गडकरी ने फिर बोला अपनी ही पार्टी पर हमला, भाजपा की फसल में लग गए हैं कीड़े

Gadkari again attacked his own party, BJP’s crop is infested with insects बड़ी हो चुकी है BJP की फसल, लग गए हैं कुछ कीड़े; नितिन गडकरी बोले- छिड़कने होंगे कीटनाशक गडकरी ने भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को भी रेखांकित किया और कहा कि सरकार और प्रशासन का धर्मनिरपेक्ष होना जरूरी है भोपाल। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में दागी नेताओं के घुसपैठ को लेकर चिंता जताई। गडकरी ने कहा कि जैसे-जैसे पार्टी का विस्तार हो रहा है, कुछ समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी स्वच्छता बनाए रखने के लिए कदम उठाने होंगे। मीडिया से बातचीत करते हुए नितिन गडकरी ने ‘बीमारी वाले फसलों’ का उदाहरण देते हुए कहा है कि पार्टी को ‘कीटनाशक’ छिड़कने की आवश्यकता पर जोर देना चाहिए। गडकरी ने कहा, “जब फसल बढ़ती है तो बीमारियां भी बढ़ती हैं। बीजेपी की फसल बहुत बड़ी हो गई है, जिसमें अच्छे अनाज के साथ-साथ कुछ बीमारियां भी आ रही हैं। इसलिए हमें ऐसे बीमार फसलों पर कीटनाशक छिड़कने होंगे।” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी की बढ़ती सदस्यता के साथ राजनीतिक नेताओं के पार्टी में शामिल होने की प्रक्रिया पर भी नजर रखनी होगी। साथ ही नए सदस्यों को पार्टी की विचारधारा और संस्कृति से अवगत कराना जरूरी है। उन्होंने कहा, “बीजेपी कार्यकर्ताओं की पार्टी है। नए लोग अलग-अलग कारणों से आ रहे हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि उन्हें प्रशिक्षण दें, विचारधारा सिखाएं और उन्हें हमारे कार्यकर्ता बनाएं। हमारे प्रयास लगातार जारी हैं। हजारों कार्यकर्ता उठते हैं, लेकिन कभी-कभी एक कार्यकर्ता कुछ ऐसा कहता है जिससे हजारों कार्यकर्ताओं के प्रयास विफल हो जाते हैं।” नितिन गडकरी के ये बयान महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के संदर्भ में आए हैं। यहां बीजेपी महायुति गठबंधन के तहत शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ मिलकर चुनावी मैदान में है। सरकार का धर्मनिरपेक्ष होना जरूरी गडकरी ने भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को भी रेखांकित किया और कहा कि सरकार और प्रशासन का धर्मनिरपेक्ष होना जरूरी है। उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति कभी धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता, लेकिन राज्य, सरकार और प्रशासन का धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए।” महाराष्ट्र में बीजेपी के प्रदर्शन और 2024 लोकसभा चुनावों में पार्टी की सीटों की संख्या में आई कमी पर नितिन गडकरी ने प्रदेश के स्थानीय नेतृत्व की क्षमता पर विश्वास जताया। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही उनका राज्य में कोई औपचारिक पद नहीं है, लेकिन उन्हें जब भी जरूरत पड़े वे सहायता के लिए उपलब्ध हैं। गडकरी ने कहा, “मुझे महाराष्ट्र में कोई औपचारिक भूमिका नहीं है। यहां के नेता सक्षम हैं। उन्हें अभी मेरी आवश्यकता नहीं है। लेकिन जब भी उन्हें मेरी आवश्यकता होगी मैं सहायता के लिए उपलब्ध रहूंगा recent visitors 235

शहरों की सिमटती हरियाली और बढ़ता जलवायु संकट: 2040 तक दुनियाभर में 200 करोड़ लोग बढ़ती गर्मी से जूझेंगे

Shrinking greenery of cities and increasing climate crisis: By 2040, 2 billion people around the world will face increasing heat शहरों की हरियाली तेजी से सिमट रही है, और उनकी जगह कंक्रीट के जंगल पनप रहे हैं। इसकी वजह से भी कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। दुनिया के शहरों में हरे भरे क्षेत्रों की हिस्सेदारी 1990 में औसतन 19.5 फीसदी थी जो 2020 तक घटकर सिर्फ 13.9 फीसदी रह गई है। कमलेश ✍️  भोपाल। भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण शहरों को गंभीर चुनौतियों से जूझना होगा। दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का एक बड़ा हिस्सा शहर पैदा कर रहे हैं। बगैर योजनाबद्ध तरीके से तेजी से विकसित होते शहरों और उनका उचित प्रबंधन न किए जाने का खामियाजा हरे-भरे क्षेत्रों को भुगतना पड़ रहा है। शहरों की हरियाली तेजी से सिमट रही है, और उनकी जगह कंक्रीट के जंगल पनप रहे हैं। इसकी वजह से भी कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। दुनिया के शहरों में हरे भरे क्षेत्रों की हिस्सेदारी 1990 में औसतन 19.5 फीसदी थी जो 2020 तक घटकर सिर्फ 13.9 फीसदी रह गई है। अनुमान के मुताबिक 2040 तक शहरों में रह रहे 200 करोड़ से ज्यादा लोगों को तापमान में कम से कम 0.5 डिग्री सेल्सियस की अतिरिक्त वृद्धि का सामना करना पड़ेगा। यह चेतावनी संयुक्त राष्ट्र संगठन यूएन-हैबिटेट ने अपनी नई रिपोर्ट में दी है। वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट 2024 वर्ल्ड अर्बन फोरम के दौरान जारी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के कई बड़े शहर लाखों लोगों को आवास प्रदान कर रहे हैं, लेकिन उन पर साल दर साल कई तरह के खतरे बढ़ते जा रहे हैं। जैसे जैसे शहर बढ़ते हैं वे जलवायु से जुड़ी आपदाओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते जाते हैं। समस्याएं बढ़ रहीं, शहर उसके लिए तैयार नहीं जलवायु परिवर्तन से जो समस्याएं पैदा हुई हैं उसके अनुरूप शहर तैयार नहीं हैं। शहरों में बेघरों की संख्या और झुग्गी बस्तियों की तादाद बढ़ती जा रही है। झुग्गी बस्तियां आमतौर पर ऐसे इलाकों में होती हैं जो पर्यावरण के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील होते हैं। इन क्षेत्रों में आपदाओं से बचाव के लिए बुनियादी ढांचा बेहद लचर है। ऐसे में अक्सर जलवायु सम्बन्धी आपदाओं या चरम घटनाओं का खामियाजा यहां रहें वाले आम लोगों को भुगतना पड़ता है। बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए बजट कम रिपोर्ट में शहरों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए मौजूदा समय में उपलब्ध राशि और वित्तीय आवश्यकतों के बीच की गहरी खाई को भी उजागर किया गया है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि शहरों को सालाना साढ़े चार से 5.4 लाख करोड़ डॉलर की दरकार है, ताकि जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके। जबकि शहरों को अभी सिर्फ 83,100 करोड़ डॉलर मिल रहे हैं। कारगर योजनाओं से सुधर सकती है स्थिति संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा है कि मजबूत निवेश और स्मार्ट योजना से शहरों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करके उन्हें जलवायु  परिवर्तन के अनुरूप ढाला जा सकता है। इसके लिए साहसिक निवेश, कारगर योजनाओं और डिजाइन की दरकार होगी।  इस संबंध में यूएन-हैबिटेट की कार्यकारी निदेशक एनाक्लॉडिया रॉसबाख का कहना है कि अगले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों को न केवल बढ़ते तापमान बल्कि बाढ़, लू, सूखा और जल संकट जैसी कई समस्याओं से जूझना होगा। recent visitors 179

उपभोक्ता अधिकार: पैकेट पर अंकित वजन कम होने पर करें शिक़ायत और पाये मुआवजा, जाने नियम 

Consumer rights: Complain and get compensation if the weight mentioned on the packet is less, know the rules  कमलेश ✍️ भोपाल। रोजमर्रा की जिंदगी में हम कई तरह के उत्पाद खरीदते हैं। अगर वे खुले में बिकने वाले हैं, जैसे सब्जियां, फल या अनाज आदि तो हम तौलकर खरीदते हैं। हालांकि, पैकेज्ड उत्पादों के साथ यह होता है कि ज्यादातर लोग पैकेज पर लिखे वजन या वॉल्यूम पर भरोसा कर लेते हैं। आज जानते हैं कि पैकेज्ड उत्पाद को लेकर उपभोक्ता कानून क्या कहते हैं। क्या हैं उपभोक्ताओं के अधिकार? उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(9) में उपभोक्ता अधिकारों का वर्णन किया गया है। अन्य कई अधिकारों के अलावा उपभोक्ता को वस्तुओं या उत्पादों की मात्रा के बारे में जानने का अधिकार भी होता है, ताकि वह अनुचित व्यापार प्रैक्टिस से बच सके। इसके अलावा अगर उपरोक्त अधिकार का उल्लंघन होता है तो उपभोक्ता को संबंधित उपभोक्ता आयोग में जाने का भी अधिकार है। वजन को लेकर क्या है कानून? वजन और माप के मानकों को स्थापित करने के लिए संसद ने कानूनी माप विज्ञान अधिनियम, 2009 को अधिनियमित किया है। इसके तहत ही वजन, माप या संख्या के आधार पर वस्तुओं को बेचा या वितरित किया जाता है। इस कानून से पहले भारत में वजन और माप के लिए मानक अधिनियम, 1976 और वजन और माप के मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 लागू थे। इन सभी कानूनों के तहत उत्पादों की प्रकृति के आधार पर उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों के संबंध में नियम बनाए गए थे। कुछ उत्पादों के लेबल पर ‘पैक किए जाते समय’ (when packed) उत्पाद के वजन/मात्रा का उल्लेख करना आवश्यक होता है, क्योंकि कुछ स्टोरेज कंडिशन में वजन कम हो सकता है या बढ़ सकता है। वहीं कुछ उत्पादों पर केवल वजन का उल्लेख करना होता है और उतनी ही मात्रा उपभोक्ता को उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य होता है। वजन कम पाए जाने पर वजन की मात्रा कम निकलने पर उपभोक्ता अदालतों और आयोगों ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया है। इस संबंध में केरल में जॉर्ज थैटिल के चर्चित मामले को लिया जा सकता है। उन्होंने जनवरी 2020 में 40-40 रुपए में बिस्किट के दो पैकेट खरीदे। प्रत्येक पैकेज पर वजन 300 ग्राम लिखा हुआ था। लेकिन उसे मापने पर उन्होंने उक्त पैकेजों में से एक का वजन केवल 268 ग्राम और दूसरे का 249 ग्राम पाया। उन्होंने कानूनी माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के तहत संबंधित अधिकारी से शिकायत की, जिन्होंने वजन में कमी की पुष्टि की। चूंकि उपभोक्ताओं को कानूनी माप विज्ञान अधिनियम के तहत मुआवजा नहीं मिल सकता है, इसलिए उन्होंने उस समय लागू उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। उपभोक्ता फोरम ने सबूतों पर विचार कर माना कि बिस्किट बनाने वाले निर्माता और बिस्किट के पैकेट बेचने वाले विक्रेता दोनों ने कानूनी माप विज्ञान अधिनियम की धारा 30 का उल्लंघन किया है और उपभोक्ता कानून के अनुसार यह सेवा में कमी का मामला बनता है। फोरम ने कहा, ‘गलती करने वाले निर्माता या व्यापारी की ओर से ऐसा भ्रामक कार्य उपभोक्ता की गरिमा के खिलाफ है और धोखे या किसी भी तरह के अनुचित व्यापार व्यवहार से उसके मुक्त जीवन जीने के उसके अधिकार को खतरे में डालने के समान है।’ उपभोक्ता को हुई वित्तीय हानि और पीड़ा के लिए 50 हजार रुपए और मुकदमे की लागत के लिए 10 हजार रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया गया। साथ ही निर्माता और विक्रेता को तत्काल प्रभाव से उन उत्पादों को वापस लेने के आदेश दिए गए, जिनमें वजन निर्धारित मात्रा से कम था। साबुन के मामले में विशिष्ट मामला  साल 1993 में एक उपभोक्ता यह कहते हुए आंध्र प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग के पास गया था कि साबुन का वजन पैकेजिंग पर उल्लिखित वजन से कुछ ग्राम कम पाया गया। इस पर आयोग ने कहा, “पैकेज में उल्लिखित वजन उस समय का वजन है, जब इसे पैक किया गया था। चूंकि पर्यावरण और अन्य स्थितियों के कारण नमी में कमी हो सकती है और इस कारण वजन भी कम हो सकता है। आयोग ने माना कि उपभोक्ताओं को शायद यह पता नहीं है कि समय बीतने के साथ साबुन का वजन कम हो जाता है और तदनुसार उसने अधिकारियों को इस संबंध में उपभोक्ताओं को शिक्षित करने का निर्देश दिया। recent visitors 286

सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई घर के खाने की लागत, शाकाहारी थाली महंगी

Rising prices of vegetables increase the cost of home food, vegetarian thali becomes expensive अक्टूबर में सब्जियों की कीमतों में वृद्धि के कारण घर में बना शाकाहारी और मांसाहारी खाना महंगा हो गया है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, शाकाहारी थाली की कीमत पिछले साल की तुलना में 20% बढ़कर 33.3 रुपये प्रति प्लेट तक पहुंच गई है, जो सितंबर के 31.3 रुपये प्रति प्लेट से अधिक है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण सब्जियों की कीमतों में उछाल है। आइए जानते हैं कि आखिर शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमतों में यह इजाफा क्यों हुआ। क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में प्याज की कीमतें सालाना आधार पर 46 फीसदी बढ़ीं, जबकि आलू की कीमतें 51 फीसदी बढ़ीं, जिसका मुख्य कारण लगातार बारिश होना है, जिसके कारण आवक कम हुई आलू-प्याज-टमाटर ने बढ़ाई महंगाई रिपोर्ट के अनुसार मासिक ‘रोटी चावल दर’ रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में प्याज की कीमतें सालाना आधार पर 46 फीसदी बढ़ीं, जबकि आलू की कीमतें 51 फीसदी बढ़ीं, जिसका मुख्य कारण लगातार बारिश होना है, जिसके कारण आवक कम हुई और महाराष्ट्र और कर्नाटक में फसल भी प्रभावित हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टमाटर की कीमतें एक साल पहले की समान अवधि के 29 रुपए प्रति किलोग्राम से दोगुनी होकर 64 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई हैं, क्योंकि बारिश के कारण आवक प्रभावित हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से आपूर्ति शुरू होने के साथ नवंबर से इस जिंस (टमाटर) की कीमतें स्थिर होने की संभावना है. ये भी है महंगाई का कारण रिपोर्ट में कहा गया है कि सब्जियों की कीमतों का कुल थाली लागत में 40 प्रतिशत भारांश होता है और इसलिए उतार-चढ़ाव ने कुल लागत को प्रभावित किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि शाकाहारी थाली में 11 प्रतिशत भार वाली दालों की कीमतों में इस महीने के दौरान 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका कारण शुरुआती स्टॉक में कमी, स्टॉक पाइपलाइन में कमी और त्योहारी मांग का होना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नई आवक के कारण दिसंबर से कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन की लागत में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की गिरावट ने भोजन की लागत में उछाल को रोकने में मदद की. मांसाहारी थाली में मामूली इजाफा वहीं दूसरी ओर मांसाहारी थाली की महंगाई को लेकर भी रिपोर्ट में ज्यादा चिंता व्यक्त नहीं की गई है. मांसाहारी थाली के मामले में, ब्रॉयलर की कीमतों में 9 प्रतिशत की गिरावट, जो कि थाली की लागत का आधा हिस्सा है, ने लागत में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि की. रिपोर्ट के अनुसार घर में बनी मांसाहारी थाली की कीमत अक्टूबर में 61.6 रुपये रही, जबकि एक महीने पहले इसी अवधि में यह 59.3 रुपये और एक साल पहले इसी अवधि में 58.6 रुपए थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि मांसाहारी थाली की लागत में 22 प्रतिशत हिस्सा सब्जियों की कीमतों का भी रहा. recent visitors 192

मल्लिकार्जुन खरगे ने डोनाल्ड ट्रंप को दी बधाई

Mallikarjun Kharge congratulated Donald Trump डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी जीत पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बधाई दी. खरगे ने भारत-अमेरिका की साझेदारी को मजबूत करने की बात की और कहा कि हम अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ रहे हैं. शुरुआती नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप ने बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है. चुनाव में जीत के बाद दुनिया भर के नेता उन्हें बधाई दे रहे हैं. इसी कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी डोनाल्ड ट्रंप को जीत की बधाई दी है. कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बधाई देते हुए लिखा है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से हम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनाव में जीत की बधाई और शुभकामनाएं देते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारत और अमेरिका एक मजबूत और व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं. यह साझेदारी लंबे समय से सामान्य लोकतांत्रिक मूल्यों, हितों और व्यापक जनसंपर्कों पर आधारित है. हम वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं. recent visitors 223

मालेगांव धमाका केस: पेशी में गैरहाजिर रहने पर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ जमानती वारंट जारी

Malegaon blast case: Bailable warrant issued against Sadhvi Pragya Singh Thakur for being absent in the hearing. Malegaon Bomb Blast Case : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल संसदीय क्षेत्र से पूर्व सांसद और भाजपा की फायर ब्रांड नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ एक बार फिर जमानती वारंट जारी हुआ है। ये जमानती वारंट एनआईए कोर्ट द्वारा मालेगांव बम धमाके के केस में चल रही पेशियों में शामिल न होने के कारण जारी किया गया है। कोर्ट ने मंगलवार को इस जमानती वारंट को ये कहते हुए जारी किया कि, मामले की बहस अपने अंतिम दौर में है, ऐसे में मुख्य आरोपी का कोर्ट में होना जरूरी है। दरअसल, प्रज्ञा ठाकुर बीते लंबे समय से कोर्ट में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मेडिकल लगाकर अदालत की पेशियों में नहीं पहुंच रही हैं। इसी के चलते लंबे समय से ये मामला लंबित है। आरोपी पक्ष के इसी व्यव्हार को अनुचित मानते हुए मुंबई की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ पेशी में शामिल न होकर कोर्ट का समय बर्बाद करने के चलते जमानती वारंट जारी किया है। इसी साल दूसरी बार मिला जमानती वारंटआपको बता दें कि ये कोई पहली बार नहीं जब मालेगांव बम धमाके की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को कोर्ट द्वारा जमानती वारंट जारी किया गया हो, इससे पहले इसी साल मार्च के महीने में भी उन्हें 10 हजार का जमानती वारंट जारी किया जा चुका है। हालांकि, उस वारंट को ठाकुर के वकील ने जमानत के 10 हजार जमा करके मेडिकल लगाते हुए कहा था कि प्रज्ञा ठाकुर अस्वस्थ हैं, इसलिए वो पेशी में नहीं पहुंच सकेंगी। अब 8 महीने बीतने के बाद भी पेशी में न आने के चलते कोर्ट ने उनका मेडिकल रद्द करते हुए एक बार फिर जमानती वारंट जारी करते हुए 13 नवंबर तक किसी भी स्थिति में कोर्ट में पैश होने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र राज्य में मुंबई से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित मालेगांव शहर की एक मस्जिद के पास बम ब्लास्ट हुआ था। इन धमाकों में 6 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मालेगांव उत्तर महाराष्ट्र के नासिक जिले का एक सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाका माना जाता है। धमाके के बाद 30 सितंबर 2008 को मालेगांव के आजाद नगर पुलिस थाने में मामले दर्ज किए गए थे। फिलहाल, मामले की सुनवाई स्पेशल एनआईए कोर्ट कर रही है। recent visitors 229

डॉ . प्रियंका प्रियांजलि को अटल गौरव अवार्ड सहित अनेक साहित्यिक सम्मानों से नवाजा गया

Dr . Priyanka Priyanjali was awarded many literary honors including Atal Gaurav Award. भोपाल। नेवरी में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में सम्मानित हुईं कवयित्री डॉ. प्रियंका प्रियांजलि को अटल गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व भी उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सम्मानित किया जा चुका है। उनकी रचनाओं को वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा सराहा गया है, जो समसामयिक विषयों पर आधारित होती हैं। डॉ. प्रियंका प्रियांजलि को निर्भया सम्मान, राष्ट्रीय शब्दाक्षर प्रतीक चिन्ह, कायस्थ कुलभूषण सम्मान और उभरती कवयित्री के लिए प्रतिभा सम्मान से विभूषित किया गया है। अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने साहित्यिक संस्थाओं, कवि मित्रों, परिवार और प्रशंसकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इन्हीं सबके समर्थन और प्रेरणा से उन्हें बेहतर लेखन की प्रेरणा मिलती रही है। हिंदी साहित्य के प्रति समर्पण अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. प्रियंका प्रियांजलि ने कहा कि हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने और राजभाषा हिंदी के उन्नयन के लिए कार्य करना ही उनका मुख्य उद्देश्य है। वे चाहती हैं कि अधिक से अधिक गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोग हिंदी से जुड़ें और हिंदी साहित्य में रूचि लें। इस उद्देश्य के साथ वे नवांकुर साहित्य मनीषियों को भी हिंदी सृजन के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। डॉ. प्रियंका का यह संकल्प हिंदी भाषा और साहित्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उनके लेखन और विचारों से हिंदी साहित्य को एक नई दिशा मिल रही है। recent visitors 389