चुनावी रैली में गरजे राज ठाकरे, अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई, तो वह राज्य में सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटा देंगे

महाराष्ट्र महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने अमरावती में आयोजित एक रैली में मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों का मुद्दा फिर से उठाया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई, तो वह राज्य में सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटा देंगे। यह बयान महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आया है, जो 20 नवंबर, 2024 को होंगे और वोटों की गिनती 23 नवंबर को होगी। लाउडस्पीकरों का मुद्दा राज ठाकरे ने अपने समर्थकों से कहा, "मुझे सत्ता दो, और मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि महाराष्ट्र में किसी भी मस्जिद पर एक भी लाउडस्पीकर न हो।" उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम नेता मस्जिदों से फतवा जारी कर महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के लिए वोट मांग रहे हैं। ठाकरे ने यह भी दावा किया कि जब उनके चाचा उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए दबाव डाला था। इसके परिणामस्वरूप उनके समर्थकों के खिलाफ 17,000 मामले दर्ज किए गए थे। शरद पवार पर निशाना राज ठाकरे ने शरद पवार पर भी हमला करते हुए उन्हें "संत शरदचंद्र पवार" कहा और आरोप लगाया कि वह ओबीसी और मराठा समुदायों के बीच विवाद भड़का रहे हैं। ठाकरे ने पवार से पूछा, "क्या मूर्तियां पर्याप्त नहीं हैं कि हर जिले में मंदिर बनाए जाने चाहिए?" यह बयान उद्धव ठाकरे द्वारा जिलों में छत्रपति शिवाजी महाराज के मंदिर बनाने की हाल की घोषणा पर था। विधानसभा चुनाव में मनसे स्वतंत्र रूप से लड़ेगी राज ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मनसे स्वतंत्र रूप से लड़ेगी, और किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा, "मनसे सभी राजनीतिक दलों में सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।" ठाकरे ने 2024 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी का समर्थन किया था, लेकिन विधानसभा चुनाव में वह अपनी पार्टी को स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतारने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, "हम पूरे जोश के साथ चुनाव लड़ेंगे, और चुनावों के बाद मनसे सरकार में होगी।" recent visitors 100

देश मे धर्म – अधर्म की लड़ाई चल रही है, स्वार्थ का दैत्य भारत को दबाने की कोशिश में है: मोहन राव भागवत

चित्रकूट राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डॉ मोहन राव भागवत में कहा है कि यह विश्व हमारे ऋषि मुनियों को हुई सत्य की अनुभूति का परिणाम है, राष्ट्र की नींव में भी सनातन धर्म का वही मूल है जिसमे सभी को धारण करने की क्षमता है। आज देश मे धर्म – अधर्म की लड़ाई चल रही है, स्वार्थ का दैत्य भारत को दबाने की कोशिश में है लेकिन उनकी कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी क्योंकि सत्य कभी दबता नहीं है। संघ प्रमुख डॉ राव मोहन भागवत चित्रकूट में आयोजित मानस मर्मज्ञ बैकुंठवासी पंडित रामकिंकर उपाध्याय जन्म शताब्दी समारोह में बोल रहे थे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय संत एवं मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू समेत बड़ी संख्या में संत – महंत , कथावाचक एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे, सर संघ चालक ने कहा कि अब अपने देश को ठीक करना है , धर्म – अधर्म की लड़ाई चल रही है। हम ईश्वर प्रदत्त अपना कर्तव्य अपना निभाएं ये अपेक्षा है यानी धर्म के पक्ष में खड़े हो जाएं। लेकिन ये होना है तो आचरण आना चाहिए, एक तरफ स्वार्थ का दैत्य उभरते भारत को दबाने का यानी सत्य को दबाने का प्रयास कर रहा है लेकिन वो कभी सफल नहीं होंगे क्योंकि सत्य कभी दबता नहीं है। हमारी हस्ती इसलिए भी नहीं मिटती क्योंकि उस हस्ती को हमारी ऋषि – सन्तो की परंपरा ,ईश्वर निष्ठों की मंडली का आशीर्वाद प्राप्त है। 'सनातन धर्म दुनिया को प्रदान करना हिन्दू समाज' संघ प्रमुख ने कहा कि सनातन धर्म दुनिया को प्रदान करना हिन्दू समाज और भारत का कर्तव्य है। भारत ,हिन्दू और सनातन धर्म एकाकार हैं। सनातन धर्म को जन जन के आचरण में लाना है, भोग के वातावरण में त्याग का संदेश देना है। हमारी सनातन काल से चली आ रही जो थाती है ,विभिन्न महापुरुषों ने अपने जीवन से जिसे जीवित रखा है,उसे पुनः जीवंत करते हुए उसे जन जन के आचरण में लाना है, उन्होंने कहा कि बाहर सुख नहीं मिलता जब ये पता चला तो हमारे ऋषि मुनियों को एक सत्य मिला जो सभी सुखों का निधान है। सत्य हमें यह बताता है कि हम सब एक की प्रतिछाया हैं, रंग रूप ,पूजा पद्धति में विविधता के बाद भी हम एक हैं। ऋषि मुनियों को लगा कि हमे जो शास्वत सत्य मिला वो सब को देना चाहिए तो बड़े परिश्रम के बाद राष्ट्र बना। हमारा राष्ट्र विश्व को धर्म देने के लिए बना। लेकिन धर्म ऐसे दिया नहीं जा सकता। धर्म की जानकारी से धर्म प्राप्त नहीं होता ,धर्म के आचरण से धर्म प्राप्त होता है। महाभारत बताती है कि दुनिया कैसी है: मोहन भागवत  महाभारत यह बताती है कि दुनिया कैसी है और रामायण यह बताती है कि उस दुनिया में हमे कैसे रहना है, जो भगवान की इच्छा होती है वही होता है। वो बिना आवाज की लाठी है। भगवान की इच्छा है तो भारत का उत्थान हो रहा है। मंदिर भी अयोध्या में बना, बिना संसाधनों के संघ भी खड़ा हुआ। भगवान की भी इच्छा को पूरी करने के लिए पुरुषार्थी लोगों को शस्त्र धारण करने उतरना पड़ता है, समाज को तैयार होना होगा। बाकी ज्ञान की बातें बहुत हैं व्यापार ,खेल सब चल रहा है ,जीत हार चल रही है। देश को बड़ा बनाने,लोगों को खुशहाल रखना ,दुनिया को राहत देना, ये सब चल रहा है। लेकिन ये सब बाहर की बातें हैं। ये सब भौतिक साधन है, ये सब तो चाहिए लेकिन इस सब को धारण करने वाला राम चाहिए। अयोध्या में मंदिर तो बन गया लेकिन विश्व में कोई युद्ध न हो इसके लिये मन की अयोध्या चाहिए। ये तब होगा जब रामायण महाभारत की कथा के माध्यम से इसके मर्मज्ञ लोगों को इन कथाओं में छिपे जीवन दर्शन – रहस्य से परिचित करा कर उनके मन मे राम के प्रकाश को जगायेंगे। कथा तो हम भी संघ में बहुत कहते हैं लेकिन… संघप्रमुख ने रामकिंकर उपाध्याय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने राम कथा को अपने जीवन – अपने आचरण में उतारा। धर्म को जी कर उन्होंने दिखाया। कैसे रामकथा इस धरा में प्रलय काल तक चिर अनंत काल तक रहने वाली है यह तो कहा जाता है लेकिन धर्म तत्व के गूढ़ रहस्यों से उन्होंने सब को परिचित कराया। ये तभी सम्भव हो सकता है जब 8 हजार साल पहले हुए राम के समय की परिस्थितियों की अनुभूति कर राम में तदरूप हो कर भगवान राम के किये कार्यो निहितार्थ बताने वाले लोग हों। कथा तो हम भी संघ में बहुत कहते हैं लेकिन ऐसे आचरण सम्पन्न ,धर्म सम्पन्न पुरुषार्थ सम्पन्न लोग जब ये बताते हैं तो उसके परिणाम मिलते हैं। भक्ति भाव से कथा श्रवण से लोगों को जीवन को और उन्नत करने वाला कोई तत्व मिलता है। जीवन परिवर्तन होता है। यह सब हम कर सकें तो यही रामकिंकर जी को सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी, अपने उद्बोधन को समाप्त करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि चित्रकूट आकर इस कार्यक्रम में शामिल होने से मेरा भी उद्देश्य सफल हुआ,सन्तो का आशीर्वाद मिला,व्याख्यान सुनने को मिला। अच्छा भोजन करने के बाद थोड़ा सा कड़वा चूर्ण खाने से हाजमा ठीक होता है। मेरे वक्तव्य को उसी चूर्ण की तरह समझें। recent visitors 158

डोनाल्ड ट्रंप के 5 सबसे शर्मनाक क्षण, अमेरिकी इतिहास में डोनाल्ड ट्रंप सबसे विवादास्पद राष्ट्रपति हैं

वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। उन्होंने डेमोक्रेट कमला हैरिस को करारी शिकस्त दी। डोनाल्ड ट्रंप बहुमत के जादुई आंकड़े 270 को पार करके 295 इलेटोरल वोट पा चुके हैं। अमेरिकी इतिहास में डोनाल्ड ट्रंप सबसे विवादास्पद राष्ट्रपति हैं। उनके खिलाफ कम से कम 34 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनके खिलाफ मामलों का अब क्या होगा, ये देखने वाली बात होगी। हम यहां डोनाल्ड ट्रंप के पिछले कार्यकाल में हुए शर्मनाक क्षणों की बात कर रहे हैं। वो वर्ल्ड लीडर्स को धक्का देने, कोरोना इलाज के लिए नसों में ब्लीच इंजेक्शन की सलाह दे चुके हैं। व्हाइट हाउस में आने वाले मेहमानों को डिनर पार्टी में बर्गर और फ्रैंच फ्राइज खिला चुके हैं। पिछले कार्यकाल में अमेरिकी राष्ट्रपति बनकर डोनाल्ड ट्रंप ने जब अपना पहला शिखर सम्मेलन अटेंड किया तो उनको नाटों अधिकारियों को धक्का देते हुए कैमरे में कैद किया गया। ब्रुसेल्स में 2017 के नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने मोंटेनेग्रो के प्रधानमंत्री डुस्को मार्कोविक की बांह पर थपकी दी और उन्हें पीछे खींचकर आगे निकल गए। सोशल मीडिया पर वायरल इस फुटेज में ट्रंप की इस हरकत को दुनिया ने देखा। डुस्को तो धक्का देने के बाद जब वे आगे आए तो अपने सूट को ठीक करते हुए देखे गए। कोरोना इलाज के लिए ब्लीच इंजेक्शन 2020 में जब कोरोना महामारी ने दुनियाभर में तबाही मचाई, लाखों की संख्या में लोग मारे गए। सबसे ज्यादा मौत के मामले अमेरिका से आए। तब ट्रंप ने सुझाव दिया कि डॉक्टरों को इंसानी शरीर के अंदर प्रकाश पहुंचाने का तरीका खोजना चाहिए, ताकि किसी तरह वायरस को मारा जा सके। उनका तर्क था कि इससे कोरोना अपने-आप ही मर जाएगा। ट्रंप का मानना था कि सूर्य की रोशनी काफी तेज है और अगर इसकी रोशनी शरीर में घुसे तो यह कोरोना को मार सकती है। इसके बाद उन्होंने एक और विचित्र सुझाव दिया। डॉक्टरों से कहा कि वे कोरोना वायरस को मारने के लिए नसों में ब्लीच या आइसोप्रोपिल अल्कोहल इंजेक्ट करे। हालांकि डॉक्टरों ने उनके दावों को खारिज कर दिया और अमेरिकियों को चेतावनी दी कि वे ब्लीच या रसायनों का इंजेक्शन न लें या उन्हें निगल न लें, क्योंकि यह घातक हो सकता है। व्हाइट हाउस में मैकडोनाल्ड्स लंच अगर आपको व्हाइट हाउस में डिनर का निमंत्रण मिले तो आप सोचेंगे कि तरह-तरह के पकवान खाने को मिलेंगे, लेकिन 2019 में ट्रंप ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। उन्होंने क्लेम्सन यूनिवर्सिटी की फुटबॉल टीम को मैकडॉनल्ड्स, वेंडी और बर्गर किंग के बर्गर और फ्रेंच फ्राइज़ सहित फास्ट फूड परोसा। हालांकि सरकारी शटडाउन के कारण व्हाइट हाउस के कर्मचारी छुट्टी पर थे। तूफ़ान पीड़ितों पर पेपर टॉवल फेंके 2017 में, प्यूर्टो रिको तूफान मारिया से तबाह हो गया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बचे हुए लोगों से मुलाकात की और उन्हें राहत सामग्री वितरित करने में मदद की। हालाँकि, उन्होंने ऐसा करने के लिए एक असामान्य तरीका चुना। राष्ट्रपति को पीड़ितों पर पेपर टॉवल रोल फेंकते हुए देखा गया।   अफ़्रीकी देशों को गाली दी 2018 में सांसदों के साथ एक बैठक के दौरान, ट्रंप को अफ्रीकी औऱ हेती देशों के प्रवासियों को गाली देते सुना गया। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, "ये सभी लोग घटिया देशों से यहां क्यों आ रहे हैं?" हालांकि उन्होंने यह बात सार्वजनिक तौर पर कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने इस शब्द के प्रयोग से इनकार कर दिया और कहा कि उन्होंने केवल कठोर भाषा का प्रयोग किया था। recent visitors 101

हाई कोर्ट ने कहा- पुरुष को कमाने-पढ़ने का मौका और महिला को नहीं, यह गलत बात

प्रयागराज महिला और पुरुष की शादी की न्यूनतम उम्र में अंतर होना पितृसत्तात्मक व्यवस्था की एक निशानी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि भारत में पुरुष के लिए शादी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है और महिला के लिए यह 18 वर्ष है। यह कुछ और नहीं बल्कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था की एक निशानी है। जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस डी. रमेश की बेंच ने कहा कि पुरुषों को शादी के लिए तीन वर्ष का अतिरिक्त समय इसलिए दिया गया है क्योंकि वे पढ़ाई कर सकें और आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त कर पाएं। अदालत ने कहा कि महिलाओं के लिए स्थिति उलट है और उन्हें इस तरह का कोई अवसर नहीं मिलता है। बेंच ने कहा, 'पुरुषों को शादी के लिए न्यूनतम आयु में तीन वर्ष का अधिक समय देना और महिलाओं को इससे इनकार करना समानता के विपरीत है। यह पितृसत्तात्मक व्यवस्था की निशानी है और मौजूदा कानून भी इसे ही आगे बढ़ा रहे हैं। इस व्यवस्था में यह मान लिया गया है कि पुरुष को आयु में बड़ा होना चाहिए और वह ही परिवार की आर्थिक व्यवस्था देखे। वहीं महिलाओं को लेकर माना गया है कि वे सेकेंड पार्टी रहें और उन्हें पहले के जितना दर्जा न मिले। यह वयवस्था किसी भी मायने में बराबरी वाली नहीं है।' अदालत ने यह टिप्पणियां एक केस की सुनवाई के दौरान की, जिसमें शश्स ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी। परिवार न्यायालय ने उस व्यक्ति की शादी को खारिज करने से इनकार कर दिया था। शख्स का कहना था कि उसका बाल विवाह हुआ था और वह इस शादी से सहमत नहीं है। उसका कहना था कि 2004 में विवाह हुआ था और तब उसकी आयु महज 12 साल ही थी, जबकि पत्नी की आयु 9 साल थी। 2013 में शख्स ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत शादी को खारिज करने की मांग की थी। शख्स ने जब केस दाखिल किया था, तब भी उसकी आयु 10 साल, 10 महीने और 28 दिन ही थी। क्या कहता है बाल विवाह को लेकर बना कानून इस प्रावाधन के तहत यदि बाल विवाह हुआ तो उसमें शामिल दो में से कोई भी एक सदस्य शादी खारिज करने की मांग कर सकता है। यही नहीं इसके अनुसार यदि बाल विवाह वाले दोनों सदस्य बालिग होने के दो वर्ष बाद भी ऐसी अपील करते हैं तो उसे माना जा सकता है। इसी मामले में जब पति अदालत पहुंचा तो उसकी पत्नी ने विरोध किया। उसका कहना था कि पति ने जब अपनी शादी को खारिज कराने की मांग की तो वह बालिग था। उसकी उम्र 18 साल से अधिक हो चुकी थी। वह 2010 में ही बालिग हो गया था। यही तर्क जब उसने हाई कोर्ट में दिया तो अदालत ने पुरुष और स्त्री की शादी की न्यूनतम उम्र में अंतर होने पर सवाल उठाया। recent visitors 91

आरोपी और पीड़ित के बीच सिर्फ समझौते के आधार पर केस को रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली यौन उत्पीड़न केस पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। गुरुवार को अदालत ने कहा कि आरोपी और पीड़ित के बीच सिर्फ समझौते के आधार पर केस को रद्द नहीं किया जा सकता है। इस संबंद में शीर्ष न्यायालय ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया, जिसमें कोर्ट ने केस को रद्द करने के लिए CrPC की धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया था। क्या था मामला दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के दोषी शिक्षक विमल कुमार गुप्ता को राहत दे दी थी। यह मामला 2022 का गंगापुर का है। खबर है कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था, जिसे शुरुआत में निचली अदालत ने मानन से इनकार कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता रामजी लाल बैरवा ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 2022 में नाबालिग दलित लड़की ने सरकारी स्कूल के शिक्षक के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद केस दर्ज हुआ था। जांच के दौरान नाबालिग का बयान भी दर्ज किया गया था। इसके बाद गुप्ता ने लड़की के परिवार का बयान एक स्टांप पेपर पर हासिल कर लिया था। इसमें कहा गया था कि उन्होंने गलतफहमी के चलते पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी थी और अब वह शिक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ अब एपेक्स कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस पीवी संजय कुमार की बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया। साथ ही आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा चलाने का भी रास्ता साफ कर दिया है। recent visitors 108

नशीली सिरप की तस्करी करने वाले आरोपियों को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई, 10 -10 साल सश्रम कारावास

रीवा रीवा शहर में नशीली सिरप की तस्करी करने वाले आरोपियों को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई है। आरोपी शहर में नशीली प्रतिबंधित सिरप की सप्लाई करते थे। नशे की खेप लाने के लिए कार का इस्तेमाल करते थे।  फिर शहर के कबाड़ी मोहल्ले स्थित अपने गोदाम से नशे का नेटवर्क संचालित करते थे। मामले में आरोपियों को सजा विशेष सत्र न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट केशव सिंह की अदालत से सुनाई गई है। लोक अभियोजन ने बताया कि नशा तस्कर इरशाद खान और अनुराग त्रिपाठी को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इरशाद लंबे समय से नशा तस्करी में जुड़ा हुआ था, पुलिस ने इसके घर में भी एक बार छापा मारा था। जहां से भारी मात्रा में नशीली कफ सिरप तहखाने से बरामद हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी 25 मई 2023 को कुछ लोग नशे की खेप लेकर रीवा के करहिया मार्ग से होकर लाडली लक्ष्मी मार्ग के रास्ते रीवा शहर में प्रवेश करेंगे। पुलिस ने लाड़ली लक्ष्मी मार्ग पर चेकिंग अभियान शुरू किया। वहां पुलिस को एक अल्टो कार आती हुई नजर आई। पुलिस ने कार की चेकिंग की कार के दौरान अंदर से 2160 सीसी नशीली कफ सिरप बरामद की। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले को कोर्ट में पेश किया। जहां सुनवाई के बाद दोनों आरोपी अनुराग त्रिपाठी और इरशाद को 10 साल की सजा सुनाई। एक लाख रुपए का जुर्माना ना अदा करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वर्तमान में जिस तरीके से पूरा रीवा शहर में नशा छाया हुआ है। उसको देखकर माना जा रहा है यह नशे के खिलाफ एक बड़ा प्रहार है। recent visitors 114

सीतापुर-हनुमना सिंचाई परियोजना के लिए समन्वित प्रयास कर शीघ्र कार्य प्रारंभ करें- उप मुख्यमंत्री शुक्ल

Make coordinated efforts and start work on Sitapur-Hanumana Irrigation Project soon – Deputy Chief Minister Shukla भोपाल ! उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सीतापुर-हनुमना सिंचाई परियोजना से मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिले के किसानों की तकदीर और खेती की तस्वीर बदल जाएगी। इस परियोजना से 653 गांवों में एक लाख 20 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने परियोजना का निर्माण कार्य समय पर शुरू करने के लिए राजस्व, वन तथा जल संसाधन विभाग को समन्वित प्रयास कर आवश्यक स्वीकृति की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। कमिश्नर कार्यालय सभागार रीवा में उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विन्ध्य की महत्वकांक्षी सीतापुर-हनुमना माइक्रो सिंचाई परियोजना की समीक्षा की। उल्लेखनीय है कि परियोजना के लिये शासन द्वारा 4 हज़ार 167 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है, साथ ही निर्माण एजेंसी से 3 हज़ार 700 करोड़ का अनुबंध हो गया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि परियोजना का बांध सीधी जिले में अमिलिया के पास सोन नदी में प्रस्तावित किया गया है। यह क्षेत्र सोन घड़ियाल अभ्यारण्य में स्थित है। निर्माण कार्यों के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति, वन्यजीव संरक्षण संबंधी स्वीकृति तथा अन्य स्वीकृति आवश्यक होंगी। इसके लिए जल संसाधन विभाग ऑनलाइन आवेदन कर दे। वन विभाग के अधिकारियों के सहयोग से जल संसाधन विभाग परियोजना की मंजूरी के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर लें। इसके लिए विशेषज्ञ की भी सलाह ले सकते हैं। इस सिंचाई परियोजना से लाखों किसानों को लाभ मिलेगा। घड़ियाल के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बांध का निर्माण कराएं, जिससे विकास के कार्यों के साथ वन्य जीवों के संरक्षण में भी किसी तरह का प्रभाव न पड़े। बहुती सिंचाई परियोजना का शेष निर्माण कार्य 1 माह के अंदर करें पूरा उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुती सिंचाई परियोजना के शेष निर्माण कार्य को पूरा करके किसानों को दिसम्बर माह तक सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करा दें। नहरों की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य एक माह में पूरा कराएं। अधूरे निर्माण कार्य 30 नवम्बर तक पूरा कराकर दिसम्बर माह में नईगढ़ी एक परियोजना में सात हजार हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराएं। मुख्य अभियंता जल संसाधन ने बताया कि सीतापुर-हनुमना सिंचाई परियोजना में सोन नदी पर 268.90 एमसीएम क्षमता का बांध बनाया जाएगा। इससे सोन घड़ियाल के बेसिन में 2 हज़ार हेक्टेयर जमीन, 1 हज़ार 290 हेक्टेयर निजी भूमि तथा 15 हेक्टेयर वन भूमि डूब क्षेत्र में आएगी। बांध से रीवा जिले के 11 गांवों में 3 हज़ार हेक्टेयर, मऊगंज में 399 गांवों में 62 हज़ार 500 हे., सीधी जिले में 140 गांवों में 26 हज़ार 500 हे. तथा सिंगरौली जिले के 103 गांवों में 28 हज़ार हे. में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। कमिश्नर रीवा संभाग श्री बीएस जामोद, आईजी एमएस सिकरवार, कलेक्टर रीवा श्रीमती प्रतिभा पाल, कलेक्टर मऊगंज अजय श्रीवास्तव, विभागीय अधिकारी एवं निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। recent visitors 110