर्बरतापूर्ण घटना ममता सरकार के जमीर पर धब्बा है। इस जघन्य घटना के आरोपियों पर कार्रवाई करने की बजाय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बचाने, सबूत नष्ट कराने का शर्मनाम काम कर रही है। दुष्कर्मियों, अत्याचारी राक्षसों को बचाना, उन्हें संरक्षण देना ममता सरकार का पुराना रिकॉर्ड रहा है और यही इंडी गठबंधन का असली चरित्र भी है। राम से इतना बैर क्यों है? श्रीमती शाज़िया इल्मी ने कहा कि महिला चिकित्सक के साथ हुई बर्बरता के दोषियों पर कार्रवाई की बजाय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसके लिए राम, श्याम और वाम को जिम्मेदार बता रही हैं। राम किसी एक पार्टी या धर्म के नहीं, पूरे देश के हैं। इस घटना के संबंध में भगवान राम का नाम लिया जाना अत्यंत शर्मनाक है। ममता बनर्जी को इस देश को यह बताना होगा कि उन्हें राम से इतना बैर क्यों है? श्रीमती शाज़िया इल्मी ने कहा कि महिला डॉक्टर के पोस्टमार्टम में जिस तरह की बर्बरता और हैवानियत के साक्ष्य मिले हैं, उससे पूरा देश सदमे में हैं। अपराधियों को राजनीतिक शह दिये जाने के चलते पश्चिम बंगाल में लड़कियां इतनी असुरक्षित महसूस कर रही हैं कि उन्हें लगता है पता नहीं कब उनकी बारी आ जाए। लेकिन ममता बनर्जी और उनकी सरकार कार्रवाई की बजाय आरोपियों को उसी तरह संरक्षण दे रही है, जैसा शाहजहां शेख को दिया था और 40 दिनों तक उसे कानून से छिपाये रखा था। उन्होंने कहा कि सारा देश आज ये जानना चाहता है कि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल की नियुक्ति किसने की, प्रिंसिपल क्या कर रहा था, उसे बर्खास्त क्यों नहीं किया गया, घटना के समय सीसीटीवी कैमरे चालू क्यों नहीं थे? सबूत नष्ट करने में मदद कर रही ममता सरकार श्रीमती शाज़िया इल्मी ने कहा कि इस पूरे मामले में ममता सरकार का रवैया शर्मनाक रहा है। पीड़ित महिला डॉक्टर के माता-पिता को ममता सरकार ने बताया कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की है। इस घटना के बाद से लगातार सबूत नष्ट करने और आरोपियों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उस बिल्डिंग में अचानक रिनोवेशन का काम शुरू कर दिया गया, जिसमें ये बर्बर घटना हुई थी। टीएमसी के लोग हुड़दंग मचा रहे हैं। सर्वर रूम पर हमला करके सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर हटाने की कोशिश की गई। श्रीमती इल्मी ने कहा कि तथ्य गढ़े नहीं जाते और पीड़िता के पोस्टमार्टम से जो तथ्य मिले हैं, उनसे पता चलता है कि बलात्कारी संख्या में ज्यादा थे। वो लोग कौन हैं और कहां हैं? जिस कोलकाता पुलिस की ममता बनर्जी तारीफ करती हैं, वो क्या कर रही थी? वो कौन है, जो सबूतों को नष्ट करने का प्रयास कर रहा है? क्यों इस घटना के दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है? आज पूरा देश ये सवाल पूछ रहा है। भाजपा शासित राज्यों की घटनाओं पर ही आवाज उठाती हैं ममता बनर्जी श्रीमती शाज़िया इल्मी ने कहा कि कोलकाता की तरह महिलाओं, बेटियों पर अत्याचार की घटना देश में कहीं भी हो, वह निंदनीय है। लेकिन ममता बनर्जी सिर्फ उन घटनाओं पर ही अपनी आवाज उठाती हैं, जो भाजपा शासित राज्यों में होती हैं। उन्हें पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में हो रही ऐसी ही वीभत्स घटनाएं दिखाई नहीं देतीं। क्या ममता बनर्जी इस तरह की घटनाओं के बारे में अपना रवैया इस बात से तय करती हैं कि उस राज्य में किस पार्टी की सरकार है? पीड़िता की जाति और धर्म क्या है? रेपिस्ट की जाति-धर्म क्या है और वो किस राजनीतिक दल से संबंध रखता है? अपराधियों को संरक्षण ही इंडी गठबंधन का असली चरित्र श्रीमती शाज़िया इल्मी ने कहा कि कोलकाता की घटना ऐसी पहली घटना नहीं है, जिसमें इंडी गठबंधन के लोगों ने अपराधियों को संरक्षण दिया हो। इससे पहले दुष्कर्म के आरोपी शाहजहां शेख को ममता बनर्जी किस तरह से बचाती रही हैं, पूरे देश ने देखा है। उत्तरप्रदेश के कन्नौज में एक 12 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती बना दिया गया। लेकिन यहां भी सपा के मुखिया अखिलेश यादव आरोपी मोइद खान को बचाने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि वो सपा नेताओं का करीबी रहा है। अपराधी पर कार्रवाई की मांग की बजाय अखिलेश यादव पीड़ित बच्ची पर झूठ बोलने का आरोप लगा रहे हैं और गर्भस्थ शिशु के पितृत्व की जांच की मांग कर रहे हैं। पीड़ितों पर सवाल और अपराधियों को संरक्षण देना ही इंडी गठबंधन का असली चरित्र है। पत्रकार-वार्ता के दौरान भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष उषा अग्रवाल, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी श्रीमती क्षमा त्रिपाठी, प्रदेश प्रवक्ता श्री पंकज चतुर्वेदी एवं सुश्री नेहा बग्गा उपस्थित रहीं। recent visitors 143

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश, 6 घंटे के अंदर दर्ज कराएं FIR, जिम्मेदारी संबंधित संस्थानों के प्रमुखों की होगी

नई दिल्ली कोलकाता में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ कथित बलात्कार और हत्या की घटना को लेकर व्यापक पैमाने पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों को निर्देश दिया है कि ड्यूटी पर तैनात किसी भी स्वास्थ्यकर्मी के साथ हिंसा की घटना होने के छह घंटे के भीतर संस्थागत प्राथमिकी दर्ज कराई जाय। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि FIR दर्ज कराने की जिम्मेदारी सभी संबंधित संस्थानों के प्रमुखों की होगी। यह प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की एक प्रमुख मांग रही है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) डॉ. अतुल गोयल द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) सहित केंद्र सरकार के अस्पतालों के निदेशकों और चिकित्सा अधीक्षकों तथा देश भर के सभी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्यों को जारी किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘ड्यूटी के दौरान किसी भी स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा की स्थिति में, घटना के अधिकतम छह घंटे के भीतर संस्थागत प्राथमिकी दर्ज कराने की जिम्मेदारी संस्थान के प्रमुख की होगी।’’ ज्ञापन के मुताबिक, हाल में यह देखा गया है कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं आम हो गई हैं। इस ज्ञापन में कहा गया है कि कई स्वास्थ्य कर्मियों को ड्यूटी के दौरान शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ता है और कई को धमकी दी जाती है या उन्हें अपशब्द कहे जाते हैं। इसमें कहा गया है कि अधिकतर मामलों में हिंसा मरीज या उनके तीमारदार करते हैं। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के बाद केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम (CPA) लागू करने की मांग को लेकर अभी भी देश भर में वरिष्ठ और रेजिडेंट डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन और हड़ताल जारी है। डॉक्टरों के संगठन फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) ने गुरुवार को दोबारा से हड़ताल का ऐलान किया है। मंगलवार को ही देर रात FORDA के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर हड़ताल खत्म करने का ऐलान किया था। recent visitors 82

महाकालेश्वर मंदिर में दर्जन से अधिक श्रद्धालु के सुरक्षाकर्मी ने निक्कर उतरवा दिए

उज्जैन  उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार को एक दर्जन से अधिक श्रद्धालु महाकाल के नाम और त्रिपुंड छपे हुए निक्कर पहनकर दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान मंदिर के सुरक्षा अधिकारी ने उन्हें रोका और उनसे निक्कर उतरवाया। हालांकि किसी प्रकार की कार्रवाई न करते हुए इन भक्तों को दूसरे कपड़े पहनने के लिए दिया। साथ ही हिदायत दी कि इस प्रकार के कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश न करें। भक्तों के कपड़े उतरवाते देख थोड़ी देर के लिए वहां अफरा तफरी मच गई। कई श्रद्धालु अपने कपड़े छुपाते नजर आए। उज्जैन के महाकाल मंदिर में शुक्रवार अल सुबह 'महाकाल' और 'त्रिपुंड' प्रिंट छपे निक्कर पहनकर प्रवेश कर रहे श्रद्धालुओं को मंदिर के कर्मचारी और सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। बताया जा रहा है कि महाकाल भस्म आरती के दौरान कई श्रद्धालु 'महाकाल' प्रिंट वाले निक्कर पहनकर मंदिर में प्रवेश कर रहे थे। इस दौरान गर्भगृह निरीक्षक उमेश पंड्या और मंदिर समिति की सुरक्षा के इंचार्ज विष्णु चौहान ने ऐसे कपड़े पहने श्रद्धालुओं पर कार्रवाई शुरू की। इस दौरान करीब एक दर्जन ऐसे लोगों को पकड़ा जिन्होंने 'महाकाल' और 'त्रिपुंड' बने निक्कर पहन रखे थे। इस दौरान मौके पर ही इन लोगों के कपड़े उतरवा दिए गए और उन्हें पहनने के लिए दूसरे कपड़े दिए गए। इसके बाद ही उन्हें मंदिर में प्रवेश दिया गया। साथ ही ऐसे कपड़े पहनकर मंदिर नहीं आने की हिदायत दी गई। बता दें कि महाकाल मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में धार्मिक वस्त्रों की दुकानें हैं। यहां 'महाकाल' लिखी हुई टी शर्ट, दुपट्टा, शर्ट, कुर्ता, शॉर्ट्स आदि मिलते हैं। कई भक्त इन्हें पहनकर महाकाल मंदिर में प्रवेश करते हैं। कपड़े पहनने के मामले में हुई कार्रवाई को मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने सही बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कपड़े पहनने से धार्मिक भावनाएं आहत होती है। हम काफी समय से महाकाल मंदिर में ड्रेस कोड लागू करने की बात कह रहे हैं। मंदिर में ड्रेस कोड लागू होना चाहिए। मंदिर में धार्मिकता के अनुसार ही वस्त्र पहनकर प्रवेश दिया जाना चाहिए। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई मंदिर में पहली बार की गई है। पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश के कई मंदिरों में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड लागू किया जा चुका है। कई मंदिरों में इस प्रकार की सख्तियां लगाई गई है कि मंदिर में संस्कृति के अनुरूप ही कपड़े पहनकर प्रवेश करें। महाकाल मंदिर के पंडित और पुजारी भी कई बार ड्रेस कोड लागू करने की मांग कर चुके हैं। अभी देखने में आता है कि पुरुष भक्त छोटे-छोटे निक्कर पहनकर मंदिर में प्रवेश करते हैं तो युवतियां भी शॉर्ट ड्रेस पहनकर मंदिर में आ जाती हैं। इन सब पर रोक लगाई जानी चाहिए। इनसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। इस मामले के संबंध में महाकाल मंदिर के नव नियुक्त प्रशासक गणेश धाकड़ से चर्चा करना चाही तो उन्होंने कहा कि मैं अभी बाहर हूं। आकर ही कुछ कह पाऊंगा। विरोध कर चुके हैं पुजारी कई बार मंदिर में महाकाल लिखे कपड़े पहनकर प्रवेश की बात सामने आई है। कई बार मंदिर के पुजारी भी इसका विरोध दर्ज करा चुके हैं। हालांकि इस तरह की कार्रवाई मंदिर में पहली बार की गई है। पुजारी बोले- मंदिर में ड्रेस कोड लागू होना चाहिए महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया, काफी समय से ड्रेस कोड लागू करने की मांग कर रहे हैं। ऐसा बड़े मंदिरों में भी है। आए दिन देखने में आता है कि पुरुष छोटे-छोटे निक्कर पहनकर मंदिर में प्रवेश करते हैं। कई ड्रेस तो मंदिर के अनुकूल नहीं होती। इसी तरह युवतियां भी शॉर्ट ड्रेस पहनकर मंदिर में आ जाती हैं। इन सब पर रोक लगाई जानी चाहिए। इनसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। मंदिर के आसपास दुकानों पर मिलते हैं कपड़े महाकाल मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में धार्मिक वस्त्रों की दुकानें हैं। यहां महाकाल लिखी हुई टी शर्ट, दुपट्‌टा, शर्ट, कुर्ता, शॉर्ट्स आदि मिलते हैं। भक्त इन्हें पहनकर महाकाल मंदिर में प्रवेश करते हैं। recent visitors 89

कैमरून ने फीफा अंडर-20 महिला विश्व कप 2024 के लिए घोषित की टीम

याउंडे कैमरून फुटबॉल महासंघ (फेकाफुट) ने अगले महीने कोलंबिया में होने वाले फीफा अंडर-20 महिला विश्व कप 2024 के लिए टीम घोषित कर दी है। कैमरून की राजधानी याउंडे में प्री-टूर्नामेंट प्रशिक्षण शिविर के पूरा होने के बाद 24 खिलाड़ियों की टीम को अंतिम रूप दिया गया। इसमें मुख्य रूप से घरेलू लीग में खेलने वाले खिलाड़ी शामिल हैं। खेल विश्लेषक जेम्स मालू ने सिन्हुआ से कहा, स्पेन और फ्रांस में खेलने वाले कुछ ही खिलाड़ी इस टीम का हिस्सा हैं, जिसका मतलब है कि कैमरून कोलंबिया में होने वाले टूर्नामेंट के दौरान अपनी स्थानीय प्रतिभाओं को दिखाना चाहता है। ये लड़कियां अच्छी हैं और अच्छा प्रदर्शन करने का वादा करती हैं। टीम की अगुआई मिडफील्डर नाओमी एटो करेंगी। एटो ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में कहा, हमें ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको और मेजबान कोलंबिया से बने एक कठिन समूह में रखा गया है। जब हम वहां जाएंगे तो हमारा ध्यान अपने काम पर रहेगा। हम वहां जीतने के लिए भी जा रहे हैं क्योंकि हम जीत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह पहली बार है जब इंडोमिटेबल लायनेसेस 24 टीमों के टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही है। कैमरून की अंडर-20 टीम इस प्रकार है- गोलकीपर- बिया कैथी, एनजीओले चेल्सी, एनजीए कैलिस्टे चैंटल। डिफेंडर्स- माग मैरिएन इनेस, एस्सिमी इवौडो मार्लेन, डजची सेनिंग ऑर्लाइन, नगासेह एमबेले बर्नाडेट, एमबीएंडजी सूजी, यंगा जेह एस्टेले लिन्सी, एनजीओनो मैरी विक्ट्री। मिडफील्डर्स- एनजॉक पौहे निकोल, दिवाविसा टोडौ तोइरे, टोको नजोया अख्ता, अजांग मवेम्बे बेरेनिस सिमोन, नाओमी एटो, मेगुयेप न्गुयेप एंजेला, एनजीओक मोनिक। फॉरवर्ड्स- कैमिला यवेटे दाहा, मेंडौआ ग्रेस डेविला, न्गुएलु सूफिया नीना, लामिन माना, एंगनेम्बेन एनी फ़ेलिशिया टाउटिना, मेवा किकी क्रिस्टियन, एनजीओ बिलोंग एंड्री एम.।   recent visitors 106