टेस्ट सीरीज के तीसरे मुकाबले का दूसरे दिन का खेल समाप्त, रहा ट्रेविस हेड-स्टीव स्मिथ के नाम, ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी

ब्रिस्बेन भारत और ऑस्ट्रेल‍िया के बीच बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी (BGT) 2024-25 के तहत पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है. टेस्ट सीरीज का तीसरा मुकाबला ब्रिस्बेन के गाबा में है. मुकाबले में दूसरे दिन (15 दिसंबर) का खेल समाप्त हो चुका है. दूसरे दिन स्टम्प तक ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपनी पहली पारी में सात विकेट के नुकसान पर 405 रन बना लिए. एलेक्स कैरी 45 और मिचेल स्टार्क 7 रन बनाकर नाबाद हैं. ऑस्ट्रेलिया के लिए ट्रेविस हेड (152) और स्टीव स्मिथ (101) ने शतकीय पारियां खेलीं. जबकि भारत की ओर से जसप्रीत बुमराह ने अब तक पांच विकेट लिए हैं. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गाबा के मैदान पर इससे पहले सात टेस्ट मैच खेले गए थे. इस दौरान भारतीय टीम को 5 में हार मिली और एक मुकाबला ड्रॉ रहा. गाबा में भारतीय टीम को इकलौती टेस्ट जीत जनवरी 2021 में मिली थी. तब उसने ऑस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हराया था. ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी की हाइलाइट्स इस मुकाबले में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला क‍िया था. हालांकि पहले द‍िन बार‍िश ने जमकर तांडव काटा. पहले दिन महज 13.2 ओवर्स का ही खेल हुआ. इन 80 गेंदों के खेल के दौरान ऑस्ट्रेलियाई ओपनरों ने सधी बल्लेबाजी की और 28 रन बनाए. यानी पहले दिन कंगारू टीम को कोई नुकसान नहीं हुआ. दूसरे दिन के खेल में जल्द ही भारत को शुरुआती सफलता मिल गई, जब उस्मान ख्वाजा ने जसप्रीत बुमराह की गेंद पर विकेटकीपर ऋषभ पंत को कैच थमा दिया. ख्वाजा ने तीन चौके की मदद से 21 रन बनाए. फिर बुमराह ने दूसरे ओपनर नाथन मैकस्वीनी (9 रन) को भी चलता कर दिया. मैकस्वीनी का कैच दूसरी स्लिप पर विराट कोहली ने लपका. इसके बाद स्टीव स्मिथ और मार्नस लाबुशेन के बीच तीसरे विकेट के लिए 37 रनों की पार्टनरशिप हुई, जिसे नीतीश कुमार रेड्डी ने तोड़ा. नीतीश ने मार्नस लाबुशेन (12) को दूसरी स्लिप में विराट कोहली के हाथों कैच आउट कराया. 75 रनों पर तीन विकेट गिरने के बाद स्टीव स्मिथ और ट्रेविस हेड की जोड़ी क्रीज पर जम गई. दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 245 रनों की पार्टनरशिप हुई. इस दौरान दोनों बल्लेबाजों ने अपने-अपने शतक जड़े. हेड ने टेस्ट करियर का 9वां और भारत के खिलाफ तीसरा शतक जड़ा. हेड ने एडिलेड टेस्ट में भी शतक जड़ा था. वहीं स्मिथ ने अपने टेस्ट करियर का ये 33वां और भारत के खिलाफ 10वां शतक लगाया. इस बड़ी पार्टनरशिप का अंत जसप्रीत बुमराह ने किया. बुमराह ने नई गेंद से पहले स्टीव स्मिथ को चलता किया, जो रोहित शर्मा को कैच थमा बैठे. स्मिथ ने 190 गेंदों पर 101 रनों की पारी खेली, जिसमें 12 चौके शामिल रहे. फिर बुमराह ने एक ही ओवर में मिचेल मार्श और ट्रेविस हेड को आउट करके 'पंजा' खोला. मार्श 5 रन बनाकर विराट कोहली को कैच थमा बैठे. जबकि ट्रेविस हेड का कैच विकेटकीपर ऋषभ पंत ने लपका. हेड ने 160 गेंदों का सामना करते हुए 152 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 18 चौके जड़े. विकेट पतन: 1-31 (उस्मान ख्वाजा, 16.1 ओवर), 2-38 (नाथन मैकस्वीनी, 18.3 ओवर), 3-75 (मार्नस लाबुशेन, 33.2 ओवर), 4-316 (स्टीव स्मिथ, 82.6 ओवर), 5-326 (मिचेल मार्श , 86.2 ओवर), 6-327 (ट्रेविस हेड, 86.5 ओवर), 7-385 (पैट कमिंस, 97.5 ओवर) हेड के आउट होने के बाद पैट कमिंस और विकेटकीपर बल्लेबाज एलेक्स कैरी के बीच सातवें विकेट के लिए 58 रनों की पार्टनरशिप हुई, जिसने ऑस्ट्रेलिया को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया. मोहम्मद सिराज इस पार्टनरशिप को तोड़ने में सफल रहे. सिराज ने कमिंस (20 रन) को विकेटकीपर पंत के हाथों कैच आउट कराया.   recent visitors 102

बुंदलेखंड में ठंड का कहर, बर्फ जमना हुई शुरू, मौसम विभाग का अलर्ट

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड रीजन के नौगांव में इस समय तेज ठंड पड़ रही है. यहां का पारा 4.1 डिग्री सेल्सियस चला गया है. छतरपुर ! मध्य प्रदेश में इन दिनों ठंड ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है. प्रदेश के ज्यादातर जिलों में पारा गिरा है. जिसके चलते कड़ाके की ठंड पड़ रही है. वहीं बात अगर बुंदेलखंड अंचल की करें तो यहां भी ठंड बहुत बढ़ी है. छतरपुर जिले के नौगांव में सर्दी चरम सीमा पर पहुंच गई है. शनिवार की सुबह तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया. बुंदेलखंड का नौगांव ठंड का केंद्र बना हुआ है. हर दिन ठंड बढ़ रही है. तापमान में भौगोलिक स्थिति का असरछतरपुर जिले के नौगांव और खजुराहो में भौगोलिक स्थिति व ग्रेनाइट पत्थर का बड़ा असर होता है. अंग्रेजों के द्वारा बसाए नौगांव नगर की भौगोलिक स्थिति ही सबसे ज्यादा ठंड व गर्मी की वजह है. इसके साथ ही ग्रेनाइट के पहाड़ों के चलते भी मौसम का असर बढ़ जाता है. इसी तरह खजुराहो में भी भौगोलिक स्थिति व ग्रेनाइट के पहाड़ों के कारण सर्दी और गर्मी का असर आसपास के इलाके से एक से दो डिग्री अधिक बढ़ जाता है. कर्क रेखा के उत्तर में नौगांव विशेष स्थान पर बसा है. जिससे सूर्य की किरणें कम प्रभाव से पहुंचती है. जिससे ज्यादा ठंडा होती है. इसके साथ ही हिमाचल से आने वाली उत्तर पूर्वी हवाएं पहले पहुंचती है, इसलिए ठंड अधिक होती है. वहीं, नौगांव के नीचे चट्टानी मिट्टी की पथरीली परत है, जो जमीन की ऊर्जा विचरण की क्षमता को प्रभावित करती है. नौगांव में लुढ़का पारा, बाइक के ऊपर जमी बर्फजिले में ठंड दिनों-दिन कहर ढहा रही है. मैदानी इलाकों में भी बर्फ जमने लगी है. उमरिया मंदिर रोड निवासी विक्रम सिंह परिहार ने बताया कि “शनिवार सुबह 5:30 बजे जब वे किसी काम से निकले, तो उनकी बाइक की सीट पर बर्फ की परत जमी हुई थी. उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया, जिसमें सुबह 5:32 का समय और 14 दिसंबर 2024 की तारीख दर्ज है.” नौगांव और इसके आस-पास के क्षेत्रों में ठंड का असर लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में मौसम वैज्ञानिक ने लोगों को सतर्क रहने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है. recent visitors 187

मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर दिखेंगी जल्द सरकारी बसें फर्राटे भरते

मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एकदम से चरमरा गई है। दो दशक पहले जहां सड़कों पर राज्य परिवहन निगम की बसें फर्राटे भरती दिखाई देती थी वहीं अब निजी बसों का बोलबाला है। तनाकुलित तथा स्लीपर कोच बसें तक प्रदेश की सड़कों पर दौड़ रही है। राज्य परिवहन की बसें प्रदेश के विभिन्न शहरों को जोड़ने के अलावा दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक यात्रियों को लाती ले जाती थी। भोपाल। राज्य परिवहन निगम की इन बसों में जहां किराया वाजिब था तो वहीं विशिष्ट जनों व पत्रकारों के लिए पास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती थी। राज्य परिवहन निगम के संचालक मंडल में पहले नेताओं को रखा जाता था और अध्यक्ष का पद नौकरशाहों के जिम्में में होता था। एक बार का दिलचस्प वाकया है तब राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष एक नौकरशाह थे किसी पत्रकार ने अनौपचारिक चर्चा में उनसे पूछ लिया कि आपने बसों में यात्रा कब से नहीं की तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया था की आखिरी बस यात्रा 15 साल पहले की थी, इस चर्चा के बाद अध्यक्ष महोदय ने समस्त डिपो प्रबंधकों को यह निर्देश दिया कि वह महीने में दो बार बसों में यात्रा करें और यात्रियों से फीडबैक ले कर व्यवस्था सुचारू करें। इसके साथ ही अध्यक्ष ने स्वयं भी हर महीने बस में सफर करना शुरू कर दिया बाद में राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष पद पर नेताओं को पदस्थ किया जाने लगा और यही से पूरे सिस्टम में दीमक लगना शुरू हो गया। जिन डिपो प्रबंधकों को राज्य परिवहन निगम अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष से अच्छी सेटिंग होती थी वहां मनमानियां करने लगे। दूसरे राज्यों में जाने वाली बसों में उन्ही ड्राइवर व कंडक्टरों को भेजा जाने लगा जो वापसी पर अच्छी खासी रकम उनको भेंट कर सके क्योंकि राज्य की सीमा पार करने के बाद टिकट चेकिंग का कोई डर नहीं, लोकल सवारियों लो और अपनी जेब गर्म करो वाला सिद्धांत चलता था। दूसरे राज्यों में स्थित राज्य परिवहन निगम के डिपो प्रबंधकों के रोस्टर पर अपने नाते रिश्तेदारों को रख लिया जो केवल वेतन लेते थे काम नहीं करते थे। राज्य परिवहन निगम के एक उपाध्यक्ष ने जब विधानसभा का चुनाव लड़ा तो डिपो प्रबंधकों ने उनके चुनावी खर्च में हिस्सेदारी की, किसी डिपो प्रबंधक ने पोस्टर का खर्च उठाया तो किसी ने विज्ञापनों के लिये भुगतान किया। इस तरह की व्यवस्था ने तथा भ्रष्टाचार ने राज्य परिवहन निगम को खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और आखिरकार 2005 में राज्य परिवहन निगम को बंद करना पड़ा हालांकि इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। राज्य परिवहन निगम बंद होने का फायदा निजी बस मालिकों ने उठाना शुरू किया यह वह समय था जब दिग्विजय सिंह की सरकार का दूसरा कार्यकाल चल रहा था। दिग्गी सरकार घाटा बताती रही और भाजपा सरकार ने राज्य परिवहन निगम पर ही ताला लगा दिया और कुछ कर्मचारियों को वीआरएस देकर घर बैठा दिया तो कुछ कर्मचारियों को दूसरे विभागों में स्थानांतरित कर दिया गया। खैर यह तो राज्य परिवहन निगम का हाल हुआ उधर निजी बस ऑपरेटर की मनमानी बढ़ने लगी। बस में क्षमता से अधिक यात्री भरना निर्धारित किराए से ज्यादा वसूलना, सवाल करने पर यात्रियों से बदसलूकी करना, यहां तक की मारपीट की नौबत आना इत्यादि। शहरी इलाकों में तो फिर भी ठीक-ठाक मगर ग्रामीण क्षेत्रों में हालत ज्यादा खराब हो गए और लोग परेशान हो गए। राज्य परिवहन निगम बंद हो जाने के बाद भी जिन राज्यों से अंतर राज्य समझौता था उनकी बसे एमपी में आती रही। निजी ऑपरेटर इनका भी विरोध करने लगे। बहरहाल अब मोहन यादव की सरकार ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को 19 साल बाद फिर से शुरू करने का संकेत दिया है तदनुसार लोक परिवहन सेवा का प्रारूप तैयार कर कैबिनेट में पेश किया जाएगा फिर उस पर अमल होना शुरू होगा वैसे अभी यह तय नहीं है कि लोक परिवहन का संचालन किस तरह होगा महाराष्ट्र का मॉडल अपनाया जाए या पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर अमल किया जाए यह फैसला भी हो जाएगा। recent visitors 176

बेंगलुरु पुलिस ने अतुल सुभाष की पत्नी निकिता सिंघानिया को किया अरेस्ट, प्रयागराज से सास-साला धर दबोचे

गुरुग्राम बेंगलुरु में कथित तौर पर पत्नी द्वारा उत्पीड़न से तंग आकर खुदकुशी करने वाले एआई इंजीनियर अतुल सुभाष की पत्नी निकिता सिंघानिया को बेंगलुरु पुलिस ने रविवार को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, निकिता के मां और भाई को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु की व्हाइट फील्ड डिवीजन की डीसीपी शिवकुमार ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया को हरियाणा के गुरुग्राम से और उसकी मां निशा और भाई अनुराग को प्रयागराज से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार किया गया। अधिकारी ने कहा कि आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। निकिता और उसके परिवारवालों पर पर अतुल के खिलाफ मामला वापस लेने के लिए 3 करोड़ रुपये और बेटे का मुंह दिखाने के लिए 30 लाख रुपये रुपये मांगने का आरोप है। वार्ता के अनुसार, अतुल सुभाष खुदखुशी मामले में गिरफ्तारी से बचने को रात के अंधेरे में फरार होने के बाद आरोपियों ने 12 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। बता दें कि, मृतक के भाई विकास ने 9 दिसंबर को बेंगलुरु के मराठाहल्ली थाने में भाई की पत्नी और ससुरालवालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले में वॉन्टेड मृतक की पत्नी निकिता और उसके परिवार के लोगों को समन भेजकर तीन दिन में थाने में हाजिर होने को कहा था। मुकदमे वापस लेने को 3 करोड़, बेटा दिखाने को 30 लाख की थी मांग अतुल सुभाष के भाई विकास ने आरोप लगाया था कि अतुल की पत्नी निकिता और ससुराल वालों ने मुकदमा वापस लेने के लिए 3 करोड़ और इकलौते बेटे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये की मांग की थी। यही वजह और मुकदमों से परेशान होकर अतुल सुभाष ने बेंगलुरु में आत्महत्या कर ली थी। विकास ने बताया था कि अतुल और निकिता की 2019 में शादी हुई थी। भाई से पैसे ऐंठने को निकिता, उसकी मां निशा, भाई अनुराग व चाचा ससुर सुशील ने पूरे परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाया और अत्यधिक मानसिक और शारीरिक तनाव दिया। निकिता और उसके परिवार ने मेरे भाई अतुल के खिलाफ कई झूठे मामले दर्ज कराए और उन मामलों को बंद करने के लिए आरोपी 3 करोड़ रुपये की मांग कर रहे थे। मेरे भाई को अपने बच्चे को देखने और उससे मिलने के लिए भी 30 लाख रुपये की मांग की जा रही थी। विकास ने कहा कि जौनपुर अदालत की सुनवाई के दौरान भाई अतुल के बयानों का मजाक उड़ाकर उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाया गया और कहा गया या तो अतुल को उन्हें 3 करोड रुपये देने चाहिए या आत्महत्या कर लेनी चाहिए। गौरतलब है कि, 34 वर्षीय अतुल सुभाष ने 9 दिसंबर को बेंगलुरु में कथित तौर पर अलग रह रही अपनी पत्नी निकिता सिंघानिया और ससुरालवालों के उत्पीड़न के कारण आत्महत्या कर ली थी। निकिता, उसकी मां निशा, भाई अनुराग और चाचा सुशील के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। recent visitors 76

अगर पेंशन किसी वजह से रुकी हो या उसमें देरी हुई हो तो सरकार देगी एरियर, कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी होगी तय

भोपाल राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में देरी और पेंशन रुकने की स्थिति में एक अहम निर्णय लिया है। अब पेंशनरों को पेंशन के साथ-साथ एरियर (बकाया राशि) भी दी जाएगी, अगर पेंशन किसी वजह से रुकी हो या उसमें देरी हुई हो। इस नए नियम के तहत जितने महीने की पेंशन रुकी होगी, उतने महीने का एरियर भी पेंशनर को दिया जाएगा। राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जिन पेंशन योजनाओं के तहत पेंशन का भुगतान असफल रहा है, या पेंशन स्वीकृति में विलंब हुआ है, उन्हें एरियर के साथ भुगतान किया जाएगा। सामाजिक न्याय विभाग ने यह निर्देश जारी किया है कि अब से इस तरह के भुगतान को ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा, जिससे हितग्राही की पात्रता की पुष्टि की जा सके। पेंशनर की पेंशन रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।   जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई इस नए प्रविधान के तहत अगर किसी अधिकारी की वजह से पेंशन रुकी है या विलंब हुआ है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही अगर पेंशन स्वीकृति में अनावश्यक देरी हुई, तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय पेंशन योजनाओं के सुचारू और समय पर भुगतान को सुनिश्चित करेगा। अधिकारियों के स्तर पर एरियर की स्वीकृति नगर निगम, नगरीय निकाय और पंचायत क्षेत्रों में पेंशन के एरियर की स्वीकृति संबंधित अधिकारियों द्वारा दी जाएगी। इसके लिए सामाजिक न्याय विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है, जो एरियर स्वीकृति की प्रक्रिया को पूरा करेंगे। कौन-कौन सी योजनाएं प्रभावित होंगी इस नए प्रविधान का असर 12 प्रमुख सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं पर पड़ेगा। जिनमें शामिल हैं…     इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना     इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना     इंदिरा गांधी राष्ट्रीय नि:शक्त पेंशन योजना     कन्या अभिभावक पेंशन योजना     मंदबुद्धि और बहुविकलांग को आर्थिक सहायता     सामाजिक सुरक्षा वृद्धावस्था पेंशन योजना     सामाजिक सुरक्षा परित्यक्ता पेंशन योजना     सामाजिक सुरक्षा नि:शक्त पेंशन योजना     दिव्यांग शिक्षा प्रोत्साहन सहायता राशि     वृद्धावस्था में निवासरत अंत:वासियों की पेंशन     मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा कल्याणी पेंशन योजना     मुख्यमंत्री अविवाहिता पेंशन योजना   recent visitors 35

प्रदूषण को रोकने के लिए ग्रेप-2 के नियम हुए सख्त, अन्य डीजल इंजन बसों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाई

नई दिल्ली दिल्ली सहित एनसीआर में सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) दो, तीन और चार के प्रावधानों को संशोधित किया है। इसके तहत ग्रेप तीन के कुछ प्रावधानों को ग्रेप दो शामिल कर उसे सख्त बनाया गया है। इसके तहत बीएस छह डीजल इंजन, इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों को छोड़कर एनसीआर के रास्ते दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले अन्य डीजल इंजन बसों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पहले यह प्रावधान ग्रेप तीन में शामिल था। लेकिन अब सीएक्यूएम ने इसे ग्रेप दो में शामिल कर दिया है। मौजूदा समय में दिल्ली एनसीआर में ग्रेप दो के प्रावधान लागू हैं। इसलिए ग्रेप दो में शामिल नए प्रावधान भी तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। सीएक्यूएम ने दिल्ली और एनसीआर से संबंधित राज्यों के परिवहन विभाग, पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और संबंधित एजेंसियों को इस पर अमल करने का निर्देश दिया है। सीएक्यूएम के अनुसार सर्दी के मौसम में लंबे समय तक हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रहती है। ग्रेप के प्रावधानों में कुछ अहम संशोधन किए गए इसके मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ग्रेप के प्रावधानों में कुछ अहम संशोधन किए गए हैं और ग्रेप तीन के शुरुआती तीन प्रावधानों को ग्रेप दो में शामिल कर दिया गया है। इसके तहत चिन्हित सड़कों की प्रतिदिन मशीन से सफाई और पानी का छिड़काव करना होगा। इसके लिए मशीनों की कार्य अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। सभी हाट स्पाट व वाहनों के अधिक दबाव वाले सड़कों पर धूल की रोकथाम लिए पानी में रसायन मिलाकर प्रतिदिन छिड़काव करना होगा। ठंड से बचाव के लिए इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराने के निर्देश सार्वजनिक परिवहन की मजबूती के लिए सीएनजी व इलेक्ट्रिक बसें और मेट्रो के फेरे बढ़ाने के साथ-साथ सुबह-शाम व्यस्त और गैर व्यस्त समय के लिए अलग-अलग किराए का प्रावधान करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही सीएक्यूएम ने सभी आरडब्ल्यूए को सुरक्षा कर्मचारियों के अलावा सफाई, बागवानी के कर्मचारियों को भी ठंड से बचाव के लिए इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। ताकि कर्मचारी ठंड से बचाव के लिए लकड़ी, उपले या कूड़ा न जलाएं। ग्रेप तीन में ये प्रतिबंध होंगे लागू     ग्रेप तीन में दिव्यांग लोगों को दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जिले में व्यक्तिगत जरूरत के लिए बीएस तीन पेट्रोल इंजन और बीएस चार डीजल इंजन के हल्के वाहन (कार) का इस्तेमाल की छूट रहेगी।     दिल्ली में माल ढुलाई के लिए बीएस चार के डीजल इंजन वाले एमजीवी (मीडियम गूड्स व्हीकल) पर प्रतिबंध रहेगा। इस प्रतिबंध से सिर्फ आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छूट रहेगी।     दिल्ली से बाहर पंजीकृत बीएस चार और उससे कम मानक के डीजल इंजन वाहनों को ग्रेप तीन के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश वर्जित रहेगा। पहले ये प्रावधान चौथे चरण में शामिल थे।     ग्रेप तीन में दिल्ली एनसीआर के स्कूल पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई हाइब्रिड मोड में करा सकते हैं। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार आनलाइन या आफलाइन क्लास का विकल्प चयन कर सकते हैं।     ग्रेप चार में स्कूल छठवीं से नौवीं व 11वीं की कक्षा भी हाइब्रिड मोड में चला सकते हैं। ग्रेप तीन में दिल्ली सरकार और एनसीआर से संबंधित राज्य सरकारें सरकारी विभागों व सिविक एजेंसियों के कार्यालय के समय में बदलाव कर सकती हैं।     आने वाले समय में जब भी ग्रेप तीन व चार लागू होंगे तो उसमें शामिल नए प्रावधानों का पालन संबंधित एजेंसियों को सुनिश्चित करना होगा। हवा की गुणवत्ता के आधार पर लगते हैं ग्रेप के प्रावधान     एयर इंडेक्स खराब श्रेणी- 201-300: ग्रेप एक     एयर इंडेक्स बेहद खराब श्रेणी- 301-400: ग्रेप दो     एयर इंडेक्स गंभीर श्रेणी- 401-450: ग्रेप तीन     एयर इंडेक्स खतरनाक श्रेणी-450 से अधिक: ग्रेप चार   recent visitors 84

अध्ययन में पाया गया कि पैरासिटामोल के कारण वृद्ध लोगों में पाचन तंत्र, हृदय और गुर्दे पर पड़ता दुष्प्रभाव

नई दिल्ली चिकित्सक की पर्ची के बिना मिलने वाली दवाओं में शामिल पैरासिटामोल 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में आंत, हृदय और गुर्दे से संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकती है। एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है। हल्के से मध्यम बुखार के दौरान आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पैरासिटामोल, अस्थियों से जुड़ी बीमारियों के उपचार के लिए भी चिकित्सक द्वारा परामर्श दी जाने वाली पहली दवा है क्योंकि इसे प्रभावी, अपेक्षाकृत सुरक्षित और सुलभ माना जाता है। हालांकि, दर्द निवारण में पैरासिटामोल की प्रभावशीलता पर कुछ अध्ययनों में सवाल उठाये गए हैं, जबकि अन्य अध्ययनों ने लंबे समय तक इसके उपयोग से पाचन तंत्र संबंधी दुष्प्रभावों, जैसे अल्सर और रक्तस्राव, के बढ़ते जोखिम को रेखांकित किया है। ब्रिटेन के नॉटिंघम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए नवीनतम अध्ययन में पाया गया कि पैरासिटामोल के उपयोग से पेप्टिक अल्सर रक्तस्राव (पाचन तंत्र में अल्सर के कारण रक्तस्राव) के जोखिम में क्रमशः 24 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की वृद्धि होती है और आंत संबंधी रक्तस्राव में कमी आती है। अध्ययन के मुताबिक, पैरासिटामोल के सेवन से गुर्दे के गंभीर रोग का खतरा 19 प्रतिशत, दिल का दौरा पड़ने का खतरा नौ प्रतिशत तथा उच्च रक्तचाप का खतरा सात प्रतिशत बढ़ सकता है। आर्थराइटिस केयर एंड रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, ‘‘यह अध्ययन वृद्ध लोगों में गुर्दा, हृदय और आंत संबंधी दुष्प्रभावों को दर्शाता है।’’ नॉटिंघम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रमुख अनुसंधानकर्ता वेया झांग ने कहा, ‘‘कथित तौर पर सुरक्षित होने की वजह से पैरासिटामोल को अस्थियों से जुड़े रोगों के लिए कई उपचार दिशानिर्देशों में प्राथमिक दवा के रूप में अनुशंसित किया गया है, विशेष रूप से वृद्ध लोगों में, जिनमें दवा से उत्पन्न जटिलताओं का उच्च जोखिम होता है।’’ शोधकर्ताओं ने इन नतीजों पर पहुंचने के लिए 1,80,483 लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, जिन्हें बार-बार पैरासिटामोल दी गई थी।शोधकर्ताओं ने इसके बाद इन स्वास्थ्य रिपोर्ट की तुलना उसी आयु के 4,02,478 (4.02 लाख) लोगों से की, जिन्हें कभी भी बार-बार पैरासिटामोल नहीं दी गई थी।   recent visitors 71