Friday, July 10, 2026 1:20 pm

बैंक एफडी घोटाले में राजेंद्र भारती पर फैसला थोड़ी देर में, तय होगा दतिया उपचुनाव का भविष्य

Verdict on Rajendra Bharti in the bank FD scam expected shortly; the future of the Datia by-election will be determined. Datia By Election High Court: विधानसभा उपचुनाव के बीच दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला शुक्रवार को आने की उम्मीद है। बैंक एफडी घोटाले में गुरुवार को सभी पक्षों की दलीलें सुनकर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। यह निर्णय भारती के राजनीतिक भविष्य व दतिया उपचुनाव में भाजपा-कांग्रेस की रणनीति को लेकर अहम माना जा रहा है। बता दें, दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने भारती को 3 वर्ष की सजा सुनाई जिसके बाद विधानसभा से उनकी सदस्यता खत्म कर दी गई थी। पी. चिदंबरम ने रखा पक्षवरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने भारती का पक्ष रखा। कहा, मामला आपराधिक नहीं, सिविल प्रकृति का है। बैंक स्वयं पहले इसको सिविल मानते हुए सुप्रीम कोर्ट गया था, जहां दोनों पक्षों में समझौता भी हुआ था। कहा, समझौते की राशि अब तक नहीं मिली और संबंधित एफडी अब भी बैंक में सुरक्षित है। recent visitors 5

भू-माफियाओं के हौसले बुलंद: मध्य प्रदेश के एकमात्र यहूदी कब्रिस्तान में तोड़फोड़ और कब्जे पर उठे सवाल

Land mafia emboldened: Questions raised over vandalism and encroachment at Madhya Pradesh’s only Jewish cemetery. विशेष संवाददाता: जितेंद्र श्रीवास्तव जबलपुर। मध्य प्रदेश का एकमात्र यहूदी कब्रिस्तान अब वैश्विक चर्चा में है। जबलपुर स्थित लगभग सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक स्थल पर कथित अतिक्रमण, तोड़फोड़ और भूमि कब्जे के आरोपों का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसी बीच इजरायल में बसे भारतीय मूल के यहूदियों ने भी विरासत बचाने के लिए अपनी सरकार और राजनयिक मिशनों से हस्तक्षेप की मांग की है। इसके साथ ही यह विवाद स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय बन गया है। रानीताल की खामोश जमीन पर दफन इतिहास आज अदालत में संरक्षण की उम्मीद लगाए बैठा है। यह लड़ाई केवल कुछ कब्रों की नहीं, बल्कि उस साझा सांस्कृतिक विरासत की है, जिसने कभी जबलपुर को विविध आस्थाओं का सम्मान करने वाली संस्कारधानी के रूप में पहचान दिलाई है। अब निगाहें हाई कोर्ट की सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यहूदी समुदाय की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि कब्रिस्तान की सुरक्षा, अतिक्रमण हटाने और विरासत संरक्षण संबंधी याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है। ब्रिटिश शासनकाल में जबलपुर में करीब 200 यहूदी परिवार रहते थे। उनके अंतिम संस्कार के लिए तत्कालीन जिला प्रशासन ने लगभग पांच हजार वर्गफीट भूमि आवंटित की थी। आज इस परिसर में 100 से अधिक कब्रें हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे यहूदियों की कब्रें भी हैं, जिन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा दी थी। आजादी के बाद अधिकांश परिवार इजराइल चले गए और अब शहर में केवल तीन-चार परिवार शेष हैं। उनका आरोप है कि भू-माफिया इस ऐतिहासिक स्थल पर कब्जे की कोशिश कर रहा है। recent visitors 5

भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का बेटा विशेष अदालत से फरार घोषित, कोर्ट ने जारी किया स्थायी गिरफ्तारी वारंट

BJP MLA Pritam Lodhi’s son declared absconder by special court; court issues permanent arrest warrant. ग्वालियर। ग्वालियर की विशेष एससी-एसटी अदालत ने भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी के बेटे दिनेश लोधी को फरार घोषित करते हुए उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि प्रकरण के रिकॉर्ड के मुख्य पृष्ठ पर लाल स्याही से “अभियुक्त फरार है” अंकित किया जाए और प्रकरण को नियमानुसार सुरक्षित रखा जाए। दिनेश लोधी (40), निवासी ग्राम जलालपुर, के विरुद्ध पुरानी छावनी थाने में एससी-एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज है। न्यायालय के रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ 28 दिसंबर 2023 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन उसके बाद भी वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया। गुरुवार को सुनवाई के दौरान पुरानी छावनी थाने के प्रधान आरक्षक संजय द्विवेदी ने अदालत में वारंट की अदम तामील रिपोर्ट और तस्दीक पंचनामा पेश किया। रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद विशेष न्यायाधीश नवीन कुमार शर्मा ने अभियुक्त को फरार घोषित करते हुए उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश पारित किए। recent visitors 7

पावर कॉरिडोर: मंत्री-सचिव की तकरार से लेकर वीआईपी प्रोटोकॉल तक, सत्ता के गलियारों की बड़ी हलचल

Power Corridors: Major stirrings in the corridors of power—from clashes between ministers and secretaries to VIP protocol issues. भोपाल। मध्य प्रदेश के सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक ओर मंत्री और विभागीय सचिव के बीच बढ़ती दूरी ने नए प्रशासनिक समीकरणों को जन्म दे दिया है, तो दूसरी ओर खजुराहो एयरपोर्ट पर कलेक्टर की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इसी बीच एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी ने अहम पद पर नियुक्त होकर नया रिकॉर्ड बनाया है, जबकि मुख्यमंत्री और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की मुलाकात भी कई अटकलों को हवा दे रही है। मंत्री ने सचिव हटाने की मांग, अब मुख्यमंत्री के फैसले पर नजर प्रदेश सरकार की एक महिला मंत्री ने अपने विभाग की सचिव को हटाने की मांग सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने रख दी है। सूत्रों के मुताबिक मंत्री चाहती हैं कि उनके विभाग में सचिव स्तर के बजाय अपर मुख्य सचिव (ACS) या प्रमुख सचिव (PS) स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जाए। बताया जा रहा है कि विभाग की 2005 बैच की आईएएस सचिव के साथ मंत्री के कार्यशैली को लेकर लंबे समय से मतभेद चल रहे हैं। हाल ही में विभाग में हुए तबादलों के दौरान भी दोनों के बीच असहमति खुलकर सामने आई थी। सूत्रों का कहना है कि मंत्री ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर सचिव को तत्काल हटाने का आग्रह किया है। अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री मंत्री की मांग स्वीकार करते हैं या वर्तमान व्यवस्था को बरकरार रखते हैं। खजुराहो एयरपोर्ट पर कलेक्टर की मौजूदगी से बढ़ा सियासी तापमान देश के प्रमुख उद्योगपति अनंत अंबानी के खजुराहो आगमन के दौरान छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल की एयरपोर्ट पर मौजूदगी ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री राजा पटेरिया ने राज्यपाल और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कलेक्टर की शिकायत की है। उनका आरोप है कि निजी दौरे पर आए व्यक्ति को सरकारी प्रोटोकॉल उपलब्ध कराना और प्रशासनिक संसाधनों का उपयोग करना अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का उल्लंघन है। हालांकि 2015 बैच के आईएएस अधिकारी पार्थ जायसवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वे किसी निजी स्वागत के लिए नहीं पहुंचे थे और तस्वीरों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है।इस मामले पर जहां विपक्ष सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है, वहीं कुछ लोग इसे संभावित निवेश और जिले के विकास की दृष्टि से उचित कदम भी मान रहे हैं। आईएएस आलोक सिंह के नाम जुड़ा नया प्रशासनिक रिकॉर्ड हालिया प्रशासनिक फेरबदल में 2008 बैच के आईएएस अधिकारी आलोक सिंह को महानिरीक्षक पंजीयन के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कई मायनों में खास मानी जा रही है।बताया जाता है कि पिछले तीन से साढ़े तीन दशकों से इस महत्वपूर्ण पद पर मुख्यतः सीधी भर्ती वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की ही नियुक्ति होती रही है। आलोक सिंह संभवतः पहले प्रमोटी आईएएस अधिकारी हैं जिन्हें इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया है। जानकार बताते हैं कि इससे पहले केवल स्वर्गीय मोती सिंह इस परंपरा से अलग अपवाद रहे थे और वे इस पद पर दो बार नियुक्त होने वाले दुर्लभ अधिकारियों में शामिल थे। ऐसे में आलोक सिंह की नियुक्ति प्रशासनिक हलकों में विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। मुख्यमंत्री और अशोक वर्णवाल की मुलाकात के कई मायने हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के बीच हुई वन-टू-वन मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी हुई है।हालांकि मुलाकात में क्या बातचीत हुई इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि आगामी प्रशासनिक फेरबदल और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा हुई हो सकती है। 1991 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक वर्णवाल जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। माना जा रहा है कि सेवानिवृत्ति से पहले या उसके आसपास उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ऐसे में मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पावर कॉरिडोर की चर्चा प्रदेश की नौकरशाही और राजनीति में इन चार घटनाओं ने नए संकेत दिए हैं। मंत्री-सचिव विवाद, वीआईपी प्रोटोकॉल पर उठे सवाल, प्रमोटी आईएएस की ऐतिहासिक नियुक्ति और मुख्यमंत्री की वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात—इन सभी घटनाओं पर आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी रहेगी। recent visitors 7