मध्य प्रदेश के लोगों को निगल रहा गुटखा, तंबाकू ने माउथ कैंसर के मरीज 40 फीसदी बढ़ाए, देश में सबसे ज्यादा मामले यहां

People in Madhya Pradesh are swallowing gutkha, tobacco has increased the incidence of mouth cancer by 40 percent, with the highest number of cases in the country. भोपाल । मध्यप्रदेश में जुगाड़ का गुटखा मुंह के कैंसर के मामलों में हर साल बढ़ोत्तरी कर रहा है. मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए मध्यप्रदेश में करीबन 14 साल पहले गुटखा की बिक्री पर रोक लगाई गई थी, लेकिन इसके बाद पाउच का स्थान ‘जुगाड़ के गुटखे’ ने ले लिया. तंबाकू-चूने और जुगाड़ के गुटखे के चलते देश में सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर के मरीज मध्य प्रदेश में सामने आ रहे हैं. मध्यप्रदेश में साल 2025 में 48 हजार 694 कैंसर के मरीज मिले थे, जिनमें से करीबन 40 फीसदी मरीज ओरल कैंसर के थे. भोपाल में सबसे ज्यादा मुंह का कैंसर नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम इंवेस्टीगेटर की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मुंह के कैंसर के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं. राजधानी भोपाल में 1 लाख लोगों की आबादी में 41 लोग मुंह के कैंसर से पीड़ित मिल रहे हैं. इसके अलावा प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी मुंह के कैंसर से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में मिल रहे हैं. गुटखे पर पाबंदी तो जुगाड़ वाला गुटखा चला कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल के मुताबिक, ” मुंह के कैंसर पर रोक लगाने के लिए ही 1 अप्रेल 2012 को मध्यप्रदेश में तंबाकू पाउच की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन इसके बाद जुगाड़ का पाउच आ गया. अब एक पाउच में सादा गुटखा होता है, और दूसरे में तंबाकू, चूना आदि. इस सबको मिलाकर यह वहीं तंबाकू का गुटखा बन जाता है, जिस पर प्रतिबंध लगाया गया था. यही वजह है कि प्रदेश में मुंह के कैंसर के रोगी कम होने के स्थान पर बढ़ गए हैं.” अब युवाओं में आ रहे कैंसर के मामले, एमपी में सबसे तेज डॉ. श्याम अग्रवाल कहते हैं, ” अब मुंह के कैंसर के मरीजों के मामले में एक अहम बदलाव आया है. कुछ साल पहले तक मुंह के कैंसर के मरीज की औसत उम्र 50 साल और उससे अधिक ही होती थी, लेकिन अब 20-25 साल की नई उम्र के युवा भी कैंसर मरीज बन रहे हैं. कारण सिर्फ तंबाकू का सेवन है. पूरे विश्व में भारत, पाकिस्तान सहित कुछ देशों में ही मुंह के कैंसर के मरीज सामने आते हैं, इसमें भी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा. मध्यप्रदेश में कैंसर के मरीजों की संख्या में हर साल 10.55 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो रही है, जबकि इसमें मुंह के कैंसर के मरीज 40 फीसदी बढ़ रहे हैं. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के अनुसार मध्यप्रदेश में साल 2021 से 2025 के दौरान कैंसर के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. 40 फीसदी मामले माउथ कैंसर के ही प्रदेश में मुंह के कैंसर के मामले औसत कैंसर के मामलों से ज्यादा बढ़ रहे हैं. देश में भी मिलने वाले कैंसर के कुल मामलों में 40 फीसदी सिर्फ मुंह के कैंसर के मामले होते हैं. भोपाल स्थिति जवाहरलाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल के आंकड़ों को देखें तो हॉस्पिटल में साल 2012 में मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या 1836 थी, जो साल 2025 में बढ़कर 2614 तक पहुंच गई हैं. यहां इलाज कराने के लिए प्रदेश के कई जिलों से मरीज पहुंचते हैं. मुंह के कैंसर के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़त देखी जा रही है, जो खतरनाह है. साल 2020 में हॉस्पिटल में 2118 ओरल कैंसर के मरीज मिले थे, जो साल 2021 में बढ़कर 2519 हो गए. साल 2022 में यहां 2492 मरीज इलाज कराने पहुंचे. वहीं, साल 2023 में 2566 मरीज, 2024 में 2743 और साल 2025 में 2614 ओरल कैंसर के मरीज सामने आए हैं. मुंह में सफेद, लाल दाग हो तो सर्तक हो जाएं जवाहरलाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल भोपाल के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. विजय भार्गव कहते हैं, ” गुटखा, पाउच, तंबाखू खाने और सिगरेट पीने वाले लोग मुंह में होने वाले शुरुआती लक्षणों को बिलकुल भी नजरअंदाज न करें. यदि धीरे-धीरे मुंह खुलना कम हो जाए या मुंह में किसी तरह के लाल-सफेद धब्बे बन जाएं तो तुरंत तंबाकू, गुटखा खाना बंद कर दें और चैकअप कराएं. शुरुआती स्तर पर ही जांच और दवा के जरिए गंभीर बीमारी को टाला जा सकता है.” डॉक्टर आगे कहते हैं, ”लगातार तंबाकू, गुटखा खाने वालों और सिगरेट पीने वालों के मुंह में सफेद या लाल धब्बे बन जाते हैं, यह एक तरह की चेतावनी होती है, जो शरीर आपको देता है. ऐसी स्थिति में तुरंत तंबाकू-पाउच खाना बंद करना चाहिए. कई बार लोग तर्क देते हैं कि सिर्फ तंबाकू और चूना खाने से कुछ नहीं होता, लेकिन जब तंबाकू को चूना के साथ मिलाया जाता है तो यह निकोटीन को खून में तेजी से घोलता है और इससे तंबाकू की लत को और मजबूत करता है, इसके साथ ही और मुंह में छाले बनाता है, जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन जाता है.” recent visitors 2

स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा आबकारी महकमा, हर दिन बहती है 1400 लीटर अवैध शराब, फिर भी 900 से ज्यादा पद खाली

स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा आबकारी महकमा, हर दिन बहती है 1400 लीटर अवैध शराब, फिर भी 900 से ज्यादा पद खाली The excise department is grappling with a severe staff shortage, with 1,400 liters of illicit liquor being transported daily, yet over 900 posts remain vacant. सागर में हुई जहरीली शराब की त्रासदी के बाद मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में हर दिन औसतन 1,400 लीटर अवैध शराब जब्त होने के बावजूद, महकमा भारी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। राज्य में सैकड़ों पद खाली पड़े हैं, जिससे अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह लगाम कसना एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेष संवाददाता : राम मेहरा भोपाल। एमपी में हर दिन औसतन लगभग 1,400 लीटर अवैध देसी शराब जब्त की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद आबकारी प्रवर्तन मशीनरी भारी मैनपावर की कमी से जूझ रही है। सागर में हाल ही में हुई दर्दनाक जहरीली शराब त्रासदी, जिसमें कम से कम 22 लोगों की जान चली गई, के बाद इस प्रशासनिक लाचारी और मैदानी अमले की कमी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हर दिन हो रही है हजारों लीटर अवैध शराब की जब्ती आबकारी विभाग के रिकॉर्ड से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दिसंबर तक कुल 3,74,639 लीटर अवैध देसी शराब जब्त की गई, जिसका दैनिक औसत लगभग 1,388 लीटर बनता है। खास बात यह है कि जब्ती का यह पैमाना ऐसे समय में दर्ज किया गया है जब अवैध डिस्टिलेशन, अवैध कब्जे, तस्करी और अवैध बिक्री के तहत दर्ज किए जाने वाले आबकारी अधिनियम के मामलों की संख्या पिछले पांच वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई थी। कागजों पर सख्ती और महकमे में भारी खालीपन एक तरफ जहां अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ आबकारी विभाग खुद अंदरूनी रूप से कर्मचारियों और अधिकारियों के भारी संकट का सामना कर रहा है। महकमे के पास जमीनी स्तर पर काम करने के लिए पर्याप्त अमला ही नहीं बचा है। मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब 1,400 लीटर अवैध देसी शराब की जा रही है जब्त। सागर में जहरीली शराब पीने से कम से कम 22 लोगों की हो चुकी है दर्दनाक मौत। आबकारी विभाग के क्लास I और II के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। क्लास III के 1,877 स्वीकृत पदों में से 704 पद अभी भी रिक्त चल रहे हैं। सरकार का दावा है कि नई भर्तियों की प्रक्रिया जारी है, लेकिन ट्रेनिंग और प्रक्रिया में समय लगेगा। पड़ोसी राज्यों तक फैले हैं अवैध शराब के जाल के तार मध्य प्रदेश की आबकारी व्यवस्था लगातार पड़ोसी राज्यों में हो रही त्रासदियों के बाद से ही रडार पर बनी हुई है। हाल ही में गुजरात के भावनगर में एक बड़ी जहरीली शराब की घटना सामने आई थी, जिसमें 12 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। गुजरात पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ था कि इस कांड के दो मुख्य आरोपी मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और वे ही अवैध जहरीली शराब बनाने के लिए आवश्यक कैमिकल की प्रोक्योरमेंट (खरीद-फरोख्त) में सीधे तौर पर शामिल थे। recent visitors 4

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा- जबलपुर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी

Madhya Pradesh High Court said – much remains to be done to improve the traffic system in Jabalpur विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर शहर में बदहाल ट्रैफिक सिग्नल, जाम और अतिक्रमण की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर माना कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। कोर्ट ने ट्रैफिक प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई नौ सितंबर को न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय के साथ अधिवक्ता मोहम्मद साजिद ने पक्ष रखा। राज्य की ओर से उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि पूर्व में 10 जुलाई, 28 जुलाई और 19 अगस्त को दिए निर्देशों के पालन में ट्रैफिक मैनेजमेंट सेल गठित किया गया है। नगर निगम को इसका नोडल विभाग बनाया गया है। सेल में नगर निगम के विभिन्न अधिकारियों को ट्रैफिक जंक्शन, सड़कों, अतिक्रमण हटाने और पार्किंग जैसी समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी दी गई है। याचिकाकर्ता ने भी माना कि प्रयास हुए हैं, लेकिन कई स्थानों पर अब भी जाम और अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है। ट्रैफिक व्यवस्था के तीन सूत्र हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस को ट्रैफिक इंजीनियरिंग, ट्रैफिक एजुकेशन और ट्रैफिक एनफोर्समेंट यानी ट्रैफिक व्यवस्था के तीनों पहलुओं पर सक्रियता से काम करना होगा। अधिकारियों को नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता भी बताई गई, ताकि वे आम जनता के सुगम यातायात और अतिक्रमण मुक्त सड़कों के लिए अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को समझें। कोर्ट ने राज्य की ओर से उपस्थित अधिवक्ता को इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के कुछ नाम सुझाने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता होने पर नगर निगम आयुक्त व पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से परामर्श लेकर प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन के लिए समिति गठित करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। recent visitors 4

अल्पेश यशवंत ने ली मध्य प्रदेश के 30वें चीफ जस्टिस की शपथ, क्राइम केस में बड़े फैसलों के लिए मशहूर

अल्पेश यशवंत ने ली मध्य प्रदेश के 30वें चीफ जस्टिस की शपथ, क्राइम केस में बड़े फैसलों के लिए मशहूर Alpesh Yashwant was sworn in as the 30th Chief Justice of Madhya Pradesh, known for his landmark decisions in criminal cases. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता  जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को नया स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है. प्रदेश के 30 वें चीफ जस्टिस के रूप में अल्पेश यशवंत कोगजे ने राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली. राजभवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई मंत्री और अधिकारी मौजूद दे. शपथ ग्रहण समारोह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य न्यायाधीश को बधाई दी है. वकालत से शुरू हुआ था सफर नव नियुक्त चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का जन्म 16 जुलाई 1969 में हुआ था. उन्होंने बीएससी केमिस्ट्री और 1990 में एलएलबी की थी और 1993 से गुजरात में वकालत कर रहे थे. मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस बनाए जाने के पहले अल्पेश यशवंत कोगज गुजरात न्यायालय में वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. प्रदेश के नए चीफ जस्टिस वकील के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं. 1993 में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद उन्होंन गुजराज में वकील के रूप काम करना शुरू किया संतुलित कार्यप्रणाली और विधिक क्षेत्र में उनकी गहरी समझ को देखते हुए 2001 में उन्हें असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और इसके बाद 2002 में एडिशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर बनाया गया. 6 अप्रैल 2016 में गुजराज उच्च न्यायालय में अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति किय गया. उन्होंने आपराधिक न्यायप्रणाली, प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं. कैसे चुनाव जाता है हाईकोर्ट चीफ जस्टिस उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. हालांकि यह पूरी प्रक्रिया कॉलेजियम प्रणाली के जरिए होती है. सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम नामों की सिफारिश केन्द्र सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय को करता है और इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दी जाती है. इसके बाद अधिसूचना जारी होती है. उच्च न्यायाधीश के रूप में चुनने के पहले संबंधित की कानूनी समझ, कार्यप्रणाली आदि को देखा जाता है. न्यायाधीश के लिए कम से कम 10 सालों तक किसी न्यायिक पद पर कार्य करने का अनुभव के अलावा बतौर अधिवक्ता 10 साल तक कार्य का अनुभव जरूरी होता है. recent visitors 7

जबलपुर के सिहोरा में अबॉर्शन की दुकान, महिला डॉक्टर के पास न कोई डिग्री न डिप्लोमा

Abortion shop in Sihora, Jabalpur; female doctor has no degree or diploma विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर । सिहोरा में फर्जी महिला डॉक्टर अवैध तरीके से क्लीनिक चला रही थी. क्लीनिक में बड़ी मात्रा में अबॉर्शन से जुड़े उपकरण बरामद किए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग और तहसीलदार की टीम ने जब छापा मारा तो फर्जी महिला डॉक्टर सकपका गई. क्लीनिक में अबॉर्शन करने की किटों के साथ ही और दवाइयां भी मिली हैं. तहसीलदार के साथ बीएमओ ने दी दबिश शहर से दूरदराज इलाकों में आज भी बिना डिग्री के झोलाछाप डॉक्टर बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं. इनकी वजह से अक्सर लोगों की जान तक चली जाती है. कई लोग इनकी गलत दवा की वजह से गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं. ऐसा ही मामला जबलपुर शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर सिहोरा के पास खितोला में सामने आया है. सिहोरा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर सिहोरा अर्शिया खान और तहसीलदार सिहोरा अमित गुप्ता को शिकायत मिली थी कि खेतोला में प्रीति केवट नाम की महिला कई महीने से लोगों का इलाज कर रही है. क्लीनिक पर अवैध गतिविधियों की शिकायतें शिकायत में लोगों ने शक जताया कि प्रीति केवट फर्जी डॉक्टर है. क्लीनिक पर अवैध गतिविधियां चल रही हैं. मेडिकल ऑफिसर और तहसीलदार ने टीम बनाकर साई मंगलम कॉलोनी के मकान में छापा मारा और प्रीति केवट से पूछताछ शुरू की गई तो पता चला कि उसके पास मेडिकल प्रैक्टिस करने की कोई डिग्री नहीं है. सिहोरा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ.अर्शिया खान ने बताया “प्रीति केवट ने पूछताछ में जानकारी दी कि उसने अल्टरनेटिव मेडिसिन का डिप्लोमा किया है, लेकिन ना तो वह अपना डिप्लोमा दिखा पाई और न ही ये साफ किया कि उसने पढ़ाई कहां तक की है.” डिटेल रिपोर्ट सीएमएचओ को सौंपेगी टीम जांच के दौरान टीम को कई आपत्तिजनक दवाइयां भी क्लीनिक पर मिली, जिनमें से अबॉर्शन से जुड़ी दवाइयां और किट हैं. इसके साथ ही बच्चों के इलाज से जुड़े कई उपकरण मिले हैं. महिलाओं के इलाज से जुड़े कई सर्जिकल आइटम भी क्लीनिक से बरामद किए गए. प्रशासन ने क्लीनिक संचालक प्रीति केवट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की है. कार्रवाई से संबंधित पूरी रिपोर्ट तैयार कर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भेजी जाएगी. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. recent visitors 7