अचल संपत्ति गाइडलाइन नियम: संशोधन, प्रक्रिया और प्रशासनिक सवाल

Real Estate Guideline Rules: Amendments, Procedures and Administrative Questions भोपाल। मध्यप्रदेश में अचल संपत्ति के बाजार मूल्य का निर्धारण “मार्गदर्शक बाजार मूल्य सिद्धांत” के आधार पर किया जाता है। यह सिद्धांत राज्य में वर्ष 2000 में लागू हुआ था, और इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष संपत्ति की गाइडलाइन दरें निर्धारित की जाती हैं। हाल ही में इस प्रक्रिया के अंतर्गत कुछ संशोधन किए गए हैं, जिनमें नए गजट नोटिफिकेशन और संभावित अध्यादेशों की बात सामने आई है। इसके संदर्भ में जनहित के कुछ सवाल और मुद्दे उठे हैं। गाइडलाइन निर्धारण की प्रक्रिया और केंद्रीय मूल्यांकन समिति केंद्रीय मूल्यांकन समिति का गठन गाइडलाइन दरों का निर्धारण करने और उनकी समीक्षा के लिए होता है। इंदौर में गाइडलाइन दरों को लेकर अंतिम बैठक 20 अक्टूबर 2024 को आयोजित हुई, लेकिन इसके बावजूद गाइडलाइन दरें कई स्थानों पर मीडिया में पहले ही लीक हो गईं। इसे लेकर यह सवाल उठता है कि मीडिया तक यह सटीक जानकारी कैसे पहुंची। जिला मूल्यांकन समिति और दावे-आपत्तियों का समय इस बार गाइडलाइन पर दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि 4 नवंबर 2024 को निर्धारित की गई है। लेकिन यह समय दीपावली पर्व के अवकाश के बीच आता है, जो कि मध्यप्रदेश में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दौरान लगातार अवकाश होने के कारण यह प्रश्न उठता है कि क्या अवकाश के दिनों में संबंधित कार्यालय खुले थे और क्या लोगों को दावे-आपत्ति दर्ज करने का पूरा अवसर मिला। जनसंपर्क विभाग या जिला प्रशासन ने इस संबंध में क्या सूचनाएं दीं और क्या संबंधित अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था थी, इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रस्तावित गाइडलाइन के मैन्युअल अवलोकन और सूचना पटल पर जानकारी प्रस्तावित गाइडलाइन को आम जनता के अवलोकन हेतु कहां रखा गया था, क्या मैन्युअल रूप से इसका निरीक्षण संभव था, और क्या सूचना पटल पर इसकी जानकारी उपलब्ध कराई गई थी? इन सवालों के संदर्भ में वैधानिकता और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। संपदा प्रणाली और बाजार मूल्य के संबंध प्रश्न यह भी उठता है कि यदि बाजार मूल्य गाइडलाइन दर से कम है, तो क्या संपदा प्रणाली इसे मान्यता देती है? धारा 31 के तहत मूल्य निर्धारण में उपपंजीयक गणों की भूमिका क्या है और कितने जिला पंजीयकों ने इस नियम के तहत दस्तावेज स्पष्ट किए हैं? आयकर विभाग और गाइडलाइन का संबंध आयकर विभाग संपत्ति का मूल्य निर्धारण गाइडलाइन दर के अनुसार करता है। क्या यह कानून आयकर विभाग के लिए अब भी लागू है या इसमें किसी प्रकार का संशोधन हुआ है? साथ ही, यदि गाइडलाइन दर को जिला पंजीयक के आदेश से मान्यता मिलती है, तो क्या व्यवहार मूल्य की मान्यता आयकर नियमों के अनुरूप है? मौखिक निर्देश और वैधानिक नियम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस संबंध में मौखिक निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कानून की दृष्टि से मौखिक निर्देशों की तुलना में लिखित और वैधानिक नियम अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। अतः यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह गाइडलाइन किस कानून, किस वर्ष और किस विधान के अंतर्गत आती है। इन प्रश्नों का तथ्यात्मक और नीतिगत उत्तर देकर प्रशासन को पारदर्शिता बनाए रखनी होगी, ताकि आम जनता के अधिकारों की रक्षा हो सके और गाइडलाइन प्रक्रिया के बारे में भ्रम दूर हो सके। recent visitors 181

बीना विधायक निर्मला सप्रे के मुंह पर भाजपा ने बांध दी पट्टी, नहीं कर सकती हैं मीडिया से बात

BJP has tied a bandage on the mouth of Bina MLA Nirmala Sapre, she cannot talk to the media भोपाल। मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी संगठन ने बीना विधायक निर्मला सप्रे पर इस बात की पाबंदी लगा दी है कि वे अब मीडिया से बात नहीं कर सकेंगे। दरअसल मीडिया ने कोशिश की वो उनसे मिलें बातचीत करें और उनसे जाने कि निर्मला का अगला कदम क्या होगा, लेकिन सप्रे ने साफ साफ कह दिया है कि मीडिया से बात नहीं करने के लिए मुझे ऊपर से आदेश है।मतलब भारतीय जनता पार्टी के संगठन से आदेश है कि जब तक वे अंतिम निर्णय नहीं लेती है जब तक कि वे किस पार्टी में है किसमें नहीं है, यह तय नहीं कर लेती हैं तब तक अब मीडिया से बातचीत नहीं करेंगे। निर्मला 2023 में कांग्रेस के टिकट पर बीना से विधायक चुनी गई थी।लेकिन 3 मई 2024 को रात में उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली। भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेने के बाद आज तक निर्मला सप्रे ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। वे चाहतीं तो इस्तीफा देकर बीजेपी से चुनाव लड़ेगी, लेकिन ऐसी कुछ परिस्थितियां बन गई है कि विधायक सप्रे अब इस्तीफा देने को तैयार नहीं है। सब जानते हैं कि जो निर्मला सप्रे ने अपने मतदाताओं और कार्यकर्ताओं व अपने समर्थकों से जो कहा था कि अभी बीना के विकास के लिए इस्तीफा दे रही है। प्रदेश में अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है तो बीना का विकास होगा। बीना जिला भी बनेगा, लेकिन यह बात तय हो गई है कि अब भारतीय जनता पार्टी बीना को जिला नहीं बनाएगी। क्योंकि बीना और खुरई के बीच में जिला बनाने को लेकर विवाद चल रहा है। कौन जिला बनना चाहिए, कौन नहीं बनना चाहिए। दूसरा मध्यप्रदेश में अब जिलों को लेकर एक परिसीमन समिति का गठन कर दिया गया है।जब तक वह समिति की रिपोर्ट नहीं आती है तब तक बीना जिला नहीं बनेगा। बेशक मुख्यमंत्री ने बीना का दौरा कर लिया है। तमाम विकास कार्यों की घोषणा कर दी है, लेकिन निर्मला सप्रे आज भी हिम्मत नहीं कर पा रही है कि वे कांग्रेस से इस्तीफा दे दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े। एक इंटरव्यू में सप्रे ने यह दावा था कि अक्टूबर में वे कांग्रेस के विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे और भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव का रास्ता सुगम कर देंगी। लेकिन आप जानते हैं कि उस समय से लेकर आज तक निर्मला सप्रे लगातार कहती रही है कि वह जल्द निर्णय लेंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा अभी तक नहीं किया। पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में उनको देखा गया। उनसे मीडिया ने कुछ सवाल जानने की कोशिश की, लेकिन वे भाग निकली। भाजपा ने उनके मुँह पर पट्टी बांध दी है कि कुछ भी हो जाए, लेकिन अब आपका कोई भी बयान मीडिया में नहीं आना चाहिए। वरना आपके लिए खतरा पैदा हो सकता है। क्योंकि अब यह पूरा मामला कोर्ट कचहरी की ओर जा रहा है। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने बाकायदा एक शिकायत विधानसभा स्पीकर को दी है कि सप्रे को अब आप दलबदल कानून के तहत बाहर का रास्ता दिखाएं। उन्हें नोटिस भी मिले।एक नहीं तीन तीन नोटिस मिले। उन्होंने जवाब भी दे दिया कि कांग्रेस की विधायक हैं। बीजेपी में गई नहीं है। कितना झूठ बोल सकते हैं वो सारे झूठ के सहारे ले लिए गए हैं। उसके बाद अभी तक अध्यक्ष ने अपना फैसला नहीं सुनाया है। निश्चित तौर पर जैसे ही अध्यक्ष का फैसला आएगा, उन्हें तीन महीने में निर्णय लेना होता है। जैसे फैसला आएगा कांग्रेस हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला वहां जा सकती है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं ने निर्मला से कहा है बिल्कुल चुप रहना है। एक शब्द नहीं बोलना है। आपका एक भी शब्द हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में बयान माना जा सकता है। बीना में इस बात की भी चर्चा है कि उन्हें उपचुनाव में शायद हार का मुँह देखना पड़ सकता है इसलिए वे इस्तीफा नहीं दे रहीं हैं। वे बुधनी और विजयपुर उपचुनाव के हालात से भी डरी हुई हैं। recent visitors 222

पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा पर जूते रखने वाला आरोपी गिरफ्तार, कांग्रेस ने किया था प्रदर्शन

The accused who put shoes on the statue of the former Prime Minister has been arrested; Congress had protested भोपाल । पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर शरारती तत्वों के द्वारा जूता रखने का मामला सामने आया है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत अरेरा हिल्स थाने में की है. साथ ही उन्होंने 7 दिन में आरोपियों को पकड़ने का पुलिस को अल्टीमेटम दिया है. साथ ही कार्यकर्ताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा की पानी से धुलाई की और दूध से अभिषेक भी किया. इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है. कांग्रेसियों ने नारेबाजी कर थाने में की शिकायत दरअसल, किसी अज्ञात व्यक्ति ने पुरानी विधानसभा मिंटो हाल (कुशाभाऊ ठाकरे सभागार) के सामने चौराहे पर स्थापित लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर दो जूते रख दिए थे. शनिवार दिन में यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव अवस्थी वहां से निकले तो उनकी नजर प्रतिमा के कंधों पर रखे जूतों पर पड़ी. उन्होंने तत्काल सूचना विधायक आरिफ मसूद व कांग्रेस के प्रदेश सचिव अब्दुल नफीस को दी. देखते ही देखते घटनास्थल पर बड़ी संख्या में कांग्रेसी एकत्रित हो गए. फिर नारेबाजी कर विरोध जताया गया. जहांगीराबाद के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष यसवंत यादव ने अरेरा हिल्स थाने में शिकायत आवेदन दिया. साथ ही प्रतिमा का दूध से अभिषेक कर माला पहनाई गई. आरोपी को अरेरा हिल्स पुलिस ने किया गिरफ्तार कांग्रेस के प्रदेश सचिव अब्दुल नफीस ने कहा, ”शास्त्री जी के इस अपमान को कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी, जिस प्रकार असामाजिक तत्वों के द्वारा उनका अपमान किया जा रहा है, ये अशोभनीय है. यदि एक सप्ताह के भीतर पुलिस जूते रखने वाले को गिरफ्तार नहीं करती है तो कांग्रेसी सड़कों पर उतरेंगे. जिस प्रधानमंत्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया. देश को संकट के समय उबारा. उस प्रधानमंत्री का किसी ने अपमान किया.” अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने देर रात एक आरोपी करन बैरागी को गिरफ्तार कर लिया है. recent visitors 169

सीसीटीवी कैमरे और रखरखाव।

CCTV Cameras and Maintenance. इंदौर नगर निगम ने नियम बना दिया है कि सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे मुख्य चौराहे व खास जगहों पर,निजी प्रतिष्ठान भी लगाऐं, खैर अच्छा है।अब आते हैं हम लगे हुए सीसीटीवी कैमरे पर और उनकी व्यवस्था पर, इंदौर के प्रशासनिक संकुल में 22सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, नब्बे फीसदी बंद है या कैमरों पर धुल जमी हुई है,। पुलिस थानों में अब लगेंगे जो लगे हैं अधिकांश समझ सकते हैं क्या औपचारिकता पूरी करते हैं।शहर के अधिकांश धार्मिक स्थलों पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं सरकारी नियंत्रण वाले खजराना गणेश मंदिर, बाबा रणजीत मंदिर, बिजासन माता मंदिर पर तो अन्य धार्मिक स्थलों पर भी संचालन करने वालों ने, तो क्या सभी काम कर रहे, व्यवस्थित रूप से रिकार्डिंग होती है, कैमरों का ऐंगल खुराफाती लोगों ने मोड़ा या ऊपर नीचे तो नहीं किया, कैमरे पर गंदगी तो नहीं,,,सवाल आम आदमी की जरूरत का सुरक्षा का भी है। तथा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तो अपराधिक घटनाएं करने वाले के मन में भय भी रहे तथा अपने कर्मचारियों में भी भय रहे।पंरतु मेरी जानकारी में है कि मैटेनस सही तरीके से नहीं हो रहे,अगर होते तो मैटेनस साथ-साथ निगाहें तथा जागरुकता दोनों के परिणाम सामने आते।आप बड़े बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान में जाए आपको लगेगा सीसीटीवी कैमरे का मतलब और उपयोगिता, कुछेक धार्मिक स्थलों पर भी,, बाकी राम भरोसे व्यवस्था चल रही,मैं बिना तथ्य के कुछ भी नहीं लिखता और खूद को कसौटी पर रखकर,,,आवश्यकता है कि सीसीटीवी कैमरे जहां जहां लगे हैं लगवाए गए हैं उनकी उपयोगिता सुनिश्चित हो,,, आवश्यकता है । प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट recent visitors 160

संत शरण में जीतू पटवारी, पीठाधीश्वर शांडिल्य महाराज से लिया आशीर्वाद

Jeetu Patwari took refuge in saint, took blessings from Peethadheeshwar Shandilya Maharaj भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार, 2 नवंबर को करुणाधाम आश्रम, नेहरू नगर का दौरा कर पीठाधीश्वर सुदेश शांडिल्य महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर जीतू पटवारी ने महाराज को दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं और उन्हें सम्मान स्वरूप शॉल व श्रीफल भेंट किया। इस मुलाकात में पटवारी के साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे, जिनमें पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, भोपाल जिला शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, महामंत्री संजीव सक्सेना, अमित शर्मा और गुड्डू चौहान प्रमुख थे। कांग्रेस नेताओं ने इस अवसर पर संत शांडिल्य महाराज के दर्शन किए और प्रदेश में समृद्धि व शांति की कामना की।  जीतू पटवारी का यह दौरा पार्टी की धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। recent visitors 155

भोपाल में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का अपमान, पीसीसी के पूर्व चीफ अरुण यादव ने जताई नाराजी

Anti-social elements garlanded the statue of former Prime Minister Lal Bahadur Shastri with shoes in Bhopal भोपाल। देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री के भोपाल में अपमान का मामला सामने आया है। इस मामले की वीडियो एक्स पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने वायरल कर तीखी नाराजगी जताई है। देश के महान नेताओं का सम्मान उनकी पुण्य तिथि और जयंती पर किया जाता है, लेकिन उनके अपमान के लिए शरारती तत्व कोई भी मौका नहीं चूकते। महान नेताओं की सार्वजनिक स्थानों व चौराहा-तिराहों पर उनकी स्थापित प्रतिमाएं की देखरेख को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं लेता और इसका परिणाम आए दिन महान नेताओं के अपमान की घटनाएं सामने आती हैं। एक ताजा मामला भोपाल का सामने आया है जिसे कांग्रेस के नेता ने एक्स पर वीडियो के साथ शेयर किया है।भोपाल में पुरानी विधानसभा के सामने पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की प्रतिमा तिराहा पर स्थापित है। जिस पर उनकी पुण्यतिथि और जयंती पर फूल माला डालने के लिए राजनीतिक दलों के नेता पहुंचते हैं। मगर इसके बाद शायद ही कभी कोई नेता इनकी तरफ देखता होगा। प्रतिमा पर धूल चढ़ी रहती है लेकिन अभी एक्स पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस प्रतिमा का एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो से भोपाल शहर शर्मसार हो रहा है क्योंकि पूर्व पीएम शास्त्री की प्रतिमा पर किसी शरारती तत्व ने जूतों की माला पहना दी है। पूर्व पीसीसी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने इस मामले में दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की है। साथ ही घटना को घोर निंदनीय एवं अपमानजनक बताया है। उन्होंने सरकार से मांग है कि दोषियों पर कठोर से कठोर कार्यवाही की जाए। वहीं, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष और मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने भी इसकी निंदा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। recent visitors 202

राहुल गांधी ने कि कारीगर समुदाय से मुलाकात: पेंटरों और कुम्हारों की जिंदगी कि चुनौतियों पर चर्चा

Rahul Gandhi meets artisan community: discusses challenges in life of painters and potters नेता विपक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में पेंटर और कुम्हार समुदाय के सदस्यों के साथ समय बिताया, उनके काम की बारीकियों को समझा और उनकी जिंदगी से जुड़ी परेशानियों पर गहन चर्चा की। राहुल गांधी ने इन मेहनतकश कारीगरों के साथ काम में हाथ बंटाया और उनकी कठिनाइयों को नजदीक से जानने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि ये कारीगर हमारे घरों को अपनी कला से रोशन करते हैं, लेकिन उनके खुद के जीवन में खुशहाली और स्थिरता की कमी है। इसके लिए समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह इन हुनरमंदों को न केवल पहचान दे, बल्कि उनके जीवन को बेहतर बनाने में सहयोग भी करे। पेंटर समुदाय की चुनौतियाँ: सीमित अवसर, जोखिमपूर्ण काम और स्थायित्व की कमी राहुल गांधी ने पेंटर समुदाय के साथ चर्चा करते हुए पाया कि उनके काम में कई तरह की चुनौतियाँ हैं। इन कलाकारों का काम चाहे घरों की दीवारों पर हो या बड़े भवनों पर, इनमें कई जोखिम जुड़े होते हैं। अधिकतर पेंटर अनौपचारिक श्रम बाजार में काम करते हैं, जिसके चलते उन्हें नियमित आय या भविष्य में स्थायित्व की कोई गारंटी नहीं मिलती। कई पेंटरों ने अपनी परेशानियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं होते, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। राहुल गांधी ने इस पर चिंता जताई और कहा कि इस समुदाय को बेहतर उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करना अत्यंत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने पेंटरों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का समाधान करने पर भी जोर दिया, ताकि इस समुदाय को एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सके। कुम्हार समुदाय से बातचीत: पारंपरिक कला के संरक्षण की जरूरत राहुल गांधी ने कुम्हार समुदाय के साथ बातचीत करते हुए उनकी कला की बारीकियों को समझा। कुम्हारों की कला भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न हिस्सा है। लेकिन आज, आधुनिकता के इस दौर में यह कला विलुप्त होने के कगार पर है। कुम्हारों ने बताया कि पारंपरिक मिट्टी के बर्तन और मूर्तियाँ बनाने का काम पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है, लेकिन अब प्लास्टिक और मशीनी उत्पादों के कारण उनकी मांग घटती जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार और समाज को मिलकर कुम्हारों को उचित बाजार और सहयोग प्रदान करना चाहिए। यदि उनके उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए, तो ये लोग न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होंगे बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर को भी संजीवनी मिलेगी। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि इस कला को आधुनिक बाजार में स्थान दिलाने के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की भी आवश्यकता है। हुनरमंदों को मौके देने पर जोर: स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण राहुल गांधी का मानना है कि यदि सही प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिले तो कारीगर और कलाकार अपनी कला से समाज में योगदान कर सकते हैं और एक आर्थिक संबल पा सकते हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि पेंटरों और कुम्हारों जैसे कारीगरों के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे कलाकारों के लिए वित्तीय योजनाओं, लोन स्कीम और सरकारी सब्सिडी की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि उन्हें अपनी कला को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक आधार मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बाजारों और कला मेलों का आयोजन करने का सुझाव दिया, जहां ये कलाकार सीधे अपने उत्पादों को बेच सकें और उचित मुनाफा कमा सकें। समाज के प्रति संदेश: कला और मेहनत की इज्जत करें राहुल गांधी ने इस मुलाकात के दौरान एक संदेश दिया कि समाज को इन मेहनतकशों के योगदान को समझना चाहिए और उनकी कला का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेंटर और कुम्हार जैसे लोग हमारे घरों और समाज को सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर हम इनकी कला और मेहनत की इज्जत करेंगे और इन्हें सहयोग देंगे, तो एक समृद्ध और सशक्त समाज की स्थापना हो सकती है। राहुल गांधी की यह पहल न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया कि कैसे नेता जनता के करीब जाकर उनकी असली समस्याओं को समझ सकते हैं और उनके समाधान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। recent visitors 169