Madhya Pradesh High Court said – much remains to be done to improve the traffic system in Jabalpur

विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर शहर में बदहाल ट्रैफिक सिग्नल, जाम और अतिक्रमण की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर माना कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। कोर्ट ने ट्रैफिक प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई नौ सितंबर को न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय के साथ अधिवक्ता मोहम्मद साजिद ने पक्ष रखा।
राज्य की ओर से उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि पूर्व में 10 जुलाई, 28 जुलाई और 19 अगस्त को दिए निर्देशों के पालन में ट्रैफिक मैनेजमेंट सेल गठित किया गया है। नगर निगम को इसका नोडल विभाग बनाया गया है। सेल में नगर निगम के विभिन्न अधिकारियों को ट्रैफिक जंक्शन, सड़कों, अतिक्रमण हटाने और पार्किंग जैसी समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी दी गई है। याचिकाकर्ता ने भी माना कि प्रयास हुए हैं, लेकिन कई स्थानों पर अब भी जाम और अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है।
ट्रैफिक व्यवस्था के तीन सूत्र
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस को ट्रैफिक इंजीनियरिंग, ट्रैफिक एजुकेशन और ट्रैफिक एनफोर्समेंट यानी ट्रैफिक व्यवस्था के तीनों पहलुओं पर सक्रियता से काम करना होगा। अधिकारियों को नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता भी बताई गई, ताकि वे आम जनता के सुगम यातायात और अतिक्रमण मुक्त सड़कों के लिए अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को समझें।
कोर्ट ने राज्य की ओर से उपस्थित अधिवक्ता को इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के कुछ नाम सुझाने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता होने पर नगर निगम आयुक्त व पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से परामर्श लेकर प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन के लिए समिति गठित करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।