प्रियंका गांधी- ‘देशद्रोह के लिए ज्ञानेश कुमार पर चले आपराधिक मुकदमा’, SIR विवाद पर साधा निशाना

Priyanka Gandhi targets Gyanesh Kumar over the ‘SIR’ controversy: ‘Criminal case should be filed against him for sedition.’

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वे वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ और वोटरों के नाम हटाने के लिए जिम्मेदार पाए जाते हैं तो उन पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

उनकी यह टिप्पणी अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के एक दिन बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से जुड़े फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी।

‘अगर ऐसा किया है तो ये एक आपराधिक कृत्य है’
केरल के वायनाड में पत्रकारों से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, “जो कोई भी हमारे चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करता है, वह देश के खिलाफ देशद्रोह करता है। हमारा रुख बिल्कुल साफ है। मुझे नहीं लगता कि उस पद पर बैठे किसी व्यक्ति को उस तरह का कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए जैसा उन्हें मिला हुआ है। अगर उन्होंने गैर-कानूनी काम किए हैं क्योंकि वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना, 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना तो मेरा मानना है कि लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ एक आपराधिक कृत्य है।”

कांग्रेस सांसद ने कहा, “चूंकि आपराधिक कृत्य एक खास कानून के दायरे में आते हैं और ऐसे काम करने वाले लोगों पर आम तौर पर मुकदमा चलाया जाता है और उन्हें सजा दी जाती है। इसलिए मुझे समझ नहीं आता कि चुनाव आयुक्त को इससे कोई संरक्षण क्यों मिलना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर उन्होंने कोई गैर-कानूनी काम किया है तो उन्हें पूरी तरह पता था कि यह सब उनकी नाक के नीचे हो रहा है। उनके सहयोगियों ने इस ओर उनका ध्यान दिलाया था। उन्होंने इसे नजरअंदाज किया और जानबूझकर एक अनुचित चुनाव होने दिया। उन पर किसी भी दूसरे अपराधी की तरह आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।”

‘दागदार चुनावी प्रक्रिया’
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी ज्ञानेश कुमार पर नए सिरे से हमला किया है। उन्होंने ECINet सॉफ्टवेयर और वोटर लिस्ट के एसआईआर में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। रमेश ने कहा कि कई रिपोर्टों ने चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से समझौता-शुदा और दागदार हो गई है।

उन्होंने कहा, “कल एक बड़े राष्ट्रीय अखबार में हुए सनसनीखेज खुलासों से यह बात सामने आई कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग की ईमानदारी, विश्वसनीयता और क्षमता को पूरी तरह से कमजोर कर दिया है।”

रमेश ने आरोप लगाया कि गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी ने सात दिनों में आठ बार चुनाव आयोग को पत्र लिखकर उन वैध मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की, जिन्हें ECINet सॉफ्टवेयर द्वारा हटा दिया गया था।

उन्होंने कहा कि चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (EROs) ने पुष्टि की थी कि मतदाता वैध थे, लेकिन उनके ईमेल को नजरअंदाज कर दिया गया और नाम हटा दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि फ़ॉर्म 6 के माध्यम से नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को और अधिक कठिन बना दिया गया है और दावा किया कि युवा मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करने के लिए जेन जी को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

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