जनता पर भड़के पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव: कहा- सुविधाएं भी लो और बुराई भी करो, यह नहीं चलेगा

Former minister Gopal Bhargava got angry at the public: Said- take the facilities and also do evil, this will not work भोपाल। पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपने आलोचकों को नसीहत देते नजर आ रहे हैं। भार्गव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग विकास कार्यों का लाभ उठा रहे हैं, वही सबसे ज्यादा सवाल उठा रहे हैं। गोपाल भार्गव का यह बयान क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां उनके समर्थक इसे ‘सच्चाई’ बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे सत्ता का ‘अहंकार’ करार दे रहा है। बता दें, आने वाले दिनों में इस बयान पर राजनीतिक गलियारों में शोर मचना तय है।    रहली विधानसभा के रामपुर में भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान भार्गव ने कहा कि क्षेत्र में करोड़ों की लागत से एक्सीलेंस स्कूल और कॉलेज बनवाए गए हैं। उन्होंने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा- अगर गोपाल भार्गव के कामों से इतनी ही दिक्कत है, तो अपने बच्चों को इन स्कूलों और कॉलेजों में मत पढ़ाओ। जब बच्चों को पढ़ने के लिए सागर भेजना पड़ता था और भारी-भरकम फीस भरनी पड़ती थी, तब समझ में आता था कि सुविधा की कीमत क्या होती है। आलोचना आसान, काम करना मुश्किल विधायक ने कहा कि बाहर बैठकर आलोचना करना बहुत सरल है। उन्होंने कहा- विकास कार्यों को धरातल पर उतारने के लिए पूरा जीवन झोंकना पड़ता है। हम दिन-रात जनता के बीच रहते हैं, जिससे अपने परिवार तक को समय नहीं दे पाते। उन्होंने भाजपा सरकार द्वारा किए गए कार्यों की सूची गिनाई और कहा- रहली-सागर रोड बनवाया। लोग इसी सड़क पर चलते हैं, लेकिन कभी आभार व्यक्त नहीं करते। लोग सुविधाओं का पूरा लाभ लेते हैं, लेकिन धन्यवाद का एक शब्द भी नहीं कहते। भार्गव ने जनता को आगाह किया कि कुछ लोग केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं, उनसे सावधान रहने की जरूरत है।  चुनाव और भविष्य की रणनीति आगामी चुनावों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पर टिप्पणी करते हुए भार्गव ने कहा कि अभी चुनाव में तीन साल का समय शेष है। उन्होंने कहा, जिसे चुनाव लड़ना है, वो लड़े। अगर हमने जनता की सेवा की होगी, तो मैं लड़ूं या मेरी जगह कोई और खड़ा हो, जनता का आशीर्वाद हमें ही मिलेगा। अगर काम नहीं किया होगा, तो जनता किसी और को चुन लेगी। recent visitors 77

फाइलों का बोझ कम करने में जल संसाधन विभाग पीछे ई-ऑफिस व्यवस्था नहीं हो पाई लागू 

The Water Resources Department lags behind in reducing file burden. The e-office system has not been implemented.  भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी महकमों में फाइल कल्चर को खत्म करने के लिए ई ऑफिस सिस्टम सभी विभागों में लागू किया गया है, लेकिन जल संसाधन विभाग में इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में विभाग के मुखिया की तरफ से निकले एक सख्त फरमान ने विभागीय कर्मचारियों और इंजीनियरों में हडकंप मचा दिया है। प्रमुख अभियंता विनोद कुमार देवड़ा ने मुख्य अभियंताओं समेत सभी इंजीनियरों और स्टाफ को चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि अब आगे से कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी, बल्कि एक सप्ताह के भीतर विभाग का सारा कामकाज ई-ऑफिस के जरिए ही करना होगा।  जल संसाधन विभाग द्वारा जारी अर्द्धशासकीय पत्र में प्रमुख अभियंता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद अधीनस्थ कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली को लेकर कोई गंभीर कार्यवाही नहीं की गई। पत्र में लिखा गया है कि यह खेद का विषय है कि बार-बार निर्देशित करने के बाद भी ई-ऑफिस प्रणाली प्रचलन में नहीं लाई गई है। इतना ही नहीं इस आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सभी मुख्य अभियंता और उनके अधीनस्थ कार्यालय इस डिजिटल सिस्टम से नहीं जुड़ते हैं और पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं सौंपते हैं, तो किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। विभाग ने फरमान का पालन न करने पर अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी भी कर ली है। recent visitors 65

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में नहीं चलेगी तुक्केबाजी ईएसबी की भर्ती परीक्षाओं में फिर से शुरू की जाएगी निगेटिव मार्किंग

Cheating will not be tolerated in government recruitment exams. Negative marking will be reintroduced in ESB recruitment exams. भोपाल। मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की भर्ती परीक्षाओं में अब तुक्केबाजी नहीं चलेगी। ईएसबी ने एग्जाम पैटर्न में बड़ा बदलाव करते हुए अपनी भर्ती परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग शुरू करने का निर्णय लिया है। साथ ही मंडल ने सख्ती बरतते हुए परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों पर केंद्रीय पर्यवेक्षक (सेंट्रल ऑब्जर्वर) तैनात करने का फैसला किया है।  मप्र कर्मचारी चयन मंडल के संचालक मंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। पूर्व में कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती परीक्षाओं में निगेटिव मार्किंग की जाती थी, लेकिन वर्ष 2011-12 परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग बंद कर दी गई थी। परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की ओर से लगातार परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग शुरू की मांग की जा रही थी, ताकि अभ्यर्थी परीक्षाओं को गंभीरता से लें। इसे देखते हुए मप्र कर्मचारी चयन मंडल के संचालक मंडल ने लंबे विचार-विमर्श के बाद भर्ती परीक्षाओं में निगेटिव मार्किंग शुरू करने का निर्णय लिया है। जानकारी के अनुसार, कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को राहत देते हुए निर्णय लिया है कि परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग में 1/4 का फामूर्ला एप्लाई किया जाएगा। मंडल ने अपने निर्णयों के क्रियान्वयन की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। आने वाले महीनों में होने वाली भर्ती परीक्षाओं ये बदलाव नजर आएंगे। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा व्यवस्था में परिवर्तन से परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक कर्मचारी चयन मंडल की ओर से पूर्व में आयोजित कुछ परीक्षाओं में परीक्षा केंद्र विशेष पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। मंडल ने इन शिकायतों की जांच भी कराई है। चूंकि आने वाले वर्षों में विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित होना है।  गौरतलब है कि कर्मचारी चयन मंडल की ओर से वर्ष 2026 में 11 भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इन भर्ती परीक्षाओं के जरिए 5,528 पद भरे जाएंगे। ईएसबी ने परीक्षाओं का कैलेंडर जारी कर दिया है। सरकार ने कर्मचारी चयन मंडल को भर्ती परीक्षाएं समय पर कराने के निर्देश जारी किए हैं। इससे माना जा रहा है कि इस साल प्रस्तावित भर्ती परीक्षाएं निर्धारित समय पर आयोजित होंगी। पिछले साल कर्मचारी चयन मंडल कुछ परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं कर पाया था। कर्मचारी चयन मंडल ने इस साल की पहली भर्ती परीक्षा-आईटीआई ट्रेनिंग आॅफिसर का कार्यक्रम तय कर दिया है। इसके लिए आवेदन भी भरे जा चुके हैं। भर्ती परीक्षा 27 फरवरी से होगी। परीक्षा केंद्रों पर तैनात होंगे केंद्रीय पर्यवेक्षक मप्र कर्मचारी चयन मंडल नहीं चाहता की किसी भी परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी की शिकायत सामने आए। इसलिए मंडल ने निर्णय लिया है कि पूर्व में जिन परीक्षा केंद्रों की कोई शिकायत मिली है या ऐसे परीक्षा केंद्र जहां गड़बड़ी की आशंका है, वहां पर केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे। रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, वित्त सेवा के रिटायर्ड अधिकारी और बिग्रेडियर रैंक से ऊपर के रिटायर्ड आर्मी पर्सन को परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया जाएगा। उन्हें मानदेय के तौर पर रोजाना 4 हजार रुपए दिए जाएंगे। केंद्रीय पर्यवेक्षक के लिए पात्र रिटायर्ड अधिकारियों से संपर्क कर उनकी सूची तैयार की जाएगी, ताकि जरूरत पडऩे पर उनसे कॉन्टेक्ट किया जा सके। नेगेटिव मार्किंग की मांग लंबे समय से वर्तमान में कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की ओर से लंबे समय से कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग शुरू करने की मांग की जा रही थी। उनकी मांगों को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श करने के बाद हाल में हुई कर्मचारी चयन मंडल के संचालक मंडल की बैठक में एग्जाम पैटर्न में बदलाव करते हुए परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य यह है कि अभ्यर्थी परीक्षा की तैयारी गंभीरता से करें और परीक्षा को गंभीरता से लेने वाले अभ्यर्थियों को एग्जाम पैटर्न में बदलाव का फायदा मिले।  परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग (नकारात्मक अंकन) का अर्थ है कि किसी प्रश्न का गलत उत्तर देने पर न केवल उस प्रश्न के अंक कटते हैं, बल्कि सही उत्तरों में से भी निश्चित अंक काट लिए जाते हैं। जिन प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया जाता है, उनके कोई अंक नहीं काटे जाते है। कर्मचारी चयन मंडल के अधिकारियों का कहना है कि सामान्यत: परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग में 1/3 का फामूर्ला अपनाया जाता है, लेकिन मंडल ने अपने अभ्यर्थियों को राहत देने के मकसद से परीक्षा में 1/4 का फामूर्ला एप्लाई करने का निर्णय लिया है। उदाहरण के तौर पर यदि परीक्षा के प्रश्न पत्र में कुल 50 प्रश्न हैं और प्रत्येक प्रश्न के है और उनमें से 10 गलत प्रश्न टिक किए हैं, तो प्रत्येक गलत प्रश्न के लिए 0.25 अंक काटे जाएंगे। लिए 1 अंक निर्धारित है। recent visitors 88

वन्दे मातरम’ की अनिवार्यता…जनता का ध्यान भटकाने भाजपा सरकार की साजिश: सपा- यश भारतीय

The necessity of ‘Vande Mataram’… a conspiracy by the BJP government to divert public attention: SP- Yash Bharatiya भोपाल। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय ने ‘वन्दे मातरम’ की अनिवार्यता को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह सरकार बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के भावनात्मक और अनिवार्य फैसलों का सहारा ले रही है।  संविधान निमार्ताओं का सम्मान यश भारतीय ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले ही कहा है कि यदि ‘वन्दे मातरम’ की अनिवार्यता आवश्यक होती, तो डॉ. भीमराव अंबेडकर और अन्य महान संविधान निमार्ताओं ने इसे संविधान में पहले ही अनिवार्य कर दिया होता। इसे स्वैच्छिक रखना उन सभी महापुरुषों का एक सामूहिक और विचारशील निर्णय था। बुनियादी सुविधाओं में विफल सरकार सपा राष्ट्रीय प्रवक्ता ने भाजपा सरकार की विफलताओं को गिनाते हुए कहा कि जो सरकार जनता को शुद्ध पानी, स्वच्छ हवा, और सुरक्षित दवाइयां (जैसे कफ सिरप) तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है, वह अब देशभक्ति के नाम पर अपनी कमियों को छिपा रही है। शिक्षा व्यवस्था की हालत यह है कि सरकारी और निजी स्कूल लगातार बंद हो रहे हैं। तानाशाही और नागपुर का एजेंडा उन्होंने भाजपा की कार्यशैली की तुलना हिटलर और तानाशाही शासन से करते हुए कहा कि भाजपा केवल नागपुर से आने वाले संदेशों का अनुसरण करती है। वे जनता को गुलामों की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत और निंदनीय है। देशभक्ति थोपी नहीं जा सकती यश भारतीय ने जोर देकर कहा कि देशभक्ति भक्ति का विषय है, अनिवार्यता का नहीं। किसी से जबरदस्ती गायन करवाकर उसकी देशभक्ति प्रमाणित नहीं की जा सकती। समाजवादी पार्टी भाजपा सरकार के इस तानाशाही रवैये का पुरजोर विरोध करती है और मांग करती है कि सरकार प्रतीकों की राजनीति छोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और आम जनता की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करे। recent visitors 72

बुलेट ट्रेन को एक लाख करोड़ और बुंदेलखंड में रेलों को पांच फीसदी भी नहीं: रघु ठाकुर 

One lakh crore for the historic train and not even five percent for the railways: Raghu Thakur भोपाल। सरकार यदि आबादी के हिसाब से बजट आवंटित करे तो बुंदेलखंड जैसे अंचलों का पिछड़ापन, बेरोजगारी और गरीबी दूर हो सकती है, लेकिन सरकार एक ओर बुलेट ट्रेन पर एक लाख करोड़ खर्च कर सकती है लेकिन बुंदेलखंड को उसकी जरूरत के मुताबिक रेल लाइन के लिए पांच हजार करोड़ भी नहीं देना चाहती। सही नीति से इसे ठीक किया जा सकता है। सोशलिस्ट चिंतक व जननेता रघु ठाकुर ने आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुंदेलखंड सर्वदलीय नागरिक संघर्ष मोर्चा के धरना में बोलते हुए यह बात कही। उन्होंने आह्वान किया कि सरकार की  भेदभावपूर्ण नीति का प्रतीकात्मक विरोध आने वाली होली से शुरू किया जाये। इस धरने में शामिल होने व समर्थन देने बुंदेलखंड सहित छत्तीसगढ़ व विदर्भ से भी लोग आये थे।  रघु ठाकुर की अगुवाई में साल 2009 से यह धरना हर साल जाड़ों में होता है। इस साल धरने के तहत भारतीय हॉकी के गौरव मेजर ध्यानचंद व सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक हरिसिंह गौर को भारतरत्न से अलंकृत करने, बुंदेलखंड को रेल सेवाओं से जोड़ने व अंचल में पर्यटन परिपथ विकसित करने की मांग मुख्य रूप से शामिल है। जिन मार्गों पर रेल सेवा शुरू करने की मांग की गई है उनमें भिंड- बांदा-महोबा, ललितपुर-सागर, सागर- छिंदवाड़ा, छतरपुर-सागर, झांसी-शिवपुरी और ललितपुर-चंदेरी मार्ग शामिल हैं। धरने के बाद प्रधानमंत्री, रेलमंत्री व वनमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। धरने को राज्यसभा सदस्य व आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह सहित अनेक गणमान्य लोगों ने संबोधित किया। संजय सिंह ने केन्द्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि लगातार जनविरोधी और किसान-विरोधी फैसले लिए जा रहे हैं। हाल का भारत – अमरीका व्यापार समझौता इसका ताजा प्रमाण है, जिसमें अमेरिका तो भारतीय माल पर मनमाना आयात कर लगा रहा है, लेकिन भारत में अमेरिकी माल आने की पूरी छूट का इंतजाम कर दिया गया है। यह समझौता नहीं, बल्कि किसानों के ‘डेथ वारंट’ पर दस्तखत हैं जिसके चलते भारत के किसान बर्बाद होंगे और अमरीका के उन किसान मुनाफा कमाएंगे, जिन्हें वहां की सरकार अच्छी खासी सब्सिडी देती है। संजय सिंह ने भाजपा की सरकार को ‘भारतीय जुमला पार्टी ‘ बताते हुए कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरी, फसल का दाम दोगुना करने , हर खाते में पंद्रह लाख रुपए आने जैसे वादे तो पूरे किए नहीं, उल्टे देशभर में एक लाख स्कूल बंद कर दिए गए, प्रति व्यक्ति आय घटती चली गई और देश तरक्की के मामले में 142 वें नंबर पर चला गया। संजय सिंह ने इन नीतियों के विरोध में सड़क से संसद तक संघर्ष करने की जरूरत बताई। रघु ठाकुर ने कहा कि विभिन्न अंचल के जनप्रतिनिधि बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार कर रहे हैं। उन्हें लगातार अंचल के हित में मांग करनी चाहिए, लेकिन वे चुप रहते हैं। दूसरी ओर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री राजे रजवाड़ों के अंदाज में लोकलुभावन घोषणाएं कर रहे हैं, जबकि हर क्षेत्र को उसकी जनसंख्या के हिसाब से बजट मिलना चाहिए। आखिर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है। रघु ठाकुर ने योजना के लागू होने में विलम्ब का विषय उठाते हुए याद दिलाया कि अटल विहारी वाजपेई के प्रधानमंत्री काल में छतरपुर में केन-वेतवा परियोजना की घोषणा की थी जिसे अमली जामा पहनाने में दो दशक से ज्यादा लग गये। धरने में आये लोगों को कांग्रेसी पूर्व विधायक तरवर सिंह, आप की नेत्री अनीता सिंह लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंभूदयाल बघेल, उपाध्यक्ष श्यामसुंदर यादव व मुकेश चंद्रा, जावेद लोसपा महासचिव, मप्र के अध्यक्ष विन्ध्येश्वरी पटेल, हरपाल सिंह जयंत तोमर, सतीश भारतिय ब्रिज किशोरजेन(ललितपुर) अनूप सिंह (छिंदवाड़ा), अशोक पंडा (छत्तीसगढ़),  प्रवीण पांडे फतेहपुर, दया शंकर शर्मा, मसौढ़ी से  धीरेन्द्र पासवान, निसार  कुरेशी, हकीम असगर खान शिव नेताम (धमतरी, छत्तीसगढ़), डॉ शिवा श्रीवास्तव आप के सर्वेश मिश्रा आदि ने संबोधित किया। रामकुमार पचौरी ने संचालन किया। recent visitors 64

कर्ज में डूबा किसान: मप्र के हर किसान परिवार पर 74,420 रुपए का कर्ज उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल

कर्ज में डूबा किसान: मप्र के हर किसान परिवार पर 74,420 रुपए का कर्ज उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल

Farmers in debt: Every farmer family in Madhya Pradesh has a debt of Rs 74,420. Umang Singhar questions government भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लगातार लिए जा रहे कर्ज और किसानों की घटती आय को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरा है। Umang Singhar questions government ने कहा कि संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश के हर किसान परिवार पर औसतन 74,420 का कर्ज है। उन्होंने कहा कि देश के कृषि मंत्री भी मध्यप्रदेश से आते हैं, फिर भी आज एमपी का किसान देश के सबसे अधिक कर्ज वाले राज्यों में शामिल है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि किसानों का कर्ज़ घटाने के लिए क्या ठोस योजना है, किसानों को फसल का सही मूल्य कब मिलेगा और किसान आत्मनिर्भर कब बनेगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं हैं बल्कि देश के अन्नदाता हैं, जिनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए। उमंग सिंघार ने कर्ज के मुद्दे पर सरकार को घेराUmang Singhar questions government मध्य प्रदेश के किसान परिवारों पर बढ़ते कर्ज़ को लेकर राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संसद में पेश किए गए ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश के हर किसान परिवार पर औसतन 74,420 का कर्ज़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के तमाम वादों और दावों के बावजूद किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई बल्कि उनपर कर्ज बढ़ गया है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या यही ह्लडबल इंजन सरकारह्व की किसान नीति है। उन्होंने पूछा कि जब देश के कृषि मंत्री भी मध्यप्रदेश से आते हैं, तब भी राज्य के किसान देश के सबसे अधिक कर्ज वाले राज्यों में क्यों शामिल हैं। मुख्यमंत्री से किए सवालनेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल किए हैं कि उनके पास कर्ज घटाने की क्या ठोस योजना है। उन्होंने पूछा कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम कब मिलेगा और आत्मनिर्भर किसान कब बनेगा। उमंग सिंघार ने कहा कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि देश का अन्नदाता है और लेकिन सरकार लगातार उनकी उपेक्षा कर रही है। बता दें कि एमपी सरकार ने प्रदेश के बजट सत्र से ठीक पहले 5,000 करोड़ का नया कर्ज लिया है, जो पिछले एक हफ्ते में दूसरी बार लिया गया बड़ा कर्ज है। चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल 36 बार कर्ज लिया जा चुका है, और इसकी कुल राशि 67,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। recent visitors 62

महिला सशक्तिकरण को भूली सरकार, अब उनका रोजगार भी छीनने की तैयारी: संगीता शर्मा

The government has forgotten women’s empowerment and is now preparing to take away their jobs: Sangeeta Sharma भोपाल। प्रदेश में 1166 करोड़ रुपये के पोषण आहार कार्य को निजी हाथों में सौंपे जाने के निर्णय को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण के दावों के विपरीत तथा लाखों महिलाओं की आजीविका पर सीधा प्रहार बताया है।सुश्री शर्मा ने कहा कि वर्षों से प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित पोषण आहार प्लांट न केवल स्थानीय महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रहे थे, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण सामग्री की नियमित आपूर्ति भी सुनिश्चित कर रहे थे। सीमित संसाधनों के बावजूद इन समूहों ने गुणवत्तापूर्ण कार्य कर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की थी। ऐसे में इस संपूर्ण कार्य को निजी कंपनियों को सौंपना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की भावना के प्रतिकूल है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एक ओर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है, उन्हें ऋण उपलब्ध कराकर प्लांट स्थापित करवाती है, वहीं दूसरी ओर नीतिगत निर्णयों के माध्यम से उन्हीं इकाइयों को बंद करने की स्थिति पैदा कर देती है। इससे हजारों परिवारों की आय का स्रोत प्रभावित हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब महिला स्व-सहायता समूहों का मॉडल सफलतापूर्वक संचालित हो रहा था, तो उसे समाप्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने आशंका जताई कि इतने बड़े वित्तीय कार्य को निजी हाथों में सौंपने से पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि माताओं और बच्चों के पोषण जैसे संवेदनशील विषय को लाभ-हानि के व्यापार में परिवर्तित नहीं किया जाना चाहिए। शर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल मंचों और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार, सम्मानजनक आय और निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो कांग्रेस पार्टी महिला स्व-सहायता समूहों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करेगी। recent visitors 94