महाकुंभ में गंगा सेवा दूत के लिए महाप्रसाद सेवा बनी वरदान, कर रहे घाटों की सफाई, दे रहे स्वच्छता का संदेश

प्रयागराज महाकुंभ में अदाणी ग्रुप और इस्कॉन के जरिए आम लोगों में महाप्रसाद बांटा जा रहा है। इससे लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन लाभ उठा रहे हैं। गंगा सेवा दूत के लिए ये सेवा किसी वरदान से कम नहीं है। महाकुंभ 2025 में गंगा सेवा दूत न केवल माँ गंगा की निर्मलता बनाए रखने में जुटे हैं, बल्कि स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता का संदेश भी फैला रहे हैं। उनकी अथक सेवा और समर्पण इस महापर्व को न सिर्फ भव्य बल्कि स्वच्छ और दिव्य भी बना रहा है। घाटों पर बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना के दौरान के जैसे ही फूल अर्पित किए जाते हैं, ये गंगा सेवा दूत तुरंत उसे निकालकर नदी को साफ कर देते हैं। गंगा और यमुना की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए करीब 1500 गंगा सेवा दूतों को सभी सेक्टर्स में बने घाटों पर नियुक्त किया गया है। इन सभी गंगा सेवा दूतों को मेला प्रशासन की ओर से भी ट्रेन्ड भी किया गया है। महाकुम्भ के पहले दिन सभी गंगा सेवा दूत अपनी नियत ड्यूटी पर तैनात रहें हैं, साथ ही श्रद्धालुओं के लिए नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे।   महाकुंभ में अदाणी ग्रुप और इस्कॉन के माध्यम से आम लोगों में महाप्रसाद वितरित किया जा रहा है। इससे लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन लाभ उठा रहे हैं। गंगा सेवा दूत के लिए ये सेवा किसी वरदान से कम नहीं है, अपनी डयूटी करते हुए ये अदाणी-इस्कॉन सेक्टर-19 के किचन में प्रसाद ग्रहण करते है फिर अपनी डयूटी पर चले जाते है। उनका मानना है इस नि:शुल्क सेवा से उन्हे काफी राहत मिली है और वो अपनी जिम्मेदारी आसानी से संभाल लेते है। महाप्रसाद पूरी तरह से सात्विक और स्वच्छता के उच्च मानकों के अनुसार तैयार किया जाता है। महाप्रसाद में प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार के व्यंजन तैयार किए जाते हैं और हजारों कर्मचारियों की मदद से इसे सुचारू रूप से वितरित किया जाता है। यहां पर श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने के बाद अपनी इच्छा से सेवा भी दे सकते हैं।   स्काउट एंड गाइड के वॉलंटियर्स भी महाकुंभ में दिखे तत्पर इनकी मदद के लिए स्काउट एंड गाइड के भी युवक एवं युवतियां तत्परता से तैयार नजर आए। ये युवक एवं युवतियां स्वयं सेवा के तहत घाटों पर मुस्तैदी से कार्य करते दिखे।  9 जनवरी से ही स्काउट एंड गाइड टीम यहां पर आ गए हैं, टीम में मिर्जापुर, वाराणसी से भी स्काउट एंड गाइड हैं। कुल मिलाकर 91 लोग स्वयं सेवा में लगे हुए हैं। इसके लिए उन्हें बाकायदा ट्रेनिंग भी दी गई है। 45 दिनों में कुल 10 हजार 200 स्काउट एंड गाइड पूरे महाकुम्भ में अपनी सेवाएं देंगे। हर हफ्ते 250-250 लोग यहां पर पहुंचेंगे। उनके रहने और खाने-पीने के लिए प्रशासन की ओर से सेक्टर 6 में व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के खास टॉयलेट इस बार महाकुंभ में 1.5 लाख टॉयलेट्स और यूरिनल्स को पूरे मेला क्षेत्र और पार्किंग स्थलों पर स्थापित किया जाना है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन टॉयलेट्स की साफ सफाई को लेकर है. प्रशासन ने इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की है। मेले में क्यूआर बेस्ड मॉनीटरिंग सिस्टम के माध्यम से टॉयलेट्स में स्वच्छता का सर्वे किया जाएगा। विशेष ऐप के माध्यम से जिस टॉयलेट में गंदगी की जानकारी मिलेगी, उसे चंद मिनटों में क्लीन कर दिया जाएगा। यही नहीं सफाई के लिए जेट स्प्रे क्लीनिंग सिस्टम अपनाया जाएगा, ताकि मैनुअल सफाई की आवश्यकता न पड़े। इसी तरह सेप्टिक टैंक को खाली करने के लिए भी सेसपूल ऑपरेशन प्लान रेडी तैयार किया गया है। recent visitors 122

आज हम ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणाली सब कुछ निर्यात कर रहे है: राजनाथ सिंह

बेंगलूरू राजनाथ सिंह ने कहा कि, आज हम छोटे तोपखानों से लेकर ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणाली जैसे बड़े प्लेटफॉर्म तक सब कुछ निर्यात कर रहे हैं। आज हमारा देश परिवर्तन के क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है।  एयरो इंडिया 2025 में बोलते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि भारत परिवर्तन के क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है और देश के लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली, नौसैनिक जहाज न केवल हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं बल्कि पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन रहे हैं। एयरो इंडिया 2025 के समापन समारोह पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, एयरो इंडिया ने ऐसी ऊंचाइयों को छुआ है जो न केवल अद्वितीय हैं बल्कि ऐतिहासिक भी हैं।  उन्होंने कहा, मैं पिछले तीन दिनों से इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से मौजूद था और अगर मुझे अपने अनुभव को तीन शब्दों में व्यक्त करना है तो वह है ऊर्जा, ऊर्जा और ऊर्जा। उन्होंने कहा कि, यहां हम जो कुछ भी देख पाए, वह ऊर्जा का प्रकटीकरण है और यह ऊर्जा और उत्साह न केवल भारत के प्रतिभागियों में बल्कि दुनिया भर से आए लोगों में देखी जा सकती है। हमारे उद्यमियों, हमारे स्टार्टअप और इनोवेटर्स में जो उत्साह देखा गया, वह सराहनीय है। देश बदलाव के क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है- रक्षा मंत्री रक्षा मंत्री ने कहा कि देश बदलाव के क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, हम सभी जानते हैं कि भारत ऐतिहासिक रूप से अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। अगर मैं एक दशक पहले की बात करूं तो हमारे देश में 65 से 70 प्रतिशत रक्षा उपकरण आयात किए जाते थे। उन्होंने कहा, यदि हम आज की स्थिति को देखें तो आप इसे समाधान या चमत्कार कह सकते हैं, लेकिन आज देश में लगभग उतने ही प्रतिशत रक्षा उपकरणों का निर्माण हो रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा, आज हम ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली, नौसैन्य पोत या ऐसे अनेक उपकरण और प्लेटफॉर्म न सिर्फ हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं बल्कि पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन रहे हैं। उन्होंने कहा, आज हम छोटे तोपखानों से लेकर ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणाली जैसे बड़े प्लेटफॉर्म तक, सब कुछ कई देशों को निर्यात कर रहे हैं। इससे न केवल हमारा रक्षा निर्यात बढ़ रहा है बल्कि वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के साथ हमारी नई साझेदारियां भी विकसित और मजबूत हो रही हैं। recent visitors 81

सीएम योगी और यामानासी प्रांत के उप राज्यपाल ओसादा के बीच यूपी में निवेश पर हुई चर्चा

लखनऊ जापान के यामानासी प्रांत के उप राज्यपाल को-ओसादा ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान सीएम योगी और यामानासी प्रांत के उप राज्यपाल ओसादा के बीच उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं समेत चार बिंदुओं को लेकर चर्चा हुई। को-ओसादा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावना तलाशने जापान से करीब 250 सीईओ आएंगे। सुदृढ़ कानून व्यवस्था और सुशासन के बलबूते आर्थिक प्रगति पर तेजी से बढ़ रहे उत्तर प्रदेश में जापान का प्रतिनिधिमंडल निवेश की संभावनाओं को देखेगा। इससे उत्तर प्रदेश के युवाओं को रोजगार में भी काफी मदद मिलेगी। वे उत्तर प्रदेश के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। सीएम और उपराज्यपाल के मध्य हुई वार्ता में ग्रीन हाइड्रोजन पर विशेष रूप से चर्चा हुई। इसमें बताया गया कि ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर उत्तर प्रदेश और यामानासी प्रीफेक्चर के मध्य समझौता होगा और यहां सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इसमें जापानी तकनीक का उपयोग होगा। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कराने पर भी चर्चा हुई, जिसमें दुनियाभर के हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी और इसके उपयोग में रुचि रखने वाले प्रतिनिधि भी उपस्थिति रहेंगे। हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी में यामानासी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के छात्रों को औद्योगिक प्रौद्योगिकी का अध्ययन करने का अवसर प्रदान करेगा। को-ओसादा ने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन की दृष्टि से असीमित संभावनाओं वाला राज्य है। यहां बौद्ध धर्म से जुड़े पर्यटन स्थलों पर जापानी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए बुद्धिस्ट सर्किट की भूमिका काफी अहम है। जापान से अधिकांश श्रद्धालु और आमजन बुद्धिस्ट सर्किट के अंतर्गत गौतम बुद्ध से जुड़ी जगहों (सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती आदि) पर आना चाहते हैं। यामानासी प्रांत के लोगों को बुद्धिस्ट सर्किट आने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ और को-ओसादा के मध्य यूपी के युवाओं के लिए जापान और यामानासी प्रांत में रोजगार की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। साथ ही जापानी भाषा का ज्ञान और अन्य ट्रेड के विषय में भी बात हुई। यह तय हुआ कि युवाओं को विभिन्न ट्रेड्स में कौशल प्रशिक्षण कराकर वहां भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि अध्ययन करने के लिए आने वाले छात्रों को यामानासी प्रीफेक्चर छात्रवृत्ति भी प्रदान करेगा। recent visitors 74

कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में राजस्थान को देश में पहले स्थान पर लाना हमारी प्राथमिकता: पशुपालन मंत्री

जयपुर पशुपालन, गोपालन और डेयरी मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने बुधवार को राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के सभागार में राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत 13 जिलों में तरल नत्रजन भंडारण हेतु 3000 लीटर के साइलो का वर्चुअल लोकार्पण किया। उन्होंने बताया कि तरल नत्रजन पशु नस्ल सुधार के लिए किए जाने वाले कृत्रिम गर्भाधान में काम आता है। तरल नत्रजन की भण्डारण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए राज्य के 16 जिलों में 3- 3 हजार लीटर क्षमता के वर्टिकल साइलो पूर्व में  स्थापित हो चुके हैं। इस तरह अब राज्य के 29 जिलों में वर्टिकल साइलो की स्थापना हो जाने से तरल नत्रजन भंडारण की कुल क्षमता 93 हजार लीटर हो गई है। जयपुर और उदयपुर के साइलो की क्षमता 6-6 हजार लीटर की है।  वर्चुअल लोकार्पण के बाद श्री कुमावत ने वीसी से जुड़े जिलों के पशु चिकित्सा अधिकारियों से बात की और साइलो की कार्यप्रणाली को समझा। उन्होंने जिलों के अधिकारियों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि सरकार पशुपालकों और पशुओं के हित के लिए उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं जिलों में पहुंचा दी गईं हैं। अब राजस्थान को इस क्षेत्र में पहले नंबर पर लाना विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के ऊपर निर्भर करता है। इस अवसर पर पशुपालन मंत्री ने जयपुर जिले के मैत्री कार्यकर्ताओं को ए आई किट का वितरण भी किया। उन्होंने मैत्री कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे पूरी निष्ठा और मेहनत से काम करें और कृत्रिम गर्भाधान में राजस्थान को देश में पहला स्थान दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संवेदनशील मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार पशुओं के कल्याण के प्रति समर्पित होकर काम कर रही है। श्री कुमावत ने कहा कि आज अधिकतर जिलों में तरल नत्रजन की भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए वर्टिकल साइलो की स्थापना हो चुकी है। बाकी बचे जिलों में भी हम जल्द ही यह व्यवस्था सुनिश्चित कर देंगे। उन्होंने कहा कि इन जिलों में साइलो की स्थापना होने से समय, ऊर्जा, मानव श्रम और पैसे इन सबकी बचत तो होगी ही साथ ही अवश्यकतानुसार तरल नाइट्रोजन की सही समय पर गुणवत्तापूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी जिससे कृत्रिम गर्भाधान के काम में गति आएगी। उन्होंने कहा कि पहले एक जिले से दूसरे जिले तक नाइट्रोजन की आपूर्ति में जार भी खराब होते थे अब उस समस्या से भी विभाग को निजात मिलेगी। श्री कुमावत ने बताया कि आज ही के दिन जैसलमेर में कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को बढ़ाने के उद्देश्य से मिशन उत्कर्ष जैसलमेर की शुरुआत भी की गई है। विस्तृत भौगोलिक परिस्थितियों और मानव श्रम की कमी के कारण जिले में योजनाओं की क्रियान्विति में समस्या आती है इसीलिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जैसलमेर जिले का चयन किया है और जिले में कृत्रिम गर्भाधान के लिए 484. 85 लाख रुपये के विशेष बजट के साथ मिशन उत्कर्ष जैसलमेर परियोजना लागू की गई है। इस अवसर पर शासन सचिव पशुपालन, गोपालन और मत्स्य डॉ. समित शर्मा ने कहा कि आज दौसा, टोंक, बाड़मेर, सवाईमाधोपुर, बारां, जैसलमेर, जालोर, प्रतापगढ़, राजसमंद, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, श्रीगंगानगर और चुरू जिलों में 218 लाख रुपये के नवीन वर्टिकल साइलो का लोकार्पण किया गया। 5 अन्य जिलों धौलपुर, सिरोही, झालावाड़, बून्दी और कुचामनसिटी में 3 हजार लीटर की क्षमता वाले साइलो की स्थापना आने वाले दिनों में भारत सरकार से बजट प्राप्त होने पर कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आर एल डी बी ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 73.25 लाख की लागत से 629 मैत्री कार्यकर्ताओं तथा 1687 विभागीय संस्थाओं को ए आई किट उपलब्ध कराया है। डॉ शर्मा ने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान कार्य की गुणवत्ता में ए आई किट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस किट में ए आई गन, सीजर, एप्रेन, फॉरसेप, डीप- स्टिक, थर्मामीटर सहित कृत्रिम गर्भाधन में काम आने वाली सामग्री होती है। राज्य में पहली बार इस किट में इलेक्ट्रिक कैटल तथा क्रायोजार बैग को भी शामिल किया गया है। भविष्य में चरणबद्ध रूप से प्रदेश में 5000 अतिरिक्त ए आई किट उपलब्ध कराए जाएंगे जिस पर 150 लाख रुपये की लागत आएगी। डॉ शर्मा ने कहा कि मिशन उत्कर्ष जैसलमेर परियोजना के अंतर्गत 50 मैत्री कार्यकर्ता को भी कार्य आधारित मानदेय पर चयनित किया गया है। इस अवसर पर राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा पशुपालन निदेशक डॉ. आनंद सेजरा, पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ सुरेशचंद मीना सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारीगण मौजूद थे। recent visitors 62

यूसीसी पर सवालिया निशान खड़े, हाईकोर्ट ने शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप पर सरकार से मांगा जबाब

नैनीताल आजाद भारत में पहली बार किसी राज्य में (उत्तराखंड) समान नागरिक संहिता लागू हुई, लेकिन इस पर कई सवालिया निशान खड़े हो गए। इसके चलते वकीलों ने यूसीसी के कुछ प्रावधानों को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यूसीसी में शादी, तलाक और लिव इन रिलेशनशिप के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर उत्तराखंड सरकार से 6 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि राज्य में लागू समान नागरिक संहिता मुसलमानों, पारसियों आदि की विवाह प्रणाली की अनदेखी करती है। लिव-इन, शादी और तलाक के प्रावधानों पर उठे सवाल समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड 2024 को जनहित याचिका (पीआईएल) के जरिए चुनौती दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि लिव इन रिलेशनशिप, शादी और तलाक से संबंधित प्रावधान नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। आपको बता दें कि प्रैक्टिस कर रहे एक वकील ने यूसीसी के कुछ हिस्सों को चुनौती दी है। लाइव लॉ की बेवसाइट के अनुसार इनमें पार्ट-1 में दिए गए शादी और तलाक के प्रावधान और पार्ट-3 में दिए गए लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े खंडों के साथ-साथ समान नागरिक संहिता नियम उत्तराखंड 2025 शामिल है। शादी के लिए साथी चुनने की स्वतंत्रता छिनने की दलील याचिका में कहा गया है कि यूसीसी उत्तारखंड 2024 ने महिलाओं से जुड़े असमानता वाले व्यक्तिगत नागरिक मामलों से जुड़ी चिंताओं पर अंकुश लगाया है। जबकि इसमें कई ऐसे प्रावधान और नियम हैं, जो राज्य में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं। इसमें निजता का अधिकार, जीवन जीने का अधिकार और बड़े अर्थों में विवाह में अपने साथी को चुनने में निर्णय लेने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के छिनने की बात है। शादी और तलाक से जुड़े रीति-रिवाजों को नजरअंदाज किया याचिका में कहा गया है कि ये प्रावधान मुस्लिम समुदाय के लिए भेदभावपूर्ण हैं। याचिका में दावा किया गया है कि ये प्रावधान मुस्लिमों की शादी और तलाक से जुड़े रीति-रिवाजों को नजरअंदाज करते हैं। दलीलों में इन लोगों पर हिन्दू मैरिज एक्ट के प्रावधानों को थोपते का भी आरोप लगाया गया है। लाइव लॉ बेवसाइट के अनुसार इसके लिए हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 3(1) (जी) में लिखी बात का हवाला दिया गया है। शादी के प्रतिबंधित रिश्तों का दिया हवाला हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 3(1) (जी) में शादी करने के लिए कुछ प्रतिबंधित रिश्तों के बारे में बताया गया है। इन्हीं प्रावधानों को मुस्लिम और पारसी समुदाय के लिए भी लागू किया गया है। याचिका में इसका उदाहरण रखते हुए दलील दी गई है कि इस बात को नजरअंदाज कर दिया गया है कि पारसी और मुस्लिम समुदाय में इन रिश्तों में शादी करना प्रतिबंधित नहीं है। इन रिश्तों में एक आदमी और उसके पिता की बहन की बेटी, एक आदमी और उसके पिता के भाई की बेटी, एक आदमी और उसके मामा की बेटी तथा एक आदमी और उसकी मामा की बेटी के जैसे रिश्ते शामिल हैं। LGBTQ समुदाय और रिलेशनशिप से जुड़े अधिकार लिव-इन रिलेशनशिप पर सेक्शन 4(बी) में कहा गया है कि केवल एक पुरुष और महिला जो "विवाह की प्रकृति" में रिश्ते के माध्यम से एक ही घर में रिलेशनशिप में रहते हैं। उनका रिश्ता निषिद्ध(बैन) संबंधों की डिग्री के तहत न आए। ऐसे रिश्तों को लिव-इन रिलेशनशिप में होना बताया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि यदि प्रावधान के शब्दों के मायने निकाले जाएं तो यह केवल "जैविक पुरुष या महिला" से संबंधित होगा। ऐसा होने पर LGBTQ समुदाय से जुड़े व्यक्ति अगर अपने लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण के लिए जाएंगे तो वो इस अधिकार से बाहर हो जाएंगे। ऐसा LGBTQ समुदाय के साथ अनुचित व्यवहार होगा। recent visitors 80

जिनका सनातन से कोई लेना देना नहीं, वो महाकुंभ में डुबकी नहीं लगायेंगे : उषा ठाकुर

इंदौर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कुंभ में स्नान नहीं करने पर पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी ने अपने पिता का सरनेम छुपा लिया. खान होकर गांधी लिखते हैं. इसलिए राहुल गांधी प्रयागराज महाकुंभ में स्नान नहीं करने गए. ये तो खान हैं, जहां उन्हें जाना है वो तो वहींं जाएंगे.’ वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए उषा ठाकुर ने कहा कि झूठे लोगों को सब झूठ लगता है. दरअसल, अखिलेश यादव ने 144 साल बाद महाकुंभ को लेकर कहा था बीजेपी ने झूठा प्रचार किया है. उषा ठाकुर ने कहा कि अखिलेश यादव वामपंथी विचार धारा से ग्रस्त हैं. इसलिए बेतुकी बातें करते रहते हैं. हिंदू समाज इन्हें समझ चुका है आने वाले समय में जनता मुंह तोड़ जवाब देगी. इसके अलावा पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए इंडिया गॉट लैटेंट के वीडियो को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि रणवीर अल्लाहबादिया ने अक्षम अपराध किया है. उन्हें कठोरतम दंड मिलना चाहिए. ये लोग वामपंथी घृणित विचारधार के हैं. टुकड़े-टुकड़े गैंग के उत्तराधिकारी हैं रणवीर. देशद्रोह, सनातन द्रोह और संस्कृति द्रोह का काम रणवीर अल्लाहबादिया ने किया है. इस जैसे दुष्टों को सजा जरूर मिलना चाहिए. वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी अखिलेश और राहुल गांधी के महाकुंभ ना जाने को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ‘वे स्नान करने क्यों नहीं गए ,ये तो वही तय करें. भगवान इनको सद्बुद्धि दें. मां गंगा सबके पाप हरती हैं. अवसर मिलेगा तो कुछ छींटे हम डाल देंगे.’ recent visitors 66

प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, प्रॉपर्टी महिला के नाम पर खरीदने पर स्टांप शुल्क 6%

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और बड़ा फैसला लेने जा रही है। प्रदेश में महिलाओं के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर बड़ी छूट देने की तैयारी कर ली गई है। अब तक 10 लाख रुपये तक की संपत्तियों पर मिलने वाली 1 फीसदी की छूट को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये तक की संपत्तियों पर लागू करने की तैयारी है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने वालों की संख्या में वृद्धि होगी। महिलाओं के हाथें में संपत्ति का अधिकार आने के बाद उनकी परिवार में निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश सरकार के स्टाम्प-न्यायालय शुल्क पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने इस संबंध में अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर उच्च स्तर पर सहमति बन चुकी है। जल्द ही इसे कैबिनेट से पास कराने की तैयारी है। इस फैसले से महिलाओं को अधिकतम 1 लाख रुपये तक की बचत हो सकेगी। उनके नाम पर संपत्ति खरीदने को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, अब महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार एक और फैसला लेने वाली है. अब एक करोड़ की संपत्ति पर स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत तक की छूट मिलेगी. विभाग के द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में एक करोड़ तक की संपत्ति महिला के नाम पर खरीदने पर स्टांप शुल्क 6% होगा. इससे लगभग एक लाख रुपए तक का फायदा मिलेगा. महिलाओं के नाम पर दर्ज संपत्ति में मिलने वाली नई छूट को लेकर उत्तर प्रदेश के स्टांप शुल्क पंजीयन विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है. उच्च स्तर पर सहमति भी बन गई है. उम्मीद जताई जा रही है कि योगी सरकार की अगली कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर मुहर भी लग जाएगी. स्टाम्प शुल्क में होगा बदलाव यूपी सरकार की ओर से अभी तक 10 लाख रुपये तक की संपत्तियों पर ही महिलाओं को 1 फीसदी की छूट मिल रही थी। नए प्रस्ताव के मुताबिक, 1 करोड़ रुपये तक की संपत्तियों पर 7 फीसदी की जगह 6 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क लिया जाएगा। इससे महिलाओं को अधिकतम 1 लाख रुपये तक का सीधा लाभ होगा। राज्य सरकार ने इससे पहले भी महिलाओं को संपत्ति हस्तांतरण में प्रोत्साहन देने के लिए गिफ्ट डीड योजना के तहत केवल 5000 रुपये में संपत्ति हस्तांतरण की सुविधा दी थी। इससे महिलाओं के नाम पर करीब 4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज की गई। योगी सरकार का बड़ा कदम महिलाओं के संपत्ति खरीद पर छूट प्रस्ताव को 18 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले कैबिनेट में रखा जा सकता है। यूपी सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट 20 फरवरी को पेश किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि केंद्र सरकार से महिला कल्याण के बजटीय आवंटन में से इस छूट की भरपाई हो सकेगी। योगी सरकार के इस फैसले को महिला सशक्तीकरण के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे राज्य में महिलाओं की संपत्ति स्वामित्व में वृद्धि होने की संभावना है। यह प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने पर भी असर डालेगा। recent visitors 78