🏏 IPL 2025 Final: खिताबी जंग में आमने-सामने RCB और पंजाब, कौन बनेगा पहली बार चैंपियन?

🏏 IPL 2025 Final: खिताबी जंग में आमने-सामने RCB और पंजाब, कौन बनेगा पहली बार चैंपियन?

IPL 2025 अब अपने अंतिम मुकाम पर है और क्रिकेट प्रेमियों के लिए रोमांच चरम पर है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और पंजाब किंग्स (PBKS) की टीमें इस बार फाइनल में आमने-सामने होंगी। दिलचस्प बात यह है कि दोनों टीमों ने आज तक एक भी बार आईपीएल खिताब नहीं जीता है, और इस बार एक टीम का सूखा जरूर खत्म होगा। 📍 फाइनल का महामुकाबला 👑 कोहली के नाम एक और सुनहरा मौका विराट कोहली, जिन्होंने हाल ही में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा है, इस फाइनल में सभी की निगाहों के केंद्र में होंगे। शानदार फॉर्म में चल रहे कोहली ने इस सीजन में 614 रन बनाए हैं और RCB की बल्लेबाजी की रीढ़ रहे हैं। कोहली के समर्थन में हजारों फैंस 18 नंबर की जर्सी पहनकर स्टेडियम में मौजूद रहेंगे 🔥 क्या टिम डेविड खेलेंगे फाइनल? RCB के लिए एक बड़ा सवाल ये रहेगा कि क्या टिम डेविड फिट होकर फाइनल में वापसी करेंगे। डेथ ओवर्स में उनकी भूमिका अहम रही है, खासकर रोमारियो शेफर्ड के साथ। साथ ही, फिल सॉल्ट और मयंक अग्रवाल ने भी टॉप ऑर्डर में अहम योगदान दिया है। 🧤 गेंदबाजों की जंग: हेजलवुड बनाम चहल RCB के पास जोश हेजलवुड और भुवनेश्वर कुमार जैसे अनुभवी गेंदबाज हैं, जबकि पंजाब की ओर से युजवेंद्र चहल से उम्मीदें होंगी। हालांकि चहल अभी भी हाथ की चोट से जूझ रहे हैं, लेकिन अपनी पुरानी टीम RCB के खिलाफ वह कुछ खास कर सकते हैं। 🧠 श्रेयस अय्यर का नेतृत्व पंजाब को कहां ले जाएगा? पंजाब किंग्स की कमान इस बार श्रेयस अय्यर के हाथों में है, जिन्होंने 603 रन बनाकर टीम को फाइनल तक पहुंचाया है। वह IPL इतिहास में तीन अलग-अलग टीमों की कप्तानी करते हुए फाइनल तक पहुंचने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। उनके साथ जोश इंग्लिस, शशांक सिंह और प्रभसिमरन सिंह जैसे खिलाड़ी भी शानदार फॉर्म में हैं। 🧢 संभावित प्लेइंग-11 पंजाब किंग्स:प्रियांश आर्या, जोश इंग्लिस (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), नेहाल वढेरा, मार्कस स्टोइनिस, शशांक सिंह, अजमातुल्लाह ओमरजई, काइल जैमीसन, विजयकुमार विशाक, अर्शदीप सिंह, युजवेंद्र चहल। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु:विराट कोहली, फिल सॉल्ट, रजत पाटीदार (कप्तान), लियाम लिविंगस्टोन, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), रोमारियो शेफर्ड, क्रुणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, यश दयाल, जोश हेजलवुड, सुयश शर्मा। 🏆 कौन बनेगा चैंपियन? RCB और पंजाब — दोनों टीमें पहली बार IPL खिताब के लिए भिड़ेंगी। क्या कोहली की टीम अपने सपने को पूरा करेगी या अय्यर की अगुवाई में पंजाब इतिहास रचेगा? recent visitors 236

डिग्री मिलती है, नौकरी नहीं मोदी सरकार क्या सिर्फ सपना बेचती है?

डिग्री मिलती है, नौकरी नहीं मोदी सरकार क्या सिर्फ सपना बेचती है?

You get a degree, but not a job. Does the Modi government only sell dreams? नई दिल्ली। Modi government only sell dreams? देश के लाखों युवाओं के लिए इंजीनियरिंग एक समय में भविष्य की गारंटी थी। आज यही पढ़ाई एक बेरोजगारी का टिकट बनकर रह गई है। सवाल उठता है क्या मोदी सरकार को इसका अंदाज़ा है, या जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है? पिछले दस वर्षों में IT सेक्टर की शुरुआती सैलरी में कोई ठोस वृद्धि नहीं हुई, जबकि महंगाई, फीस और रहन-सहन का खर्चा लगातार आसमान छूता रहा। एक इंजीनियर बनने के लिए छात्र 4 साल और लाखों रुपये खर्च करता है, और बदले में उसे मिलता है। 15-25 हज़ार की नौकरी, वो भी किस्मत से। मोदी सरकार, जिसने “डिजिटल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” और “मेक इन इंडिया” जैसे नारों से युवाओं को सपने दिखाए थे, अब उन्हीं युवाओं को बिना दिशा, बिना नीति और बिना सहारे के छोड़ चुकी है। न नई नौकरियों का ठोस रोडमैप, न तकनीकी शिक्षा को लेकर कोई नीति सुधार। जिस सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री को बीजेपी ने कभी अपनी राजनीतिक ताकत का आधार बनाया था, आज उसे उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। मोदी सरकार के शासन में: IT सेक्टर में स्थिरता गायब हो गई है Modi government only sell dreams?निजी संस्थानों को बिना रेगुलेशन के लूट की छूट हैशिक्षा से लेकर रोजगार तक, हर जगह नीतिगत ठहराव और दिशाहीनता हैऔर सरकार केवल GDP के खोखले आंकड़ों से संतोष जता रही है किसका भला हो रहा है GDP से? Modi government only sell dreams?जब लाखों इंजीनियर बेरोजगार हैं, जब टेक्निकल डिग्रियां बेअसर हो चुकी हैं, जब कंपनियां सैलरी बढ़ाने को तैयार नहीं, तब यह ग्रोथ किसके लिए है? सरकार अगर युवाओं के भविष्य के प्रति गंभीर है तो उसे यह साफ़ करना होगाक्या इंजीनियरिंग अब भी भविष्य है, या ये सिर्फ़ बेरोजगारी की ट्रेनिंग है? अगर जवाब नहीं है, तो यह देश के करोड़ों परिवारों को साफ़-साफ़ बताया जाए।अगर जवाब हाँ है, तो उसकी नीति और गारंटी कहां है? आज देश का युवा पूछ रहा हैमोदी सरकार, जवाब दो। recent visitors 142

भोपाल पहुंचे राहुल गांधी मध्य प्रदेश में नई कांग्रेस खड़ी करने… 5 घंटे में करेंगे ताबड़तोड़ बैठकें

भोपाल पहुंचे राहुल गांधी मध्य प्रदेश में नई कांग्रेस खड़ी करने… 5 घंटे में करेंगे ताबड़तोड़ बैठकें

Rahul Gandhi reached Bhopal to establish a new Congress in Madhya Pradesh… will hold a series of meetings in 5 hours भोपाल (Rahul Gandhi in MP): 23 साल से मध्य प्रदेश में कांग्रेस वनवास काट रही है। कमल नाथ के नेतृत्व में 2018 में सरकार बनी, पर डेढ़ साल ही चल सकी। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समय बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर चले गए। संगठन का ताना-बाना बिखर गया। अब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मप्र में नई कांग्रेस खड़ी करेंगे। इसके लिए संगठन सृजन अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मंगलवार, 3 जून को भोपाल में राहुल गांधी ही करेंगे। वे 5 घंटे में तीन बैठकों और अधिवेशन में भाग लेंगे। विभीषणों को चिन्हित करने की बात कह चुके राहुल गांधीमध्य प्रदेश में अब कांग्रेस नया नेतृत्व तैयार कर रही है। अभी तक यह कमल नाथ, दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं के हाथों में रहा है। राहुल गांधी मध्य प्रदेश में भी ‘विभीषणों’ को चिन्हित करने की बात भी कह चुके हैं।जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष, उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष और हेमंत कटारे को उपनेता बनाकर पीढ़ी परिवर्तन की कवायद भी प्रारंभ कर दी गई है। इस बीच, देश में जनगणना के साथ जाति आधारित गणना का श्रेय पार्टी राहुल गांधी को देगी। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस पूरे प्रदेश में अभियान चलाएगी। संगठन सृजन अभियान के दौरान ही कार्यकर्ता घर-घर जाकर बताएंगे कि राहुल गांधी के जाति आधारित गणना करने का मुद्दा उठाने के बाद भारत सरकार को झुकना पड़ा और वह इसके लिए तैयार हुई। विमानतल से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय तक 52 द्वार भी बनाए गए है, जिनमें जाति आधारित गणना के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया है। recent visitors 124

बिहार चुनाव का बिगुल: पीएम मोदी, नीतीश और तेजस्वी आमने-सामने, जाने विशेषज्ञों का विश्लेषण

बिहार चुनाव का बिगुल: पीएम मोदी, नीतीश और तेजस्वी आमने-सामने, जाने विशेषज्ञों का विश्लेषण

Bihar election bugle 2025: PM Modi, Nitish and Tejashwi face to face, know the analysis of experts पटना। Bihar election bugle 2025 बिहार की राजनीति में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सियासी पारा चरम पर है। हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। इसके बाद से सभी दल अपनी-अपनी चुनावी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के लगातार दौरे, भाजपा का मिशन बिहारप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार में बढ़ता दौरा कार्यक्रम इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। ऑपरेशन सिंदूर से पहले और बाद में उनकी यात्रा यह संकेत देती है कि पार्टी मिशन 2025 को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। उनके संबोधन में विकास, राष्ट्रवाद और विपक्ष पर हमलावर रुख स्पष्ट दिखाई देता है। प्रशांत किशोर की नई सियासी पारी Bihar election bugle 2025राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर भी ‘जन सुराज’ के जरिए बिहार की राजनीति में तीसरे मोर्चे के विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहे हैं। गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद और जमीनी मुद्दों पर फोकस उनकी रणनीति का अहम हिस्सा है। वे जनता से सीधे जुड़कर पारंपरिक दलों को चुनौती देने की ओर बढ़ रहे हैं। Read More: कमलनाथ का भाजपा पर तीखा हमला: “सेना के सम्मान को राजनीतिक बयानबाज़ी से दूर रखें नीतीश कुमार की नई सामाजिक गणितमुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। खासकर सवर्ण और अगड़ा वर्ग को अपने साथ जोड़ने की उनकी कोशिश साफ़ नज़र आ रही है। एनडीए के साथ जाने के बाद नीतीश कुमार की राजनीति अब नए मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां उन्हें अपनी स्वीकार्यता फिर से साबित करनी है। राजद का आक्रामक रुखविपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी सरकार को घेरने में पीछे नहीं है। बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर पार्टी के नेता लगातार सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। तेजस्वी यादव युवाओं और पिछड़े तबके को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। क्या कहती है ज़मीन की सच्चाई? Bihar election bugle 2025बिहार का चुनाव हमेशा जातीय संतुलन, विकास के वादे और नेतृत्व के चेहरे के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। इस बार का चुनाव प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता, नीतीश की विश्वसनीयता, प्रशांत किशोर का नया प्रयोग, और तेजस्वी यादव का आक्रामक तेवर — इन चार स्तंभों के बीच निर्णायक बन सकता है। पूर्णिमा त्रिपाठी: बिहार हमेशा चुनावी मोड में रहता है। वहां राजद की राजनीति अपनी जगह है तो भाजपा की राजनीति अपनी जगह है। इन सबके बीच भाजपा और जदयू के बीच आपसी खींचतान भी जारी है। नीतीश कुमार द्वारा अगड़ा आयोग का पुनर्गठन इसी खींचतान का नतीजा है। प्रशांत किशोर चुनावी राजनीति में कितना सफल होंगे ये अभी नहीं कहा जा सकता है। राजद एंटी-भाजपा और एंटी-जदयू की राजनीति में लगी हुई है।रामकृपाल सिंह: एक तरफ भाजपा और जदयू में आपसी खींचतान जारी है तो दूसरी तरफ कांग्रेस और राजद के बीच भी उतनी ही खींचतान हो रही है। बिहार राजनीतिक रूप से जागरूक वर्ग है। सीटों का बंटवारा जब होगा तब ये आपसी अंतर्विरोध खुलकर सामने आएगा। मुझे लगता है कि ये अंतर्विरोध राजद और कांग्रेस गठबंधन में ज्यादा दिखाई देगा। अवधेश कुमार: तेज प्रताप यादव के मामले में जो कुछ हुआ वह एक बड़ा प्रश्न है। लालू यादव ने एक नैतिक स्टैंड लिया। लेकिन किसी को घोषित कर देने से कोई बाहर होता नहीं है। यह आंख पोंछने वाली बात है। सामाजिक न्याय का तकाजा था कि लालू यादव और राबड़ी देवी को उन लड़कियों के साथ खड़ा होना चाहिए था। प्रधानमंत्री मोदी बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश गए हैं तो उन्होंने तीनो जगह हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट दिए हैं। प्रधानमंत्री अगर जा रहे हैं तो किसलिए गए। यह तो बिहार को तय करना है कि क्या करना है? प्रशांत किशोर इस समय एक फैक्टर हैं। अगर वो वोट काटेंगे तो दोनों तरफ के काटेंगे।विनोद अग्निहोत्री: प्रधानमंत्री की रैलियां और दौरे सिर्फ बिहार के लिए नहीं हो रहे हैं। बिहार के चुनाव के तत्काल बाद बंगाल, तमिलानाडु और असम जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं। बिहार में अगर आज की तारीख में बात करेंगे तो अभी की एनडीए का पलड़ा भारी है। पिछली बार एनडीए में ज्यादा संकट था। नीतीश कुमार के खिलाफ चिराग पासवान ने झंडा बुलंद किया हुआ था। जहां तक लालू परिवार की बात है तो वहां भी सत्ता संघर्ष खुलकर है। तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच तो है तो तेजस्वी और मीसा में भी है। समीर चौगांवकर: मुझे लगता है कि राजद और कांग्रेस के मुकाबले एनडीए में ज्यादा संकट है। राजद-कांग्रेस गठबंधन में एकदम साफ है कि तेजस्वी ही इसके नेता होंगे। सबसे बड़ी चुनौती तो नीतीश कुमार को लेकर है। प्रशांत किशोर ये चुनौती दे रहे हैं कि क्या भाजपा यह एलान करेगी कि सीटें कितनी भी आएंगी नीतीश कुमार ही हमारे मुख्यमंत्री बनेंगे। नीतीश कुमार का जो स्वास्थ्य है क्या उनको मुख्यमंत्री के रूप में पार्टी लेकर जाएगी। क्या चिराग पासवान जिन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ उम्मीदवार दिए वो नीतीश जो सीटें देंगे उस पर मान लेंगे। अगर आप जंगलराज के 15 साल की बात करते हैं तो आपको अपने 20 साल का भी हिसाब देना होगा। विश्लेषकों की मानें तो 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव ना केवल राज्य की दिशा तय करेगा, बल्कि देश की राजनीति को भी नया संदेश देगा। recent visitors 122

कमलनाथ का भाजपा पर तीखा हमला: “सेना के सम्मान को राजनीतिक बयानबाज़ी से दूर रखें

कमलनाथ का भाजपा पर तीखा हमला: “सेना के सम्मान को राजनीतिक बयानबाज़ी से दूर रखें

Kamal Nath sharp attack on BJP: “Keep the honor of the army away from political rhetoric” छिंदवाड़ा। Kamal Nath sharp attack मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने गृहनगर छिंदवाड़ा में प्रेसवार्ता कर भाजपा पर तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता सेना के शौर्य को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जो न केवल असंवेदनशील है, बल्कि देश की सुरक्षा में लगे जवानों का भी अपमान है। सेना को राजनीति से दूर रखने की नसीहतकमलनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमारे वीर जवान अपनी जान की बाज़ी लगाकर देश की रक्षा करते हैं। उनके बलिदान को चुनावी भाषणों में घसीटना शर्मनाक है। सेना राजनीति से ऊपर है, और उसे वहीं रहने देना चाहिए। भाजपा को यह बात समझनी चाहिए।” भोपाल मेट्रो पर श्रेय की जंगपूर्व मुख्यमंत्री ने भोपाल मेट्रो परियोजना को लेकर भाजपा पर “झूठा श्रेय” लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना की नींव उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही रखी गई थी। “जब बाबूलाल गौर मुख्यमंत्री थे, मैंने दिल्ली जाकर 17 करोड़ रुपये सर्वे के लिए स्वीकृत करवाए थे। आज जब प्रोजेक्ट जमीन पर दिखने लगा है, तो भाजपा इसे अपनी उपलब्धि बताकर जनता को गुमराह कर रही है,” कमलनाथ ने कहा। Read More : सिरदर्द को न करें नजरअंदाज: ये संकेत हो सकते हैं किसी गंभीर बीमारी के महिला सुरक्षा पर सरकार को घेरामहिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कमलनाथ ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि “महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है। मंचों और इवेंट्स में भाषण देने से हकीकत नहीं बदलती।” राजनीति में गरमा गया माहौलकमलनाथ के इस बयान से राज्य की राजनीति में एक बार फिर से गरमाहट आ गई है। भाजपा की तरफ़ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन जानकार मानते हैं कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में सियासी बहस का केंद्र बन सकता है। recent visitors 126

सिरदर्द को न करें नजरअंदाज: ये संकेत हो सकते हैं किसी गंभीर बीमारी के

सिरदर्द को न करें नजरअंदाज: ये संकेत हो सकते हैं किसी गंभीर बीमारी के

Do not ignore headache: These can be signs of a serious disease Do not ignore headache आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में सिरदर्द को हम अक्सर नींद की कमी या थकान का सामान्य लक्षण मान लेते हैं। लेकिन अगर यह सिरदर्द बार-बार हो रहा है, पेनकिलर से भी ठीक नहीं हो रहा, या इसके साथ अन्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं — तो यह शरीर का एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है। सिरदर्द के पीछे छिपे हो सकते हैं ये बड़े कारण ब्रेन ट्यूमरअगर सिर में बार-बार एक ही स्थान पर दर्द हो रहा है और वह समय के साथ तेज़ होता जा रहा है, तो यह ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। विशेष रूप से अगर दवा लेने के बाद भी आराम नहीं मिल रहा है। माइग्रेनमाइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें सिरदर्द के साथ मतली, तेज़ रोशनी या आवाज़ से चिढ़, और धुंधलापन भी हो सकता है। इसका इलाज केवल दवा नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव से भी संभव है। Read More: सीधी में रातों-रात आदिवासी परिवार बेघर, कमलेश्वर पटेल ने जताया विरोध साइनस इन्फेक्शननाक बंद होना, चेहरे में भारीपन और माथे पर दबाव के साथ दर्द — ये संकेत साइनस के हो सकते हैं। यह वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण होता है। आंखों की समस्याअगर लंबे समय तक स्क्रीन देखने या पढ़ने के बाद सिरदर्द होता है, तो आंखों में नंबर बढ़ना, चश्मा न लगाना या थकावट इसकी वजह हो सकती है। कब सतर्क हो जाएं? Do not ignore headache क्या करें सिरदर्द होने पर? Do not ignore headache न करें इसे मामूली समझने की भूलसिरदर्द एक ऐसा शरीरिक अलार्म है जिसे अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। यह किसी गहरी और गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। अगली बार सिर में हल्का दर्द भी हो, तो उसे नजरअंदाज न करें — क्योंकि कभी-कभी छोटा दर्द, बड़े खतरे की घंटी हो सकता है। recent visitors 197

सीधी में रातों-रात आदिवासी परिवार बेघर, कमलेश्वर पटेल ने जताया विरोध

सीधी में रातों-रात आदिवासी परिवार बेघर, कमलेश्वर पटेल ने जताया विरोध

Tribal family became homeless overnight in Sidhi, Kamleshwar Patel protested सीधी । Tribal family became homeless जिले के डैनीहा गांव में बुधवार-गुरुवार की रात प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से हाहाकार मच गया। इस कार्रवाई में लगभग 100 आदिवासी परिवारों के घर जमींदोज कर दिए गए, जिनमें ज़ालिम कोल, लखन कोल, मोहन कोल और मसाली कोल जैसे परिवार शामिल हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें अपना सामान निकालने तक का वक्त नहीं दिया। पीड़ित परिवारों का दावा है कि वे पिछले 80 वर्षों से इस जमीन पर रह रहे थे। कार्रवाई के बाद अधिकांश परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हो गए, जबकि कुछ को अस्थायी आश्रय स्थल ‘रंग बसेरा’ में शरण दी गई है। कोर्ट के आदेश पर चली कार्रवाई Tribal family became homelessप्रशासन के मुताबिक यह कार्रवाई सिविल कोर्ट के आदेश पर की गई थी। जानकारी के अनुसार, मृगेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ने करीब 20 वर्ष पहले अतिक्रमण हटाने की याचिका दायर की थी, जिस पर 2020 में निर्णय आया था। हाल ही में कोर्ट ने फिर से प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, जिसके बाद राजस्व विभाग की टीम ने यह कार्रवाई अंजाम दी। कमलेश्वर पटेल पहुंचे मौके पर, बताया अमानवीय Tribal family became homelessघटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल गुरुवार-शुक्रवार की रात लगभग 12 बजे मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और सीधी कलेक्टर को फोन कर पीड़ितों की व्यथा सुनाई।पटेल ने इस कार्रवाई को “अन्यायपूर्ण और अमानवीय” करार देते हुए कहा, Read More: ऑपरेशन सिंदूर”: भाजपा का नया नाटक या संस्कृति के नाम पर स्त्री अस्मिता का अपमान? “अगर अतिक्रमण हटाना आवश्यक था, तो पहले इन आदिवासी परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए थी।” कलेक्टर बोले – पहले से जानकारी नहीं थीसीधी कलेक्टर ने सफाई दी कि उन्हें इस कार्रवाई की पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन उचित कार्रवाई करेगा और प्रभावितों को राहत पहुंचाई जाएगी। recent visitors 121