शिवपुरी में दलित सरपंच परिवार पर फायरिंग, महिला को लगी गोली

शिवपुरी में दलित सरपंच परिवार पर फायरिंग, महिला को लगी गोली

Firing on Dalit Sarpanch family in Shivpuri, woman shot शिवपुरी। जिले के करेरा थाना क्षेत्र में आने वाले लालपुर गांव में सरपंच परिवार पर हमला हुआ है. आरोपियों ने एक महिला पर दिन दहाड़े देसी कट्टे से फायर कर गंभीर रूप से घायल कर दिया और मौके से फरार हो गए. घायल महिला को अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है, वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि हमले की यह घटना किसी पुरानी रंजिश के चलते अंजाम दी गई है. जिसकी अब पुलिस पड़ताल कर रही है. 3 महीने पहले भी इस इन्हीं लोगों ने इसी दलित सरपंच परिवार पर हमला बोलते हुए उनके घर के बाहर अंधाधुंध फायरिंग की थी. उस समय मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. जहां से लौट के बाद एक बार फिर इन्होंने यह गंभीर घटना अंजाम दिया है. रामहेत परिहार अपने परिजन महाराज सिंह परिहार और रामसिंह परिहार के साथ घर के बाहर चबूतरे पर बैठे थे. इसी दौरान गांव का गुड्डू उर्फ नाहर सिंह गौतम अपने एक साथी के साथ वहां आया और गाली-गलौज करने लगा इस दौरान दोनों में बहस बाजी होने लगी. विवाद बढ़ने पर आरोपी ने कट्टे से फायर कर दिया. गोलियां चलने की आवाज का शोर सुनकर रामहेत की मां पुष्पा परिहार बाहर आईं और बीच बचाव करने की कोशिश करने लगी इसी दौरान आरोपी गुड्डू ने कट्टे से फायर कर दिया और गोली पुष्पा परिहार के पेट में जा लगी उन्हें तुरंत करैरा अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। recent visitors 93

प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे शिक्षक

प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे शिक्षक

Teachers stuck on lucrative posts for years by taking deputation भोपाल। मध्यप्रदेश समग्र शिक्षक संघ ने राज्य में प्रतिनियुक्ति की अवधि को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। संघ ने लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों को मूल पदस्थापना पर भेजने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंद्र दुबे एवं प्रदेश संरक्षक मुरारी लाल सोनी ने इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन को पत्र प्रेषित किया है। संघ पदाधिकारियों ने पत्र में उल्लेख किया है कि शासन के नियमों के अनुसार प्रतिनियुक्ति की अवधि सामान्यत: 4 वर्ष तय है। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि दोनों विभागों की सहमति से केवल 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकती है, लेकिन वर्तमान में नीति के विपरीत अनेक अधिकारी, कर्मचारी एवं शिक्षक ऐसे हैं, जो व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर जमे हुए हैं। जो स्पष्ट रूप से प्रतिनियुक्ति नियमों के विपरीत है। संघ ने तर्क दिया है कि प्रतिनियुक्ति की लंबी अवधि से मूल विभाग के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि प्रतिनियुक्ति का उद्देश्य केवल विशेष प्रशासनिक आवश्यकता की पूर्ति होती है, न कि व्यक्तिगत सुविधा से इसे स्थायी पदस्थापना का रूप देना है। प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार विभागों में जमेसंघ के अध्यक्ष सुरेशचंद दुबे का कहना है कि विभिन्न संगठनों से जुड़े कई शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी और उनके परिजन मलाईदार विभागों में नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर 10 से 15 वर्षों से जमे हुए हैं। ऐसे सभी कर्मचारी, अधिकारियों और शिक्षकों को मूल विभाग में तत्काल प्रभाव से वापस भेजा जाए। प्रतिनियुक्ति पर जमे लोकसेवकों की संपत्ति की जांच होसंघ के प्रदेश संरक्षक मुरारीलाल सोनी का का आरोप है कि अनेक लोकसेवक कई वर्षों से नियमविरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर जमे हैं। वे शासन को आर्थिक रूप से खोखला कर रहे हैं। ऐसे लोकसेवकों की प्रति नियुक्ति समाप्त कर उनके कार्यकाल और संपत्ति की जांच कराई जाए। recent visitors 104

यूपी पंचायत चुनाव में बीजेपी की टेंशन बढ़ाएगी जंयत चौधरी की पार्टी? RLD ने सभी को चौंका दिया

यूपी पंचायत चुनाव में बीजेपी की टेंशन बढ़ाएगी जंयत चौधरी की पार्टी? RLD ने सभी को चौंका दिया

Will Jayant Chaudhary’s party increase BJP’s tension in UP Panchayat elections RLD surprised everyone मेरठ में आयोजित चुनाव समिति की बैठक को लेकर डॉ. कुलदीप उज्जवल ने कहा कि पंचायत का चुनाव गांव का चुनाव है, गांव के लोग इसमें वोट डालते हैं. UP Panchayat elections RLD उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. मेरठ में आयोजित चुनाव समिति की बैठक में पार्टी ने तय किया कि वे अकेले ही अपने दम पर किसी गठबंधन के बिना पंचायत चुनाव लड़ेगी. मेरठ में आरएलडी ने यूपी पंचायत चुनाव के मद्देनजर एक अहम बैठक की जिसमें बहुत बड़ा ऐलान हुआ. एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद अब राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ेगी. इसकी घोषणा शुक्रवार को मेरठ में पंचायत चुनाव समिति के प्रदेश संयोजक डॉ. कुलदीप उज्जवल ने एक बैठक में की. मेरठ में आयोजित चुनाव समिति की बैठक को लेकर डॉ. कुलदीप उज्जवल ने कहा कि पंचायत का चुनाव गांव का चुनाव है, गांव के लोग इसमें वोट डालते हैं. हमारी पार्टी गांव में ग्रास रूट लेवल तक जुड़ी हुई है, उसी पर हम काम करते हैं और उसी के दम पर हम पूरे प्रदेश में चुनाव लड़ने की तैयारी में है. हमारी पूरी तैयारी हो चुकी, मेरठ में हमारी बैठक थी जो हमारी क्षेत्रीय स्तर की बैठक थी. हमारा क्षेत्र ये दो मंडलों का क्षेत्र है, हमारा गठबंधन है, हम एनडीए के पार्ट हैं वो विधानसभा स्तर पर, लोकसभा स्तर पर हमारा गठबंधन है लेकिन यह क्षेत्रीय स्तर का चुनाव है, पंचायत का चुनाव है. इसे हम लोग जो है अपने संगठन के दम पर, अपने कार्यकर्ता के दम पर लड़ने का काम करेंगे. UP Panchayat elections RLD इस दौरान मेरठ और सहारनपुर मंडल के सभी पदाधिकारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष और पंचायत समिति के सदस्य मौजूद रहे. इस बैठक में तय किया गया कि हर जिले में पांच सदस्य समिति का गठन होगा जो प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी निभाएगी. रालोद का मानना है कि पंचायत चुनाव से संगठन की ताकत निचले स्तर तक पहुंचेगी और कार्यकर्ताओं को सक्रिय राजनीति में भागीदारी का अवसर मिलेगा. पंचायत चुनाव समिति के प्रदेश संयोजक ने बैठक के बारे में बताया कि पंचायत चुनाव से ही विधानसभा चुनाव की मजबूत नींव तैयार होगी. उज्जवल ने जोर दिया कि पंचायत स्तर की जीत भविष्य की बड़ी राजनीतिक दिशा तय करेगी. recent visitors 150

जो खून बहना था वह बह गया, पैसे से लोगों की सोच बदलने गए मोदी : कांग्रेस नेता

जो खून बहना था वह बह गया, पैसे से लोगों की सोच बदलने गए मोदी : कांग्रेस नेता

The blood that was to be shed has been shed, Modi went to change people’s thinking with money: Congress leader नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को मणिपुर के दौरे पर हैं। यह उनका 2023 की जातीय हिंसा के बाद पहला दौरा है। इस यात्रा को राज्य में शांति और विकास को मजबूत करने के लिए अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी ने चुराचांदपुर और इंफाल में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। वहीं इस दौरे को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।कांग्रेस बोली-बहुत देर हो चुकी हैCongress leader Udit Raj ने बयान में पीएम मोदी के दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले ही कुकी और मैतेई दोनों समूह पीएम के खिलाफ विरोध जता रहे हैं और अब यह यात्रा ‘हीलिंग टचÓ नहीं मानी जाएगी। Congress leader Udit Raj का कहना है कि एक समय था जब पीएम जाकर बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन अब बहुत खून बह चुका है और सिर्फ 3 घंटे की यात्रा से कुछ नहीं होगा। वह भले ही कुछ परियोजनाओं की घोषणा करें लेकिन पैसों से लोगों की सोच नहीं बदली जा सकती। 2023 में भड़की थी जातीय हिंसाबता दें कि 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की थी, जिसमें कम से कम 260 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए थे। इसके बाद से ही राज्य में तनाव और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है. पीएम मोदी का यह दौरा लंबे समय से प्रतीक्षित था और इसे जनता और राजनीतिक दल दोनों करीब से देख रहे हैं। चुराचांदपुर और इंफाल ऐसे इलाके हैं, जहां हिंसा का असर सबसे ज्यादा रहा और अब यहां नए विकास कार्यों के जरिए माहौल को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। दौरे का महत्व और आगे की राहविशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा मणिपुर में शांति और पुनर्निर्माण के लिए एक बड़ा संदेश है। यह सिर्फ परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं बल्कि राज्य के लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश भी है. हालांकि विपक्ष इसे ‘बहुत देर से उठाया गया कदम बता रहा है। अब देखना होगा कि इस यात्रा से क्या सकारात्मक असर होता है और क्या यह मणिपुर में स्थायी शांति और विकास के नए रास्ते खोल पाएगी। recent visitors 98

आईडीए सीईओ अहिरवार की यादगार बिदाई

आईडीए सीईओ अहिरवार की यादगार बिदाई

Memorable farewell of IDA CEO Ahirwar इंदौर ! आईडीए सीईओ रामप्रकाश अहिरवार का कल कार्यालय सभागृह में बिदाई समारोह हुआ. उनके विदाई समारोह में बड़े से लेकर छोटे से छोटे कर्मचारी ने उक्त समारोह में ना सिर्फ भाग लिया, बल्कि पूरे समय और नीचे कार तक छोड़ने तक साथ रहे. आईडीए में चर्चा थी कि ऐसी बिदाई किसी सीईओ की नहीं हुई. अधिकांश अधिकारी आते है और एक दूसरे को पदभार सौंप कर चले जाते है.बिदाई समारोह में सीईओ ने कहा कि मेरे द्वारा किसी कार्य के दौरान कुछ कहा भी हो तो उसे उसी समय तक मन छोड़ देना. मैंने किसी का नुकसान करने के लिए कोई फाइल पर कुछ नहीं लिखा. आप लोगों को भी मेरी सलाह है कि वरिष्ठ अधिकारी का गुस्सा क्षणिक होता है और उसको भूल जाना चाहिए. मुझे सभी ने टीम वर्क के साथ सहयोग किया, जिसके कारण आज आईडीए का नाम विकास की ऊंचाइयों पर पहुंचा सका हूं. काम के साथ अपने परिवार को भी समय दे यहेरी व्यक्तिगत राय है. आप सभी खूब और स्वस्थ रहे यही मेरी शुभकामनाएं है. आप कभी जबलपुर आए तो आप सभी का स्वागत है. कोई भी कर्मचारी या अधिकारी मुझसे जो घूमने में सहयोग होगा पूरा करूंगा. आपका आभार. recent visitors 86

सादगी की राजनीति या सियासत का नया गणित? — हेमंत खंडेलवाल के नाम एक पड़ाव

सादगी की राजनीति या सियासत का नया गणित? — हेमंत खंडेलवाल के नाम एक पड़ाव

Politics of simplicity or new mathematics of politics? — A milestone in the name of Hemant Khandelwal भोपाल ! BJP President Hemant Khandelwal मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी-कभी ऐसे चेहरे सामने आते हैं, जिनकी चमक न तो पोस्टरों से आती है और न ही बड़ी-बड़ी रैलियों की भीड़ से। हेमंत खंडेलवाल ऐसा ही एक नाम हैं—जो बिना ढोल-नगाड़े, बिना सत्ता का शोर मचाए आज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुँच गए। सवाल यह है कि क्या यह सफर केवल सादगी और संघर्ष का है, या फिर संगठन की राजनीतिक गणित का भी खेल? हेमंत खंडेलवाल सिर्फ भाजपा के अध्यक्ष नहीं, बल्कि संघर्ष, सादगी और संगठन के उस दर्शन का चेहरा हैं जो राजनीति को जनसेवा का सच्चा माध्यम बनाता है। BJP President Hemant Khandelwal 3 सितंबर 1964 को मथुरा में जन्मे हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल में पढ़ाई की और धीरे-धीरे राजनीति में कदम रखा। पिता विजय कुमार खंडेलवाल चार बार सांसद रहे, इसलिए राजनीतिक माहौल घर में मौजूद था। लेकिन यहाँ भी दिलचस्प मोड़ यह है कि हेमंत ने विरासत की मलाई खाने के बजाय खुद को संघर्ष के रास्ते में झोंक दिया। वरना आजकल तो नेता जी का बेटा सीधे ‘उत्तराधिकारी’ घोषित हो जाता है। 2008 में पिता के निधन के बाद बैतूल उपचुनाव से सांसद बने। यही वह पल था जब उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की रोशनी मिली। लेकिन उनके साथ विडंबना यह रही कि वे लंबे समय तक सत्ता की गाड़ी के इंजन से दूर रहे—कभी विधायक, कभी जिला अध्यक्ष, कभी कोषाध्यक्ष, और कभी प्रवासी प्रभारी। कहते हैं, उन्होंने राजनीति को ‘करियर’ नहीं, बल्कि ‘धैर्य की परीक्षा’ मान लिया था। Read more: जब मंत्री ही अपराध के कटघरे में हों, तो न्याय किससे मांगे जनता? BJP President Hemant Khandelwal की सबसे बड़ी पूंजी उनकी सादगी है। सुना है, कार्यकर्ताओं को शर्ट तक दे दी और कभी स्कूटर तक। अब सोचिए, जिस दौर में नेता जी चुनाव में नोटों की बारिश कर रहे हों, उसमें कोई नेता अपनी शर्ट उतारकर कार्यकर्ता को दे दे—ये दृश्य राजनीति की किताब में दुर्लभ ही है। लेकिन राजनीति केवल सादगी से नहीं चलती। 2020 की सत्ता पलट की पटकथा में उनकी भूमिका किसी पर्दे के पीछे के निर्देशक जैसी रही। कमलनाथ सरकार जब गिर रही थी, तब खंडेलवाल ने सिंधिया खेमे और भाजपा के बीच पुल का काम किया। और कहते हैं, यही पुल उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक ले आया। राजनीति में ऐसे मौके हर किसी को नहीं मिलते—यह किस्मत और कौशल का संगम है। अब वे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं। सवाल यह है कि क्या वे भाजपा को बूथ स्तर तक और मजबूत बना पाएंगे, या फिर संगठनात्मक जोड़-तोड़ में ही उलझ जाएंगे? याद रखिए, प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी केवल शोभा की वस्तु नहीं है; यह वह कुर्सी है जिस पर बैठकर पार्टी का भविष्य तय होता है। एक और दिलचस्प पहलू यह है कि 31 साल बाद वैश्य समाज से किसी नेता को यह जिम्मेदारी मिली है। तो क्या यह केवल जातीय संतुलन साधने की कोशिश है, या फिर सचमुच संगठन के ‘सच्चे सेवक’ को उसकी मेहनत का इनाम? जनता तो यही देख रही है कि सियासी समीकरणों में जनता का हिस्सा कितना है। BJP President Hemant Khandelwal के पास अब मौका है कि वे यह साबित करें कि राजनीति सिर्फ ‘सत्ता का गणित’ नहीं, बल्कि सेवा और संघर्ष का भी नाम है। क्योंकि अगर वे भी बाकी नेताओं की तरह महंगे काफिलों और बेतहाशा पोस्टरों में उलझ गए, तो जनता उन्हें भी उसी भीड़ में गुम कर देगी, जहाँ नेता बदलते रहते हैं, लेकिन जनता की उम्मीदें वही की वही रहती हैं। हेमंत खंडेलवाल का नया अध्याय केवल भाजपा के संगठन का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का भी इम्तिहान है। देखना दिलचस्प होगा कि वे अपनी सादगी और संघर्ष को कायम रखते हैं या फिर सत्ता के गलियारों की चकाचौंध उन्हें भी उसी रंग में रंग देती है, जिसमें बाकी नेता डूब चुके हैं। recent visitors 77

कलेक्टर नहीं, मप्र में मुख्यमंत्री को स्वयं बदलने की जरूरत : संगीता शर्मा

कलेक्टर नहीं, मप्र में मुख्यमंत्री को स्वयं बदलने की जरूरत : संगीता शर्मा

Not the collector, but the Chief Minister himself needs to be changed in Madhya Pradesh: Sangeeta Sharma भोपाल। प्रदेश की राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। हाल ही में भिंड में विधायक और कलेक्टर के बीच हुए टकराव को निशाना बनाते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तालमेल पूरी तरह बिगड़ चुका है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के राज में न तो जनप्रतिनिधियों की सुनवाई हो रही है और न सरकार प्रशासन की साख बचा पा रही है।राज महिला आयोग की पूर्व सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कलेक्टर को हटाने की बात कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि प्रदेश में किसानों पर लाठियाँ बरस रही हैं, मासूम अस्पतालों में दम तोड़ रहे हैं और अधिकारी भ्रष्टाचार में डूबे हैं।उन्होंने कहा कि खाद के लिए किसान घंटों कतारों में खड़े अपमान झेल रहे हैं और उन पर पुलिस की लाठियाँ बरसाई जा रही हैं। इंदौर के एमवाय अस्पताल में दो बच्चों की मौत चूहों के काटने से होना सरकार की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। वहीं कुत्तों के इलाज के नाम पर आए करोड़ों रुपये निकाय अफसरों की जेबों में चले जा रहे हैं।शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या यही भाजपा की “डबल इंजन” सरकार का सुशासन है? उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को कलेक्टर नहीं, बल्कि खुद को बदलने की जरूरत है। recent visitors 78