कार्यकर्ताओं में जोश भरने पहुंचे जीतू पटवारी, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की अपील

Jitu Patwari reached to energize the workers, appealed to strengthen the organization till the booth level. इंदौर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने देपालपुर विधानसभा के बेटमा ब्लॉक में आयोजित ‘ब्लॉक स्तरीय पंचायत समिति कार्यकर्ता सम्मेलन’ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ आगामी राजनीतिक कार्ययोजना और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने को लेकर विस्तृत चर्चा की। सम्मेलन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान पटवारी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि आने वाले समय में संगठन को और ज्यादा सक्रिय और मजबूत बनाना जरूरी है, ताकि जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाया जा सके और पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण पटेल, इंदौर जिला (ग्रामीण) अध्यक्ष विपिन वानखेड़े, विधानसभा प्रभारी मनोज सिंह गौतम, किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष जीतू ठाकुर, मनीष पटेल सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावी रणनीति पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया और संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने के लिए विभिन्न सुझाव भी सामने आए। recent visitors 147

नगर पालिका में चली कुर्सी, भाजपा और कांग्रेस पार्षद में तीखी बहस, आगबबूला हुए जनप्रतिनिधि

Budget in Tikamgarh Municipality : A heated debate erupts between BJP and Congress councillors in the municipal council, leaving public representatives furious. टीकमगढ़ ! शुक्रवार को Budget in Tikamgarh Municipality बैठक आयोजित की गई, जिसमें भाजपा-कांग्रेस पार्षदों के बीच जमकर हंगामा हो गया. बैठक के दौरान भाजपा पार्षद ने उनके वार्ड में रूके कार्य को लेकर आपत्ति जताई, जिसको लेकर भाजपा पार्षद अजय यादव और कांग्रेस पार्षद अरविंद आमने-सामने आ गए. दोनों में देखते-देखते तीखी बहस शुरू हो गई और बात इतनी बढ़ गई कि गुस्से में भाजपा पार्षद ने कुर्सी उठाकर फेंक दी. भाजपा पार्षद ने कुर्सी उठाकर फेंकी कांग्रेस पार्षद और भाजपा पार्षद में बहस इतनी बढ़ गई कि भाजपा पार्षद ने गुस्से में आकर सभाकक्ष में रखी कुर्सी उठाकर फेंक दी, उपस्थित महिला और पुरुष सभी पार्षद यह सब देखकर दंग रह गए और मीटिंग में हड़कंप मच गया. हालांकि, वहां उपस्थित पार्षदों ने समझा बुझाकर मामले को शांत करने की कोशिश की. नगरपालिका में हंगामे के बीच बजट Budget in Tikamgarh Municipality ने वित्तीय वर्ष के लिए 2 अरब 50 करोड़ से अधिक का बजट पेश किया. सीएमओ द्वारा ये बजट पेश किया गया. इस दौरान जमकर हंगामा होता रहा लेकिन सर्वसम्मति से बजट पेश किय गया. शोर-शराबे के बीच नगरपालिका का वार्षिक बजट पेश किया गया. भ्रष्टाचार ने पकड़ी रफ्तार, जब से आए अब्दुल गफ्फार : अजय यादव नाली और सड़क निर्माण के टेंडर बजट में शामिल नहीं होने से वार्ड नंबर 18 से पार्षद अजय यादव उर्फ अज्जू गाढ़े का गुस्सा सातवें आसमान पर था. अज्जू गाढ़े ने नगरपालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा, ” जिन कार्यों में इनको कमीशन मिलता है तो इनको भ्रष्टाचार नहीं दिखता और जिनमें इनको कमीशन ने मिले तो भ्रष्टाचार दिखाई देता है. अध्यक्ष को केवल अपने क्रेसर की डस्ट और गिट्टी बेचने से मतलब है. उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार ने पकड़ी रफ्तार, जब से आए अब्दुल गफ्फार.” मुझे भी है 5000 लोगों का नशा वहीं, कुर्सी फेंकने पर भाजपा पार्षद ने कहा, ” कुर्सी उठाना केवल मेरा गुस्सा नहीं बल्कि उन 5000 लोगों का गुस्सा है जो वार्ड में निवासरत हैं. उनकी जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. यदि मेरे वार्ड का विकास नहीं होगा तो गुस्सा आना लाजमी है. वहीं, बैठक में कुर्सी फेंकने की घटना पर नगरपालिका सीएमओ ओमपाल सिंह भदौरिया ने कहा, ” ये अनुशासनहीनता है, नोटिस जारी किया जाएगा. recent visitors 90

भोपाल में 29 मार्च को शिक्षकों का बड़ा मोर्चा, TET आदेश के खिलाफ रणनीति, सुप्रीम कोर्ट में दायर होगी रिव्यू पिटीशन

A massive teachers’ protest in Bhopal on March 29th, a strategy to oppose the TET order, and a review petition to be filed in the Supreme Court. भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर जारी आदेश के बाद शिक्षक संगठनों में हलचल तेज हो गई है। प्रांतीय शिक्षक संघ, मध्यप्रदेश ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने का निर्णय लिया है। संघ के प्रदेश संगठन मंत्री रामचरण वर्मा ने बताया कि डीपीआई (लोक शिक्षण संचालनालय) द्वारा हाल ही में जारी किए गए TET परीक्षा संबंधी आदेश के बाद शिक्षकों में असंतोष बढ़ा है। इसी को देखते हुए संगठन ने कानूनी सलाह लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष मनोहर प्रसाद दुबे ने बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं शिवसागर तिवारी, बी.के. सतीजा और विवेक तनख्वाह से विस्तृत चर्चा की गई है। अधिवक्ताओं की सलाह के आधार पर अब प्रांतीय शिक्षक संघ मध्यप्रदेश के नाम से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की जाएगी। संगठन ने इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए सभी जिलाध्यक्षों को 22 मार्च 2026 को अनिवार्य रूप से जिला स्तरीय बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं 29 मार्च 2026 को भोपाल में संयुक्त मोर्चा बनाकर आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए सभी संगठन अध्यक्षों और शिक्षकों से उपस्थित होने की अपील की गई है। प्रदेशाध्यक्ष मनोहर प्रसाद दुबे ने कहा कि इससे पहले भी 2001 के संविदा शिक्षकों के हितों के लिए संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी थी और सफलता हासिल की थी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार भी संगठन शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से कानूनी लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों से एकजुट होकर संगठन का सहयोग करने और इस मुद्दे को लेकर आगे की रणनीति के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है। मनोहर प्रसाद दुबे प्रांताध्यक्षरामचरण वर्माप्रदेश संगठन मंत्रीप्रांतीय शिक्षक संघ म प्र recent visitors 80

अमरूद की खेती से चमकी किस्मत: किसान अभिषेक दांगी ने कमाए एक सीजन में 10 लाख रुपये

Guava farming brings fortune: Farmer Abhishek Dangi earns Rs 10 lakh in one season भोपाल। मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ता रुझान किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। केंद्र सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत भोपाल जिले को अमरूद उत्पादन के लिए चयनित किया गया है। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता के पौधे, ड्रिप सिंचाई और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे जिले में अमरूद की खेती तेजी से बढ़ रही है। भोपाल जिले के बरखेड़ा बरामद गांव के प्रगतिशील किसान अभिषेक दांगी ने अमरूद की खेती से सफलता की नई मिसाल पेश की है। उन्होंने करीब तीन वर्ष पहले अपनी साढ़े चार एकड़ जमीन में बीएनआर किस्म के 1660 अमरूद के पौधे लगाए थे। उद्यानिकी विभाग से मिली ड्रिप सिंचाई और तकनीकी मार्गदर्शन की मदद से उनकी फसल ने अच्छा उत्पादन दिया। वर्तमान में उनके बाग से करीब 6400 किलोग्राम अमरूद का उत्पादन हो रहा है। अभिषेक दांगी बताते हैं कि अमरूद की खेती से उन्हें एक सीजन में करीब 10 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। उनके अमरूद की मांग भोपाल के साथ अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है। उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक राजकुमार सगर के अनुसार पिछले पांच वर्षों में भोपाल जिले में अमरूद की खेती का रकबा और उत्पादन करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ा है। जिले की लगभग 50 ग्राम पंचायतें अमरूद उत्पादन के नए क्लस्टर के रूप में विकसित हो चुकी हैं। किसानों को पौधारोपण, ड्रिप सिंचाई, ऋण और तकनीकी सहयोग देकर आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।  अमरूद की खेती से जिले के मनमोहन पाटीदार, अरुण दांगी और अभिषेक दांगी जैसे किसान न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। recent visitors 75

गांधी आश्रम छात्रावास में होली पर्व पर सेवा और संस्कारों का संगम, बांटी खुशियां

A confluence of service and values ​​on the occasion of Holi festival at Gandhi Ashram hostel, happiness was shared. भोपाल। सेवा भारती के तत्वावधान में सेवा भारती वनवासी एवं दिव्यांग बालक छात्रावास, गांधी आश्रम, गांधीनगर में निवासरत 30 वनवासी छात्रों के साथ समाजसेवियों एवं विभिन्न सेवा भावी संगठनों द्वारा होली पर्व उल्लासपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को गुलाल, पिचकारी, मिष्ठान एवं उपहार भेंट किए गए।सेवा भारती महानगर भोपाल के मीडिया प्रभारी भगवान दास ढालिया ने बताया कि अभावग्रस्त वनवासी क्षेत्र के 30 बच्चे छात्रावास में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जिनकी शिक्षा-दीक्षा एवं लालन-पालन सेवा भारती समाज के सहयोग से किया जाता है।गांधी आश्रम समिति के सचिव मनोज सोनी ने बताया कि होली के अवसर पर समाजसेवियों एवं सेवा संगठनों ने छात्रों के साथ होली मनाई। कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष मुकेश शर्मा, दुर्वेश मालवीय, हुकुम सिंह ठाकुर, ललित मूलचंदानी, सत्येंद्र अग्रवाल, संतोष साहू, विजय गुप्ता (एसबीआई) सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। इस दौरान जीव सेवा संस्थान, पुष्प हरी मीरचन्दानी ट्रस्ट, नवजीवन सेवा समिति, अक्षर फाउंडेशन तथा स्वर्वेद महा मंदिर धाम वाराणसी सहित अनेक संस्थाओं द्वारा छात्रों को कंबल, ट्रैकसूट, स्कूल बैग, पानी की बोतल, भोजन सामग्री, दैनिक उपयोगी वस्तुएं, कॉपी-किताबें, मिष्ठान, नमकीन, गुलाल एवं पिचकारी आदि भेंट की गईं।सभी समाजसेवियों ने आगामी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया। अक्षर फाउंडेशन द्वारा स्वास्थ्य के लिए योग की उपयोगिता बताते हुए योग क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम में छात्रों द्वारा भक्ति गीतों की मनोहारी प्रस्तुति भी दी गई। recent visitors 60

जन औषधि दिवस 2026 : दावा 2000 से अधिक दवाइयों और उपकरण का, हकीकत में 500 ही उपलब्ध

इंदौर। देश में मरीजों को सस्ती दवाइयां मिलें, इस उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए। दावा किया जाता है कि इन केंद्रों में 50 से 70 प्रतिशत तक की छूट के साथ 2000 से अधिक प्रकार की दवाइयां और उपकरण मिलते हैं। जबकि हकीकत यह है कि इन पर करीब 500 प्रकार की दवाइयां ही उपलब्ध हैं। इन केंद्रों पर जेनरिक दवाइयां मिलती हैं। इंदौर में 100 और मध्य प्रदेश में 600 से अधिक केंद्र हैं, लेकिन यहां अभी भी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, प्रोटीन पाउडर, फेसवाश आदि ही उपलब्ध नहीं होते हैं। इस कारण मरीजों को मजबूरन मेडिकल दुकान पर जाकर महंगे दामों में दवाइयां खरीदनी पड़ती है। यह भी देखा गया है कि इन केंद्रों पर सिर्फ जेनरिक दवाइयों को बेचने की ही अनुमति होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। यानी यह सभी प्रकार की दवाइयां बेचते हैं क्योंकि इन पर कभी कार्रवाई नहीं होती है। मरीजों को जरूरी दवाइयां नहीं मिलती बता दें कि उक्त योजना 2008 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी। इसके बाद 2016 में भाजपा सरकार ने इसे री-लांच किया। अब हालत यह है कि जगह-जगह जन औषधि केंद्र तो खुल गए हैं लेकिन मरीजों को जरूरी दवाइयां नहीं मिलती। सबसे अधिक परेशानी उन्हें होती है, जो दूर-दूर से यहां शासकीय अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आते हैं। जो दवाई उन्हें शासकीय अस्पताल में नहीं मिलती है, वे इन केंद्रों पर लेने के लिए जाते हैं। यहां पर नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरन महंगी दवाएं खरीदना पड़ती हैं। मध्य प्रदेश में सबसे अधिक केंद्र इंदौर में बता दें जन औषधि के सबसे अधिक केंद्र प्रदेश में इंदौर में ही हैं, बावजूद मरीजों को दवाइयां खरीदने में परेशानी होती है। हालांकि कई दवाइयां इन केंद्रों पर मरीजों को आसानी से मिल जाती हैं, जिससे मरीजों को फायदा भी मिल रहा है। 1000 रुपये की दवाइयां मिलती हैं 300 में अधिकारियों ने बताया कि जन औषधि केंद्र के माध्यम से 50 से 70 प्रतिशत सस्ते में दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती हैं। जैसे बाजार में यदि कोई दवाई 1000 रुपये में मिल रही है तो वह केंद्र में 300 रुपये में मिल सकती है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को लाभ हो रहा है। भ्रमित हो रहे लोग, अन्य केंद्रों पर भी लगी पीएम की फोटो शहर में करीब 100 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो लगी हुई है। जबकि इसके अलावा भारत औषधि केंद्र जैसे नाम से केंद्र भी खोले गए हैं। यहां प्रधानमंत्री के फोटो लगाने की अनुमति नहीं है। बावजूद फोटो लगा रखे हैं। इन्हें नोटिस भी जारी किया गया है, लेकिन कोई जवाब अब तक नहीं आया है। समय पर नहीं मिलती दवाइयां दवाई न मिलने पर जब भी केंद्र संचालकों से इसका कारण पूछा जाता है तो वे यही कहते हैं कि हमें दवाइयां समय पर नहीं मिल पाती हैं। कई बार दवाइयों का आर्डर देते हैं, लेकिन हमें समय पर दवाई ही नहीं मिल पाती है। ऐसे में मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। नियम है कि सात दिन में केंद्र पर जो भी दवाई का आर्डर देते हैं, वे आ जानी चाहिए, लेकिन हमारे पास 15 दिन-एक माह तक दवाइयां नहीं आ पाती हैं। वहीं कई बार दवाइयां आती भी हैं तो मरीज अधिक मात्रा में लेकर चले जाते हैं। recent visitors 141

फाइलों का बोझ कम करने में जल संसाधन विभाग पीछे ई-ऑफिस व्यवस्था नहीं हो पाई लागू 

The Water Resources Department lags behind in reducing file burden. The e-office system has not been implemented.  भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी महकमों में फाइल कल्चर को खत्म करने के लिए ई ऑफिस सिस्टम सभी विभागों में लागू किया गया है, लेकिन जल संसाधन विभाग में इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में विभाग के मुखिया की तरफ से निकले एक सख्त फरमान ने विभागीय कर्मचारियों और इंजीनियरों में हडकंप मचा दिया है। प्रमुख अभियंता विनोद कुमार देवड़ा ने मुख्य अभियंताओं समेत सभी इंजीनियरों और स्टाफ को चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि अब आगे से कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी, बल्कि एक सप्ताह के भीतर विभाग का सारा कामकाज ई-ऑफिस के जरिए ही करना होगा।  जल संसाधन विभाग द्वारा जारी अर्द्धशासकीय पत्र में प्रमुख अभियंता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद अधीनस्थ कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली को लेकर कोई गंभीर कार्यवाही नहीं की गई। पत्र में लिखा गया है कि यह खेद का विषय है कि बार-बार निर्देशित करने के बाद भी ई-ऑफिस प्रणाली प्रचलन में नहीं लाई गई है। इतना ही नहीं इस आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सभी मुख्य अभियंता और उनके अधीनस्थ कार्यालय इस डिजिटल सिस्टम से नहीं जुड़ते हैं और पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं सौंपते हैं, तो किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। विभाग ने फरमान का पालन न करने पर अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी भी कर ली है। recent visitors 70