अल्पेश यशवंत ने ली मध्य प्रदेश के 30वें चीफ जस्टिस की शपथ, क्राइम केस में बड़े फैसलों के लिए मशहूर
Alpesh Yashwant was sworn in as the 30th Chief Justice of Madhya Pradesh, known for his landmark decisions in criminal cases.

विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को नया स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है. प्रदेश के 30 वें चीफ जस्टिस के रूप में अल्पेश यशवंत कोगजे ने राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली. राजभवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई मंत्री और अधिकारी मौजूद दे. शपथ ग्रहण समारोह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य न्यायाधीश को बधाई दी है.
वकालत से शुरू हुआ था सफर
नव नियुक्त चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का जन्म 16 जुलाई 1969 में हुआ था. उन्होंने बीएससी केमिस्ट्री और 1990 में एलएलबी की थी और 1993 से गुजरात में वकालत कर रहे थे. मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस बनाए जाने के पहले अल्पेश यशवंत कोगज गुजरात न्यायालय में वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. प्रदेश के नए चीफ जस्टिस वकील के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं. 1993 में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद उन्होंन गुजराज में वकील के रूप काम करना शुरू किया
संतुलित कार्यप्रणाली और विधिक क्षेत्र में उनकी गहरी समझ को देखते हुए 2001 में उन्हें असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और इसके बाद 2002 में एडिशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर बनाया गया. 6 अप्रैल 2016 में गुजराज उच्च न्यायालय में अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति किय गया. उन्होंने आपराधिक न्यायप्रणाली, प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं.
कैसे चुनाव जाता है हाईकोर्ट चीफ जस्टिस
उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. हालांकि यह पूरी प्रक्रिया कॉलेजियम प्रणाली के जरिए होती है. सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम नामों की सिफारिश केन्द्र सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय को करता है और इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दी जाती है. इसके बाद अधिसूचना जारी होती है. उच्च न्यायाधीश के रूप में चुनने के पहले संबंधित की कानूनी समझ, कार्यप्रणाली आदि को देखा जाता है. न्यायाधीश के लिए कम से कम 10 सालों तक किसी न्यायिक पद पर कार्य करने का अनुभव के अलावा बतौर अधिवक्ता 10 साल तक कार्य का अनुभव जरूरी होता है.