एमपी विधानसभा में चाय की केतली लेकर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस विधायक ने शराब की बोतलों की माला पहनी

MP Congress Protest: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के 1 साल पूरा होने के साथ ही विपक्ष ने आंदोलन के सिलसिले को बढ़ा दिया है. विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बेरोजगारी की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार चाय की केतली लेकर पहुंचे. इसके अलावा कांग्रेस के विधायक महेश परमार ने शराब घोटाले का आरोप लगाते हुए शराब की खाली बोतलों की माला पहनकर ध्यान अपनी और आकर्षित कराया. डॉ मोहन यादव सरकार को 1 साल पूरा होने के साथ ही सरकार जन कल्याण अभियान चलाते हुए प्रदेश भर में कई सौगात दे रही है. दूसरी तरफ कांग्रेस अपने विधायकों के साथ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है. विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने बुधवार (18 दिसंबर) को कहा कि सरकार को युवाओं को नौकरी देना चाहिए. सदन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाथ में चाय की केतली लेकर प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा, ”जब युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा तो उनके पास चाय बेचने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा.” कांग्रेस विधायक महेश परमार शराब की खाली बोतल की माला पहन कर पहुंचे और उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शराब घोटाले को लेकर कड़ी कार्रवाई का संदेश देने की बात कही थी. मध्य प्रदेश में हजारों करोड़ों का शराब घोटाला हो चुका है. केंद्र सरकार को इस बारे में संज्ञान लेना चाहिए. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक जितेंद्र पंडिया ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए कांग्रेस केवल सुर्खियां बटोरने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है. कांग्रेस के नेता मीडिया में चेहरा चमकाने के लिए नाटक कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ”मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार हर वर्ग के लिए काम कर रही है. सरकार मध्य प्रदेश के विकास की गति को तेजी प्रदान कर रही है. मध्य प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं. कांग्रेस के पास आंदोलन करने के लिए कोई मुद्दा तक नहीं बचा है.” recent visitors 118

श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड नीलबड़ ब्रांच का शुभारंभ

सुशील दामले ( विशेष संवाददाता ) नीलबड़ ! राजधानी स्थित नीलबड़ मेन रोड में श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड के नए कार्यालय का शुभारंभ हुआ,वही मुख्य अतिथि के रूप में स्टेट हेड शैलेश वर्मा एवं ब्रांच मैनेजर संदीप मिश्रा उपस्थित रहे,मुख्य अतिथि के द्वारा रीबन काटकर कार्यालय का उद्घाटन किया ! वही स्टेट हेड शैलेश वर्मा ने हमें बताया कि,श्रीराम फाइनेंस आम जनता का भरोसा एवं विश्वास प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है,श्रीराम फाइनेंस ने अब गोल्ड की दुनिया में भी अपना कदम रखा है,वही 4 पहिया एवं कमर्शियल गाड़ीयो के फाइनेंस के साथ-साथ अब गोल्ड में भी श्रीराम फाइनेंस सेवा उपलब्ध करा रहा है,कम ब्याज में आपको यहां पर संपूर्ण सुविधा उपलब्ध करा रहे है ! इस अवसर पर ब्रांच मैनेजर संदीप मिश्रा,ब्रांच टीम लीडर दीपक कुमार गौर,कलेक्शन मैनेजर पंकज चौहान,ब्रांच कस्टमर सपोर्ट एग्जीक्यूटिव मिस्टर अंकू बिसेन आदि बड़ी संख्या में कर्मचारी,अधिकारी एवं और कस्टमर मौजूद रहे recent visitors 143

मध्यप्रदेश वासियों के लिए खुशखबरी, फाइलों के ढेर और बाबुओं के चक्कर से मिली मुक्ति , अब प्रदेश में लगेंगे ई ऑफिस

भोपाल ! मध्यप्रदेश में सरकारी कामकाज में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य में अब सभी काम ऑनलाइन होंगे। ऑफिसों में फाइलों के ढेर और बाबुओं के चक्कर से मुक्ति मिल गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश में ई ऑफिस लगाने की कवायद की है जिसका काम शुरु भी हो गया है। नए साल से मंत्रालय वल्लभ भवन में सभी विभागों में ई-ऑफिस के माध्यम से ही फाइलें निपटाई जाएंगी। इससे फाइलों की मॉनिटरिंग में भी आसानी होगी। ई-ऑफिस के लिए कर्मचारियों, अधिकारियों को बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया है। कामकाज में तेजी और फाइलों की स्थिति की ट्रैकिंग के लिए ई-ऑफिस के संचालन की कवायद की जा रही है। राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन के सभी विभागों में 1 जनवरी 2025 से ई-ऑफिस संचालित किए जाएंगे। इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभागीय प्रमुखों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय में करीब डेढ़ दर्जन विभागों में ई-ऑफिस शुरु भी हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था से टेबल पर से फाइलों का ढेर हट जाएगा। मंत्रालय में 39 विभागों में ई-ऑफिस चालू होगा जिनमें से 17 में ई- फाइल सिस्टम प्रारंभ भी हो चुका है। बाकी 22 विभागों में भी 1 जनवरी से ई-ऑफिस लगने लगेंगे।राजधानी के सभी विभागाध्यक्ष कार्यालयों यानि संचालनालयों को भी ई-ऑफिस से जोड़ दिया गया है। राज्य के सभी संभागों और जिलों में भी जल्द ही ई-ऑफिस चालू कराए जाएंगे। राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन के विभागों में अब ई- फाइलें ही बनेंगी। यहां तक कि कैबिनेट प्रस्ताव भी ऑनलाइन तैयार किया जाएगा। ई-ऑफिस में सभी काम ऑनलाइन होंगे। अधिकारी कर्मचारी कंप्यूटर पर फाइलें निपटाएंगे। सरकारी कामकाज ई- फाइलों से ही होंगे। मैन्युअल फाइलिंग बंद हो जाएगी। पुरानी नस्तियों को भी ई- फाइलों में रखा जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री व अन्य मंत्रियों के लिए मैन्युअल फाइलें ही चलेंगी। recent visitors 221

WEATHER UPDATE:  एमपी में ठंड का सितम जारी , भोपाल में टूटा 58 साल का रिकॉर्ड 

WEATHER UPDATE: Cold wave continues in MP, 58 year old record broken in Bhopal  भोपाल । मध्यप्रदेश में इस बार जनवरी से भी ठंडा दिसंबर है। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिछले 8 दिन से शीतलहर चल रही है, जो 9वें दिन मंगलवार को भी चलेगी। मौसम विभाग ने भोपाल, जबलपुर समेत 20 जिलों में कोल्ड वेव यानी, शीतलहर चलने का अलर्ट जारी किया है। कड़ाके की ठंड की वजह से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, जबकि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए हैं। सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, मंगलवार के बाद शीतलहर का दौर खत्म होने का अनुमान है और कुछ दिन तक थोड़ी राहत मिल सकती है। मंगलवार को 20 जिलों में शीतलहर चलने का अनुमान है। इनमें से 6 जिले- शाजापुर, आगर-मालवा, सीहोर, रायसेन, मंडला और छतरपुर में पेड़-पौधों की पत्तियों पर बर्फ भी जम सकती है। पचमढ़ी में 1.9 डिग्री, शहडोल का कल्याणपुर भी रहा ठंडा  प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। रविवार-सोमवार की रात में इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां पारा 1.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीती रात की तुलना में 0.9 डिग्री की बढ़ोतरी जरूर हुई है। शहडोल के कल्याणपुर में तापमान 2.3 डिग्री रहा। राजधानी भोपाल में पारे में गिरावट हुई और यह 3.3 डिग्री पर आ पहुंचा। मंडला में 3 डिग्री और उमरिया, शाजापुर के गिरवर में 3.3 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़, खजुराहो में पारा 5 डिग्री के नीचे ही रहा। भोपाल में टूटा 58 साल का रिकॉर्ड, पारा 3.3 डिग्री रहा भोपाल में दिसंबर की सर्दी का 58 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। 15-16 दिसंबर की रात में टेम्प्रेचर 3.3 डिग्री रहा। अब पारा 0.3 डिग्री लुढ़का तो ओवरऑल रिकॉर्ड टूट जाएगा। कड़ाके की ठंड की वजह से भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों के लिए हीटर लगाए गए हैं। वहीं, हाउस की खिड़कियों को बंद किया गया है। ताकि जानवरों को ठंड न लगे। recent visitors 289

मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रदर्शन: रोशनपुरा चौराहे पर पुलिस की बैरिकेडिंग, आ रहे कांग्रेस नेताओं को रोका

Demonstration of Madhya Pradesh Congress: Police barricading at Roshanpura intersection, stopped the coming Congress leaders. MP Congress Protest: मध्य प्रदेश कांग्रेस का विधानसभा का घेराव का प्रदर्शन जारी है। सोमवार को एमपी कांग्रेस के इस प्रदर्शन में प्रदेशभर के हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। अभी भोपाल के जवाहर चौक इलाके में सभा चल रही है। इसके बाद कांग्रेस के नेता हजारों कार्यकर्ताओं के साथ विधानसभा की ओर कूच करेंगे। उनको रोकने के लिए पुलिस ने रोशनपुरा चौराहे पर बैरिकेडिंग कर रखी है। यहां वाटर कैनन भी मौजूद है। वहीं दूसरे जिलों से आ रहे कांग्रेस नेताओं को रोकने के लिए पुलिस ने भोपाल से लगी सड़कों पर भी बैरिकेड्स लगा रखे हैं। राजगढ़ जिले से आए कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका तो जिला पंचायत अध्यक्ष चन्दर सिंह राजगढ़ की अधिकारियों से बहस हो गई। प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विधायक और कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। मनोज परमार के बच्चों की करेंगे मदद: सज्जन कांग्रेस की सभा में सज्जन सिंह वर्मा ने कहा- मणिपुर जल रहा है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में सुरक्षित हैं लेकिन वहां हिंदू मारे जा रहे हैं। वर्मा ने कहा कि मनोज परमार और उनकी पत्नी नेहा ने बीजेपी और ईडी के दबाव में आत्महत्या कर ली। आज बीजेपी के लोग उन बच्चों को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। मैं कल अपने पार्टी के तमाम साथियों से मदद लेकर एक बड़ी गुल्लक उन बच्चों को देने जाऊंगा। ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए और भविष्य में तकलीफ न हो। रावत को लेकर जयवर्धन का तंज पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि बीजेपी सरकार ने लाड़ली बहन योजना की राशि 1250 रुपए में एक रुपया भी नहीं बढ़ाया। चुनाव जीतने के बाद बीजेपी ने लाड़ला नेता योजना शुरू की। उस लाड़ला योजना के सबसे पहले लाभार्थी बने रामनिवास रावत। रामनिवास बीजेपी में गए लेकिन विजयपुर की जनता ने, माताओं-बहनों ने गरीब आदिवासी मुकेश मल्होत्रा को विधानसभा पहुंचा दिया। बीजेपी के लाड़ले नेता रामनिवास जी को घर बैठा दिया। बीजेपी सरकार चीन का लहसुन खिला रही कांग्रेस की सभा में पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह ने कहा- आज बांग्लादेश के जरिये चीन का लहसुन हमारे यहां आ रहा है। बीजेपी सरकार के राज में हमें चीन का लहसुन खिलाया जा रहा है। किसानों को फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा। मैं जब ऊर्जा मंत्री था, कांग्रेस की सरकार 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली देती थी। आज 1500 रुपए में 100 यूनिट बिजली मिल रही है। किसानों पर फर्जी केस लगाए जा रहे हैं। आज एकजुट होकर इस भाजपा सरकार के खिलाफ लड़ना है। अलका लांबा बोलीं- सरकार को घुटने पर लाएंगे महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा भी प्रदर्शन स्थल पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को बने हुए एक साल के ऊपर हो गया है। आधी आबादी यानी महिलाओं से सुरक्षा का वायदा था। एक साल में कितनी बहनें सुरक्षित हुईं? रीवा में इनको जिंदा गाड़ने की हिम्मत दबंगों ने दिखाई है। उज्जैन में नाबालिग बेटी को लहूलुहान हमने देखा है। बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। कौन सी बहन को साढ़े 400 रुपए में गैस सिलेंडर मिल रहा है, जिसकी गारंटी मोदी जी ने दी थी। महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा इन मुद्दों पर हम सरकार को घुटनों पर लाएंगे। अपना समय भी आएगा : कमलनाथ कमलनाथ ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत बड़ा राजनीतिक परिवर्तन हुआ है। नौजवानों, समझ लो। आज आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इस राजनीतिक परिवर्तन को आप पहचानिए। जब तक आप घर-घर नहीं जाएंगे, हम बीजेपी से कभी मुकाबला नहीं कर पाएंगे। हमारा कर्तव्य है कि इस राजनीतिक परिवर्तन को पहचानें और उस हिसाब से काम करें। मुझे विश्वास है कि आप निराश नहीं होंगे। कमर ठाने रखिएगा। अपना समय भी आएगा। पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा- प्रदेश की तस्वीर आप सभी के सामने है। आज बड़े दुख के साथ मुझे कहना पड़ता है कि मध्य प्रदेश की पहचान घोटाला प्रदेश की है। हर क्षेत्र में घोटाला। नौजवानों के रोजगार में घोटाला। किसानों के बीज-खाद में घोटाला। जहां देखो घोटाला-घोटाला। आज हमारे कृषि क्षेत्र में कितनी समस्या है। एक बात याद रखिएगा कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था 70 प्रतिशत कृषि क्षेत्र पर आधारित है। अगर कृषि क्षेत्र डूबता है तो पूरा प्रदेश डूबता है। रात में हटाए गए होर्डिंग शहर में कांग्रेस के प्रदर्शन के जगह जगह होर्डिंग भी लगाए गए हैं। 15 दिसंबर, रविवार रात को नगर निगम के अमले ने कुछ जगहों से होर्डिंग भी हटाए हैं। इसे लेकर विवाद की छुटपुट घटनाएं भी हुई। कांग्रेस ने इसे लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस की हैं ये मांगें? recent visitors 166

मौत का हॉटस्पॉट बनीं राजधानी भोपाल की कई सड़कें

Many roads of the capital Bhopal have become hotspots of death भोपाल । राजधानी भोपाल की कुछ सड़के ऐसी है जो मौत का हॉटस्पॉट बन चुकी है। जहां आए दिन हादसे होते हैं और लोगों की मौत हो जाती है। इस साल दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, क्योंकि पिछले साल की तुलना में इस साल 2,435 सड़क दुर्घटनाओं में 193 लोगों की जान चली गई। यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 31 अक्टूबर के बीच 1,865 लोग घायल भी हुए। 2023 में, 2,498 सड़क दुर्घटनाओं में 155 लोग मारे गए, जबकि इसी अवधि के दौरान शहर में 1,917 लोग घायल हुए। यातायात पुलिस ने कहा कि इस साल दर्ज की गई घातक सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण तेज गति थी। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि शहर की सड़कें उनकी हाई-एंड बाइक और एसयूवी को तेज गति से चलाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, जिनकी अधिकतम गति 150-200 किमी प्रति घंटा है। एक बार फिर, मिसरोद पुलिस स्टेशन का अधिकार क्षेत्र सड़क दुर्घटना में घायलों के मामले में शहर का सबसे घातक क्षेत्र बनकर उभरा। क्या कह रहे आंकड़े? ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से 31 अक्टूबर के बीच मिसरोद में सड़क हादसों में 22 लोगों की मौत हुई, जो शहर में सड़क हादसों में मरने वालों की सबसे अधिक संख्या है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने मिसरोद क्षेत्र में होशंगाबाद रोड को अत्यधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। दुर्घटनाओं के प्राथमिक कारणों में सड़क के डिवाइडर पर कट पॉइंट और आवासीय कॉलोनियों को मुख्य हाईवे से जोड़ने वाली सड़कें शामिल हैं।  बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने से स्थिति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन सड़क के चौड़ीकरण से वाहनों की गति बढ़ गई है। कई दुर्घटनाएं इसलिए होती हैं क्योंकि आस-पास की कॉलोनियों के निवासी बिना सामने से आने वाले तेज रफ्तार वाहनों देखे लापरवाही से हाईवे पर एंट्री करते हैं। पुलिस मानती है कि ड्राइवरों को पूरी तरह से रुककर सुनिश्चित करना चाहिए कि सड़क साफ है, तो उसके बाद ही हाईवे पर आगे बढ़ना चाहिए। मिसरोद पहले स्थान पर, यहां सबसे ज्यादा मौत सड़क दुर्घटनाओं के मामले में मिसरोद के बाद खजूरी क्षेत्र का स्थान आता है। जब इस अवधि के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 20 लोगों की जान चली गई। यहां भोपाल-इंदौर हाईवे, भौरी बायपास और गांव की सड़कों को दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। रातीबड़ तीसरा सबसे घातक क्षेत्र बन गया है। जहां इस साल जनवरी से अक्टू‌बर तक सड़क दुर्घटनाओं में 13 लोगों की मौत हुई है। इसके बाद कोह-ए-फिजा का स्थान है, जहां सड़क दुर्घटनाओं में 11 लोगों की जान गई, इसके बाद बैरागढ़ और बाग सेवनिया का स्थान है, जहां इस साल सड़क दुर्घटनाओं में 10-10 लोगों की मौत हुई। चालान भी पिछली बार से अधिक एक वरिष्ठ यातायात अधिकारी ने बताया कि यातायात पुलिस ने इस साल 2024 में अब तक यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के 63,318 चालान जारी किए हैं, जो इसी अवधि के दौरान 2023 में जारी किए गए चालानों से अधिक है। इस साल हेलमेट न पहनने पर 34,000 से अधिक लोगों पर जुर्माना लगाया गया, जबकि सीटबेल्ट न पहनने पर 8,800 से अधिक लोगों पर जुर्माना लगाया गया। सख्ती के बावजूद लोग यातायात नियमों का उलंघन कर रहे है। सड़कों की इंजीनियरिंग में हुई गलतियों से हो रहे हादसे, होगा विश्लेषण यातायात डीसीपी संजय सिंह का कहना है कि शहर में होने वाली लगभग 90 प्रतिशत घातक सड़क दुर्घटनाओं में तेज गति मुख्य कारण पाई गई है। इसके अलावा यातायात नियमों और सुरक्षा उपायों का पालन करने में लापरवाही दुर्घटनाओं का कारण बनती है। प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ, वाहन अधिक से अधिक एडवांस होते जा रहे हैं। लोग यह महसूस किए बिना उन्हें तेज गति से चलाते हैं कि शहर की सड़कें इतनी तेज गति के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण एजेंसियों, बीएमसी, पीडब्ल्यूडी, जिला प्रशासन और यातायात पुलिस की संयुक्त टीमें शहर की सड़कों पर सड़क इंजीनियरिंग में हुई गलतियों का विश्लेषण करेंगी और समस्याओं को दूर करने के लिए काम करेंगी। पुलिस ने दी समझाइश पुलिस ने कहा कि यदि सड़क दुर्घटना होती है, तो घायलों को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। तत्काल चिकित्सा देखभाल से जान बच सकती है। लोगों को सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करनी चाहिए, यदि वे क्षेत्र से गुजरते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को दोपहिया या कार चलाते समय हमेशा हेलमेट और सीट बेल्ट पहनना चाहिए। शराब पीकर गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। recent visitors 106

मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर दिखेंगी जल्द सरकारी बसें फर्राटे भरते

मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एकदम से चरमरा गई है। दो दशक पहले जहां सड़कों पर राज्य परिवहन निगम की बसें फर्राटे भरती दिखाई देती थी वहीं अब निजी बसों का बोलबाला है। तनाकुलित तथा स्लीपर कोच बसें तक प्रदेश की सड़कों पर दौड़ रही है। राज्य परिवहन की बसें प्रदेश के विभिन्न शहरों को जोड़ने के अलावा दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक यात्रियों को लाती ले जाती थी। भोपाल। राज्य परिवहन निगम की इन बसों में जहां किराया वाजिब था तो वहीं विशिष्ट जनों व पत्रकारों के लिए पास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती थी। राज्य परिवहन निगम के संचालक मंडल में पहले नेताओं को रखा जाता था और अध्यक्ष का पद नौकरशाहों के जिम्में में होता था। एक बार का दिलचस्प वाकया है तब राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष एक नौकरशाह थे किसी पत्रकार ने अनौपचारिक चर्चा में उनसे पूछ लिया कि आपने बसों में यात्रा कब से नहीं की तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया था की आखिरी बस यात्रा 15 साल पहले की थी, इस चर्चा के बाद अध्यक्ष महोदय ने समस्त डिपो प्रबंधकों को यह निर्देश दिया कि वह महीने में दो बार बसों में यात्रा करें और यात्रियों से फीडबैक ले कर व्यवस्था सुचारू करें। इसके साथ ही अध्यक्ष ने स्वयं भी हर महीने बस में सफर करना शुरू कर दिया बाद में राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष पद पर नेताओं को पदस्थ किया जाने लगा और यही से पूरे सिस्टम में दीमक लगना शुरू हो गया। जिन डिपो प्रबंधकों को राज्य परिवहन निगम अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष से अच्छी सेटिंग होती थी वहां मनमानियां करने लगे। दूसरे राज्यों में जाने वाली बसों में उन्ही ड्राइवर व कंडक्टरों को भेजा जाने लगा जो वापसी पर अच्छी खासी रकम उनको भेंट कर सके क्योंकि राज्य की सीमा पार करने के बाद टिकट चेकिंग का कोई डर नहीं, लोकल सवारियों लो और अपनी जेब गर्म करो वाला सिद्धांत चलता था। दूसरे राज्यों में स्थित राज्य परिवहन निगम के डिपो प्रबंधकों के रोस्टर पर अपने नाते रिश्तेदारों को रख लिया जो केवल वेतन लेते थे काम नहीं करते थे। राज्य परिवहन निगम के एक उपाध्यक्ष ने जब विधानसभा का चुनाव लड़ा तो डिपो प्रबंधकों ने उनके चुनावी खर्च में हिस्सेदारी की, किसी डिपो प्रबंधक ने पोस्टर का खर्च उठाया तो किसी ने विज्ञापनों के लिये भुगतान किया। इस तरह की व्यवस्था ने तथा भ्रष्टाचार ने राज्य परिवहन निगम को खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और आखिरकार 2005 में राज्य परिवहन निगम को बंद करना पड़ा हालांकि इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। राज्य परिवहन निगम बंद होने का फायदा निजी बस मालिकों ने उठाना शुरू किया यह वह समय था जब दिग्विजय सिंह की सरकार का दूसरा कार्यकाल चल रहा था। दिग्गी सरकार घाटा बताती रही और भाजपा सरकार ने राज्य परिवहन निगम पर ही ताला लगा दिया और कुछ कर्मचारियों को वीआरएस देकर घर बैठा दिया तो कुछ कर्मचारियों को दूसरे विभागों में स्थानांतरित कर दिया गया। खैर यह तो राज्य परिवहन निगम का हाल हुआ उधर निजी बस ऑपरेटर की मनमानी बढ़ने लगी। बस में क्षमता से अधिक यात्री भरना निर्धारित किराए से ज्यादा वसूलना, सवाल करने पर यात्रियों से बदसलूकी करना, यहां तक की मारपीट की नौबत आना इत्यादि। शहरी इलाकों में तो फिर भी ठीक-ठाक मगर ग्रामीण क्षेत्रों में हालत ज्यादा खराब हो गए और लोग परेशान हो गए। राज्य परिवहन निगम बंद हो जाने के बाद भी जिन राज्यों से अंतर राज्य समझौता था उनकी बसे एमपी में आती रही। निजी ऑपरेटर इनका भी विरोध करने लगे। बहरहाल अब मोहन यादव की सरकार ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को 19 साल बाद फिर से शुरू करने का संकेत दिया है तदनुसार लोक परिवहन सेवा का प्रारूप तैयार कर कैबिनेट में पेश किया जाएगा फिर उस पर अमल होना शुरू होगा वैसे अभी यह तय नहीं है कि लोक परिवहन का संचालन किस तरह होगा महाराष्ट्र का मॉडल अपनाया जाए या पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर अमल किया जाए यह फैसला भी हो जाएगा। recent visitors 171