आरक्षक भर्ती के लिए रोजगार कार्यालय का लाइव पंजीकरण कार्ड होना अनिवार्य शर्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट

 जबलपुर  सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को उचित तरह से निरूपित किया है, जिसके जरिए व्यवस्था दी गई थी कि पुलिस आरक्षक भर्ती के लिए रोजगार कार्यालय का लाइव पंजीकरण आवश्यक नहीं है। हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन की विशेष अनुमति याचिका निरस्त कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान आरक्षक पद पर चयनित उम्मीदवारों की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ताओं के आवेदन के समय रोजगार कार्यालय का लाइव पंजीकरण कार्ड नहीं होने के कारण उनकी उम्मीदवारी निरस्त कर दी गई थी। लाइव पंजीयन कार्ड हाई कोर्ट ने उनके हक में आदेश पारित करते हुए कहा था कि पुलिस आरक्षक पद के लिए उम्मीदवार की पात्रता, योग्यता या फिटनेस तय करने में रोजगार कार्यालय का लाइव पंजीकरण कार्ड होना अनिवार्य शर्त नहीं है। एमपी सरकार को निराशा हाथ लगी सार्वजनिक रोजगार के लिए विचार किया जाना संविधान के अनुच्छेद-16 के अंतर्गत मौलिक अधिकार है और इसे अनावश्यक शर्तें लगाकर सीमित नहीं किया जा सकता, लिहाजा, आवेदकों को नौकरी दी जाए। इस आदेश के विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी थी, लेकिन उसे निराशा हाथ लगी। नायब तहसीलदार ने सीमा लांघकर दिया स्टे, कार्रवाई से कराएं अवगत हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने नायब तहसीलदार द्वारा स्टे आर्डर जारी किए जाने को चुनौती के प्रकरण में कलेक्टर जबलपुर से शपथ पत्र पर जवाब मांग लिया है। इस सिलसिले में कलेक्टर के अलावा नायब तहसीलदार शहपुरा सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। हाई कोर्ट ने सवाल किया है कि एक जमीन पर दावा सिविल वाद कोर्ट में लंबित होने के बावजूद अनावेदक के हक में स्टे आर्डर कैसे जारी कर दिया गया। चूंकि मामला बेहद गंभीर है। अत: कलेक्टर हर हाल में चार सप्ताह में हलफनामा देकर जवाब सुनिश्चित करें। यह नियम-कायदे की हद लांघने का प्रकरण है। यदि कलेक्टर ने समय पर जवाब नहीं दिया तो वे कार्रवाई के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे। यदि नायब तहसीलदार ने पद का दुरुपयोग करते हुए स्टे आर्डर जारी किया है तो उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई, यह भी कोर्ट को अवगत कराना होगा। जवाब न पेश करने पर कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने तैयार रहना होगा। याचिकाकर्ता रोहन लाल मेहरा की ओर से अधिवक्ता सचिन जैन ने पक्ष रखा कि याचिकाकर्ता व मदन लाल, लखन लाल के बीच गांव की एक जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। इसे लेकर सिविल कोर्ट में दावा पेश किया। साथ ही स्टे आर्डर की अंतरिम राहत चाही थी, जिसे सिविल कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। recent visitors 67

जिनका सनातन से कोई लेना देना नहीं, वो महाकुंभ में डुबकी नहीं लगायेंगे : उषा ठाकुर

इंदौर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कुंभ में स्नान नहीं करने पर पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी ने अपने पिता का सरनेम छुपा लिया. खान होकर गांधी लिखते हैं. इसलिए राहुल गांधी प्रयागराज महाकुंभ में स्नान नहीं करने गए. ये तो खान हैं, जहां उन्हें जाना है वो तो वहींं जाएंगे.’ वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए उषा ठाकुर ने कहा कि झूठे लोगों को सब झूठ लगता है. दरअसल, अखिलेश यादव ने 144 साल बाद महाकुंभ को लेकर कहा था बीजेपी ने झूठा प्रचार किया है. उषा ठाकुर ने कहा कि अखिलेश यादव वामपंथी विचार धारा से ग्रस्त हैं. इसलिए बेतुकी बातें करते रहते हैं. हिंदू समाज इन्हें समझ चुका है आने वाले समय में जनता मुंह तोड़ जवाब देगी. इसके अलावा पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए इंडिया गॉट लैटेंट के वीडियो को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि रणवीर अल्लाहबादिया ने अक्षम अपराध किया है. उन्हें कठोरतम दंड मिलना चाहिए. ये लोग वामपंथी घृणित विचारधार के हैं. टुकड़े-टुकड़े गैंग के उत्तराधिकारी हैं रणवीर. देशद्रोह, सनातन द्रोह और संस्कृति द्रोह का काम रणवीर अल्लाहबादिया ने किया है. इस जैसे दुष्टों को सजा जरूर मिलना चाहिए. वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी अखिलेश और राहुल गांधी के महाकुंभ ना जाने को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ‘वे स्नान करने क्यों नहीं गए ,ये तो वही तय करें. भगवान इनको सद्बुद्धि दें. मां गंगा सबके पाप हरती हैं. अवसर मिलेगा तो कुछ छींटे हम डाल देंगे.’ recent visitors 54

ईएसबी ने प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा के आवेदन की तारीख 20 फरवरी तक बढ़ाई

भोपाल  मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की ओर से प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा के लिए आवेदन करने की तारीख में 10 दिन की बढ़ोतरी की गई है। अब अभ्यर्थी 20 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। अभी आवेदन करने की अंतिम तिथि मंगलवार को समाप्त हो रही थी। वहीं, आवेदन पत्र में संशोधन करने की तिथि 16 से बढ़ाकर 25 फरवरी की गई है। अभ्यर्थियों ने आवेदन की तारीख बढ़ाने की मांग की थी।     खासतौर पर अतिथि शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और ईएसबी के अधिकारियों को पत्र लिखकर तारीख बढ़ाने की मांग की थी।     अतिथि शिक्षकों का कहना था कि इस बार आवेदन करते समय ही अनुभव प्रमाण पत्र मांगे गए हैं।     कई के अनुभव प्रमाण पत्र बन नहीं पाए हैं, ऐसे में वे आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।     वहीं कुछ अभ्यर्थी प्रोफाइल पंजीयन आईडी का मैप नहीं होने से आवेदन नहीं कर पा रहे थे। अब तक 1.43 लाख आवेदन आ चुके हैं। दो पारियों में होगी परीक्षा यह चयन परीक्षा 20 मार्च से शुरू होकर दो पारियों में आयोजित की जाएगी। पहली पारी की परीक्षा सुबह नौ से 11 बजे तक और दूसरी पारी में दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक आयोजित होगी। दोनों पारियों में अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर एक घंटा पहले पहुंचना होगा। recent visitors 61

प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, प्रॉपर्टी महिला के नाम पर खरीदने पर स्टांप शुल्क 6%

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और बड़ा फैसला लेने जा रही है। प्रदेश में महिलाओं के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर बड़ी छूट देने की तैयारी कर ली गई है। अब तक 10 लाख रुपये तक की संपत्तियों पर मिलने वाली 1 फीसदी की छूट को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये तक की संपत्तियों पर लागू करने की तैयारी है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने वालों की संख्या में वृद्धि होगी। महिलाओं के हाथें में संपत्ति का अधिकार आने के बाद उनकी परिवार में निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश सरकार के स्टाम्प-न्यायालय शुल्क पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने इस संबंध में अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर उच्च स्तर पर सहमति बन चुकी है। जल्द ही इसे कैबिनेट से पास कराने की तैयारी है। इस फैसले से महिलाओं को अधिकतम 1 लाख रुपये तक की बचत हो सकेगी। उनके नाम पर संपत्ति खरीदने को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, अब महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार एक और फैसला लेने वाली है. अब एक करोड़ की संपत्ति पर स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत तक की छूट मिलेगी. विभाग के द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में एक करोड़ तक की संपत्ति महिला के नाम पर खरीदने पर स्टांप शुल्क 6% होगा. इससे लगभग एक लाख रुपए तक का फायदा मिलेगा. महिलाओं के नाम पर दर्ज संपत्ति में मिलने वाली नई छूट को लेकर उत्तर प्रदेश के स्टांप शुल्क पंजीयन विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है. उच्च स्तर पर सहमति भी बन गई है. उम्मीद जताई जा रही है कि योगी सरकार की अगली कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर मुहर भी लग जाएगी. स्टाम्प शुल्क में होगा बदलाव यूपी सरकार की ओर से अभी तक 10 लाख रुपये तक की संपत्तियों पर ही महिलाओं को 1 फीसदी की छूट मिल रही थी। नए प्रस्ताव के मुताबिक, 1 करोड़ रुपये तक की संपत्तियों पर 7 फीसदी की जगह 6 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क लिया जाएगा। इससे महिलाओं को अधिकतम 1 लाख रुपये तक का सीधा लाभ होगा। राज्य सरकार ने इससे पहले भी महिलाओं को संपत्ति हस्तांतरण में प्रोत्साहन देने के लिए गिफ्ट डीड योजना के तहत केवल 5000 रुपये में संपत्ति हस्तांतरण की सुविधा दी थी। इससे महिलाओं के नाम पर करीब 4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज की गई। योगी सरकार का बड़ा कदम महिलाओं के संपत्ति खरीद पर छूट प्रस्ताव को 18 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले कैबिनेट में रखा जा सकता है। यूपी सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट 20 फरवरी को पेश किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि केंद्र सरकार से महिला कल्याण के बजटीय आवंटन में से इस छूट की भरपाई हो सकेगी। योगी सरकार के इस फैसले को महिला सशक्तीकरण के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे राज्य में महिलाओं की संपत्ति स्वामित्व में वृद्धि होने की संभावना है। यह प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने पर भी असर डालेगा। recent visitors 65

सऊदी अरब ने हज यात्रा से पहले नियमों को सख्त कर दिया, भारत सहित 14 देशों के लिए सिंगल एंट्री वीजा

रियाद  सऊदी अरब की सरकार ने इस साल, 2025 की हज यात्रा से पहले नियमों को सख्त कर दिया है। सऊदी ने वीजा समेत कई नए नियम लागू किए हैं, जिससे हज की चाहत रखने वाले दुनियाभर के मुस्लिमों को मुश्किल पैदा हो सकती है। सऊदी ने हज में बच्चों को साथ लाने पर रोक लगाई है, पेमेंट का तरीका बदला है और 14 देशों के यात्रियों के लिए सिंगल-एंट्री वीजा लागू किया है। इन बदलावों से हज यात्रा की पुरानी परंपराएं खत्म हो गई हैं, जिससे कई लोग हज पर जाने के अपने सपने को पूरा नहीं कर पाएंगे। इससे ये सवाल भी उठा है कि सऊदी सरकार हज यात्रा को क्यों मुश्किल बना रही है। सऊदी अधिकारियों ने भीड़ और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कहा है कि बच्चों को हज में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे उन परिवारों के लिए हज की सपना टूट सकता है, जो बच्चों के साथ मक्का आना चाहते हैं। सऊदी अरब ने वीजा पर भी सख्ती की घोषणा की है। भारत समेत 14 देशों के यात्रियों को अब सिर्फ सिंगल एंट्री वीजा ही मिलेगा। इस कदम को उठाने की वजह अनधिकृत हज यात्रा को रोकने का प्रयास कहा गया है। सऊदी सरकार ने एक नई भुगतान प्रणाली भी शुरू की है। इसके तहत हाजियों को कई किश्तों में भुगतान करना होगा। ऐसा ना करने पर उनकी हज यात्रा पर संकट हो सकता है। निशाने पर आए मोहम्मद बिन सलमान इन नई नीतियों के लागू होने से सऊदी सरकार खासतौर से क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान लोगों के निशाने पर आए हैं। बहुत से लोग पूछ रहे हैं कि क्या सऊदी अरब धार्मिक कर्तव्य से ज्यादा राजस्व को प्राथमिकता दे रहा है। वीजा प्रतिबंधों, भुगतान नियमों और बच्चों पर प्रतिबंध ने कई लोगों को सऊदी अधिकारियों पर अनावश्यक बाधाएं डालने का आरोप लगाया है, जो हज को पहले से कहीं अधिक कठिन बनाते हैं। सऊदी अरब के हज 2025 के लिए सख्त दृष्टिकोण ने वीजा-मुक्त यात्रा और धार्मिक पर्यटन के भविष्य के बारे में चिंताएं पैदा कर दी हैं। कई लोगों को डर है कि ये नए नियम दूसरे देशों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगेंगे। वीजा-मुक्त यात्रा पर कार्रवाई दुनियाभर में वीजा नियमों को कड़ा करने के लिए एक मिसाल कायम कर सकती है। एक तरफ सऊदी के इन नियमों की आलोचना हो रही है तो वहीं काफी लोगों ने इनका समर्थन भी किया है। सऊदी अरब में बीते साल हज में गर्मी के चलते एक हजार से ज्यादा मौतें हुई थीं। इसकी वजह बिना परमिशन के लिए हज पर आए लोगों को माना गया। ऐसे में सऊदी की कोशिश है कि ऐसी स्थिति फिर से होने से रोकी जाए। recent visitors 50

सुप्रीम कोर्ट चुनाव से पहली मुफ्त योजनाओं पर भड़का, फ्रीबीज के कारण लोग काम करने तैयार नहीं हैं,

नई दिल्ली चुनाव से पहले मुफ्त योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने जमकर नाराजगी जाहिर की है। शीर्ष न्यायालय का कहना है कि Freebies की वजह से लोग काम करने को तैयार नहीं है। अदालत बुधवार को शहरी इलाकों में बेघरों से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही थी। फिलहाल, इस मामले पर सुनवाई को 6 हफ्तों के लिए स्थगित कर दिया गया है। शीर्ष न्यायालय में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच शहरी इलाकों में बेघरों को घर के अधिकार से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस गवई ने कहा, 'दुर्भाग्यवश, मुफ्त की इन सुविधाओं के कारण… लोग काम करने को तैयार नहीं हैं। उन्हें मुफ्त राशन मिल रहा है। उन्हें बिना कोई काम किए ही धनराशि मिल रही है।' बेंच ने कहा, 'हम उनके प्रति आपकी चिंता को समझते हैं, लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि वह भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और उन्हें भी देश के विकास में योगदान का मौका मिले।' अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में बेघरों के लिए आश्रय की व्यवस्था समेत विभिन्न मुद्दों का समाधान किया जाएगा। पीठ ने अटॉर्नी जनरल को केंद्र सरकार से यह पूछने का निर्देश दिया कि शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन कितने समय में लागू किया जाएगा। recent visitors 45

बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से स्थापित की लोकतांत्रिक व्यवस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार वंचित वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में गरीब परिवारों के लिए बनेंगे 10 लाख आवास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से स्थापित की लोकतांत्रिक व्यवस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी का संघर्ष पूर्ण जीवन प्रत्येक युवा के लिए प्रेरणा स्त्रोत संत रविदास ने देश-धर्म पर स्वाभिमान और प्रभु भक्ति के साथ कर्म को सर्वाधिक महत्व दिया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत शिरोमणि गुरू रविदास की जयंती पर दी बधाई और शुभकामनाएं हिंदी भवन में आयोजित समारोह को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संत शिरोमणि गुरू रविदास की जयंती पर बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि राज्य सरकार वंचित वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। सबको आगे बढ़ने का मौका मिले, सबकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो, गरीबों की गरीबी दूर हो, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को सम्मान मिले, किसानों का मान बढ़ें और सभी लोग बराबरी से रहें, राज्य सरकार इस उद्देश्य से हर वर्ग के लिए योजनाएं और कार्यक्रम संचालित कर रही है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में दी गई लोकतांत्रिक व्यवस्था के आधार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जीवन की कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए प्रधानमंत्री बनें। उनसे यह प्रेरणा मिलती है कि गरीब से गरीब परिवार के बच्चे भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बन सकते हैं। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने समाज को शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और समानता का अधिकार दिया। जन-जन को इन सब अधिकारों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार निरंतर सक्रिय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती पर हिंदी भवन में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन और कन्या-पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और संत रविदास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। नवयुवक अहिरवार समाज सुधार संघ भोपाल एवं चर्मकार विकास संघ भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मारिका और रविदास चालीसा का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आयोजनकर्ताओं ने गजमाला पहनाकर स्वागत कर स्मृति-चिन्ह भेंट किया। कार्यक्रम में भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, भोपाल दक्षिण-पश्चिम के विधायक भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, रवींद्र यती और समाज बंधु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी "सबका साथ-सबका विकास" की अवधारणा के साथ समाज के हर वर्ग के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कृत संकल्पित हैं। राज्य सरकार उनके मार्गदर्शन में इस दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश ही नहीं देश में सभी को यह अनुभूति है कि मध्यप्रदेश प्रगति पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसमें प्रदेश के सामान्यजन की मेहनत का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सागर में संत शिरोमणि रविदास जी का भव्य स्मारक आकार ले रहा है। उन्होंने उज्जैन स्थित संत रविदास जी के गुरूद्वारे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थल संत रविदास के उज्जैन आगमन की स्मृति को अब भी जीवंत करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजकों की मांग पर कहा कि सामाजिक गतिविधियों के संचालन के लिए भोपाल में व्यवस्था की जाएगी। साथ ही सभी पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुसार पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। राज्य सरकार जल्द ही प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में गरीब परिवारों के लिए 10 लाख आवासों का निर्माण आरंभ करने जा रही है। गाँवों में भी पुन: सर्वे कराकर गरीबके अपने पक्के घर का सपना साकार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "मन चंगा तो कठौती में गंगा" का संदेश देने वाले संत रविदास का जीवन इस बात का प्रतीक था कि व्यक्ति के भीतर ही भगवान विद्यमान हैं और भक्ति-साधना से व्यक्ति का उद्धार हो सकता है। उनका मानना था कि भगवान के दरबार में कोई ऊंच-नीच नहीं है। संत रविदास ने देश-धर्म पर स्वाभिमान और प्रभु भक्ति के साथ कर्म को सर्वाधिक महत्व दिया। उन्होंने परिश्रम के आधार पर जीवन संचालित करने और समाज की बेहतरी के लिए योगदान देने का संदेश दिया। संत रविदास ने बताया कि व्यक्ति के सत्कर्म, सद्भावना, परस्पर विश्वास और प्रेम का भाव ही जीवन में सर्वोपरि है। उनके इन उदात्त विचारों के परिणामस्वरूप ही उन्हें समाज में संत शिरोमणि की उपाधि से विभूषित किया गया। विधायक भगवानदास सबनानी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।   recent visitors 43