एमपी में 1 मई से होंगे कर्मचारियों के तबादले: अगले हफ्ते आएगी ट्रांसफर नीति

Employees will be transferred in MP from May 1: Transfer policy will come next week भोपाल,सुशील दामले । मध्यप्रदेश में करीब ढाई साल बाद 1 से 31 मई तक कर्मचारियों के तबादले होंगे। मंगलवार को डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कैबिनेट बैठक की ब्रीफिंग के दौरान यह जानकारी दी। बैठक शुरू होने से पहले एक न्यूज एजेंसी से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी तबादलों से रोक हटाने के संकेत दिए थे। सीएम ने कहा, हमारी कोशिश रहेगी कि तबादला नीति अगली कैबिनेट बैठक तक आ जाए। से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी तबादलों से रोक हटाने के संकेत दिए थे। सीएम ने कहा, हमारी कोशिश रहेगी कि तबादला नीति अगली कैबिनेट बैठक तक आ जाए। बता दें, मध्यप्रदेश के कर्मचारी लंबे समय से तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल के अंत में कुछ विशेष मामलों में तबादलों की छूट दी गई थी, लेकिन इससे कई कर्मचारी वंचित रह गए थे। सीएम चाहते थे शैक्षणिक सत्र के बाद हों तबादलेएक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि पिछले साल मुख्यमंत्री की यह मंशा थी कि शैक्षणिक सत्र के बीच में तबादले न हों। इसकी दो वजह भी बताईं… सत्र के बीच किसी शिक्षक का तबादला होता है, तो उस स्कूल के छात्रों का कोर्स प्रभावित होता है। शिक्षक को भी नई संस्था में जाने के बाद रुटीन में आने में समय लगता है। दूसरे विभागों के कर्मचारियों के बीच में तबादले होते हैं, तो उनके बच्चों को स्कूल शिफ्ट करने में परेशानी होती है। कर्मचारी और परिवार सत्र खत्म होने तक दूर-दूर रहते हैं। आखिरी बार अक्टूबर 2022 में हुए थे तबादलेबता दें, एमपी में 2022 के बाद अब तबादले हाेंगे। तब जून 2021 की तबादला नीति के आधार पर तबादले हुए थे। प्रदेश में 7.50 लाख कर्मचारी हैं। इनमें से डेढ़ से दो लाख कर्मचारी तबादलों से प्रभावित होते हैं। जनवरी 2025 में सरकार ने गंभीर बीमारी या कारण वाले मामलों में तबादले में छूट दी थी। ये तबादले प्रभारी मंत्री की सहमति से किए गए थे। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 78

22 अप्रैल तक की बात करें तो आईपीएल के 18वें सीजन में चार टीमों की हालत ज्यादा ही खराब

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल 2025 के सीजन का आधा सफर समाप्त हो चुका है। दूसरा हाफ शुरू हो चुका है और 22 अप्रैल तक की बात करें तो आईपीएल के 18वें सीजन में चार टीमों की हालत ज्यादा ही खराब है। इनमें चेन्नई सुपर किंग्स, सनराइजर्स हैदराबाद, राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स का नाम शामिल है। इन टीमों ने इस सीजन कम से कम 5-5 मैच गंवाए हैं। इन टीमों के लिए प्लेऑफ्स में पहुंचना बहुत ज्यादा कठिन हो गया, खासकर उन टीमों के लिए जो 6-6 मैच हार चुकी है। सबसे पहले बात पॉइंट्स टेबल में सबसे आखिरी पायदान पर चल रही चेन्नई सुपर किंग्स की करते हैं, जो 8 में से 6 मुकाबले हार चुकी है। टीम प्लेऑफ्स की रेस में है, लेकिन इसके लिए टीम को बाकी के 6 मुकाबले जीतने होंगे। अगर टीम एक भी मैच हार जाती है तो प्लेऑफ्स की रेस से लगभग बाहर हो जाएगी। वहीं, नौवें नंबर पर विराजमान सनराइजर्स हैदराबाद ने अब तक खेले सात मैचों में से 5 मुकाबले गंवाए हैं। इस तरह एसआरएच के पास अभी भी खुद के दम पर प्लेऑफ्स में पहुंचने का मौका है। इसके लिए टीम को बाकी बचे सात मैचों में से कम से कम 6 मुकाबले जीतने होंगे और नेट रन रेट का भी ख्याल रखना होगा। राजस्थान की भी हालत खराब पॉइंट्स टेबल में आठवें नंबर पर चल रही राजस्थान रॉयल्स की बात करें तो इस सीजन टीम 8 में से 2 ही मैचों में जीत दर्ज कर कर पाई है। अभी भी टीम के 6 मुकाबले बाकी हैं और 6 मैचों को जीतकर टीम के खाते में 16 अंक हो सकते हैं और इस तरह टीम प्लेऑफ्स के लिए क्वॉलिफाई कर जाएगी, लेकिन पहले हाफ की परफॉर्मेंस को देखकर लगता नहीं है कि आरआर इस बार टॉप 4 में फिनिश कर पाएगी। मौजूदा चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स की भी हालत इस सीजन पतली लग रही है। टीम 8 मैचों में से सिर्फ तीन मुकाबले ही जीत पाई है। पांच मैचों में हार मिल चुकी है। टीम अभी भी 18 अंकों तक पहुंच सकती है, लेकिन जिस तरह का प्रदर्शन उसके मध्य क्रम और निचले क्रम के बल्लेबाज कर रहे हैं, उसे देखते हुए कहा नहीं जा सकता कि केकेआर टॉप 4 में बने रहने लायक है। हालांकि, क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, यहां कुछ भी हो सकता है तो किसी भी टीम को कमतर नहीं आंका जा सकता। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 18

कोलकाता में केवल दो मैचों के लिए पैनल में शामिल किया गया था, जो खत्म हो चुके हैं, हर्षा भोगले ने क्यों नहीं की कमेंट्री?

नई दिल्ली मशहूर कमेंटेटर हर्षा भोगले ने उन अटकलों को खारिज कर दिया है कि उन्हें बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) की शिकायत के कारण सोमवार को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और गुजरात टाइटन्स के बीच खेले गए आईपीएल 2025 मैच से दूर रखा गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें कोलकाता में केवल दो मैचों के लिए पैनल में शामिल किया गया था, जो खत्म हो चुके हैं। हर्षा भोगले ने ये भी बताया है कि दो मैचों में से उन्होंने एक ही मैच में कमेंट्री की। एक मैच में वे अनुपस्थित रहे। इसके पीछे का कारण भी उन्होंने बताया। उनका यह स्पष्टीकरण सीएबी के सचिव नरेश ओझा द्वारा लगभग 10 दिन पहले भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) को भेजे गए पत्र के मीडिया रिपोर्टों में सामने आने के एक दिन बाद आया है। पत्र में सीएबी ने हर्षा भोगले और न्यूजीलैंड के साइमन डूल को कोलकाता में मैचों के लिए कमेंट्री पैनल से हटाने के लिए कहा था, क्योंकि इन दोनों ने कहा था कि ईडन गार्डन्स की पिच स्थानीय फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स की मदद नहीं कर रही थी। इस पर हर्षा भोगले ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि केकेआर वर्सेस जीटी मैच उनके रोस्टर में नहीं था। उन्होंने लिखा, ‘‘इसको लेकर कुछ अनुचित निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं कि मैं कल के मैच में के लिए कोलकाता में क्यों नहीं था। सीधे शब्दों में कहें तो, यह उन मैचों की सूची में नहीं था, जिनमें मुझे कमेंट्री करनी थी। मुझसे पूछने से समस्या का समाधान हो जाता। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही रोस्टर तैयार कर लिया जाता है। मुझे कोलकाता में दो मैचों के लिए चुना गया था। मैं पहले मैच के लिए वहां था और परिवार के सदस्य की बीमारी के कारण दूसरे मैच के लिए नहीं पहुंच पाया था।’’ केकेआर को सोमवार को ईडन गार्डन्स में खेले गए मैच में गुजरात टाइटंस से 39 रन से हार का सामना करना पड़ा था। केकेआर के कप्तान अजिंक्य रहाणे और मुख्य कोच चंद्रकांत पंडित दोनों ने अपने घरेलू मैदान पर स्पिनरों के अनुकूल पिच नहीं मिलने पर निराशा व्यक्त की थी। कोलकाता की पिच पर स्पिनरों को मदद नहीं मिल रही थी। यहां तक जीटी के खिलाफ केकेआर के स्पिनर एक विकेट तक नहीं निकाल पाए। हालांकि, विपक्षी टीम के स्पिनरों को पिच से मदद मिली। साई किशोर, राशिद खान और वॉशिंगटन सुंदर ने केकेआर के खिलाफ अच्छी गेंदबाजी की। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 27

अशोक गहलोत ने कहा- गांधी परिवार के खिलाफ षड्यंत्र रच रही केंद्र सरकार, केंद्रीय एजैंसियों का कर रहे दुरुपयोग

शिमला देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले गांधी परिवार के खिलाफ केंद्र की भाजपा सरकार लगातार षड्यंत्र रच रही है। केंद्रीय एजैंसियों ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग कर झूठे मामले बनाए जा रहे हैं। यह बात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान कही। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह सहित अन्य नेता मौजूद रहे। अशोक गहलोत ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नैशनल हैराल्ड अखबार की भी आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका रही है और अखबार को पुनर्जीवित करने के लिए कांग्रेस ने प्रयास किया। ईडी द्वारा सोनिया और राहुल गांधी को नैशनल हैराल्ड मामले में 11 साल बाद चार्जशीट करना दुर्भाग्यपूर्ण है और विपक्षी पार्टी को भाजपा दुश्मन की तरह देख रही है जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। कांग्रेस ने देश में विरासत को बचाने का काम किया अशोक गहलोत ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। देश आज किस दिशा में जा रहा है। विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए ईडी और सीबीआई का प्रयोग कर झूठे मामले बनाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने देश में विरासत को बचाने का काम किया है। गांधी परिवार का देश की आजादी में योगदान रहा है, ऐसे में नैशनल हैराल्ड मामले में 5 हजार करोड़ के घोटाले के बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। नैशनल हैराल्ड में कोई हितधारक एक रुपए का फायदा भी नहीं उठा सकता है। इलैक्ट्रॉल बॉन्ड मामले में भी यही हुआ था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ यह भाजपा को भूलना नहीं चाहिए। भाजपा की वाॅशिंग मशीन में धुलकर साफ हो जाते हैं भ्रष्टचारी नेता अशोक गहलोत ने कहा कि जितना भी भ्रष्टचारी नेता हो अगर भाजपा में शामिल हो जाए तो वह भाजपा की वाॅशिंग मशीन में धुल कर साफ हो जाते हैं। लोकतंत्र में कोई स्थायी नहीं है मोदी भी परमानैंट नहीं हैं, सता आती है और जाती है, लेकिन इस तरह से विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 14

संवैधानिक संस्थाओं का अपमान और झूठ-फरेब की राजनीति कांग्रेस की पुरानी आदत : राजपाल सिंह सिसौदिया

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कांग्रेस नेत्री कुमारी शैलजा की पत्रकार-वार्ता पर दी प्रतिक्रिया कानून का सामना करने से क्यों घबरा रहा कांग्रेस का शाही परिवार:  राजपाल सिंह सिसौदिया संवैधानिक संस्थाओं का अपमान और झूठ-फरेब की राजनीति कांग्रेस की पुरानी आदत : राजपाल सिंह सिसौदिया -नेशनल हेराल्ड मामले में चोरी और सीनाजोरी कर रही कांग्रेस पार्टी – राजपाल सिंह सिसौदिया भोपाल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कांग्रेस नेत्री कुमारी शैलजा की पत्रकार-वार्ता पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा झूठ, छल-कपट की राजनीति करती रही है। नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर उसका विरोध चोरी और सीनाजोरी को दर्शाता है। इस मामले में कांग्रेस के लोग कभी ईडी और आयकर के दफ्तर पर प्रदर्शन करते हैं, तो कभी इन संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने के लिए इन पर सवाल उठाते हैं। सिसौदिया ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की चार्जशीट में श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम आना पूरी तरह से तकनीकी और कानूनी मामला है। इसलिए सोनिया और राहुल गांधी को तकनीकी और कानूनी आधार पर अपना पक्ष अदालत में रखना चाहिए, लेकिन समझ में नहीं आता कि कांग्रेस का शाही परिवार इस मामले में कानून का सामना करने से घबरा क्यों रहा है? आरोप लगाने से पहले आत्मविश्लेषण करे कांग्रेस भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले की शुरुआत 2012 में हुई थी, उस समय देश में कांग्रेस की ही सरकार थी। एक जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 2013 में इस मामले में सुनवाई शुरू की और 2013 में ही केस दर्ज हुआ। उस समय देश में कांग्रेस की ही सरकार थी। ऐसे में ईडी की चार्जशीट में श्रीमती सोनिया गांधी, राहुल गांधी और सैम पित्रोदा आदि के जो नाम आए हैं, तो इन नामों को कौन सामने लाया? मोदी सरकार पर आरोप लगाने की बजाय कांग्रेस पार्टी को यह आत्मविश्लेषण करना चाहिए कि इन लोगों के खिलाफ किसने ये षडयंत्र रचा था? कार्पोरेट षडयंत्र की परिणति है नेशनल हेराल्ड मामला भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कहा कि नेशनल हेराल्ड अखबार 1937 में शुरू हुआ और 5000 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इसके शेयरहोल्डर थे। 2008 में नेशनल हेराल्ड बंद हो गया।  उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड रुपए का लोन इस अखबार को दिया। नेशनल हेराल्ड की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी, तो कार्पोरेट षडयंत्र करके यंग इंडिया नाम की कंपनी बनाई गई, जिसमें 38-38 प्रतिशत शेयर श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी के थे। बाकी मोतीलाल वोरा व अन्य लोगों के थे। कांग्रेस एक पॉलीटिकल पार्टी है और यह जानना जरूरी है कि एक पॉलीटिकल पार्टी किसी प्राइवेट बॉडी को फंड कैसे दे सकती है? इसके बाद नेशनल हेराल्ड के 90 करोड़ के शेयर यंग इंडिया कंपनी को ट्रांसफर कर दिए गए, जिसके शेयर होल्डर्स श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी है। इस तरह यह पूरी संपत्ति एक परिवार के हाथ में आ गई। यह बताया गया था कि यंग इंडिया एक चैरिटेबल संस्था है, लेकिन यह क्या चैरिटी करती है, इसका किसी को कुछ नहीं पता। इस तरह से जो अखबार आजादी के आंदोलन में लड़ने वाले लोगों की आवाज को ताकत देने के लिए स्थापित किया गया था, उसे नेहरू खानदान की जागीर बना दिया। स्वतंत्रता सेनानियों ने किया था विरोध भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसौदिया ने कहा कि नेशनल हेराल्ड के स्वामित्व वाली कंपनी ऐसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की स्थापना देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने की थी। इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शेयर होल्डर्स ने कंपनी के अधिग्रहण का विरोध किया था, आपत्ति भी दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि शेयर धारकों से पूछे बिना कंपनी को किसी को भी कैसे दे दिया गया? उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता जी ने तो अधिकारिक रूप से कहा था कि नेशनल हेराल्ड के लिए मैंने मेहनत करके पार्टी कार्यकर्ताओं से पैसा जुटाया था और यह अखबार देश की आवाज उठाने के लिए स्थापित किया गया था। लेकिन इसे नेहरू खानदान की आवाज कैसे बना दिया गया? लेकिन कांग्रेस के एक परिवार के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के विरोध तथा आपत्तियों की भी परवाह नहीं की गई। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 27

आम लोगों के लिए बड़ी खबर: गैस सिलेंडर को लेकर सरकार ने नए नियम किए लागू

नई दिल्ली LPG सिलेंडर आज के समय में सभी लोगों के लिए बड़ी जरूरत बन चुका है। गैस सिलेंडर को लेकर सरकार ने नए नियम लागू कर दिए हैं। दरअसल, केंद्र सरकार आए दिन राशन कार्ड व गैस सिलेंडर से जुड़े नियमों में बदलाव करती रहती है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि, केंद्र सरकार ने गैस सिलेंडर को लेकर नए नियम पूरे देश में लागू कर दिए हैं, जिनका असर सभी वर्गों पर पड़ेगा। अगर आप भी गैस सिलेंडर भरवाने जा रहे हैं तो पहले लागू किए नए नियम जान लें। ये नियम केंद्र सरकार की योजना राशन कार्ड और गैस सिलेंडर 2025 के लिए 21 अप्रैल 2025  से शुरू हो रहे हैं। आपको बता दें कि इस योजना की अवधि 21 अप्रैल से 31 दिसंबर 2028 तक है, जिसमें प्रति परिवार 6-8 गैस सिलेंडर हर वर्ष मिलेंगे।  गैस सिलेंडर बुकिंग की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। जारी किए गए नियमों के तहत गैस सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी व सब्सिडी प्रक्रिया को डिजीटल कर दिया गया है। KYC अपडेट करवाना जरूरी अब गैस सिलेंडर की बुकिंग से पहले उपभोक्ता को अपनी KYC अपडेट करवानी होगी। इसके लिए उपभोक्ता को अपना आधार कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर व अन्य जानकारी एजेंसी को अपडेट करवानी होगी। इसके लिए आपका आधार नंबर मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए। जिस उपभोक्ता का KYC अपडेट नहीं होगा उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। OTP वेरिफिकेशन जरूरी बुकिंग के बाद गैस सिलेंडर की डिलीवरी के लिए नियम लागू हुआ है। दरअसल, गैस सिलेंडर की डिलीवरी की दौरान OTP वेरिफिकेशन जरूरी है। आपको बता दें कि ये OTP आपको गैस सिलेंडर बुकिंग के दौरान आया है, जिसे डिलीवरी ब्वॉय को देना होता है। अगर कोई उपभोक्ता अपना OTP नहीं देता हो उसे सिलेंडर नहीं मिलेगा। सब्सिडी अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी के बाद तीसरा नियम लागू होता सब्सिडी पर। गैस सिलेंडर की सब्सिडी का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता का बैंक खाता, आधार व गैस कनेक्श लिंक होना चाहिए। बता दें कि सब्सिडी की रक्म में सरकार समय-समय पर बदलाव कर सकती है। इसकी कोई भी रकम तय नहीं है। ये भी बता दें कि जरूरत से ज्यादा गैस सिलेंडर बुक करवाने पर सब्सिडी नहीं मिलेगी। नियमों के फायदे लागू किए कए नियमों के सबसे बड़ा फायदा ये है कि, सब कुछ डिजिटल होने से फर्जीवाड़े से बचा जा सकता है। वहीं OTP से गलत डिलीवरी व चोरी का कोई डर नहीं रहेगा। इसके साथ ही सब्सिडी सीधा उपभोक्ता के खाते में आ है। जरूरी दस्तावेज मोबाइल नंबर आधार कर्ड सब्सिडी के लिए इंकम सर्टीफिकेट बैंक खाता गैस कनेक्शन बुक व e-KYC अपडेट।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 28

‘लहसुन सब्जी है, मसाला नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला, 8 साल पुराना विवाद हुआ खत्म, सरकारी प्रक्रिया से नीलामी का निर्देश

 इंदौर  लहसुन की नीलामी फल-सब्जी की तरह आढ़तीये नहीं करवा सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय देते हुए फल-सब्जी को मसाला श्रेणी में मानते हुए सरकारी प्रक्रिया से नीलामी का निर्देश दे दिया है। इसी के साथ आठ वर्षों से ज्यादा समय से चले आ रहे विवाद का भी अंत हो गया है। इंदौर और प्रदेशभर की मंडियों में फिर से लहसुन की नीलामी की प्रक्रिया बदल जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण पर निर्णय देते हुए प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड के 13 फरवरी 2015 को जारी आदेश को अपास्त कर दिया। केस, फैसला और आगे क्या होगा     इंदौर मंडी के व्यापारी मुकेश सोमानी और बिजलपुर के किसान कैलाश मुकाती सर्वोच्च न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे थे। किसान विरोध कर रहे थे कि लहसुन जल्द खराब होने वाली कमोडिटी है और इसे सब्जियों के साथ किसानों की मर्जी से नीलाम करवाया जाना चाहिए।     किसान चाहे तो सरकारी कर्मचारियों से नीलामी करवाए या आढ़तियों से। हाई कोर्ट ने किसानों के पक्ष में निर्णय दिया था। बाद में सोमानी ने इस पर स्थगन ले लिया था। इसके बाद बीते दिनों स्थगन के खिलाफ किसान मुकाती सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।     इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन को हटा दिया। किसानों की मर्जी से नीलामी शुरू भी हो गई। हालांकि मामले पर सुनवाई चलती रही। अब दिल्ली में अंतिम बहस के बाद कोर्ट ने निर्णय देते हुए लहसुन को मसाला श्रेणी में आठवीं अनुसूची में मानते हुए सरकारी कर्मचारियों से नीलामी को सही करार दिया।     इसी के साथ अब किसानों के पास मर्जी से अपनी उपज बेचने के कानूनी रास्ते बंद हो गए हैं। जल्द ही थोक मंडी में फिर से लहसुन की प्राइवेट नीलामी पर रोक लगने का आदेश जारी हो सकता है। 'लहसुन सब्जी है, मसाला नहीं' सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मप्र हाईकोर्ट की डिवीजन बेच के निर्णय को बरकरार रखा है. कोर्ट ने कहा कि लहसुन जल्द खराब होने वाली कमोडिटी है, ऐसे में इसे सब्जियों की श्रेणी में रखा जाएगा. किसान अपनी सुविधा और दाम के अनुसार इसकी बिक्री करवा सकते हैं.मंडी के बने सरकारी नियम-कायदों में लहसुन को सब्जी की श्रेणी में ही रखा जाएगा. सरकारी मर्जी से चल रही थी नीलामी लहसुन की नीलामी किसानों की मर्जी से नहीं बल्कि सरकारी मर्जी से चल रही थी. बीते साल फरवरी में इंदौर में लहसुन की सीधी नीलामी करने से आढ़तियों और व्यापारियों ने रोक लगा दी थी. इसके साथ ही नियम लागू किया गया था कि अनाज-मसालों की तरह की लहसुन की नीलामी सरकारी मंडी में सरकारी कर्मचारी ही करेंगे. इस फैसले के बाद कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुआ था. 8 सालों से चल रहा विवाद मध्यप्रदेश में 8 सालों से लहसुन पर विवाद चल रहा था. किसान संगठनों के आवेदन के बाद मप्र मंडी बोर्ड ने लहसुन को 2015 में लहसुन को सब्जी की श्रेणी में शामिल कर लिया था. लेकिन कुछ समय बाद ही कृषि विभाग ने इस आदेश को रद्द कर दिया और लहसुन को मसाले की श्रेणी में डाल दिया. साल 2016 में मंडी व्यापारियों का एसोसिएशन हाईकोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने 2017 में लहसुन को सब्जी में माना और किसानों की मर्जी से नीलामी की छूट दी. फिर बदला फैसला इस फैसले के बाद एक व्यापारी ने हाईकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका दायर की, हाइकोर्ट ने फिर से लहसुन को मसालों की श्रेणी में डाल दिया. इसके बाद किसान कैलाश मुकाती ने किसानों की तरफ से हाईकोर्ट की डिवीजनल बेंच में अपील की. साल 2024 में डिवीजनल बेंच ने फैसला दिया कि लहसुन सब्जी है और किसान इसे अपनी मर्जी जहां चाहे बेच सकता है. व्यापारी मुकेश सोमानी फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और हाई कोर्ट डिवीजनल बेंच के निर्णय पर स्थगन ले लिया. लगी सुप्रीम मुहर अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के स्थगन को हटाकर किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डिवीजनल बेंचे के आदेश को बरकरार रखा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद किसान अपनी सुविधा और कीमत के हिसाब से लहसुन की बिक्री करवा सकते हैं.    Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 25