मांडू में दिन दहाड़े युवक की पीट-पीट कर की हत्या, पर्यटकों और जनता में फैला डर

मांडू शनिवार को मांडू में जामा मस्जिद चौक से लगे मुख्य चौराहे पर फिल्मी स्टाइल में दिनदहाड़े युवक की हत्या कर दी गई। युवक को आरोपियों ने इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैली हुई है। शनिवार का दिन होने से यहां बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय जनता घटना स्थल पर मौजूद थी। इस घटनाक्रम से पर्यटन नगरी की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार जिसकी हत्या हुई उसका नाम निलेश 18 वर्ष पिता रावासिंग निवासी गुगली है। वारदात के बाद आरोपी भाग निकले हत्या का आरोपी स्थानीय युवक बताया जा रहे हैं। हालांकि पुलिस ने अभी हत्या के कारणों और आरोपियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। वारदात सुबह 11:30 बजे के करीब की गई है। घटना को अंजाम देकर आरोपी भाग निकले। पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल युवक को लेकर मांडू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। युवक की स्थिति गंभीर होने के कारण तत्काल धार जिला भोज चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। इस दौरान युवक की मौत हो गई। सीसीटीवी फुटेज से कर रहे पहचान इस विषय में मांडू थाना प्रभारी रामसिंह राठौड़ ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य माध्यमों से आरोपियों की पहचान की जा रही है। आरोपियों की धडपकड़ के लिए मांडू पुलिस जुटी हुई है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करेंगे। इधर घटना के बाद पूरे नगर में सनसनी फैली हुई है। मांडू में हाट बाजार का दिन होने से दिन भर इस घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। इस घटना के बाद कानून व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मांडू में पहली बार ऐसी वारदात मांडू में देशी-विदेशी पर्यटक लिए आते हैं। सुरक्षा को लेकर यहां हालात ठीक नहीं है। इधर मांडू में पहली बार इस तरह की घटना होने से क्षेत्र में क्षेत्र में भय का माहौल है। इधर घटना के बाद धामनोद एसडीओपी मोनिका सिंह मांडू पहुंची। उन्होंने जल्द ही हत्यारों के पकड़े जाने के संकेत दिए हैं। एसडीओपी मोनिका सिंह ने बताया कि हमने वीडियो फुटेज के आधार पर तीन लोगों को आईडेंटिफाई किया है पुलिस दल, इन तीनों आरोपियों को पकड़ने में लगा हुआ है। recent visitors 91

लोकायुक्त टीम ने मझौली तहसील के नायब तहसीलदार को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा

सीधी हमेशा रिश्वत के लिए चर्चा में रहा तहसील कार्यालय मझौली एक बार फिर शनिवार को सुर्खियों में रहा। लोकायुक्त टीम रीवा ने यहां पदस्थ नायब तहसीलदार को 25 हजार रूपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। कार्रवाई के बाद से तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई लोकायुक्त की 12 सदस्यीय टीम ने किया। 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग सरैहा, ठोंगा के रहने वाले प्रवेश शुक्ला ने लोकायुक्त कार्यालय रीवा में शिकायत की थी। प्रवेश ने बताया कि जमीन के नामांतरण के एवज में 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे हैं। बाद में 25 हजार में सौदा तय हुआ। लोकायुक्त ने मांगी जा रही रिश्वत की जांच की, जिसमें पाया गया है नायाब तहसीलदार बाल्मीकि प्रसाद साकेत प्रभारी नायाब तहसीलदार 50 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं।   रंगे हाथों पकड़ा लोकायुक्त ने शनिवार को जाल बिछाया, जैसे ही प्रवेश शुक्ला नायब तहसीलदार के शासकीय आवास में 25 हजार रुपये रिश्वत दे रहे थे। लोकायुक्त की टीम रंगे हाथ पकड़ लिया। जब्त की गई 50 नोट पांच-पांच सौ की है। टीम ने भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई किया है। recent visitors 103

जीएसटी काउंसिल की बैठक में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी घटाने का फैसला फिलहाल टल गया

जयपुर राजस्थान के जैसलमेर में हुई जीएसटी काउंसिल की 55वीं बैठक से आम जनता को बड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी घटाने का फैसला फिलहाल टल गया। मंत्रियों के समूह (GOM) ने यह प्रस्ताव रखा था, लेकिन काउंसिल ने इसे और अधिक स्पष्टीकरण के लिए अगली बैठक तक टाल दिया।   हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर फैसला क्यों टला? काउंसिल का कहना है कि इस प्रस्ताव पर और गहराई से विचार की जरूरत है। GOM को अपनी रिपोर्ट में अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टता जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में हेल्थ इंश्योरेंस, टर्म लाइफ इंश्योरेंस और यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान पर 18% जीएसटी लगाया जाता है। पॉपकॉर्न और पुरानी कारों पर नई जीएसटी दरें पॉपकॉर्न: मिक्स रेडी-टू-ईट (अनपैक्ड): 5% जीएसटी प्री-पैकेज्ड और लेबल वाले: 12% जीएसटी कैरेमेल पॉपकॉर्न: 18% जीएसटी पुरानी छोटी पेट्रोल-इलेक्ट्रिक कारें (EV): इनकी बिक्री पर जीएसटी को 12% से बढ़ाकर 18% कर दिया गया है। GST काउंसिल की बैठक आज: इंश्‍योरेंस प्रीमियम से लेकर फूड ऑर्डर तक, कई चीजों पर घट सकता है टैक्स! GST काउंसिल की बैठक आज: इंश्‍योरेंस प्रीमियम से लेकर फूड ऑर्डर तक, कई चीजों पर घट सकता है टैक्स! GST Council : GST पर आई बड़ी खबर…21 दिसंबर को बैठक, ये प्रोडक्ट्स होंगे महंगे! GST Council : GST पर आई बड़ी खबर…21 दिसंबर को बैठक, ये प्रोडक्ट्स होंगे महंगे! पुराने वाहनों पर GST बढ़ाकर 18% करने की तैयारी, काउंसिल की बैठक में हो सकता है बड़ा फैसला       आम जनता को झटका इस बैठक में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी घटाने का फैसला न होने से आम लोग निराश हैं, जो इस राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे। हालांकि, उम्मीद है कि अगली बैठक में इस पर चर्चा कर कोई निर्णय लिया जाएगा। recent visitors 77

मोदी ने आज कच्छ में आयोजित होने वाले रण उत्सव के लिए देशवासियों को आमंत्रित किया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कच्छ में आयोजित होने वाले रण उत्सव के लिए देशवासियों को आमंत्रित किया है। 1 नवंबर 2024 से शुरू ये रण उत्सव फरवरी 2025 तक चलेगा। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह उत्सव एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “कच्छ आप सभी का इंतजार कर रहा है। आइए, चल रहे रण उत्सव के दौरान कच्छ की शानदार संस्कृति और गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी का आनंद लें। यह महोत्सव आपके और आपके परिवार के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होने का वादा करता है।” पीएम मोदी ने एक अन्य वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “कच्छ की परंपरा, संस्कृति और विरासत का प्रतीक रण उत्सव हर किसी का मन मोह लेने वाला है। अद्भुत क्राफ्ट बाजार हो, सांस्कृतिक कार्यक्रम या फिर खान-पान की परंपरा, यहां का आपका हर अनुभव अविस्मरणीय बन जाएगा। आप सभी से मेरा आग्रह है कि एक बार अपने परिवार के साथ इस रण उत्सव में जरूर आएं।” गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल ने पीएम मोदी के पोस्ट को शेयर किया है। उन्होंने लिखा, पीएम मोदी के मार्गदर्शन में कच्छ का सफेद रण वर्ल्ड क्लास टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है। यहां आयोजित रण उत्सव प्राकृतिक सौंदर्य के साथ कला और संस्कृति का अद्भुत संगम है। रण उत्सव में जरूर पधारिए, आप खुद कहेंगे की “कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा”।”   recent visitors 127

क्या है न्यायसंगत गुजारा भत्ता? सुप्रीम कोर्ट ने तय किए नए पैमाने, पति-पत्नी दोनों के लिए राहत

नई दिल्ली ! यह बेहद दुखद है कि बेंगलुरू में 34 साल के अतुल सुभाष ने अपनी पत्नी के साथ तलाक, गुजारा भत्ता और अन्य मामलों को लेकर चल रहे कानूनी विवाद के चलते अपनी जान दे दी. उन्होंने मरने से पहले अपनी पत्नी पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने, पैसे ऐंठने और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए. अतुल सुभाष ने अपने 24 पेज के सुसाइड नोट और 81 मिनट के वीडियो में आरोप लगाया कि वह पत्नी निकिता सिंघानिया को 40 हजार रुपये महीना गुजारा भत्ता के तौर पर दे रहे थे. फिर भी, पत्नी और उसके परिवार वाले सभी केस खत्म करने के लिए 3 करोड़ रुपये की रकम मांग रहे थे. इतना ही नहीं, बच्चे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये की डिमांड की जा रही थी. अतुल सुभाष की आत्महत्या ने यह दिखाया है कि तलाक-गुजारा भत्ता के मामलों में कानूनी प्रक्रिया कितनी मुश्किल और तनावपूर्ण हो सकती है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में गुजारा भत्ता को लेकर अहम फैसला सुनाया है. यह मामला दुबई के एक बैंकर, उनकी पत्नी और बच्चे के बीच कानूनी विवाद से जुड़ा था. इस मामले में कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करते समय 8 बातों का ध्यान रखने के लिए कहा है. अब भारत की अदालतें गुजारा भत्ता के मामलों में इसी फैसले को आधार मानकर काम करेंगी. यह मामला दुबई के एक बैंक के सीईओ का है जिनकी साल 1998 में शादी हुई और 2004 में उनका पत्नी से विवाद हो गया. इसके बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई, जिसमें 20 साल तक यह बैंकर पारिवारिक अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक घूमता रहा. 2004 में बैंकर ने क्रूरता के आधार पर पत्नी से तलाक की अर्जी दायर की. इसके बाद पत्नी ने भी गुजारा भत्ता पाने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत याचिका दायर कर दी. यह केस 20 साल से अदालतों में घूम रहा है. परिवारिक अदालत से शुरू हुआ ये मामला पहले हाईकोर्ट में पहुंचा और फिर सुप्रीम कोर्ट. मुख्य सवाल यही है कि पत्नी को कितना गुजारा भत्ता मिलना चाहिए. 2015 में बैंकर ने सभी अदालती फैसलों का पालन करते हुए खुद से गुजारा भत्ता बढ़ा दिया. हालांकि, जब उनकी पत्नी ने और भी ज्यादा गुजारा भत्ता मांगना शुरू किया, तो उन्होंने विरोध किया. पति को यह मंजूर नहीं था कि यह रकम बार-बार बढ़ती रहे, खासकर जब उसकी अपनी भी आर्थिक स्थिति ठीक न हो और उसे अपने बच्चों की जिम्मेदारी भी निभानी हो. बैंकर के वकीलों के अनुसार, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 एक वयस्क बच्चे को गुजारा भत्ता देने की अनुमति नहीं देती है. मगर, पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 26 को चुनौती दी और अदालत से अपने और अपने वयस्क बेटे को स्थायी गुजारा भत्ता देने का समाधान मांगा. पत्नी का कहना था कि इस कानून के हिसाब से बच्चों के बड़े होने पर ज्यादा पैसे मिलने चाहिए. उनके बेटा हाल ही में ग्रेजुएट हुआ है और अभी भी उन पर निर्भर है, इसलिए और उन्हें भी ज्यादा पैसे चाहिए. बैंकर को इस बात पर सबसे ज्यादा एतराज था कि उसकी पत्नी हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 26 का गलत इस्तेमाल करके ज्यादा पैसे मांग रही है. हालांकि वो पहले के फैसलों को मानता रहा था और गुजारा भत्ता बढ़ाने को भी तैयार था. यह पारिवारिक विवाद जब कानून का सवाल बन गया, तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले ने केस के सभी तथ्यों को ध्यान से समझा. उन्होंने मौजूदा कानून को भी ध्यान में रखा. सुप्रीम कोर्ट ने रजनेश बनाम नेहा (2021) और उसके बाद के फैसलों में दिए गए सिद्धांतों को दोहराया है. फिर कोर्ट ने कुछ बातें बताईं जिनके आधार पर यह तय किया जा सकता है कि गुजारा भत्ता देना जरूरी है या नहीं और अगर जरूरी है तो कितना. सुप्रीम कोर्ट के नए दिशानिर्देश के अनुसार, गुजारा भत्ता तय करते समय पहले ये देखा जाना चाहिए कि पति-पत्नी दोनों का समाज में क्या स्थान है, उनकी पृष्ठभूमि क्या है, उनके परिवार का क्या रुतबा है, ये सारी बातें शामिल हैं. कई बार सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण भी गुजारा भत्ता की राशि प्रभावित हो सकती है. साथ ही दोनों कितना कमाते हैं और उनकी कितनी संपत्ति है. अगर पति आर्थिक रूप से मजबूत होता है, तो उसे ज्यादा गुजारा भत्ता देने के लिए कहा जा सकता है. अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हैं और उनकी आय लगभग बराबर है, तो गुजारा भत्ता की राशि कम हो सकती है या फिर शायद किसी को गुजारा भत्ता देने की जरूरत ही नहीं पड़े. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ एक कारक है. गुजारा भत्ता तय करते समय अदालत बाकी 7 कारकों पर भी विचार करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करते समय पति-पत्नी के जीवन स्तर को भी एक अहम कारक बताया है. गुजारा भत्ता तय करते समय अदालत यह भी देखेगी कि पति-पत्नी का समाज में क्या रुतबा है और वे कैसा जीवन जीते थे. उनके पास कितने मकान और गाड़ियां हैं, उनकी कीमत क्या है? उनका घर कितना बड़ा है, उसमें कितने एसी और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं हैं? उनके घर में कितने नौकर-चाकर काम करते हैं? वे कितनी बार छुट्टियां मनाने जाते थे, भारत में या विदेश में? अगर पति-पत्नी अमीर थे और ऐशो-आराम की जिंदगी जीते थे, तो पत्नी को ज्यादा गुजारा भत्ता मिल सकता है ताकि वो भी वैसी ही जिंदगी जी सके. अदालत यह भी देखेगी कि पत्नी की उम्र क्या है, उसने कितनी पढ़ाई की है और क्या वो खुद कमा सकती है. अगर वह बेरोजगार है, तो उसे ज्यादा गुजारा भत्ता मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गुजारा भत्ता तय करते समय पत्नी और बच्चों की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है. पत्नी को शादी के दौरान जैसा जीवन जी रही थी, वैसा ही जीवन जीने का हक है, लेकिन उसकी मांगें वाजिब होनी चाहिए. पत्नी और बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी होनी चाहिए, इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन अदालत यह भी देखेगी कि पत्नी की मांगें … Read more

दिल्ली चुनाव में इस बार पूर्व बस मार्शल भी ‘जनहित दल’ पार्टी के बैनर तले दिल्ली के सियासी समर में कूद गए

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। कांग्रेस-भाजपा और आम आदमी पार्टी के अलावा इस बार पूर्व बस मार्शल भी 'जनहित दल' पार्टी के बैनर तले दिल्ली के सियासी समर में कूद गए हैं। दिल्ली डेमोक्रेटिक एलायंस की तरफ से शुक्रवार शाम दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए छह प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की गई। दिल्ली डेमोक्रेटिक एलायंस में जनता पार्टी के साथ जनहित दल और दिल्ली जनता पार्टी शामिल हैं। नई दिल्ली विधानसभा सीट से आदित्य राय, बुराड़ी विधानसभा सीट से अनिल कुमार, तिमारपुर विधानसभा सीट से राकेश रंजन श्रीवास्तव, मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से ललित भाटी, मुंडका विधानसभा सीट से प्रवीण कुमार लकड़ा और नरेला विधानसभा सीट से श्रीमती श्यामो देवी को उम्मीदवार बनाया है। तिमारपुर विधानसभा को छोड़कर इन सभी छह प्रत्याशियों में से शेष सभी 5 सिविल डिफेंस वॉलंटियर हैं। यह पांचों प्रत्याशी उन दस हजार सिविल डिफेंस कर्मियों में से चुने गए हैं जो आज पिछले चौदह महीनों से अपनी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पार्टी की तरफ से कहा गया है कि हमने इन सिविल डिफेंस कर्मियों के संघर्ष को सदा सहयोग किया है और कोर्ट में इनके हक के लिए लड़ रहे हैं। हमारे साथी अंशुमन जोशी (अध्यक्ष-जनहित दल) वाले काफी समय से इस संघर्ष के साक्षी और सहयोगी हैं। 'आप' और कांग्रेस ने उतारे उम्मीदवार, भाजपा का इंतजार दिल्ली विधानसभा के लिए फरवरी 2025 में चुनाव होने हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी 2025 तक है। दिल्ली में अभी तक दिल्ली में चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सियासी दलों की चुनावी तैयारियां चरम पर हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने सबसे पहले दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। वहीं कांग्रेस ने 21 उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट जारी कर दी है। माना जा रहा है कि भाजपा भी अगले हफ्ते अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर सकती है। recent visitors 115

ईडी ने पांच दिसंबर को केजरीवाल पर मुकदमा चलाने के लिए एलजी से अनुमति मांगी थी, मिली अनुमति, बढ़ेगी मुश्किलें

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर मुकदमा चलाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय को मंजूरी दे दी है। ईडी ने पांच दिसंबर को केजरीवाल पर मुकदमा चलाने के लिए एलजी से अनुमति मांगी थी। ईडी ने बताया था कि उसे शराब नीति बनाने और उसके कार्यान्वयन में कथित तौर पर भ्रष्टाचार का पता चला है, जिसकी जांच के लिए उसने एलजी से इजाजत मांगी थी। इस साल 17 मई को राउज एवेन्यू कोर्ट में दायर प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) में एजेंसी ने इसका उल्लेख किया था। जिसपर कोर्ट ने 9 जुलाई को संज्ञान लिया। क्या है ईडी की शिकायत ईडी ने आप सुप्रीमो के तौर पर केजरीवाल के खिलाफ केस चलाने की उपराज्यपाल से इजाजत मांगी थी, जो उसे मिल गई है। ईडी ने अभियोजन शिकायत में आरोप लगाया है कि केजरीवाल ने 'साउथ ग्रुप' के सदस्यों के साथ मिलकर 100 करोड़ रुपये की रिश्वत ली और 'टेलर-मेड' शराब नीति तैयार और उसे लागू करके निजी संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाया। इसमें कहा गया है कि साउथ ग्रुप के लिए अलग-अलग शराब की दुकानों में हिस्सेदारी सुनिश्चित की गई और उसे आबकारी नीति 2021-22 के उद्देश्यों के विरुद्ध कई रीटेल जोन रखने की अनुमति दी गई। केजरीवाल हैं जिम्मेदार ईडी ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि अपराध की आय से मिले लगभग 45 करोड़ रुपये गोवा चुनावों में केजरीवाल की मिलीभगत और सहमति से पार्टी के प्रचार में इस्तेमाल किए गए। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि आप अपराध की आय की 'मुख्य लाभार्थी' थी। अंततः केजरीवाल, राष्ट्रीय संयोजक और राजनीतिक मामलों की समिति और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य होने के नाते, गोवा चुनावों के दौरान धन के उपयोग को लेकर जिम्मेदार हैं। आप ने क्या कहा इस मामले पर आप का कहना है कि 250 से अधिक छापे मारे गए लेकिन एक भी पैसा नहीं मिला। बीजेपी का मकसद केजरीवाल को कुचलना है। पार्टी ने कहा, 'तथाकथित शराब घोटाले की जांच दो साल तक चली, 500 लोगों को परेशान किया गया, 50,000 पन्नों के दस्तावेज दाखिल किए गए और 250 से अधिक छापे मारे गए, लेकिन एक भी पैसा नहीं मिला। विभिन्न अदालती आदेशों द्वारा मामले में कई तरह की खामियां उजागर की गईं। भाजपा का असली लक्ष्य किसी भी तरह से आप और अरविंद केजरीवाल को कुचलना है।' दो तरह से आरोपी हैं केजरीवाल अरविंद केजरीवाल दिल्ली की शराब नीति से जुड़े कथित घोटाले के मामले में दो तरह से आरोपी हैं। एक केस उनपर बतौर मुख्यमंत्री होने के नाते अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए नीति बनाने के आरोप में चल रहा है। इस मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से सितंबर में जमानत मिली थी। दूसरा केस, जिसकी हाल ही में अनुमति उपराज्यपाल से मिली है, वो आप के मुखिया होने के नाते है। इजाजत मिलने के बाद अब ईडी उनके खिलाफ मुकदमा चलाएगी। recent visitors 87