‘ब्रेन डेड’ युवक के अंगों से छह लोगों को मिलेगा जीवनदान, युवक के महत्वपूर्ण अंगों को हेलीकॉप्टर के जरिए जयपुर लाया गया

जयपुर राजस्थान में एक ‘ब्रेन डेड’ युवक के विभिन्न अंगों से कम से कम छह लोगों को नया जीवन मिलने जा रहा है। युवक के महत्वपूर्ण अंगों को झालावाड़ से हेलीकॉप्टर के जरिए जोधपुर और जयपुर लाया गया। राज्य में शायद यह पहली बार है जब जयपुर और जोधपुर में प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए अंगों को हेलीकॉप्टर से लाया गया। झालावाड़ जिले के मानपुरा पीपाजी निवासी विष्णु प्रसाद (33) 10 दिसंबर को हाथापाई में घायल हो गए थे। चिकित्सकों की एक टीम ने 12 दिसंबर को उन्हें ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया, जिसके बाद उनके परिजनों द्वारा दान किए गए अंगों को जोधपुर और जयपुर लाया गया। सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल के अधीक्षक डॉ. दीपक माहेश्वरी ने कहा, ‘‘एसएमएस अस्पताल में आज अंग प्राप्त हुए हैं और प्रत्यारोपण सर्जरी की जा रही है। एक किडनी, दो फेफड़े और हृदय जयपुर में जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित किए जाएंगे, जबकि एक किडनी और लिवर जोधपुर में प्रत्यारोपित किए जाएंगे।’’ झालावाड़ से अंगों को लेकर एक हेलीकॉप्टर जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज पहुंचा। यहां से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ‘ऑर्गन बॉक्स’ को एसएमएस अस्पताल पहुंचाया गया। हेलीकॉप्टर में ईंधन भरा गया और बाद में जोधपुर के लिए उड़ान भरी। अंगों को प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए जोधपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया जाएगा। झालावाड़ में न्यूरोसर्जन डॉ. रामसेवक योगी ने संवाददाताओं को बताया कि विष्णु प्रसाद को घायल अवस्था में उपचार के लिए 11 दिसंबर को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के दौरान युवक के दिमाग ने काम करना बंद (ब्रेन डेड) कर दिया। इसके बाद एक कमेटी बनाई गई, जिसमें युवक को ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया गया। झालावाड़ जिलाधिकारी अजय सिंह राठौड़ और अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों की मौजूदगी में मृतक के पिता तथा उसकी पत्नी अनीता की समझाइश की गई। वे अंगदान पर सहमत हो गए।   recent visitors 83

चंद्र अभियान की बनी योजना, 108 देशों की कक्षा 8 और 9 की लड़कियां भाग लेंगी

चेन्नई चंद्रयान की सफलता के बाद देश के बच्चों में भी उसके बारे में और अधिक जाने की उत्सकता बढ़ गई है इसको देखते हुए चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप कंपनी ने सितंबर 2026 तक महिलाओं द्वारा संचालित वैज्ञानिक चंद्र अभियान की योजना बनाई है। इस अभियान में 108 देशों की कक्षा 8 और 9 की लड़कियां भाग लेंगी। यह अभियान तकनीकी रूप से महत्वाकांक्षी है, बल्कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा। स्पेस किड्ज इंडिया चांद की सतह पर 80 किलोग्राम के भार वाला एक यान क्रैश लैंड कराने की योजना बना रहा है। इस यान में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक प्रोपल्सन मॉड्यूल शामिल किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य केवल चांद पर यान पहुंचाना नहीं, बल्कि 108 देशों की लड़कियों को सैटेलाइट तकनीक में प्रशिक्षित करना और उन्हें इस मिशन का हिस्सा बनाना है। अभियान के तहत जनवरी 2025 से 12 हजार लड़कियों को सैटेलाइट तकनीक का प्रशिक्षण ऑनलाइन दिया जाएगा। सितंबर 2025 तक हर देश से एक लड़की को चुनकर भारत लाया जाएगा। यहां वह स्पेस किड्ज इंडिया की टीम के साथ मिलकर चंद्रयान के निर्माण का हिस्सा बनेंगी। स्पेस किड्ज इंडिया ने इससे पहले भी फरवरी 2023 में आजादीसैट नामक सैटेलाइट मिशन का नेतृत्व किया था, जिसे भारत के 750 सरकारी स्कूलों की छात्राओं ने बनाया था। इसे इसरो के एसएसएलवी-डी2 रॉकेट से लॉन्च किया था। स्पेस किड्ज इंडिया का यह मिशन वसुधैव कुटुंबकम के संदेश को बढ़ावा देगा। अभियान पूरी तरह से लड़कियों द्वारा संचालित किया जाएगा। इस मिशन के लिए पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल किया जाएगा। इस मिशन पर अनुमानित खर्च 80 लाख से 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर आएगा। यह मुख्य रूप से कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंडिंग से संचालित होगा। स्पेस किड्ज इंडिया इसरो और अन्य वैश्विक एजेंसियों के साथ साझेदारी कर रही है ताकि बच्चों को प्रशिक्षित किया जा सके और मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके। अगर यह अभियान सफल होता है, तो यह भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। यह मिशन न केवल विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत की शक्ति को प्रदर्शित करेगा, बल्कि दुनिया भर में लड़कियों को विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करेगा। चेन्नई की यह स्पेस कंपनी अंतरिक्ष क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने के साथ विज्ञान के क्षेत्र में भारत को ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में काम कर रही है।   recent visitors 50

एमपी गजब: भाजपा अपराधियों पर मेहरबान एक साल से फरार आरोपी को बनाया अध्यक्ष

MP Amazing: BJP is kind to criminals, made an accused who was absconding for one year as its president भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा ने मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियां की हैं, लेकिन इन नियुक्तियों में भाजपा ने पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व की गाइडलाइन को दरकिनार कर दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि केन्द्रीय नेतृत्व की गाइडलाइन थी कि संगठन चुनाव में दागी को मंडल या जिला अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। फिर भी आलोट विधानसभा में जोगणिया माता मंडल का अध्यक्ष धोखाधड़ी मामले में फरार हरिसिंह गुर्जर को बना दिया गया। रतलाम जिले की आलोट विधानसभा के जोगणिया माता मंडल का अध्यक्ष नियुक्त किया है, उसका नाम हरिसिंह गुर्जर है। हरिसिंह गुर्जर चिटफंड मामले में एक साल से फरार है। वो एडीवी चिटफंड कंपनी का एजेंट था और उस पर बरखेड़ा के कैलाशचंद्र सेठिया से रुपए लिए, जिसे समय पूरा होने पर भी नहीं लौटाए। कोर्ट ने 2 दिसंबर को एडीवी एमडी राजेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह को 3 साल की सजा सुनाई। पुलिस ने हरिसिंह और रमेश ब्राह्मण को 19 दिसंबर 2023 से स्थायी फरार घोषित किया। हैरानी की बात तो ये भी है कि पुलिस ने जिस हरिसिंह गुर्जर को फरार घोषित किया था उसका मंडल अध्यक्ष बनाए जाने के बाद स्वागत किया गया। लेकिन फिर भी वो पुलिस को नजर नहीं आया। बता दें कि भाजपा ने रतलाम जिले के 25 में से 20 मंडल अध्यक्षों की सूची जारी की है जिसमें हरिसिंह गुर्जर का नाम भी है। recent visitors 303

कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा क्षेत्र के आनंद नगर में ऋषिपुरम, मानक विहार, हथाईखेड़ा खेड़ा में सड़क निर्माण का निरीक्षण किया

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा क्षेत्र के आनंद नगर में ऋषिपुरम, मानक विहार, हथाईखेड़ा खेड़ा में सड़क निर्माण का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण एजेंसी को निर्देश दिये कि सीसी रोड का निर्माण करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि वर्षा का पानी सड़क से रहवासियों के घरों में नहीं जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सड़क के दोनों तरफ नाली बनाए और पेपर ब्लॉक लगाये जाये। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि 15 करोड़ की लागत से सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है इसमें एक किलोमीटर की सीसी रोड और लगभग 3 किलोमीटर की डामर रोड बनाई जाएगी। साथ ही हथाईखेड़ा का ब्रिज भी नया बनाया जाएगा। निरीक्षण के दौरान स्थानीय जन प्रतिनिधि, सड़क निर्माण एजेंसी के अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।   recent visitors 91

सेवा भारती ने समाज सेवा को अपने जीवन का ध्येय बना चुके है ऐसे 25 विभूतियों को किया सम्मानित

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि सेवाभारती समाज में उपेक्षित एवं वंचित वर्गों के उत्थान के जिस कार्य में लगी है उससे नि:संदेह भारत को पुन: विश्वगुरू बनने और समावेशी भारत बनाने में सहयोग प्राप्त होगा। डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित सेवा सम्मान कार्यक्रम में शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। जय भारत मारुति लि. (जेबीएम) के सीएमडी सुरेन्द्र आर्य ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकारों के साथ राष्ट्र के जागृत लोगों को भी समाज के समावेशी विकास में कार्य करना पड़ेगा। एकात्म मानवतावाद एवं अंत्योत्य के जिन विचारों के साथ सेवा भारती के कार्यकर्ता कार्य कर रहे हैं वो निसंदेह सराहनीय है। राजनाथ सिंह ने सभी सम्मान प्राप्त विभूतियों को बधाई दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने कहा कि सेवा ही वो कार्य है जिससे समाज में असमानता की खाई को कम किया जा सकता है। आलोक कुमार जी शनिवार को नई दिल्ली में सेवा भारती द्वारा आयोजित सेवा सम्मान 2024 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आलोक कुमार ने कहा कि सेवा ही वो कार्य है जिससे समाज में असमानता की खाई को कम किया जा सकता है। ये एक ईश्वरीय कार्य है जिसमें समाज के हर वर्ग को जुड़ना चाहिए। सेवा भारती को अगले वर्ष 4 गुना ज्यादा लोगों को सेवा सम्मान देना चाहिए, ताकि सेवाभावियों का उत्साह कई गुणा बढ़ जाए। उन्होंने कहा कि पुराणों में कहा गया है कि परोपकार करना पुण्य है और दूसरों को परेशान करना पाप है। जो लोग किसी चीज से वंचित हैं, उसे प्राप्त करवाना पुण्य का काम है। सेवा भारती का मानना है कि व्यक्तिगत स्तर पर सेवा की जानी चा‌हिए और इसमें समरसता का भाव होना चाहिए। सेवा भारती द्वारा सेवा सम्मान के माध्यम से ऐसे महानुभावों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया जाता है जो समाज सेवा को अपने जीवन का ध्येय बना चुके है। इस वर्ष 10 श्रेणियों में 25 लोगों को सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया। जिन विभूतियों को सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया उनमें बद्री भगत झण्डेवाला टेम्पल सोसाइटी एवं स्व. सुभाष गुप्ता (मरणोपरांत) को सेवा रत्न से सम्मानित किया गया। यशपाल गुप्ता, वेद कुमार वढ़ेरा, तुषार गुप्ता, सरदार हरमनजीत सिंह, अजय गुप्ता, पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड, सत्यभूषण जैन, डॉ. संजय सचदेवा, भाऊराव देवरस सेवा न्यास, साहिल मेंदीरत्ता, सान्या मेंदीरत्ता, संजय दत्ता, सीमा गुप्ता, सौरभ गर्ग, जादूगर सम्राट शंकर, बजरंग लाल अग्रवाल, गोपाल वर्मा, राकेश गुप्ता, संजीव मोंघा, सुभाष चंदर अग्रवाल, अंजू जैन, अलका बैगानी तथा सरदार नरेन्द्र सिंह चहल को सेवा भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि सेवा भारती समाज में विभिन्न सेवा प्रकल्पों का संचालन करने वाली संस्था है। सेवा भारती 1979 से समाज सेवा में कार्यरत है। सेवा भारती द्वारा शिक्षा, चिकित्सा, स्वरोजगार, महिला स्वावलंबन, कुष्ट निवारण, अनाथ बच्चों की देखभाल और बालवाड़ी सहित अनेक सेवा कार्य किए जा रहे है। सेवा भारती देशभर में 1 लाख 80 हजार सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में विभिन्न स्तर पर सेवा प्रदान करती है।   recent visitors 84

आज 3-3 महामिसाइल बनाकर पूरी दुनिया को चुनौती दे रहा है भारत, जो अमेरिका बनाने के लिए संघर्ष कर रहा

नई दिल्ली सपने अक्सर उन्हीं के सच होते हैं, जो उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं. दुनियाभर में ताकत का प्रतीक माना जाने वाला अमेरिका भी आज हाइपरसॉनिक मिसाइल बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है. लेकिन भारत जो कभी तकनीकी क्षमता में दुनिया की दौड़ में पीछे समझा जाता था, वही आज 3-3 महामिसाइल बनाकर पूरी दुनिया को चुनौती दे रहा है. प्रोजेक्ट ध्वनि के तहत हाइपरसॉनिक मिसाइल तकनीकी क्षमता में पीछे रहने वाले देश को आज दुनिया की अग्रणी सूची में गिना जाता है. इसका श्रेय भारत के वैज्ञानिकों का जुनून और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की मेहनत को जाता है. DRDO के वैज्ञानिकों ने प्रोजेक्ट ध्वनि के तहत ऐसे हाइपरसॉनिक हथियार बनाए है, जिन्हें रोक पाना अब नामुमकिन है. ध्वनि की गति से भी तेज होते हैं हाइपरसॉनिक मिसाइल दरअसल, हाइपरसॉनिक मिसाइल उन हथियारों को कहा जाता है जो कि ध्वनि की गति से पांच गुणा तेज यानी 6,200 प्रति घंटे की रफ्तार से उड़कर अपने लक्ष्य पर हमला करते हैं. इनकी तेज रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खासियत के बदौलत ये हाइपरसॉनिक मिसाइल बेहद खतरनाक हो जाते हैं, जिसे कोई भी रडार पकड़ नहीं सकता है. DRDO की यह हाइपरसॉनिक तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है. हाइपरसॉनिक मिसाइल रॉकेट इंजन के जरिए लॉन्च होता है और वातावरण में 6 से 7 Mach की गति से उड़ता है. वहीं, 1,500 किलोमीटर से अधिक की रेंज में पेलोड ले जाने में सक्षम है. भारत के तीनों सेनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है हाइपरसॉनिक मिसाइल ध्वनि की गति से 5 गुना तेज उड़ने, किसी भी रडार के पकड़ में न आने वाली खासियत से यह हाइपरसॉनिक मिसाइल भारत की तीनों सेना (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के लिए अत्यंत उपयोगी है. इसमें मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल होता है, जो उड़ान के दौरान मिसाइल की गति को बनाए रखता है. भारत का ब्रह्मोस-2 इस हाइपरसॉनिक तकनीक का सटीक उदाहरण है. बता दें कि DRDO अभी तीन अलग-अलग डिजाइनों पर काम कर रहा है. पाकिस्तान और चीन की अब खैर नहीं उल्लेखनीय है कि भारत ने एक बार गलती से पाकिस्तान की ओर एक ब्रह्मोस मिसाइल दाग दी थी, जिसे पाकिस्तान ट्रैक नहीं कर पाया था. वहीं, अब ब्रह्मोस-2 और प्रोजेक्ट ध्वनि की हाइपरसॉनिक मिसाइलों के सामने पाकिस्तान तो क्या चीन और अमेरिका के डिफेंस सिस्टम भी पूरी तरह से बेबस नजर आ रहे हैं. जहां अमेरिका अब तक अपने हाइपरसॉनिक प्रोग्राम को सफलता नहीं दिला पाया, वहीं भारत रूस के साथ मिलकर इस तकनीक में महारथ हासिल कर ली है. recent visitors 86

मौत का हॉटस्पॉट बनीं राजधानी भोपाल की कई सड़कें

Many roads of the capital Bhopal have become hotspots of death भोपाल । राजधानी भोपाल की कुछ सड़के ऐसी है जो मौत का हॉटस्पॉट बन चुकी है। जहां आए दिन हादसे होते हैं और लोगों की मौत हो जाती है। इस साल दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, क्योंकि पिछले साल की तुलना में इस साल 2,435 सड़क दुर्घटनाओं में 193 लोगों की जान चली गई। यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 31 अक्टूबर के बीच 1,865 लोग घायल भी हुए। 2023 में, 2,498 सड़क दुर्घटनाओं में 155 लोग मारे गए, जबकि इसी अवधि के दौरान शहर में 1,917 लोग घायल हुए। यातायात पुलिस ने कहा कि इस साल दर्ज की गई घातक सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण तेज गति थी। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि शहर की सड़कें उनकी हाई-एंड बाइक और एसयूवी को तेज गति से चलाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, जिनकी अधिकतम गति 150-200 किमी प्रति घंटा है। एक बार फिर, मिसरोद पुलिस स्टेशन का अधिकार क्षेत्र सड़क दुर्घटना में घायलों के मामले में शहर का सबसे घातक क्षेत्र बनकर उभरा। क्या कह रहे आंकड़े? ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से 31 अक्टूबर के बीच मिसरोद में सड़क हादसों में 22 लोगों की मौत हुई, जो शहर में सड़क हादसों में मरने वालों की सबसे अधिक संख्या है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने मिसरोद क्षेत्र में होशंगाबाद रोड को अत्यधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। दुर्घटनाओं के प्राथमिक कारणों में सड़क के डिवाइडर पर कट पॉइंट और आवासीय कॉलोनियों को मुख्य हाईवे से जोड़ने वाली सड़कें शामिल हैं।  बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने से स्थिति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन सड़क के चौड़ीकरण से वाहनों की गति बढ़ गई है। कई दुर्घटनाएं इसलिए होती हैं क्योंकि आस-पास की कॉलोनियों के निवासी बिना सामने से आने वाले तेज रफ्तार वाहनों देखे लापरवाही से हाईवे पर एंट्री करते हैं। पुलिस मानती है कि ड्राइवरों को पूरी तरह से रुककर सुनिश्चित करना चाहिए कि सड़क साफ है, तो उसके बाद ही हाईवे पर आगे बढ़ना चाहिए। मिसरोद पहले स्थान पर, यहां सबसे ज्यादा मौत सड़क दुर्घटनाओं के मामले में मिसरोद के बाद खजूरी क्षेत्र का स्थान आता है। जब इस अवधि के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 20 लोगों की जान चली गई। यहां भोपाल-इंदौर हाईवे, भौरी बायपास और गांव की सड़कों को दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। रातीबड़ तीसरा सबसे घातक क्षेत्र बन गया है। जहां इस साल जनवरी से अक्टू‌बर तक सड़क दुर्घटनाओं में 13 लोगों की मौत हुई है। इसके बाद कोह-ए-फिजा का स्थान है, जहां सड़क दुर्घटनाओं में 11 लोगों की जान गई, इसके बाद बैरागढ़ और बाग सेवनिया का स्थान है, जहां इस साल सड़क दुर्घटनाओं में 10-10 लोगों की मौत हुई। चालान भी पिछली बार से अधिक एक वरिष्ठ यातायात अधिकारी ने बताया कि यातायात पुलिस ने इस साल 2024 में अब तक यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के 63,318 चालान जारी किए हैं, जो इसी अवधि के दौरान 2023 में जारी किए गए चालानों से अधिक है। इस साल हेलमेट न पहनने पर 34,000 से अधिक लोगों पर जुर्माना लगाया गया, जबकि सीटबेल्ट न पहनने पर 8,800 से अधिक लोगों पर जुर्माना लगाया गया। सख्ती के बावजूद लोग यातायात नियमों का उलंघन कर रहे है। सड़कों की इंजीनियरिंग में हुई गलतियों से हो रहे हादसे, होगा विश्लेषण यातायात डीसीपी संजय सिंह का कहना है कि शहर में होने वाली लगभग 90 प्रतिशत घातक सड़क दुर्घटनाओं में तेज गति मुख्य कारण पाई गई है। इसके अलावा यातायात नियमों और सुरक्षा उपायों का पालन करने में लापरवाही दुर्घटनाओं का कारण बनती है। प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ, वाहन अधिक से अधिक एडवांस होते जा रहे हैं। लोग यह महसूस किए बिना उन्हें तेज गति से चलाते हैं कि शहर की सड़कें इतनी तेज गति के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण एजेंसियों, बीएमसी, पीडब्ल्यूडी, जिला प्रशासन और यातायात पुलिस की संयुक्त टीमें शहर की सड़कों पर सड़क इंजीनियरिंग में हुई गलतियों का विश्लेषण करेंगी और समस्याओं को दूर करने के लिए काम करेंगी। पुलिस ने दी समझाइश पुलिस ने कहा कि यदि सड़क दुर्घटना होती है, तो घायलों को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। तत्काल चिकित्सा देखभाल से जान बच सकती है। लोगों को सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करनी चाहिए, यदि वे क्षेत्र से गुजरते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को दोपहिया या कार चलाते समय हमेशा हेलमेट और सीट बेल्ट पहनना चाहिए। शराब पीकर गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। recent visitors 113