तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे: फिर हिरासत में सौरव दास-रांका; दिपके बोले- प्रतिरोध को दबा नहीं सकते

Arrived at Jantar Mantar with the Tricolour: Sourav Das and Ranka detained again; Dipke says resistance cannot be suppressed. दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार सुबह तिरंगा लेकर पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सीजेपी की ओर से साझा की गई पोस्ट के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य समेत संगठन के अन्य सदस्य शामिल हैं। दिपके ने क्या-क्या कहा?सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक देशभर में प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कार्रवाई की है। दिपके ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों से कहा गया कि वे इस बार मतदान नहीं कर सकते तो अगली बार कर लेंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी यही कहेगा कि वह इस बार चुनाव न लड़ें और अगली बार लड़ लें? दिपके ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को बड़ा और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विपक्ष समेत पूरे देश को ऐसे प्रदर्शनों के लिए एकजुट होना चाहिए। पहले विमान से हिरासत, फिर रिहाई और अब जंतर-मंतर पर कार्रवाईकॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को दिल्ली पुलिस ने पहली बार 10 अक्तूबर को हिरासत में लिया था। पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में पहुंचने की कोशिश में थे। पुलिस ने तीनों को दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से हिरासत में ले लिया। सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना चाहती थी। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताएं हुई हैं। इसके बाद 11 अक्तूबर को तीनों नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया। प्रदर्शन की अनुमति लेने थाने पहुंचे थे रांका-दासरिहाई के बाद सीजेपी ने प्रदर्शन से पीछे हटने के बजाय आंदोलन जारी रखने का एलान किया। 12 अक्तूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे। उन्होंने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए 24 घंटे के भीतर तारीख और समय तय करने की मांग की। उनका कहना था कि अगर पुलिस तारीख नहीं देती है, तो पार्टी खुद प्रदर्शन का एलान करेगी। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर रोड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया। पुलिस ने प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान जैसे वैकल्पिक स्थान बताए। सीजेपी ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने की मांग जारी रखी। इसी घटनाक्रम के बीच 13 अक्तूबर की सुबह सीजेपी के नेता और कार्यकर्ता तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बार-बार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की क्यों हो रही है कोशिश?इसकी मुख्य वजह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठे सवाल हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कई छात्र संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं। प्रदर्शनकारी इसे मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। इसी विरोध के तहत 10 अक्तूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एलान किया गया था। recent visitors 22

कूनो में अब तक 28 चीतों की मौत, इस साल 7 ने गंवाई जान; आशा के 8 माह के शावक की भी गई जान

28 cheetahs have died in Kuno so far, with 7 losing their lives this year; Asha’s 8-month-old cub has also died. मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला जारी है। अक्टूबर 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के बाद अब तक 28 चीतों की मौत हो चुकी है। इनमें वयस्क चीते और भारत में जन्मे शावक दोनों शामिल हैं। इस साल अब तक सात चीतों की मौत हुई है। ताजा मामला नामीबियाई मादा चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत का है। शावक की मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। 2023 में सबसे ज्यादा 9 चीतों की मौतसरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद शुरुआती तीन वर्षों में भी कई चीतों की मौत हुई। सालवार आंकड़े के अनुसार वर्ष 2023 में 6 वयस्क चीते और तीन शवक कुल 9 मौतें। 2024 में 2 वयस्क और चार शावक यानी कुल 6 मौतें। 2025 में एक वयस्क और पांच शावक यानी कुल 6 मौतें। 2026 में 12 अक्टूबर तक दो वयस्क, पांच शावक कुल सात चीतों की मौत हुई। इस प्रकार अब तक 11 वयश्क, 17 शावक समेत कुल 28 चीतों की मौत हो चुकी हैं। इस साल इन घटनाओं में गई जानइस वर्ष सात चीतों की जान गई। इसमें मई 2026 में जंगल में जन्मे चार शावक मृत मिले थे। उनकी मौत के पीछे किसी दूसरे वन्यजीव के हमले की आशंका जताई गई थी। जून 2026 में भारतीय मूल की मादा चीता KGP-11 की मोरेना जिले में चोटों के कारण मौत हुई। सितंबर 2026 में नामीबियाई चीता गौरव की मौत हुई। उसे कमजोर और डिहाइड्रेशन की स्थिति में पाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, उसे पहले से एक गंभीर बीमारी थी। वहीं, 12 अक्टूबर 2026 को आशा के आठ महीने के पांच शावकों में से एक मृत मिला। उसकी मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। अब भारत में कितने चीते बचे हैं?5 अक्टूबर 2026 को कूनो में पांच शावकों के जन्म के बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई थी। इसके बाद आशा के एक शावक की मौत के साथ यह संख्या घटकर 59 रह गई है। इनमें कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में मौजूद चीते शामिल हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी उठा सवालचीतों की मौत के बीच उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा भी सामने आया है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद से मृत चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी थी। हाल ही में मध्यप्रदेश वन विभाग ने सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट का हवाला दिया। इससे रिपोर्टों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। recent visitors 19

जबलपुर में नर्मदा नदी पर बनेगा 150 मीटर लंबा ब्रिज, हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के सेंसर से होगी निगरानी

A 150-meter-long bridge will be built over the Narmada River in Jabalpur; it will be monitored by sensors from a health monitoring system. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। जबलपुर की 114 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड परियोजना का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। लगभग 3500 करोड़ रुपये की इस परियोजना में नर्मदा नदी पर 150 मीटर स्पान पर एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज बनाया जा रहा है। इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, अमझर से बरेला तक के पांचवें पैकेज में करीब 30 प्रतिशत काम हुआ है, जिसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। रिंग रोड बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होने और प्रमुख राजमार्गों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। ब्रिज की तकनीकी बारीकियों का निरीक्षणयह जानकारी शनिवार को एनएचएआई के अधिकारियों ने पत्रकारों के साथ रिंग रोड़ निर्माण के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने बरेला से मनेगांव के बीच नर्मदा नदी पर बन रहे केबल ब्रिज की तकनीकी बारीकियों को देखा और पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।एनएचएआई के प्रोजेक्ट प्रभारी पीयूष रंजन ने दावा किया कि एनएचएआई में यह प्रदेश का पहला केबल ब्रिज है, जो केबल के साथ पिलर पर भी खड़ा है। करीब एक किमी लंबे इस ब्रिज का मुख्य भाग में लगे पिलर के बीच करीब 150 मीटर की दूरी है, जो इसे और मजबूत और आकर्षित बनाता है। उन्होंने बताया कि इस केबल ब्रिज का निर्माण पूरा होने के बाद इसमें एडवांस हेल्थ मानिटरिंग सिस्टम के सेंसर लगाए जाएंगे। इनसे पुल के झुकाव और केबलों के तनाव में होने वाले बदलावों की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।डेटा को एटीएमएस कंट्रोल सेंटर से जोड़ने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार, स्वतंत्र इंजीनियर इसकी निगरानी करेंगे, ताकि संभावित तकनीकी खामियों का समय रहते पता लगाकर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। अधिकारियों ने पुलों और प्रमुख संरचनाओं की डिजाइन लाइफ करीब 100 वर्ष बताई है। पुल में लगेंगे प्रोफाइल लाइटिंगनर्मदा पर बन रहे एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज में 150 मीटर का स्पान रखा गया है। सामान्य तकनीक से 50-50 मीटर के स्पान बनाने पर करीब 10 फाउंडेशन की जरूरत होती, जबकि इस डिजाइन में तीन से चार फाउंडेशन से काम पूरा करने की योजना है।इससे नदी के भीतर निर्माण करने में लगने वाले अतिरिक्त प्रयास और संसाधनों की बचत होगी। ब्रिज के एक हिस्से में छह केबल लगाने का काम पूरा हो चुका है। पुराने पुल के जीर्णोद्धार और फसाड लाइटिंग का प्रस्ताव भी है, ताकि घाट की ओर से इसका दृश्य आकर्षक दिखाई दे। पूरी रिंग रोड पर सर्विस रोड एनएचएआई के प्रबंधक तकनीकी पारस बंसल ने बताया कि इस पूरे रिंग रोड़ पर सर्विस रोड भी बनाई है। मुख्य सड़क का उपयोग तेज और भारी वाहनों के लिए होगा, जबकि सर्विस रोड से स्थानीय लोगों को आवाजाही की सुविधा मिलेगी।इससे स्थानीय और तेज गति वाले यातायात के बीच टकराव कम करने में मदद मिल सकती है। मुख्य सड़क से जुड़ने के लिए पैकेज-1 में पांच, पैकेज-2 में छह, पैकेज-3 में आठ और पैकेज-4 में चार प्रवेश-निकास बिंदु रखे गए हैं। पैकेज-5 में एक्सेस कंट्रोल के तहत केवल दो बिंदु प्रस्तावित हैं। पांच साल तक ठेकेदार की जिम्मेदारी पत्रकारों से चर्चा करते हुए एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण पूरा होने के बाद पांच साल तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी संविदाकार की होगी। इसके बाद सरकार यातायात की संभावनाओं और वित्तीय जरूरतों के आधार पर सामान्य रखरखाव या मुद्रीकरण पर निर्णय लेगी। उन्होंने नईदुनिया के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि डामर और सीमेंट-कंक्रीट सड़क में से किस तकनीक का उपयोग किया जाए, यह लागत, यातायात और रखरखाव की जरूरतों पर निर्भर करता है। टायर फटने की घटनाओं के लिए केवल सीसी सड़क को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता, तेज गति, टायर का दबाव, ओवरलोडिंग और खराब स्थिति भी इसके कारण हो सकते हैं। recent visitors 29

आज इंडिया ब्लॉक का ‘सुप्रीम’ मार्च, कांग्रेस मुख्यालय में तैयारियां तेज; दिल्ली में नेताओं का जुटना शुरू

INDIA bloc’s ‘Supreme’ march today; preparations intensify at Congress headquarters; leaders begin gathering in Delhi. चुनाव आयोग में कथित अनियमितता को लेकर विपक्ष लामबंद दिख रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ दिल्ली में आंदोलन हो रहा है। आज विपक्षी दलों के गठबंधन- इंडिया ब्लॉक के नेताओं के मार्च, विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने व्यापक बंदोबस्त किए हैं इंडिया गठबंधन के मार्च पर क्या बोले राजभर?उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता ने गठबंधन को नकार दिया है और उसके पास कोई सबूत नहीं है। राजभर ने कहा कि ज्ञानेश कुमार एक साल से चुनाव आयुक्त हैं, जबकि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर हुए 10 साल और कांग्रेस को 30 साल हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया 1952 से चली आ रही है। जेएनयू के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज, कांग्रेस सांसद का नाम भी शामिलदिल्ली पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। 11 अक्तूबर 2026 को दर्ज इस एफआईआर में कांग्रेस के लोकसभा सांसद और जेएनयू के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम का नाम भी शामिल है। पुलिस ने वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत मामला दर्ज किया है। recent visitors 21

भोपाल में CGST सुपरिंटेंडेंट रिश्वत लेते गिरफ्तार, घरों से ₹72.5 लाख नकद बरामद

CGST Superintendent arrested in Bhopal while accepting a bribe; ₹72.5 lakh in cash recovered from his homes. भोपाल। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भोपाल में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग के सुपरिंटेंडेंट राजेश कुमार गुप्ता को कथित तौर पर दो लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद अधिकारी के भोपाल और कानपुर स्थित आवासों पर तलाशी ली गई, जहां से 72.5 लाख रुपये नकद और महंगी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। CBI के अनुसार, अधिकारी पर एक स्क्रैप कारोबारी से रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायत में दावा किया गया कि कारोबारी के वाहनों की जांच नहीं करने, माल से लदे वाहनों को नहीं रोकने और कारोबार निर्बाध रूप से चलने देने के बदले हर महीने दो लाख रुपये मांगे जा रहे थे। शिकायत के आधार पर एजेंसी ने कार्रवाई की और कथित तौर पर रिश्वत लेते अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी में ₹72.5 लाख नकद, संपत्तियों के दस्तावेज भी मिलेगिरफ्तारी के बाद CBI की टीम ने भोपाल और कानपुर स्थित आवासों की तलाशी ली। इस दौरान 72.5 लाख रुपये नकद और संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए। जांच एजेंसी अब नकदी के स्रोत और संपत्तियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। हालांकि, बरामद नकदी या संपत्ति के दस्तावेज अपने आप में अवैध कमाई का प्रमाण नहीं हैं। जांच के निष्कर्ष और अदालत में सामने आने वाले साक्ष्य ही आरोपों की पुष्टि या खंडन का आधार होंगे। recent visitors 26

जबलपुर में सजेगा ‘Power of Women Garba Maharaas’, महिलाओं के हुनर और उत्साह को मिला मंच

Jabalpur to host ‘Power of Women Garba Maharaas’, a platform to showcase women’s talent and enthusiasm विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर। महिलाओं की प्रतिभा, आत्मविश्वास और पारंपरिक संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से Power of Women Garba Maharaas का आयोजन रविवार, 11 अक्टूबर से होटल डिलाइट पैलेडियम में किया जा रहा है। आयोजन में गरबा और डांडिया के रंगों के साथ महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम दोपहर 2 बजे शुरू किया गया। इसके साथ ही तीन दिवसीय गरबा वर्कशॉप भी रखी गई है, जिसमें प्रतिभागी गरबा नृत्य की बारीकियां सीख सकेंगे। आयोजकों ने कार्यक्रम में भाग लेने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया है। प्रतिभागियों के लिए निर्धारित शुल्क प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क ₹600 और पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए ₹450 निर्धारित किया गया है। आयोजकों की ओर से शुरुआती 30 रजिस्ट्रेशन करने वालों के लिए पुरस्कारों की घोषणा की गई है। इसके अलावा विजेताओं और टाइटल होल्डर्स के लिए भी विभिन्न पुरस्कार रखे जाने की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम में फलाहारी भोजन की व्यवस्था भी रहेगी। आयोजन से जुड़ी टीम प्रियंका पोद्दार पटेल कार्यक्रम की डायरेक्टर हैं। पारुल नौग्रैया, प्रीति दुबे, प्रतिमा श्रीवास्तव और ज्योति श्रीवास्तव को-डायरेक्टर के रूप में जुड़ी हैं। एडवाइजरी पैनल में दीपा तिवारी, संगीता तिवारी, नीलम चौधरी, रीना प्रसाद और मनीषा पटेल के नाम शामिल हैं। यह आयोजन गरबा प्रेमियों को पारंपरिक नृत्य, उत्सव और सांस्कृतिक सहभागिता का अवसर प्रदान करेगा। कार्यक्रम में शामिल होने तथा रजिस्ट्रेशन संबंधी जानकारी के लिए पोस्टर पर दिए गए संपर्क नंबर 8085707393 पर संपर्क किया जा सकता है। recent visitors 33

जबलपुर में स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए सड़कों पर उतरे आयुष डॉक्टर, निकाला कैंडल मार्च

AYUSH doctors took to the streets in Jabalpur to demand a stipend increase, holding a candlelight march. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर । स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आयुष डॉक्टर विरोध पर उतर गए हैं। अपनी मांग की तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए इन सभी ने कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से लेकर झंडा चौक तक ये कैंडल मार्च निकाला गया। इस मार्च में 150 से 200 छात्र शामिल थे। कैंडल मार्च निकालते हुए शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से झंडा चौक पहुंचे छात्रों ने आखिर में मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांगों के लिए आवाज उठाई। छात्रों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में जो स्टाइपेंड दिया जा रहा है वह बहुत कम है। वह चाहते हैं कि इसे बढ़ाकर एमबीबीएस छात्रों को जितना कर देना चाहिए। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग विरोध कर रहे हैं छात्रों ने बताया कि उनके वर्तमान स्टाइपेंड 9383 रुपए है। वह चाहते हैं कि इसे बढ़ाकर एमबीबीएस छात्रों के स्टाइपेंड 21500 तक कर दिया जाए क्योंकि खर्चों के हिसाब से ये बहुत कम है। छात्रों का कहना है की एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति और आयुष चिकित्सा पद्धति के विद्यार्थियों को मिलने वाले स्टाइपेंड में अंतर नहीं किया जाना चाहिए। वह भी प्रशिक्षण के दौरान मेहनत करते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सारे दायित्व निभाते हैं। ऐसे में उन्हें आर्थिक लाभ भी समान मिलना चाहिए। विरोध कर रहे छात्रों ने बताया कि स्टाइपेंड से उनके खर्च निकलना मुश्किल हो रहे हैं। अगर इसे बढ़ा दिया जाएगा तो विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिलेगी और वह बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण पर ध्यान दे सकेंगे। आंदोलन करने की चेतावनी कैंडल मार्च निकालकर अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाने वाले इन छात्रों का कहना है कि अगर स्टाइपेंड बढ़ाने की उनकी मांग को नहीं सुना गया, तो वह आंदोलन तेज करेंगे। छात्रों ने उम्मीद जताई है कि उनकी मांग पर विचार कर इसे पूरा किया जाएगा। आदेश का है इंतजार छात्रों ने यह भी बताया कि अपनी मांगों को लेकर उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का सपोर्ट मिला है। आयुष मंत्रालय से भी संबंध में बातचीत हुई है लेकिन अब तक किसी भी तरह का आदेश जारी नहीं किया गया है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि लंबे समय से वह अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। लेकिन कोई समाधान न मिलने की वजह से उन्हें प्रदर्शन पर उतरना पड़ा। recent visitors 22