नगर निगम चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, इतनी देर में करवाने होंगे इलेक्शन

जालंधर कुछ सप्ताह पहले पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश जारी किए थे कि 15 दिन के भीतर निगम चुनाव का शेड्यूल जारी किया जाए। राज्य सरकार ने यह आदेश नहीं माने और सरकार सुप्रीम कोर्ट की शरण में चली गई जहां आज इस याचिका पर सुनवाई हुई। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को निरस्त करते हुए आदेश जारी किए हैं कि पंजाब सरकार 2 सप्ताह के भीतर निगम चुनाव संबंधी शेड्यूल जारी करे और अगले 8 सप्ताह के भीतर यह निगम चुनाव करवाए जाएं। एक प्रकार से पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से झटका लगा है क्योंकि 'आप' सरकार फरवरी में होने जा रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद निगम चुनाव करवाने का इरादा किए बैठी थी। अब भी पंजाब में निगम चुनाव जनवरी में होते हैं या दिल्ली विधानसभा के चुनाव के बाद, यह देखने वाली बात होगी। recent visitors 99

चयनित खिलाड़ी राष्ट्रीय सिविल सेवा शतरंज प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश का करेंगे प्रतिनिधित्व

भोपाल खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित मध्यप्रदेश राज्य सिविल सेवा शतरंज चैम्पियनशिप 2024 का समापन इंदौर पब्लिक स्कूल में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में राज्य के विभिन्न जिलों से आए सिविल सेवा अधिकारियों ने भाग लेकर अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया। महिला वर्ग में शीर्ष स्थान पर निशाद मोनिका ने शानदार प्रदर्शन कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके बाद पद्मजा नायडू ने दूसरा स्थान और स्नेहलता नागेश ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इनके अतिरिक्त छाया हरदिया, वैशाली रामटेके और मंजू डोंगरे ने भी प्रतियोगिता में बेहतरीन खेल प्रदर्शन करते हुए क्रमशः चौथा, पाँचवाँ, और छठवाँ स्थान हासिल किया। छह राउंड के बाद शेखर वर्मा 5.5 अंकों के साथ प्रथम, सिद्धार्थ जैन और दीपक चिवांडे ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 अंकों के साथ क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस चैम्पियनशिप में बी.के.चौधरी, विवेकानंद यादव और अशोक तुरकिया ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया और शीर्ष छह स्थानों में जगह बनाई। यह सभी चयनित खिलाड़ी राष्ट्रीय सिविल सेवा शतरंज प्रतियोगिता 2024 में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस आयोजन में टूर्नामेंट डायरेक्टर के रूप में सुनील सोमानी तथा मुख्य निर्णायक के रूप में सौरभ सोनी ने अपनी अहम भूमिका निभाई। इस प्रतियोगिता ने राज्य में शतरंज के प्रति रुचि को बढ़ावा दिया और खेल संस्कृति को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। प्रतियोगिता के समापन अवसर पर देवास कलेक्टर ऋषभ गुप्ता, अपर कलेक्टर भोपाल सिद्धार्थ जैन, मध्यप्रदेश अड हॉक कमिटी के संयोजक अंतरराष्ट्रीय मास्टर अक्षत खमरिया, ओरिएंटल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर सुनील सोमानी, इंदौर शतरंज संघ के अनिल फतेहचंदानी एवं मंदसौर के नंदकिशोर जोशी उपस्थित रहे|   recent visitors 51

हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी अगामी विधानसभा सत्र में कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं

हरियाणा हरियाणा के 1.20 लाख कच्चे कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर आई है। हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी अगामी विधानसभा सत्र में कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकते हैं। सीएम सैनी 1.20 लाख कर्मचारियों के जॉब सिक्योरिटी वाले विधेयक के पारित होने के समय ही बड़ा ऐलान कर सकते हैं। अभी तक सरकार ने अध्यादेश जारी कर रखा था। हरियाणा में पांच साल से अनुबंध पर काम कर रहे एक लाख 20 हजार कच्चे कर्मचारियों की सेवाएं 58 साल की आयु तक करने के निर्णय पर विधानसभा में मुहर लगेगी। प्रदेश सरकार ने विधानसभा में पारित कराए जाने वाले बिल का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है। सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त निकायों में कौशल रोजगार निगम, आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-1 और आउटसोर्सिंग पालिसी पार्ट-2 तथा तदर्थ आधार पर लगे 50 हजार रुपये तक मासिक वेतन वाले सभी कच्चे कर्मचारियों की सेवाएं सेवानिवृत्ति आयु तक सुनिश्चित की जाएंगी। इस अध्यादेश की अवधि 6 माह की होती है। लेकिन इससे पहले अगर विधानसभा में विधेयक पारित हो जाए तो राज्यपाल की मंजूरी के बाद वह स्थायी कानून बन जाता है। सीएम नायब सैनी ने विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल की बैठक में 1.20 लाख अस्थायी कर्मचारियों की नौकरी 58 साल तक सुरक्षित करने के लिए जॉब सिक्योरिटी अध्यादेश मंजूर कराया था। अब 13 नवंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरु होने जा रहा है। जिसमें विधेयक पेश किए जाएंगे। इनमें वे विधेयक भी शामिल होते हैं जिनके अध्यादेश पहले जारी हो चुके हैं। लेकिन इन अध्यादेशों को ऐसे के ऐसे ही विधेयक के रूप में पेश करना होता है। जॉब सिक्योरिटी का अध्यादेश भी ज्यों का त्यों ही पेश किया जाएगा। लेकिन जब इसपर चर्चा होगी तो सीएम सैनी बड़ा ऐलान कर सकते हैं।   पक्के कर्मचारियों के समान बेसिक वेतन मिलेगा सरकारी स्कूलों में तैनात अतिथि अध्यापकों को भी नए नियमों का लाभ मिलेगा। विगत 14 अगस्त से ही कानून लागू होगा, जब इसे अध्यादेश के रूप में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने मंजूरी दी थी।  15 अगस्त तक पांच साल की नौकरी पूरी कर चुके सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्के कर्मचारियों के समान बेसिक वेतन दिया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को न्यूनतम पे स्केल से पांच प्रतिशत अधिक वेतन मिलेगा। न्यूनतम पे स्केल से 10 प्रतिशत अधिक वेतन मिलेगा इसी तरह आठ साल पुराने कर्मचारियों को न्यूनतम पे-स्केल से 10 प्रतिशत अधिक वेतन मिलेगा। 10 साल से अधिक पुराने अनुबंधित कर्मचारियों को न्यूनतम पे-स्केल से 15 प्रतिशत अधिक वेतन दिया जाएगा। हर साल एक जनवरी और एक जुलाई को मानदेय में वृद्धि भी की जाएगी। साथ ही सालाना वेतन वृद्धि, डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और मेटरनिटी एक्ट के तहत मिलने वाले सभी लाभ मिलेंगे।   पीएम-जन आरोग्य योजना-चिरायु एक्सटेंशन योजना के तहत अनुबंधित कर्मचारियों के परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ भी दिया जाएगा।   recent visitors 79

मल्लिकर्जुन खड़गे की मोदी सरकार पर तीखी टिप्पणी: ओबीसी आरक्षण और जातिगत जनगणना का दोगला रुख

Mallikarjun Kharge’s sharp comment on Modi government: Double stance on OBC reservation and caste census नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकर्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खड़गे ने कहा कि मोदी जी चुनावी लाभ के लिए खुद को बार-बार ओबीसी बताने का दावा करते हैं, लेकिन यह कभी नहीं बताते कि वे जातिगत जनगणना से पिछड़ी जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को क्यों छुपाए रखना चाहते हैं।खड़गे ने इस संदर्भ में मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया और कहा, “जब मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की गईं, तो बीजेपी ने इसका विरोध करते हुए यात्रा निकाली थी। अब मोदी जी ओबीसी वोट हासिल करने के लिए ओबीसी होने का दावा करते हैं, लेकिन जब बात उनके वास्तविक कामकाजी रुख की आती है, तो वे पिछड़ों के हक में कभी खड़े नहीं हुए।” राहुल गांधी के हालिया बयान का हवाला देते हुए खड़गे ने कहा कि हाल ही में धनबाद में राहुल गांधी ने यह खुलासा किया था कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग से है, 15 प्रतिशत दलित हैं, और 8 प्रतिशत आदिवासी वर्ग के लोग हैं। इन वर्गों की बेहतर सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने का सबसे बड़ा तरीका जातिगत जनगणना है।खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के खिलाफ है, और यह बात झारखंड की गठबंधन सरकार द्वारा किए गए एक बड़े कदम से स्पष्ट होती है। झारखंड विधानसभा ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन मोदी सरकार ने इसे गवर्नर से रोकवा दिया। “यह दोहरा चरित्र दर्शाता है कि मोदी जी अपने घोषणापत्र में OBC आरक्षण बढ़ाने की बात करते हैं, लेकिन जब असल में इसे लागू करने का समय आता है, तो वे उसे रोकने में किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्या इस तरह के दावे पर आप लोग विश्वास करेंगे?” खड़गे ने सवाल उठाया। खड़गे ने यह भी कहा कि मोदी सरकार का यह दोगला रुख ही उनकी असल नीयत को दर्शाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर गंभीर सोच-विचार करें और सही पक्ष का समर्थन करें। recent visitors 139

वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों का समुचित विधिक प्रक्रिया से निराकरण किया जा रहा

भोपाल वन अधिकार अधिनियम 2006 का जनवरी 2008 से मध्यप्रदेश में सुचारू तरीके से क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 75 हजार 352 से अधिक व्यक्तिगत वन अधिकार दावे मान्य किये गये हैं। इसके अतिरिक्त 29 हजार 996 सामुदायिक वन अधिकार दावों को भी मान्यता प्रदान की गई है। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त वन अधिकार दावों का निर्धारित पात्रता अनुसार समुचित विधिक प्रक्रिया से निराकरण किया जा रहा है। 792 वन ग्राम बने राजस्व ग्राम वन अधिकार अधिनियम में प्रदेश में अब तक 792 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में सम्परिवर्तन कर दिया गया है। इसके लिये संबंधित जिला कलेक्टर्स द्वारा विधिवत अधिसूचनाएं भी जारी कर दी गई हैं। सभी जिलों का एफआरए एटलस भी तैयार केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार वन अधिकार अधिनियम के पोटेंशियल एरिया की मैपिंग के लिए प्रदेश के सभी जिलों का एफआरए एटलस भी तैयार कर लिया गया है। एफआरए एटलस की सहायता से सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन के सामुदायिक अधिकारों सहित अन्य जरूरी अधिकारों को भी कानूनी मान्यता देने की कार्यवाही की जा रही है। शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदाय मध्यप्रदेश में सभी वन अधिकार पत्र धारकों को विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। अब तक 55 हजार 357 वन अधिकार पत्र धारकों को कपिलधारा कूप, 58 हजार 796 को भूमि सुधार/मेंढ़-बंधान, 61 हजार 54 को पक्का आवास/प्रधानमंत्री आवास, 1 लाख 86 हजार 131 को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ देकर 21 हजार 514 वन अधिकार पत्र धारकों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना से भी जोड़ा गया है। क्या है वन अधिकार अधिनियम उल्लेखनीय है कि वन अधिकार अधिनियम केन्द्र सरकार द्वारा 2006 में लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इसका उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के अधिकारों की रक्षा करना है। इसे अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के अधिकारों को मान्यता देने के लिए लागू किया गया था। इसमें वन क्षेत्रों में रह रहे आदिवासी और अन्य परंपरागत वन निवासी अपने पुश्तैनी निवास और कृषि भूमि पर मालिकाना हक हासिल कर सकते हैं। इन्हें जंगलों के संसाधनों अर्थात वनोपज पर अधिकार दिया गया है। जैसे लकड़ी, फल, शहद, जड़ी-बूटी आदि का संग्रहण। सामुदायिक स्तर पर वे जंगल की भूमि और अन्य संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन कर सकते है। यह अधिनियम वनवासियों को व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों तरह के अधिकार प्रदान करता है। ग्राम सभा दावों की पुष्टि करती है और उन्हें मंजूरी देती है। इसके तहत सरकार की अनुमति के बिना वन क्षेत्रों से विस्थापन नहीं किया जा सकता है। स्थानीय समुदायों को वन क्षेत्रों के संरक्षण में भागीदारी का अधिकार मिलता है। इस अधिनियम ने वनवासियों को उनके पूर्वजों की भूमि पर अधिकार दिया है, जिससे उनके जीवन-यापन के साधनों को मजबूती मिली है। वन अधिकार अधिनियम से वनवासियों की आजीविका में सुधार आया है और इससे इन्हें अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने का अधिकार मिला है। यह अधिनियम जनजातीय और वन समुदायों के अधिकारों को मान्यता देने के साथ ही उनके पारम्परिक जीवन और संस्कृति की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।   recent visitors 77

दिल्ली में 347 दर्ज किया गया औसत एक्यूआई, कम नहीं हो रहा वायु प्रदूषण

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार खराब बनी हुई है। सोमवार को यहां का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 347 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण एवं नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार राजधानी दिल्ली में सोमवार सुबह 7:30 बजे तक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 347 दर्ज किया गया है। जबकि दिल्ली एनसीआर के शहर फरीदाबाद में एक्यूआई 165, गुरुग्राम में 302, गाजियाबाद में 242, ग्रेटर नोएडा में 271 और नोएडा में 237 बना हुआ है। वहीं, दिल्ली के जहांगीरपुरी में एक्यूआई सबसे अधिक 409 दर्ज किया गया। राजधानी दिल्ली के अधिकांश इलाकों में एक्यूआई का स्तर 300 से 400 के बीच में बना हुआ है, जिसमें आनंद विहार में 378, अलीपुर में 397, अशोक विहार में 389, बवाना में 400, बुराड़ी क्रॉसिंग में 352, मथुरा रोड में 316, द्वारका सेक्टर 8 में 356, डॉ करणी सिंह शूटिंग रेंज में 344, डीटीयू में 311 और आईजीआई एयरपोर्ट में 336 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा आईटीओ में 338, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 216, लोधी रोड में 308, मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 369, मुंडका में 389, मंदिर मार्ग में 344, नरेला में 352, नेहरू नगर में 368, नॉर्थ कैंपस डीयू में 363, नजफगढ़ में 356, पटपड़गंज में 366, ओखला फेस 2 में 339, एनएसआईटी द्वारका में 369, आरके पुरम में 368, रोहिणी में 384, शादीपुर में 383, सिरी फोर्ट में 337, विवेक विहार में 372 और वजीरपुर में 391 एक्यूआई दर्ज किया गया। पूर्वी जिले की गीता कॉलोनी के आसपास एक्यूआई 325 मापा गया। यहां पर सड़कों पर पानी द्वारा छिड़काव किया जा रहा है, जिससे सड़कों पर उड़ने वाली धूल वहीं पर जम जाए और हवा में ना फैले। धूल के कण हवा में फैलने से लोगों को खासकर बच्चों और बूढ़ों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।   recent visitors 94

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की विजयपुर और बुधनी के मतदाताओं से अपील: 13 नवंबर को करें मतदान और लोकतंत्र को मजबूत बनाएं

Leader of Opposition Umang Singhar’s appeal to the voters of Vijaypur and Budhni: Vote on 13th November and strengthen democracy. भोपाल ! मध्य प्रदेश में 13 नवंबर को श्योपुर जिले की विजयपुर और सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट के उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस उपचुनाव में न केवल इन दो विधानसभा क्षेत्रों का भविष्य तय होगा, बल्कि यह मध्य प्रदेश सरकार के पिछले 10 महीने के कार्यकाल का भी महत्वपूर्ण मूल्यांकन का अवसर होगा। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने विजयपुर और बुधनी के मतदाताओं से एक अपील की है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों का चुनाव नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की ताकत को मजबूत करने और प्रदेश सरकार की नीतियों और कार्यों पर आम जनता की राय जानने का भी मौका है। उमंग सिंघार ने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा, “आपका एक-एक वोट प्रदेश की दिशा तय करेगा। यह सिर्फ विधानसभा चुनाव नहीं है, बल्कि यह हमारी सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता का मापदंड भी है। आपके मतदान से यह संदेश जाएगा कि आप किस प्रकार के नेतृत्व और नीतियों को अपने क्षेत्र और प्रदेश में देखना चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि 10 महीने पहले सत्ता में आई प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली, वादों की पूर्ति और जनता की सेवा के हिसाब से इस उपचुनाव में मतदाताओं को अपना फैसला लेना है। यह एक बड़ा मौका है जहां जनता को यह तय करना है कि क्या सरकार अपने वादों को पूरा करने में सफल रही है या नहीं।“आपका मतदान ही यह तय करेगा कि आने वाले दिनों में प्रदेश की विकास यात्रा किस दिशा में आगे बढ़ेगी। विजयपुर और बुधनी के मतदाता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं, और हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप 13 नवंबर को अपने मतदान का अधिकार अवश्य उपयोग करें,” उमंग सिंघार ने कहा। यह उपचुनाव न केवल इन दो विधानसभा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में चुनाव परिणामों से यह संकेत मिलेगा कि राज्य के नागरिक आगामी विधानसभा चुनावों में किस दिशा में अपना समर्थन देंगे। recent visitors 139